रासायनिक हथियार (Chemical Weapon- in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: - जर्मनी ने लीबिया से रासायनिक हथियारों के आखिरी जखीरे को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। ये हथियार पूर्व लीबियाई तानाशाह मोअम्मद गद्दाफी के रासायनिक हथियार कार्यक्रम का हिस्सा थे। जर्मन सरकार की एक कंपनी (संघ) गेका ने अपने देश के मुंस्टर में बने एक केन्द्र में इसे नष्ट किया है। इन हथियारों को परमाणु हथियारों से भी बेहद खतरनाक माना जाता है। दुनिया के किन-किन देशों के पास हैं रासायनिक हथियार हैं और कौन से देश दुश्मनों के खिलाफ इनका इस्तेमाल कर चुके हैं। आखिर ये हथियार बड़ा खतरा क्यों बनते जा रहे हैं? आगे इन्हीं हथियारों के विस्तार के बारे में बताया गया हैं।

क्या है रासायनिक हथियार? : - रासायनिक हथियार या केमिकल वेपन का इस्तेमाल गैस या तरल के तौर पर किया जाता है। ऐसे में इनके फैलने की गति बहुत तेज होती है और हजारों जानें कुछ ही मिनटों में चली जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक हथियारों का भंडार धरती पर जिंदगी को कई बार खत्म कर सकता है।

किसी तरह से शरीर पर डालता है असर? : - हवा में घुल जाती है और बन जाती है हजारों मौतों का कारण बन जाती है। त्वचा और आंख के जरिए ये किसी के संपर्क में आता है और आंख, नाक से पानी बहने लगता है। उल्टियां शुरू हो जाती हैं। महज 1 से 10 मिनट में ही शरीर अकड़ने के बाद किसी भी शख्स की इससे मौत हो सकती है।

क्या इसे रोकने के लिए कोई संधि है? : - रासायनिक हथियार निषेध संगठन (ओपीसीडब्ल्यू) संयुक्त राष्ट्र संघ समर्थित एक संस्था है जो दुनिया भर में रासायनिक हथियारों को नष्ट करने और उनकी रोकथाम के लिए काम करती है। इसके उल्लेखनीय काम को देखते हुए उसे 2013 का नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला।

क्या भारत ने भी नष्ट कर दिए ये हथियार? : -भारत ने 1993 में ही इस संधि पर दस्तखत किए थे। उसने 2006 के अंत तक अपने रासायनिक हथियार व सामग्री भंडार के 75 प्रतिशत को नष्ट कर दिया। 14 मई 2009 को भारत ने यूएन को जानकारी दी कि उसने पूरी तरह से इन हथियारों के भंडार को नष्ट कर दिया था।

किन देशों ने ओपीसीडब्ल्यू पर दस्तखत किए हैं? : - भारत, रूस और अमरीका व यूरोपीय देशों समेत संयुक्त राष्ट्र के 190 से ज्यादा देशों ने रासायनिक हथियारों को नष्ट करने पर सहमति जताई। इन देशों ने ओपीसीडब्ल्यू पर दस्तखत किए हैं। सिर्फ इजरायल और उ. कोरिया ने ही इस पर दस्तखत नहीं किए हैं। हालांकि, इजरायल ने जरूर कुछ कार्यक्रम चलाए हैं।

इन हथियारों को नष्ट कैसे किया जाता हैं? : - सीरिया के रासायनिक हथियारों को समुद्र में नष्ट करने के लिए योजना बनाई गई थी। ऐसे हथियारों को नष्ट करने के लिए जहाज पर एक विध्वंस केन्द्र की स्थापना की गई, जो पानी के इस्तेमाल से रसायनों को बेहद कम खतरनाक सुरक्षित स्तर तक लाता है। फिर इसे नष्ट किया जाता है।

किसने नष्ट किए ये हथियार? : - रूस ने अपनी आखिरी रासायनिक हथियारों की खेप को बीते साल पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। अमरीका अभी तक इन्हें खत्म नहीं कर पाया है। यूरोप में भी इनका करीब-करीब खात्मा हो चुका है। एशिया में भी खात्मे के कगार पर है।

ये है दुनिया के खतरनाक रसायन: -

  1. वीएक्स-वीएक्स बेहद जहरीला रासायनिक मिश्रण है। ऑर्गनोफॉस्फेट क्लास (कक्षा) का यह कंपाउंड सीधा इंसान के तंत्रिका तत्र पर हमला करता है। असर सेकेंडों (पल) के भीतर होता है। दम घुटना या हार्ट फेल (हृदयघात) हो जाता है।
  2. मस्टर्ड गैस- इसका इसर धीमा लेकिन घातक होता है। मस्टर्ड गैस आंखों, श्वसन तंत्र, त्वचा व कोशिकाओं पर हमला करती है। प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मन सेना ने ब्रिटिश और कनाडा की सेना के विरुद्ध इस्तेमाल हुआ था।
  3. क्लोरीन (एक औषधी) -क्लोरीन का इस्तेमाल आम तौर पर सफाई, कीटनाशक बनाने, रबर बनाने या फिर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है। लेकिन ज्यादा मात्रा जानलेवा है। पहली बार दव्तीय विश्वयुद्ध में इस्तेमाल किया गया था।
  4. सेरीन-सेरीन बेहद जहरीला रसायन है। इसकी एक बूंद भी इंसान को तुरंत मार सकती है। वीएक्स की तरह सेरीन भी तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। मांसपेशियां नाकाम हो जाती है और मौत हो जाती है। सीरिया में इस्तेमाल हुआ था।
  5. फॉस्जीन- फॉस्जीन को अब तक के सबसे घातक रासायनिक हथियारों में गिना जाता है। प्लास्टिक और कीटनाशक बनाने में इस्तेमाल होने वाली फॉस्जीन से इंसान की सांस फूल जाती है। प्रथम विश्वयुद्ध में प्रयोग हुआ था।
  6. डब्ल्यू पी- इराक में आतंकियों के खिलाफ अमरीकी सेना ने सफेद फास्फोरस (डब्ल्यूपी) का इस्तेमाल किया था। इतना ही नहीं रूस ने सीरिया के रक्का शहर में सॅेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया था। हड्‌िडयां तक गला देता है।

दक्ष्िण्कोरिया: -दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उ. कोरिया के पास 5000 टन से ज्यादा रासायनिक हथियारों का जखीरा है। उसमें से वह रसायन भी शामिल है जिसका उपयोग उ. कोरिया के नेता के सौतेले भाई की हत्या में किया गया है।

  • इस मामले में मलेशिया की पुलिस का कहना है कि किम जोंग-नाम के चेहरे और आंख से वीएक्स-नर्व एजेंट रसायन मिला है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने सामूहिक विनाश के हथियार की सूची में शामिल किया हुआ है। गौरतलब है कि जोंग-नाम को कुआलालंपुर के हवाई अड्‌डे पर पिछले सप्ताह जहर दिया गया था।
  • दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने साल 2014 के अपने श्वेत पत्र में कहा है कि उ. कोरिया ने 1980 से ही रासायनिक हथियार बनाना शुरू कर दिया था और ऐसा अनुमान है कि इसने 2, 500 से लेकर 5000 टन तक का भंडार जमा कर लिया है। निजी कोरिया रक्षा नेटवर्क (जाल पर कार्य) के रक्षा विशेषज्ञ ली वु ने एएफपी को बताया कि, ”ऐसा माना जाता है कि उ. कोरिया के पास वीएक्स का भंडार है। इसका उत्पादन कम खर्चे पर आसानी से किया जा सकता है।” उन्होंने बताया कि इसका विकास 100 साल पहले किया गया था। वीएक्स का उत्पादन किसी भी छोटी प्रयोगशाला और कीटनाशक के उत्पादन की सुविधा वाले स्थान पर हो सकता है।
  • उ. कोरिया ने वैश्चिक रासायनिक हथियार करार पर हस्ताक्षर नहीं किया है। इसके तहत रासायनिक हथियारों के उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर प्रतिबंध है। इस संधि पर 160 से ज्यादा देशों ने हस्ताक्षर किया है जो 1997 से अस्तित्व में हैं।
  • पिछले दिनों सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने युद्ध में नए तरह के हथियारों के खतरे से देश को आगाह किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु हथियारों (सीबीआरएन) के उपयोग का खतरा वास्तविक बनकर उभरा है। सेना प्रमुख ने कहा कि पारंपरिक सेना के विपरीत सीबीआरएन से मुकाबला एक ”अति अप्रत्याशित” वातावरण में करना होता है, जहां शत्रु भारत का मुकाबला करने के लिए ’विषम’ साधनों का उपयोग कर सकते हैं।

आइयें बताते है कि क्या सीबीआरएन? रासायनिक हथियारों के मामले में कौन कितना अधिक शक्तिशाली?

रासायनिक द्ध का अर्थ है: - किसी युद्ध में रासायनिक पदार्थों के विषैले गुणों का उपयोग करके जन-धन की हानि पहुंचाना। रासायनिक युद्ध, परमाणु युद्ध (या नाभिकीय युद्ध) से अलग है। सामान्य भाषा में नाभिकीय युद्ध, जैविक युद्ध तथा रासायनिक युद्ध को सम्मिलित रूप से महासंहारक हथियार कहलातें हैं। रासायनिक युद्ध अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिये विस्फोटक बलों पर निर्भर नहीं करता है बल्कि रसायनों के विषकारी घातक प्रभावों पर निर्भर है।

2016 में 92 फीसदी रसायनिक भंडार खत्म

रासायनिक हथियार कन्वेंशन (सम्मेलन) (1993) के अंतर्गत कानूनी तौर पर रासायनिक हथियारों का उत्पादन, भंडारण या इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। हालांकि, 1993 रासायनिक हथियार कन्वेंशन (सीडब्ल्यूसी) इसे नियंत्रित करने का सबसे हालिया समझौता है जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मानना बाध्यकारी है। प्रतिबंध के बावजूद इसका कई देशों के पास अब भी जखीरा मौजूद है। सीब्ल्यूसी पर 192 हस्ताक्षर करने वाले देशों में दुनिया की कुल आबादी का 98 फीसदी आबादी बसती है। जून 2016 तक इन देशों में कुल भंडार जून 2016 तक 72, 525 मीट्रिक (मात्रिक) टन में से 66, 368 टन भंडार को खत्म कर दिया गया। यानि 92 फीसदी भंडार को खत्म कर दिया गया। साल 2017 तक सिर्फ नॉर्थ (उत्तर) कोरिया और अमेरिका ने ही इस बात की पुष्टि की है कि उनके पास रासायनिक हथियार हैं।

रूस-रूस जिस वक्त सीडब्ल्यूसी पर दस्तखत किया था उस समय उसके पास रासायनिक हथियार का सबसे बड़ा भंडार था। लेकिन, 2010 आते आते उसने 18, 241 टन्स रासायनिक को खत्म कर दिया। जबकि, साल 2016 तक रूस ने अपने 94 फीसदी रासायनिक हथियार खत्म कर दिए और बाकी रासायनिक हथियार 2018 के अंत तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है।

यूनाईटेड स्टेट्‌-यूएस ने रासायनिक हथियार का जखीरा देश के अमेरिकी प्रायदव्ीपीय के आठ सैन्य प्रतिष्ठानों में भंडारण किया हुआ था। हालांकि, हनमें से कई जगहों पर रासायनिक हथियारों को खत्म किया जा रहा है। अमेरिका ने रासायनिक हथियार को जवाबी तौर पर इस्तेमाल कर अपने अधिकार को सुरक्षित कर रखा है। सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति ही जवाबी कार्रवायी में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत दे सकता है।

नॉर्थ कोरिया-नॉर्थ कोरिया ने सीडब्ल्यूसी पर हस्ताक्षर नहीं किया है और रासायनिक कार्यक्रम के बारे में कभी भी आधिकारिक तौर पर नहीं जाना जा सकता है। लेकिन, ऐसा माना जा रहा है कि उसके पास पर्याप्त मात्रा में रासायनिक हथियारों का भंडार है। ऐसा कहा जा रहा है कि नॉर्थ कोरिया ने रासायनिक हथियार बनाने के लिए जरूरी टर्बुन और मस्टर्ड गैस 1950 से भी पहले ही हासिल कर ली थी। साल 2009 में इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) क्राइसिस ग्रुप (समूह) ने आपसी सहमति जताते हुए अंदेशा जताया था कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 2, 500 टन से 5, 000 टन रासायनिक हथियारों का भंडार है।

भारत- भारत 14 जनवरी 1993 को आधिकारिक तौर पर रासायनिक हथियार देश (सीडब्ल्यूसी पर हस्ताक्षर करने के बाद जून 1997 में 1044 टन्स सल्फर मस्टर्ड के भंडार की घोषणा की थी। साल 2006 तक भारत ने 75 फीसदी रासायनिक मैटीरियल (माल) को खत्म कर दिया। 14 मई 2009 को भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस बात का ऐलान किया कि उसने रासायनिक हथियारों के भंडार को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

इराक-रासायनिक हथियार पर नजर रखने वाले ’द (यह) ऑर्गेनाइजेशन (संगठन) फॉर (के लिए) दी प्रोहिबिशन (निषेध) ऑफ (का) रासायनिक हथियार’ ने साल 2009 में इस बात की घोषणा की थी कि इराक सरकार ने अपने सभी रासायनिक हथियारों सयुंक्त राष्ट्र के महासचिव के सामने जमा करा दिया है। उसके बाद वह रासायनिक कन्वेंशन (सम्मेलन) का 186वां सदस्य बन गया।

जापान-जापान ने रासायनिक हथियारों का 1937 से 1945 के दरम्यान किया था। हालांकि, सितंबर 2010 में चीन और जापान ने संयुक्त रूप से उसे खत्म करने का फैसला किया।

उपसंहार: - इस प्रकार रासायनिक हथियार हर प्राणी के लिए बहुत खतरनाक हैं इसलिए इसको नष्ट करना ही बेहतर है पर कुछ देश इसे अपने लिए दुश्मनों से युद्ध के लिए सुरक्षित रखते हैं।

- Published/Last Modified on: March 13, 2018

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