सम्मेलन दावोस (Conference in Davos- in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: -वर्ल्ड (विश्व) इकोनॉमिक (अर्थशास्त्र) फोरम (मंच) -2018 की सालाना बैठ स्ट्‌िजरलैंड के रिजॉर्ट (आश्रय), शहर दावोस में शुरू हो गई थी। मोदी फोरम (मंच) में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय दल ले गए हैं। इसमें 6 मंत्रिमंडल मंत्री, 2 सीएम (मुख्यमंत्री), 100 सीईओ समेत 130 लोग शामिल हुए हैं। मोदी जी ने स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बेरसेट के साथ बातचीत की।

भारत की ओर से 21 साल बाद कोई प्रधानमंत्री इस फोरम में शामिल हो हुआ था। इससे पहले 1997 में पीएम एचड़ी देवेगौड़ा और 1994 में पीएम नरसिंह राव शामिल हुए थे। बैठक में पहली बार 21 प्रतिशत प्रतिनिधि महिलाएं थी, यह रिकॉर्ड (प्रमाण) था। पहली बार सभी को-चेयर (पद/आसन) महिलाएं थी। इनमें भारत की आंत्रप्रेन्योर चेतना सिन्हा भी शामिल थी। दावोस में यह 48 वीं बैठक है। इसमें 70 देशों के राष्ट्रध्यक्षों समेत 3000 लोग शामिल हो रहे हैं। बैठक की थीम (विषय) ’बंटी हुई दुनिया के लिए साझा भविष्य का निर्माण’ है। वर्ल्ड (विश्व) इकोनॉमिक (अर्थशास्त्र) फोरम (मंच) -की स्थापना 1971 में जिनेवा विश्वविद्यालय के प्रो. (प्राचार्य) क्लॉज एम श्वाब ने की थी। यह गैर-लाभकारी संस्था है, जो सार्वजनिक -निजी सहयोग के लिए व्यापार, राजनीति, शिक्षा, समाज से जुड़े लोगों की भागीदारी से दुनिया में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक: - दावोस -2018 में डब्ल्यूटीओ, विश्व बैंक, आईएमएफ समेत 38 संगठनों के हेड (शीर्ष) बैठक में शामिल हो रहे हैं। 2000 संघ के सीईओ भी मौजूद हैं। बैठक में 400 सत्र होंगे। इसमें 70 देशों के प्रमुखों समेत 350 नेता हिस्सा लेंगे। दावोस में पहली बार योग सत्र का आयोजन हो रहा है। इसमें योग गुरु बाबा रामदेव के दो शिष्य योग सिखाएंगे। शाहरुख खान जी महिला सशक्तिकरण सत्र को संबोधित करेंगे। शाहरूख, केट व्लैंचेट, एल्टन जॉन को 24वां क्रिस्टल अवॉर्ड (पुरस्कार) दिया जाएगा। एक सत्र को आरबीबाई के पूर्व गवर्नर (राज्यपाल) रघुराम राजन भी संबोधित करेंगे। पाक पीएम शाहिद खकान अब्बासी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हिस्सा लेंगे।

Table Contain shows the Indian team at number four in 70 countries

Table Contain shows the Indian team at number four in 70 countries

70 देशों में भारतीय दल चौथे नंबर पर

देश

सदस्य संख्या

अमेरिका

780

ब्रिटेन

266

स्विटजरलैंड

233

भारत

130

चीन

118

Table Contain shows the Davos agenda (agenda): The world will talk about 8 issues in 4 days

Table Contain shows the Davos agenda (agenda): The world will talk about 8 issues in 4 days

दावोस एजेंडा (कार्यसूची) : 4 दिन में 8 मुद्दों पर दुनिया बात करेगी

थ्दनांक

कार्य

23 जनवरी

विशेषाधिकारों पर बात। आप्रवासियों का मुद्दा।

24 जनवरी

शोषण, धर्म और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा।

25 जनवरी

नस्ल, एलजीबीटी।

26 जनवरी

अक्षमता पर बात।

मंच: -विघटित विश्व में साझा भविष्य निर्माण की अवधारणा के साथ विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) का 48 वां वार्षिक सम्मेलन दावोस (स्विट्‌जरलैंड) में हो रहा है। यह सम्मेलन 23 जनवरी से 26 जनवरी तक चला। वैश्वीकरण के इस युग में दुनिया के विभिन्न देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और कुछ देश तो ऐसे हैं जो दुनिया का सरताज बनने के भी इच्छुक हैं।

इसी महत्वाकांक्षा के बीच विभिन्न देश, समान हितों वाले समूहों में बंट गए हैं। ऐसे माहौल में स्वहितवादी विचारधारा का व्यापक असर देशों के परस्पर सहयोग पर पड़ा है और इसलिए एकीकृत साझा हितों जैेसे अंतरराष्ट्रीय सहभागिता, पर्यावरण संतुलन, शांति, सीमा सुरक्षा तथा अर्थव्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई। शायद इसलिए डब्लूईएफ का मुख्य एजेंडा (कार्यसूची) राष्ट्रों के बीच परस्पर सहयोगात्मक व एकीकृत विदेश नीतियों पर केन्द्रित है।

सम्मेलन के उदघाटन सत्र को भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित किया है। मोदी जी ने अपने उदबोधन में दरारों और दूरियों को बढ़ावा देने वाली विश्व व्यवस्था पर चिंता जताई। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबलाइजेशन (भमंडलीयकरण) की फीकी होती चमक के खतरे भी गिनाए। वर्ष 1997 के बाद पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री डब्लूईएफ में भाग ले रहे हैं। भारत विश्व मंच पर बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ते हुए तरक्की के पथ पर अग्रसर है और माना जा रहा है कि 2022 तक भारत जर्मनी से आगे निकल चुकेगा जो आर्थिक शक्ति के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है। भारत का ऑटो (वाहन/स्व) बाजार दुनिया में पांचवें स्थान पर है और यह विश्व की दूसरी सर्वाधिक आबादी वाला देश है; जिनमें 65 प्रतिशत युवा हैं जिनकी आयु 35 वर्ष से कम है।

कृषि के जरिये विश्व जीडीपी में योगदान के लिहाज से यह दुनिया में सातवें नंबर पर है। इसके अलावा हाल ही 35000 का स्तर पार कर लेने के बाद भारतीय स्टॉक (भंडार) बाजार भी विश्व में तीसरे पायदान पर खड़ा है। हांगकांग और अमरीका का नंबर (संख्या) पहले आता है। जहां तक व्यापार वरीयता का सवाल है, तीस पायदान चढ़कर भारत उन पांच शीर्ष देशों में शुमार हो गया है जो निरंतर बेहतरी की ओर अग्रसर हैं। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय संस्थान, राजनेता और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (संघ) के सीईओ दुनिया को एक समग्र राष्ट्र बनाने के लिए भारत के सुझाव और एजेंडा (कार्यसूची) की ओर उत्सुकता से देख रहे हैं।

विकास: -2018 - 20 में विश्व ओर उत्सुकता से देख रहे हैं। 2018 - 20 में विश्व की समग्र अर्थव्यवस्था में विकास की दर जहां 2.9 से 3.1 फीसदी है, अमरीकी अर्थव्यवस्था की दर 2.0 से 2.5 फीसदी, यूरो देशों की 1.5 से 2.1 फीसदी तथा चीन की 6.2 से 6.4 फीसदी है। वहीं भारत की आर्थिक विकास दर सबसे तेजी से बढ़ते हुए 7.3 से 8.1 फीसदी तक रहने का अनुमान है। इसलिए दुनिया भर के पूंजीवादी भारत को विश्व व्यापार केन्द्र के तौर पर देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की वर्ष 2017 में आई रिपोर्ट (विवरण) के अनुसार विश्व बेरोजगारी की दर 5.8 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। भारत को विकासशील एवं विकसित देशों में बेरोजगारी पर आवाज उठानी होगी।

उच्च स्तरीय रोजगार कौशल बढ़ाने के लिए सकल प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की जगह निर्माण व उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था में रोजगार कौशल को प्रोत्साहन देना होगा। श्रमिकों को रोजगार के लिए तैयार करने वाले देशों में यह सिद्धांत व्यवहारिक है। रोजगारों की यह अदला-बदली अगर सीमा पार राष्ट्रों में हो जाए तो दुनिया भर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान होगा, परस्पर जीवन शैलियों की जानकारी साझा होगी और यहीं से ’विश्व एक घर’ की अवधारणा का मार्ग प्रशस्त होगा। वर्ल्ड (विश्व) बैंक (अधिकोष), आईएएफ यूनिसेफ की ही तर्ज पर भारत को विभिन्न राष्ट्र समूहों में वर्ल्ड (विश्व) लेबर (मजदूर) बैंक (अधिकोष) व वर्ल्ड (विश्व) इनोवेशन (नवाचार) सेल (बिक्री) बनाने की वकालत करनी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट (विवरण) के अनुसार विश्व स्वास्थ्य सेवा विश्व जीडीपी की 9.89 प्रतिशत है। भारत की दो योजनाएं स्वच्छ भारत अभियान व योग-जीवन शैली ने दुनिया को संकेत दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पैसा खर्च करने के बजाय बहुमूल्य जीवन को बचाने पर ध्यान देना बेहतर विकल्प है। स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य केवल स्वच्छता ही नहीं है बल्कि बीमारियों के उपचार में होने वाला खर्च भी कम करना है, जो इस समय जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 6.8 फीसदी है।

इंस्टीट्‌यूट (संस्थान) ऑफ (के) इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) फाइनेंज की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व जीडीपी के मुकाबले वैश्विक ऋण बढ़कर जीडीपी का 3.25 गुना हो गया है। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि दुनिया ऋण के बल पर विकास कर रही है, जबकि इसे चुकाने के लिए विश्व के पास पर्याप्त संपत्ति व संसाधन नहीं है। इसलिए राष्ट्रों का व्यक्तिगत दायित्व है कि वे कर्ज के बल पर हो रहे विकास की चकाचौंध में न बह कर अपने राजकोषीय घाटे और सरकार पर कर्ज का हिसाब रखें। भारत को इस दिशा में भी दुनिया को राह दिखाने को तैयार रहना होगा।

प्रो. गौरव वल्लभ, आर्थिक मामलों के जानकार, विभिन्न समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में निरंतर लेखन

व एक्सलएलआरआई जमशेदपुर में अध्यापन।

उपसंहार: - इस मंच में 1997 के बाद भाग लेने से एक बार फिर भारत को नई ऊर्जा प्राप्त हुई हैं, जिससे वह विकास की ओर अग्रसर हुआ हैं। इसी तरह भारत हर मंच पर भारत के विकास के लिए, शामिल होता रहेगा जिसका परिणाम आगे आने वाला समय बताएगा।

- Published/Last Modified on: March 12, 2018

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