एलियंस(पराग्रह्यी)का अस्तित्व और मानव सभ्यता (Aliens & the Existence of Human Civilization) (Download PDF)

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प्रस्तावना:- अंतरिक्ष के असीम विस्तार में पृथ्वी के आगे भी जीवन की संभावनांए हैं। विज्ञान कथाओं और फिल्मों ने इन एलियंस (पराग्रह्यी) को हमारी स्मृति में रोप (गाढ़) दिया है। इनके अस्तित्व पर शोध जारी है। हाल ही में मशहूर वैज्ञानिक ’स्टीफन हॉकिंग’ एलियंस से संपर्क नहीं करने और मानव अस्तित्व को इनसे खतरा बताया है। हॉकिंग का कहना है कि एलियंस हमसे बेहतर तकनीक वाले जीव हो सकते हैं। जबकि कुछ अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि ये आशंका निर्मूल भी हो सकती है। अंतरिक्ष ने मानव को हमेशा से खोज के लिए प्रेरित किया है। वर्तमान में मानव ने अंतरिक्ष अन्वेषण की नई ऊंचाइयों की ओर कदम बढ़ाए हैं। आज अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (दूरी स्थान/अंतर) भी है तो ब्रह्यांड की गुत्थी को सुलझाने के लिए सर्न में प्रयोग चल रहे हैं। एलियंस के बारे में कल्पना को वैज्ञानिक आधार पर भी समझा जाना होगा। फिर भी बड़ा सवाल है कि एलियंस यदि है तो वे खतरनाक है या मित्रवत। एलियंस यदि भविष्य में पृथ्वी पर आ गए तो फिर क्या होगा, क्या पता, क्या खबर?

  • अंतरिक्ष:- आकाश की ओर देखने पर एक सवाल दिमाग में कौंधता है कि क्या हम इस अंतरिक्ष में अकेले हैं। एक ऐसा भी दौर था जब विज्ञान ये मानता था कि पृथ्वी अंतरिक्ष का केंद्र है। सभी आकाशीय ग्रह-उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। इस विचार के अनुसार पृथ्वी बहुत ही विशेष ग्रह के रूप में थी। और शायद ये सोचने भी उसी समय से आधार बनाना शुरू कर दिया था कि अंतरिक्ष में पृथ्वी नामक ग्रह पर ही जीवन हैं। लेकिन उस दौर से हम वर्तमान तक के सफर में बहुत आगे निकल गए हैं।
  • ज्ञान:-अंतरिक्ष के बारे में हमारा ज्ञान बहुत विकसित हो गया है। अब हम जानते हैं कि अंतरिक्ष का विस्तार अनंत है। करोड़ों ग्रह और तारे हमारी आकाशगंगा में मौजूद हैं। फिलहाल, हमें किसी भी अन्य ग्रह पर जीवन के बारे में प्रमाणिक रूप से जानकारी और तथ्य नहीं हैं लेकिन संभावनाओं के सिद्धांत के अनुसार ये माना जाता है कि करोड़ों ग्रहों में से कुछ में तो जीवन संभव होगा। अथवा वहां भी जीवन विकसित हो रहा होगा।
  • नासा:-नासा के प्रसिद्ध वैज्ञानिक केविन हैंड का कहना है कि अंतरिक्ष के असीम विस्तार को देखते हुए ये असंभव लगता है कि केवल पृथ्वी पर ही जीवन पल्लवित हुआ हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाएं तलाशने का सबसे अच्छा तरीका है वहां पर तापमान और ऑक्सीजन की खोज की जाए। यही जीवन की किरण है। नासा के केपलर स्पेस क्राफ्ट (दूरी कौशल/जहाज) से अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाएं तलाशी जा रही है। आकाशगंगा में खोज के दौरान पृथ्वी के जैसे चंद ग्रह के बारे में तथ्य सामने आए हैं। इन ग्रहों पर जीवन हो सकता है। लेकिन ये आशंका भी है कि पृथ्वी जैसा दिखने पर ही वहां पर जीवन हो ये मानना जल्दबाजी भी हो सकती है। वहां अत्यधिक तापमान भी हो सकता है जिसके कारण जीवन पनपना संभव ही नहीं हो।
  • माध्यम:-अभी हम अंतरिक्ष यान और अन्य उपग्रहों के माध्यम से ही ऐसे ग्रहों पर वैज्ञानिक शोध कर पाते हैं क्योंकि इनकी दूरी पृथ्वी से इतनी ज्यादा है कि मनुष्य का वहां जाना फिलहाल संभन नहीं है। हो सकता है कि भविष्य में स्पेस यात्रा से ऐसा संभव हो पाए। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम इस दिशा में बस एलियंस के दव्ारा संपर्क करने के इंतजार में हैं। सेटी (सेंटर फॉर एवस्ट्रा टेरिस्टियल इंजेलीजेंस) इस दिशा में काम कर रहा है। वर्ष 1960 में रेडियो टेलीस्कोप (दूरबीन) से एलियंस से संवाद करने की कोशिशें की गई थीं। अभी तक हमारे दव्ारा भेजे गए रेडियों संकेतो का कोई जवाब नहीं मिला है।
  • चीन:-चीन ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक बहुत ही शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप बनाने का काम शुरू किया है एक अध्ययन के अनुसार अभी ऐसी तकनीक विकसित नहीं हो पाई है जिससे कि हम ये जान सकें कि एलियंस ने हमारे संकेतो को प्राप्त किया अथवा नहीं। वैज्ञानिकों को भरोसा है कि वर्ष 2025 तक एलियंस के बारे में हमें और पता चल सकेगा।
  • संकेत:- दुनिया में कई ऐसे कई अनसुलझे रहस्य है जिनके बारे में कहा जाता हैं कि ये एलियंस के बारे में पहेलियां हैं। इनमें दक्षिण अमरीका की नाज्का लाइंस और माचूनीचू के पिरामिड भी हो सकते है। विशेषकर यूरोप और अमरीका में खेतों में रातों-रात बन जाने वाले क्रॉप सर्किल्स (प्रत्यक्ष होना या सतह पर आ जाना) और एलियंस संकेत भी इन्हीं में से एक हैं।
  • क्रॉप सर्किलस:- के बारे में एक सिद्धांत चला करता है कि इन्हें एलियंस के दव्ारा बनाया गया है। गूढ़ आकृतियों को देखकर हर कोई दंग रह जाता था कि वाकई में ये मानव निर्मित है अथवा इन्हें एलिंयस के दव्ारा बनाया गया है। लेकिन वर्ष 1991 में दो ब्रिटिश लोगों ने कुछ पत्रकारों के सामने ऐसे क्रॉप सर्किल्स को बना कर इन्हें एलियंस दव्ारा बनाए जाने को खारिज कर दिया था। कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्होंने एलियंस से मुलाकात की है और रेडियो संकेत प्राप्त किए हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने अब तक के ऐेसे दावों को पुष्ट नहीं किया हैं। एलियंस के अस्तित्व के बारे में ये दावे अभी तक पहेली के समान हैं, जिनका सुलझना अभी बाकी है।
  • शक्तिशाली:- हॉकिंग कहते हैं, किसी ग्रह से कोई संकेत मिल सकता है लेकिन हमें उसका जवाब देने से पहले सावधान हो जाना चाहिए। वे हमसे कहीं अधिक शक्तिशाली होंगे और उनके लिए हमारा मूल्य बैक्टीरिया (जल,वायु में सूक्ष्म जीवाणु) से अधिक नहीं होगा।
  • अंतरिक्ष यान:- ’द ब्रैकथू लिसनिंग प्रोजेक्ट’ (योजना) में पृथ्वी के नजदीकी तारे ’अल्फा सेंटोरी’ तक बिस्किट के आकार के कई अंतरिक्षयान भेजे जाएंगे। ये अंतरिक्षयान अगर प्रकाश की मात्र 20 प्रतिशत गति से भी गए तो बीस वर्षों में अल्फा सेंटोरी पहुचेंगे।
  • तारो की खोज:- हॉकिंग ने 10-वर्षीय ’द ब्रैकथू लिसनिंग प्रोजेक्ट’ शुरू किया था जिसके तहत शक्तिशाली दूरबीनों से हमारी पृथ्वी के लगभग दस लाख नजदीकी सितारों का जीवन के चिन्हों के लिए गहन अध्ययन किया जाएगा।
  • तारामंडल:- हमारे ब्रह्यांड में मौजूद आकाश गंगा में विद्यमान 100 अरब जैसे तारो में से एक तारा है। ब्रह्यांड में 100 अरब तारामंडल है। इस ब्रह्यांड में धरती पर समुद्र किनारों पर मौजूद रेत के कणों के जोड़ से भी ज्यादा तारे विद्यमान हैं।

अंतरिक्ष के विषय महत्वपूर्ण बिन्दू निम्न हैं-

  • 14 अरब साल पहले बिन्दू था अंतरिक्ष, बाद में हुआ विस्तार।
  • सबसे पुराने तारे एचई-1523-0901 की उम 13.2 अरब साल के लगभग हैं।
  • धरती का चक्रण हर सौ साल बाद 1.4 मिली सैकण्ड कम होता हैं।
  • चांद हर साल धरती से 3.4 सेंटीमीटिर दूर चला जाता हैं।
  • 27 करोड़ तारे रोज पैदा होते हैं।
  • 8000 से ज्यादा कबाड़ के टुकड़े धरती की कक्षा में घूम रहे हैं।
  • प्रकाश की गति से चलने पर भी आकाशगंगा 01 लाख साल में पार होगी।
  • 33 प्रकाश वर्ष दूर एग्जोप्लानेट है, जो प्रचंड बर्फ से ढका हुआ हैं।
  • सूर्य को तारामंडल का चक्कर लगाने में 2250 लाख वर्ष लगते हैं।
  • ब्रह्यांड 70 प्रतिशत डार्क शक्ति से बना 25 प्रतिशत डार्क मैटर है।
  • सौरमंडल का 98 प्रतिशत द्रव्यमान सूर्य में ही निहित है।
  • सौरमंडल धरती में 05 वां बड़ा ग्रह है।
  • खतरा:- यदि आपने हॉलीवुड फिल्म ’इंडिपेंडेंस डे’ (स्वतंत्रता) देखी है तो फिर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के एलियंस के बारे में खतरे से आप वाकिफ होंगे। हाकिंग भी यही कहते हैं कि एलिंयस से संवाद करने की कोशिश मानव सभ्यता के लिए घातक हो सकता है। बड़ा सवाल है कि क्या एलियंस का अस्तित्व है? यहां हम उन एलियंस के बारे में बात कर रहे हैं जो कि फिल्मों से अलग हैं। हो सकता है कि वो मानव के समान हों या बिल्कुल अलग हों। अंतरिक्ष में कोई एलिंयस सभ्यता विकसित भी है तो भी हमें उसके बारे में समय लगेगा। खतरें को भांपने से पहले उन एलियंस के बारें में पता भी करना होगा। सेटी के प्रमुख सेत शोस्टक आशंकाओं के खारिज करते हुए कहते हैं कि एलियंस के बारे में नकारात्मकसोच सही नहीं है, हो सकता हैं कि एलियंस ऐसी आदर्श सभ्यता हो जिसकी हम कल्पना ही करते हैं। चीन ने हाल में रेडियों तरंगे पकड़ने के लिए बड़ी टेलीस्कोप (दूरबीन) बनानी शुरू की हैं।

चर्चित केस:- एलियंस से मुलाकात के कुछ मामले विश्व में समय-समय पर चर्चा में रहे हैं। इन पर सवाल भी उठते रहे हैं।

  • देखी उड़नतश्तरियां- जॉर्ज फडमस्की ने कैलिफोर्निया में माउंट पैलोमर वेधशाला के समीप 200 से ज्यादा बार उड़नतश्तरियों को गुजरते देखने और वर्ष 1952 में उसने शुक्र ग्रह से आए एलियंस से मुलाकात का दावा भी किया था। उन्होंने कई किताबे भी लिखीं। उनके दव्ारा खीचे गए चित्र काफी विवादित रहे।
  • लाइट बीम क्रिडनैम- न्यूयॉर्क के मैनहैटन इलाके में नवंबर, 1989 को तड़के तीन बजे एक महिला लिंडा पेनोलिटानों को 20वीं मंजिल पर स्थित उसके अपार्टमेंट (मकान का एक कमरा) से एलियंस ने कथित रूप से लाइट (रोशनी) बीम (प्रकाश की किरण) के जरिये अगवा कर लिया था। दिलचस्प तथ्य है कि इस घटना के कई चश्मदीद भी थे।
  • तस्वीरों से सनसनी- वर्ष 1968 में दक्षिण अटलांटिक महासागर से गुजरते ब्राजील नेवी के जहाज पर सवार 48 नौसैनिकों ने कई उड़नतश्तरियों को उड़ते हुए देखा। इसकी तस्वीरों से सनसनी फैल गई। अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति ने इसकी जांच के आदेश भी दिए। बाद में चित्र खीचने वाले पर सवाल भी खड़े हुए।
  • बेल्जियम में बवाल- वर्ष 1989 में बेल्जियम में 90 फीसदी लोगों ने आकाश में यूएफओ को देखे जाने के बारे में बताया। 8 महीने के दौरान लगभग 800 से ज्यादा लोगों ने एलियंस से आमना-सामना होने की बात कहीं। बवाल मचने पर की गई सरकारी जांच में पाया गया कि ये नाटों के विमान हो सकते थे।
  • कोलकाता- वर्ष 2007 में 39 अक्टुबर की तड़के सैंकड़ो लोगों ने आकाश में यूएफओ देखा। कुछ ने इसकी वीडियो फिल्म भी बनाई। समाचार चैनलों में इसकी विलप भी चलाई गई। बाद में इसे जांच के लिए भेजा गया तो बिलड़ा प्लेनेटोरियम ने इस यूएफओं को शुक्र ग्रह करार दिया।

                                                                                                                                (साहिल भल्ला का विवरण)

  • साइंस फिक्शन आधारित फिल्में (चलचित्र)- स्पेस ओडिसी, द ईयर वी मेक कॉन्टेक्ट, द एडवेंचर ऑफ प्लूटो नेश, एलियन वर्सेज प्रीडेटर, आर्मागेडन, द इंडिपेंडेंस डे, ग्रेविटी अपोलो-13, अपोलो-18, अवतार, कॉन्टेक्ट, कोई मिल गया, पीके, द फिपथ एलीमेंट, गॉड पार्टिकल

सभ्यता का संघर्ष:-

  • अनंत अंतरिक्ष में असीम संभावनाएं हैं। सीधा सा तर्क है कि समूची आकाश गंगा में कई ग्रह हैं। इनमें से अनेक में जीवन हो सकता है। विज्ञान ने हमें तार्किक सोच का आधार दिया है। नासा ने कैपलर मिशन से आकाशगंगा में जीवन के पनपने लायक परिस्थितियों वाले ग्रहों की खोज में है। कई तथ्य भी सामने आए है। पृथ्वी पर लगभग 3.8 अरब वर्ष पूर्व जीवन की उत्पत्ति हुई थी, तब का एक जीवाश्म हमें मिला है। इससे पहले पृथ्वी अत्यधिक गर्म पिंड के समान थी। यदि हमारी पृथ्वी आकाशगंगा का वह ग्रह है जहां जीवन है तो फिर असंख्य ग्रह भी मौजूद है, ऐसे में वहां पर भी जीवन हो सकता है।
  • दूसरे ग्रहों में जीवन को तलाशने के लिए वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। बड़ा सवाल है कि अन्य ग्रहों के जीवों जिन्हें हम एलियंस कहते हैं यदि उनसे संपर्क में आए तो फिर क्या होगा? ये सभ्यताओं का संघर्ष हो सकता है। दव्तीय विश्व युद्ध के दौरान से वैज्ञानिकों के प्रयास ब्राह्य अंतरिक्ष की ओर बढ़े हैं। तकनीक के विकास के साथ उपग्रहों को भेजने जैसे कार्यक्रम कई देशों ने शुरू किए। रेडियो प्रसारण, टेलीविजन और अब मोबाइल।
  • इन सभी की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) अंतरिक्ष में जाती है। यानी यदि अंतरिक्ष में यदि कोई सभ्यता है तो वो हमारे संदेशों को पकड़ सकती हैं। हमसे संपर्क कर सकती है। विज्ञान फिल्मों से अलग एलियंस का आकार अलग भी हो सकता है। लेकिन इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। वे प्राणी जिन्हें हम एलियंस कहते हें। वो कैसे होंगे। लेकिन आशंका है कि वे हमसे अधिक उन्नत तकनीक के जानकार भी हो सकते हैं। उनसे संपर्क बढ़ाया तो फिर हमें खतरा हो सकता है। पृथ्वी पर व्याप्त समस्याओं और देशों के बीच शत्रुता का फायदा वे उठा सकते हैं। जैसा कि हमने देखा है कि यूरोपीय लोगों के जाने से माया, एजटेक, रेड इंडियन (लाल रंग के भारतीय) और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की सभ्यता का खात्मा ही हो गया। कभी ये सभ्यताएं काफी विकसित थीं, लेकिन दूसरी सभ्यता की विभिन्नता ने उन्हें नष्ट कर दिया। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि एलियंस हमसे कमतर तकनीक वाले भी हो सकते हैं अथवा समकक्ष तकनीक के जानकार भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में भी हमारी और उनकी सभ्यताओं में संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।

                                                                                                                        अमिताभ पाण्डेय, खगोल विज्ञानी

अंतरिक्ष में भेजे गए संदेश निम्न हैं-

  • पायनियर संदेश- सच यह है कि आज खगोलविदों ने शक्तिशाली टेलीस्कोपों से अनंत आकाश में झांक कर ब्रह्यांड के अनेक रहस्यों का पता लगा लिया है। उनमें से एक रहस्य यह भी है कि ’जहां और भी हैं सितारों से आगे’। तो, क्या सचमुच पृथ्वी के अलावा भी ब्रह्यांड में कहीं जीवन का अस्तित्व है? केप केनेडी से वर्ष 1972 में छोड़े गए पायनियर-10 अंतरिक्ष यान में एक धातु पट्‌िटका पर उकेर कर एलियंस के नाम धरती के निवासियों का संदेश भेजा गया था। उसमें एक से दस तक की बाइनरी संख्याएं, पांच मूलभूत तत्वों की परमाणु संख्या, डीएनए कुंडली और पृथ्वी पर खड़े मानव का रेखाकंन किया गया था। पायनियर 10 दशकों पहले सौरमंडल की सीमा के पार चला गया था।
  • वायेजर संदेश:-वर्ष 1977 में वायेजर-1 तथा वायेजर-2 अंतरिक्ष यान छोड़े गए। उनमें अज्ञात ग्रहों से अनजाने प्राणियों के लिए लोंग’प्लेंइंग प्रामण के रूप में दृश-श्रव्य संदेश भेजा गया। संदेश में पृथ्वी की तमाम आवाजें और चित्र भेजे गए। उनमें भारत की एक भीड़ भरी सड़क, ताजमहल का चित्र और केसरबाई केलकर के गाए ’राम तुम जात कहां हो’ का अंश भी शामिल था। आज विश्व के तमाम देशों में परग्रही जीवों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
  • बर्हिग्रहों :-सौरमंडल से बाहर के यानी बर्हिग्रहों में जीवन की सबसे अधिक संभावना जताई जा रही है। अब तक ऐसे अनेक ग्रह खोजे जा चुके हैं जो अपने-अपने तारों की परिक्रमा कर रहे हैं। लेकिन, सवाल यह है कि जिन हजारों बहिर्ग्रहों का पता लगा है, क्या उनमें जीवन का अस्तित्व हो सकता है। क्या वहां सचमुच एलियन जीवन होगा? अगर होगा तो वह किस प्रकार का जीवन होगा? सूक्ष्म जीवों जैसा या प्राणियों जैसा? क्या वहां हमारी तरह बुद्धिमान जीव होंगे? लेकिन, स्टीफन हॉकिंग के विपरीत अनेक आशावादी वैज्ञानिकों का कहना हैं कि कोई जरूरी नहीं, एलियन खलनायक ही साबित हों और हमारी सभ्यता को नेस्तानाबुद करके पृथ्वी पर अपना राज चलाएं। कई दशकों से परग्रही बृद्धिमान जीवों का पता लगा रही परियोजना ’सेटी’ के निदेशक सेथ शोस्टक का कहना है कि हो सकता है, वे बृद्धिमान जीव एक आदर्श दुनिया में रहते हो जिन्हें खुद भी शांति, अमन और अच्छे पड़ोसियों की तलाश हो। आखिर हम भी तो पिछले दो लाख वर्षों के अपने इतिहास में अपनी पृथ्वी पर अन्वेषण की राह पर ही चल रहे हैं। जिस प्रकार के प्रयोग हम जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धि और बाह्य अंतरिक्ष के साथ कर रहे हैं, उससे कल किसी अलग ही प्रकार के मानव का विकास हो सकता है जिससे पृथ्वी पर हमारा अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
  • बहरहाल, पृथ्वी से दूर ब्रह्यांड के अन्य ग्रहों में बुद्धिमान एलियन हैं या नहीं, इसका तो पता नहीं लेकिन शायद हमे हस युग के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की यह चेतावनी जरूर याद रखनी चाहिए कि एलियंस से हम जरा दूर ही रहें तो यह मानव सभ्यता के हित में होगा और यह भी कि एलियंस को पृथ्वी की राह दिखाने से हमें बचना चाहिए।
  • हॉकिंग आशंकित हों, मगर यह खूबसूरत कल्पना ही क्या कम है कि इस विराट ब्रह्यांड में हम अकेले नहीं हैं।

                                                                                                                            देवेंद्र मेवाड़ी, विज्ञान लेखक

उपसंहार:-इन सब बातों से यह स्पष्ट है कि हमारे वैज्ञानिक अब भी कोई न कोई खोज करते रहते हैं, जिससे पृथ्वी वासियों को कोई नुकसान न हों। इसलिए आज भी हमारे वैज्ञानिक एलियंस नामक जीव पर खोज और इन से संपर्क करने में लगे रहते हैं कि इनसे हमें खतरा है या ये हमारे दोस्त हैं। अब ये सब बाते एलियंस पर खोज कर की स्पष्ट हो सकती हैं आगे हमारे वैज्ञानिक इनकी खोज पर आगे क्या कर पाते हैं यह तो आने वाले समय पर ही पता पड़ेगा।


- Published/Last Modified on: November 8, 2016

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