ब्राजील का भूगोल (Brazilian Geography) Part 2 for CISF Exams

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धरातल-

सरचना और स्थलाकृति का दृष्टि से हम इसको चार भागो में विभाजित करते हैं-

  • गुयाना उच्च भूमि

  • आमेजन बेसिन

  • ब्राजील उच्च भूमि

  • तटवर्ती मैदान

  • गुयाना उच्च भूमि-ब्राजील की उत्तरी सीमा, गायना तथा निकटवर्ती दक्षिणी वेनेजुएला तक यह लघु पठार विस्तृत है। इस पठार का दक्षिणवर्ती ढाल सीढ़ीदार है। इसकी चटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टानें आमेजन घाटी के तल तक विस्तृत है। संरचनात्मक दृष्टि से गुयाना उच्च भूमि तथा ब्राजील उच्च भूमि आपस में मिले हुए थे, लेकिन महादव्ीपीय विस्थापन से उत्पन्न गनिक विषमता से दरार की उत्पत्ति हुई और उसी भ्रंश घाटी में निक्षेपित पदार्थ आमेजन बेसिन का निर्माण करता है। गुयाना का पठार तथा ब्राजील का पठार दोनों समकालीन तथा अपरदित पठार है। इनका निर्माण प्री- कैम्ब्रियन काल में हुआ है। ये संभवत: पैन्जिया तथा गोंडवानालैंड के अंग थे।

  • आमेजन बेसिन- आमेजन एवं उसकी उत्तरी एवं दक्षिणी सहायक नदियों दव्ारा बिछाये गए अभिनव काल के अवसादों से बना यह समतल प्राय: मैदान दक्षिणी अमेरिका का सबसे विशाल उत्तरी मैदान भी है। आमेजन विश्व की सबसे लंबी नदी (7200किमी) होने के साथ-साथ सबसे अधिक जल ढोने वाली नदी है। यह प्रति सेकेण्ड अटलांकटक में 1 मिलियन (दस लाख) मीटर3 (मापक) जल छोडती है। यह विश्व में अति धीमी गति से बहने वाली नदी है, कारण 3200 कि.मी. की दूरी में (मनौस से पूरब) इसकी औसत ढाल 10 एमएम/किमी हैं। यह अति समतल मैदान बनाती है। गुयाना पठार से आने वाली इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं- नीग्रो एंव ट्रोम्बेटास, एण्डीज से आने वाली नदियों में जापुरा, पुरमायो जुरुआ, पुरुष एवं मदिरा तथा ब्राजील पठार से आने वाली नदियों में तापाजोस, झिंगू तथा टोकान्टिस प्रमुख सहायक नदियां हैं। आमेजन नदी बेसिन का कुल क्षेत्रफल 37.5 लाख किमी2 है, जिसमें 80 प्रतिशत ब्राजील में है। मंद गति से बहने एवं मार्ग में झरने आदि नहीं होने से यह प्रारंभ से ही नौगम्य रही है। आमेजन के माध्यम से महासागरीय जलयान 3700 किमी अंदर स्थित मनौस तक जा सकते हैं।

  • ब्राजील उच्च भूमि - यह पठार ब्राजील के मध्य एवं पूर्वी भाग में लगभग 36 लाख किमी2 क्षेत्र में विस्तृत है। इसकी आकृति त्रिकोणाकार है, जिसका आधार उत्तर में एवं शीर्ष दक्षिणी ब्राजील में है। इस पठार के उत्तर में आमेजन प्रवाह, दक्षिण-पश्चिम में पराना-पराग्वे प्रवाह एवं मध्य -पूर्व साओ फ्रांसिस्को नदी का प्रवाह बहता है। सावो मैनफ्रांसिस्को समुद्र में गिरने वाली दूसरी सबसे लंबी नदी है। इसका बेसिन गन्ने की कृषि के लिए प्रसिद्ध है। यह पठार 300-900 मीटर (मापक) के मध्य एवं पूर्वी पहाड़ी भाग में 1200 मीटर तक ऊँचा है। ब्राजील उच्च भूमि में तीन प्रकार की भूआकृतियाँ दृष्टिगत होती है-

  • पूर्व की ओर तीव्र ढालू कंगार प्रदेश

  • मुख्य समतल पठार

  • अवशिष्ट पर्वत अथवा पर्वत श्रेणियाँ

पठार की मध्यवर्ती पर्वतमाला गोयना की श्रेणी नाम से प्रसिद्ध है। मिएरा-डि-मार नामक पर्वत श्रेणी रियो ग्रान्डे-डि-सुल राज्य में विस्तृत है। मध्यवर्ती भाग में दूसरी श्रेणी सिएरा-डि-मोण्टी क्यूटा है। मिनास जेरास राज्य की सीमा पर सियरा-कनास्ट्रा तथा सियरा-डि-माटा-डि-कोडे श्रेणी है। ब्राजील पठार का सर्वोच्च शिखर रियो-डि-जेनेरो के उत्तर-पश्चिम में स्थित माउण्ट इराटिया (2787 मी.) है।

ब्राजील पठार के दक्षिणी भाग में विदर उदगार के प्रमाण मिलते हैं। पराना राज्य में करीब 91000 किमी2 क्षेत्र में लावा का निक्षेप देखने को मिलता है। इस लावा का जमाव ट्रियासिक काल में हुआ है। यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा लावा पठार है। यहाँ लावा की औसत गहराई 610 मीटर है। इसी प्रदेश में ऋतुक्षरण प्रक्रिया से ’टेरा-रोक्सा’ मृदा का निर्माण हुआ जो कहवा की कृषि के लिए उपयुक्त है। इस मृदा में चुना-पत्थर और लोहा के पर्याप्त अंश हैं। प्राचीन रवेदार शैलों के उपर बालुका-पत्थर का निक्षेपण हुआ है, जिनके अवशेष ’चपाडोज’ कहलाते है। यह पठार अनेक बहुमूल्य धातु अधातु एवं कीमती खनिजों में धनी है, इसलिए कहा जाता है- ”ब्राजील का भविष्य ब्राजील के पठार के भविष्य से बंधा हुआ है।”

  • तटवर्ती मैदान-ब्राजील के तट पर तटीय मैदान का निरन्तर विस्तार नहीं पाया जाता है। सिर्फ उत्तरी भाग में गायना की सीमा से लेकर परानाम्बुको तक निरन्तर विस्तृत मैदान तट पर फैले है। यह आमेजन के मुहाने के पास चौड़े हैं। ब्राजील के पूर्वी तट पर उत्तर में साओ रॉक अंतरीय से लेकर दक्षिण में रियो-गाण्डे. डि-सुल तक लगभग 7400 किमी की लंबाई में तटवर्ती संकरा लहरदार मैदान विस्तृत है। कई स्थानों पर यह तट कटाफटा होने से यहाँ अनेक प्राकृतिक पोताश्रय भी पाए जाते हैं। इसमें सेन्टोस, रियो-डि-जेनेरो, सेल्वाडोर, विटोरिया एवं रेसिफ मुख्य बंदरगाह हैं।

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