देश-विदेश (Country and Abroad - in Hindi Feb 2018) (Download PDF)

()

Download PDF of This Page (Size: 283.18 K)

प्रस्तावना: -प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फलस्तीन ओमान और संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा महत्वपूर्ण रही। फलस्तीन जाने वाले मोदी तकनीकी रूप से भारत के पहले प्रधानमंत्री बने तो पुराने सहयोगी ओमान के साथ रिश्तों पर कड़वाहट को हटाने की कोशिश भी की। यह भी देखना है कि यूएई से निवेश आकर्षित करने के प्रयास कितने सफल होंगे? वहीं दूसरी और भारत में ईरान के राष्ट्रपति आए जहां भारत और ईरान के संबंध ओर मजबूत होने की उम्मीद हैं।

भारत और पश्चिम एशिया: -के संबंधों के लिहाज से वर्ष 2018 अहम है। नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम एशिया के तीन देशों की यात्रा की है। पश्चिम एशिया भारत के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है। इससे करीब एक महीने पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरे पर आए। भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ रहा है और विदेश नीति में भी बदलाव आया है। अब भारत विदेश नीति में सबसे पहले अपना हित देखता है। शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद गुटनिरपेक्ष आंदोलन कमजोर पड़ा और हमारी विदेश नीति से धीरे-धीरे आदर्शवाद दूर हो गया। अब भारत का ध्यान दव्पक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर है। विदेश नीति में यथार्थवाद पर जोर है। पश्चिम एशिया के भारत की प्राथमिकता में होने के कई कारण हैं।

सबसे बड़ा कारण वहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय की उपस्थिति है। खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। ये अप्रवासी भारत में सालाना लगभग 35 - 40 अरब डॉलर की राशि भेजते हैं। साथ ही भारत की आवश्यकता का करीब 65 फीसदी कच्चा तेल खाड़ी देशों से ही आता है। भारत अपनी जरूरत के हिसाब से कच्चे तेल के ऑयल (तेल) रिजर्व (संशय) बनाना चाहता है जिसके लिए इन देशों के साथ सहयोग बढ़ाया जाना जरूरी है। तेल समृद्ध इन देशों से भारत निवेश भी चाहता है। अधिकतर खाड़ी देश परंपरागत रूप से पाकिस्तान के समर्थक रहे हैं पर जब से भारत ने पाक का आतंकी चेहरा उजागर किया है तब से पाकिस्तान के प्रति समर्थन कम हुआ है।

फलस्तीन: -तीन देशों की यात्रा के दौरान मोदी फलस्तीन गए तो उन्हें इजराइली वायुसेना ने सुरक्षा प्रदान की। फलस्तीन ने दौरे को ऐतिहासिक बताया है क्योंकि मोदी फलस्तीन की यात्रा करने वाले तकनीकी रूप से पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनकी फलस्तीन यात्रा वैसे ही है जैसे इजरायल की यात्रा थी। भारत अब इन दोनों देशों के साथ स्वतंत्र रिश्ते बना रहा है और इसके लिए उसकी नीति अलग-अलग है।

  • फलस्तीन ने मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ’ग्रैंड कॉलर’ से सम्मानित किया। फलस्तीन के साथ 6 एमओयू किए गए जिनमें इंडिया (भारत) -पेलेस्टाइन सेंटर (केन्द्र) फॉर (के लिये) इम्पावरिंग () वूमेन (महिला), नेशनल (राष्ट्रीय) प्रिंटिंग (मुद्रण) इन रामल्ला आदि है। फलस्तीन में मोदी मात्र तीन घंटे रूके और भारत की दव्राष्ट्र की पुरानी नीति को दोहराया जिसके तहत फलस्तीन और इजराइल दो अलग-अलग संप्रभु राष्ट्रों का समर्थन किया जाता रहा है। लेकिन मोदी ने फलस्तीन में इजराइली सेना की हिंसक गतिविधियों पर कुछ नहीं कहा और फलस्तीन-इजराइल मुद्दे के किसी समाधान पर पहुंचने में नाकाम रहे।
  • यह भी नहीं बता पाए कि फलस्तीन संप्रभु राष्ट्र कैसे बनेगा? जबकि इजराइल, फलस्तीन के इलाके में अवैध सेटलमेंट (समझौता) करने में लगा हुआ है। इस यात्रा में भारत की पुरानी नीति को ही दोहराया गया और यह फलस्तनी के लिए टोकेनिज्म ही बन रही। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की मोदी की वर्ष 2015 की यात्रा के बाद यह दूसरी यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री वे वीडियो सम्मेलन के जरिए मंदिर की आधारशिला रखी। 5 एमओयू हुए जिनमें ऊर्जा, रेलवे, रोजगार के क्षेत्र शामिल हैं।
  • यूएई में संविदा पर काम करने वाले भारतीय कामगारों के लिए दोनों देशों के बीच ई-प्लेटफॉर्म (मंच) बनाने का समझौता भी हुआ। इससे मानव तस्करी, अवैध गतिविधियां रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही कामगारों को अधिकारों के प्रति शिक्षित किया जाएगा व उनकी समस्याओं के समाधान में आसानी होगी। मोदी की वर्ष 2015 की यूएई यात्रा के बाद 2017 में आबूधावी हाउंसिंग, एनआईआईएफ में एक-एक अरब डॉलर और अक्षय ऊर्जा में 30 करोड़ का निवेश किया। पिछले वर्ष वहां के क्राउन (ताज) प्रिंस भारत यात्रा पर आए और उन्हें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाया गया।

ओमान: -प्रधानमंत्री ने यात्रा के लिए तीसरे देश के लिए ओमान को चुना। ओमान से भारत के ऐतिहासिक और व्यापारिक रिश्ते रहे हैं। ओमान के वर्तमान सुल्तान कबूस बिन सैद ने वर्ष 1970 में जब सत्ता अपने हाथ में ली तो ब्रिटेन के अलावा ओमान से कूटनीतिक संबंध बनाने वाला दूसरा देश भारत ही था। तब से ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, व्यापारिक, राजनीतिक और नौसैनिक सहयोग जारी है। खाड़ी देश जब भारत के विरोध में थे तब भी ओमान भारत के साथ खड़ा रहा। बीच में दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट कम हुई जिसे इस यात्रा के जरिए फिर बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य और सैन्य सहयोग के लिए समझौते हुए। अब भारतीय नौसेना ओमान के दकम पोर्ट (बंदरगाह) का इस्तेमान कर सकेगी। यह भारत के लिए पश्चिमी एशिया और पूर्वी अफ्रीका के प्रवेश द्वार का कार्य करेगा जिससे हिन्द महासागर में चीनी सक्रियता और समुद्री लूटेरों पर लगाम लग सकेगी।

लोकसभा: -प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के एक सवाल के जवाब में कहा कि पश्चिम एशिया में कोई भी बदलाव स्थानीय जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र पर बाहर से कोई बदलाव थोपे जाने के खिलाफ है उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में 60 लाख भारतीय हैं जिनके हित और कल्याण सरकार के लिए सबसे ऊपर है प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पश्चिम एशिया की सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। इस क्षेत्र के साथ दोस्ताना संबंधों को भारत बहुत महत्व देता है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन ने हाल ही में ओमान-कतर और सऊदी अरब की यात्रा की हैं।

समझौता: -एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि तेल संपन्न यूएई और भारत परस्पर आर्थिक सहयोग और गहन करने के इच्छुक हैं दोनों पक्षों के बीच वित्त और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में करार होने की संभावना है मोदी की तीन पश्चिमी एशियाई देशों फलस्तीन ओमान की यात्रा पर प्रस्थान किया था समझा जाता है कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान रक्षा सुरक्षा और आतंकवाद से लड़ाई जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर सहमति बनेगी भारत में यूएई के राजदूत अहमद अल बन्ना ने कहा ”प्रधानमंत्री मोदी 10 फरवरी को यूएई की यात्रा पर जा रहे हैं यह सरकारी यात्रा होगी और इस दौरान 12 समझौते किए जाएंगे”

भारत व ईरान: - ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैदराबाद आए। अगस्त 2013 में ईरान के राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद यह रूहानी की पहली भारत यात्रा है। इससे पहले वो पद पर ना रहते हुए एक बार भारत आ चुके हैं। रूहानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भारत और ईरान ’आपसी हित’ के क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

  • दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम और चाबहार पोर्ट (बंदरगाह) को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिए जाने पर बात होने की उम्मीद है। रूहानी की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान, भारत का प्रमुख तेल सप्लायर (प्रदायक) देश है। उसके साथ भारत का सालाना करीब 83 हजार करोड़ का कारोबार होता है। इसमें से 67 हजार करोड़ का कच्चा तेल और उससे जुड़ी चीजें भारत आयात करता है। राजनीतिक क्षेत्र के साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक क्षेत्र में 15 करार होने की उम्मीद है।
  • मोदी जी के न्योते पर भारत आए रूहानी का यह दौरा महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल से लगाया जा सकता है। रूहानी के साथ उनकी सरकार के 5 मंत्री विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ, उप राष्ट्रपति फॉर इकोनॉमी मोहम्मद नहवादियां, तेल मंत्री बिजान जांगनेह, सड़क एवं शहरी विकास मंत्री अखौंदी, उद्योग, खनन और व्यापार मंत्री शरियामादरी और रूहानी के चीफ (मुख्य) ऑफ (के) स्टाफ (सदस्य) मेहमूद वैजी और ईरान के शीर्ष कारोबारी समूह के प्रतिनिधि भी आए हैं।
  • चाबहार पोर्ट भारतीय नजरिए से महत्वपूर्ण है। 3200 करोड़ रुपए की लागत वाले चाबहार पोर्ट के बन जाने से पाकिस्तान की सीमा में जाए बिना ही भारत, अफगानिस्तान से होकर ईरान के पोर्ट तक सामान की आवाजाही कर सकेगा। रूहानी को ऑब्जर्वर (देखने वाला) रिसर्च (अध्ययन) फाउंडेशन (नींव) (ओआरएफ) में व्याख्यान देंगे। 21 सदस्यीय शिष्टमंडल के साथ आए ईरान के राष्ट्रपति दो दिन तक हैदराबाद में रूकेंगे। सूत्रो ने बताया कि वह हैदराबाद में रह रहे ईरानी नागरिकों के साथ बातचीत करेंगे। वे ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के बाद जलसे को संबोधित करेंगे।

समझौते के कारण: -

  • निम्नलिखत होने की उम्मीद हैं, उनमें वीजा (आज्ञापत्र) जारी करने की सुविधा, कांउसलर (परामर्शदाता) सहयोग शामिल है।
  • ईरान के तेल कंपनी फरजाद-बी गैस फील्ड (क्षेत्र) इस दौरे पर कई अहम करार कर सकती है। यह कंपनी (संघ) 2007 में बनी थी।
  • ईरान, भारत के साथ एक बेहतर करार करने के लिए आगे बढ़ रहा है, क्योंकि उस पर 2015 में अमेरिका, चीन समेत 6 देशों ने प्रतिबंध लगा दिए थे। इस संकट में भारत उसकी आय का प्रमुख स्त्रोत है।
  • 2016 में पीएम मोदी की ईरान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर दस्तखत किए गए थे।

दोनों देशों के बीच ये 9 करार हुए-

  • डबल (दोहरा) टैक्सेशन (कर लगाना), टैक्स (कर) सेविंग (बचत) के लिए पैसे बाहर भेजने की रोकथाम।
  • कूटनीतिक पासपोर्ट (आज्ञापत्र) धारकों को वीजा में छूट
  • प्रत्यपर्ण संधि को लागू करने के लिए समझौता।
  • चाबहार बंदरगाह के पहले फेस के लिए समझौता।
  • ट्रेडिशनल (पंरपरागत) सिस्टम (प्रबंध) के क्षेत्र में सहयोग।
  • आपसी व्यापार।
  • कृषि से जुड़े सेक्टर (क्षेत्र) ।
  • स्वास्थ्य -दवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।
  • पोस्टल (डाक का) सहयोग।

मोदी जी ने कहा कि दोनों आपसी सहयोग बढ़ाने को इच्छुक हैं। रूहानी की यात्रा से दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे। चाबहार बंदरगाह के लिए ईरान ने जो नेतृत्व दिया हैं, उसके लिए भारत आभार जताता हैं। आज जो भी समझौते हुए वह पिछले समय में हुई प्रगति का परिणाम हैं। मोदी जी 2016 में ईरान गया था और दव्पक्षीय यात्रा का रोडमैप (सड़क नक्शा) तैयार किया था।

दोनों देशों का रिश्ता कारोबार और व्यापार से बहुत आगे है। ये इतिहास से जुड़ा है। परिवर्तन और अर्थव्यवस्था दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारी राय एक है। हम दोनों देशों के बीच रेलवे संबंध भी शुरू करना चाहते हैं। दोनों देश चाबहार बंदरगाह के विकास में शामिल हैं।

फायदे: - इस दोस्ती के 3 फायदे: भारत मध्य एशिया के देशों से जुड़ेगा-

चाबहार-भारत के लिए चाबहार बंदरगहा बहुत महत्वपूर्ण है। इसके जरिए वह अफगानिस्तान, रूस के साथ ही मध्य एशिया के बाकी देशों से जुड़ना चाह रहा है। इससे दन देशों से भारत के लिए तेल और अन्य सामानों का आयात-निर्यात आसान होगा। ट्रांसपोर्ट (यातायात) खर्च भी कम होगा। भारत, अफगानिस्तान के जहाज से देलाराम तक सड़क भी बना चुका है।

एक्ट (अधिनियम) -ईस्ट (पूर्व) पॉलिसी (नीति) -गुजरात के कांडला बंदरगाह से जहाज केवल 6 दिन में चाबहार पहुंचते है। वहां से रेल या सड़क के माध्यम से सामान आगे पहुंचाया जा सकता है। एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत, म्यांमार, थाईलैंड के बीच रेल कनेक्टिविटी (संयोजक) शुरू होने वाली है। इससे मध्य एशिया से जो समान आएगा, उसे दशिण-पूर्व एशिया ले जाने में काफी आसानी होगी।

फरजाद गैस ब्लॉक (खंड): - ओएनजीसी ने ईरान के फरजाद में गैस ब्लॉक की खोज की है। भारत यहां निवेश करना चाहता है, ताकि सस्ती दर पर गैस मिल सके। भारत, ओमान से 1, 100 किमी लंबी गैस पाइपलाइन लाना चाह रहा है। ओमान से ईरान होकर पाइपलाइन लाना बहुत महंगा है, पर लंबे समय के लिए भारत, ओमान और ईरान को इससे बहुत फायदा होगा।

उपसंहार: -जहां प्रधानमंत्री की यूएई और ओमान की यात्रा सफल रही जिससे भारत के संबंध मजबूत हुए हैं लेकिन फलस्तीन की यात्रा को सफल नहीं माना जा सकता है। क्योंकि इसके लिए ठोस कारण नजर नहीं आया हैं। वहीं भारत के साथ ईरान के 9 करार होने पर संबंध ओर मजबूत हुए है।

- Published/Last Modified on: March 13, 2018

News Snippets (Hindi)

Monthy-updated, fully-solved, large current affairs-2019 question bank(more than 2000 problems): Quickly cover most-important current-affairs questions with pointwise explanations especially designed for IAS, NTA-NET, Bank-PO and other competetive exams.