बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की चार दव्वसीय भारत यात्रा Bangladesh PM 4day Visit to India (Download PDF)

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प्रस्तावना: - बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की 8 अप्रेल से चार दिन की भारत यात्रा शुरू हो रही है। उनके परिवार के भारत से आधी सदी से बहुत गहरे संबंध रहे हैं। वे कई बार भारत आ चुकी हैं पर इस बार उनकी यह यात्रा सात वर्ष के अंतराल के बाद हो रही है। आज के संदर्भ में देखें तो भारत के पड़ोसी देशों में बांग्लादेश की महत्ता अदव्तीय है।

क्यों अहम है हसीना का यह दौरा?

  • ऐसे में सात साल बाद उनकी आधिकारिक यात्रा के क्या मायने हैं और यह दौरा इतना खास क्यों है? दोनों देशों के प्रिंट (छपाई) और इलेक्ट्रॅनिक (विद्युत संबंधी) मीडिया (संचार माध्यम) में इस दौरे को लेकर सरगर्मी है और जमकर टॉक (बातचीत) शो (प्रदर्शन) और डिबेट्‌स (विवाद) चल रही हैं, शेख हसीना के इस दौरे में कई सारे मसलों पर चर्चा होनी है और तकरीबन 30 से 35 समझौते पर दस्तखत इस दौरान होने हैं।

दव्पक्षीय वार्ता: -

  • बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना चार दिवसीय दौर पर भारत आयी हैं। जहां दोनों देशों के पीएम हैदराबाद हाउस में दव्पक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देश के नेताओं के बीच करीब 20 समझौतों पर सहमति बन सकती है। इनमें से दो रक्षा क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। रक्षा क्षेत्र से संबंधित एक समझौता अगले पांच वर्षो का एजेंडा (परिपाटी) तय करने से जुड़ा हुआ होगा जबकि दूसरा समझौता बांग्लादेश को हथियार खरीदने के लिए कम दर पर कर्ज उपलब्ध कराने से जुड़ा होगा।
  • विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्रीप्रिय रंगनाथन ने उम्मीद जताया कि बांग्लादेश के साथ भारत 20 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर करेगा। रंगनाथन ने आगे बताया कि, दोनों देश को जोड़ने के लिए बस सर्विस (सेवा) और ट्रेन (रेल) सर्विस (सेवा) शुरुआत की जाएगी। बांग्लादेश सरकार ने बांग्लादेश के ढाका और भारत के कोलकाता के बीच नई पैसेंजर (यात्रीक) बस सेवा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

समझौते: -

  • माना जा रहा है कि पड़ोसी देश प्रधानमंत्री के इस दौरे पर दोनों देशों के बीच 20 से ज्यादा समझौते होंगे लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की राजनीतिक दूरियों की वजह से तीस्ता नदी के जल बंटवारें का समझौता फिलहाल नहीं होगा। तीस्ता समझौते पर सिंतबर 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए जाने की संभावना थी, लेकिन ममता की आपत्ति के बाद अंतिम समय में इसे स्थगित कर दिया गया था। इससे बांग्लादेश ने काफी नाराजगीजाहिर की थी।
  • पश्चिम बंगाल इस समझौते में एक अहम पक्ष होगा लेकिन ममता इस समझौते के पक्ष में नजर नहीं आ रही। खबर यह भी हैं कि शेख हसीना की यात्रा के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली बातचीत में ममता शामिल नहीं होगी। हालांकि ममता बनर्जी ने दोनों देशों के बीच की कुछ परियोजनाओं की शुरूआत को लेकर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के सरकार के आमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। ममता और हसीना के बीच बातचीत में तीस्ता का मुद्दा उठने की संभावना है।

बांग्लादेश सहायक: -

  • भारत की विदेश नीति में, दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव और वहाबी-सलाफी इस्लाम और दाएश का मुकाबला करने में बांग्लादेश भारत का अहम सहयोगी हो सकता है। इसके साथ-साथ भारत की एक्ट (काम करना) ईस्ट (पूर्व) पॉलिसी (नीति) के साथ-साथ बांग्लादेश, भूटान, इंडिया व नेपाल (बीबीआईएन) चतुर्पक्षीय सहयोग और बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टीसेक्टोरल (बिम्सटेक) की ओर बढ़ते रुझान में भी बांग्लादेश बड़ा सहायक हो सकता है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश और भारत के प्रधानमंत्री दोनों ही अपने पद की आधी से ज्यादा अवधि पूरे कर चुके हैं और अगले चुनाव की तैयारी के मद्देनजर इस यात्रा को सफल बनाना दोनों के लिए जरूरी है। ध्यान रहे कि बांग्लादेश ने हाल ही में बांग्लादेश की मुक्ति के दौरान शहीद हुए 1,661 भारतीय सैनिकों को मरणोपरांत सम्मानित करने का फैसला लिया है। यही नहीं, बांग्लादेश की मुक्ति में भारत की भूमिका और भारतीय सैनिकों की वीरागाथाएं अब वहां की इतिहास की पुस्तकों में पढ़ाई जाएगी। इस फैसले से भारतीय सैनिकों को इज्जत तो मिलेगी ही साथ ही हौसलाअफजाई भी होगी।

अहम सम्मान: -

  • 1971 की बांग्लादेश की आजादी की जंग में शहादत देने वाले 1661 भारतीय सैनिकों को मृत्योपरांत सम्मान देने का हसीना का मास्टरस्ट्रोक (अनपेक्षित पूर्ण सफलता सुनिश्चित करने वाले कुशल कार्य) भी बेहद अहम माना जा रहा है। यह न केवल बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में भारत के योगदान को मान्यता देना है, बल्कि यह शौर्य का परिचय करते हुए शहीद हुए भारतीय सैनिकों को एक श्रद्धांजलि भी है। इसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

भारत का फैसला: -

  • इधर, भारत सरकार ने भी एक अच्छा फैसला लिया है। अब कोलकाता-ढाका मैत्री एक्सप्रेस (तीव्रगामी) 14 अप्रेल 2017 से पूर्ण रूप से वातानुकुलित हो जाएगी। 14 अप्रेल, ‘पोयला वैशाख’ बांग्ला कलैंडर (पंचाँग) में पहले दिन के तौर पर मनाया जाता है। दोनों देशों के इन फैसलों ने शेख हसीना की यात्रा के माहौल को बेहतर बना दिया है। कहा जा रहा है कि शेख हसीना की इस यात्रा में करीब तीन दर्जन संधियों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा व सुरक्षा सहयोग, न्यायपालिका में सहयोग, सड़क, रेल व जहाजरानी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के मुद्दे शामिल हैं।

भारत और बांग्लादेश: -

  • दोनों ही विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं जिनकी वृद्धि दर 7 फीसदी से ऊपर है। चाहे इनका आपसी व्यापार आज केवल 6.6 अरब डॉलर (अमेरिका आदि देशों में प्रचलित मुद्रा) हो पर इसे आसानी से चार गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इसी यात्रा के दौरान भारत की तरफ से आज तक के सबसे बड़े 3.5 अरब डॉलर (अमेरिका आदि देशों में प्रचलित मुद्रा) की तीसरी क्रेडिट (उधार) लाइन (रेखा) देने की तैयार है। इसमें 94 करोड़ डॉलर रुपए न्यूक्लियर (नाभकीय) प्लांट (औद्योगिक संयत्र) के लिए, 35 करोड़ डॉलर पायरा बंदरगाह टर्मिनल (अंत संबंधी), 17 करोड़ डॉलर लाइन (रेखा) के लिए होगा। इसके अलावा 50 करोड़ डॉलर भारत बोगरा-सिराजगंज में नई रेलवे लाइन बिछाने और सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए 17 करोड़ डॉलर उपलब्ध कराने की बात है। यही नहीं, भारत की ओर से चार आरब डॉलर गंगा बैराज प्रोजेक्ट (परियोजना) में भी निवेश किए जा सकते है। इसका सीधा फायदा भारत के नेशनल (राष्ट्रीय) वॉटरगेज (पानी बंधक) प्रोजेक्ट्‌स (परियोजना) को भी मिल सकता है। यहां भारत, बनारस से कोलकाता तक और नारायणगंज से गुवाहाटी तक नदी के जरिए सस्ता आवागमन भी उपलब्ध कराना चाहता है। 17.7 करोड़ डॉलर बोगरा और झारकंड के बीच पावर (शक्ति) ट्रांसमिशन (संचारण) लगाने के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा 17.7 करोड़ सौलर (सूर्य संबंधी) प्लांट (औद्योगिक संयत्र) के लिए दिए जाने हैं। सहमति पत्रों (एमओयू) और अलग-अलग समझौतों के जरिए बांग्लादेश के इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी संरचना) सेक्टर (मुहल्ला) की बड़ी मदद की जाएगी।

महत्वपूर्ण संधि: -

  • इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण संधि रक्षा एवं सुरक्षा को लेकर होने वाली है। बांग्लादेश की मुक्ति के बाद इंदिरा गांधी व शेख मुर्जीबुर्र रहमान के बीच ऐसी संधि हुई थी। माना जाता है कि बाद में राष्ट्रपति जिया उर्ररहमान ने एक ऐसी रक्षा सहयोग की संधि चीन से भी की थी। इसी के चलते जब भारत- बांग्लादेश रक्षा एवं सुरक्षा संधि के 25 वर्ष 1997 में पूरे हुए तो इसे नए सिरे से आगे नहीं बढ़ाया जा सका। करीब दो साल से बांग्लादेश में हो रहे आतंकवादी हमलों के लिए बांग्लादेश सरकार जमात उल मुजाहिदीन व उसके सहयोगियों को जिम्मेदार मानती है। विशेषज्ञों की राय में इन हमलों में दाएश का रंग भी नजर आता है। कहा जाता है कि पाकिस्तान की आईएसआई का भी इनको समर्थन है क्योंकि हसीना सरकार की अस्थिरता से भारत- बांग्लादेश संबंध कमजोर किए जा सकते है। इस संदर्भ में जरूरी हो जाता कि भारत- बांग्लादेश ऐसी व्यवस्थाएं बनाएं जिसमें ठोस खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान हो सके। आशा है, नई रक्षा व सुरक्षा संधि में इन सब बातों का ध्यान रखा गया होगा।

सुरक्षा सहमति: -

  • बांग्लादेश पर चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत सुरक्षा सहयोग में मजबूती चाहता है। इस मकसद से बांग्लादेश के साथ 2 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर होंगे। बांग्लादेशी मीडिया (संचार माध्यम) की रिपोर्ट (विवरण) में कहा गया था कि भारत 25 साल का व्यापक रक्षा समझौता चाहता था लेकिन फिलहाल 5 साल के दो सहमति पत्रों के हस्ताक्षर होने पर बात बनी है।
  • पहले सहमति पत्र के अनुसार, अगले 5 साल के लिए रक्षा सहयोग का फ्रेमवर्क (ढाँचा) होगा जबकि दूसरे के तहत बांग्लादेश को रक्षा साजोसामान खरीदने के लिए मदद मुहैया कराई जाएगी। कहा जा रहा है कि भारत बांग्लादेश को 50 करोड़ डॉलर का लाइन ऑफ (का) क्रेडिट (उधार) देगा।

सुरक्षा अहम: -

  • हालांकि, उनके दौरे के मुख्य मसलों में दोनों देशों के बीच एक डिफेंस (प्रतिरक्षा) और सिक्योरिटी (सुरक्षा) कोऑपरेशन (सहकारिता) समझौते पर दस्तखत शामिल है। पिछले साल 1 जुलाई से बांग्लादेश लगातार आंतकी हमलों से जूझ रहा है।
  • आईएस की मौजूदगी इन हमलों में दिखाई दी है, हालांकि सरकार इससे इनकार करती रही है, आतंकी हमलों का घरेलू टेरर (आतंक), ग्रुप (समूह) जेएमबी (जमातउल मुजाहिदीन बांग्लादेश) और इससे जुड़े हुए ग्रुप्स की करतूत बताया जाता है, ये ग्रुप्स अच्छी तरह प्रशिक्षित है, इनके पास आधुनिक हथािर है, पाकिस्तान से इन्हें फंडिंग (कोष) मिल रही है।
  • आईएसआई का नेटवर्क (जाली का काम) इन्हें हथियार और अन्य मदद मुहैया करा रहा है इनका मकसद बांग्लादेश की मौजूदा सरकार को अस्थिर करना और भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत होते संबंधों को खराब करने की कोशिशें करना है।

तीस्ता नदी: -

  • सबसे कठिन मुद्द तीस्ता नदी जल के सहभागिता को लेकर है। पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जो केंद्रीय सहायता व विमुद्रीकरण को लेकर केंद्र सरकार से नाराज हैं, इस पर सहमति को तैयार नहीं हैं। हालांकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिए जाने वाले भोज में वे शामिल होंगी। इतिहास में देखें तो चाहे कर्णफूली नदी परियोजना हो या फरक्का बैराज पर ढाका की चिंताए, नेहरू से मोदी तक नई दिल्ली का ढाका की तरफ रवैया कोलकाता के मुकाबले हमेशा ज्यादा उदारतापूर्ण रहा है। हो सकता कि तीस्ता पर कोई फैसला नहीं हो पर तीन बांग्लाभाषी नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी की मौजदूगी में, दोनों देशों के बीच ऐसे जटिल मुद्दे पर तालमेल की उम्मीद है। भारत- बांग्लादेश में 54 नदियां सामूहिक रूप से बहती हैं। इन पर काम हो तो लोगों को जीविका मिलेगी व आतंकवाद की ओर जाते युवाओं को रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही आतंकवाद की ओर से बढ़ते युवाओं को नई दिशा दी जा सकती हैं।

प्रो. स्वर्ण सिंह, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार, जेएनयम के सेंटर (केंद्र/स्थान) फॉर (के लिये) इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) पॉलिटिक्स (राजनीतिक) , ऑर्गेनाइजेशन (संगठन) एंड (और) डिस्टार्मामेंट () विभाग में अध्यापन का लंबा अनुभव।

तीस्ता अहम: -

  • तीस्ता जल समझौते पर चर्चा नहीं की जाएगी क्योंकि यह हसीना सरकार के विरोधियों को आलोचना का मौका देता है। बांग्लादेश के वाटर (पानी) एक्सपर्ट (दक्ष) मानते हैं कि तीस्ता हर साल दिसंबर से मार्च तक अहम बनी रहती है क्योंकि वाटर (पानी) फ्लो (बहना) 5,000 क्यूसेक से गिरकर 1,000 पर आ जाता है।
  • हमला: -ऐसे संकेत मिले हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले का मुद्दा भारत इस बार जोर-शोर से नहीं उठाएगा। बताया जा रहा है कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर शेख हसीना सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से संतुष्ट है।

नई दिल्ली: -

  • बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के दूसरे दिन में सुबह राष्ट्रपति भवन में उनका रस्मी स्वागत किया गया। हसीना के भारत दौरे से भारत और बांग्लादेश के बीच जुलाई से ट्रेन (रेल) दौड़ना शुरु होगी। इसी संदर्भ में भारत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधनमंत्री शेख हसीना ने ट्रेन (रेल) के ट्रायल (जाँच) रन (दौड़) को हरी झंडी दिखाई। राजधानी के हैदराबार हाउस (मकान) में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में दोनों देश एक साथ आगे बढ़ेगे। उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश को बिजली सप्लाई (पूर्ति करना) बढ़ा रहे हैं। डीजल (भारी तेल) सप्लाई (पूर्ति करना) के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच पाइपलाइन बिठाई जाएगी। आर्थिक मुद्दों पर भी भारत बांग्लादेश के साथ कदम मिलाकर चलेगा। भारतीय कंपनियां (संघ) पड़ोसी देश में निवेश भी करेंगी। मोदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत होगी। दोनों ही देश आतंकवाद से मिलकर मुकाबला करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के विकास के लिए हमेशा खड़ा रहा है। उनकी इस यात्रा के दौरान दोनों पक्ष असैन्य परमाणु सहयोग और रक्षा सहित विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में कम से कम 25 समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद हसीना की यह पहली भारत यात्रा है। उनकी इस यात्रा के दौरान तीस्ता जल साझा करने पर कोई समझौता होने की उम्मीद नहीं है।

शेख हसीना की भारत यात्रा का महत्व क्या हैं? : -निम्न हैं-

  • बांग्लादेश की कमान दोबारा संभालने के बाद यह उनकी पहली दव्पक्षीय यात्रा है जोकि दोनों देंशों के बीच रिश्तों में मजबूती लाने के काफी महत्वपूर्ण है।
  • शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगने की संभावना है।
  • बांग्लादेश की सत्ता मेंं शेख हसीना के आने के बाद से ही भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में काफी सुधार आया है, कई स्तरों पर दोनों के संबंध सकरात्मक हुए हैं।
  • बांग्लादेश ने भारत की कई चिंताओं को हसीना ने काफी हद तक दूर किया है।
  • बांग्लादेश में बढ़ रही इस्लामी कट्‌टरता और आतंकवाद को काबू करने में, सभी आतंकी ठिकानों को खत्म करके बांग्लादेश ने भारत के कई आतंकी खतरों से राहात देने के प्रयास किए है।
  • बढ़ती अलगावादी गतिविधियों पर कार्रवाई करके शेख हसीना सरकार ने यह वादा पूरा किया कि बांग्लादेश की धरती को भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देंगी।
  • भारत की सुरक्षा की दृष्टि से बांग्लादेश हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए शेख हसीना की यह भारत यात्रा हमारे लिए अहम है।
  • शेख हसीना की सत्ता में आने के समय बांग्लादेश पर चीन का प्रभाव कम करने में भी मदद मिली।
  • अहम बात यह है कि इस यात्रा के दौरान तीस्ता जल समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं या नहीं, फिलहाल इसके बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
  • हाल के दिनों में चीन का रुझान दोबारा बांग्लादेश की तरफ काफी बढ़ने लगा था और उसने वहां निवेश करने की बात भी रखी थी। पर शेख हसीना का रुझान हमेशा भारत की ओर रहा है और इसलिए वह यह दिखाने की कोशिश करेंगी कि वे किसी भी तरह से भारत के खिलाफ जाकर चीन को अपना प्रभाव बढ़ाने नहीं देगी।
  • वहीं भारत ने भी कोशिश की है कि बांग्लादेश के साथ चीन रक्षा मामलों में सहयोग को आगे न बढ़ा सके इसलिए बांग्लादेश के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग को बढ़ाएगा और हाइड्रोजन एनर्जी (ऊर्जा) के क्षेत्र में भी भारत सहयोग देगा। इस तरह शेख हसीना की यह यात्रा इन्हीं आयामों के इर्द गिर्द रहेगी। संभव है कि दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता न हो लेकिन बांग्लादेश की सरकार भारत को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना चाहती है। तो वह चीन से मिलने वाली विकास की संभावनाओं को खोना नहीं चाहेंगी।
  • बांग्लादेश में भारत के मुकाबले चीन ने कई गुना निवेश कर रखा है। वहीं रुस ने बांग्लादेश में दो जहार मेगावाट के पावर (शक्ति) प्लांट (औद्योगिक संयत्र) लगा रखे हैं।
  • इसलिए भारत जिस क्षेत्र में भी बांग्लादेश को सहयोग कर सकता है, उसे सामने आकर करना ही चाहिए। आगे आने दिनों में दोनों देशों के बीच मेरीटाइम सहयोग, रक्षा सहयोग का बढ़ावा मिलेगा और मिलिटरी (सैन्य) प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाए।
  • बांग्लादेश को भारत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी मदद कर सकता है ताकि काउंटर (प्रतिकार करना) टेररिज्म (आतंकवाद) और कट्‌टरपंथी ताकतों से लड़ा जा सके। मोदी सरकार इस स्थिति में हैं कि वह बांग्लादेश को एक अच्छे मित्र और पड़ोसी के रूप में पूरा-पूरा सहयोग कर सकते है। साथ ही, साल 2019 में शेख हसीना और मोदी दोनों आम चुनाव को सामना करने जा रहे है। इसलिए दोनों देशों का आपसी सहयोग और रिश्ते इसी बात पर निर्भर करते हैं कि हसीना की यह यात्रा कितनी सार्थक, उपयोगी और सकरात्मक रहती है। शेख हसीना की जितनी जरूरत बांग्लादेश को, उतनी भारत को भी हैं।

उत्साह: -

  • बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना की भारत की अगली यात्रा को लेकर दोनों देशों के बीच ऐसा उत्साह, उम्मीद और सौहार्द्र है जो शायद पहले कभी दिखाई नहीं दिया, हालांकि हसीना पीएम बनने से पहले लगातार भारत आती रही हैं क्योंकि उनके बच्चे कोडाइकनाल में पढ़ रहे थे।
  • बांग्लादेश में चल रहे उथल-पुथल के दौर में उनके जीवन को लेकर खतरा पैदा हो गया था ऐसे में उन्होंने अपने बच्चों को भारत पढ़ाई के लिए शिफ्ट (स्थान बदलना) कर दिया था।

भारत की जानकारी: -

  • हालांकि, इसके साथ यह भी कहना होगा कि हसीना को निर्णायक तौर पर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ढाका के शिक्षाविद और अकैडेमिक (शैक्षणिक) भारत के इस योगदान को विद्यालयों में सकरात्मक तरीके से इतिहास के पाठयक्रम में दर्ज करें ताकि बांग्लादेश की वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी को 1971 की आजादी की लड़ाई में भारत की हिस्सेदारी का सही ज्ञान हो। बांग्लादेश में मौजूद भारत विरोधी ताकतों के हाथों इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किए जाने को रोकना तय करना होगा।

खुफिया सुचनाओं के लिए तालमेल पर चर्चा

  • खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान का एक मैकेनिज्म (यंत्र रचना) तैयार करने के लिए भी दोनों देशों को साथ आना होगा ताकि ठोस खुफिया सूचनाओं के आधार पर त्वरित कदम उठाए जा सकें और आतंकी नेटवर्क को कमजोर किया जा सके, ऐसा लग भी रहा है कि इंटेलिजेंस (बुद्धि) प्राथमिकता में है।
  • बांग्लादेश का कांउटर (प्रतिकार करना) टेरर (आतंक) तंत्र आर्मी (फौज) की मदद से संचालित होता है और यह प्रोफेशनल (व्यावसायिक) तौर पर काफी मजबूत है, आतंकी घटनाओं से जुड़े बंधक संकट से हालांकि हर बार सफलातापर्वूक निपटा गया है, इसके बावजूद बांग्लादेश का इंटेलिजेंस (बुद्धि) हर बार आतंकी घटनाओं के पहले इनपुट हासिल करने में सफल नहीं रहा है, ऐसे में इस दिशा में भारत तकनीकी चीजों और अपनी बारे में विशेषज्ञता को बांग्लादेश को ऑफर (प्रस्ताव) कर सकता है ताकि खुफिया सूचनाएं जुटाने में बांग्लादेश और समर्थ हो सके।

हसीना की सुरक्षा प्राथमिकता में: -

  • सिक्योंरिटी (सुरक्षा) के मसले पर दोनों देशों के पास बड़े मौके हैं, पीएम शेख हसीना की पर्सनल (निजी) सिक्योरिटी (सुरक्षा) पर चर्चा करना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें इस्लामिक चरमपंथियों से बड़ा खतरा है, वह इस समय एकमात्र ऐसी लीडर (नेतृत्व-कर्त्ता) हैं जो भारत की दोस्त है और जिन्होंने चरमपंथ को खत्म करने में पूरी ताकत लगा रखी है, ऐसे में उनकी पुख्ता सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है, दोनों देशों के प्रोफेशनल्स (व्यावसायिक) को इसे ठोस बनाने की दिशा में बातचीत करनी चाहिए।

आर्म्ड फोर्सेस (सेना): -

  • इसी तर्ज पर, बांग्लादेश को भारत से मदद मांगनी चाहिए कि बांग्लादेश आर्म्ड फोर्सेस में ऐसे तत्व न दाखिल हो जाएं जो कि हसीना के खिलाफ काम करें, बांग्लादेशी आर्म्ड फोर्सेस एक बेहद राजनीतिक रूप से प्रभावित और इस्लामिक कट्‌टरता की ओर झुकाव वाला रहा है, इसमें कई विद्रोह और तख्तापलट की घटनाएं देखी गई हैं, ऐसे में इस मोर्चे पर भी काफी सतर्क रहने की जरूरत है।

(लेखक रिटायर्ड (सेवानिवृत्त) आईपीएस अफसर हैं, वह एक सिक्यारिटी (सुरक्षा) अनालिस्ट (विश्लेषक) हैं और ढाका और नई दिल्ली से बांग्लादेश के साथ जुड़े रहे हैं, उनकी राय व्यक्तिगत है।)

उपसंहार: - बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की इस यात्रा से इतना तो पता है तीस्ता नदी का समझौता शायद ही हो पाएगा। इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे रक्षा व सुरक्षा के है जिसमें संधि होगी। जिससे दोनों देशों के रिश्ते ओर मजबूत होगे। आगे तीस्ता नदी के समझौते में क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा और माना जा रहा है कि हसीना जी यात्रा से दोनों देशों के संबंधों के बीच में मजबूती आएगी।

- Published/Last Modified on: May 21, 2017

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