विश्व अर्थव्यवस्था 2018 ( World Economy 2018 - in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: - अपने आने के पहले शायद ही किसी नए साल ने तथ्यों पर आधारित इतनी ठोस उम्मीदें जगाई हो। यही कितनी बड़ी बात है कि दुनिया आखिरकार 2008 में आई महामंदी से उबर जाएगी। इतना ही नहीं, मेडिसिन (दवा) के क्षेत्र में जेनेटिक (आनुवांशिक) उपचार के नए युग की शुरुआत हो रही है, जो सीधे जड़ पर प्रहार कर लाइलाज रोगों को भी खत्म कर देगी। दशकों से हमे चकमा दे रहे मलेरिया का वैक्सीन (टीका) भी नए साल में हकीकत होगा।

देश: - विश्व अर्थव्यवस्था 2018 में लगभग पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगी। महामंदी शुरू होने के दस साल और उसके कारण पैदा हुई दशकभर की दुश्वारियों के बाद दूर-दूर तक सब कुछ अच्छा होने की भावना मजबूत होगी।

  • अपस्फीति यानी कीमतें गिरते ही चले जाने की स्थिति तो खत्म हो चुकी है, वेतनमान धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं और लगभग हर जगह अर्थव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं। यहां तक की केन्द्रीय बैंक (अधिकोष) जो हाल के दिनों में नोट छापते रहने वाले बन गए थे, अब वाकई बैंकरों (महाजन) की तरह व्यवहार करेंगे। सावधानीपूर्वक विचार करेंगे कि अपनी नकदी कहां लगाना है। लेकिन, उसी समय एक नई चिंता भी है। मंदी से वापसी होते समय ही क्या 2018 का साल नई मंदी की भूमिका तैयार करेगा? 2017 में वैश्विक उत्पादन 2010 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ा लेकिन, इसे शायद ही उत्साहपूर्व कहा जाएगा।
  • वैश्विक वृद्धि (विनियम दरों के हिसाब से) 2.9 फीसदी की दर से होती रही। यह 3 फीसदी के नीचे है जिसे कभी औसत भर माना गया था। 2018 में वृद्धि थोड़ी और धीमी, 2.7 फीसदी की दर पर रहेगी। लेकिन, इसके पीछे एक उत्साहवर्धक वास्तविकता छिपी है। सारी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, विकसित और उभरती दोनों, आगे बड़ रही होगी। अमेरिका व यूरोपीय संघ सम्मानजनक 2 फीसदी या इसके आसपास बढ़ेंगे, ब्राजील व रूस नवीनतम मंदी से बाहर आ जाएंगे और कभी एशियन टाइगर (बाघ) कहलाने वाले मलेशिया व इंडोनेशिया जोशीली 5 फीसदी दर से बढ़ेगे। भारत करीब 8 फीसदी की गति से दौड़ेगा। केवल कर्ज में दबा चीन वाकई चिंतित दिखता है लेकिन, उसके नेता इतनी मांग तो पैदा कर ही देंगे कि वृद्धि करीब 6 फीसदी रहे।
  • यूरो क्षेत्र सुखद आश्चर्य है। पिछले दशक में इसने दो मंदियां बर्दाश्त की और लगभग टूटते-टूटते बचा और अब इसके कदमों में उत्साह है। कंज्यूमर (उपभोक्ता) लोन (ऋण) लेने की दर तेजी से बढ़ रही है, आर्थिक भावनाएं दस साल में सबसे ऊंचे स्तर पर हैं और बेरोजगारी गिरकर 8.5 फीसदी थी। यूरोप उछाल तो नहीं मार रहा पर गिरती आबादी और कम निवेश इसे रोक रखेगा और व्यापक यूरोपीय संघ पर ब्रेग्जिट छाया रहेगा। फिर भी नया साल संकट की भावना के साथ नहीं, स्थिति सामान्य होने के अहसास के साथ शुरू होगा।

चीन: - दुनिया में किसी देश का वजन देखना हो तो दो बातो का महत्व है मानव शक्ति और पैसा या कहें की आबादी और उत्पादन। 19वीं सदी तक दोनों साथ होते थे। सबसे बड़ी आबादी वाले चीन की अर्थव्यवस्था भी सबसे बड़ी थी। आर्थिक इतिहासकार एंगस मेडिसन के मुताबिक अमेरिका ने इसे तोड़ा।

  • चीन की तुलना में 20 फीसदी आबादी होने के बाद में 1890 में यह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। क्या चीन अब दोनों बातों में फिर शीर्ष पर आने वाला है? बाजार की विनिमय दर में चीन अमेरिका को कब पीछे छोड़ेगा? पांच-छह साल पहले लगता था कि वह पल आने ही वाला है तब चीन दो अंक की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दर से बढ़ रहा था।
  • युआन डॉलर (मुद्रा) के और कीमतें अमेरिकी स्तर के नजदीक बढ़ रही थीं। इनके मिलेजुले असर से डॉलर में चीन की जीडीपी 2011 के साल में ही उल्लेखनीय रूप से 24 फीसदी बढ़ गया। चीन की आर्थिक वृद्धि अब भी ठोस है यानी 2011 से लगातार 7 फीसदी का औसत। पर युआन अब डॉलर की तुलना में कमजोर है। चीन में कीमतें 2014 - 16 में अमेरिका की तुलना में कम गति से बढ़ीं, क्योंकि चीन औद्योगिक अपस्फीति का शिकार हो गया। इसलिए डॉलर में चीन की जीडीपी अब भी अमेरिका से बहुत कम है।
  • चीन के ऊपर उठने में देरी होने से राष्ट्रीय महानता के खेल नया मोड़ आ गया है। चीन की जीडीपी अमेरिका को अंतत: पीछे छोड़ देगी पर क्या ऐसा वह भारत की आबादी उससे अधिक होने के पहले कर सकेगा? शायद आबादी में पिछड़ने के बाद ही वह आर्थिक श्रेष्ठता प्राप्त करेगा। कुछ तो मानते हैं कि यह खेल खत्म हो गया है। विस्कॉन्सिन मेडिसन विश्वविद्यालय के यी फूशियन मानते हैं कि चीनी सरकार ने देश की आबादी में 9 करोड़ का अधिक अनुमान लगा लिया, क्योंकि इसने नेशनल (राष्ट्रीय) फर्टीलिटी (उपजाऊपन) रेट (कीमत) में भीषण गिरावट को ध्यान में नही लिया।
  • यदि वे सही हैं तो भारत पहले ही दुनिया का सर्वाधिक आबादी वाला देश बन चुका है। लेकिन, संयुक्त राष्ट्र मानता है कि भारत की आाबदी 2024 में चीन से ज्यादा हो जाएगी। यानी चीन के पास अमेरिका को आर्थिक रूप से पीछे छोड़ने के लिए छह साल हैं। उसके लिए डॉलर में चीन की जीडीपी को 11 - 12 फीसदी से बढ़ना होगा। 6 फीसदी की वृद्धि और 3 फीसदी की मुद्रास्फीति चाहिए होगी। युआन डॉलर के मुकाबले 5.96 पर जरूरी होगा। यह असंभव नहीं है लेकिन, हम इस पर शर्त लगाना नहीं चाहते।
  • दो हजार साल पहले सिल्क (रेशम) रोड (सड़क) चीन से सामान, सेवाएं और विचार यूरेशिया ले जाता था। 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को एशिया, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, रूस और मध्य पूर्व से जोड़ने के लिए इसे पुनर्जीवित किया। अब 2018 में यह रेशम मार्ग डिजिटल का रूप लेगा। चीन अपने उपग्रह नेविगेशन (नौसंचालन) प्रणाली का कवरेज (क्षेत्र) बेल्ट (पट्‌टा) एंड (और) रोड (सड़क) से जुड़े 60 से ज्यादा देशों में ले जाएगा। उसका लक्ष्य 2020 तक अमरीका के जीपीएस से स्पर्धा करके 35 उपग्रहों के नेटवर्क (जाल पर कार्य) से अपनी सेवाएं पूरी दुनिया में ले जाने का है।
  • 2018 की शुरुआत में चीन की बेइदू (यानी बिग डीपर) के 30 उपग्रह होंगे, जो इसकी अचूकता 10 मीटर तक ले आएंगे। यह तब भी जीपीएस से पीछे रहेगा लेकिन, इसमें सुधार हो रहा है। बेल्ट एंड रोड पर 100 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश के अलावा चीन बेइदू पर 25 अरब डॉलर खर्च कर रहा है।
  • 30 से ज्यादा देशों में बेइदू को घरेलू नेटवर्क से जोड़ने का करार किया है। कई ने चीन को ग्राउंड (भूमि) स्टेशन (स्थान) बनाने का हक दिया है, जिससे बेइदू की अचूकता बढ़ेगी। चीन में 2015 में बाइदू से संचालित सेवाएं 25 अरब डॉलर की थीं, जो 2020 तक दोगुनी हो जाएगी। बाइदू चिप, एंटिना और अन्य प्रोडक्ट (उत्पाद) का एक बाजार खड़ा हो गया है। चीन सेना के नियंत्रण वाले बाइदू से उसकी अमेरिकी जीपीएस पर निर्भरता भी तैनात कर सकता है। आलोचकों को दो चिंताएं हैं। एक तो चीन की गोपनीयता दूसरा वित्तीय जोखिम को लेकर ढीलाढाला रवैया। यदि इससे आमदनी ठीक नहीं हुई तो समस्याएं पैदा हो सकती है।

सालगिरह: -

  • टाटा समूह 150 वर्ष पूरे कर लेगा, यह भारत का सबे बड़ा औद्योगिक समूह है।
  • पेप्सी -कोला 125 वर्ष अगस्त में पूरे करेगी। पहले इसका नाम ब्रेड्‌स ड्रिंक (पेय) था, इसके आविष्कारक अमेरिकी फामासिस्ट केलेब ब्रेधम थे।
  • कार रेंटल कंपनी ‘हट्‌र्ज’ के 100 वर्ष पूरे होंगे। 150 देशों में इसका करोबार है।
  • गूगल के 20 वर्ष पूरे हो जाएंगे। यह कंपनी (संघ) साल में दो लाख करोड़ सर्च (खोज) क्वेरी पूरी करती है।
  • लिंक्डइन 15 वर्ष मई में पूरे करेगी। बिजनेस (व्यापार) एवं एम्प्लॉयमेंट संबंधी इस सोशल (सामाजिक) साइट (कार्यस्थल) की शुरुआत 2002 में कैलिफोर्निया से हुई थी।
  • एपल के एप स्टोर के 10 वर्ष जुलाई में पूरे होंगे। इसे ‘एपी बर्थडे’ (जन्मदिन) कहते हैं।

वर्ल्ड (विश्व) इन (में) ब्रीफ: - (संक्षिप्त वृतान्त)

भारत:

  • भारत सरकार ने देश के सभी गांवों में प्रत्येक घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
  • भारत की वोडाफोन और आइडिया मर्ज (विलय) हो जाएगी। दोनों के करीब 40 करोड़ उपभोक्ता हैं।
  • चीन की खरबों डॉलर की बाइसाइकल शेयरिंग (साझा करने) कंपनी (संघ) ‘ओफो’ भारतीय बाजार में प्रवेश करेगी।
  • ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) की बैठक जोहानिसबर्ग में होगी।

चीन:

  • द (यह) ग्रेट (महान) फायरवॉल (सुरक्षा दीवार), चीन सभी निजी वीपीएन को ब्लॉक (खंड) कर सकता है। इससे यूज़र प्राइवेसी (निजी) बचाकर प्रतिबंधित वेबसाइटो तक पहुंचते हैं।
  • चीन ने ‘झुग्गी मुक्त देश’ का लक्ष्य बनाया है। इसकी शुरुआत वह 2018 से करेगा। डेढ़ करोड़ झुग्गी बस्ती 2020 तक हटाई जाएंगी।
  • चीन अपना वीकिपीडिया लॉन्च (प्रक्षेपण) करेगा। इसके लिए 20 हजार कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, जो 3 लाख एंट्री (प्रवेश) करेंगे।
  • नानजिंग में एशिया का पहला वर्टीकल (खड़ा) फॉरेस्ट (जंगल) तैयार होगा। प्रदूषण नियंत्रित करने के उद्देश्य से दो इमारते पौधों से भरी रहेंगी।
  • चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्से के अध्ययन के लिए चीन चांग-4 यान पहुंचाएगा।
  • चीन नववर्ष 2018 इस बार ‘ईयर (साल) ऑफ (का) द (यह) डॉग’ (तारामंडल) कहलाएगा।

अमेरिका:

  • माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक की मारिया केबल (अल्ट्रा (अत्यंत) फास्ट (तेज) फाइबर (रेशा) ऑप्टिक (दृष्टि संबंधी) केबल) काम शुरू करेगी। वह अमेरिका से स्पेन पहुंचेगी। उसकी मोटाई बगीचे के पाइप जितनी होगी।
  • पेंटागन डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को रोक सकता हैं, जिसमें उन्होंने सेना में ट्रांसजेंडर (विपरीतलिंगी) की भर्ती को मंजूरी दी है।
  • प्यूर्तों रिको में ई-कॉमर्स (वाणिज्य) कंपनी (संघ) एमेजॉन का दूसरा मुख्यालय बन सकता है। ऐसा हुआ तो यह उत्तरी अमेरिका के 230 शहरों से बाजी मार लेगा।
  • 50 वर्ष पहले उ. कोरिया ने अमेरिका के यूएसएस प्यूब्लो पोत को कब्जे में ले लिया था। उसके कारण 11 माह तक ‘प्रिज्नर -ऑफ (के) -वॉर’ (युद्ध) का संकट चला था। पांच दशक बाद भी आज दोनों देश युद्ध के मुहाने पर नजर आते हैं।
  • 150 किलोवॉट का लेजर हथियार अमेरिकी सेना को मिलेगा। उससे वह ड्रोन तुरन्त गिरा सकेगी।

यूरोप:

  • अमेरिकी कॉफी चेन स्टारबक्स इटली के मिलान में अपना पहला स्टोर खोलेगी। कॉफी चेन की प्रेरणा उसे मिलान से ही मिली थी।
  • फ्रांस की एयरबस 2018 के अंत तक पहली ऑटोनॉमस (स्वायत्त) फ्लाइंग (उड़ान) टैक्सी (कार) लॉन्च (प्रक्षेपण) करेगी।
  • यूरोस्टार लंदन से एम्सटर्डम तक सीधी रेल सेवा शुरू करेगी, जो चार वर्ष में पूरी होगी।
  • 250 से अधिक कंपनियां (संघ) ब्रिटेन में अप्रैल से महिला-पुरुष कर्मचारियों का वेतन डेटा (आंकड़ा) पेश करेंगी। इससे पे गैप का पता चलेगा।
  • ब्रिटेन ने 1 लाख जीनोम एकत्र किए, अब जेनेटिक बीमारियों को समझने के लिए अध्ययन होगा।

अंतरराष्ट्रीय:

  • फरवरी में ‘इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) मदर (माता) लैंग्वेज (भाषा) डे’ (दिन) मनाया जाएगा। उसे विश्व की 3,500 भाषाएं लुप्त होने पर चर्चा हो सकती है।
  • कनाडा में आर्टिफिशियल (कृत्रिम) ट्रांसफैट पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
  • सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले जी-20 देशों के सम्मेलन की मेजबानी अर्जेटीना करेगा।
  • अरब देशों में सबसे अमीर सऊदी अरब और यूएई 1 जनवरी से वैट (मूल्य विर्धत कर) लागू करेंगे।

साइबर क्राइम (अपराध) : -

नए तरह के अपराधों के लिए तैयार रहना होगा-टारगेट, याहू, इक्विफैक्स: ये उन कंपनियों के नाम हैं जो साइबर हमलों से पीड़ित रही हैं और यह सूची बहुत लंबी है। निश्चित रूप से वर्ष 2018 में यह सूची और लंबी हो जाएगी। आने वाले वर्ष में सुरक्षा के लिए पहले से ज्यादा खतरे की स्थितियां पैदा होंगी।

  • उनका कारण हैकर्स की खतरनाक जनरेशन (पीढ़ी) होंगी। उनके कारण न केवल वित्तीय नुकसान होंगे, बल्कि संसाधनों का भी नुकसान हो सकता है।
  • औद्योगिक देशों का नेशनल (राष्ट्रीय) इंफ्रास्ट्रक्चर (आधारिक संरचना) जटिल होता है। उनमें चिकित्सालय, रेलवे और न्यूक्लियर (नाभिकीय) डिफेंस (रक्षा) सिस्टम (प्रबंध) भी होता है, जिसे केवल नेटवर्क (जाल पर कार्य) के बल पर हैक (काट डालना) नहीं किया जा सकता। इनमें डेटा (आंकड़ा) का निरंतर प्रवाह काम करता है और उसी से उनका संचालन होता है। मौसम केन्द्र, एयरपोर्ट (हवाईअड्‌डा), मोटरवे और विद्युत संयंत्र में हर सूचना का प्रवाह मिनट (समय) दर मिनट (समय) या सेकंड (क्षण) के आधार पर होता है। लेकिन क्या इस तरह के जटिल डेटा को अपराधियों द्वारा प्रभावित किया जा सकता है? क्या उनका डेटा क्लोन (प्रतिरूप) तैयार किया जा सकता है? जून 2017 की बात है। रूसी बंदरगाह नोवोरोसियस्क के समीप एक जहाज के कैप्टन (नायक) को आभास हुआ कि उनका जीपीएस सिस्टम गलत जानकारी दे रहा है। वैसा उस क्षेत्र में 20 अन्य जहाजों के साथ हुआ था। ऑस्टिन स्थित यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय) ऑफ (का) टेक्सस के टोड हम्फ्रे न्यूयॉर्क स्टॉक (भंडार) एक्सचेंज (अदला-बदली) के प्रति चिंता जताते हैं। वहां ऐसी ही सूचनाओं पर काम होता है, जो कभी भी हैक हो सकती हैं।
  • लंदन स्थित फॉरेन पॉलिसी (नीति) थिंक (सोच) टैंक ‘चैंथम हाउस’ की बेयजा देखरेख और संचालन ‘रियल टाइम (वास्तविक समय) इंफॉर्मेशन (सूचना) ’ पर होता है। हैकर अपना डेटा तैयार करके उसे उन कम्प्यूटरों (परिकलक) तक पहुंचा सकते हैं, जो परमाणु हथियार या न्यूक्लियर लॉन्च सिस्टम को सूचना देते हैं। वे कहती हैं- दुनियाभर के परमाणु हथियार अतिसंवेदनशील श्रेणी में आते हैं। उनकी प्रणाली की सुरक्षा के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मानक या प्रबंध नहीं है, जो साइबर या डिजिटल (अंकीय) हमले से उनकी रक्षा कर सके।

अमेरिका: - उथल-पुथल के इस दौर में पॉलिटिक्स (राजनीतिक) की कई थ्योरी (सिद्धांत) दफन हो गई लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित एक पेंडुलम थ्योरी अब भी चल रही है। बराक ओबामा के रणनीतिकार डेविड एक्सेलरॉड बताते हैं कि पेंडुलम ‘सुधार’ की दिशा में जाता है, क्योंकि मतदाता इन गुणों की खोज करता है, जो मौजूदा राष्ट्रपति में नहीं होते। थ्योरी के मुताबिक ओबामा पेशेवर अंदाज वाले वाले निर्लिप्त व्यक्ति थे तो चुनावी पेंडुलम उनके विपरीत गुणों वाले शोमैन डोनाल्ड ट्रंप की ओर झुका। खुद ओबामा अपनी सहजवृत्ति से चलने वाले उनके पूर्ववर्ती जॉर्ज डब्ल्यू बुश की प्रतिक्रिया थे। आस्थावान व परंपरावादी जॉर्ज बुश नैतिक रूप से असंयमी बिल क्लिंटन की प्रतिक्रिया में चुने गए थे।

2018 में डेमोक्रेटिक पार्टी में चुनाव का माहोल बनने लगेगा तो तय है कि राजनीति का पेंडुलम किसी ऐसे व्यक्ति की ओर जाएगा, जो ट्रंप जैसा बिल्कुल नहीं होगा। इसमें मुश्किल यह है कि थ्योरी यह नहीं बताती कि वोटर (मतदाता) कौन-से गुण सुधार चाहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि ट्रंप फोनी पॉपुलिस्ट हैं यानी भ्रष्ट बिजनेसमैन हैं जो पहले वादे करते हैं और फिर अपनी सरकार बैंकरो व लॉबिस्ट (हितों की पैरवी करने वाले) को सौंप देते है। इस हिसाब से पेंडुलम 2020 में 79 वर्ष के हो रहे सीनेटर बर्नी सेंडर्स की ओर झुकता है। वे डेमोक्रेट उम्मीदवारों के लिए लिटमस टेस्ट (जांच) साबित होंगे।

कुछ अन्य लोग ट्रंप को नस्लवादी कट्‌टरपंथी मानते हैं। इस हिसाब से उन्हें मैसाच्युसेट्‌स की सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन एंटी (विरोधी) -ट्रंप पैकेज दिखती हैं। दादागिरी बताने वाले बैंको व बिजनेस (कारोबार) पर उन्हें बहुत गुस्सा आता है। कुछ मानते हैं कि वोटर पेशेवर राजनेताओं से ऊब गया है। कुछ सोचते हैं कि ट्रंप विषैला प्रचार करके जीते हैं तो विविधतापूर्ण अर्बन भविष्य का प्रतिनिधित्व करने वाली भारतवंशी कमला हैरिस भी दावेदार हैं।

रूस: -रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को वहां ज़ार कहा जाता है, यानी ऐसा शासक जो अपना शासन लंबे समय तक बनाए रखना चाहता है। वर्ष 2018 में 18 मार्च से 1 अप्रैल तक वहां चुनाव होंगे, निश्चत ही उसमें पुतिन की जीत तय होगी। रूस में अलेक्सी नाक्लनी विपक्ष के मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे थे, जो राष्ट्रपति चुनाव लड़ते। लेकिन मुश्किल है कि वे चुनाव लड़ पाएं क्योंकि उन्हें चुनाव लड़ने से ही अयोग्य ठहरा दिया गया है।

संभव है कि अलेक्सी देशभर में पुतिन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करें। 2018 के प्रारंभ से ही उनका अभियान शुरू होगा, उन्हें युवाओं का जबर्दस्त समर्थन प्राप्त है। यह भी हो सकता है कि पुलिस उनके हजारों समर्थकों को उठाकर जेल में बद कर दें। पुतिन के लिए यह चुनाव तकनीकी प्रश्न हो गया है, वे मानते हैं कि परंपरा का सम्मान होना चाहिए। लेकिन इसका कोई महत्व नहीं है, यह चुनाव नहीं बल्कि ताजपोशी है। इसी के साथ उन्हें और छह वर्ष के लिए राष्ट्रपति का कार्यकाल मिल जाएगा। उसके अंत में पुतिन ऐसे राष्ट्रपति बन जाएंगे, जिन्होंने रूस पर 24 वर्ष शासन किया।

रूस में असली षड्‌यंत्र की शुरुआत इस चुनाव के अंत में होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि संविधान के अनुसार तो यह पुतिन का आखिरी कार्यकाल होगा। आगे देखना रोचक होगा कि वे संवैधानिक नियमों के साथ किसी तरह बदलाव करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं। निश्चित ही इस चुनाव में उनकी विजय ‘पुतिन बाद के’ युग की शुरुआत होगी।

यूरोप: -आधुनिक कारें पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर हैं। लोग कार चलाते हैं तो डेटा (आंकड़ा) इकट्‌ठा होता जाता है, जिसे वाहन को सुधारने में इस्तेमाल किया जाता है। यदि बहुत सारी कारें डेटा दें कि सड़क के किसी खास हिस्से में ऑटोमेटिक (स्वचालित) ब्रैकिंग सिस्टम (प्रबंध) सक्रिय हो गया तो यह खतरनाक मोड़ का संकेत है।

फिर भी जर्मनी में यह नहीं होता। कारण है प्राइवेसी रूल (निजी नियम) । यूरोपीय कानून लोगों को डेटा का मालिकाना हक देता है। इससे सारे डेटा को इकट्‌ठा करके कोई उपयोगी नतीजा निकालने में दिक्कत आती है। इसलिए प्राइवेसी (नीज) की सुरक्षा में सड़के थोड़ी असुरक्षित रह जाती हैं। यह दशा कई तरह से पूरे यूरोप में दोहराई जाती है। मई 2018 में जब जनरल डेटा (आंकड़ा) प्रोटेक्शन (सरुक्षा) रेग्यूलेशन (विनियमन) (जीडीपीआर) लागू होगा तो यह डेटा पर लोगों के नियंत्रण को बहुत मजबूत कर देगा और कंपनियों (संघो) द्वारा इसके दुरुपयोग पर पेनल्टी (दंड) कड़ी हो जाएगी। बैंक (अधिकोष) धोखधड़ी को ही लीजिए। एक तरीका यह है कि अपराधी खुद को खाताधारी बताकर फोन करते हैं कि उन्हें कॉन्टेक्ट (संपर्क) डिटेल (विस्तार) और पासवर्ड (सांकेतिक शब्द) बदलना है ताकि बाद में वे खाते से सारी रकम निकाल सकें। कॉल (पुकार) रिकॉर्ड (प्रमाण) किए जाते हैं और जब उसे डेटा में बदलते हैं तो वे ज्ञात ठगो के ‘वॉइसप्रिंट’ (आवाज छाप) होते हैं। लेकिन, ब्रिटेन में प्राइवेसी के कारण बायोमेट्रिक (शारीरिक चिन्हों जैसं ऊँगली के निशानों अथवा आँखों की पुतलियों द्वारा व्यक्ति विशेष की पहचान की पद्धति) वॉइसप्रिंट्‌स (आवाज छाप) बैंको से शेयर नहीं किए जाते। बैंको को अपराधी की आवाज पता लगाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ते हैं। इसलिए साइबर क्राइम की चिंता बनी रहती है।

ऐसा तो कभी सोचा नहीं गया था। इस तरह की गतिविधियों के लिए डेटा का इस्तेमाल करने हेतु अपवाद भी है। समस्या यह है कि कानून से भय का माहौल बनता है। फिर एग्जीक्यूटिव (कार्यकारी अधिकारी) जोखिम लेने की बजाय व्यक्तिगत डेटा के फायदे को छोड़ देते हैं।

वैक्सीन (टीका) : -

  1. मेडिकल (दवा) क्षेत्र के इतिहासकार भविष्य में 2018 को वह साल बताएंगे, जब से ‘एडवांस्ड’ (उन्नत) मेडिसिन (दवा) हकीकत बनना शुरू हुई। अभी दवा मानव कोशिका में बीमारी पैदा करने वाले प्रोटीन (एक रासायनिक सत्त्व) पर किसी छोटे अणु वाली रासायनिक दवा से हमला करती है अथवा शरीर में मौजूद कोई एंटीबॉडी (रोग-प्रतिकारक) उसे ध्वस्त करती है पर एडवांस्ड मेडिसिन ज्यादातर उस डीएनए पर ही काम करती है, जहां रोग पैदा करने वाले अणु जन्म लेते हैं। सबसे महत्वपूर्ण होगा आरएनए इंटरफियरेंस (दखल अंदाजी) (आएनएआई) ड्रग (नशीली दवा) को मंजूरी।

इसे कैम्ब्रिज, मैसाच्युसेट्‌स की बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) फर्म (संगठन) एलनायलम विकसित कर रही है। मैसेंजर (दूत) आरएनए डीएनए से महत्वपूर्ण जानकारी शरीर की प्रोटीन बनाने वाली फैक्ट्रियों (कारखानों) में ले जाता है। इसकी दवा पेटीसिरन कोशिका के बीच सूचना के इसी आदान-प्रदान में दखल देती है। इससे तंत्रिका में गड़बड़ी के दुर्लभ रोग का ईलाज होगा। इससे उपचार की नई शाखा आरएनएआई का आगाज होगा।

  1. जीन (वंशाणु) थैरेपी (चिकित्सा) भी आगे बढ़ेगी। इसमें किसी वायरस के अंदर जीन के करेक्ट (सही बात) वर्जन को डालकर सही जगह पहुंचाया जाता है। फिलाडेल्फिया की स्पार्क थेरेप्यूटिक्स के लक्सटुर्ना नाम उपचार को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। यह आनुवांशिक गड़बड़ी से दृष्टि खोने वालों के लिए की जाने वाली थैरेपी है। स्पाइनल (रीढ की हड्‌डी में) मस्क्यूलर (पेशी -संबंधी) एट्रॉपी में भी जीन थैरेपी (चिकित्सा) के अच्छे परिणाम मिले हैं। 20 माह का एक बच्चा बना किसी सहारे के बैठ सका, जबकि इस रोग में कोई भी मांसपेशी काम नहीं करती। खून में थक्का न जमने वाली बीमारी हीमोफिलिया की जीन थैरेपी पर भी काम चल रहा है।

एक अन्य जीन थैरपी सीएआर-टी में ब्लड कैंसर के उपचार की संभावना है। इसमें रोगी की श्वेत रक्त कणिका टी सेल्स (कोशिका) को निकालकर उसे जेनेटिक रूप से कैंसर पर हमले लायक बनाते हैं। इससे इलाज की अनुमति हाल ही में दी गई। कोई 40 कंपनियां (संघ) अन्य प्रकार के कैंसर के लिए इसके विकास में लगी हैं। 2018 में इलाज की और मंजूरियों की उम्मीद है। उम्मीद है कि इससे किसी दिन ठोस ट्‌यूमर (फोडा) का इलाज हो सकेगा।

  1. सीधे डीएनए में ही जीन में सुधार करने का तरीका है जीन एडिटिंग (संपादन) - 2018 में इसमें भी काफी तरक्की होने वाली है। जीन एडिटिंग के बहुत से ट्रायल (परीक्षण) की घोषणा होगी, जिनमें से कई चीन में होंगे। सीआरआईएसपीआर नाम की नई तकनीकी में रोगी के जेनेटिक (आनुवांशिक) कोड (गुप्त भाषा) में सटिक एडजस्टमेंट (समायोजन) संभव होता है। इसमें भारी निवेश हुआ है। 2018 में ही फैफड़े के कैंसर की रोगप्रतिरोधक सिस्टम (प्रबंध) को कारगर बनाने वाली जीन एडिटिंग थैरेपी का ट्रायल खत्म होने वाला है। इसके नतीजों का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

इस सारी तरक्की के बावजूद एडवान्स्ड मेडिसिन बहुत महंगी है और दुर्लभ रोगों का उपचार करती हैं, जो कम लोगों को होती है लेकिन ऐसा हमेशा नहीं रहेगा। एक दिन यह उपचार पद्धति भी वैसी आम हो जाएगी जैसे आज हम बायोलॉजिक (जीवविज्ञानिक) दवाएं लेते हैं, जिससे हाई (उच्च) कोलेस्टेरॉल जैसी समस्याओं के उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध रहेंगे। इस भविष्य की दिशा में आने वाला 2018 का साल महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा।

मलेरिया: - मलेरिया से मुकाबला 12 वीं सदी की ऐसी सफलता है, जिसकी ज्यादा चर्चा नहीं हुई। 2000 में जोखिम के घेरे में आने वाले 1 लाख लोगों में 47 मारे जाते थे। 2015 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अब मलेरिया से मारे जाने वाले प्रति लाख 19 हैं-60 फीसदी की गिरावट। फिर भी मलेरिया हर साल 4.30 लाख लोगों की जान ले लेता है। 70 प्रतिशत पांच साल से कम आयु के बच्चे होते हैं।

  • 2018 में बदलाव शुरू होगा। इस साल मलेरिया की सबसे घातक किस्म के लिए जिम्मेदार प्लास्मोडियम (मलेरिया) फैलसीपेरम के खिलाफ पहले असरदार वैक्सीन (टीका) का व्यापक परीक्षण शुरू होगा। आरटीएस, एस खासतौर पर बच्चों को दिया जाएगा। ब्रिटेन की ग्लैक्सों (आकाशगंगा) स्मिथक्लाइन और अमेरिका की ग्लोबल (विश्वव्यापी) हैल्थ (स्वास्थ्य) चैरिटी (दानी संस्था) साथ मिलकर इसे 2001 से विकसित करने मेें लगी थीं। मलेरिया का वैक्सीन बनाना बहुत कठिन है। आमतौर पर वैक्सीन बनाने में निष्क्रिय किए या मरे हुए वायरस का इस्तेमाल होता है पर प्लास्मोडियम में यह काम नहीं देता। यह बैक्टीरिया (जीवाणु) अथवा वायरस की तुलना में बहुत जटिल सूक्ष्मजीवी है, जबकि यह एककोशीय है। इसलिए वैक्सीन ऐसा होना चाहिए कि वह शरीर को रोगप्रतिरोध प्रणाली को पूरे प्लास्मोडियम बजाय उसके सबसे कमजोर हिस्से पर हमला करने की दिशा दे।
  • आरटीएस, एस के आविष्कारकों को मलेरिया के स्पोरोजोइट्‌स (बिजाणुज) में एक प्रोटीन के रूप में कमजोर कड़ी पता चल गई। प्लास्मोडियम के जीवन चक्र में स्पोरोजोइट मच्छर की लार ग्रंथि में बनने वाला चरण है। मच्छर जब काटता है तो यह रक्त में से होकर लिवर (जिगर) में पहुंचता है और अगले चरण मीरोजोइट में बदलता है। स्पोरोजोइट पर ही रोक दे ंतो संक्रमण शुरू में ही खत्म हो जाता है। वैक्सीन (टीका) में वही प्रोटीन होता है, जिसे प्रयोगशाला में बड़ी मात्रा में बनाया जाता है। शरीर की प्रणाली उसे पहचानना सीख जाती है और स्पोरोजोइट मार डालती है। परीक्षण घाना, केन्या और मलावी के 5 से 17 माह के 3.60 लाख बच्चों पर किया जाएगा। 2014 में हुए इस वैक्सीन के सबसे बड़े ट्रायल (परीक्षण) में संक्रमण 40 फीसदी घट गया था।
  • उधर, संक्रामक रोगों का बार-बार दोहराव हो रहा है। पश्चिम अफ्रीका में ईबोला, लेटिल अमेरिका में जीका और मीडिल (मध्य) ईस्ट (पूर्व) रेस्पीरेटरी (श्वसन) सिंड्रोम (लक्षण) (एमईआरएस) जिसकी शुरुआत सऊदी अरब में हुई। अब इन महामारियों से निपटने की योजना बनाई जा रही है।

उपसंहार: - इस प्रकार यह नया साल आर्थिक व मेडिकल क्षेत्र की दृष्टि से लोगों के लिए अच्छा होने वाला हैं। जिससे जनता को काफी लाभ होगा।और अन्य क्षेत्र में क्या जनता को क्या लाभ होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

- Published/Last Modified on: January 23, 2018

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