भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के तीन वर्ष का विवरण [ Detailed Analysis (CA/GS) - ]

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प्रस्तावना: - भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी और उनकी सरकार कई मायनों में विशेष है। अपार जनसमर्थन, लोकसभा में जबरदस्त ताकत, लोगों से सीधा संवाद करने वाला प्रधानमंत्री। संगठन पर मजबूत पकड़ और मीडिया (माध्यम) की टीआरपी देने वाला नेता। ऐसे में लोगों की अपेक्षाओं का पहाड़ से पर्वत बन जाना चौंकाता नहीं। पांच में से 3 वर्ष बीत भी चुके हैं। समीक्षा होना लाजिमी है। सरकार निर्णय लेने में ठिठकती नहीं दिखती, लेकिन कुछ बड़े सवाल मुंह बाये खड़े हैं। अमीर-गरीब का फासला मिट नहीं रहा। किसानों की जिंदगी नहीं बदली। शहरों का खड़ा करने वाले प्रवासी सड़को पर हैं। नौजवानों को नौकरियों की तलाश है। ये हो गया और वो गया…. यह सिर्फ शोर बन कर न जाए, इसके लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

कार्यकाल: - मोदी सरकार अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे कर रही है। जब यह सरकार बनी थी तब देश की जनता को भाजपा से ज्यादा मोदी से उम्मीदें थीं। वह उन्हें सर्वशक्तिमान की तरह देख रही थी। जो कुर्सी पर बैठते ही देश की सारी समस्याओं का समाधान कर देंगे। यह वही कारण था कि भाजापा को पहली बार स्पष्ट बहुमत मिला। तीन साल का कार्यकाल बहुत ज्यादा भी नहीं होता, तो बहुत कम भी नहीं होता, कोई सरकार जो करना चाहती है वह शुरू कर चुकी होती है। कुछ नतीजें सामने भी आने लगतें हैं। कई तरह से सरकार के वादों और देशहित की मंशा भी सतह पर आ जाती है।

उपलब्धि: - इन तीनों सालों में सबसे बड़ी उपलब्धि सरकार देश की जनता में निराशा के माहौल का खात्मा बता सकती है। जब 2014 के आम चुनाव हुए तो देश में निराशा का माहौल था। हर दिन यूपीए सरकार के किसी न किसी मंत्री का भ्रष्टाचार अथवा भाई भतीजावाद अखबारों की सुर्खियां बन रहा था। कभी कॉमनवैल्थ (राष्ट्रमंडल) खेल तो कभी टू जी तो कभी कोयला घोटाला। स्वच्छ छवि का होने के बावजूद चुप्पी की वजह से उसके छीटें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक जा रहे थे। कम से कम इन तीन सालों में ऐसे किसी भ्रष्टाचार का आरोप तो केन्द्र सरकार के किसी मंत्री पर नहीं लगा। मोदी जी ने तो इन वर्षों में पूर्ववर्ती तमाम प्रधानमंत्रियों से अपनी एक अलग साख बनाई है। उनके काम मैं, काम करने के तरीके में कमियां गिनाई जा सकती हैं लेकिन उनकी नीयत या देश के प्रति निष्ठा पर अंगुली उठाने वाला शायद ही कोई मिले। एक तरफा ही सही पर नियमित रूप से देश के सामने अपने ’मन की बात’ रखना भी कम हिम्मत की बात नहीं है। उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों में कुछ तो ऐसे हैं ही जो अपने विभागों में मन लगाकर काम कर रहे है। अपने-अपने विभागों का उनका काम देश भर में बोल रहा है। ऐसे मंत्रियों में रेलमंत्री सुरेश प्रभु, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल, मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, प्रेट्रोलियम व गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एवं सड़क परिवहन मंत्री निति गडकरी शामिल है। गोवा लौटने में पहले ढाई साल में रक्षामंत्री के रूप में मनोहर पर्रिकर भी अपनी अलग छाप छोड़ गए हैं।

जनसंघ: - पिछले तीन सालों में बहुत कुछ अच्छा हुआ किन्तु लोकतंत्र को झटके भी कम नहीं लगे। विपक्ष का सम्मान लगभग समाप्त हो गया। जो भी नेता भाजपा के विरुद्ध है भारी पड़ेगा। उससे निपट लिया जाएगा। मानो भाजपा के सारे नेता दूध के धुले हों। कांग्रेस द्वारा नियुक्त राज्यपाल किस तरह हटाए गए, किस प्रकार नजीब जंग ने दिल्ली सरकार को नाको चने चबवाएं-ऐसा नजारा आश्चर्यजनक ही था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि विपक्ष जितना मजबूत होगा, सरकार भी उतनी ही अच्छा कार्य कर पाएगी। इस लक्ष्य को पुरा करने के लिए उन्होंने स्वयं पार्टी (दल) के कुछ कद्दावर नेताओं को विपक्ष की भूमिका से जोड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी कुछ बड़े नेताओं के जरिए जनसंघ की स्थापना की थी।

चुनावी वादे: -तीन वर्ष पहले किए कुछ चुनावी वादों को तो भाजपा के ही बड़े नेताओं ने चुनावी जुमले कहकर कार्यालय में दाखिल कर दिया था। जनता ने जो बहुमत दिया शायद उसका इनाम था। पेट्रोल के दाम बढ़ते गए। खाद्य पदार्थ पहले ही वर्ष में महंगे हो गए। नीचे का भ्रष्टाचार ज्यों का त्यों हैं। कालाधन वापस लने की घोषणाएं अभी पूरी होने का इंतजार कर रही हैं। इसके विपरीत नोटबंदी करके बेराजगारी की समस्या भी पैदा कर दी। सेकड़ों उद्योग धंधे बंद होग गए।

मोदी जी ने अपनी पारी की शुरूआत ’एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के सपने के साथ की थी। इसके लिए दिन रात मेहनत भी की थीं। लोगों की उम्मीदों के खिलाफ अपने शपथ समारोह में पड़ोसी राष्ट्रध्यक्षों के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी बुलाया था।

मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड (विवरण पत्रक) : -

1. मोदी सरकार के कामों में सबसे अच्छे सात काम-

बड़े कदम: -

1. नोट बंदी-8 नवंबर, 2016 को पीएम मोदी जी ने 1000 और 500 के पुराने नोट बंद कर दिए। मकसद था कालेधन, आतंकियों की फंडिंग (निधिकरण) व जाली नोटों पर लगाम लगाना। लेकिन सरकार और आरबीआई दोनों यह नहीं बता पाए कि यह कदम कितना सफल हुआ। इससे संबंधित आंकड़े आज तक सामने नहीं आए। 3.4 माह तक जनता परेशान रही। वजह यह थी कि सरकार की तैयारी पूरी नहीं थी। कालेधन और भ्रष्टाचार से निटने के लिए नोटबंदी का ऐतिहासिक निर्णय। 82 प्रतिशत लोगों ने इस अच्छे कामों में चुना है। और 52 प्रतिशत नोटबंदी करने के तरीके से नाराज है।

2. जीएसटी- जीएसटी 1 जुलाई से लागू करने की दिशा में खासी तेजी हुई। 18 से ज्यादा कर खत्म होंगे। ज्यादातर वस्तुओं व सेवाओं की कर दरों में बदलाव तय हुआ है। 57 प्रतिशत लोगों ने इस फैसले को अच्छा माना है। इनमें से 72 प्रतिशत ग्रामीणों ने जीएसटी के फैसले को पसंद किया। जबकि शहरों में 67 प्रतिशत फैसले के साथ है।

3. चुनावी जीत-जनता ने यूपी में भाजपा को रिकॉर्ड (प्रमाण) 325 सीटें जिताकर सरकार के फैसलों पर मुहर लगाई। तीन साल में बिहार-दिल्ली में हार के बाद असम, महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू कश्मीर आदि में सरकार बनी। महाराष्ट्र निकाय चुनाव और एमसीडी में जीत हुई।

4. गुड गवर्नेंस (अच्छा प्रशासन) की झलक-

1.96 लाख गांव खुले में शौच से मुक्त।

  • 1.8 करोड़ लोगों ने डाउनलोड की भीम एप।
  • 130 किमी रोज सड़क बनती है। पहले 73 किमी थी।
  • 2016 - 17 में 32.14 लाख नए घर बने।
  • 7.7 किमी रेल ट्रैक (चिन्ह) रोज बन रहा, पहले 4.3 किमी था।

5. सर्जिकल (शल्यक) स्ट्राइक (हड़ताल) -उरी हमले में 18 जवानों के शहीद होने के करीब दस दिन बाद 29 सितंबर को सेना ने पीओके में तीन किमी तक घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की। 4 घंटे तक कार्रवाई कर 40 आतंकी मार गिराए। 150 जवानों की टीम ने 7 आतंकी कैंप तबाह किए और 9 पाक सैनिक भी मार गिराए। पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस (पत्रकार-सम्मेलन) कर सर्जिकल स्ट्राइक को स्वीकार किया। पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक की ड्रोन से वीडियोग्राफी भी की। खुली चेतावनी दी कि जरूर पड़ी तो पाक के खिलाफ फिर ऐसी कार्रवाई करेंगे। 83 प्रतिशत ने इसे सबसे अच्छे 5 कामों में चुना है। इनमें से 84 प्रतिशत पुरुषों के अनुसार यह मोदी का सबसे अच्छा काम है। जबकि 68 प्रतिशत महिलाओं ने अच्छा माना।

6. डिजिटल (अंकसंबंध) इंडिया (भारत) - 60 प्रतिशत लोगों ने इसे सबसे अच्छे कामों में चुना है। इनमें से 74 प्रतिशत पुरुषों के अनुसार डिजिटल इंडिया मोदी का सबसे अच्छा काम हैं।

7. लालबत्ती खत्म-60 प्रतिशत लोग इसे अच्छा काम मानते हैं। लेकिन सर्वे में शामिल दक्षिण के 29 प्रतिशत लोगों ने इसे अच्छा कदम नहीं माना। जबकि हिमाचल में 92 प्रतिशत के साथ।

सबसे निराशाजनक पांच काम -

  1. कुल जमा पाक को लेकर रवैया-55 प्रतिशत के अनुसार निराशाजनक कदम।
  2. नौकरियों के लिए कदम-52 प्रतिशत ने इसे निराशाजनक कामों में चुना है।
  3. नोटबंदी का तरीका-52 प्रतिशत ने इसे निराशाजनक कामों में चुना है।
  4. ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया-45 प्रतिशत ने निरशाजनक कामों में चुना हैं।
  5. फेयर (किसी काम में सफल या विफल होना) एंड (और) लवली (आनन्दायक) स्कीम (योजना) -38 प्रतिशत लोगों ने स्कीम को निराशजनक बताया।
  1. लोकसभा चुनाव में क्या मोदी फिर सरकार बना पाएंगे? -यदि आज चुनाव हो तो 56 प्रतिशत के अनुसार 2014 से भी ज्यादा सीटें लेकर जीतेंगे। 18 प्रतिशत के अनुसार 2014 से कम सीटें आएंगी। यानी 91 प्रतिशत के अनुसार अगर आज चुनाव हो तो मोदी दोबारा जीत जाएंगे। 2019 में होंगे तब- 59 प्रतिशत के अनुसार 2014 से भी ज्यादा सीटें लेकर जीतेंगे। 18 प्रतिशत के अनुसार 2014 से कम सीटें आएंगी।
  2. हर मुद्दे पर खुलकर बोलने वाले मोदी राम मंदिर, बूचड़खाने और दलित जैसे विवादित मुद्दो पर 61 प्रतिशत लोगों ने कहा मोदी खामोश रहते है। 39 प्रतिशन ने कहा मोदी खुलकर बोलते हैं।
  3. आप प्रधानमंत्री मोदी को किस तरह जानते हैं? - 43 प्रतिशत खूब काम करने और खूब काम लेने वाले प्रधानमंत्री 35 प्रतिशत आक्रामक प्रधानमंत्री।
  4. क्या मोदी जी मुस्लिमों का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं? - 50 प्रतिशत लोगों ने कहा हां, व 34 प्रतिशत के अनुसार न दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं न दुखी कर रहे हैं।
  5. मोदी सरकार में आपकी आजादी- खुलकर कहने की आजादी 78 प्रतिशत लोगों ने कहा बढ़ी है। 22 प्रतिशत लोगों ने कहा कम हुई है। खाने पीने की आजादी 68 प्रतिशत लोगो ने कहा बढ़ी है। 32 लोगों ने कहा कम हुई है।
  6. मोदी सरकार आने के बाद- सांप्रदायिकता 38 प्रतिशत ने कहा घटी है। 32 प्रतिशत ने कहा कह नहीं सकते। जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने कहा बढ़ी है। असहिष्णुता 42 प्रतिशत ने कहा झटी है। 20 लोगों ने कहा कि बढ़ी हैं। जबकि 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कह नहीं सकते।
  7. क्या विपक्ष मोदी सरकार की खामियों को उजागर कर पा रहा हैं? - 79 प्रतिशत नहीं कर पा रहा। 21 प्रतिशत हां, उजागर कर पा रहा है।
  8. कालेधन को लेकर मोदी सरकार के प्रयास आपको कैसे लगते हैं? - 66 प्रतिशत लोगों का मानना है ठोस हैं, परिणाम मिलेंगे। 34 प्रतिशत लोगों ने बताया दिखावे वाले हैं, फर्क नहीं पड़ेगा।
  9. सरकार के तीन सालों में इन मुद्दों पर आपकी नजर में क्या बदलाव हुआ है? -महंगाई 40 प्रतिशत बढ़ी और 32 प्रतिशत तक घटी व 28 प्रतिशत तक पहले जैसी है। महिला सुरक्षा 50 प्रतिशत बढ़ी, 19 प्रतिशत घटी हैं व 31 प्रतिशत पहले जैसी हैं, नौकरियां 32 प्रतिशत तक बढ़ी 27 प्रतिशत घटी व 41 प्रतिशत पहले जैसे हैं।
  10. क्या मोदी सरकार मध्यम वर्ग का ध्यान रखती हैं? -59 प्रतिशत हां, क्योंकि देश अच्छे दिन की ओर जा रहा है। 41 प्रतिशत नहीं, क्योंकिन महंगाई कम हुई, न ही रोजगार बढ़ा।
  11. मोदी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार…. ? केंद्रीय मंत्रियों और उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार 67 प्रतिशत ने कहा घटा है। 22 प्रतिशत लोगों ने कहा वैसा ही है। 11 प्रतिशत लोगों ने कहा बढ़ा है। 42 प्रतिशत ने कहा वैसा ही है। 28 प्रतिशत लोगों ने कहा घटा है। 20 प्रतिशत लोगों ने कहा बढ़ा है।
  12. मोदी सरकार के फैसले लेने के तरीके कैसे हैं? -सोच समझकर तेजी से लेते हैं 72 प्रतिशत। जल्दबाजी भरे, बार-बार बदलने वाले 21 प्रतिशत। फैसले देर से लेते हैं या नहीं ले पाते हैं 7 प्रतिशत।

सर्वे: -2015 में सरकार पर युवाओं का सर्वे किया, 2016 में महिलाओं का और इस बार देश का सबसे बड़ा सर्वे-

1. पहला सर्वे 56 प्रतिशत युवाओं ने कहा -हरेक के खाते में 15 लाख का वादा सबसे बड़ी भूल।

2. दूसरा सर्वे 43 प्रतिशत महिलाओं ने कहा था-महंगाई नहीं घटी, 30 प्रतिशत को भरोसा भी नहीं।

29 राज्यों, 492 जिलों, 1328 शहरों और 433 गांवों में मोदी के कामकाज को लेकर पूछे गए सवाल चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। कश्मीर, महंगाई, महिला सुरक्षा में फेल, फिर भी 77 प्रतिशत लोग मोदी के साथ है। सर्वे में खास बात जो निकलकर आई, वह यह रही कि लोगों ने उन्हीं कामों को सबसे ज्यादा सराहा जो नए थे, लीक (रहस्योद्धाटन) और परंपरागत सुधारों से हटकर। यह सर्वे केवल सरकार का नहीं था। विपक्ष की ताकत को आंकने का भी था। सर्वे में करीब अधिकतर लोगों ने कहा-विपक्ष कमजोर दिख रहा है, यही वजह है कि वह सरकार की खामियों उजागर नहीं कर पा रहा है। इसके लिए चिंताए इसलिए भी हैं क्योंकि जहां चुनाव होने हैं वहां 83 प्रतिशत लोग ऐसा सोचते है।

हिसाब: -

  • 53 प्रतिशत मानते है कि नोटबंदी का लक्ष्य हासिल करने में सरकार फेल रही।
  • 45 प्रतिशत मानते है कि टैक्स की जटिलताएं खत्म हुई, आसान प्रणाली आई
  • 56 प्रतिशत ने माना यूपीए सरकार की तुलना में ज्यादा विदेशी निवेश हुआ।
  • 56 प्रतिशत के मुताबिक 3 वर्षो में अपराध पद लगाम लगाने में सफल हुई।
  • 62प्रतिशत को लगता है कि सरकार ने महंगाई पर लगाम लगाई है।

विचार: -निम्न हैं-

सवाल उठाने वालों को पहले यह जवाब देना चाहिए दशकों तक सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने क्या किया? जो काम अन्य सरकारें 70 साल में नहीं कर पाईए वह हमने तीन साल में कर दिखाया।

अमित शाह अध्यक्ष, भाजपा

युवा नौकरी के लिए जूझ रहा है। किसान आत्महत्या कर रहें हैं। सीमा पर सैनिक शहीद हो रहें हैं। मोदी सरकार आखिर किस बात का जश्न मना रही है। सरकार ने अपने वादे तोड़े है, ं हर मोर्चे फैल रहें हैैं।

राहुल गांधी, उपाध्यक्ष, कांग्रेस

घोषणाओं, योजना और अमल में दूरी घटे तो बने बात: -

सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। स्वच्छ भारत मिशन के बावजूद शहरो में कचरा निस्तारण बड़ी समस्या हैं। 2014 में 41ं 93 प्रतिशत घरों में शौचालय थे जो अब बढ़कर 63.98 प्रतिशत हो गए। पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय के अनुसार हिमाचल, सिक्किम और केरल 100 प्रतिशत खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। लेकिन, नेशनल (राष्ट्रीय) सैंपल (नमूना) सर्वे (सर्वेक्षण) के अनुसार 60 फीसदी नवनिर्मित शौचलाओं में पानी नहीं है। किसी तीसरे पक्ष से सत्यापन न होने के कारण विश्वबैंक ने 1.5 अरब डॉलर (अमेरिका व अन्य राज्यों की प्रचलित मुद्रा) का ऋण रोक लिया है। ईज (होना) ऑफ (का) डूइंग (काम) बिजनेस (व्यापार) के लिए 10 हजार करोड़ रुपए दिए गए, लेकिन नया व्यवसाय शुरू करने पर विश्व बैंक के सूचकांक में भारत 2014 में 134वें स्थान पर था। अब 130वें पर है। 189 देशों में काफी पीछे है। बेटी बचाओे, बेटी पढ़ाओं योजना जनवरी, 2015 में शुरू हुई। इसके तहत आवंटित धन में से करीब 90 प्रतिशत का प्रयोग नहीं हुआ है। 12000 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन का लक्ष्य था, लेकिन हासिल हुआ केवल 2250 मेगावाट। सरकारी बैंको के एनपीए (नॉन परफार्मिंग असेट्‌स) (संपत्ति) (गैर व्यवसायी) में 2016 तक दो वर्षों में 135 प्रतिषत बढ़ोत्तरी हुई है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 2015 - 16 में 18.3 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, इनमें से मात्र 12.4 प्रतिशत को नौकरी मिल सकी।

चुनावनी घोषणापत्र 2014- वादे हैं वादों का क्या?

  • 100 नए शहर: यह बड़ा विचार एक वर्ष बाद 100 स्मार्टसिटी (आकर्षक शहर) के रूप में सामने आया। 7060 करोड़ दिए। मात्र 22 शहरों में काम शुरू हुआ।
  • महिला आरक्षण बिल- यह बिल 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। 15वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही यह लैप्स (पतन) हो गया। सरकार ने कुछ नहीं किया।
  • धारा 370 खत्म करना-इस संबंध में कभी-कभी किसी मंत्री के बयान के अलावा कुछ भी ठोस नहीं किया। कश्मीर की वर्तमान परिस्थिति में इस दिशा में कुछ भी करने से हालात बिगड़ने का डर।
  • प्रभावशाली लोकपाल-नियुक्ति नहीं की। लोकपाल बिल में संशोधन की बात। सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने कहा-बिना संशोधन के ही करें लोकपाल नियुक्ति। लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं।

किरकिरी-निम्न मुद्दों पर हुई किरकिरी

  • बिहार और दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार।
  • स्मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्रालय से हटाना।
  • मोदी की लाहौर यात्रा के बाद 2016 को पठानकोट हमला।
  • उत्तराखंड- मार्च, 2016 में राष्ट्रपति शासन के फैसले को उत्तराखंड हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने रद्द किया।
  • विजय माल्या का ब्रिटेन भागना

सेना का फैसला: - घाटी में हिंसा और पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन इस समय देश के ज्वलंत मुद्दों में है। भारतीय सेना के पूर्व कमांडर (सेनापति) इन (भीतर) चीफ (मुखिया) लेफ्टिनेंट जनरल अरुण कुमार साहनी ने इन मुद्दों सहित अन्य मामलों पर पत्रिका के सवालों पर अपनी बेबाक राय रखी।

1. प्रश्न 2014 से पहले के मुकाबले क्या ज्यादा तैयार हैं हम?

उत्तर- 2014 के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि राजनीतिक नेतृत्व ने मजबूत इरादा दिखाया है। पिछले रक्षामंत्री पर्रिकर ने हथियार खरीद नीति को काफी हद तक बदला। मेक (बनाना) इन (भीतर) इंडिया (भारत) को अहमियत दी। बड़ी रक्षा मंत्री परियोजनाओं को डिफेंस (रक्षा) एक्वीजिशन (अर्जन) काउंसिल (परिषद) से तेजी से क्लीयरेंस (निकासी) मिली। अब तक लगभग 1.27 लाख करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। सेना की जरूरतों को सूचीबद्ध कर दिया। वहीं कश्मीर हो या सीमा सेनाध्यक्ष से लेकर जमीन पर काम करने वाले कमांडरों को छूट दी गई।

2. प्रश्न-क्या जमीन पर इसका अंतर दिखाई दे रहा है?

उत्तर -कश्मीर समस्या ऐसी नहीं कि मोदी साहब ने बटन दबाया तो उसका हल हो जाएगा। बड़ी बात यह है कि सरकार की नीति में अस्थिरता नहीं है। उसने जो स्टैंड लिया उस पर टिकी है। मेजर गोगोई का मामला ही लें। सरकार और सेना ने इस मामले में जो स्टैंड लिया उस पर टिके है। मेजर (प्रमुख) पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जो हुआ थोड़ा गलत तरीके से जरूर हुआ, लेकिन उस समय की परिस्थितियों में मेजर ने कई लोगों की जान बचाई। हुर्रियत नेताओं के अवैध लेन-देन पर अंगुली उठनी चाहिए थी, संभवत: पहली बार उठाई जा रही है।

3. प्रश्न क्या पत्थरबाजों पर सरकार की नीति काम कर रही है?

उत्तर -कश्मीर समस्या के समाधान में नौजवान के दृष्टिकोण को शामिल करना जरूरी है। 18 से 30 वर्ष के कश्मीरी युवाओं को दिशा देने की जरूरत है। उनकी सोच में एक खीज भर गई है, उन्हें लगता है कि वर्षों से स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। पुराना तरीका नहीं चलेगा। लेकिन सरकार अब इस पर काम कर रही है।

4. प्रश्न बचे दो वर्षों से क्या आशा है?

5. उत्तर -मैं आशावादी हूं, लेकिन मेरा मानना है समझदार और जीवंत विपक्ष होना जरूरी है। लोकतंत्र के लिए यह बेहद जरूरी है।

महंगाई व रोजगार: -मोदी सरकार को सत्ता में आए करीब 1100 दिन हो गए हैं। इस दौरान अर्थव्यवस्था 2013 - 14 के मुकाबले डेढ़ गुना बड़ी हो गई है। इस सरकार के कार्यकाल में खुदरा महंगाई की दर कागजों पर 4.9 प्रतिशत घटी है, लेकिन इसका सीधा लाभ आम लोगों को कम मिला है।

इन तीन वर्षों में कच्चे तेल के दामों में बढोत्तरी नहीं हुई। हमारी जरूरत का करीब 80 फीसदी कच्चे तेल के दामों का असर यह रहा कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दामों में बहुत परिवर्तन नहीं आया। जो कुछ बदलाव इनके दामों में हुआ वह उतना नहीं था कि महंगाई को बहुत अधिक बढ़ा देता है। इस तरह देश की मुद्रास्फीति पर अंकुश लगा। इस तरह महंगाई काबू में रहीं।

इसी तरह अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़े बता रहे है कि नए रोजगार सृजन के हालात बहुत नाजुक है। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं। रोजगार रहित विकास को आर्थिक विकास कहना किसी भी स्थिति में ठीक नहीं कहा जा सकता। 1.77 करोड़ लोग बेरोजगार थे 2016 में इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) लेबर (श्रम) ऑर्गेनाइजेशन (संगठन) के मुताबिक जो 2018 में 1.80 करोड़ हो जाएंगे।

कांग्रेस मुक्त भारत: -भाजपा की ओर से अकसर, काग्रेंस मुक्त भारत का जुमला इस्तेमाल होता है लेकिन, हकीकत यह है हक कांग्रेस की सबसे अधिक जरूरत उसे ही है। उसे पूर्ववर्ती सरकार से तुलना के लिए कांग्रेस की बहुत जरूरत हैं। और, आगे भी उसे कांग्रेस की जरूरत होगी। कुल मिलाकर इस सरकार की जुमलेबाजी या फिर कहे कि मुद्दों की मार्केटिंग (बिक्री/विपण) बहुत बढ़िया कही जा सकती है। मोटे तौर पर मोदी की सरकार वादों को जमीनी हकीकत में उतार पाने में तो अब भी नाकाम ही हैं।

मोदी सरकार के कार्यकाल में विदेश में नौकरियों पर संकट बढ़ा है। अमरीका की एच1 बी वीजा पर सख्ती इसका उदाहरण हैं।

नरेश चंद्रा, विदेश नीति विशेषज्ञ, यूएस में भारत के पूर्व राजदूत

विदेश नीति चुनौती: - सत्ता संभालते समय शपथ ग्रहण के दौरान मोदी जी ने पाक, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल जैसे देशों को न्यौता देकर पड़ोंसियों से बेहतर संबंध बनाने की अपनी सरकार की विदेश नीति की मंशा साफ कर दी थी। मगर, मोदी सरकार के लिए तीन वर्ष बाद भी यह बड़ी चुनौती रही है। पाक व चीन से हमारे संबंध तो खराब हैं ही, साथ में नेपाल और श्रीलंका को हम पूरी तरह साध नहीं पाए। हालांकि बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते कुछ बेहतर हैं और वह आतंकवाद से निपटने में हमारा सहयोग भी कर रहा है। पठानकोट और उरी हमले के बाद पाकिस्तान से संबंध और बिगड़े हैं। तीन साल में सरकार पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने में पूरी तरह से विफल रही है।

पड़ोसी देशों से भले ही भारत के संबंध बेहतर नहीं हो पाए हों लेकिन इजरायल, वियतनाम आदि देशों से हमारे संपर्क बढ़े हैं। अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रलिया जैसे देशों से संबंधों में तेजी आई है। अमरीका में ओबामा के बाद ट्रंप प्रशासन भी पाक के आतंकी संगठनों पर कार्रवाई नहीं करने से नाराज है व पाक को देने वाली मदद में भी कटौती की है। ये बाते भारत के पक्ष में हैं।

क्षेत्र: -निम्न है

कृषि क्षेत्र-कृषि क्षेत्र में सरकार का प्रदर्शन सर्वथा निराशाजनक रहा। गेहूं, धान तथा अन्य कृषि उत्पादन में लगातार कमी आई है। गेहूं व धान के मूल्य भी कम ही रहे हैं।

सेमपाल शास्त्री, पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री

मोदी जी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कृषि क्षेत्र के लिए दो बड़े वादे किए थे। पहला, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना जिसके अनुसार कृषि लागत और मूल्य आयोग जो खेती की लागत का आकलन करता है वह कृषि जिंसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करे। दूसरा अगले 5 - 6 वर्ष में कृषकों की आय दो गुना करने के प्रयास करना। इन पर अभी तक कोई भी सार्थक कदम देखने को नहीं मिला। कृषि विपणन में आने वाली रुकावटों को दूर कर कृषकों को उनके उत्पादों का वाजिब दाम मिले और उपभोक्ता को जो दाम देना पड़ रहा है उसका अंतर कम हो। यह भी अभी तक स्वप्न ही हैं। फसल बीमा योजना भी किसानों के लिए लाभप्रद न होकर घाटे का सौदा ही साबित हो रही है। प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से फसल नष्ट होने पर इन बीमा कंपनियों (संघो) के जटिल नियम-कायदों की वजह से किसानों को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती।

दालों के न्यनूतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने का वादा किया गया था जिससे किसान दालों को अधिक उत्पादन करने को प्रोत्साहित हो। उसमें कुछ बढ़ोत्तरी भी की गई। पर पिछली दो फसलों में दालो का इतना अधिक उत्पादन हुआ कि किसान को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाया। यह मात्र घोषणा बनकर रह गई। तिलहन में भी किसान सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने में असमर्थ रहे। दूसरी ओर कृषि की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

सामाजिक क्षेत्र-1.5 करोड़ बैक खाते खोले गए प्रधानमंत्री जन-धन योजना के पहले दिन ही। प्रत्येक परिवार में एक खाते का लक्ष्य था।

मोदी सरकार अच्छे दिन के वादों के साथ सत्ता में आई। पिछली सरकार के नरेगा एवं खाद्य सुरक्षा जैसे कानून को कांग्रेस की विफलता का स्मारक तक बताया। मोदी सरकार ने सामाजिक क्षेत्र से हाथ खींचने का भरपूर प्रयास किया। चाहे नरेगा हो या राशन, शिक्षा हो या स्वास्थ्य, सभी कार्यक्रमों का बजट काटकर पैसा बचाने का प्रयास किया। सरकार चाहती है कि जनता के पास कोई हम नहीं रहे। इसलिए जो आज सरकारी हैं उसका जहां तक संभव हो निजीकरण किया जाए। यदि कुछ देना भी पड़े तो कुछ चिन्हित और सीमित संख्या में गरीबों को पैसा दे दिया जाए ताकि गरीब व्यक्ति को भी बाजार जाकर आवश्यक सेवाएं प्राप्त करनी पड़े और फायदा निजी कंपनियों (संघों) को मिले। इसलिए कैश (नकद) ट्रांसफर (स्थानातंरण) के लिए जन-धन खाते, आधार और मोबाइल हर नागरिक के लिए अनिवार्य कर दिया गया। ये सभी निर्णय सोची-समझी नीति के तहत किये जा रहे हे। योजना आयोग को समाप्त कर उसकी जगह पर बनाए गए नीति आयोग ने अपनी पिछले माह हुई बैठक में 3 साल की कार्ययोजना पेश की जिसमें उसने स्पष्ट किया कि ’आधार की मदद से हर संभव सरकारी सेवा को निजी क्षेत्र में और पब्लिक (जनता) -प्राइवेट (निजी) पार्टनरशिप (साझेदारी) में बदल देना चाहिए। बेशक तकनीक आधारित कंपनियों को फायदा हुआ लेकिन इसने गरीबों को वंचित कर डाला। सामाजिक स्तर बिगड़ता जा रहा है और लोगों को पूछने पर ही जवाब मिलेगा कि 3 साल में किस हद तक किसके अच्छे दिन आए? इन कंपनियों के या फिर आम जनता के?

आतंरिक सुरक्षा क्षेत्र-

हमारें सुरक्षा बलों को चुनौती देते हुए माओवादी हिंसक घटनाओं को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं। साफ है कि माओवादियों ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में समानांतर सरकार चला रखी है।

एम. एल. कुमावत बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक, माओवाद प्रभावित इलाकों में तैनात रहे

विगत तीन साल के दौरान यदि माओवाद के खात्मे की दिशांं में मोदी सरकार के प्रयासों की बात करें तो यह तो तय है कि माओवादियों की हिंसक गतिविधियों पर थोड़ी लगाम लगी है। लेकिन इस दौरान सुरक्षा बलों को ही चुनौती देने वाली जो घटनाएं हुईं उससे कोई यह उम्मीद शायद ही करे कि देश में माओवाद का जल्दी खात्मा हो पाएगा। यह भी एक तथ्य है कि देश में माओवाद को पनपे पचास बरस पूरे हो रहे हैं। कभी आंध्रपदेश में माओवादियों का आतंक था लेकिन जिस तरह से ’ग्रे हाउंड्‌स’ के नाम से विशेष फोर्स (बल) गठित कर माओवादियों का सफाया किया गया वैसा ही मॉडल (आदर्श) अब छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड व महाराष्ट्र के माओवादी प्रभावित इलाकों में अपनाने की जरूरत है। अभी माओवाद प्रभावित इलाकों में स्थानीय पुलिस के अलावा केंन्द्रीय सुरक्षा बलों की 112 बटालियनें यानी एक लाख 20 हजार जवान तैनात हैं। यह किसी छोटे देश की आर्मी (सेना) के बराबर है। मोटे तौर पर माओवादी हिंसक गतिविधियों को अंजाम दो कारणों से देते हैं। पहला, वे अपनी मौजूदगी का अहसास कराना चाहते है और दूसरा क्षेत्र की विपुल प्राकृतिक संपदा पर इनकी नजर है। यदि इस समस्या को केवल केन्द्र के भरोसे छोड़ा जाएगा तो माओवाद का खात्मा नहीं लगता। जरूरत सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार देने और प्रभावी समन्वय की है। चिंता की बात यह भी है कि ’स्मार्ट (आकर्षक) पुलिसिंग’ की बाते कागजों में ही नजर आती हैं।

जम्मू-कश्मीर: - कश्मीरियों को यह एहसास दिलाया जाए कि भारत केवल कश्मीर की जमीन को नहीं, कश्मीरी जनता को भारतीय समाज का अभिन्न अंग मानता है।

सैयद अतहर हुसैन देहलवी

मोदी जी प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी खास तौर पर शरीक हुए। अनुमान लगाया गया कि ये लोग अतीत को भूलकर दोस्ती की नई मिसाल साबित करेंगे। अफसोस बहुत जल्द ये सपना टूट गया। मोदी ने पाक से लगातार दोस्ती की कोशिशे जारी रखीं मगर बदले में पाकिस्तान ने सीमा पर तनाव पैदा किया, घुसपैठ कराई और भाड़े के आंतकियों के सहारे कश्मीर में अशांति पैदा की। यही नहीं पाकिस्तान के वफादार पियादों यानी अलगाववादियों ने कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी की मौत को शहादत का रुतबा देकर जिहाद और पत्थरबाजी का नया दौर शुरू किया। तमाम वैचारिक सिद्धांतों को किनारे कर पीडीपी-बीजेपी सरकार का गठन भारतीय राजनीतिक का एक नवीन अध्यांय था जिस से उम्मीदें और बढ़ीं। लेकिन राज्य सरकार अभी तक कोई भी ऐस फैसला लेती नहीं दिखी, जिसे देख कहा जा सके कि ये सबका साथ सबके विकास से बंधी हुई सरकार है। वर्तमान स्थितियों में गठबंधन सरकार से बहुत ज्यादा उम्मीद रखना बेकार है। हमें यह बात याद रखनी होगी कि गत 70 वर्षों से हम कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से लड़ते आ रहे न कि कश्मीरियों से।

पाकिस्तान/आतंकवाद पर सख्त रवैये वाले माने गए मोदी कश्मीर पर ठंडे आंके गए। 37 प्रतिशत लोग ही मानते हैं कि मोदी सख्त कदम उठा रहे हैं। बाकी के 63 प्रतिशत को वे सख्त नहीं दिखते भाजपा शासित राज्याेे में 35 प्रतिशत लोग मान रहे हैं कि वे कश्मीर पर केवल बाते कर रहे हैं, जबकि गैरभाजपा शासित राज्यों में 40 प्रतिशत।

सितंबर 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ के बाद मोदी सरकार ने राहत के जो काम किए थे उससे माहौल बदला था और कश्मीरी जनता के बीच आतंक और अलगाव के खिलाफ मजबूत सोच उभर रही थी। यही कारण था कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता खासकर कश्मीर घाटी के मतदाताओं ने भारी प्रतिशत से मत डालकर दुनिया को यह बता दिया कि वे भारतीय प्रजातंत्र के सच्चे सिपाही हैं।

मोदी जी के अन्य बड़े कार्य: -निम्न हैं-

बड़े फैसले, कड़े फैसले-

  • सालो बाद बेनामी प्रॉपर्टी (संपत्ति) पर कड़ा कानून बना।
  • सर्जिकल (शल्यक्रिया) स्ट्राइक (हड़ताल) से आतंकवाद को मुँहतोड़ जवाब
  • दशको से लंबित ओरआरओपी की मांँग को पूरा किया
  • सालो बाद जीएसटी पर सर्वसम्मति बनाई, देश को अब मिलेगी एक समान टैक्स (कर) व्यवस्था

खुशहाल परिवार सुविधाएं अपार-

  • 28 करोड़ गरीब बैंक से जुड़े।
  • मुद्रा योजना के तहत गरीबों को 7.5 करोड़ लोन (ऋण) दिए गए, कुला लोन राशि 3.15 लाख करोड़ रुपये है।
  • 2 करोड़ से भी अधिक गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन (मिलाने की क्रिया) ।
  • स्टेट (राज्य) की कीमत में 80 तक की कटौती।
  • जन औषधि केंद्र से दवाईयाँ सस्ती हुईं।
  • हर गरीब को पक्की छत देने का संकल्प।

देश की तरक्की ईमानदारी पक्की-

  • 3 सालों में भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं।
  • कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े कदम।
  • कोयला, स्पेक्ट्रम (विस्तार/विविध वर्ण श्रेणी), एफ. एम. नीलामियों और पर्यावरण के मामलों में पूर्ण पादर्शिता।
  • ग्रेड (स्नातक) 3 और 4 की नौकरियों में साक्षात्कार खत्म।

सबकी सुरक्षा सबका ख्याल-

  • विदेशों में फँसे हजारों भारतीयों को सुरक्षित घर पहुँचाया गया।
  • पहली बार सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रेल से करोड़ों लीटर पानी पहुँचाया गया।
  • दिव्यांगजनों को अवसरों के माध्यम से नया हौसला मिला।
  • आदिवासियों को अपनी जमींन का हक मिल रहा है।
  • जन-जन का साथ बढ़ता विश्वास।
  • जन-भागीदारी से ’स्वच्छ भारत मिशन’ (दूतमंडल) एक जन आंदोलन बना।
  • 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने एलपीजी सब्सिडी (सरकार द्वारा आर्थिक सहायता) छोड़ी
  • कैशलेस (नकदीहीन) ट्रांजेक्शन (व्यापार/कार्य) को अपार जन-समर्थन मिला और 2 करोड़ से अधिक लोगों ने ’भीम’ ऐप डाउनलोड किया
  • वी. आई. पी. संस्कृति को खत्म किया।

देश विदेश में बढ़ता मान भारत की नई पहचान-

  • भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था हैं।
  • ’मेक इन इंडिया’ को पूरे विश्व में पहचान मिल रही है।
  • पूरा विश्व उत्साह से योग दिवस मना रहा है।
  • अंतरिक्ष में भारत को अभूतपूर्व सफलता मिल रही है।

भारत का कल उज्जवल-

  • ग्रामीण सड़कों को अभूतपूर्व तेजी से बनाया जा रहा है।
  • भारतमाला और सेतु भारतम प्रोजेक्ट (परियोजना) से देश का कोना-कोना जुड़ रहा है।
  • स्मार्ट सिटी (आकर्षक शहर) से बेहतर कल का निर्माण हो रहा है।
  • देश-भर की पंचायतों को ब्रॉडबैंड (अनेक आवृत्तियों का उपयोग करने वाले संकेत) से तेजी से जोड़ा जा रहा है।
  • जलमार्गो को भी ट्रांसपोर्ट (यातायात) के लिए विकसित किया जा रहा है
  • रेल नेटवर्कों (जाल पर कार्य) का विस्तार पहले से तेज हो रहा है।
  • 6 नए शहरों को मेट्रो (भूमिगत रेल) की सुविधा मिलेगी।

सशक्त नारी सशक्त भारत-

  • 2 करोड़ से अधिक महिलाओं को गैस कनेक्शन।
  • मातृत्व अवकाश 12 हफ्तों से बढ़ाकर 26 हफ्ते।
  • गर्भावस्था में महिलाओं के पोषण के लिए 6000 रुपए की मदद।
  • मुद्रा लोन लाभार्थियों में 70 प्रतिशत महिलाएं।

नये भारत की शक्ति युवा शक्ति-

  • स्किल इंडिया (कौशल भारत) के माध्यम से 1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा।
  • 109 नये केन्द्रीय विद्यालय, 62 नवोदय विद्यालय, 7 नये आई. आई. एम. , 6 नये आई. आई. टी. बनाए जा रहे है।
  • 1 करोड़ एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति सीधी पहुंची।
  • स्टार्ट अप (उद्धाटन) इंडिया (भारत) के द्वारा युवाओं को नए अवसर।
  • खेत खलिहान में आ रही नई जान।
  • मंडियों को सीधे किसानों से जोड़ा जा रहा है।
  • ई-एनएएम से किसानों को फसल का सही दाम
  • किसानों को प्रचुर मात्रा में नींम-कोटेड यूरिया कम प्रीमियम पर किसानों को पूरा फसल बीमा।
  • इस साल किसानों द्वारा बंपर पैदावार।

विकास का आधार नीतियों में सुधार-

  • पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था।
  • ’ईज (होना) ऑफ (का) डूइंग (काम) कारोबार’ में बड़ा सुधार।
  • इन्साल्वेंसी (दिवालियापन) और बैंकरप्सी (दिवालियापन) कानून के माध्यम से बड़ा सुधार।
  • एफ. डी. आई. कानूनों में बड़ा उदारीकरण।

नरेन्द्र मोदी के विषय में: -युवावस्था में घर का त्याग करने वाले पीएम मोदी के दोस्त भी कम हैं। इसके अलावा उनका परिवार से मिलना जुलना भी बहुत कम होता है। लेकिन अपनी जुझारू टीम (दल) के दम पर प्रधानमंत्री मोदी आज तक ब्रांड (चिन्ह) बन गए हैं।

स्वामी दयानंद सरस्वती- मोदी जी का शुरू से आध्यात्मक से गहरा नाता रहा है। ऋषिकेश में अद्धैत वेदांत की शिक्षा देने वाले आश्रम के संस्थापक। मोदी युवावस्था में घर छोड़ने के बाद यहां रहे। सितंबर 2015 में इनका देहातं हो गया। इन्हें मरणोपरांत पदम भूषण से नवाजा गया।

संगठन के करीबी: -निम्न हैं-

  • अमीत शाह- मोदी के सबसे करीबी अमित शाह को चुनावी रणनीति बनाने में बादशाहत है। पिछले 25 साल से मोदी के साथ है। वे मोदी जी के दाहिने हाथ माने-जाते हैं। मोदी ने ही उन्हें पार्टी (राजनीतिक दल) अध्यक्ष बनवाया।
  • राममाधव- जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी की नीतियों को लागू करवाने में भूमिका निभाते हैं। राममाधव कश्मीर समस्या पर काम कर रहे हैं।
  • मनोहर पर्रिकर-मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का खुला समर्थन किया। मोदी भी पर्रिकर की सादगी और शिक्षा के कायल है। पर्रिकर मोदी के कहने पर रक्षा मंत्री पद छोड़ गोवा गए।

संघ में सहयोगी: -

  • सुरेश सोनी- सह सरकार्यवाह, गोवा अधिवेशन में मोदी को पीएम का उम्मीदवार घोषित करवाने में बड़ी भूमिका।
  • दत्तात्रेय होसबोले- सह सरकार्यवाह, मोदी के एजेंडे (कार्यसूची) को संघ में मंजूरी दिलाने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

करीबी दोस्त: -

काकूभाई- अहमदाबाद में चार्टर्ड (अधिकार-पत्र) अकाउंंटेंट (हिसाब), मोदी के बेहद करीबी मित्रों में शामिल। राजनीति से कोई वास्ता नहीं।

महेश मेहता- गुजराती मूल के अमरीकी कारोबारी, प्रचारक के समय से गहरी दोस्ती। मोदी यूएस में इनके यहां रुकते थे।

टीम (दल) मोदी: -

  • अजित डोभाल- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार देश की बाह्य सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • नृपेंद्र मिश्र-प्रमुख सचिव, मोदी के फैसलों को कियान्वित करने की जिम्मेदारी इनके पास।
  • पीके मिश्रा-अतिरिक्ति प्रमुख सचिव, मोदी के फैसलों को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी इनके पास भी।
  • पीके सिन्हा- कैबिनेट (मंत्रिमंडल) सचिव, सरकार के सभी फैसलों को सुचारू रूप से लागू करने का काम करते हैं।
  • अमिताभ कांत- सीईओ नीति आयोग, नई नीतियों का निर्माण, राज्यों से समत्वय की भी जिम्मेदारी हैं।
  • शक्तिकांत दास- आर्थिक मामलात सचिव, डिमॉनेटाइजेशन में प्रमुख भूमिका निभाई।
  • हंसमुख अढिया- राजस्व सचिव, जीएसटी काउंसिल (परिषद) के सचिव भी बनाए गए।

समीक्षा: -संसद के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार के तीन साल के कामकाज पर भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने है। सरकार जहां तीन साल में खूब काम करने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि जनता की मर्जी के काम करना तो दूर की बात अभी तो मंत्रियों को ही अपनी मर्जी से फैसले करने की छूट नहीं है। मोदी सरकार अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लेगी। जहां मोदी के सबसे भरोसेमंद अरुण जेटली और जीएसटी लागू कराने के बाद सबसे ज्यादा जलवा हैं वहीं कश्मीर और नक्सलियों को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर दबाव है।

आइए जानते हैं मोदी के टॉप (उच्च) 10 मंत्रियों के किन कार्यो को पॉजिटव कहा गया और किन्हें निगेटिव।

1. अरूण जेटली-वित्त के साथ रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले मोदी के करीबी रणनीतिकारों में शामिल जेटली देश की आर्थिक हालत दुरूस्त करने में जुटे रहे।

पॉजिटिव (वास्तविक) -मुद्रास्फीति में गिरावट को साधने में सफल रहे। जीएसटी को पास कराने में सफलता।

निगेटिव (नकरात्मक) –नोटबंदी के बाद नगदी की किल्लत में सुधारने में विफल रहने के कारण आलोचना।

2. राजनाथ सिहं-पीएमओ के दखल और एनएसए अजीत डोभाल के हस्तक्षेप के बाद भी विवादों से दूर मोदी के एजेंडे (कार्यसूची) को लागू करने में जुटे हैं।

पॉजिटव (वास्तविक) - अफसरों को फैसले लेने की छूट। नागरिक शस्त्र लाइसेंसो (आज्ञा) को दर्ज करने के लिए डिजिटल (अंकसंबंधी) डाटा (आधार सामग्री) प्रबंधन प्रणाली।

निगेटिव (नकरात्मक) – पुलिस आधुनिकरण योजना को लागू करवाने में असफल। कश्मीर व नक्सली हिंसा रोकने में असफलता।

3. वेंकैया नायुडू-वेंकैया मोदी के दो बड़े सपनों के वाहक हैं। स्मार्ट सिटी (आकर्षक शहर) का निर्माण और 2022 तक शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराना।

पॉजिटव (वास्तविक) -मोदी के भरोसेमंद। रियल एस्टेट कानून पास कराने में सफलता। 600 शहरों की स्मार्ट सिटी योजना को मंजूरी।

निगेटिव (नकरात्मक) - हेरिटेज सिटी के विकास, स्मार्ट सिटी मिशन (आकर्षक शहर दूतमंडल) और अन्य योजनाओं के लिए फंड (धन) का व्यवहारिक ढांचा नहीं।

4. सुरेश प्रभु-रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने छोटे छोटे सियासी फायदों के लिए रेलवे को दुधारू गाय की तरह दोहने पर लगाम में सफलता पाई।

पॉजिटिव (वास्तविक) -परियोजनाओं को मंजूरी के लिए औसत 24 माह लगते थे जिसे घटाकर 4 माह पर लाया। रेलेव के ठेको में पारदर्शिता लाना।

निगेटिव (नकरात्मक) –रेल दुर्घटना रोकने में नाकाम रहे हैं। टिकटों के महंगे दामों के बाद भी सुविधाओं में अपेक्षानुसार सुधार नहीं।

5. धर्मेन्द्र प्रधान- बिचौलिए के लिए पहचाने जाने वाले पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय को बिचौलिए से मुक्त करने के साथ पारदर्शिता लाने का श्रेय।

पॉजिटिव (वास्तविक) -उज्जवला योजना के सफल क्रियांवयन के साथ पेट्रोल और गैस एजेसियों के आवंटन में पारदर्शिता।

निगेटिव (नकरात्मक) --तेल और गैस की खोज में बड़ा निवेश आकर्षित करने में विफल। तेल के मूल्य को बाजार के हवाले करने के कारण आलोचना।

6. नितिन गडकरी-मोदी कैबिनेट (मंत्रिमंडल) के एकमात्र मंत्री जो अपने मंत्रालय के फैसले खुद लेते हैं और पीएमओं की हरी झंडी का इंतजार नहीं करते।

पॉजिटिव (वास्तविक) - सड़क परिवहन विधेयक पेश किया। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत रिकॉर्ड (प्रमाण) सड़क निर्माण।

निगेटिव (नकरात्मक) –उद्योगपतियों और करीबियों को ठेका देने का आरोप। प्रमुख राजमार्गो पर काम अटका।

7. उमा भारती-गंगा के लिए प्रेम के लिए पहचाने जाने वाली उमा भारती का मंत्रालय गंगा सफाई पर फिसड्‌डी रहा है।

पॉजिटिव (वास्तविक) -लंबित 297 परियोजनाओं में से 160 को पूरी कराने में सफलता। स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण।

िनगेटिव (नकरात्मक) –नदी जोड़ो परियोजना में भी खास प्रगति नहीं। चेतावनी के बाद भी सूखे से निपटने की कार्ययोजना तैयार नहीं।

8. सुषमा स्वराज-विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खराब स्वास्थ्य के बाद भी लगातार विदेशी मामलों में मजबूती से डटी रही।

पॉजिटिव (वास्तविक) -विदेशों में फंसे भारतीयों को मदद उपलब्ध कराने के कारण सुर्खियों में। पासपोर्ट (आज्ञापत्र) को आसान बनाने में भूमिका।

निगेटिव (नकरात्मक) –ललित मोदी को वीजा (अन्य देशों में आने, जाने या उसमें से गुजरने की शासकीय अनुमति) में मदद पर छवि पर असर। खराब स्वास्थ्य के कारण मंत्रालय बदलने की चर्चा।

9. प्रकाश जावड़ेकर-जावड़ेकर के जरिए मोदी सबको सस्ती, सुलभ शिक्षा दिलवाने की कोशिश में हें लेकिन अड़चने हजार।

पॉजिटिव (वास्तविक) -97 नए केन्द्रीय और 62 नए नवोदय विद्यालयों को अनुमति दी है। विवि रैंकिंग प्रणाली की शुरुआत।

निगेटिव (नकरात्मक) –केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कई कुलपतियों के साथ सरकार का विवाद। टीचर एज्यूकेशन (अध्यापक शिक्षा) रिफॉर्म (सुधार) पर बड़ा काम नहीं।

10. पीयूष गोयल-मोदी के सबसे ज्यादा ऊर्जावान मंत्री पर हर घर में बिजली पहुंचाने की महत्वकांक्षी योजना का भार है।

पॉजिटिव (वास्तविक) -देश में बिजली की कमी 4.2 से घटाकर 2.1 फीसदी तक लाने का श्रेय। पारदर्शी बोली से कोयले का आयात घटाने में सफलता।

निगेटिव (नकरात्मक) -गैसा आधारित बिजली परियोजनाओं में खास प्रगति नहीं। सस्ती बिजली अभी दूर की कौड़ी। वितरण कंपनियों (संघों) की खस्ता हालत।

इन मंत्रियों का प्रदर्शन खराब: -अनंत गीते, भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम मंत्री, अशोक गणपति राजू, नागरिक उडयन मंत्री, कलराज मिश्रा, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग मंत्री, रामदास आठवलें, सामाजिक न्याय मंत्री। साध्वी निरंजन ज्योति, फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय

पीएम आवाज योजना: - 9 जून 2014 को प्रधानमंत्री ने प्रधनमंत्री आवास योजना की घोषणा की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बताया गया था, 2022 तक देश के हर नागरिक के पास खुद का घर होगा।

चार फैक्टर्स (कारक) -सरकार के चार फैक्टर्स (कारक) रियल एस्टेट पर पॉजीटिव (वास्तविक) असर डाल रहे हैं। पहला अफोर्डेबल (वहन करने योग्य) हाउसिंग (घर) का आकार बढ़ाना, दूसरा पूंजी और ब्याज पर सब्सिडी (सरकार द्वारा आर्थिक सहायता), तीसरा गृह ऋण ब्याज दरों में कमी और चौथ रेरा लागू किया जाना।

विजय मीरचंदानी, चेयरमैन, क्रेडाई एमपी

शेयर मार्केट (बाजार): - भारत की अर्थव्यवस्था का बेरोमीटर कहे जाने वाले सेंसेक्स (शेयर बाजार) में पिछले तीन वर्षो में काफी उतार-चढ़ाव देख गया। बीएसई सेंसेक्स पिछले तीन वर्षो में 6 हजार से अधिक अंको की उछाल के साथ 30750 के रिकॉर्ड (प्रमाण) स्तर पर है। 26 मई 2014 को बीएसई सेंसेक्स 24716.88 अंको पर बंद हुआ था, जबकि 26 मई 2017 को यह 30750.03 अंको पर बंद हुआ है। तीन वर्षो में शेयर बाजारों ने भारी उतार-चढ़ाव का सामना भी किया। इस दौराने बीएसई सेंसेक्स 26 फरवरी 2016 को निचले स्तर 23002 अंको पर भी रहा।

बैंकिंग (महाजन) रिफॉर्म (सुधार), जीएसटी पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) और विदेशी निवेश में स्पष्टीकरण लाए जाने के कारण वर्तमान में 300 बिलियन (दस अरब) डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है। साथ ही घरेलू निवेशकों की परिसपंत्ति भी 18 लाख करोड़ पहुंच चुकी है। यह तरह के फैक्टर्स है, जो बाजारों में उछाल का कारण बने हुए हैं। आगे भी बाजारों में मजबूती रहेगी।

आरआर बाल्दी, डायरेक्टर, इंडिया (निर्देशक, भारत) निवेश

बुलियन बाजार: - सरकार सोना सॉवरेन (प्रभु) बांड (बंधन) और सोना जमा योजना लेकर आई, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं रहा। सॉवरेन बांड में केवल निवेशक ही रुचि ले रहे हैं। 32.63 बिलियन डॉलर का कुल निर्यात हुआ 2015 - 16 में। 35.55 बिलियन डॉलर का कुल निर्यात हुआ 2016 - 17 में।

मौजूदा सरकार हमसे पूछकर ही पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) बना रही है। इससे भविष्य बेहतर होगा। वर्तमान पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) उद्योग हित में है। जेम्स एंड (और) ज्वैलरी के लिए अलग जीएसटी पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) प्रस्तावित है। सरकार बोल्ड (साहसी) निर्णय लेती है।

सुमित आनंद, जैमस एंड (और) ज्वेलरी (गहने) फेडरेशन (संधि)

जीएसटी: - में कर दरे 5, 12, 18, और 28 प्रतिशत रखी गई हैं। साथ ही कर फ्री (नि: शुल्क) आइटम्स (वस्तु) की सूची जारी कर दी गई है। प्रस्तावति कर स्लैब (तख्ता) से देशभर में वस्तु और सेवाएं सस्ती होंगी। अलग-अलग कर प्रणालियों से भी उद्योगों और संस्थानों को मुक्ति मिलेगी। इससे देश मेें करोबार आसान होगा।

जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू किया जाना प्रस्तावित है। इसे मोदी सरकार के बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है। इसे लेकर जहां एक ओर सरकारी मशीनरी तैयारियों में जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर उद्योग भी इसे लेकर पूरी तरह से तैयार है। जीएसटी में जिस तरह से कर प्रणाली रखी गई, उससे उद्योग खुश है। उद्योगों का मानना है कि इस कर प्रणाली से वस्तुओ और सेवाओं के सस्ते होने के साथ ही जटिल कर प्रणाली से मुक्ति मिल जाएगी। यह उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों के लिए भी लाभदायक रहेगा।

16 वर्षों तक लगातार जीएसअी पर काम करने के बाद आखिरकार दिसंबर 2014 में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने संसद में जीएसटी बिल प्रस्तुत किया। इसके बाद फरवरी 2015 में जीएसटी लागू करने और इसकी समयावधि को बजट भाषण में सम्मिलित किया गया। 2015 में संविधान संशोधन बिल प्रस्तुत किया गया। इसके बाद लगातार बदलावों के साथ 29 मार्च 2017 को लोकसभा ने जीएसटी बिल पास कर दिया। गया।

जीएसटी लागू होने के बाद देश में न केवल वस्तु एवं सेवाएं सस्ती होंगी बल्कि उद्योगों के लिए भी फायदेमंद रहेगा। जीडीपी 2 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसके अलावा महंगाई का आंकड़ा भी कम हो जाएगा।

एक समान कर प्रणाली से देशभर के कारोबारियों को कहीं भी किसी भी राज्य में कारोबार करना आसान रहेंगा। इसके अलावा अलग-अलग करों को एक में समाहित करने का फायदा उद्योगों और कारोबारियों को भी मिलेगा। कर की दरे बेहतर है और इसका लाभ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। यह देश की प्रगति और रोजगार सृजन में काफी लाभदायक साबित होगा।

राघवेंद्र सिंह, कमिश्नर (आयुक्त) , मप्र वाणिज्यिककर विभाग

कर: - मोदी सरकार अपने कार्यकाल के चौथे वर्ष में देश के इनडायरेक्ट (अप्रत्यक्ष) कर इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव गुड्‌स (अच्छा) एंड (और) सर्विस (सेवा) कर के रूप में एक जुलाई से लागू करने जा रही है। इसके बाद एक देश एक कर हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर पहली बार देश के इतिहास में इनकम कर की न्यूनतम दर 10 फीसदी से कम कर पांच फीसदी की गई।

Table shows the Tax in year 2013 - 14 and 2017 - 18

Tax in year 2013 - 14 and 2017 - 18

एक्साइज (उत्पाद शुल्क) डयुटी (कर्तव्य) कलेक्शन (संचयन) 139 प्रतिशत बढ़ेगी

कर

2013 - 14

2017 - 18

बदलाव

कॉर्पोरेशन (सहकारिता) कर

3.95

5.39

36.51 प्रतिशत

इनकम (आय) कर

2.43

4.41

81.69 प्रतिशत

कस्टम () ड्‌युटी (कर्तव्य)

1.72

2.45

42.44 प्रतिशत

एक्साइज (आबकारी) ड्‌यूटी (कर्तव्य)

1.70

4.06

139.08 प्रतिशत

सर्विस (सेवा) कर

1.55

2.75

77.67 प्रतिशत

कुुल कर

11.39

19.12

67.87 प्रतिशत

शुद्ध कर संग्रह (स्टेट शेयर व अन्य मद घटाने के बाद)

8.16

12.27

50.4 प्रतिशत

कर कलेक्शन (संचयन) के आंकड़े लाख करोड़ रु. में

विभिन्न कर निम्न हैं-

  • 42 सेस और सरचार्ज लग रहे थे वर्ष 2013 - 14 में केन्द्र के विभिन्न करो पर।
  • 34 सेस और सरचार्ज लग रहे हैं वर्ष 2017 - 18 में। इस दौरान सर्विस (सेवा) पर कृषि कल्याण और स्वच्छ भारत सेस को बढ़ाया।
  • 50 करोड़ रुपए तक करोबार करने वाली छोटी कंपनी (संघ) पर कॉर्पोरेशन (सहकारिता) कर 5 प्रतिशत घटाकर 25 प्रतिशत किया। पहली बार 50 लाख से 1 करोड़ रुपए की कमाई पर 10 प्रतिशत का सरचार्ज लगाया गया।
  • वेल्थ (धन) कर को पर्ष 2016 - 17 से खत्म किया गया। वहीं दूसरी ओर वर्ष 2015 - 16 में 1078 करोड़ रुपए का कर संग्रह हुआ था।

आगे क्या- गुड्‌स एंड सर्विस कर लागू होने के बाद कर चोरी मुश्किल हो जाएगी। वहीं अप्रत्यक्ष कर देने वालों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाएगी। जीडीपी ग्रोथ (विकास) 2 फीसदी बढ़ जाएगी।

ऊर्जा क्षेत्र: - मोदी सरकार के तीन वर्षो के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। वर्ल्ड (विश्व) बैंक (अधिकोष) इलेक्ट्रिसिटी (बिजली) एसोसिबिलिटी (मित्रता) रैंकिंग (अत्यंत कष्टदायी) में भारत वर्तमान (2017) में 26वें पायदान पर हैं, जबकि यूपीए-2 के दौरान 2014 में 99वें स्थान पर था। तीन वर्षो में 73 स्थानों की छलांग ने देश को विश्व मंच पर ला दिया है। पहली बार हमारा देश सरप्लस बिजली वाले देशों में शामिल हुआ है। भारत की पावर (शक्ति) क्षमता में 243 गीगा वॉट की बढ़ोत्तरी हुई हैं।

कोयले से बनने वाली बिजली से होने वाले नुकसान को धीरे-धीरे खत्म करने के उद्देश्य से नवकरणीय ऊर्जा पर सरकार का जोर है। ऐसे में विंड एनर्जी (वायु एनर्जी) (ऊर्जा) एक बेहतर विकल्प है और इसमें निवेश भी बढ़ रहा है।

तुलसी तांती, चेयरमैन (सभापति) व एमडी, सुजलान

ऑटोमोबाइल (स्वचालित) : - कार की बड़ी मांग निकल रही है। रिफॉर्म के प्रभाव नजर आने लगे है। सबसे बड़ी बात यह रही कि महंगाई पर नियंत्रण होने से सभी क्षेत्रों को अवसर मिले हैं। जीएसटी लागू होने से सर्वाधिक फायदा ऑटोमोबाइल्स सेक्टर को होगा।

अजय सेबकरी, एमडी, ब्रिजस्टोन

मेन्यूफेक्चरिंग (विनिर्माण): - इंडेक्स (सूची) ऑफ (का) इंडिस्ट्रियल (उद्योग संबंधी) प्रॉडक्शन (उत्पादन) की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में 8 कोर इंडस्ट्रीज (औद्योगिक) का आईआईपी 162.2 से बढ़कर 175.6 पर पहुंच गया।

अन्य कार्यों का रिपोर्ट कार्ड (विवरण पत्रक) : - केंद्र की सत्ता में काबिज होने से पहले भाजपा ने जो वादे किए थे, उनमें शहरों की दशा सुधारने का वादा शामिल था। इस दिशा में अमल भी शुरू हो गया है। आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने के लिए हाईवे (मुख्यमार्ग) और सड़कों के नेटवर्क (जाल पर काम) पर काम तेजी से किया जा रहा है। दूसरी ओर, जल्द न्याय के लिए जजों की नियुक्ति का वादा पूरा करने की दिशा में सरकार ने अब तक पूरे प्रयास नहीं किए हैं। हालांकि लोगों का भरोसा कायम हैं

काशी: - आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह ने कहा कि काशी में विकास हुआ है और सबसे अच्छी बात है कि योजना के तहत कार्य हो रहे हैं, जिसका फायदा सभी जगहों पर मिलेगा। पीएम मोदी ने दिखाया है कि उनका मकसद काम करना है वह दिखायी भी दे रहा है। वैसे लोगों का उतना ही सपना दिखाना चाहिए था जितना काम हो सके।

बनारस: -उस्मानिया जाता मस्जिद के ईमाम मुफ्ती हारुन रशीद नक्शबंदी ने बताया, पीएम के संसदीय क्षेत्र में ऐसा कोई काम नहीं हुआ है, जिसे सरकार की उपलब्धि कहा जाए। तीन साल में सड़कों की हालात नहीं सुधरी। सफाई के मामले में भी बनारस पीछे है।

साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा, आजादी के बाद पहली बार ऐसी पीएम मिला है जिसने निस्वार्थ भाव से देश के विकास का प्रयास किया। मोदी ऐसे पीएम हैं जिन्होंने बिना रूके और देश के हर कौने में काम किया है। वे वाराणसी का खास ख्याल रख कर काम कर रहे हैं। उनके विजन (कल्पना) का वाराणसी में फर्क साफ दिखने लगा है।

श्रमशक्ति-51 करोड़ की श्रमशक्ति भारत में हैं, जिनमें 5 प्रतिशत ही दक्ष हैं। नेशनल (राष्ट्रीय) स्किल (कौशल) डवलपमेंट (विकास) के तहत इन सभी को दक्ष किया जा रहा है ताकि नियोक्ताओं को दक्ष श्रमशक्ति मिले। अब तक 15 लाख से ज्यादा लोगों ने प्रशिक्षण लिया है।

जयंत कृष्ण, सीओओ, नेशनल (राष्ट्रीय) स्किल (कौशल) डवलपमेंट (विकास) कॉर्प

मोदी जी की शख्सियत: -नरेन्द्र मोदी जी की शख्सियत 15 बातें जो निम्न हैं-

  1. चौंकाने वाले-ज्यादातर फैसले अलग होते हैं। क्योंकि ब्रिटिश संसद में बोलने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री, मंगोलिया, इजराइल जाने वाले पहले पीएम। यही नहीं पहले प्रधानमंत्री जिन्होंने दिल्ली का दशहरा छोड़ा और लखनऊ की रामलीला में गए। 17 की उम्र में घर छोड़कर भी माता-पिता को चौंकाया था।

2. स्टाइल (अभिकल्पना करना) आइकॉन (प्रतिभा)

बुलगरी का चश्मा, मॉ ब्लां का पेन मोवाड़ों की घड़ी इस्तेमाल करते हैं। आधी बाहं के कुर्ते इनसे ही फैशन (वेशभूषा) में आए। मोनोग्राम्ड सूट से भारी विवादों में रहे। क्योंकि 2015 में तत्कालीन अमरिकी राष्ट्रपति ओबामा भारत आए तो वॉल स्ट्रीट जर्नल (दिवार, सड़क, साधारण) ने हेडलाइन (शीर्षक) दी थी एयरपोर्ट (हवाईअड्‌डे) पर मोदी ने फैशन में मिशेल ओबामा को भी पीछे छोड़ दिया।

  1. प्रखर राष्ट्रवादी छवि-अंग्रेजी बोल लेते हैं, बात हिंदी में ही करते है, क्योंकि वे किसी भी विदेशी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से जानबूझ कर हिन्दी में बात करते हैं। सरकारी माध्यम को बढ़ावा देने के लिए आकाशवाणी पर मन की बात कहते हैं।
  2. नेट प्रॉफिट (यथार्थ लाभ) पीएम-परिवार के लोगों का काम में दखल नहीं।
  3. फिटनेस पसंद-योग करते हैं, खाने में भाकरी व खिचड़ी।
  4. मार्केटिंग (विपण) मैन (मनुष्य) -डिग्री एम की, तरीका एमबीए वाला-सेल्समैन (विक्रेता) व स्टेटसमैन (राजनेता) दोनों की खूबियां हैं। योजनाओं की मार्केेटिंग शांंयद ही उनसे बेहतर कोई कर पाता हो। क्योंकि जैस मेक इन इंडिया को ही लें। अभी बड़ा निवेश इसमें नहीं हुआ है लेकिन इसकी चर्चा खूब हैं।
  5. सनसनीखेज भाषण-जुमलों का इस्तेमाल करते हैं।
  6. वनमैन (एक मनुष्य) शो (कार्यक्रम) -गैस सब्सिडी (सरकार द्वारा आर्थिक सहायता) का धन्यवाद पत्र भी इनके नाम से।
  7. िरस्क (जोखिम) लेते हैं-नोटबंदी हो या मगरमच्छ, डरते नहीं हैं। क्योंकि बचपन में मोदी शर्मिष्ठा झील में तैरते थे। उसमें मगरमच्छ रहते थे झील में मंदिर था। धार्मिक मौकों पर उसके झंडे को बदला जाता था। एक बार बारिश मे मगरमच्छ सक्रिय थे। कोई जाने को तैयार नहीं था। मोदी तैर के गए और झंडा बदलकर आए।
  8. गैजेट (जुगत/यंत्र) गुरु-सुबह उठते ही चेक (जांच) करते है आईपैड, 2015 में नेपाल में आए भूकंप की जानकारी वहां के तत्कालीन पीएम सुशील कोईराला को मोदी के ट्‌वीट से मिली। क्योंकि- करीब 20 साल पहले पंजाब, हिरयाणा, हिमाचल प्रभारी थे पंचकूला में रहते थे। तब वे इकलौते थे जो वहां कम्प्यूटर (परिकलक) इस्तेमाल करते थे। जो चोरी हो गया था। 1999 के चुनाव में भी डिजिटल (अंकसंबंधी) कैमरा (छायाचित्र खींचने का यंत्र) उपयोग किया था।
  9. अनुशासन प्रिय-एक भी छुट्‌टी नहीं लते, शुरू से हैं ऐसे।
  10. विवादों में रहते हैं-उत्तराखंड में लगवा दिया राष्ट्रपति शासन। क्योंकि मोदी अक्सर विवादों में रहते हैं। इससे पहले गुजरात दंगे, महिला की जासूसी, अमेरिका से वीजा न मिलना, आदि ऐसे मामले हैं जिन्हें लेकर वे हमेशा विवादों में रहे हैं।
  11. अफसरों पर ज्यादा भरोसा- कानून बदलकर लाए पसंद का अफसर। पूर्ववर्ती सरकारों की तरह अफसरों पर ज्यादा भरोसा है। क्योंकि प्रधानमंत्री बनते ही मोदी पहला अध्यादेश सेवानिवृत्त आईएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्रा की नियुक्ति के लिए ही लाए थे। कानून में बदलाव कर उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया। एस जयशंकर और अजीत डोभाल भी ऐसे ही भरोसेमंद अफसर हैं।
  12. जिद्दी स्वभाव- लोकपाल नहीं नियुक्त करना था, नहीं किया। गुजरात में लोकायुक्त नियुक्त करना हो या केंद्र में लोकपाल। मोदी ने हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) और सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के दखल के बावजूद नहीं किया। मुस्लिम टोपी भी नहीं पहनी थी। क्योंकि बचपन से जो नहीं करना चाहते थे, राजी नहीं होते थे।
  13. दूसरी पंक्ति पनप नहीं पाती-पार्टी में केवल दो ही प्रमुख चेहरे। मोदी के नेतृत्व में भाजपा में दूसरी पंक्ति के लीडर (नेता) नहीं तैयार हो पा रहे हैं। पार्टी (राजनीतिक) में अभी केवल नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ही नजर आ रहे हैं। इनकी ही चलती थी है। क्योंकि मोदी जी वहीं करते है जो जांचा जाता है। फिर चाहे गुजरात के विश्वसनीय अमित शाह को विरोध के बावजूद पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना हो या लालकृष्ण आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी जैसे नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में शामिल करना हो।

मोदी जी की यात्राएं: -प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी अब तक 57 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं। 45 देशों की इन यात्राओं में उन्होंने 119 दिन विदेश में बिताए हैं। जबकि उनके पहले प्रधनमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने 10 सालों में कुल 80 और पहले तीन साल में 24 विदेश यात्राएं की थीं।

अमरीका-सबसे ज्यादा 4 बार अमेरिका की यात्रा, सितंबर 2014, सितंबर 2015, अप्रैल 2016 और जून 2016।

9 देशों में गए 2 - 2 बार-

Table shows the nine country

Table shows the nine country

1. जापान

नवं-2014-नवं-2016

2. रूस

जुलाई-2015, दिसं-2015

3. अफगानिस्तान

दिसं-15 जून-16

4. चीन

मई-2015, सितंबर-2016

5. नेपाल

अगस्त-2014, नवंबर-2014

6. फ्रांस

अप्रैल-2015, नवंबर-2015

7. श्रीलंका

मार्च-2015, मई-2017

8. सिंगापुर

मार्च-2015, नवंबर-2015

9. उजबेकिस्तान

जुलाई-15, जून-16

एक बार इन 35 देशों की यात्रा-ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बेल्जियम, भूटान, ब्राजील, कनाडा, फिजी, जर्मनी, ईरान, आयरलैंड, केन्या, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, लाओस, मलेशिया, मॉरिशस, मैक्सिको, मोजाम्बिक, म्यांमार, कतर, पाकिस्तान, सेशल्स, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्विअजरलैंड, ताजाकिस्तान, तंजानिया, थाईलैंड, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, यूएई, ब्रिअेन, वियतनाम, मंगोलिया, सऊदी अरब।

म्गााेंलिया- मोदी मंगोलिया (मई 2015) जाने वाले पहले प्रधाानमंत्री हैं। इस साल जुलाई में जब मोदी इजरायल जाएंगे तो ऐसा करने वाले भी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे।

सऊदी अरब-मोदी को सऊदी अरब (अप्रैल 2016) ने शीर्ष नागरिक सम्मान द (यह) ऑर्डर (आदेश) ऑफ (का) किंग (राजा) अब्दुल्लअजीज से नवाजा। यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय हैं।

मिशन (दूतमंडल) मोदी: -लोकसभा चुनाव के बाद 17 राज्यों में भाजपा सत्ता में 2018 तक राजस्थान सहित 10 राज्य जीतने का संघर्ष।

2014 का राजनीति नक्शा- 26 मई को मोदी प्रधानमंत्री बने तब भाजपा 7 राज्यों में थी। 39 प्रतिशत आबादी भाजपा शामिल राज्यों में हैं।

Table shows the Politics map of 2014

The Politics map of 2014

भाजपा 5

मध्यप्रदेश

छत्तीसगढ़

गुजरात

राजस्थान

गोवा

भाजपा गठबंधन 2

प्जाांब

आंध्रप्रदेश

कांग्रेस 10

हरियाणा

हिमाचल

उत्तराखंड

कनार्टक

केरल

असम

अरुणाचल

मणिपुर

मेघालय

मिजोरम

कांग्रेस गठबंधन 3

महाराष्ट्र

झारखंड

जम्मू-कश्मीर

श्रीजनल 9

बिहार

उत्तरप्रदेश, प. बंगाल

ओडिशांं

नागालैंड, त्रिपुरा

पुडुचेरी

सिक्किम, तमिलनाडु

दिल्ली में राष्ट्रपति शासन था।

मई 2014 में तेलंगाना अलग राज्य नहीं था। वोटिंग (मतगणना) 30 राज्यों में हुई थी और चुनाव के बाद आंध्रपद्रेश से अलग हुआ तेलंगाना।

2017 का राजनीतिक नक्शा-3 साल बाद भाजपा और सहयोगियों की यूपी सहित 17 राज्यों में सरकार, 61 प्रतिशत आबादी भाजपा शासित राज्यों की।

Table shows the Politics map of 2017

The Politics map of 2017

भाजपा 8

1. मध्यप्रदेश

2. छत्तीसगढ़

3. गुजरात

4. राजस्थान

5. हरियाणा

6. उत्तर प्रदेश

7. उत्तराखंड

8. अरुणाचल

9. भाजपा गठबंधन 9

10. गोवा

11. जम्मू-कश्मीर

12. झारखंड

13. आंध्रप्रदेश

14. महाराष्ट्र

15. मणिपुर

16. नागालैंड

17. सिक्कम

18. असम

19. कांग्रेस 6

20. कर्नाटक

21. हिमाचल

22. पुडुचेरी

23. प्जाांब

24. मेघालय

25. मिजोरम

26. कांग्रेस गंठबंधन 1

27. बिहार

28. श्रीजनल 7

29. प्ां. बंगाल

30. त्रिपुरा

31. तेलंगाना

32. तमिलनाडु

33. ओडिशा

34. केरल

35. दिल्ली

2 जून 2014 को आंध्रप्रदेश से अलग हुए राज्य तेलंगाना में टीआरएस ने सरकार बनाई। केसीआर मुख्यमंत्री बनाए गए। इसके चुनुाव संयुक्त आंध्रपद्रेश में हुए थ।

गोवा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में उठापठक कर बनाई अपनी सरकार: -

  • यहां पाई सफलता-2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद भाजपा ने हिरयाणा, महाराष्ट्र झारंखड, 2016 में असम और 2017 में उप्र, उत्तराखंड, गोवा मणिपुर में सरकार बनाई।
  • यहां गठबंधन-सिक्मिक नागालैंड, आंध्र, जम्म कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड, असम, मणिपुर, गोवा में गठबंधन से सरकार बनाई। इनमें से 5 राज्यों में भाजपा के सीएम हैं।
  • यहां मजबूत हुए- भाजपा ने केरल में 1 विधानसभा सीट और पश्चिम बंगाल में 3 सींटे जीतकर खाता खोला। अरुणाचलन प्रदेश में दलबदल से सरकार बनाई।
  • यहां फेल हुए-2015 में भाजपा की सबसे बड़ी हार बिहार और दिल्ली में हुई। दिल्ली में 31 से 3 सीटों पर आ गई। 2017 में पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन हारा।
  • कांग्रेस से टक्ककर- मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से सीधी टक्कर है। इनमें से हिमाचल को छोड़कर 4 राज्यों में भाजपा की सरकार है।
  • यहां मौजूदगी नहीं- तमिलनाडु, त्रिपुरा, पुडुचेरी, मेघालय, मिजोरम में भाजपा की एक भी सीट नहीं है, केवल वोट (मत) प्रतिशत बढ़ा है। पीर्टी (राजनीतिक दल) संघ के सहारे आधार मजबूत कर रही हैं।

अब आगे ये………. .

2017: गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव

  1. गुजरात-प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी के गृहराज्य में पहला चुनाव होगा। भाजपा की 4 बार से सरकार, 3 बार मोदी के नेतृत्व में जीता चुनाव।

कुल सीट: 182

Table shows the total 182 seats

Table shows the total 182 seats

भाजपा

121

कांग्रेस

57

अन्य

04

पटेल और दलित राजनीति से भाजपा बैकफुट पर आई है।

  1. हिमाचल प्रदेश- मुख्यमंत्री वीरभ्रद सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोपों से कांग्रेस बैकफुट पर। कांग्रेस और भाजपा दोनों गुटबाजी से परेशान हैं।

कुल सीट: 68

Table shows the total 68 seats

Table shows the total 68 seats

भाजपा

26

कांग्रेस

36

अन्य

06

लोकसभा चुनाव में सभी 4 सीटों पर भाजपा का कब्जा।

2018: राजस्थान सहित 8 राज्यों में चुनाव

  1. राजस्थान- यहां हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता रहा है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने क्लीनस्वीप (पुरा सफ़ाया) किया था।

कुल सीट: 200

Table shows the total 200 seats

Table shows the total 200 seats

भाजपा

161

कांग्रेस

24

अन्य

15

भाजपा गुत्तबाजी से परेशान। कांग्रेस ने सचिन पायलट को बढ़ाया।

  1. छत्तीसगढ़-पिछली बार भाजपा जीती थी। अजीत जोगी के नई पार्टी (राजनीतिक दल) बनाने से त्रिकोणीय संघर्ष के आसार।

कुल सीट: 90

Table shows the total 90 seats

Table shows the total 90 seats

भाजपा

49

कांग्रेस

39

अन्य

02

कांग्रेस गुटबाजी की शिकार, भाजपा फिर रमन सिंह के भरोसे।

  1. मध्यप्रदेश- शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा मैदान में उतरेगी। राज्य में लगातार 3 बार से पार्टी (दल) की सरकार है।

कुल सीट: 230

Table shows the total 230 seats

Table shows the total 230 seats

भाजपा

166

कांग्रेस

57

अन्य

07

कांग्रेस गुटबाजी से परेशान। व्यापमं कांड से भाजपा विचलित।

  1. कर्नाटक-दक्षिण में पहली बार 2008 में भाजपा ने यहीं सरकार बनाई थी। यहां एक बार फिर से येदियुरप्पा को कमान सौंपी।

कुल सीट: 224

Table shows the total 224 seats

Table shows the total 224 seats

भाजपा

40

कांग्रेस

122

अन्य

62

देवेगौड़ा की जनता दल (एस) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

  1. मिजोरम-आरएसएस के सहारे भाजपा आधार मजबूत करने में जुटी।

कुल सीट: 40

Table shows the total 40 seats

Table shows the total 40 seats

भाजपा

00

कांग्रेस

34

अन्य

06

  1. मेघालय- एनपीए से गठबंधन कर भाजपा यहां मैदान में उतरेगी।

कुल सीट: 60

Table shows the total 60 seats

Table shows the total 60 seats

भाजपा

00

कांग्रेस

29

अन्य

31

  1. नागालैंड-एनपीएफ, भाजपा व निर्दलियों ने मिलकर सरकार बनाई है।

कुुल सीट: 60

Table shows the total 60 seats

Table shows the total 60 seats

भाजपा

04

कांग्रेस

00

अन्य

56

  1. त्रिपुरा-लेफ्ट फ्रंट (वाम मोर्चा) की सरकार। इस बार भाजपा भी चुनौती।

कुल सीट: 60

Table shows the total 60 seats

Table shows the total 60 seats

भाजपा

00

कांग्रेस

10

अन्य

50

2019: लोकसभा चुनाव: -’मिशन 2019’ के तहत भाजपा ने लोकसभा की 400 सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा है। भाजपा अमित शाह ने तैयारी शुरू कर दी है। वे उन राज्यों का दौरा कर रहे हैं, जहां भाजपा की मौजूदगी न के बराबर है। कांग्रेस ने भी संगठन में भारी फेरबदल की तैयारी शुरू कर दी है।

2019: जनवरी -मई विधानसभा चुनाव: - आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, अरुणाचल, सिक्कम, पुडुचेरी में चुनाव होंगे। अभी आंध्र, अरुणाचल, सिक्किम में एनडीए की सरकारें हैं। अरुणाचल में पीपीए के 33 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।

2019: जुन दिसंबर 3 राज्यों में चुनाव: -

  • महाराष्ट्र-भाजपा ने 2014 में पहली बार शिवसेना से गठबंधन किए बिना चुनाव लड़ा था और सबसे बड़ी पार्टी (दल) बनी थी। बीएमसी और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों में मिली जीत से भाजपा के हौसले बुलंद हैं।
  • हरियाणा-वर्ष 2014 में भाजपा ने पहली बार यहां अपने दम पर सरकार बनाई थी। जाट आंदोलन से भाजपा की स्थिति कमजोर। अब मतों के ध्रवीकरण का ही सहारा।
  • झारखंड-भाजपा ने यहां गठबंधन सरकार बनाई है। पार्टी के बड़े नेताओं में गुटबाजी से हो सकता है नुकसान।

उपसंहार: - क्यां भारत बदल रहा है बड़े बदलाव की बयार लेकर 2014 में यूपीए सरकार को सत्ता से हटाकर एनडीए भारी बहुमत के साथ मोदी के नेतृत्व में सत्तासीन हुई। मोदी सरकार के बीते तीन साल की उपलब्धियों की चर्चा करें तो बात नकारात्मकता से शुरू होती है, लेकिन खत्म सकारात्मक परिणाम पर होती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, हर बड़े निर्णय को योजनाबद्ध तरीके से लागू करना। इसलिए जब सरकार की नीतियों को मोदीफिकेशन नाम दिया गया तो इस पर ऐतराज जताने वाले कम ही नजर आए। यकीनन देश की अर्थव्यवस्था को बुलेट (बंधुक की गोली) गति देने के संसाधन ठोस धरातल पर तैयार है। एनालिस्टों (विग्रह करने वाला) में शेयर बाजार के 40 और 50 हजार होने की चर्चा का शुरू हो जाना इसके संकेत भी देता है कि देश नई उड़ान के लिए तैयार हो चुका है।

- Published/Last Modified on: June 6, 2017