Important of Modern Indian History (Adunik Bharat) for Hindi Notes Exam

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CHAPTER: Non-Cooperation Movement

असहयोग आंदोलन 1920 - 22

कारण-

  • प्रथम विश्वयुद्ध के बाद लोगों को अंग्रेजी हुकुमत से कुछ करने की उम्मीद थी। पर सरकार ने दमन के सिवा कुछ नहीं दिया।
  • मांटाग्यू चेम्सफोर्ड सुधार (1919) का मकसद भी सिर्फ दोहरी शासन प्रणाली लागू करना था, जनता को राहत देना नहीं।
  • अंग्रेजों ने तुर्की के प्रति (प्रथम विश्वयुद्ध में मुसलमानो के सहयोग के लिए) उदार देने का वादे से भी मुकर गए।
  • हंटर कमेटी के जाँच से भी लोग क्षुब्ध थे।
  • ‘हाउस ऑफ लॉडस’ ने जनरल डायर के कारनामों को उचित ठहराया।
  • मार्निग पोस्ट ने जनरल डायर को 30 हजार पौंड दिया।
  • तुर्की के साथ 1920 की संधि से तुर्की के विभाजन का फैसला अंतिम था।
  • नवंबर 1919 में खिलाफत सम्मेलन में गाँधी जी को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
  • 1920 में गाँधी जी ने खिलाफत कमेटी को असहयोग आंदोलन छेड़ने को बोला 9 जून 1920 इलाहाबाद में इसे स्वीकार कर उन्हें अगुवाई करने कहा।
  • मई 1920 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाद सितंबर में विशेष अधिवेशन का फैसला हुआ। उद्देश्य-आगे की रणनीति तय करना आर्थिक कठिनाइयों ने जनता को संघर्ष के लिए उकसाया।

आंदोलन-

  • 1 अगस्त, 1920 को असहयोग आंदोलन प्रारंभ हुआ।
  • 22 जून को वाइसराय को नोटिस- गाँधी जी- “कुशासन करने वाले शासक को सहयोग देने से इनकार करने का अधिकार हर आदमी को है।”
  • 1 अगस्त, 1920 को प्रात: तिलका का निधन हो गया।
  • दिसंबर में नागपुर अधिवेशन में आर. सी. दास ने असहयोग आंदोलन से संबंद्ध प्रस्ताव रखा-असहयोग आंदोलन की पुष्टि
  • असहयोग आंदोलन से असहमत होने के कारण मुहम्मद अली जिन्ना, ऐनी बेसेंट तथा विपिन चंद्रपाल ने कांग्रेस छोड़ दी।
  • ज्यादातर बंगाल में- क्रांतिकारी आतंकवादियों के गुटों ने इस आंदोलन का समर्थन किया।
  • कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में परिवर्तन के साथ उद्देश्य भी बदल गए।
  • पहले उद्देश्य था स्वशासन अब था स्वराज
  • 15 सदस्यीय कार्यकारिणी गठित की गई-1916 में तिलक ने प्रस्ताव दिया था।
  • प्रदेश कांग्रेस समितियों का गठन किया गया- स्थानीय स्तर पर
  • सदस्यता फीस चार आना साल कर दी गई।
  • गांधी जी ने खिलाफत नेता अली भाइयों के साथ पूरे देश का दौरा किया।
  • आर. दास. ने प्रोत्साहित किया-कलकता के विद्यार्थियों ने राज्यव्यापी हड़ताल किया।
  • सुभाषचंद्र बोस ‘नेशनल कॉलेज’ (कलकता) के प्रधानाचार्य बनें।
  • लाला लाजपत राय ने काम किया- बंगाल के बाद शिक्षा का ज्यादा बहिष्कार पंजाब में हुआ।
  • आर. दास. , मोतीलाल नेहरू, एम. आर. जयकर, किचलू, वल्लभ भाई पटेल, सी. राजगोपालाचारी, टी. प्रकाशय और आसफ अली ने वकालत छोड़ दी।
  • प्रभुदास गांधी, महात्मा गांधी के साथ देश के दौरे पर गए थे।
  • बहिष्कार आंदोलन में सबसे अधिक सफल विदेशी कपड़ो का बहिष्कार था-1920 - 21 में 1 अरब 2 करोड़ का आयात हुआ, 1921 - 22 में 57 करोड़ का आयात हुआ।
  • साड़ी की दुकान पर धरना जो मूल कार्यक्रम में नहीं था, बहुत लोकप्रिय हुई। सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।
  • 8 जुलाई, 1921 में खिलाफत सम्मेलन में मुहम्मद अली ने घोषणा की मुसलमान का सेना में रहना धर्म के खिलाफ है।
  • इसके बाद इन्हें साथियों समेत गिरफ्तार (असहयोग आंदोलन में सर्वप्रथम मुहम्मद अली हुए गिरफ्तार) कर लिया गया।
  • 4 अक्टूबर को गांधी समेत कांग्रेस के 47 नेताओं ने बया जारी कर मुहम्मद अली के बयान की पुष्टि की।
  • 16 अक्टूबर को पूरे देश में कांग्रेस समितियों की बैठक ने इसे मंजूरी दी।
  • सरकार ने हार मान ली।
  • पूरे भारत में हड़ताल-17 नवंबर, 1921 को प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा शुरू हुई।
  • जिस दिन वे बंबई आए उस दिन गाँधी जी ने ‘एलकिंस्टन मिल’ (बंबई) मजदूरों की सभा में भाषण दिया।
  • शहर में दंगा भड़क उठा 58 व्यक्ति मरे।
  • गांधी जी के 3 दिन के अनशन के बाद हिंसा खत्म हुई।
  • कांग्रेस (प्रदेश) समितियों को इजाज़त थी अवज्ञा आंदोलन छेड़ने की।
  • मिदनापुर (बंगाल) और गुंटूर जिले (आंध्र) के चिराल-पिराला और पेडानंडीपाडु तालुका में कर ना अदा करने का आंदोलन छिड़ा।
  • जे. एम. सेनगुप्त (Medical Student, kalkata) ने जमींदारों कंपनी के खिलाफ काश्तकारों के हड़ताल का साथ दिया।
  • प्जाांब में अकालियों ने महंतो के खिलाफ आंदोलन छेड़ा।
  • लॉर्ड रैडिंग फूट डालने के लिए-मई, 1921 में वाइसराय ने गांधी जी से कहा कि वे अली भाइयों को अपने भाषणों में हिंसा भड़काने वाली बात ना कहने को मनाए।
  • दिसंबर आते-आते स्वयंसेवी संगठनों को गैर-कानूनी घोषित कर, सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया।
  • सबसे पहले आर. सी. दास उसके बाद उन्ही पत्नी बासंती देवी को गिरफ्तार किया गया।
  • बड़े नेता में केवल गांधी जी बाहर थे।
  • खिलाफत आंदोलन के विरूद्ध थी- दिसंबर के मध्य में मालवीयजी के माध्यम से बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश को गांधी जी ने मना कर दिया।
  • बैठक, सभाओं पर प्रतिबंध लगाया गया, अखबार बंद कर दीए गए।

चौरीचौरा कांड-

  • दिसंबर, 1921 में अहमदाबाद कांग्रेस सम्मेलन में आंदोलन के लिए रणनीति तय करने की जिम्मेदारी गांधी जी को सौंपी गई।
  • जनवरी, 1922 में सर्वदलीय सम्मेलन की अपील और गाँधी जी के पत्र का सरकार पर कोई असर नहीं हआ।
  • 1922 गाँधी जी- यदि सरकार नागरिक स्वतंत्रता बहाल नहीं करेगी, राजनीतिक बंदियों को रिहा नहीं करेगी, तो वह देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ने को बाध्य हो जाएंगे।
  • सवियन अवज्ञा आंदोलन बारदोली तालुका (सूरत) से शुरू होना था।
  • गाँधी जी ने जनता से अनुशासित व शांत रहने की अपील की।
  • 5 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा (संयुक्त प्रांत, गोरखपुर जिला) में कांग्रेस और खिलाफत का एक जुलूस निकला-3000 किसान
  • 22 पुलिस मारे गए-पुलिस ने गोली चलाई, भीड़ ने उत्तेजित होकर थाने में आग लगा दी।
  • 12 फरवरी, 1922 को आंदोलन समाप्त हो गया-बारदोली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में
  • 12 फरवरी, 1922 को कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ, उसे बारदोली प्रस्ताव कहा गया।

आंदोलन वापस लेने को निर्णय के विरोध में आलोचकों के तर्क:-

  • गाँधी जी अमीर वर्गो के हितों का ख्याल रखते थे और भारतीय जनता अमीर शोषकों के खिलाफ कमर कस रही है।
  • गाँधी जी को लगा कि आंदोलन की बागडोर उनके हाथ से निकल लड़ाकू ताकतो के हाथ में जाने वाली है।
  • पूँजीपतियों और भूस्वामियों के खिलाफ लड़ाई होने वाली है, उनका उद्देश्य जमींदारों के हितों की रक्षा करना था।
  • कर अदा न करना असहयोग आंदोलन का हिस्सा था, इसलिए जब आंदोलन वापस लिया गया, तो किसानों और काश्तकारों को कर व लगान की अदायगी करने को कहा गया।
  • मांटाग्यू बौर बरकेनहेड- “भारत, दुनिया की सबसे शक्तिशाली सत्ता को चुनौती नहीं दे सकता और अगर चुनौती दी गई, तो इसका उत्तर पूरी ताकत से दिया जाएगा।”
  • 1922-गाँधी जी- (यंग इंडिया) - “अंग्रेजों को यह जान लेना चाहिए कि 1920 में छिड़ा संघर्ष अंतिम संघर्ष है, निर्णायक संघर्ष है, फैसला होकर रहेगा, चाहे एक महीना लग जाए या एक साल लग जाए, कई महीने लग जाएं या कई साल लग जाएँ। अंग्रेजी हुकुमत चाहे उतना ही दमन करे जितना 1857 के विद्रोह के समय किया था, फैसला होकर रहेगा।”

Some Imp. Points:-

खिलाफत आंदोलन-भारतीय मुसलमानों का मित्र राष्ट्रों के विरूद्ध विशेषकर ब्रिटेन के खिलाफ तुर्की के खलीफा के समर्थन में था।

  • 19 अक्टूबर 1919 को देश में खिलाफत दिवस मनाया गया।
  • 23 नवंबर, 1919 को हिन्दू और मुसलमानों की एक संयुक्त कांफ्रेंस हुई-अध्यक्ष महात्मा गाँधी जी

रॉलेट एक्ट, जलियाँबाला बाग कांड और खिलाफत आंदोलन के उत्तर में गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया।

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