Science and Technology: Science and Technology Policy, 2003

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति, 2003 (Science & Technology Policy, 2003)

भारत की नई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति राष्ट्र के पुननिर्माण, आर्थिक विकास और स्थायित्व तथा राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति पूर्णत: कटिबद्ध है। हांलाकि अब तक कई नीतियों के माध्यम से सतत्‌ विकास और संसाधनों के समतामूलक वितरण के प्रयास किये गये थे लेकिन आर्थिक अधिकारों की रक्षा और आर्थिक शक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से एक पूर्णत: नई रणनीति की नितांत आवश्यकता थी। इसी तीक्ष्ण दृष्टि के साथ इस नई नीति की घोषणा की गई है। हाल के वर्षों में तकनीकी विकास तथा प्रगति के सामाजिक विधायी तथा नैतिक आयामों पर विशेष बल दिया जाने लगा है। भूमंडलीकरण के इस युग में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक नई चेतना के विकास की भी आवश्यकता है। इसका मूल कारण यह है कि विज्ञान लोगों, विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी प्रकार विज्ञान से यह भी अपेक्षित है कि वह संसाधनों के अनुकूलतम दोहन से वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ भविष्य के लिए ऐसे संसाधनों का संरक्षण भी करे। इस आलोक में नीति के उद्देश्यों की व्याख्या की गई है। ऐसे उद्देश्यों में कुछ प्रमुख उल्लेख नीचे किया गया है:

  • वैज्ञानिक और तकनीकी लाभों को निम्नतम स्तर तक पहुँचाने का प्रयास।
  • विकास के सभी पक्षों के साथ विज्ञान और तकनीक के प्रत्यक्ष और घनिष्ठ संबंधों की स्थापना का प्रयास।
  • सतत्‌ आधार पर लोगों के लिए खाद्य, कृषि, पोषण, पर्यावरणीय, जल, स्वास्थ्य, तथा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • ग्रामीण तथा नगरों में क्षेत्रीय असंतुलन कम करने का प्रयास।
  • देश भर में स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की पर्याप्त उपलब्धता।
  • गरीबी उपशमन के लिए हर संभव प्रयास।
  • विश्वविद्यालय स्तर पर वैज्ञानिक अनुसंधानों को प्रोत्साहन।
  • भारत की संस्कृति और सभ्यता के सरंक्षण एवं परिक्षण के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग।
  • बौद्धिक संपदा के सृजन और उसके संरक्षण के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों की प्रणाली का सुदृढ़ीकरण।
  • सभी वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी गतिविधियों में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित कर उनका सशक्तिकरण।
  • अत्याधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के माध्यम से देश की सामरिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति।
  • विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी संस्थानों के मध्य समन्वय और सामंजस्य की स्थापना।
  • संकल्पना से अनुप्रयोग तक के स्तरों पर उन सभी प्रक्रियाओं का सुदृढ़ीकरण जिनका संबंध प्रौद्योगिकी विकास, मूल्यांकन, अवशोषण और उन्नयन से है।
  • विशेषकर बाढ़, सूखा, तूफान, भूकंप तथा भू-स्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान तथा प्रबंधन के लिए अनुसंधान को व्यापक बनाने का प्रयास।
  • विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

सरकार ने इस नीति के माध्यम से तेजी से बदलये हुये वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप विकास को दिशा देने का प्रयास किया है। इसके लिए नीति के क्रियान्वयन हेतु विशिष्ट रणनीति का निर्धारण भी किया गया है। इसके पूर्व बड़ी संख्या में विशेषज्ञों की राय ली गई है ताकि क्रियान्वयन के सभी अवरोधों को तत्काल दूर किया जा सके। नीति की एक विशेषता यह है कि व्यापक स्तर पर विकास के सभी आयामों के साथ विज्ञान और तकनीक के संबंधों की स्थापना के प्रयास किये जा रहे हैं। निश्चित रूप से इसके लिए अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दी गई है। भारत जैसे देश में यह अत्यंत आवश्यक है कि किसी भी नीति को तब तक सफल नहीं बनाया जा सकता जब तक कि राज्य का समर्थन पर्याप्त नहीं हो। इस कारण नीति में इस तथ्य का स्पष्ट उल्लेख है कि क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारों का सहयोग प्रत्यक्ष तथा पूर्ण रूप से प्राप्त किया जाएगा।

  • भारत सरकार ने यह महसूस किया है कि देश में वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यक्रमों को और अधिक गत्यात्मक तथा उत्पादक बनाने की आवश्यकता है। इस कारण न केवल क्रियान्वयन बल्कि मूल्यांकन तथा समीक्षा के स्तर को भी सुदृढ़ बनाने के प्रयास किये जाएंगे। नीति को क्रियान्वित करने वाले अधिकारियों को समय-समय पर आवश्यक सुझाव देने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय परामर्शदात्री समिति के गठन का भी प्रस्ताव हैं समिति को दक्ष तथा कार्यकुशल बनाये रखने के लिए वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा। साथ ही, उद्योग को विज्ञान के साथ संबद्ध करने का एक उद्देश्य यह भी है कि इससे निवेश की पर्याप्तता सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास के लिए ओर जहांँ नई अवसंरचनाओं का निर्माण किया जाए, वहीं दूसरी ओर, विद्यमान अवसरंचनाओं के आधुनिकीकरण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इससे निश्चित रूप से चिकित्सा, अभियांत्रिकी और वैज्ञानिक संस्थानों को अपेक्षाकृत अधिक कार्यकुशल बनाने में सहायता मिलेगी। इसी क्रम में विश्वविद्यालय स्तर पर भी वैज्ञानिक अवसंरचनाओं के निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे सभी प्रयासों को सफल बनाने के लिए सरकार ने वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता की एक नई प्रणाली विकसित की है। इससे न केवल प्रशासकीय तथा वित्तीय समस्याएंँ दूर होगी बल्कि भारतीय विज्ञान और तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक भी बनाया जा सकेगा।
  • तीव्र गति से होने वाले परिवर्तनों के दृष्टिकोण से प्रशिक्षण और दक्षता उन्नयन कार्यक्रमों के तहत मानव संसाधन विकास के आधार को बढ़ाने का निर्णय किया गया है। इस क्रम में वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यक्रमों में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने की भी योजना है। यह आशा व्यक्त की गई है कि इस नीति की सफलता से भी वैज्ञानिक और तकनीकी लाभों को समाज के निचले स्तर तक उपलब्ध कराने के लक्ष्य भी प्राप्त होंगे जिनसे अंतत: सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रक्रियाओं को गति प्रदान की जा सकेगी।
  • किसी राष्ट्र की सुरक्षा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विशेष योगदान होता है। इस संदर्भ में नीति में नई प्रतिरक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास पर बल दिया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस कार्य के लिए सभी प्रक्रियाओं के सरलीकरण का भी प्रस्ताव है। विश्व बाजार में नये एवं अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए सरकार दव्ारा कटिबद्धता व्यक्त की गई है।
  • तकनीक-आधारित निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए नये विधानों के निर्माण को प्राथमिकता दिया जाना नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। एक अन्य विशेषता के रूप में यह प्रावधान किया गया है कि विश्व व्यापार के माध्यम से नई तकनीकों के आयात के लिए औद्योगिक इकाइयों को प्रशुल्क संबंधी सुविधाएंँ प्रदान की जाएंगी। वैज्ञानिक और तकनीकी लाभों को त्वरित गति प्रदान करने के लिए स्वायत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण संगठन (Autonomous Technology Transfer Organisation) के गठन का प्रस्ताव है। यह संगठन विश्वविद्यालयों के सहायतार्थ कार्य करेगा। भारत के विज्ञान संबंधी परंपरागत ज्ञान के आलोक में नई नीति में इस परंपरागत ज्ञान तथा अत्याधुनिक तकनीकों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने पर जोर दिया गया है। साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण की सहायता से विज्ञान और तकनीक के विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • नई नीति को क्रियान्वित करने के लिए एक कार्य बल का गठन किया गया है जो विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सरकार को यथासंभव परामर्श देना।

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