कश्मीर के उड़ी में सबसे हमला (Attack in Kashmir’S Uri) (Download PDF)

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प्रस्तावना:- पाकिस्तान से आए जैश-ए मोहम्मद के आत्मघाती आतंकियों की नापाक करतूतों से एक बार फिर घाटी हमारे जवानों के खून से लाल हो गई। झेलम पार कर पीओके से घुसे भारी गोला-बारूद से लैस (कम) चार आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में बारामूला के उरी सेक्टर में एलओसी के पास सेना के एक हेडर्क्वाटर (अध्यक्ष निवास स्थान) पर ग्रेनेड (बारूद से भरा हुआ गोला जो हाथ से या तोप से फेंका जाता हैं।) और एके-47 से हमला कर दिया। 12वीं ब्रिगेड के हेडक्वार्टर (सैन्यदल अध्यक्ष निवास स्थान) के पास कैंपो (शिवरों (सेना का निवास)) में ग्रेनेड (बारूद से भरा हुआ गोला जो हाथ से या तोप से फेंका जाता हैं।) से ताबड़तोड़ हुए हमले और फायरिंग(अग्नि) में कई जवान शहीद व घायल हो गए। इस हमले को 1990 के बाद का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। इस हमले के बाद रक्षा मंत्री मनोहर परिर्कर और सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग फौरन उरी पहुंच गए।

  • हमला:-पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने कश्मीर में सेना पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। सेना के उड़ी ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर 18 सितंबर 2016 रविवार को तड़के हुए इस हमले में 17 जवान शहीद हो गए। इनमें से 13 की मौत टेंट (तंबू) में लगी आग से जिंदा जलने से हुई। 32 जवान गंभीर रूप से झुलसे हैं। जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकी मार गिराए गए। आतंकी कैंप से छह किलोमीटर दूर झेलम से लगते सलामाबाद नाले से दाखिल हुए थे। 19 जवान घायल हो गए।
  • घटना:- मौके पर मौजूद एक सैनिक के मुताबिक आतंकी 3.30 बजे कैंप की पिछली दीवार से घुसे। करीब पौने दो घंटे तक नाइट (रात) विजन (आभास) से शिवर का जायजा लिया। फिर 5.15 बजे फ्यूल (ईंधन) टैंक (ईंजन की टंकी) से डीजल भर रहे निहत्थे जवानों पर धावा बोल दिया। 3 मिनिट में 17 ग्रेनेड दागे। इससे 150 मीटर इलाके में फेले टेंट और बैरकों में आग लग गई। डीजल टैंक में धमाका होते ही आतंकवादी अलग-अलग होकर खाली बैरकों में घुस गए। बाद 5.19 बजे सेना की ओर से जवाबी हमला शुरू हुआ। वहां मौजूद 19 साल के डोगरा जवान ने एक आतंकी को मार गिराया। बाकी तीन बुरी तरह जख्मी थे। तीन आतंकियों ने खाली बैरकों में पोजीशन (जगह) ली।
  • एक जवान के हेलमेट पर भी गोली लग चुकी थी। उसे साथी जवानों ने बाहर निकाला। बैरक खाली थे। आतंकी वहां दूसरे फ्लोर (भूतल) तक पहुंच गए। बाद में 7.12 बजे पैरा कमांडो मौके पर हेलीकॉप्टर से पहुंचाए गए। 7.45 बजे 4 पैरा के कंमाडो ने बचे तीन आतंकियों को मार गिराया। 8.30 बजे लक्ष्य पूरा हुआ।

संक्षेप में घटना:-

  • 18 सितंबर को सुबह 4 बजे झेलम पार कर पीओके के सलामाबाद नाला से होकर चार आतंकी भारत में दाखिल हुआ।
  • सुबह 5 बजे आतंकी हथियारों और ग्रेनेड से लैस थे। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने 24 से 48 घंटे पहले ही घुसपैठ की थी।
  • सुबह 5.30 बजे आतंकी 10 फीट ऊंची बाड़ के तार काटकर आर्मी बेस में घुसे और दो गुटों बंटकर हमला किया।
  • सुबह 7 बजे दो हिस्सों मेें बंटने के बाद आतंकियों ने सबसे पहले सेवा खत्म कर सो रहे डोगरा रेजीमेंट के जवानों के टेंटों पर लगातार ग्रनेड फेंके। 10 टेंटो में आग लग गई। 13-14 जवानों की झुलसने मौत हो गई। शहीदों में 10 डोगरा के और 6 बिहार रेजीमेंट के थे।
  • अहम:- 12 आर्मी ईकाई के आर्मी बेस में डोगरा रेजीमेंट तैनात है। यहां महत्वपूर्ण जंगी हथियार रखे जाते हैं। इसके पीछे पहाड़ियां हैं, जो लाइन ऑफ कंट्रोल (रेखा नियंत्रण) से सटी है। आतंकी झेलम के रासते यहीं से घुसपैठ करते हैं। यह एलओसी के पास के सबसे बड़े बेस में से एक हैं।
  • सामान-आतंकियों से मिले हथियारों और सामान पर पाकिस्तान की मार्किंग है। निदेर्शक जनरल मिलिट्री (फौज) ऑपरेशन ((क्रिया) ले. जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि आतंकवादी युद्ध जैसी तैयारी करके आए थे। उनके पास चार एके-47, चार अंडर बैरेल ग्रेनेड लॉन्चर (शुरू) और भारी मात्रा में गोलाबारूद मिला है। उनके पास आग लगाने वाले हथियार भी थे। हालांकि पाक ने भारत के आरोपों से इनकार किया है।
  • पूर्व हमला-इससे पहले पिछले साल जून में आतंकियों ने मणिपुर में सेना के ट्रक पर हमला किया था। इसमें 18 जवान शहीद हुए थे। इसके दो दिन बाद सेना ने म्यांमार बॉर्डर (सीमा) के अंदर घुसकर उग्रवादियों को मार गिराया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी केन्द्र सरकार ऐसा ही फैसला करेंगी?
  • जवान:- हमले के समय कैंप में 35000 से 4000 जवान मौजूद थे। सेना में लंगर 2.30 बजे काम करना शुरू कर देता है। कुक और बाकी जवान जिनकी खाना बनाने की सेवा थी वो लंगर में काम कर रहे थे। उनके अलावा कुछ जवान सोए हुए थे। हमले के बाद आग और गोलाबारी की आवाज सुन सब घटनास्थल की ओर भागे।
  • इन दिनों कैंप में 10 डोगरा रेजीमेंट के जवानों को 6 बिहार रेजीमेंट (सैन्य दल) के जवान रिलीव (सहायता देना) कर रहे हैं। आतंकियों को संभवत: पहले से ही सेवा बदलने के समय का पता था। इस दौरान जवान आने वाले हालात को समझ रहे होते हैं। जबकि जाने वालों का ध्यान अपनी रिप्लेसमेंट (भर्ती करना) पर रहता है। आशंका है कि बेस से किसी ने यह सूचना आतंकियों तक भी पहुंचाई।
  • नक्शा:-आतंकियों के पास से पश्तों भाषा में बना एक नक्शा मिला है। इससे पता चलता है कि निहत्थे जवानों को निशाना बनाने के बाद आतंकी सेना के चिकित्सा शास्त्र ईकाई पर हमला करने की योजना बनाकर आए थे। यह ईकाई कैंप के एडमिन एरिया के नजदीक है। इसके बाद उन्हें अधिकारी मेस में जाकर खुद को ब्लास्ट (उड़ा) करना था।

अधिकारी:-

  1. ले.जन सैयद अता हसनैन पूर्व में उड़ी ब्रिगेड के कमांडर (आज्ञा देने वाला) रह चुके रहे।
  2. मेजर जनरल एस के राजदान (सेना के आतंकवाद विरोधी डिविजन (विभाग) के प्रमुख रहे चुके हैं)
  • रक्षामंत्री:- रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने 17 सैनिकों के बलिदान का बदला लेने के निर्देश दिए हैं। नॉदर्न आर्मी और चिनार कॉर्प्स के कमांडर ले. जनरल डीएस हुडडा और ले. जनरल सतीश दुआ ने उन्हें उड़ी हमले के बारे में जानकारी दी। कहा जा रहा है कि इसमें जवाबी कार्रवाई के एक्शन प्लान ( गतिविधि योजना) पर बात हुई। इस बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी रूस और अमरीका की यात्रा रद्द कर दी है।
  • खुफिया सूचना:-कश्मीर में दो माह से जारी हिंसा के बीच पाक खुफिया कार्यकर्ता आईएसआई और आतंकवादी गुटों के हमले की सुरक्षा कार्यकताओें को पहले से ही आशंका थी। खुफिया तंत्र ने ईद पर उड़ी और श्रीनगर में बड़े हमले का अलर्ट जारी किया था। ईद पर कड़ी सरुक्षा के चलते आतंकी कुछ नहीं कर पाए। 15 सितंबर को दूसरी बार फिर आतंकी हमले का अलर्ट (चेतावनी) जारी हुआ। इसमें स्पष्ट उल्लेख था कि उड़ी में एलओसी पर किसी अग्रिम चौकी या गश्तीदल पर पाकिस्तानी सेना का बैट दस्ता हमला कर सकता है। इसके अलावा एक आत्मघाती दस्ते के तीन-चार दिन में घुसपैठ करके किसी सैन्य प्रतिष्ठान या नागरिक इलाके में बड़े हमले की चेतावनी दी गई थीं। हालांकि, सैन्य अभियान महानिदेशक ने कहा कि सभी खुफिया चेतावनी गंभीरता से ली जाती हैं।
  • बैठक:- सूत्रों के अनुसार और सैन्य अफसरों ने पीएम मोदी को घाटी के ताजा हालात की जानकारी दी। एलओसी और आसपास के इलाकों में सेना की गतिविधियों और कार्रवाई से जुड़े विस्तृत आंकड़े पेश किये गये। सूत्रों ने बताया कि पीएम ने सुरक्षा अधिकारियों से कहा है कि आतंकियों से निपटने में जरा सी भी कोताही न बरती जाए और उन्हें इसके लिए पूरी छूट है। बैठक का मकसद इसी दशा में प्लान ऑफ ऐक्शन (योजना की साहसिक कार्रवाई) तैयार करना था। सूत्रों का कहना है कि सभा के बाद सरकार जल्द इस आतंकी हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दे सकती है।
  • हालांकि, मोदी जी टॉप मंत्रियों के साथ आतंकी हमले के बारे में चर्चा कर चुके हैं, लेकिन सीसीएस औपचारिक तौर से इस बारे में चर्चा की गई। सरकार के सूत्रों ने बताया कि आम तौर पर सुरक्षा से जुड़े विषयों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा नहीं होती है, लेकिन इस बैठक में उरी हमले पर बातचीत हुई। सूत्रों ने कहा कि सरकार के शीर्ष स्तर पर इस बारे में एक तरह की राय है कि भारत को सोच समझकर, बहुस्तरीय और सामरिक प्रतिक्रिया देनी चाहिए और पाकिस्तान की संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचो पर बेनकाब करना चाहिए। इस योजना के तहत निर्देशक जनरल मिलिटरी ऑपरेशन (फौज क्रिया) उरी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के बारे में अपने पाकिस्तानी समकक्ष को जल्द ही सबूत सौंपेगे। बैठक में ओर भी देशों ने आतंक के विषय अपनी राय दी।
  • यूएन -इतना ही नहीं, यूएन महासचिव बान की मून ने भी महासभा में अपने अंतिम भाषाण में कश्मीर का कोई जिक्र नहीं किया। बान की मून ने सीरियाई संकट, फिलीसतीनी मुद्दे, शरणार्थी संकट और कोरियाई प्रायदव्ीप में तनाव समेत कई वैश्विक मुद्दों का जिक्र किया, मगर किसी ने उन्हें तवज्जों नहीं दी।
  • अफगानिस्तान- के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन का कहना है कि पाकिस्तान के भीतर भारत का खौफ इतना है कि वो आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य और असैन्य तनाव है। जबकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विश्वास का अभाव है।
  • बैठक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, एनएसए अजित डोभाल थे। वहीं जेटली ने कहा है। कि उरी हमले पर सेना का रुख ही सरकार का रुख है। कूटनीतिक स्तर पर पाक को घेरने की रणनीति को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू है। पाक प्रधानमंत्री नवाज को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाएगा।
  • पहचान:- उड़ी का यह शिवर सीमा पर सबसे बड़ा है। यहां सेना की 17 बटालियन है। यहां से महज 6 किमी की दूरी पर एलओसी है। कैंप में शहीद जवानों में दो जम्मू-कश्मीर के भी हैं। करनैल सिंह जम्मू के और रवि पाल सांबा के रामगढ़ गांव के हैं। दोनों डोगरा रेजीमेंट के हैं। करनैल सिंह का तो पठानकोट स्थानातंरण हो चुका था। उनकी छुट्‌टी भी मंजूर थी। अगले महीने घर आना था। करनैल के तीन बच्चे हैं। वहीं, रामगढ़ के शहीद रवि पाल के छोटा भाई भी सेना में है। रवि के दो बच्चे दूसरी और चौथी कक्षा में पढ़ते हैं।
  • शहीद होने वालों में सबसे अधिक 11 बिहार रेजीमेंट के हैं। चार जवान तो इतनी बुरी तरह झुलस चुके हैं कि उनकी पहचान नहीं हो पाई है।

बिहारी व डोगरा रेजीमेंट (सैन्य दल):-

जो निम्न हैं-

  • 11 बिहार रेजीमेंट के शहीद है- राकेश सिंह, जवारा मुंडा, नादमन कुंंजर, उपवचन राव, आरएस रावत, गणेश शंकर, एसके विचाती, गोरहाई, जी शंकर, जी उलाव, आरके यादव।
  • बिहार रेजीमेंट के शहीद-वीके गिरी, राम स्वरूप जाट, हरम सिंह, एसके ओरांव, बीजी सरकार, सुनील कुमार, सीएनके चंद्रमणी, रामदेव, शाम लाल, मुन्ना सिंह, सतीश कौशिक, बीजी बारिल।
  • डोगरा रेजीमेंट- मंजीत कुमार, विजय कुमार, जसवंत सिंह, कमल कांत और एक अन्य सैन्यकर्मी सतीश कुमार शामिल हैं।
  • आतंकवाद और आतंकवादी समूहों को पाकिस्तान के प्रत्यक्ष समर्थन से मैं निराश हूं। पाकिस्तान एक आतंकवादी राज्य हैं। इसे अलग करना चाहिए। इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि उड़ी के हमलावर पूरी तरह प्रशिक्षित थे। उन्हें पूरें हथियार और उपकरण देकर भेजा गया था।

                                                                                                                                                         राजनाथ सिंह, गृहमंत्री

कूटनीतिक जवाब:-

  • उड़ी में हुए आतंकी हमले का मुहतोड़ जवाब चाहे भारत सरकार न दे सकी हो, लेकिन कूटनीतिक दृष्टि से पाकिस्तान सारी दुनिया में बदनाम हो गया है। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस बार संयुक्त राष्ट्र यह सोचकर गए थे कि कश्मीर में चल रहे कोहराम को जमकर भुनाएंगे। भारत को बदनाम करेंगेे और कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुददा बना देगे, लेकिन लेने के देने पड़ गए। उड़ी ने पाकिस्तान की सारी चौपड़ को हवा में उड़ा दिया। मियां नवाज के हर तर्क का जवाब भारतीय प्रवक्ताओं ने जमकर तो दिया ही, सबसे मजेदार बात यह हुई कि जिस भी विदेशी नेता के समाने मियां साहब ने रोना-धोना किया, उन्होंने उन्हें उल्टी घुटी पिला दी। अमेरिका के विदेश मंत्री हो या ब्रिटेन की प्रधानमंत्री हो या संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हो, सबने नवाज शरीफ को एक ही बात कही कि अपने पड़ोसी देशों में आतंकी गतिविधियां चलाने से बाज आएं। कश्मीर के सवाल को आपसी बातचीत से हल करें।
  • पाकिस्तानी जनता के मन में अपनी फौज और सरकार की छवि कायम रखने के लिए पाक सरकार के प्रवक्ता नवाज की मुलकातों का मनचाहा ब्यौरा पेश कर रहे हैं, लेकिन जिन विदेशी नेताआंे से वे मिले हैं, उनके प्रवक्ताओं के बयान सारी पोल खोल रहे हें। यहां तक कि चीनी प्रधानमंत्री ने भी कश्मीर के सवाल पर तटस्थ रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र सरुक्षा परिषद के लगभग सभी स्थायी सदस्यों ने उड़ी हमलों की कड़ी भर्त्सना की है। पाक के लिए इससे बढ़कर शर्म की बात क्या हो सकती है कि सऊदी अरब जैसे उसके संरक्षक देश ने भी उड़ी हमले को कलंक बताया हे। अंतरराष्ट्रीय इस्लामी संगठन के प्रमुख देशों संयुक्त अरब, अमिरात, बरीन और कतर ने भी सऊदी के स्वर में स्वर मिलाया है।
  • दक्षेस सम्मेलन:-उड़ी ने पाकिस्तान की कितनी दुर्गति कर दी है, इसका अंदाज आप इसी से लगा सकते हैं कि दक्षिण एशिया (दक्षेस) तीन मुस्लिम राष्ट्रों बांग्लादेश, अफगानिस्तान और मालदीप ने पाकिस्तान की निंदा की है। उड़ी के पहले तक यह असमंजस बना हुआ था कि नंवबर में दक्षेस सम्मेलन होगा कि नहीं लेकिन, क्या अब साफ है कि इस्लामाबाद में होने वाला यह सम्मेलन स्थगित हुए बिना नहीं रहेगा।

अमरीका व रूस:-

  • अफगानिस्तान के विदेशमंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी ने पाक आतंकी कारस्तानियों का संयुक्त राष्ट्र में जमकर भांडाफोड़ किया है। श्रीलंका, भूटान और नेपाल भी आतंक के विरुद्ध खुलकर बोले। पाक फौज और सरकार के लिए यह छोटा-मोटा धक्का नहीं है कि अमेरिकी कांग्रेस में एक विधेयक लाया जा रहा है, जो यह घोषित करेगा कि पाकिस्तान आतंकवाद का जनक और पोषक है जो अमेरिका अब तक पाकिस्तान को पालता पोसता रहा और उसकी आतंकी गतिविधियों की अनदेखी करता रहा, उसके सांसद इस तरह कानून बनवाने के लिए आखिर क्यों मजबूर हुए हैं? उड़ी की घटना ने पाकिस्तान की नई सीढ़ियां भी गिरा डाली। एक बार तो रूस ने भी इशारा दिया कि वह पाकिस्तान के साथ होने वाला संयुक्त फौजी अभ्यास रदद कर देगा। दुनिया के किसी भी देश ने पाक के साथ सहानुभूति नहीं दिखाई। पाक को ’रोग स्टेट’ (गुंडा राज्य) घोषित करनवाने में भारत सफल हो या न हो, उड़ी और पठानकोट में हुई घटना का काला टीका पाक के माथे पर चिंत्र बन गया है।
  • अमरीकी कांग्रेस में पाक को आतंकी देश करार देने का बिल पेश हुआ। सासंद टेड पो व सांसद डाना ने बिल पेश करते हुए कहा कि समय है हम पाक को पैसा देना बंद करें और उसे आतंकी देश घोषित करें।

भारत:-

  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय तो जो कूटनीतिक सजा पाक को दे सकता था, दे रहा है, लेकिन भारत सरकार जबानी जमा-खर्च के अलावा क्या कर रही है? मोदी की सरकार और मनमोहन सिंह की सरकार में फर्क क्या है? उड़ी में जवानों को शहीद हुए सप्ताहभर हो गया, लेकिन हमारी सरकार ने अभी तक ठोस कदम क्या उठाया? उसे सभी सलाह दे रहे हैं कि वह आनन-फानन कोई सख्त कदम न उठा ले। युद्ध न छेड़ दे। यह सलाह तो ठीक है पर पिछले ढाई साल में इस सरकार ने क्या कभी यह नहीं सोचा कि उड़ी या पठानकोट जैसी कोई वारदात हो जाए तो वह क्या करेगी? यदि सोचा होता तो ये छह-सात दिन क्या हमारे नेता सिर्फ बैठको, यात्राओं, बयानों और भाषणों में गुजार देते? वे तुरंत कार्यरवाई करते। उड़ी में चार आतंकी मारे जाते, उसके पहले ही सीमा-पार में खड़े उनके चार शिविर उड़ा दिए जाते। ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाता। सारे भारत का सीना गर्व से फूल जाता। दुश्मन को पता चलता कि भारत को यदि छेड़ा तो वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं।
  • किन्तु आतंकियों और उनके संरक्षकों को पता है कि भारत की सरकारें दब्बू हैं वे डरी रहती हैं कि युद्ध छिड़ जाएगा। यह डर पाकिस्तान को क्यों नहीं है? जबकि उनके मुकाबले हमारी फौजी ताकत ,हमारी जनसंख्या, हमारा क्षेत्रफल और हमारी एकता कई गुना ज्यादा हैं। यदि आपको डर है कि पाक के पास परमाणु बम है तो क्या पाक को पता नहीं है कि भारत के पास उससे कहीं ज्यादापरमाणु बम हैं? क्या पाक को डर नहीं होगा कि परमाणु युद्ध हो गया तो पाक का नामो-निशान भी नहीं बचेगा? यदि आप डरते रहे तो भारत की संसद, मुंबई की ताज होटल, पठानकोट और उड़ी के फौजी अड्‌डे उड़ाए जाते रहेंगे और आप देखते रह जायेंगे।
  • पाकिस्तान तो खुद बेहद डरा हुआ राष्ट्र है, वरना वह कश्मीर में चोर दरवाजे से युद्ध क्यों चला रहा था? सीना तानकर सामने आता। मान लें कि आप में खतरा मोल लेने की हिम्मत नहीं है लेकिन आप में इतनी कुवत तो होनी चाहिए कि आप अपनी रक्षा कर सके। आपके फौजी अड्‌डों में विदेशी आतंकी घुस जाते हैं और आपको उसका सुराग तक नहीं लगता। हम अपने गुप्तचर विभाग और फौज पर करोड़ों रुपया रोज क्या इसलिए खर्च कर रहे हैं? पाक को तो आप कोई ठोस जवाब नहीं दे सकते, लेकिन आपको भारत की जनता को तो जवाब देना पड़ेगा। वह पूछेगी कि वह 56 इंच का सीना कहां है? आप क्या जवाब देगे? यदि आपको पूरा विश्वास है कि इन आतंकियों को पाक फौज भेज रही है तो आपको किसने रोका है? आज पाक की हालत यह है कि आप वहां दस कश्मीर खड़े कर सकते हैं आप कांटे से कांटा निकालिए। ईरान और अफगानिस्तान आपका साथ देंगे। सभी मित्र-देशों से आग्रह कीजिए कि वे पाक का हुक्का पानी तब तक बंद रखें, जब तक वह आतंकियों को खत्म नहीं करता। यदि चीन उसकी मदद पर दौड़ता है तो चीन के सिंक्यांग प्रात के बागी उइगर मुसलमानों को इतनी शह दी जा सकती है कि बीजिंग और शंघाई के पसीने छूटने लगें। यदि आपकी कूटनीति में दम हो तो पाकिस्तान को ’अतरराष्ट्रीय अछूत’ घोषित करवाइए।
  • मदद:-उरी हमले पर केंद्र सरकार की रणनीति है कि सैन्य कारवाई से पूर्व कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान को चौतरफा घेर आतंकवादी देश घोषित कराया जाए। इसके लिए अमरीका, फ्रांस, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों की भी मदद लेने की भी संकेत हैं। इसके बाद सैन्य कारवाई के विकल्प को अंतिम रूप दिया जाएगा।
  • पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने के बाद सैन्य कारवाई में मदद मिलेगी। पाक की आतंकवादी छवि को उजागर करने की भारत ने जिनेवा में चल रही संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक से शुरुआत कर दी है।
  • संकेत है कि इसके लिए भारत आतंकवाद से जूझ रहे अमरीका, इजराइल और फ्रांस जैसे देशों से भी चर्चा कर सकता है।
  • डीएन की जांच- एनआईए की दल ने उरी आतंकी हमले में एफआर्आर (विवरण) दर्ज कर ली है। दल ने मौके से कई नमूने बरामद किए हैं, जिनमें आतंकियों के खून के नमूने भी हैं।
  • डर- हमले के बाद पाकिस्तानी मीडिया (संचार माध्यम) को भी डर सता गया हैं। पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबर डॉन के अनुसार भारत अब पाकिस्तान को एक आतंकी देश शोषित कर के ही दम लेगा। ऐसे में यदि भारतीय सेना हमला करती है तो पाकिस्तान के हालात बद से बदतर हो जाएंगे। वहीं पाक मीडिया का कहना है कि पाकिस्तान को अन्य देशों से मिलने वाली मदद को भी इस हमले के बाद से बड़ा खतरा हो गया हैं।
  • सबूत:-भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को एक हफ्ते में दूसरी बार तलब कर उन्हें 18 सितंबर को हुए उरी हमले से जुड़े सबूत सौंपे। विदेश सचिव एस जयशंकर ने बासित को बताया कि उरी हमले में आतंकियों को घुसपैठ करने में मार्ग दर्शक की भूमिका निभाने वाले दो पाकिस्तानियों को स्थानीय ग्रामीणों ने 21 सितंबर को पकड़ा था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक 20 साल का फेजल हुसैन अवान और 19 साल का यासीन खुर्शीद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद के रहने वाले हैंं। दोनों अब हिरासत में हैं। उनसे हुई पूछताछ के आधार पर मारे गए चार आतंकवादियों में से एक की पहचान कर ली गई है। उसका नाम हाफिज अहमद था और वह मुजफ्फराबाद के रहने वाला था। इसके अलावा 23 सितंबर को अब्दुल कय्यूम नामक पाकिस्तानी को गिरफ्तार किया गया, जो सियालकोट का रहने वाला है। उसने आतंकी संगठन लश्कर-ए- तैयबा में तीन महीने की प्रशिक्षिण लेने की बात कबूल की है। इससे पहले उरी हमले के तीन दिन बाद 21 सितंबर को बासित तलब किया गया था। साथ ही भारत में आतंकियों के हैंडलर (हाथ से मारने) के रूप में मोहम्मद कबीर अवान और बशरत की पहचान की है। इससे जुड़े सबूत भी बासित को सौंपे गए हैं। विदेश सचिव ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त से ये भी कहा कि भारत के खिलाफ पाक की ओर से हो रहे लगातार आतंकी हमले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।
  • पांबदी- मसूद अजहर को यूएन से आतंकी घोषित कराने में चीन के अडंगे की 6 माह की वैधता खत्म हो जाएगी। यदि बीजिंग अडंगा नहीं लगाता है तो मसूद पर पाबंदी लग जाएगी। पठानकोट के पास फिर 4 संदिग्ध दिखे। जिसके बाद इलाके में चेतावनी जारी कर दी गई।
  • भारत के ऑल इंडिया (पूरे भारत) से पाक आवाम को सरकार और सेना की आतंकवाद बढ़ाने वाली नीतियों का पर्दाफाश हो रहा है।

कोझिकोड के चुनावी रैली से मोदी :-

  • उरी में 18 जवानों के बलिदान के छह दिन बाद पाक पर पहली बार तीखा हमला बोलते हुए मोदी जी ने कहा कि पाक के हुक्मरान अगर 1000 साल तक जंग चाहते हैं तो भारत को चुनौती स्वीकार है। पीएम ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो पूरी दुनिया में आतंकवाद का निर्यात कर रहा है।
  • मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान आतंकवाद के आगे न कभी झुका है और न कभी झुकेगा। वह आतंकवाद को परास्त करके ही रहेगा। केरल के कोझिकोड में एक चुनावी रैली में दल कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पाक को नसीहत भी दी और कहा कि अगर लड़ाई लड़नी ही है तो दोनों देश गरीबी, अशिक्षा, नवजात शिशुओं और गर्भवती माताओं की असमय होने वाली मौतों से लड़ें। उन्होंने कहा कि एशिया में जहां-जहां आतंकवाद फैल रहा है, उसके पीछे बस एक ही देश की वजह से एशिया लहूलुहान है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश हो या पड़ोस का कोई भी देश इस पड़ोसी के आतंकवाद से परेशान है।
  • आगे मोदी जी ने कहा कि दुनिया में आतंक फेलाने वाले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन ने भी पाकिस्तान में ही जाकर पनाह ली थी। आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। पूरी दुनिया को आतंकवाद को परास्त करना ही होगा।
  • पीएम ने कहा कि भारत में इन दिनों आक्रोश का माहौल है। पड़ोसी ने उरी हमला कराया, जिसमें हमारे 18 जवानों को बलिदान देना पड़ा। आतंकी कान खोलकर सुन लें, उरी हमले को हम कभी नहीं भूलेंगे। हमारे जांबाज जवानों ने पड़ोस से आए आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। देशवासियों को सेना पर गर्व है।
  • पाक के लोग सुन लें, हमारे 18 जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। भारत पूरी दुनिया में आपको अलग-थलग करने में सफल रहा है। हम इसमें तेजी लाएंगे, पाक को अकेला कर देंगे। वो दिन दूर नहीं, जब पाक की अवाम हुक्मरानों के खिलाफ होगी। हमारे देश का भविष्य एकता-सद्भावना से जुड़ा है।

मंच-

  • मंच पर मोदी व अमित शाह के साथ एमपी (मध्यप्रदेश) के सीएम शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के डॉ. रमण सिंह, महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात के विजय रुपाणी व झारखंड के सीएम रघुबर दास शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह के अलावा लाल कुष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, वेंकैया व गडकरी उपस्थित थे।
  • पीएम ने पाक की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 1947 से पहले आपके पुरखे इसी धरती के थे। अपने हुक्मरानों से पूछिए कि गिलगित, बलूचिस्तान नहीं संभाल पा रहे हैं, तो कश्मीर की बात कैसे करते हैं।

आतंक के विषय विचार निम्न हैं-

इस कुत्सित हमले के पीछे जो भी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

                                                                                              नरेन्द्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री

हमें पाक को उसी की भाषा में जवाब देना होगा।

                                                                                              हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति

भारत ऐसे हमलों से झुकने वाला नहीं है। हम नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे।

                                                                                                                             प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति

पाकिस्तान एक आतंकी देश है, उसे इस पहचान के साथ अलग-थलग किया जाना चाहिए।

                                                                                                                                राजनाथ सिंह, गृहमंत्री

ऐसे हमलों से जंग के हालात पैदा करने की कोशिश हो रही है।

                                                                                                 महबूबा मुफ्ती, सीएम जम्मू-कश्मीर

जम्मू कश्मीर :-

  • जम्मू कश्मीर के पूर्व महाराजा डॉ. कर्णसिंह ने कहा है कि नासुर बनती जा रही कश्मीर समस्या का समाधान केवल बातचीत से ही संभव है और यह बातचीत बिना किसी पूर्वाग्रह के, समस्या से जुड़े सभी पक्षों के साथ होनी चाहिए। फिर चाहे वह पाकिस्तान हो या अलगाववादी।
  • जम्मू कश्मीर में पिछले 70 दिनों से फैली हिंसा से व्यथित डॉ. सिंह ने कहा कि, इस बात में कोई शक नहीं कि, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है लेकिन कौन सा जम्मू कश्मीर? आजादी के समय मेरे पिता ने जिस ’इन्स्ट्रूमेंट (यंत्र या औजार) ऑफ एक्सेशन’ पर दस्तखत किए, वह जम्मू कश्मीर 84000 वर्गमील में फैला था। आज हमारे पास जो जम्मू कश्मीर है वह तो केवल 42000 वर्गमील का ही है। यानी आधा हिस्सा तो हमारे कब्जे से बाहर पाक या चीन के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि, जब जम्मू कश्मीर मसले को अपना आतंरिक मसला (जो बेशक है भी) कहते हुए किसी अन्य से बातचीत से इनकार करते हैं तब उसका मतलब कहीं यह तो नहीं कि हमने पाकिस्तान और चीन के उस कब्जे को कानूनी मान लिया है। उस पर अपना हक छोड़ दिया है? उन्होंने कहा कि, कश्मीर की समस्या अकेले आर्थिक नहीं है, राजनीतिक भी है। इसलिए इसका समाधान केवल आर्थिक पैकेजाेें (पुलिन्दा) से नहीं हो सकता। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, केवल कश्मीर घाटी नहीं जम्मू और लद्दाख भी इसके मजबूत पक्ष हैं और कोई भी समाधान उन्हें विश्वास में लिए बिना नहीं रह सकता।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर:- पाक को अलग करना कठिन है। कारण निम्न हैं-

  • हमले पर ब्रिटेन अमरीका और रूस की ठंडी प्रतिक्रिया है।
  • संयुक्तराष्ट्र में पाक को चीन का समर्थन है।
  • भारत-पाक मामले में अमरीका का दोहरा रवैया है।
  • पाक की इस्लामी देशों का समर्थन हैं।

सुरक्षा में कुछ गलतियां हुई हैं, मगर उसे जल्द ही ठीक कर लेंगे।

                                                                                                      मनोहर पर्रिकर, रक्षामंत्री

तलब-पाक उच्चयुक्त अब्दुल बासित को तलब किया है। विदेश सचिव एस जयशंकर ने नई दिल्ली में बासित को बुलाकर उरी हमले से जुड़े तथ्यों को रखा और इसमें पाक की भूमिका पर चिंता जताई।

हमें कूटनीतिक तौर पर काम करना हैं। हमें राजदूत को बुला लेना चाहिए। बस सेवा बंद और व्यापारिक संबंध तोड़े जा सकते हैं।

                                                                                                                                            सलमान हैदर, पूर्व विदेश सचिव

विमान:-

  • कराची- दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए कराची में सीमावर्ती इलाकों में पाक ने अपने विमानों को नीची उड़ान पर रोक लगा दी है।
  • हाहवें (प्रधान सड़क) बंद:- पाक ने एलओसी से सटे गिलगित, स्कर्दू, चितराल की सभी उड़ाने रद्द के साथ हाइवें भी बंद कर दिए हैं। सीमाओं पर घुसपैठ रोकने को अदृश्य लेजर (मचान की आड़ी धरन) वॉल (दीवार) लगेगी।
  • संयुक्त राष्ट्र:- कश्मीर के अंतरराष्ट्रीय में लगा पाकिस्तान अपनी आदत से बाज नहीं आया। संयुक्त राष्ट्र में पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरफ ने जहर उगलते हुए कहा कि कश्मीर की नई पीढ़ी आजादी चाहती है। उन्होंने आतंकी बुरहान वानी को शहीद करार देते हुए कहा कि कश्मीर में हिंसा की जांच होनी चाहिए। उन्होंने उरी हमले पर एक शब्द भी नहीं बोला। उल्टे भारत पर आरोप मढ़ते हुए कहा कि कश्मीर में भारत की निर्दयता जारी है। उन्होंने कश्मीर से सेना हटाने की मांग की। कश्मीर हिंसा पर उन्होंने डोजियर (कपटी) देने की भी बात कही।
  • एलओसी फायरिंग (अग्नि) का जवाब:- उरी में हुए आतंकी हमले के ठीक दो दिन बाद फिर पाकिस्तान का उल्लंघन किया। पाक ने 20 सितंबर दोपहर 1.10 बजे से 1.30 बजे तक एलओसी पर फायरिंग की। इसका जवाब भारतीय सेना की तरफ से भी दिया गया। इस दौरान दोनों तरफ से देर रात तक फायरिंग जारी थी। लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए सेना ने सीमा पर गतिविधि बढ़ा दी। और इलाके में हेलिकॉप्टर से निगरानी भी की जा रही है। वहीं उरी सेक्टर के लक्ष्मीपुरा इलाके में ही सेना ने दस आतंकियों को मार गिराया। माना जा रहा है कि हमले में मारे गए आतंकियों के साथ ही इन्होंने भी घुसपैठ की थी। वहीं इलाके में सात ओर आतंकियों के छिपे होने की खबर है। इधर नौगाम में भी आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की जिसे सेना ने नाकाम कर दिया। लेकिन इस दौरान गोलीबारी में एक जवान शहीद हो गया। सेना ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इस गोलीबारी में कितने आतंकी ढेर हुए।
  • गुपचुप कार्यवाई:- उरी में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय 24 सेना के खास सेना के जवानों ने उसी सेक्टर से एलओसी को पार कर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में संचालित 3 आतंकी कैम्पों पर र्कारवाई करके 20 आतंकियों को मार गिराया। इस कार्रवाई में 200 अन्य के घायल होने की सूचना है। दे क्विंट मीडिया (संचार माध्यम) हाउस (घर) के अनुसार इस ऑपरेशन (क्रिया) को गुपचुप तरीके से 20 सितंबर की देर रात शुरू किया गया और 21 सितंबर तड़के तक इसे खत्म भी कर दिया गया। ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एलओसी 2 पारा की दो ईकाई के 18-24 जवान हेलिकॉप्टर से एलओसी पार गए। उन्हें पीओके के उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र में आतंकी कैंपो के पास उतारा। हालांकि सेना एवं महानिदेश मिलिट्री ऑपरेशन (फौज क्रिया) ने एलओसी के पार सेना दव्ारा ऐसी कोई भी कार्रवाई करने से इनकार किया है।
  • तैयारी:- उरी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की पूरी तैयारी कर ली है। 29 सितंबर को मोदी पाक को मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफन) यानी सबसे तरजीही देश का दर्जा दिए जाने की समीक्षा की हैं।
  • जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने सेना को पूरी छूट देने की तैयारी कर ली हैं। हमले के बाद पैदा हुए हालातों पर चर्चा के लिए मोदी की अगुवाई में सुरक्षा पर बनी मंत्रिमंडल समिति की (सीसीएस) की अहम बैठक हुई। माना जा रहा है कि बैठक में पाकिस्तान को तीन तरफ से घेरने की रणनीति बनी है। केंद्र कूटनीतिक, राजनीतिक और सैन्य तीनों ही मोर्चो पर पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देगा।
  • वायुसेना:- भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते खटास को देखते हुए वायुसेना को हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है। वायुसेना के 18 एयर बेस हाई अलर्ट (हवाई नींव उच्च चेतावनी) पर हैं। बीकानेर से लेकर श्रीनगर तक वेस्टर्न फ्रंट (पश्चिम की ओर पहला) पर वायुसेना ने रक्षा अभ्यास तेज कर दिया है। हर घंटे विभन्न टुकड़ियों में ड्रिल (सैनिको की सेना-अनुशासन की शिक्षा देना) की जा रही है।
  • उपसंहार:-पाक के आतंकियों दव्ारा उरी में सबसे बड़ा हमला होने के कारण आज हर कोई आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहता हैं ताकि इस आतंक को जड़ से ही नष्ट किया जा सके पर ऐसा तब ही संभव है जब हम सब एवं हर देश मिलकर इस आतंक का विरोध करें।

- Published/Last Modified on: October 14, 2016

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