व्यक्तियों दव्ारा मैला ढोने पर नया कानून (A New Law on Carrying Waste by Persons – Social Issues)

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• जूलाई में प्रकाशित नवीनतम सामाजिक-आर्थिक जनगणना आंकड़ो से पता चलता है कि देश में 1,80, 657 परिवार और 7.84 लाख लोग अब भी अपने जीविकापार्जन के लिए मैला ढोने के अपमानजनक कार्य में संलग्न हैं।

• महाराष्ट्र में 63,713 परिवार मैला ढोने में कार्यरत हैं और जनगणना आंकड़ों के अनुसार ऐसे लोगों की सर्वाधिक संख्या के साथ यह राज्य पहले स्थान पर है। इसके बाद मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, त्रिपुरा और कर्नाटक आते हैं।

मैला ढुलवाना निषेध एवं मैला ढोने वालों का पुनर्वास अधिनियम 2013 की विशेषताए

• इस अधिनियम ने मैला ढोने वाले व्यक्तियों की परिभाषा में विस्तार का प्रयास किया गया है।

• इस अधिनियम के लागू होने के 9 माह के भीतर प्रत्येक अस्वास्थ्यकर शौचालय को गिरा दिया जाएगा या उन्हें स्वच्छ शौचालयों में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

• यह विषय केन्द्रीय सूची (प्रविष्ट 97) के अंतर्गत आती है।

• इसे कार्यान्वित कराने का दायित्व सफाई कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय आयोग को सौंपा गया है।

• लगभग 2 लाख मैला ढोने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए उन्हें एकमुश्त नकद राशि सहायता और अन्य वैकल्पिक जीविकोपार्जन साधनों हेतु प्रशिक्षण के दौरान 3000 रूपये प्रतिमाह दिए जाएगें। परिवार के कम से कम एक सदस्य को रियायती दर पर ऋण और गृह निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

• सामुदायिक स्वच्छ शौचालयों की सुनिश्चिता का दायित्व स्थानीय सरकार को सौंपा गया है।

• किसी को मैल ढोने के काम पर लगाने वालों के लिए पहले से अधिक कठारे दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें 50,000 रूपए या /और एक वर्ष तक के कारावास का दंड दिया जा सकता है। सीवर और सेप्टिक (व्यक्ति और सुरक्षित) टैंक की सफाई के लिए जोखिमपूर्ण प्रक्रिया अपनाने पर 2 लाख रूपये का आर्थिक दंड और 2 वर्ष तक के कारावास का दंड दिया जा सकता है।

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