Science and Technology: International Cooperation and Simple Satellite

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स्चाांर, नौवहन/नौसंचालन तथा मौसमविज्ञानीय उपग्रह प्रणाली (Communication and Meteorological Satellite System)

अंतरराष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation)

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ज्ञाान तथा संसाधन की आदान-प्रदान करते हुए भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक नया सीमोल्लंघन कर लिया है। देश में अंतरिक्ष कार्यक्रम, अंतरिक्ष एजेंसियों तथा अंतरिक्ष से संबंधित निकायों के साथ दव्पक्षी तथा बहुपक्षीय समन्वयी संबंध बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए, इसरो नए वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिकी चुनौतियों को लेने, अंतरिक्ष नीतियों के शोधन तथा शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए बाह्य अंतरिक्ष के दोहन व उपयोगिता के लिए अंतरराष्ट्रीय ढाँचे कार्य को पुन: भाषिक करना जारी हैं। अंतरराष्ट्रीय फेयरिंग राष्ट्रों के बीच प्रौद्योगिकी उन्नति के साथ दूसरे लोगों में इसके प्रति जागरूकता, हाल ही में विश्व में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का कार्यक्षेत्र बहुत ही विस्तृत तथा व्यापक बन गया है तथा इसरो ऐसे अवसरों का उपयोग करने के लिए तत्पर है।

मेघा-ट्रॉपिक्स (Megha-Tropics)

जलवायु तथा मौसम प्रणाली को समझने में सुधार हेतु, इसरो ने संयुक्त रूप से सीएनईएस के साथ कार्य किया तथा उपरोक्त के लिए एक विशिष्ट पर्यवेक्षणीय प्रणाली के रूप में कार्य करने हेतु मेघा-ट्रॉपिक्स उपग्रह का विकास किया। उपग्रह में जा रहे चार उपकरण में से, दो उपकरणों का विकास सीएनईएस दव्ारा किया गया। सीएनईएस तथा इसरो दव्ारा विकसित एक उपकरण का विकास किया गया है तथा एक उपकरण को इटली से खरीदा गया है। उपग्रहों के निर्माण तथा प्रमोचन के अलावा, इसरो उपग्रह का प्रचालन कर रहा है तथा निरंतर वैज्ञानिक यंत्रों से आँकड़ा अभिग्रहण कर रहा है। मेघा-ट्रॉपिक्स तथा अन्य समकालीन उपग्रहों के साथ प्राप्त आँकड़े, अच्छे मौसम पूर्वानुमान केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि समूचे उष्णकटिबंधी क्षेत्र में स्थित राष्ट्र के लिए भी वर्तमान मौसम की भिन्नताओं में सुधार करने हेतु सहायक होगा। भारत तथा फ्रांस के वैज्ञानिक समुदाय के अलावा, इस उपग्रह से ऑस्ट्रेलिया, ब्राजिल, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, नाइगेर, स्वीडन, यू. के. तथा यू. एस. अमरीका भी आँकड़े की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मेघा-ट्रॉपिक्स वैश्विक वर्षण मापन (जीपीएम) के लिए तारामंडल के आठ उपग्रहों में से एक उपग्रह होगा। यह उपग्रह, वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए भारत तथा फ्रांस का संयुक्त योगदान माना जाता है, जो समूचे विश्व में मानवजाति के दैनिक जीवन तथा विशिष्ट रूप से उष्णकटिबंधी क्षेत्र के रहन-सहन को प्रभावित करता है, के जलवायु तथा मौसम प्रणाली पर अनुसंधान चल रहा है। यूथसैट उपग्रह वायुमंडलीय संघटक तथा अंतरिक्ष मौसम के लिए, इसरो के केन्द्रों तथा रूस के मास्को राज्य विश्वविद्यालय के युवा वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से यूथसैट नामक उपग्रह का विकास किया। यूथसैट इसरो एक तथा मास्को राज्य विश्वविद्यालय से दो वैज्ञानिक नीतभारों का वहन करता है। भारतीय नीतभार:-1 वायुमंडलीय संघटक के अध्ययन हेतु लिंब दृष्टिरत आति स्पेक्ट्रमि प्रतिबिंबित्र (एलआईवीएचवाईएसआई) तथा 2 अंतरिक्ष मौसम अध्ययन के लिए आयन मंडलीय स्थलाकृति (आरएबीआईटी) । सौर फ्लेयर क्रियाकलाप के अध्ययन के लिए सौर विकिरण प्रयोग (सोलराड) तथा एक्स किरण के प्रस्फोट, ऊर्जा इलेक्ट्रॉन, प्रोटान तथा वाई किरण संसूचन के लिए यह एक रूसी नीतभार है। वैधता/अशांकन की समाप्ति के बाद, आँकड़े को प्रयोक्ताओं को वितरित किया जाएगा। फ्रांस के साथ संयुक्त रूप से निर्मित सरल तथा रूस के साथ संयुक्त रूप से निर्मित चन्द्रयान-2 के प्रमोचन हेतु इसरों इस समय तैयार हो रहा है।

सरल उपग्रह (Simple Satellite)

मौसम आँकड़ा केन्द्रों (एआरजीओएस) तथा समुद्र सतह से आँकड़ा संग्रहण करने के लिए आँकड़ा संग्रहण मंच तथा समुद्र सतह तुंगतामापी (के ए-बैंड तुंगतामापी) के अध्ययन हेतु रडार तुंगतामापी का वहन करने वाली एआरजीओएस तथा एएलटीआईकेए (सरल) के लिए सीएनईएन उपकरण के लिए तथा इसरो पीएसएलवी का प्रयोग करते मंच तथा प्रचालन के लिए उत्तरदायी है। 2012 में प्रमोचन के लिए दोनों एजेंसी उपग्रह को तैयार करने में कार्यरत हैं। वैज्ञानिक समुदाय ने सरल से प्राप्त आँकड़े के उपयोग में अपनी रूचि दिखाई है। पहले 82 परियोजनाएँ पहचानी गई है जिसमें फ्रांस की 16परियोजनाएँ तथा अन्य शहरों से 30 परियोजनाएँ शामिल हैं।

चन्द्रयान-2 (Chandrayaan-2)

  • भारत और रूस, एक संयुक्त मानव रहित चन्द्र मिशन चन्द्रयान-2 को आपस में सहयोग दे रहे हैं। भारत, प्रमोचन, चन्द्र कक्ष मॉड्‌यूलर तथा रोवर के लिए जिम्मेदार है, जबकि रूस, चन्द्र लैंडर मॉडयूल इस वर्ष महत्वपूर्ण प्रगति की हुई है, जहाँ दोनों पक्षों ने ‘कक्षित्र-लैंडर रोवर अंतरापृष्ठ तथा मिशन प्रचालन’ पर चर्चा की गई। कक्षित्र तथा रोवर पर भारतीय उपकरणों को अंतिम रूप दिया गया, कक्षित्र का प्राथमिक डिज़ाइन समीक्षा रोवर को पूरी की गई है। 2014 के दौरान, दोनों देश कक्षित्र, रोवर तथा उपकरणों की तैयारी में जुटे है। इसरो तथा केनेडियन अंतरिक्ष एजेन्सी (सीएसए) , दोनों पराबैंगनी प्रतिबिंबिन दूरबीन के विकास पर कार्यरत हैं, जिसे इसरो के बहु तरंगदैर्ध्य खगोलीय उपग्रह एस्ट्रोसेट पर भेजने की योजना है। विदेश मंत्रालय के माध्यम से इसरो इस समय (दक्षिण पूर्वी एशियन राष्ट्र संघ) के सचिवालय के साथ कार्य कर रहा है ताकि भारत-एशियन सहकारिता के सभी 10 राष्ट्रों को आपदा प्रबंधन सहायता में भारतीय सुदूर संवेदन आंकड़े उपलब्ध हों। इसरो, सार्क राष्ट्रों दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहकारिता संघ के साथ भी गंभीर तडित झांझा पूर्वानुमान की सहायता हेतु मौसम केन्द्रों के एक नेटवर्क की स्थापना के लिए कार्यरत है।
  • इसरो ने क्षेत्र के लाभ के लिए उपग्रह सुदूर संवेदन आँकड़ा तथा विशेषज्ञों की भागीदारी के जरिए एशिया प्रशांत क्षेत्र (स्टार) कार्यक्रम के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी तथा सेन्टिल एशिया परियोजना सहित एशिया प्रशांत प्रादेशिक अंतरिक्ष एजेंसी फोरम (एपीआरएसएएफ) के क्रियाकलापों को योगदान जारी रखा। क्षमता निर्माण के क्षेत्र में, इसरो ने अपनी सुविधाओं, एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र (सीएसएसटीईएपी) में अंतरिक्ष विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी शिक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र (मून) दव्ारा मान्यता प्राप्त केन्द्र के जरिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग में विशेषता तथा सेवाएँ जारी रहीं।

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