आसियान देश (ASEAN Countries- in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: -आगामी 26 जनवरी को दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन एसोसिएशन ऑफ (के) साउथ (दक्षिण) ईस्ट (पूर्व) एशियन नेशन्स (आसियान) के 10 देशों के प्रमुख हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए हैं। आसियान के सदस्य देशों इंडोनेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर, मलेशिया, ब्रुनेई, थाइलैंड, म्यांमार, लाओस, वियतनाम और कंबोडिया के राष्ट्र प्रमुख सभी ने गणतंत्र दिवस समारोह की गरिमा बढ़ायी। इसके अलावा भारत-आसियान वार्ता के 25 वर्ष पूरे होने पर भारत की मेजबानी में आयोजित आसियान स्मारक शिखर सम्मेलन में भी शामिल हुए। इस सम्मेलन में आपसी कारोबार बढ़ाने, आतंकवाद से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने, नौवहन सुरक्षा-सहयोग को बढ़ावा देने और संपर्क को मजबूत बनाने के अलावा आपसी हितों के विषयों पर भी चर्चा हुई थी। इसके अलावा आसियान देशों के वाणिज्य एवं वित्तमंत्री तथा उनके बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल आसियान इंडिया (भारत) कारोबार एंड इन्वेस्टमेंट (निवेश) मीट एंड (और) एक्सपो (प्रदर्शनी) में भाग लेकर कारोबार की नई संभावनाएं भी खोजेंगे। गौरतलब है कि पहले एनडीए सरकार द्वारा पूरब की ओर देखो नीति अपनाई गई थी लेकिन अब नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने पूरब में काम करो की नीति को अपनाया है।

आसियान संगठन: -उल्लेखनीय है कि आसियान संगठन के दस देशों की कुल जनंसख्या 64 करोड़ से अधिक है। इन देशों का मौजूदा संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद करीब 2.8 लाख करोड़ डॉलर (मुद्रा) है। इसके अलावा आसियान देशों की एक हजार अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मुक्त व्यापार क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है। आसियान देशों की अर्थव्यवस्था विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आसियान देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों की शुरुआत वर्ष 1990 के दशक में हुई थी। आसियान देशों ने जनवरी 1992 में भारत को क्षेत्रीय संवाद सहयोगी और दिसंबर 1995 में पूर्ण वार्ताकार सहयोगी का दर्जा प्रदान किया था। तब से आसियान देशों के साथ भारत के आर्थिक-सामाजिक संबंध लगाकार बढ़ रहे है। भारत और आसियान देशों के बीच मुख्यत: इलेक्ट्रॉनिक्स (विद्युत), रसायन, मशीनरी (यंत्र) और टेक्सटाइल्स (कपड़ें) का कारोबार होता है। वर्तामन में भारत आसियान व्यापार वर्ष 1990 में मात्र 2.4 अरब डॉलर का था वहीं वह वर्ष 2016 - 17 में बढ़कर करीब 80 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। सरकार का इसे वर्ष 2022 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसमें कोई दो मत नहीं कि कई आसियान देश भारत के साथ विभिन्न आर्थिक साझेदारी के साथ सामरिक सहयोग की भी आशा रखते है। चूंकि आसियान देश समुद्री सीमाओं पर चीन के क्षेत्रीय व दबावपूर्ण मंसूबों से त्रस्त हैं, इसलिए वे लोकतांत्रिक भारत को अपना समुद्री मित्र मानते हुए आर्थिक संबंधों में उपयोगिता देख रहे हैं। आसियान का मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और भारत का सॉफ्टवेयर उद्योग आपस में जुड़ जाएं तो यह पूरा इलाका आर्थिक प्रगति के कीर्तिमान रच सकता है।

डॉ. जयंतीलाल भंडारी, आर्थिक मामलों के जानकार, आर्थिक विषयों पर अध्यापन, नेशनल (राष्ट्रीय) एकेडमी फॉर (के लिये) ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) एंड (और) रिसर्च (अध्ययन) इन (में) सोशल (सामाजिक) सिक्योरिटी (सुरक्षा) में शोध सलाहकार रहे हैं।

भारत: -विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आसियान के साथ और अधिक गहरे आर्थिक संबंधों की वकालत करते हुए कहा कि भारत साझी सुरक्षा और समृद्धि के दोहरे सिद्धांत पर काम करना चाहता है। उन्होंने आसियान के सदस्य देशों और भारत के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश और शिक्षा व सांस्कृतिक विरासतों के संवर्धन के क्षेत्र में विस्तृत सहयोग देने पर जोर दिया।

  • सिंगापुर में आसियान-भारत प्रवासी दिवस समारोह में सुषमा स्वराज ने कहा है कि आसियान देशों के साथ मधुर संबंध हमारी प्राथमिकता है। इंडोनेशिया आसियान देशों में एक बड़ा लोकतंत्र और आर्थिक शक्ति है। इंडोनेशिया की इस क्षेत्र में शांति कायम रखने में अहम भूमिका है। उन्होंने कहा, भारत आसियान देशों के साथ आगे बढ़ने की योजना बना रहा है। भारत से थाईलैंड की त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना काफी प्रगति कर रही है। पूरा दक्षिण पूर्व एशिया एक-दूसरे और विश्व के साथ साझेदारी में वृद्धि कर रहा है और आसियान क्षेत्र एशिया की सफलता का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा, ’भारत और आसियान का भविष्य संभावनाओं और जिम्मेदारियों से भरा हुआ है। हमारे उत्तर-पूर्व क्षेत्र तभी समृद्ध होंगे, जब यह दक्षिण-पूर्वी एशिया से जुड़े हुए होंगे। उन्होंने इस क्षेत्र में आम चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जैसे डिजिटल (अंकसंबंधी) युग के लिए कौशल बनाना, व्यवधान की स्थिति में नौकरियां पैदा करना, तेजी से शहरीकरण की आवश्यकता को पूरा करना, जैव-विविधता की सुरक्षा, ऊर्जा स्रोत क्लीनर (सफाई वाला) बनाने और उत्पादक कृषि के लिए जागरूकता फैसला पर जोर दिया।
  • सुषमा ने कहा, आसियान के साथ भारत की वार्ता भागीदारी एक सामरिक भागीदारी में बदल गई है और भारतीय समुदाय समूह के साथ संबंधों को और मजबूत करने का एक मंच उपलब्ध कराता है। हम यहां अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं और दुनिया में भारत और आसियान के भविष्य की दिशा साझा करते हैं। जब सभी देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हैं और जब हम सार्वभौम समानता एवं परस्पर सम्मान के आधार पर आचरण करते हैं तब हमारे देश खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं और हमारी अर्थव्यवस्थाएं समृद्ध होती हैं।
  • दुनिया में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा व्यक्तित्व है। मोदी जिस भी देश में जाते हैं, निजी दोस्ती के साथ दो देशों के संबंधों में भी मजबूती आ जाती है।
  • सुषमा स्वराज ने कहा, आज भारत के 16 शहर सिंगापुर से जुड़े हैं। भारत से थाईलैंड के बीच त्रिपक्षीय हाइवे (मुख्य मार्ग) प्रोजेक्ट (परियोजना) जारी है और इसे आगे भी बढ़ाने की योजना है जिससे भारत को दूसरे एशियाई देशों से जोड़ा जा सके। सुषमा ने कहा कि ये साल मील के पत्थरों का वर्ष है। पिछले साल भारत 70 वर्ष का हुआ, आसियान देश 50 का हुआ और भारत-आसियान मैत्री 25 साल की हुई।

उपसंहार: - कुल मिलाकर आसियान देश भारत वर्ष के लिए फायदा ही करता रहा है और आगे भी इसी तरह आसियान संगठन भारत का साथ देता रहे तो भारत का आगे भी तीव्र गति से विकास होता रहेगा।

- Published/Last Modified on: March 15, 2018

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