बीसीसीआई (BCCI accepts proposal of playing cricket with Pakistan Team - Essay in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: - पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी घटनाओं को प्रोत्साहन और सीमा पर बढ़ती मुठभेड़ों से दोनों देशों के आपसी संबंधों में आई कटूता के बाद भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड ने तीन साल पहले तय किया था कि अब पाक से क्रिकेट नहीं खेलेंगे। हालात आज भी जस के तस हैं। सीमा पर घुसपैठ और गोलाबारी आज भी जारी है। पिछले सप्ताह ही कर्नल संतोष महादिक मारे गए लेकिन बीसीसीआई तय कर रही कि अब क्रिकेट खेलेंगे। आखिर क्यों भारत का इस तरह हृदय परिवर्तन हो रहा हैं?

भारत: - के साथ न खेलने की कोई हमारी ज़िद नहीं रही है। हमारी कभी कोई ऐसी इच्छा कभी नहीं रही है। कि पाकिस्तान के साथ खेल न होने दे। बस कहीं मामला अटक सा गया था, जिसके दूर होने के आसार अभी दिख रहे हें। हां इसमें राजस्व का नुकसान तो जरूर हुआ हैं। लेकिन अब दोनों देशों के बीच क्रिकेट का खेल शुरू हो रहा हैं तो यह अच्छी बात हैं। और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। भारत पाकस्तािन के बीच कुछ टकराव हो सकते हैं। वर्तमान में जो सरकार है वह इन मामलों में कड़ा रूख रखती है। लेकिन इन सब बातों के बीच क्रिकेट का मसला है।

भारत व पाकिस्तान: - भारतीय भी चाहते है कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट का खेल हो। दुनिया के सभी क्रिकेट खेलने वाले मुल्कों में भारत-पाकिस्तान के बीच के मुकाबला का कोई दूसरा मुकाबला और नहीं है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी मुकाबले में इतना आकर्षण नहीं बचा जितना अभी भी भारत-पाकिस्तान के बीच में हैं दोनों देशों के आम लोगों की दिली ख्वाहिश यह हमेशा से रहती है कि क्रिकेट प्रतिस्पर्द्धा का आयोजन लगातार होता रहे। भारत में पाकिस्तान के खिलाड़ियों को और पाकिस्तान में भारतीय खिलाड़ियों को आम दर्शकों ने अपना लिया हैं। भारत और पाकिस्तान के संबंध विरोधाभास से भरे हैं। एक ओर तो खूब तनातनी का माहौल है लेकिन जैसे ही क्रिकेट की बात सामने आती है तो दोनों देशों के लोग इसमें बहुत ही दिलचस्पी लेने लगते हैं। क्रिकेट के मामलों में दोनों ही देशों की इच्छाएं बहुत ही मिलती-जुलती हैं। ऐसे माहौल में दोनों को ही देश के दर्शकों को क्रिकेट के आयोजन से महरूम रख पाना इतना आसान काम नहीं हैं। दोनों देशों में पैसे के कारण ही क्रिकेट की बात शुरू हुई क्योंकि इसके लिए कुछ समय पहले पैसे कितना आएगा, किसको कितना लाभ होगा जैसे मुद्दों पर विचार किया जाने लगा। इसलिए अब दोनों के बीच क्रिकेट शुरू होने ही वाला हैं। क्योंकि इसमें सिद्धांतो की बात नहीं हो रही है केवल पैसे की बात हो रही हैं। पैसा का सवाल इतना मुश्किल नहीं रहता जितना की सिद्धांत की बातें करना कठिन होता हैं।

मुनाफा: - श्रीलंका में दोनों देशों के बीच क्रिकेट प्रतिस्पर्द्धा के आयोजन की खबर से आम लोग खुश होंगे। एक आशंका यह व्यक्त की जा रही है कि भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट के आयोजन की जगह तीसरे देश को चुनने से राजस्व का नुकसान हो सकता हैं इससे संभव है कि थोड़ा नुकसान हो सकता है लेकिन राजस्व का मसला टेलीविजन पर अधिक निर्भर है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट कहीं भी हो, दोनों ओर के लोग दीवानगी की हद पर जाकर देखते हैं।

प्रतिबंध: -इन खेलों में इसलिए प्रतिबंध लगा हैं-

  • पाकस्तािन आखिरी बार भारत दौरे पर 2012 - 13 में आई थी।
  • आतंकवादी गतिविधियों के चलते भारत-पाक दौरे पर प्रतिबंध।
  • 2009 में लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर हमला हुआ था।
  • 2009 से लकर अब तक पाकिस्तान खेलने सिर्फ जिम्बावे ही पहुंची है।

गुरुदासपुर में इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया है। भारतीयों की जाने ली जा रही हैं, ऐसे में दोनों देशों के बीच किक्रेट शुरु करने की संभावना अनुराग जी को नहीं दिखाई देती है। क्रिकेट और आतंकी गतिविधियों दोनों साथ-साथ नहीं चल सकती हैं।

अनुराग ठाकुर, सचिव, बीसीसीआई 27 जुलाई 2015

बोर्ड: - समझ में नहीं आता कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने के लिए किसने कहा था? भारतीय क्रिकेट कट्रोंल बोर्ड खुद को देश के कानून से ऊपर समझता है। उसे लगता है कि पहले बोर्ड है, उसके बाद देश का कानून। बोर्ड कहता है कि वह पहले है और बाद में भारतीय। हैरत की बात तो यह है कि 26/11 को जिस दिन हम पर आतंकी हमला हुआ उसी दिन हम पाकिस्तान के साथ खेलने की बात कर रहे हैं। वे हमारे जवानों के सिर कलम कर साथ ले जाएं, आतंकी हमलों की साजिश में बेगनाहों को मारा जाएं और हम उनके साथ क्रिकेट खेलने की बात करें, यह तो कोई खेल भावना नहीं हुई। इस्लामिक स्टेट (आईएस) पाकिस्तान से आतंकियों को कश्मीर पहुंचाने में मदद कर सकता है। तीस खूंखार आतंककारी भारत में प्रवेश कर आतंक फेलाना चाहते हैं। उस देश के जो अलग-अलग आतंकी संगठन हमारे यहां आतंक फेलाने में लगे हैं उनके साथ हम दोस्ती की बात कैसे कर सकते हैं? सब जानते है कि पिछले पांच साल से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेला गया। मुद्दा भी मुम्बई हमले से ही जुड़ा है। अब कौनसा शांतिकाल आ गया? बीसीसीआई दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डो के बीच समझौते की बात करता है। लेकिन कोई भी समझौता देश के जवानों की शहादत की कीमत पर नही होना चाहिए। बीसीसीआई खुद के कारनामों को देखे। मैच फिक्सिंग के जरिए गड़बड़ी होती रहीं और बोर्ड कहता रहा कुछ नहीं हुआ। लोगों ने जनहित याचिकाएं लगाई तो सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए लोढ़ा कमेटी बनाई है। इन मामलों में जनभावना का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता है? बीसीसीआई मनमर्जी से तनावपूर्ण माहौल में पाक से क्रिकेट डिपलोमेसी कहने वालों की कमी नहीं है। लेकिन दो देश क्रिकेट खलते है तो इसमें कौन सी डिप्लोमेसी है? महत्वपूर्ण यह है दोनों देशों के बीच मधुर एवं मैत्रीपूर्ण संबंध हो यह जरूरी हैं।

कीर्ति आजाद, पूर्व क्रिकेटर एवं राजनेता

खेल: - भारत-पाकिस्तान के बीच श्रीलंका में क्रिकेट का आयोजन दिसम्बर में संभवत: होने जा रहा है। असल में आईसीसी की बैठक में यह तय हुआ था कि भारत-पाकिस्तान को पांच या छह श्रृंखलाएं खेलनी है। भारत को पाकिस्तान में और पाकिस्तान को भारत में और दोनों ने ही इसकी रजामंदी दे दी थी। दिसम्बर में होने वाली श्रृंखला भी उसी रजामंदी का हिस्सा है। इस तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार पहले भारत को पाकिस्तान में जाकर खेलना था। पाकिस्तान ने अपने यहां के हालांत को देखते हुए भारत को अपने यहां खेलने के लिए बुलाया ही नहीं। पाकिस्तान ने भारत से यूएई में खेलने का आग्रह किया था। भारत के संबंध यूएई से कुछ सालों से बहुत अच्छे नहीं रहे हैं इसलिए भारत ने मना कर दिया। हालांकि भारत ने यूएई में कुछ आईपीएल के मैच का आयोजन कराया था। भारत में कुछ एक-दो जगहों को छोड़ दिया जाए जात बाकी जगहों पर भारत-पाक श्रृंखला का आयोजन किया जा सकता हैं, लेकिन पाकिस्तान खेलने के लिए भारत आने को राजी नहीं हुआ। इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि पाकिस्तान ने श्रीलंका में आगामी श्रृंखला के लिए अपनी रजामंदी दे दी है। हालांकि अभी भारत की ओर से रजामंदी मिलनी बाकी है।

दोनों देशों के बीच में बहुत तरह की समस्याएं है। जैसे सीमा को लेकर, आतंकवाद आदि को लेकर अक्सर दोनों देशों के बीच माहौल बिगड़ सा गया है इसका असर दोनों देशों के बीच अत्यंत रोमांचकारी क्रिकेट प्रतिस्पर्द्धा के आयोजन पर पड़ता है। दोनों देशों के बीच की समस्याओं को दूर करने की तरकीब निकल आये तो इससे बड़ी खुशी की ओर क्या बात हो सकती हैं। लेकिन इन बातों के हल होने तक क्रिकेट के खेल के आयोजन को बंद और शुरू करने का खेल नहीं होना चाहिए। दोनों देशों की आंच क्रिकेट पर अक्सर पड़ती हुई दिखती है। निश्चित तौर पर क्रिकेट को सियासत से बचाने की कोशिश होनी चाहिए।

नुकसान: - दोनों के बीच क्रिकेट के आयोजन में बाधा से राजस्व का नुकसान बहुत अधिक होता हे। भारत की तुलना में पाकिस्तान को इसका खामियाजा ज्यादा भुगतना पड़ता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस समय बहुत तंगहाल में है बोर्ड कंगाली की कगार पर पहुंच चुका है। ऐसा इसलिए हुआ कि कुछ साल पहले श्रीलंकाई टीम पाकिस्तान खेलने गई थी और वहां उनकी बस पर हमला हो गया, उसके बाद वहां लंबे अर्से से कोई खेंलने ही नहीं गया। कुछ समय पहले पाकिस्तान में जिम्बावे खेलने को पहुंचा था लेकिन जिम्बावे को लेकर दर्शकों में बहुत कम रोमांच रहता है। भारत-पाक श्रृंखला को लेकर बीसीसीआई पहले से राजी है अब भारत सरकार की सहमति का इंतजार है कि वह श्रीलंका में होने वाली श्रृंखला को हरी झंडी दिखाए। इस श्रृंखला को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। एक हिस्सा श्रीलंका में आयोजित होना एवं दूसरा हिस्सा इंग्लैंड में आयोजित होना है। दोनों देशों के बीच कार्यक्रम की रुपरेखा के बारे में फैसला आना बाकी है।

उपसंहार: - उपरोक्त बातों से समझ में आता है कि हमें भारत-पाकिस्तान की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों देशों में खेल का आयोजन करना ही चाहिए पर इन खेलों के बीच में किसी प्रकार की कोई टकराहट नहीं होनी चाहिए न दोनों देशों की समस्या इन खेलों के मध्य आनी चाहिए।

- Published/Last Modified on: December 17, 2015

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