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अमरीका में पनामा पेपर्स (कागज) (Essay in Hindi - Panama Papers) [ Current News (Concise) ]

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प्रस्तावना: - पिछले साल दुनिया भर में स्विस लीक को लेकर बवाल मचा हुआ था, 1100 भारतीयों के गुप्त बैंक खातों की चर्चा थी और काला धन बाहर ले जाने को लेकर पूरा देश हाहाकार कर रहा था। यह मसला कुछ छोटा नजर आ रहा है। क्योंकि अब बारी हैं पनामा पेपर्स की। प्रस्तुत पेपर्स के माध्यम से 1.15 करोड़ से ऊपर के गुप्त (टैक्स) कर दस्तावेज लीक हुए है। यह सभी मोसेक फॉन्सेका फर्म के हैं। जो नाम सामने आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। सूची में 500 भारतीय सहित 12 देशों के पूर्व और मौजूदा मुखिया भी हैं। जिन्होंने काला पैस कर हैवन में लगाया और कर चोरी करने के मकसद से जानकारी भी किसी को नहीं दी। सूची में कई देशों के राष्ट्रध्यक्ष, फिल्मी हस्तियां, खिलाड़ियों और अपराधियों के नाम हैं। भारतीय नाम के साथ टैक्स हैवन्स (कर बंदरगाह) में अपना काला पैसा कमाने वालों में दुनिया भर के 140 नेताओं और सैकड़ों हस्तियों के नाम भी हैं।

पनामा: - पनामा एक नहर का नाम है, यह उत्तरी व दक्षिणी अमरीका को जाड़ने वाला एक छोटा -सा देश है। इसके उत्तर में कोस्टारिका व दक्षिण में कोलंबिया है। यह दो महासागरों (प्रशांत व अटलांटिक) को जोड़ता है। 77 किमी. लंबी पनामा नहर में दिनभर बड़े जहाज चलते रहते है। जो इसके आय का मुख्य साधन हैं। इसके एक तरफ अमरीकी महाद्धीप तो दूसरी तरफ कैरीबियाई द्धीप है। पनामा को इसलिए कर बंदरगाह कहा जाता हैं क्योंकि यहां के कर पद्धति के अनुसार स्थानीय व बाहरी कंपनी (जनसमूह) से तभी कर वसूला जाता है, जब आय देश के भीतर से आई हो। समाज कर पद्धति है, पर विदेशी निवेश पर कर नहीं लगता हे। पनामा में दो तरह का कर पद्धति है।

  • एक है टेरेट्रियल कर पद्धति इसमें रेसिडेंट जनसमहों से सभी कर वसूला जाता है, जब आमदनी देश में ही जनरेट हुई हो।
  • दूसरा है कॉर्पोरेशन (समाज) कर पद्धति इसमें कर कीमत 25 फीसदी है।

हालांकि, जनसूमह जिनका टैक्सबल रेवेन्यूज 1.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा है उन पर अल्टरनेटिव टैक्स अप्लाई हो सकता है। जहां उनके ग्रॉस टैक्सेबल नामक आय पर ज्यादा से ज्यादा 1.168 फीसदी कर लगेगा या नेट टैक्सेबल नामक आय पर 25 फीसदी कर लगेगा।

टैक्स हैवन (कर बंदरगाह या आश्रय लेने का स्थान): - टैक्स हैवन ऐसे देश या राज्य हैं जहां मुनाफे पर लगने वाला कर या तो है नहीं या काफी कम है। ऐसी कुछ जगहों पर पैसा लगाने वाले के नामों को गुप्त रखा जाता है। पनामा पेपर्स लीक मामले में हमने बार-बार ’टैक्स हैवन’ का जिक्र सुना होगा। इन देशों में वित्तीय गोपनीयता बहुत होती है जिससे लोग वहा पैसा रखना पसंद करते हैं। यहां की सरकारें भी इस गोपनियाता की रक्षा करती है। इसके अलावा इन देशों में राजनीतिक स्थिरता होती है जो इस आर्थिक व्यवस्था की रक्षा करती हे। ये सभी टैक्स हेवन बहुत छोटे देश हैं।

खुलासा: - जानकारी के अनुसार जर्मन डेली सुडेश जेतुंग ने अपने सोर्स के जरिए यह दस्तावेज हासिल किए और बाद में इंटरनेशल कनसॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव नामक जर्नलिस्ट ने इस पर आठ महीनों तक खोज की। पनामा पेपर्स नाम से हुए इस खुलासे में खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन (आईसीआईजे) ने पनामा की लॉ फर्म ’मोसैक फॉन्सेका’ के दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। आईसीआईजे से जुड़े दुनियाभर के 109 मीडिया संस्थानों के सैकड़ों पत्रकारों ने 2.6 टेराबाइट डेटा (लगभग 600 डीवीडी के बराबर) का विश्लेषण किया। यह आंकड़े 1977 से 2015 के बीच करीब 40 साल का हैं। जांच के दौरान 2.14 लाख प्रतिष्ठानों से जुड़े 1.15 करोड़ दस्तावेजों को खंगाला गया। अभी और खुलासें होने बाकी है। 33 वे जो अमरीकी सरकार की काली सूची में है। 08 माह तक दस्तावेजों की छानबीन की गई। पनामा में स्थित एक विधि फर्म के लीक हुए दस्तावेजों से दनियाभर में हलचल मची हुई है। इस फर्म की लगभग 11 मिलियन फाइल लीक हुइ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने एक मीडिया संगठन ने इन दस्तावेजों की पड़ताल की है। प्रस्तुत समूह में 76 देशों के 100 से अधिक मीडिया समूह शामिल थे। इन दस्तावेजों की पड़ताल से कई गंभी खुलासे हुए हैं।

कारण: - पनामा पेपर्स में पैसा लगाने के पीछे सबसे बड़ा कारण नामों को गुप्त रखा जाना था। साथ ही टैक्स हैवन होने के कई और फायदे मिलने है। यहां पर निवेश भी आसान था। इसलिए कई दुनिया के बड़े लोग यहां अपना पैसा लगाते हैं।

कर: - कर बचाने के लिए लोग गुप्त रूप से जनसमूह खोलकर इन देशों में काम करते हैं। इससे कॉपोरेट टैक्स (सहकारी संस्था कर), इनकम टैक्स (आमदनी कर), कैपिटल गेन टैक्स (मूलधन कमाना कर) नामक आदि देने से लोग बच जाते हैं। सिर्फ पनामा में 3.5 लाख अंतरराष्ट्रीय जनसमूह गोपनीय रूप से रजिस्टर्ड (पंजीकरण) हैं। स्विट्‌जरलैंड, मॉरिशस, मोनेको, पनामा, अंडोरा, हांगकांग, बहामास, बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड, चैनल आइलैंड, कुक आइलैंड जैसे देश टैक्स हैवन के खिलाफ बने प्रेश ग्रुप -टैक्स जस्टिस नामक नेटवर्क’ की वर्ष 2012 की विवरण के अनुसार प्रस्तुत देशों में 21 ट्रिलियन से 32 ट्रिलियन डॉलर के बीच की राशि चोरी कर रखी गई है।

342 डॉलर: पंजीकृत एजेंट, 29 डॉलर: पंजीकृत कार्यालय, 350 डॉलर: लाइसेंस फीस (अनुमति फीस) 50 हजार तक के शेयर वाली कंपनी के लिए), 54 डॉलर: मेल भेजने के लिए, 215 डॉलर: मिटिंग (सभा) की रूप रेखा के लिए यहां कम खर्च होता हैं।

हड़कंप: -कर चोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। भारत ही नहीं दुनियाभर के नामचीन लोग इसमें लिप्त हैं। हॉलीवुड हो या बॉलीवुड, समुदाय हों या लोकतांत्रिक देशों के मुखिया अथवा तानाशाह, नेता हों या उद्योगपति, सब इस खेल में शामिल हैं। प्रस्तुत लोगों ने कर बचाने के लिए अपनी काली कमाई पनामा में निवेश की। खुलासे के बाद दुनियाभर में हड़कंप मच गया है। कोई सफाई दे रहा है तो कोई आरोपों को गलत बता रहा है चीन में साइटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है तो आइसलैंड में पीएम (प्रधानमंत्री) सिगमंडर ने इस्तीफे की पेशकश की हैं और बाद में इस्तीफा देना पड़ा।

अमेरिका: - बहुचर्चित पनामा पेपर्स के मामले में मध्य अमेरिकी देश अल साल्वाडोर ने पनामा की संबंधित कानूनी फर्म मोसैक फोंसेका के स्थानीय कार्यालय पर छापा पड़ा। यह छापे अल साल्वाडोर ने अटार्नी जनरल डगलस मेलेंडज की देखरेख में मारे गए। मेंलडेंज ने बताया कि मोसैक फोंसेका अपने कार्यालय का साइनबोर्ड (विज्ञापन तख्तें) अचानक हटा लिया। जिससे सरकार को जनसमूह के इरादों पर शक हुआ। मेनेजर ने बताया कि वे कार्यालय कहीं ओर स्थापित कर रहे है। छापे मारने से कई दस्तावेज और उपकरण जब्त किए गए हैं। पनामा पेपर्स अल साल्वाडोर के 33 लोगों के नाम सामने आए हैं। जबकि जनसमूह की संयुक्त वैबसाईट पर उसके अल साल्वाडोर कार्यालय का जिक्र तक नहीं है। छापे के बारे जानकारी देने के लिए उसका कोई अधिकरी भी उपलब्ध नहीं था। पनामा भी मध्य अमेरिका में ही है। अमरीकी ग्लोबल फाइनेशियल इंटीग्रिटी काउंसिल ने कुछ वर्ष पूर्व अनुमान लगाया था कि विदेश में भारतीयों का 450 अरब डॉलर यानी करीब बीस से बाईस लाख करोड़ रु. जमा है। यह भारत के जीडीपी की एक चौथाई है। संस्था के अनुसार 2015 में भारतीयों ने वैध रूप से 83 अरब डॉलर विदेश भिजवाए हैं। हालांकि कुछ लोगों का कहना है पैसा कानूनी तरीके से भेजा गया है और इसकी जानकारी आयकर विभाग को बताई गई है। पिछले कुछ समय से रिजर्व बैंक ने सीमित राशि विदेश ले जाने की अनुमति दी हुई है। पर यह भी सच है कि ये टैक्स हेवन भारत से बाहर गए पैसों को सफेद बनाकर लाने का काम भी करते हैं। 2015 में जिन देशों से सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत आया, उनमें मॉरिशस और सिंगापुर शीर्ष पर थे।

शेल कंपनियां (जहाज जनसमूह): - शेल कंपनियां (जनसमूह) वे हैं जिन्हें ऊपर से देखने से लगता है कि कानूनी तौर पर सामान्य व्यापार कर रही है। लेकिन वह एक खाली खोल जैसी होती हैं। यह सिर्फ पैसे का पैसे का प्रबंधन करती है। वह यह भी छिपाती है कि किसका है। जनसमूह प्रबंधन में वकील, अकाउटेंट (हिसाब किताब करने वाला) और यहां तक की दफ्तर के सफाईकर्मी भी शामिल कर लिए जाते हैं। वह कागजात पर दस्तखत करने और लेटरहेड (पत्र कागज) नाम पर अपना नाम दर्ज करने की इजाजत देने के अलावा कुछ काम नहीं करते हैं।

गलत: - शेल कंपनियां (जनसमूह) दुनियाभर में बैंकिंग गोपनीयता के लिए अपने केंद्र बनाते हैं, जो एक सीमा तक गोपनीयता देते हैं। इससे वास्तविक ओनर का नाम पता करना मुश्किल होता है। उदाहरण के लिए जल्द ही आप अपनी पत्नी से तलाक लेने जा रहे हैं, जो शेल जनसमूह में लगे पैसे का आधा हिस्सा नहीं हासिल कर सकेगी। कारण, उसे और उसके वकील को तो पता ही नहीं होगा आपका पैसा कहां लगा है और वे यह साबित नहीं कर पाएंगे कि वह पैसा आपका है।

राष्ट्रध्यक्ष: - पनामा में कर चोरी के लिए डीलिंग्स (समझौता) करने वालों में सूची में 12 वर्तमान व पूर्व राष्ट्रध्यक्षों के नाम शामिल हैं। इनमें 60 लोग इन राष्ट्रध्यक्षों से जुड़े हुए लोग है। इनके कुछ नाम निम्नलिखित हैं। इनमें आइसलैंड व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन के पिता इयान कैमरन, यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको, सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज के साथ-साथ इसके अलावा लीबिया के पूर्व शासक कर्नल गद्दाफी, मिस्र के अपदस्थ शासक होरनी मुबारक, सीरिया के राष्ट्रपति अल असद, जैकी चेन जैसे खेल व फिल्मी दुनिया के अनेक सितारे शामिल हैं।

नाम: - दूसरे देशों में पैसा छिपा कर कर बचाने के मामले में कई और लोगों के नाम सामने आए हैं। एक अग्रेंजी अखबार दव्ारा जारी की गई सूची में नेता, उद्योगपति, ज्वैलर और क्रिकेटरों के नाम भी शामिल हैं। 40 साल के दस्तावेज खंगाले गए। 214488 लोगों, फमाेर् की जानकारी मिली। 200 देशों के लोग कर चोरी में शामिल हैं। 29 अरबपति भी जो फोर्ब्स सूची में थे। यह सब 300 पत्रकारों ने मिलकर खुलासा किया हैं। कुछ प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं- उद्योगपति गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी, जैसे नाम आने के बाद मामला गरमा गया है। नाम केवल यही नहीं हैं और भी नाम हैं।

  • पहली सूची में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या, डीएलएफ के प्रमोटर केपी सिंह, व्लादिमीर पुतिन, नवाज शरीफ, शी जिनपिंग और फुटबॉलर मैसी, इंडिया बुल्स के मालिक समीर गहलोत और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे शामिल हैं
  • दूसरी सूची में जो नाम आए है वे है पूर्व क्रिकेटर अशोक मलहोत्रा का नाम शामिल हैं।

पहली सूची में निम्नलिखित नाम शामिल हैं-

  • अभिताभ बच्चन- 1995 में एबीसीएल कंपनी लॉन्च (समूह शुरू) करने के 2 साल पहले बॉलिवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन कम से कम 4 चार समूह के निर्देशक नियुक्त किए गए। सभी शिपिंग जनसमूह 1993 में 5 हजार डॉलर से 50 हजार डॉलर तक शुरू की गई। लेकिन इस जनसमूह ने अरबों खरबों रुपए के जहाजों की डील (समझौता) किया। मोसैक फॉन्सेका के विवरण और उसके आधार पर हुई जांच से पता लगता है जिन 4 समूहों के निर्देशक बच्चन जी थे, उनका पंजीकरण 1993 में टैक्स हेवन देशों में हुआ था। इनमें से एक ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड (बीवीआई) में थी और तीन बहामास में थी। हर जनसमूह की पहली परिषद सभा में ही अमिताभ को एडिशनल निर्देशकके तौर पर नियुक्त किया गया था।

अमिताभ का जवाब-जारी दस्तावेज में कोई सच्चाई नहीं है। बच्चन ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि जिन जनसमूहों का नाम लिया है उनमें से वे किसी एक को भी नहीं जानते है। सी बल्क शिपिंग कंपनी लिमिटेड, लेडी शिपिंग लिमिटेड, ट्रेजर शिपिंग लिमिटेड और ट्रंप शिपिंग लिमिटेड में से प्रस्तुत में से किसी भी जनसमूह का निर्देशक नहीं रहा उन्होंने कहा कि मेरे नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है।

जांच-बच्चन को लेकर एक और खुलासे का दावा किया है। एक अंग्रेजी अखबार ने पनामा पेपर्स के दो दस्तावेज जारी किए हैं, जिसमें लिखा है बच्चन ’सी बल्क शिपिंग कंपनी लिमिटेड’ में बतौर निर्देशक कार्यभार संभाल रहे हैं। बच्चन जी जनसमूह की परिषद सभा में टेलिफोन सम्मेलन के जरिए शामिल होते थे। दस्तावेजो से पता चलता है कि बहमास की ट्रंप शिपिंग लिमिटेड और ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड की सी बल्क शिपिंग कंपनी लिमिटेड नाम की यह बैठक 12 दिसंबर 1994 को रख्ी गई थी। दोनों जनसमूहों की तरफ से जारी प्रमाणपत्र में भी बच्चन जी का नाम निदेशक के तौर पर दर्ज है। इन दोनों बैठकों में बच्चन जी टेलिफोन सम्मेलन’ के जरिए शामिल हुए थे।

  • ऐश्वर्या राय- रिपोर्ट के अनुसार ऐश्वर्या, उनके पिता के. आर आर के राय, मां वृंदा और भाई आदित्य को ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में 14 मई 2005 को एमिक पार्टनर्स लिमिटेड नाम की फर्म में निर्देशक बनाया गया। जनसमूह की शुरुआत 50 हजार डॉलर से हुई। पनामा की एक फर्म ने इस कंपनी को स्थापित करने में मदद की। थी। बाद मेें फर्म राज्य शेयरहोल्डर हो गया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 3 साल के लिए ऐश्वर्या इस कंपनी से जुड़ी हुई थीं वह कंपनी की शेयर होल्डर थीं। शेयर होल्डर में से एक ने अनुरोध किया था कि गोपनीयता के खातिर ऐश्वर्या राय का नाम मिस ऐ. राय रखा जाए। 2008 में अभिषेक से शादी के एक साल बाद कंपनी (जनसमूह) समेटने का काम शुरू हो गया था। और 2008 में कंपनी बंद हो गयी।

ऐश्वर्या का जवाब-जो भी दस्तावेज बताए जा रहे हैं, वे सब पूरी तरह झूठे हैं।

  • केपी सिंह- डीएलएफ के प्रमोटर 2010 में ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में कंपनी खरीदी कुशल पाल सिंह (केपी सिंह) और उनके परिवार के नौ सदस्यों के नाम से ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में ही वाइल्डर लिमिटेड के नाम से कंपनी हैं। सिंह की पत्नी इंदिरा इसमें शेयर होल्डर हैं। 2012 में बेटे राजीव और बेटी पिया सिंह ने दो और कंपनियां जनसमूह बनाई। परिवार के इन तीन जनसमूहों में 66 करोड़ रुपए लगे हैं।

केपी का जवाब- तय सीमा में ही रकम लगाई, आरबीआई के नियम नहीं तोड़ें।

  • नवाज शरीफ- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बेटों हुसैन और हसन के अलावा बेटी मरियम नवाज ने टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में कम से कम चार कंपनियां (जनसमूह) शुरू की। कंपनियों (जनसमूह) से लंदन में 6 बड़ी सपंत्तियां खरीदी। इन संपत्तियों को गिरवी रखकर डॉएचे बैंक से करीब 70 करोड़ का लोन लिया। इसके अलावा, दूसरे दो अपार्टमेंट खरीदने में बैंक ऑफ स्कॉटलैंड नामक बैंक ने मदद की।

शरीफ परिवार का कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। उनका नाम इस मामले में गलत घसीटा जा रहा है।

नवाज शरफ के छोटे भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरफ के करीबी रिश्तेदार शमीना दुर्रानी का नाम तीन जनसमूहों से जुड़ा हुआ है जो 2010 में खोली गई थी। एक अन्य करीबी रिश्तेदार इलियास मेहराज का नाम भी कई कंपनियों से जुड़ा हुआ है। इनके अलावा पूर्व राष्ट्रपति जरदारी के करीबी मित्र जावेद पाशा, राजनीतिक और व्यापारिक रसूख वाले सैफुल्ला परिवार का नाम भी विदेशों में स्थित जनसमूहों से जुड़ा हुआ है।

  • शी-जिनपिंग- चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग और उनके परिवार का भी पनामा के बैंक से लिंक है। उनके रिश्तेदार डेंग जियागुई का नाम भी सूची में है। सितम्बर 2009 में डेंग ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड स्थित दो कंपनियों (जनसमूह) के निदेशक बने। अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले इकबाल मिर्ची का नाम भी इस सूची में है। हालांकि उसकी मौत हो चुकी है।
  • व्लादिमीर पुतिन- इन दस्तावेजों से अरबों डॉलर (अमेरिका की प्रचलित मुद्रा) की हेराफेरी करने वाले एक गिरोह का भी पता चला है जिसका संबंध रूसी बैंक से हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी भी इस बैंक से जुड़े हैं। क्रिमिया प्रकरण सामने आने के बाद अमरीका व यूरोपीय संघ ने इस बैंक पर प्रतिबंध लगा दिया है। दस्तावेजों से पता चला है कि यह रूसी बैंक किस तरह काम करता है। विदेश में जनसमूहों के माध्यम से पैसा लगाते हैं, जिनमें से दो जनसमूह उनकी हैं जो पुतिन के सबसे करीबी दोस्तों में शुमार हैं। इनमें पुतिन के दोस्त रहे सर्गेई रोल्डूगिन शामिल हैं।
  • हरीश साल्वे- क्रेस्टब्राइट, पायबुश ग्रुप और एडनेवल ग्रुप लिमिटेड (ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड) है। हरीश देश के सबसे मशहुर वकील हैं। 1999 से 2002 तक सॉलिसटर जनरल ऑफ इंडिया भी रहे। उनके परिवार के तीन सदस्य के नाम तीन कंपनियां (जनसमूह) ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में पंजीकरण हैं।
  • समीर गहलोत- इंडिया बुल्स नाम के मालिक समीर गहलोत ने बहामास और जर्सी के जरिए परिवार के सदस्यों के नाम पर ब्रिटेन, बहामास, जर्सी, नई दिल्ली, यूके और करनाल की जनसमूहों के माध्यम से लंदन में 3 संपत्ति खरीदी। जिन्हें आवासीय और होटल परियोजनाओं में बदल दिया गया। यह संपत्ति अक्टुंबर 2012 में बने एसजी परिवार संस्था की हैं।

समीर का जवाब- भारत में कर चुकाने के बाद ही निवेश किया।

  • लिओनल मैसी- अर्जेटीना के फुटबॉल खिलाड़ी लिओनेल मैसी और उनके पिता ने पनामा की एक कंपनी मेगा स्टार एंटरप्राइज इंक को खरीदा था। यह एक शेल कंपनी थी और पहले जब स्पेन के जांचकर्ताओं ने बाप-बेटों के कर से जुड़ी जानकारियों की जांच की थी, तब इसके बारे में कुछ पता नहीं था। अब इस खुलासे से मामले पर से पर्दा उठते दिख रहा है।

दूसरी सूची मेे निम्न नाम हैं-

  • अशोक मल्होत्रा: - भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल कोलकाता में क्रिकेट एकेडेमी चलाते हैं। इनके नाम सेईएंडपी ऑनलुकर्स लिमिटेड नाम की कंपनी ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में पंजीकरण है। बंगाल और टीम भारत के कोच भी रह चुके हैं।

अन्य नाम निम्नलिखित हैं-

  • अश्विनी कुमार मेहरा: - मेहरासंस ज्वैलर्स के मालिक। जिनके दो बेटे भी सहभागी के तौर पर काम करते हैं। विदेशों में उनके नाम पर 7 जनसमूह पंजीकरण पाई गई हैं।
  • गौतम और करण थापर: - चार्लवुड फाउंडेशन और निकोम इंटरनेशनल फाउंडेशन के नाम से इनकी पनामा में दो जनसमूह पंजीकरण हैं।
  • गरवारे परिवार- रोन्डर ओवरसीज लिमिटेड और दूसरी कई जनसमूह चलाती है। प्रस्तुत जनसमूह ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड और पनामा में है। सूची में इस परिवार के अशोक गरवारे, आदित्य गरवारे, सुषमा गरवारे के नाम शामिल हैं।
  • ओंकार कंवर- जेएंडएस सिस्टम्स कॉरपोरेशन (ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड) कंवर की कंपनी अपोलो टायर्स बनाने के लिए चर्चित है। ओंकार ने 2010 में जेएंडएस कॉरपोरेशन और 2014 में दो संंस्था बनाई। इनका पंजीकरण भी ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में है।
  • जहांगीर सोराबाजी- मून ग्लो इन्वेस्टमेंट्‌स ग्लोबल लिमिटेड के निर्देशक जहोगीर पूर्व अटॉनी जनरल सोली सोराबाजी के बेटे हैं। वह बाम्बे चिकित्सालय में फिजीशियन भी हैं। मूल ग्लो जनसमूह ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में रजिस्ट्रर्ड (पंजीकृत) है।
  • जावेरी पूनावाला- स्टालेस्ट लिमिटेड ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड अरबपति कारोबारी सायरस पूनावाल के भाई है। रॉयल वेस्टर्न इंडिया टर्फ क्लब के हेड हैं। स्टालेस्ट लिमिटेड में जावेरी के अलावा पत्नी बहरोज और दो बेटियों सिमोन और डेल्ना को भी निर्देशक बताया गया है।
  • राजेंन्द्र पाटिल- पाटिल कर्नाटक के कांग्रेस नेता एस. शिवशंकरप्पा के दामाद और बिजनेसमैन (व्यापारी आदमी) हैं। देवनगेरे में उनके कई इंजीनियरिंग महाविद्यालय हैं। उनकी ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्‌स में एल्गेनबर्ग लिमिटेड नामक जनसमूह है। इसमें पाटिल के दो मित्र भी शामिल हैं।
  • मोहन ला लोहिया- इंडो रामा सिंथेटिक्स और इंडो रामा होलडिंग्स के चेयरमैन हैं। वेंटन ग्रुप लिमिटेड और लोहिया चैरिटिबल फाउंडेशन नामक कंपनी ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड और बहामास में संचालित है।

राजनेता: -अन्य राजनेताओं के भी नाम निम्न है-

  • शिशर के बाजोरिया- पं. बंगाल के नेता शिशिर के नाम से ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में हैप्टिक लि. के नाम से फर्म।
  • अनुराग केजरीवाल- लोकसत्ता पार्टी की दिल्ली इकाई के पूर्व प्रमुख अनुराग केजरीवाल का नाम भी इस सूची में है।
  • बेनजीर भुटटो- पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुटटों उनके साथी अब्दुल रहमान मलिक और भतीजे हसन अली जाफरी भुटटोपेट्रोलाइन इंटरनेशनल इंक के नाम से कंपनी बनाई। बाद में तीनों पर संयुक्त राष्ट्र संघ के इराक के लिए तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में इसी नाम की कंपनी के माध्यम ठेका लेने का आरोप लगा था।
  • सिगमंडर गुनलॉन्गसॉन- दस्तावेजों में आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिगमंडर गुनलॉन्गसॉन का नाम भी आया है जिन पर एक गुप्त विदेशी जनसमूहों में करोड़ों डॉलर निवेश करने का आरोप है। आरोप के बाद सिगमंडर ने इस्तीफे की पेशकश की है। इस मामले में उनकी पत्नी का भी नाम सामने आया है।
  • जुआन पेड़ो डेमियानी, फीका मेंबर- फ्रांस के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी माइकल प्लाटिनी ने वर्ष 2007 में पनामा में एक जनसमूह बनाई थी। इसी साल 2016 में वे यूईएफए के अध्यक्ष बने थे। वर्तमान में फीफा से जुड़े हुए थे। हालांकि उन्हें 20 लाख डॉलर लेने के मामले में 6 साल के लिए निलबिंत किया जा चुका है। घूस के मामले में अमरीका ने फीफा के कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया था।

पनामा के लीक के और अन्य नाम-

  • सुब्रत राय: - मार्च 2014 में जेल भेजें जाने से पहले सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय ’बिजनेस’ (व्यापार) के सिलसिले में विदेश जाना चाहते थे। सुप्रीम न्यायालय में इसके लिए उन्होंने एक आवेदन दिया था। इसके मुताबिक उन्हें विदेश में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मिलना था। सेबी बनाम सहारा मुकदमे में सेबी के वकील अरविंद दातार ने हाल ही एक कार्यक्रम में यह खुलासा किया। सुब्रत राय 4 मार्च से 2014 से जेल में है। एक सुनवाई में मुंबई की संपत्ति से जुड़ा मामला सामने आया तो सुप्रीम न्यायालय ने सहारा प्रमुख को देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद न्यायालय ने सुब्रत राय से हाजिर होने को कहा। तब राय ने हलफनामा में कहा कि उनकी मां की तबियत बहुत खराब है। वे लखनऊ के बाहर नहीं जा सकते । तब न्यायालय ने कहा कि जब वे विदेश में क्लिंटन से मिलने जा सकते है तो न्यायालय में हाजिर क्यों नहीं हो सकते? न्यायालय के आदेश के बावजूद राय न्यायालय नहीं आए। सहारा समूह को निवेशकों के 24, 000 करोड़ रुपए लौटानें हैं। ब्याज समेंत यह रकम करीब 35, 000 करोड़ बनती है। सहारा का दावा है कि वह 95 प्रतशत निवेशकों के पैसे लौटा चुकी है। समूह की संपत्ति बेचकर सेबी को निवेशकों के पैसे लोटाने हैं। लेकिन सेबी ने अभी तक 55 करोड़ का ही लौटाया है। इस बारे में दातार ने बताया कि कुल तीन करोड़ निवेशकों में से सिर्फ 5, 000 ने लौटाने के लिए आवेदन किया है।
  • सुब्रत राय की जमानत के पैसे जुटाने के लिए सुप्रीम न्यायालय ने सेबी से जनसमूहों की 87 संपत्ति बेचने को कहा लेकिन दातार के मुताबिक यह बड़ा मुश्किल काम है। हाल ही विजय माल्या के किंगफिशर मकान की नीलामी में ज्यादा बोली नहीं लगी थी। बैंको ने इसकी बेस कीमत 150 करोड़ रुपए रखी थी। लेकिन बोली लगाने वालों ने कहा की यह बहुत अधिक है। दातार ने कहा कि सुब्रत राय तब तक 10, 000 करोड़ रुपए का इंतजाम नहीं करते तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा। इसके बाद 25, 000 करोड़ रुपए की पुन: लाभ प्राप्त करने का मुश्किल काम होगा।
  • सुब्रत राय की जमानत के लिए सुप्रीम न्यायालय ने 5, 000 करोड़ रुपए नकद और 5, 000 करोड़ रुपए की ही बैंक गांरटी की शर्त रखी है। दातार ने बताया कि ’सहारा ने नकद के अधिकतर पैसे जुटा लिए हैं। सिर्फ पांच-छह सौ करोड़ रुपए बाकी हैं। जहां तक बैंक भरोसे की बात है तो हम किसी भारतीय बैंक की भरोसा चाहते हैं। सहारा समूह ने पनामा के एक बैंक की गांरटी (भरोसा) दी है। लेकिन पनामा को लेकर कोई समस्या थी। दातार का आशय हाल ही सामने आए पनामा लीक्स से था।
  • माल्या: - पनामा पेपर्स लीक के बाद सवालों के घेरे में अब भारतीय बैंको के विलफुल डिफॉल्टर विजय माल्या आ गए हैं। इंटरनेशनल कन्सॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिग्रटिव जर्नलिस्ट्‌स (आईसीआईजे) ने नए खुलासे में कहा है कि टैक्स हैवन देश ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड कीकंपनी वेंचर न्यू होल्डिंग लिमिटेड माल्या से जुड़ी है। माल्या वेंचर न्यू होल्डिंग को बेंगलरु स्थित 3 विट्टल माल्या रोड से संचालित करते थे, जो उनका आवास है। उनकी विदेशी जनसमूह सीधे तौर पर पॉर्टिकुलस ट्रस्ट नेट नाम के एक फर्म से जुड़ी थी जो कि विदेशी खातों का निपटारा करती है। पॉर्टिकुलस ट्रस्ट नेट फर्म दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित कुक आइलैंड से संचालित की जाती थी।
  • नीरा राडिया- पनामा पेपर्स में एक ओर नया नाम आया है कॉरपोरेट (मिला हुआ/संयुक्त) लॉबिस्ट नीरा राडिया का। एक अग्रेंजी अखबार के अनुसार नीरा राडिया की ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में एक जनसमूह का कामकाज पनामा की लॉ फर्म मोसेका फोंसेका देखती थी। लीक हुए दस्तावेजों में उनके नाम की स्पेलिंग में परिवर्तन है। हालांकि मीडिया की कंपनी वैष्णवी कम्यूनिकेशंस ने इन आरोपों का सर्मथन किया है। राडिया के अनुसार 1994 में उनके पिता इकबल मेनन ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में क्राउन मार्ट इंटरनेशनल कंपनी खोली थी। लेकिन वे उसमें हिस्सेदार नहीं रही हैं। राडिया ने कहा कि विदेशों में उनकी सपंत्तियों की भारत में जानकारी पहले ही दी थी। राडिया एक जमाने में कंपनियों के लिए लॉबिग किया करती थीं। प्रमुख राजनेताओं, उद्योगपतियों से कथित बातचीत का टेप बाहर आने के बाद वह विवादों में घिर गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी जनसंपर्क कंपनी वैष्णवी कॉपोरेट कम्यूनिकेशंस नाम था तथा उसकी अन्य इकाइयों को बंद कर दिया था।
  • गंभीरता से जांच करना जरूरी है। यह एक अच्छा कदम है। ऐसे खुलासे और होने चाहिए।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

  • जिन्होंने ऐसा किया है, उन्हें यह महंगा पड़ेगा। कई एजेसियां जैसे सीबीआई, आरबीआई, एफआईयू, एफटी एंड टीआर जैसी एजेसियां अब इस जांच में लगा दी।

अरूण जेटली, वित्त मंत्री

एसआईटी जांच: - पूलिस और कर कार्यालयों ने जांच शुरू की। एचएसबीसी, यूबीएस व ड्‌यूश बैंक राडार पर हैं। सूची में मौजूद भारतीयों की जांच एसआईटी भी करेगी । एसआईटी ने कहा कि सामने आए 500 भारतीयों के नाम जांचे जाएंगे। एसआईटी के चेयरमैन (सभापति) जस्टिस (धर्मनीति, सत्यता एवं अपक्षपात) एमबी शाह ने बताया कि जांच शुरू भी कर दी गई है। जांच में गलती पाए जाने पर जुर्माने की कार्रवाई होगी। पिछले साल स्विस लीक्स में 1100 नामों के खुलासे की जांच भी जारी है।

फर्म: - मोसेक फॉन्सेका फर्म विदेशियों को पनामा में शेल जनसमूह बनाने में मदद करती है, जिसके जरिए वे अपनी वित्तीय संपत्ति को अपना नाम या पता बताए बिना खरीदते हैं। वर्ष 1977 में अपने गठन के बाद से फर्म ने पनामा फर्म के ये अधिकारी दुनियाभर के अपने ग्राहक को न सिर्फ पनामा, बल्कि बहमास, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड और अन्य टैक्स हैवन देशों में शेल कंपनीज बनाने में मदद करते हैं।

मोसैक फोंसेका: - पनामा पेपर्स के नाम से तहलका मचाने वाले दस्तावेज जिस कानूनी फर्म मोसेक फोंसेका से लिए गए थे, उसने हैकिग का आपराधिक मामला दर्ज करा दिया है। कंपनी के संस्थापकों में से एक रैमन फोंसेका ने कहा कि ”लोगो का ध्यान केवल उन लोगों की ओर है, जिन्होंने हमारी मदद से जनसमूह बनवाई जबकि यह असल मामला हमारे नेटवकर् (जाली का काम) में घुसपैठ का आपराधिक मामला है। इसे विदेश में बैंठे लोगों ने अजांम दिया है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास तकनीकी विवरण है कि हमें विदेश के सर्वरों ने हैक (बंधक) किया है।” फोंसेका ने किसी देश विशेष या हैकर का नाम नहीं लिया है।

आरोप: - पनामा पेपर्स मौसेक फोन्सेका पर कालेधन को सफेद करने और अपने उपभोक्ताओं के धन को छुपाने के लिए फर्जी जनसमूह बनाने का आरोप है। और कई देशों में भारी हलचल है।

फ्रांस: - यहा पनामा ने स्पष्ट कहा है कि वह फ्रांस के विरूद्ध जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। अब वह पनामा पेपर्स के कारण उत्पन्न गतिरोध दूर करने के लिए कूटनीति का सहारा लेगा फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने पनामा पेपर्स के मद्देनजर पनामा को काली सूची करने की घोषणा की थी।

स्पेन: - दुनिया को हिला देने वाले पनामा पेपरर्स नीक में नाम आने पर अब स्पेन के उद्योब मत्री जोश मैनुएल सोरिया ने उस्तीफा दे दिया हे। पनापा पेपर्स के अनुसार सोरिया वर्ष 1992 में ऐ खनन समूह के प्रशासक थे। सोरिया ने कहा कि बीते दिनों व्यापार में हुई कुछ गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया है। वे मानते है कि उनके कथन से स्पेन सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा हैं।

जमीर: - पनामा की विधि व्यवस्था फर्म मौसेक फोन्सेका के दस्तावेजों में छुपे कारोबारी गोरखधंधे ने पूरी दुनिया के जमीर को झकझोर दिया है। इस खुलासे ने विकीलीक्स के खुलासे को कहीं पीछे छोड़ दिया है। पत्रकारिता जगत के अब तक के इस सबसे बड़े भ्डाांफोड़ ने दो सौ देशों के राष्ट्रध्यक्षों, राजनेताओं, अधिकारियों, कारोबारियों, फिल्म अभिनेताओं और खिलाड़ियों के चेहरों से नकाब उतार दिया है। और इन आशंकाओं तथा धारणाओं की फिर पुष्टि की है। कि पूजीवाद के वित्तीय क्रियाकलापों में बहुत कुछ स्याह है। और समाज के लिए खतरनाक भी। इससे अमेरिका के बड़े उद्योगपति, ग्लोबल फाइनेंशियल इंट्रीग्रिटी के संस्थापक और कैपिटलिज्यम एकीलीज हील जैसे महतवपूर्ण ग्रंथ के लेखक रेमंड डब्लू बेकर का विश्लेषण सही होता दिख रहा है कि दुनिया के मौजूदा वित्तीय ढांचे का एक हिस्सा कर चोरी, नियमों के उल्लघंन, अपराध और आतंकवाद पर टिका है और विकासशील देशों का बहुत सारा काला धन इसी तरह विकसित देशों की वित्तीय पूंजी का निर्माण करता है। इंटरनेशनल कनसॉर्टियम ऑफ इनवेस्टीगेटिव जर्नलिज्म ने इस खुलासे के माध्यम से यह बता दिया है कि संयुक्त रूपी पूंजी से चलने वाले मीडिया में सच उजागर करने का समार्थ्य समाप्त नहीं हुआ है। सच हमेशा के लिए नहीं दबाया जा सकता है। लेकिन इन समार्थ्य को सार्थकता तभी मिलेगी, जब राष्ट्रीय सरकारें अपनी सीमाओं में अपने कानूनों के तहत कार्रवाई करें और एक-दूसरे से मिलकर ऐसे अंतरराष्ट्रीय कानून बनाए जो इस तरह की गतिविधियों करने वाले किसी भी महत्वपूर्ण और ताकतवर व्यक्ति को कटघरें में खड़ा कर सके। भारत के वित्तमंत्री अरूण जेटली ने प्रधामंत्री नरेंन्द्र मोदी के हवाले से इसकी जांच की जरूरत बताई है। लेकिन वैसी जांच हकीकत होगी और कितना झूठ यह कहा नहीं जा सकता है। भारत ही क्यों यही स्थिति पूरी दुनिया की है।

सजा: - ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। 30 प्रतिशत टैक्स, 300 प्रतिशत तक सजा व छह माह से लेकर सात साल तक की सजा का प्रावधान है।

उपंसहार: - विदेशों में धन छिपाकर आयकर से बचने से जुड़े पनामा पेपर्स लीक मामले में विस्फोटक खुलासें जारी हैं। साथ ही जारी है कड़ी कार्रवाई किए जाने का आश्वासन भी। विवरण के अनुसार, कई जाने माने भारतीय पनामा स्थित फर्जी जनसमूह के शेयर धारक या बोर्ड सदस्य हैं। भारत सरकार ने भी कार्रवाई करने की बात कही हे। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह एक विवरण आने और उस पर सही कार्रवाई हो जाने जितना ही सहज है, शायद नहीं। इसमें कई पेंच हैं। किसी भी आरोपी पर कार्रवाई से पहले भारतीय कानून की सीमाएं, आरोपी की दोषसिद्धि का ध्यान रखना होगा। अभी किसी पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। काले धन की जांच के लिए सुप्रीम न्यायालय दव्ारा बनाए गए विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख सेवानिवृत जज अरिजीत पसायत भी यही मानते हैं। इसलिए भविष्य में पनामा पेपर्स लीक के मामले में सरकार क्या ठोस कार्यवाई करती है यह तो आना वाला समय ही बताएगा।

- Published on: May 11, 2016