भारत के सामने चुनौतियां (Challenges Before India) (Download PDF)

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प्रस्तावना: - विश्व राजनीति में भारत का स्थान अहम है। आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहे भारत को वैश्विक रूप से अहम किरदार निभाने के लिए अपने मित्र देशों को ढूंढना होगा। पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन के साथ हमारे संबंधों में खटास का एक लंबा अध्याय रहा है। उत्तरपूर्व के पड़ोसी चीनी ड्रेगन की विस्तारवादी वन (एक) रोड (सड़क) वन (एक) बैल्ट (यंत्र चलाने का पट्‌टा) का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे पड़ोसियों के बीच भारत के सामने अब विश्व महाशक्ति अमरीका और रूस में स्वाभाविक मित्र का चयन करना है। अमरीका के साथ नजदीकियां बढ़ रहीं हैं तो रूस के साथ दूरियां पनप रहीं हैं।.

प्रयास: - विश्व राजनीतिक दृश्य अत्यंत जटिल, गतिमान और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। वर्तमान विश्व राजनीति में न तो कोई स्थाई मित्र है और न ही कोई स्थाई शत्रु। यह स्थिति आतंकवाद के मुद्दे पर चीन और रूस के अख्तियार किए गए रुख से स्पष्ट होती हैं। विश्व मंच पर अमरीका एकमात्र महाशक्ति नहीं रह गया है। वह पहले के मुकाबले कमजोर हुआ है। अमरीका को रूस, चीन जैसे देशो से चुनौती मिल रही हैं। ऐसी स्थिति में भारत वैश्विक राजनीतिक मंच पर अपनी जगह बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के प्रति चुप बैठना अब संभव नहीं रह गया है।

भारत ने अपनी भूमिका के विस्तार के लिए कई-देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के प्रयास किए हैं। यह प्रयास दव्पक्षीय और बहुपक्षीय दोनों रूप में किए गए हैं। इसी के मद्देनजर भारत प्रशांत दव्पीय देशों का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया तो भारत -अफ्रीका सम्मेलन में अफ्रीकी देशों की भागीदारी 17 देशों से बढ़ाकर सभी 54 देशों तक पहुंचाई गई। इसकी कड़ी में हार्ट (हृदय) ऑफ (का) एशिया और ब्रिक्स सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। अफगानिस्तान में संसद भवन, सलमा बांध का निर्माण, श्रीलंका में डुरीअप्पा स्टैडियम (मैदान), नेपाल में ट्रोमा (आघात) सेंटर (केन्द्र) तो बांग्लादेश में समेकित पेट्रोपोल चेकपोइंट (जाँच पड़ताल करने का स्थान) का निर्माण संबंधों को मजबूत करने के लिए किया।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर पेरिस अनुबंध के लिए भारत ने प्रमुख भूमिका निभाई तो अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा गठबंधन बनाने में भी अग्रणी भूमिका में रहा। भारत अपने आप को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए विभिन्न तरीकों से लगातार प्रयास कर रहा है।

भारतीय रणनीतिक के 4 समीकरण: -

  1. पाक-पड़ोसी पाकिस्तान के साथ भारत का चार बार सशस्त्र संघर्ष हो चुका हैं। दोनों देशों के बीच ज्यादातर समय कटुता बनी रही है। वर्तमान में कश्मीर को लेकर भारत के पाकिस्तान से संबंधों मेें दरार है। भारत ने हाल ही में पाक सैन्य चौकियों को ध्वस्त करने का वीडियो जारी किया, जवाब में पाक ने भी कथित वीडियो जारी किया है। फिलहान पाक अब रूस के साथ नजदीकियां बढ़ा रहा है। चीन के साथ उसका गठजोड़ है।
  2. चीन-भारत का उत्तर पूर्वी पड़ोसी चीन बड़ा खतरा है। वर्ष 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया था। भारत की सैकड़ों वर्ग किलोमीटर भूमि पर चीन का कब्जा है। अब वन रोड वन बेल्ट के नाम पर चीन भारत को घेरना चाहता है। भारत ने फिलहान वन रोड वन बेल्ट सम्मेलन का बहिष्कार किया है, लेकिन चीन मंसूबे घातक हैं। फिलहान चीन के एशिया में विस्तावादी रवैये में भारत सबसे बड़ा सामरिक प्रतिरोध है।
  3. यूएस-अमरीका के साथ यू ंतो भारत के संबंध उतार-चढ़ाव वाले रहे हें। लेकिन पिछले लगभग एक दशक के दौरान दोनों देश आर्थिक रूप से एक-दूसरे के करीब आए हैं। विगत वर्षो में भारत ने अमरीका के साथ सामरिक संबंधें में भी मजबूती बनाई है। वैश्विक हालातों में भारत और अमरीका के बीच नजदीकियों में इजाफा हुआ हैं। फिलहाल अमरीका के साथ व्यापार के क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान छह गुना वृद्धि हुई है।
  4. रूस-स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के दौर में नेहरूयुगीन विदेश नीति में रूस का स्थान प्रथम था। तत्कालीन सोवियत संघ कभी भारत का सबसे बड़ा कूटनीतिक साझेदार था। सोवियत विघटन के बाद वर्तमान रूस के साथ भारत के संबंध में अब पहले जैसी मजबूती नहीं रही है। वैसे दोनों देश पुराने संबंधों को याद जरूर करते हैं। फिलहाल रूस के साथ सामरिक संबंध अब भी कायम है लेकिन व्यापार में गति नहीं।

जरूरत: - भारत ’ब्रेग्जिट’ से राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से प्रभावित हुआ है। राजनीतिक रूप से ब्रिटेन यूरोप संघ (ईयू) में भारत का सबसे अच्छ मित्र देश रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का ब्रिटेन समर्थन करता रहा है। ब्रिटेन, ईयू के उन चुनिंदा देशों में रहा जो सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का खुलकर समर्थन करते रहे हैं। ब्रिटेन के ईयू के बाहर होने के बाद भारत को राजनीतिक रूप से यूरोपीय संघ में अपने भरोसेमंद मित्र बनाने पड़ेंगे। आर्थिक रूप से ब्रिटेन, भारत के लिए यूरोपीय संघ के दरवाजे का काम करता था। ऐसे में यूरोप के दरवाजे भारतीय कंपनियों (संघों) के लिए ब्रिटेन के जरिए काफी हद तक खुल जाते थे। ब्रिटेन के अलग होने के बाद भारतीय कंपनियों (संघों) को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ेगी। ब्रेग्जिट के बाद यूरोप से भारत में होने वाले निवेश के भी प्रभावित होने की आशंका है। ब्रिटिश पाउंड (कुछ देशों का सिक्का) का मूल्य अभी गिरा है लेकिन लंबे समय में यह मजबूत हो सकता है। यह स्थित भारतीय एक्सपोर्टरों (विशेषज्ञ) के लिए अच्छा नहीं है। इससे भारत का निर्यात सस्ता और आयात महंगा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भारत को यूरोप को लेकर अपनी नीति फूंक-फूंक कर कदम रखकर सावधानी पूर्वक बनानी होगी।

3 बड़े नेता और भारत: -

वर्तमान वैश्विक दृश्य में अमरीका, रूस और जर्मनी के नेताओं का भारत के प्रति रवैया

  1. डोनाल्ड ट्रंप अमरीका राष्ट्रपति-ट्रंप का भारत के प्रति फिलहाल रवैया कुल मिलाकर मिश्रित ही रहा है, एच-1 बी वीजा (एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की अनुमति) प्रावधानों के कारण अमरीका में बसने वाले भारतीयों को दिक्कते हो सकती हैं। साथ ही ट्रंप प्रशासन ने पाक को सैन्य मदद में ढाई गुना कटौती का निर्णय किया है।
  2. व्लादीमीर पुतिन रूसी राष्ट्रपति-रूस के साथ भारत का व्यापार लगातार घट रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार अब सालाना 7 अरब डॉलर ही रह गया है। मोदी 1 जून को रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। रूस की पाक से नजदीकियां बढ़ रही है।
  3. एंजेला मर्केल जर्मन चांसलर (प्रधान अधिकारी) -नए वैश्विक परिदृश्य में जर्मनी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का साथ दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का मसला हो या न्यूक्लियर (नाभकीय) सप्लायर्स (आपूर्तिकर्ता) ग्रुप (समूह) में भारत की सदस्यता का समर्थन हो।

विशेषज्ञों की राय: -

भारतीय विदेश नीति में पिछले कुछ साल में बुनियादी बदलाव आए हैं। दुनिया के कई देशों से रिश्ते बेहतर हुए हैं।

कुंवर नटवर सिंह, पूर्व मंत्री और विदेश मामलों के विशेषज्ञ

  • भारत की विदेश नीति में पिछले कुछ साल में बुनियादी बदलाव आए हैं। हमने अपने परंपरागत सहयोगियों के इतर अन्य देशों से भी संबंध मजबूत किए हैं। वियतनाम, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से संबंध मजबूत हुए हैं तो मंगोलिया जैसे देशों से संबंध बनाए जा रहे हैं। भारत के अमरीका से संबंध पहले की तुलना में और बेहतर हुए हैं। इसका असर भारत-रूस के संबंधों पर पड़ा भी है। रूस, भारत का परंपरागत सहयोगी रहा है और दोनों देशों के संबंध प्रगाढ़ रहे हैं लेकिन कुछ समय से रूस के रिश्ते पाकिस्तान से बेहतर हुए हैं।
  • रूस और चीन के बीच भी रणनीतिक सहयोग बढ़ा है। हमने खाड़ी देशों से मधुर संबंध बनाने के प्रयास किए हैं जिनमें से कई देश परंपरागत रूप से पाकिस्तान के समर्थक माने जाते हैं। सऊदी अरब, तुर्की जैसे देशों से भारत ने अच्छे संबंध बनाने के प्रयास किए जिनके पाकिस्तान से अच्छे संबंध रहे हैं। सऊदी अरब ने पाकिस्तान से यमन में विद्रोहियों से लड़ने के लिए फौज भेजने का आग्रह किया था जिसे पाक ने नहीं माना। इससे सऊदी अरब में पाकिस्तान के प्रति कुछ नाराजगी है। भारत ने इसके साथ ही कतर, बहरीन से भी संबंध मजबूत करने के प्रयास किए गए।
  • लेकिन ये सभी सभी सुन्नी बहुल देश हैं जो कि शिया बहुल देश ईरान के विरोधी हैं। इनसे मधुर संबंधों का असर भारत-ईरान संबंधों पर भी पड़ सकता है। हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति की सऊदी अरब की यात्रा के दौरान खाड़ी देशों ने ईरान के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित की है। यह देश आतंकवाद से लड़ने के लिए इस्लामिक देशों का एक सैन्य गठबंधन भी बन रहे हैं जिसका नेतृत्व पाकिस्तान सेना के पूर्व जनरल राहिल शरीफ करेंगे। भारत के इन देशों के साथ-साथ ईरान भी काफी महत्वपूर्ण है। ईरान की भी भारत की ऊर्जा जरूरते पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे आस-पास के देशों से बेहतर रिश्ते होने चाहिए।
  • हालांकि इसमें सरकार पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई भारत ने हिन्द महासागर चीन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर हिन्द महासागरीय देशों ऑस्ट्रेलिया, सेशल्स, मॉरीशस जैसे देशों से बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की गई। इसके लिए प्रधानमंत्री ने सेशेल्स, मॉरीशस जैसे छोटे हिंद महासागरीय देशों की यात्रा की। फिजी और उसके आस-पास के छोटे देशों का सम्मेलन जयपुर में आयोजित करके इन देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

संबंध: -हमे अपने पडोसी देशों से संबंंध बेहतर बनाने होंगे क्योंकि हम अपने ़मित्र ओेैर शत्रु तो बदल सकते हैं लेकिन पडोसी नहीं।

प्रो. एके पाशा जेएनयू अध्यापन विदेश मामलो के जानकार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शप़थ ग्रहण के समय सभी पडोसी देशों के शासनाघ्यक्षों को बुलाया या। इसका मकसद पडोसी देशो से संबंघ सुधारना था लेकिन इसमे पर्याप्त सफलता हाय नही लगी। भारत की स्थिति बडे भाई जैसी रही हैं। इसलिए भी पड़ोसी देश हमें शंका की दृष्टि से देखते हैं। इस शंका का फायदा चीन जैसे देश उठाते हैं। पाकिस्तान के साथ हमारा सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई के वीडियो जारी कर रहे हैं।
  • चीन ने पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल को अपने महत्वाकांशी वन रोड, वन बेल्ट (ओआरओबी) प्रोजेक्ट (परियोजना) का हिस्सा बना लिया है। चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारा) पाक अधिकत कश्मीर से होकर गुजर रहा है। पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ता रणनीतिक गठबंधन भी देश के सामने बड़ी चुनौती है। भारत के नेपाल, श्रीलंका से संबंधों में खटास आई है। भारत ने नेपाल के संविधान संशोधन और मधेशियों के मुद्दे पर हस्तक्षेप कर चीन को मौका दे दिया। चीन ने बिना समय गंवाए नेपाल में निर्माण कार्यों और ओआरओबी के जरिए संबंधों को मजबूत किया है। भारत-पाक के संबंधों को अन्य पक्ष भी प्रभावित करते हैं। अमरीका, पाकिस्तान का पुराना सहयोगी रहा है। चीन को काउंटर (गिनने वाला) करने, अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने और आतंक से लड़ने के लिए पाकिस्तान की जरूरत समझते हुए उससे संबंधों को ज्यादा बिगाड़ना नहीं चाहता है। चीन के पाकिस्तान के साथ संबंध बेहतर बन रहे हैं। ये चीजें दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करती है। इस तरह से दोनों देशों के संबंध दव्पक्षीय की बजाए बहुपक्षीय हो जाते हैं।
  • अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए भी भारत की पहल से ही ’हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन की शुरुआत हुई है। अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए ईरान, अमरीका पाकिस्तान सहित कई देशों सहयोग जरूरी है। अफगानिस्तान में अशांति भारत के मध्य एशिया तक के संबंधों को प्रभावित करती है। चीन के साथ हमारा व्यापार तो बढ़ रहा है लेकिन सीमा विवाद का हल अब तक नहीं निकला है। इसके अलावा चीन क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने और भारत के घेरने का मौका नहीं छोड़ रहा है। हिंद महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने उसने ’मोतियों की माला’ परियोजना तैयार की है। इसमें वह श्रीलंका बांग्लादेश और मालदीप में बंदरगाह विकसित कर रहा है। श्रीलंका के हमारे बिगड़े संबंधों में अब कुछ सुधार हुआ है और हाल ही में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने एक-दूसरे देशों की यात्रा की है। नेपाल में मधेशियों के मामले में हस्तक्षेप से चीन को वहां पैर जमाने का मौका मिला है

पड़ोसियों की तुलना मेंं हम कहांं?

Table Contain Shows Where do we compare to neighbors

Table Contain Shows Where do we compare to neighbors

भारत

पाक

चीन

सक्रिय सेना

13, 25, 000

6, 20, 000

23, 35, 000

सैन्य रिजर्व (सुरक्षित रखना)

21, 43, 000

5, 15, 000

23, 00, 000

फाइटर (लड़ाकू) एयरक्राफ्ट (हवाईजहाज/विमान)

2, 086

923

2, 924

हेलीकॉप्टर (घिरनीदार विमान)

646

306

802

सर्विसेबल एयरपोर्ट

346

151

507

टैंक (टंकी)

6, 464

2, 924

9, 150

अर्माड व्हीकल (वाहन)

6, 704

2, 828

4, 788

सेल्फ (स्वार्थ) प्रोपेल्ड (झुकाव) गन (तोप)

290

465

1, 710

रॉकेट (अग्नि बाण) सिस्टम (प्रबंध)

292

134

1, 770

विचार: - निम्न हैं-

किसी भी देश की विदेश नीति चाहे वो कितनी भी सरल क्यों न हो, उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कुछ उपजाऊ लोगों के दिमाग की उपज होनी चाहिए। विदेश नीति में दिल नहीं दिमाग का इस्तेमाल होना चाहिए।

हैनरी किसिंनजर, कूटनीतिज्ञ

स्थान: -

  • भारतीय अर्थव्यस्था का दुनिया भर में 6 नंबर है।, आईएमएफ के अनुसार वर्ष 2022 तक भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में चौथे स्थान पर होगी ।

जीडीपी: -

  • भारतीय पर्यटन उद्योग को वर्ष 2016 के दौरान 208.9 अरब डॉलर (अमेरिका व अन्य राज्यों का प्रचलित मुद्रा) का राजस्व प्राप्त हुआ। इस आधार पर भारत दुनिया का 7वां देश बना, ये जीडीपी का 9.6 फीसदी है।

दर: -निम्न हैं

बेरोजगारी दर: - भारत 3.4 प्रतिशत, पाक 4.5 प्रतिशत, चीन 6.5 प्रतिशत।

श्रम शक्ति में महिला अनुपात-भारत 0.41 प्रतिशत, पाक 0.84 प्रतिशत, चीन 0.11 प्रतिशत

साक्षरता दर- भारत 71.2 प्रतिशत, पाक 96.4 प्रतिशत, चीन 68 प्रतिशत

प्रजनन दर -भारत 2.5प्र्रतिशत, पाक 1.7 प्रतिशत चीन 3.62 प्रतिशत

Table Contain Shows Major Defence Items of India, Pakistan and China

Table Contain Shows Major Defence Items of India, Pakistan and China

फ्लीट (बेड़ा) स्ट्रेैन्थ (शक्ति)

भारत

295

पाक

197

चीन

714

सबमरीन (पनडुब्बी)

भारत

14

पाक

05

चीन

68

क्राफ्ट (शिल्प) कैरियर (व्यवसाय)

भारत

02

पाक

00

चीन

01

परमाणु हथियार

भारत

100

पक

90

चीन

250

स्रोत: इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) एटॉमिक (आणविक) रिसर्च (खोज) , प्यू (अल्प) रिसर्च (खोज) ग्लोबल (विश्वव्यापी) फायर (उत्साह) पावर (शक्ति) डॉट कॉम

अमेरिका: -

  • 26 मई, 2014 को मोदी सरकार के शपथग्रहण की सबसे खास बात पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के नेताओं को बुलाया जाना था। सभी आए भी। यह ’पड़ोसी पहले’ की नीति की बेहतरीन शुरुआत थी। लेकिन कुछ महीनों बाद ही मोदी सरकार के लगभग सभी पड़ोसियों से संबंधों में तनाव भर गया। नेपाल हो या श्रीलंका ज्यादातर पड़ोसी चीन की ओर झुकते दिखे। चीन तो लगातार भारत के रास्ते में अड़ंगे डालने में जुटा हुआ हैं। हां, अमेरिका से संबंध बेहतर हुए है। उसने भारत को अपना रणनीतिक साझीदार बना लिया है।

नेपाल: -

  • मई, 2016 में अभूतपूर्व तरीके से नेपाल ने अपनी राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी की भारत यात्रा रद्द कर दी। नई दिल्ली से राजदूत को बुला लिया। इधर, पीएम मोदी ने भी लुंबर्नी यात्रा रद्द कर दी। इस तनाव के जड़ में था नेपाल का नया संविधान जिससे भारतीय मूल के तेराई, मधेसी व थारू समुदाय नाराज थे। उन्होंने भारत का समर्थन पाकर काठमांडू की घेराबंदी कर दी। जवाब में पहली बार नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र से शिकायत की। चीन से करार किया।

पड़ोसी देश खफा: -

  • पाकिस्तान-सीमा पार से गोलीबारी और आतंकी वारदातों के कारण भारत के पाक के रिश्ते बेहद खराब हो चुके हैं। पठानकोट में इमला, भारत की सर्जिकल (शल्य क्रिया) स्ट्राइक (हड़ताल), भारत के सैनिकों के सिर काटने और जाधव मामले से तल्खी बढ़ी हैं।
  • बांग्लादेश-भारत के साथ बांग्लादेश अपने खून के रिश्ते मानता है। बीते अप्रैल में ही 22 समझौते कर उसने भारत की मदद से आगे बढ़ने में रुचि दिखाई है। हालांकि तीस्ता नदी को लेकर मामला अब तक लटका हुआ है।
  • श्रीलंका-श्रीलंका ने इसी साल 18 मई को पीएम मोदी की यात्रा से पहले चीन की पनडुब्बी को कोलंबो में रुकने की इजाजत नहीं दी। 2016 में श्रीलंका कह चुका है कि वह न भारत का समर्थक है और न ही चीन का।
  • चीन-चीन के मेगा (विशाल) प्रोजेक्ट (परियोजना) ओबीओआर भारतीय कूटनीति के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। यह सीधे कश्मीर नीति से जुड़ा है। भारत की आपत्तियों को दरकिनार कर पाक, श्रीलंका तथा नेपाल इसमें शामिल हैं।
  • अफगानिस्तान-2014 में अमरीकी सेना के जाने के बाद अफगानिस्तान को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत ने सैन्य मदद के साथ कई बड़ी परियोजनाओं में मदद की। इसमें यातायात के लिए बसें दी और सेना को एमआई हेलीकाप्टर।

बढ़े कदम: -

  • यूएस-दोनों देशों ने अगस्त, 2016 के लॉजिस्टिक्स (सेना को टिकाने या हटाने की विद्या) एक्सचेंज (अदला बदली) मैमोरंडम (स्मारक पत्र) ऑफ (का) एग्रीमेंट (समझौता) पर हस्ताक्षर किए है। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्‌डों का प्रयोग कर सकते हैं।
  • जापान-जापान ने भारत से असैन्य परमाणु करार कर लिया है। उसने ऐसे देश से करार किया जिसने एनपीटी पर दस्तखत नहीं किए। इसके अलावा वह भारतीयों के कौशल निखारने व बुलेट (बंदूक की गोली) ट्रेन (रेल) चलाने में मदद देगा।
  • इजराइल-रूस को पीछे छोड़ इजरायल आज भारत का दूसरा बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। 3 जुलाई, 2015 को भारत पहली बार इजरायल के खिलाफ यूएन में मानवाधिकार परिषद में आए प्रस्ताव पर वोटिंग (मतगणना) में शामिल नहीं हुआ।
  • रूस-सालों से भारत का भरोसेमंद साथी रहा रूस अब पाकिस्तान के साथ तेजी से सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है बीते साल सिंतबर में भारत की आपत्ति के बाद भी संयुक्त युद्धाभ्यास किया। उसे हथियार देने पर भी आगे बढ़ रहा।
  • ईरान-ईरान के साथ भारत के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। उदारवादी रूहानी के दोबारा सत्ता में लौटने से भारत मजबूत हुआ है। ऊर्जा क्षेत्र के साथ ईरान मध्य एशिया में भारत को वैकल्पिक रास्ते भी मुहैया करा रहा है।

कामयाबी: -

दक्षिण एशिया में भारत ने कूटनीति पर काम शुरू कर दिया है। उसने जीसैट 9 उपग्रह छोड़कर जहां संचार को मजबूत करने का कदम उठाया, वहीं जाधव मामले को आईसीजे में लाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाक की कारगुजारी दुनिया के सामने ला दी है।

उपग्रह-चीन के प्रभाव को रोकने के लिए भारत ने स्पेस (अंतरिक्ष) कूटनीति का सहारा लिया। उसने इसी महीने सार्क में संचार और संपर्क बढ़ाने के लिए दक्षिण एशिया उपग्रह जीसैट-9 लांच (प्रक्षेपण) किया। मोदी जी ने इसरो के इस उपग्रह को सार्क देशों को ’उपहार’ का बताया है।

पाक इस उपग्रह का लाभ नहीं लेगा। उसने तर्क दिया है कि उसका खुद का अंतरिक्ष कार्यक्रम है। उपग्रह का सबसे ज्यादा लाभ भूटान और मालदीव को होगा।

जाधव-भारतीय नागरिक कूलभूषण जाधव की फांसी की तामील पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के लिए न्यायाधीश द्वारा रोक लगाए जाने को भारत की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। इसे रणनीतिक तौर पर सही तैयारी की मिसाल के तौर पर देखांं जा रहा है। पाकिस्तान ने अब तक भारत को जाधव तक राजनयिक पहुंच नहीं दी है। वह लगातार झूठ बोल रहा कि जाधव के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।

उपसंहार: - अब भारत या तो चीन-पाक गठजोड़ से निपटें या अमरीका तथा रूस से रिश्ते में बनाएं संतुलन। इनमें से भारत को क्या करना यह तो भारत तय कर सकता है कि उसको किस देश से फायदा होगा जिससे वे अपना रिश्ता उस देश के प्रति मजबूत कर सके।

- Published/Last Modified on: June 11, 2017

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