सेबी दव्ारा गठित पैनल (तालिका) ने वैकल्पिक फंड (धन) उद्योग को विकसित करने का सुझाव (SEBI Constitutes Panel to Develop Alternative Fund Industry – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• नारायण मूर्ति की अध्यक्षता में सेबी दव्ारा गठित एक 21 सदस्यीय सलाहकार पैनल (तालिका) ने AIFs (AIF -अल्टरनेटिव (व्रणकारी) इन्वेस्टमेंट (निवेश) फंड (धन) ) दव्ारा पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने हेतु अनेक कर सुधारों और मौजूदा कानूनों में परिवर्तन का सुझाव दिया है।

AIF (वैकल्पिक निवेश कोष) क्या है?

• निवेश के पारंपरिक तरीकों से इतर निवेश के अन्य वैकल्पिक साधनों को ‘वैकल्पिक निवेश’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

• AIFs को भारतीय प्रतिभूमि एवं विनिमय बोर्ड (मंडल) (वैकल्पिक निवेश कोष) विनियम, 2012 के विनियम 2 (1) (बी) में परिभाषित किया गया है।

• यह किसी ट्रस्ट या किसी कंपनी के रूप में, जो वर्तमान में एसईबीआई के किसी भी विनियमन के दायरे में नहीं आते हैं और न ही भारत में किसी भी अन्य क्षेत्रक नियामकों (IRDA, PFRDA, RBI) के प्रत्यक्ष विनियमन के तहत आते हैं, उनके किसी भी निजी तौर पर संग्रहित निवेश कोष (चाहे इसका स्रोत भारत हो या विदेशों में) को संदर्भित करता है।

AIFs को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है

श्रेणी I: वाले AIF अर्थव्यवस्था पर सकरात्मक स्पिल (अवधि) ओवर (अधिकता) वाले AIFs होते हैं। उदाहरण: वेंचर कैपिटल (पूंजी) फंडए एस. एम. ई. फंड (संचय) आदि।

श्रेणी II. : वैसे AIFs जिन्हें कोई विशेष प्रोत्साहन या रियायतें नहीं दी जाती हैं “कैटेगरी II” वाले AIF कहलाते हैं। जैसे-निजी इक्विटी (निष्पक्षता) या डेट (तिथि) फंड (ऋण कोष)

श्रेणी III: वैसे AIF जिनके बारे में यह माना जाता है कि लघु अवधि के प्रतिफल की प्राप्ति के दृष्टिकोण के कारण उनमें कुछ परिस्थितियों में कुछ संभावित नकरात्मक बाह्यता की क्षमता होती है। “कैटेगरी III” वाले AIFs कहलाते हैं। इन्हें सरकार या किसी अन्य नियामक से कोई विशेष प्रोत्साहन या रियायतें प्राप्त नहीं होती हैं। जैसे-हेज फंड।

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