भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के तीन वर्ष का विवरण (GoI 3 Years) Part-3 (Download PDF)

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नरेन्द्र मोदी के विषय में: -युवावस्था में घर का त्याग करने वाले पीएम मोदी के दोस्त भी कम हैं। इसके अलावा उनका परिवार से मिलना जुलना भी बहुत कम होता है। लेकिन अपनी जुझारू टीम (दल) के दम पर प्रधानमंत्री मोदी आज तक ब्रांड (चिन्ह) बन गए हैं।

स्वामी दयानंद सरस्वती- मोदी जी का शुरू से आध्यात्मक से गहरा नाता रहा है। ऋषिकेश में अद्धैत वेदांत की शिक्षा देने वाले आश्रम के संस्थापक। मोदी युवावस्था में घर छोड़ने के बाद यहां रहे। सितंबर 2015 में इनका देहातं हो गया। इन्हें मरणोपरांत पदम भूषण से नवाजा गया।

संगठन के करीबी: -निम्न हैं-

  • अमीत शाह- मोदी के सबसे करीबी अमित शाह को चुनावी रणनीति बनाने में बादशाहत है। पिछले 25 साल से मोदी के साथ है। वे मोदी जी के दाहिने हाथ माने-जाते हैं। मोदी ने ही उन्हें पार्टी (राजनीतिक दल) अध्यक्ष बनवाया।
  • राममाधव- जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी की नीतियों को लागू करवाने में भूमिका निभाते हैं। राममाधव कश्मीर समस्या पर काम कर रहे हैं।
  • मनोहर पर्रिकर-मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का खुला समर्थन किया। मोदी भी पर्रिकर की सादगी और शिक्षा के कायल है। पर्रिकर मोदी के कहने पर रक्षा मंत्री पद छोड़ गोवा गए।

संघ में सहयोगी: -

  • सुरेश सोनी- सह सरकार्यवाह, गोवा अधिवेशन में मोदी को पीएम का उम्मीदवार घोषित करवाने में बड़ी भूमिका।
  • दत्तात्रेय होसबोले- सह सरकार्यवाह, मोदी के एजेंडे (कार्यसूची) को संघ में मंजूरी दिलाने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

करीबी दोस्त: -

  • काकूभाई- अहमदाबाद में चार्टर्ड (अधिकार-पत्र) अकाउंंटेंट (हिसाब), मोदी के बेहद करीबी मित्रों में शामिल। राजनीति से कोई वास्ता नहीं।
  • महेश मेहता- गुजराती मूल के अमरीकी कारोबारी, प्रचारक के समय से गहरी दोस्ती। मोदी यूएस में इनके यहां रुकते थे।
  • टीम (दल) मोदी: -

    • अजित डोभाल- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार देश की बाह्य सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • नृपेंद्र मिश्र-प्रमुख सचिव, मोदी के फैसलों को कियान्वित करने की जिम्मेदारी इनके पास।
    • पीके मिश्रा-अतिरिक्ति प्रमुख सचिव, मोदी के फैसलों को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी इनके पास भी।
    • पीके सिन्हा- कैबिनेट (मंत्रिमंडल) सचिव, सरकार के सभी फैसलों को सुचारू रूप से लागू करने का काम करते हैं।
    • अमिताभ कांत- सीईओ नीति आयोग, नई नीतियों का निर्माण, राज्यों से समत्वय की भी जिम्मेदारी हैं।
    • शक्तिकांत दास- आर्थिक मामलात सचिव, डिमॉनेटाइजेशन में प्रमुख भूमिका निभाई।
    • हंसमुख अढिया- राजस्व सचिव, जीएसटी काउंसिल (परिषद) के सचिव भी बनाए गए।

समीक्षा: -

संसद के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार के तीन साल के कामकाज पर भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने है। सरकार जहां तीन साल में खूब काम करने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि जनता की मर्जी के काम करना तो दूर की बात अभी तो मंत्रियों को ही अपनी मर्जी से फैसले करने की छूट नहीं है। मोदी सरकार अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लेगी। जहां मोदी के सबसे भरोसेमंद अरुण जेटली और जीएसटी लागू कराने के बाद सबसे ज्यादा जलवा हैं वहीं कश्मीर और नक्सलियों को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर दबाव है।

आइए जानते हैं मोदी के टॉप (उच्च) 10 मंत्रियों के किन कार्यो को पॉजिटव कहा गया और किन्हें निगेटिव।

1. अरूण जेटली-वित्त के साथ रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले मोदी के करीबी रणनीतिकारों में शामिल जेटली देश की आर्थिक हालत दुरूस्त करने में जुटे रहे।

पॉजिटिव (वास्तविक) -मुद्रास्फीति में गिरावट को साधने में सफल रहे। जीएसटी को पास कराने में सफलता।

निगेटिव (नकरात्मक) –नोटबंदी के बाद नगदी की किल्लत में सुधारने में विफल रहने के कारण आलोचना।

2. राजनाथ सिहं-पीएमओ के दखल और एनएसए अजीत डोभाल के हस्तक्षेप के बाद भी विवादों से दूर मोदी के एजेंडे (कार्यसूची) को लागू करने में जुटे हैं।

पॉजिटव (वास्तविक) - अफसरों को फैसले लेने की छूट। नागरिक शस्त्र लाइसेंसो (आज्ञा) को दर्ज करने के लिए डिजिटल (अंकसंबंधी) डाटा (आधार सामग्री) प्रबंधन प्रणाली।

निगेटिव (नकरात्मक) – पुलिस आधुनिकरण योजना को लागू करवाने में असफल। कश्मीर व नक्सली हिंसा रोकने में असफलता।

3. वेंकैया नायुडू-वेंकैया मोदी के दो बड़े सपनों के वाहक हैं। स्मार्ट सिटी (आकर्षक शहर) का निर्माण और 2022 तक शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराना।

पॉजिटव (वास्तविक) -मोदी के भरोसेमंद। रियल एस्टेट कानून पास कराने में सफलता। 600 शहरों की स्मार्ट सिटी योजना को मंजूरी।

निगेटिव (नकरात्मक) - हेरिटेज सिटी के विकास, स्मार्ट सिटी मिशन (आकर्षक शहर दूतमंडल) और अन्य योजनाओं के लिए फंड (धन) का व्यवहारिक ढांचा नहीं।

4. सुरेश प्रभु-रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने छोटे छोटे सियासी फायदों के लिए रेलवे को दुधारू गाय की तरह दोहने पर लगाम में सफलता पाई।

पॉजिटिव (वास्तविक) -परियोजनाओं को मंजूरी के लिए औसत 24 माह लगते थे जिसे घटाकर 4 माह पर लाया। रेलेव के ठेको में पारदर्शिता लाना।

निगेटिव (नकरात्मक) –रेल दुर्घटना रोकने में नाकाम रहे हैं। टिकटों के महंगे दामों के बाद भी सुविधाओं में अपेक्षानुसार सुधार नहीं।

5. धर्मेन्द्र प्रधान- बिचौलिए के लिए पहचाने जाने वाले पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय को बिचौलिए से मुक्त करने के साथ पारदर्शिता लाने का श्रेय।

पॉजिटिव (वास्तविक) -उज्जवला योजना के सफल क्रियांवयन के साथ पेट्रोल और गैस एजेसियों के आवंटन में पारदर्शिता।

निगेटिव (नकरात्मक) --तेल और गैस की खोज में बड़ा निवेश आकर्षित करने में विफल। तेल के मूल्य को बाजार के हवाले करने के कारण आलोचना।

6. नितिन गडकरी-मोदी कैबिनेट (मंत्रिमंडल) के एकमात्र मंत्री जो अपने मंत्रालय के फैसले खुद लेते हैं और पीएमओं की हरी झंडी का इंतजार नहीं करते।

पॉजिटिव (वास्तविक) - सड़क परिवहन विधेयक पेश किया। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत रिकॉर्ड (प्रमाण) सड़क निर्माण।

निगेटिव (नकरात्मक) –उद्योगपतियों और करीबियों को ठेका देने का आरोप। प्रमुख राजमार्गो पर काम अटका।

7. उमा भारती-गंगा के लिए प्रेम के लिए पहचाने जाने वाली उमा भारती का मंत्रालय गंगा सफाई पर फिसड्‌डी रहा है।

पॉजिटिव (वास्तविक) -लंबित 297 परियोजनाओं में से 160 को पूरी कराने में सफलता। स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण।

िनगेटिव (नकरात्मक) –नदी जोड़ो परियोजना में भी खास प्रगति नहीं। चेतावनी के बाद भी सूखे से निपटने की कार्ययोजना तैयार नहीं।

8. सुषमा स्वराज-विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खराब स्वास्थ्य के बाद भी लगातार विदेशी मामलों में मजबूती से डटी रही।

पॉजिटिव (वास्तविक) -विदेशों में फंसे भारतीयों को मदद उपलब्ध कराने के कारण सुर्खियों में। पासपोर्ट (आज्ञापत्र) को आसान बनाने में भूमिका।

निगेटिव (नकरात्मक) –ललित मोदी को वीजा (अन्य देशों में आने, जाने या उसमें से गुजरने की शासकीय अनुमति) में मदद पर छवि पर असर। खराब स्वास्थ्य के कारण मंत्रालय बदलने की चर्चा।

9. प्रकाश जावड़ेकर-जावड़ेकर के जरिए मोदी सबको सस्ती, सुलभ शिक्षा दिलवाने की कोशिश में हें लेकिन अड़चने हजार।

पॉजिटिव (वास्तविक) -97 नए केन्द्रीय और 62 नए नवोदय विद्यालयों को अनुमति दी है। विवि रैंकिंग प्रणाली की शुरुआत।

निगेटिव (नकरात्मक) –केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कई कुलपतियों के साथ सरकार का विवाद। टीचर एज्यूकेशन (अध्यापक शिक्षा) रिफॉर्म (सुधार) पर बड़ा काम नहीं।

10. पीयूष गोयल-मोदी के सबसे ज्यादा ऊर्जावान मंत्री पर हर घर में बिजली पहुंचाने की महत्वकांक्षी योजना का भार है।

पॉजिटिव (वास्तविक) -देश में बिजली की कमी 4.2 से घटाकर 2.1 फीसदी तक लाने का श्रेय। पारदर्शी बोली से कोयले का आयात घटाने में सफलता।

निगेटिव (नकरात्मक) -गैसा आधारित बिजली परियोजनाओं में खास प्रगति नहीं। सस्ती बिजली अभी दूर की कौड़ी। वितरण कंपनियों (संघों) की खस्ता हालत।

इन मंत्रियों का प्रदर्शन खराब: -अनंत गीते, भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम मंत्री, अशोक गणपति राजू, नागरिक उडयन मंत्री, कलराज मिश्रा, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग मंत्री, रामदास आठवलें, सामाजिक न्याय मंत्री। साध्वी निरंजन ज्योति, फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय

पीएम आवाज योजना: - 9 जून 2014 को प्रधानमंत्री ने प्रधनमंत्री आवास योजना की घोषणा की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बताया गया था, 2022 तक देश के हर नागरिक के पास खुद का घर होगा।

चार फैक्टर्स (कारक) -सरकार के चार फैक्टर्स (कारक) रियल एस्टेट पर पॉजीटिव (वास्तविक) असर डाल रहे हैं। पहला अफोर्डेबल (वहन करने योग्य) हाउसिंग (घर) का आकार बढ़ाना, दूसरा पूंजी और ब्याज पर सब्सिडी (सरकार द्वारा आर्थिक सहायता), तीसरा गृह ऋण ब्याज दरों में कमी और चौथ रेरा लागू किया जाना।

विजय मीरचंदानी, चेयरमैन, क्रेडाई एमपी

शेयर मार्केट (बाजार): - भारत की अर्थव्यवस्था का बेरोमीटर कहे जाने वाले सेंसेक्स (शेयर बाजार) में पिछले तीन वर्षो में काफी उतार-चढ़ाव देख गया। बीएसई सेंसेक्स पिछले तीन वर्षो में 6 हजार से अधिक अंको की उछाल के साथ 30750 के रिकॉर्ड (प्रमाण) स्तर पर है। 26 मई 2014 को बीएसई सेंसेक्स 24716.88 अंको पर बंद हुआ था, जबकि 26 मई 2017 को यह 30750.03 अंको पर बंद हुआ है। तीन वर्षो में शेयर बाजारों ने भारी उतार-चढ़ाव का सामना भी किया। इस दौराने बीएसई सेंसेक्स 26 फरवरी 2016 को निचले स्तर 23002 अंको पर भी रहा।

बैंकिंग (महाजन) रिफॉर्म (सुधार), जीएसटी पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) और विदेशी निवेश में स्पष्टीकरण लाए जाने के कारण वर्तमान में 300 बिलियन (दस अरब) डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है। साथ ही घरेलू निवेशकों की परिसपंत्ति भी 18 लाख करोड़ पहुंच चुकी है। यह तरह के फैक्टर्स है, जो बाजारों में उछाल का कारण बने हुए हैं। आगे भी बाजारों में मजबूती रहेगी।

आरआर बाल्दी, डायरेक्टर, इंडिया (निर्देशक, भारत) निवेश

बुलियन बाजार: - सरकार सोना सॉवरेन (प्रभु) बांड (बंधन) और सोना जमा योजना लेकर आई, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं रहा। सॉवरेन बांड में केवल निवेशक ही रुचि ले रहे हैं। 32.63 बिलियन डॉलर का कुल निर्यात हुआ 2015 - 16 में। 35.55 बिलियन डॉलर का कुल निर्यात हुआ 2016 - 17 में।

मौजूदा सरकार हमसे पूछकर ही पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) बना रही है। इससे भविष्य बेहतर होगा। वर्तमान पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) उद्योग हित में है। जेम्स एंड (और) ज्वैलरी के लिए अलग जीएसटी पॉलिसी (कूटनीति/बीमा) प्रस्तावित है। सरकार बोल्ड (साहसी) निर्णय लेती है।

सुमित आनंद, जैमस एंड (और) ज्वेलरी (गहने) फेडरेशन (संधि)

जीएसटी: - में कर दरे 5, 12, 18, और 28 प्रतिशत रखी गई हैं। साथ ही कर फ्री (नि: शुल्क) आइटम्स (वस्तु) की सूची जारी कर दी गई है। प्रस्तावति कर स्लैब (तख्ता) से देशभर में वस्तु और सेवाएं सस्ती होंगी। अलग-अलग कर प्रणालियों से भी उद्योगों और संस्थानों को मुक्ति मिलेगी। इससे देश मेें करोबार आसान होगा।

जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू किया जाना प्रस्तावित है। इसे मोदी सरकार के बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है। इसे लेकर जहां एक ओर सरकारी मशीनरी तैयारियों में जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर उद्योग भी इसे लेकर पूरी तरह से तैयार है। जीएसटी में जिस तरह से कर प्रणाली रखी गई, उससे उद्योग खुश है। उद्योगों का मानना है कि इस कर प्रणाली से वस्तुओ और सेवाओं के सस्ते होने के साथ ही जटिल कर प्रणाली से मुक्ति मिल जाएगी। यह उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों के लिए भी लाभदायक रहेगा।

16 वर्षों तक लगातार जीएसअी पर काम करने के बाद आखिरकार दिसंबर 2014 में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने संसद में जीएसटी बिल प्रस्तुत किया। इसके बाद फरवरी 2015 में जीएसटी लागू करने और इसकी समयावधि को बजट भाषण में सम्मिलित किया गया। 2015 में संविधान संशोधन बिल प्रस्तुत किया गया। इसके बाद लगातार बदलावों के साथ 29 मार्च 2017 को लोकसभा ने जीएसटी बिल पास कर दिया। गया।

जीएसटी लागू होने के बाद देश में न केवल वस्तु एवं सेवाएं सस्ती होंगी बल्कि उद्योगों के लिए भी फायदेमंद रहेगा। जीडीपी 2 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसके अलावा महंगाई का आंकड़ा भी कम हो जाएगा।

एक समान कर प्रणाली से देशभर के कारोबारियों को कहीं भी किसी भी राज्य में कारोबार करना आसान रहेंगा। इसके अलावा अलग-अलग करों को एक में समाहित करने का फायदा उद्योगों और कारोबारियों को भी मिलेगा। कर की दरे बेहतर है और इसका लाभ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। यह देश की प्रगति और रोजगार सृजन में काफी लाभदायक साबित होगा।

राघवेंद्र सिंह, कमिश्नर (आयुक्त) , मप्र वाणिज्यिककर विभाग

कर: - मोदी सरकार अपने कार्यकाल के चौथे वर्ष में देश के इनडायरेक्ट (अप्रत्यक्ष) कर इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव गुड्‌स (अच्छा) एंड (और) सर्विस (सेवा) कर के रूप में एक जुलाई से लागू करने जा रही है। इसके बाद एक देश एक कर हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर पहली बार देश के इतिहास में इनकम कर की न्यूनतम दर 10 फीसदी से कम कर पांच फीसदी की गई।

Table Contain Shows Excise collection increase 139 percent

Table Contain Shows Excise collection increase 139 percent

एक्साइज (उत्पाद शुल्क) डयुटी (कर्तव्य) कलेक्शन (संचयन) 139 प्रतिशत बढ़ेगी

कर

2013 - 14

2017 - 18

बदलाव

कॉर्पोरेशन (सहकारिता) कर

3.95

5.39

36.51 प्रतिशत

इनकम (आय) कर

2.43

4.41

81.69 प्रतिशत

कस्टम () ड्‌युटी (कर्तव्य)

1.72

2.45

42.44 प्रतिशत

एक्साइज (आबकारी) ड्‌यूटी (कर्तव्य)

1.70

4.06

139.08 प्रतिशत

सर्विस (सेवा) कर

1.55

2.75

77.67 प्रतिशत

कुुल कर

11.39

19.12

67.87 प्रतिशत

शुद्ध कर संग्रह (स्टेट शेयर व अन्य मद घटाने के बाद)

8.16

12.27

50.4 प्रतिशत

कर कलेक्शन (संचयन) के आंकड़े लाख करोड़ रु. में

विभिन्न कर निम्न हैं-

  • 42 सेस और सरचार्ज लग रहे थे वर्ष 2013 - 14 में केन्द्र के विभिन्न करो पर।
  • 34 सेस और सरचार्ज लग रहे हैं वर्ष 2017 - 18 में। इस दौरान सर्विस (सेवा) पर कृषि कल्याण और स्वच्छ भारत सेस को बढ़ाया।
  • 50 करोड़ रुपए तक करोबार करने वाली छोटी कंपनी (संघ) पर कॉर्पोरेशन (सहकारिता) कर 5 प्रतिशत घटाकर 25 प्रतिशत किया। पहली बार 50 लाख से 1 करोड़ रुपए की कमाई पर 10 प्रतिशत का सरचार्ज लगाया गया।
  • वेल्थ (धन) कर को पर्ष 2016 - 17 से खत्म किया गया। वहीं दूसरी ओर वर्ष 2015 - 16 में 1078 करोड़ रुपए का कर संग्रह हुआ था।

आगे क्या- गुड्‌स एंड सर्विस कर लागू होने के बाद कर चोरी मुश्किल हो जाएगी। वहीं अप्रत्यक्ष कर देने वालों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाएगी। जीडीपी ग्रोथ (विकास) 2 फीसदी बढ़ जाएगी।

ऊर्जा क्षेत्र: - मोदी सरकार के तीन वर्षो के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। वर्ल्ड (विश्व) बैंक (अधिकोष) इलेक्ट्रिसिटी (बिजली) एसोसिबिलिटी (मित्रता) रैंकिंग (अत्यंत कष्टदायी) में भारत वर्तमान (2017) में 26वें पायदान पर हैं, जबकि यूपीए-2 के दौरान 2014 में 99वें स्थान पर था। तीन वर्षो में 73 स्थानों की छलांग ने देश को विश्व मंच पर ला दिया है। पहली बार हमारा देश सरप्लस बिजली वाले देशों में शामिल हुआ है। भारत की पावर (शक्ति) क्षमता में 243 गीगा वॉट की बढ़ोत्तरी हुई हैं।

कोयले से बनने वाली बिजली से होने वाले नुकसान को धीरे-धीरे खत्म करने के उद्देश्य से नवकरणीय ऊर्जा पर सरकार का जोर है। ऐसे में विंड एनर्जी (वायु एनर्जी) (ऊर्जा) एक बेहतर विकल्प है और इसमें निवेश भी बढ़ रहा है।

तुलसी तांती, चेयरमैन (सभापति) व एमडी, सुजलान

ऑटोमोबाइल (स्वचालित) : - कार की बड़ी मांग निकल रही है। रिफॉर्म के प्रभाव नजर आने लगे है। सबसे बड़ी बात यह रही कि महंगाई पर नियंत्रण होने से सभी क्षेत्रों को अवसर मिले हैं। जीएसटी लागू होने से सर्वाधिक फायदा ऑटोमोबाइल्स सेक्टर को होगा।

अजय सेबकरी, एमडी, ब्रिजस्टोन

मेन्यूफेक्चरिंग (विनिर्माण): - इंडेक्स (सूची) ऑफ (का) इंडिस्ट्रियल (उद्योग संबंधी) प्रॉडक्शन (उत्पादन) की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में 8 कोर इंडस्ट्रीज (औद्योगिक) का आईआईपी 162.2 से बढ़कर 175.6 पर पहुंच गया।

अन्य कार्यों का रिपोर्ट कार्ड (विवरण पत्रक) : - केंद्र की सत्ता में काबिज होने से पहले भाजपा ने जो वादे किए थे, उनमें शहरों की दशा सुधारने का वादा शामिल था। इस दिशा में अमल भी शुरू हो गया है। आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने के लिए हाईवे (मुख्यमार्ग) और सड़कों के नेटवर्क (जाल पर काम) पर काम तेजी से किया जा रहा है। दूसरी ओर, जल्द न्याय के लिए जजों की नियुक्ति का वादा पूरा करने की दिशा में सरकार ने अब तक पूरे प्रयास नहीं किए हैं। हालांकि लोगों का भरोसा कायम हैं

काशी: - आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह ने कहा कि काशी में विकास हुआ है और सबसे अच्छी बात है कि योजना के तहत कार्य हो रहे हैं, जिसका फायदा सभी जगहों पर मिलेगा। पीएम मोदी ने दिखाया है कि उनका मकसद काम करना है वह दिखायी भी दे रहा है। वैसे लोगों का उतना ही सपना दिखाना चाहिए था जितना काम हो सके।

बनारस: -उस्मानिया जाता मस्जिद के ईमाम मुफ्ती हारुन रशीद नक्शबंदी ने बताया, पीएम के संसदीय क्षेत्र में ऐसा कोई काम नहीं हुआ है, जिसे सरकार की उपलब्धि कहा जाए। तीन साल में सड़कों की हालात नहीं सुधरी। सफाई के मामले में भी बनारस पीछे है।

साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा, आजादी के बाद पहली बार ऐसी पीएम मिला है जिसने निस्वार्थ भाव से देश के विकास का प्रयास किया। मोदी ऐसे पीएम हैं जिन्होंने बिना रूके और देश के हर कौने में काम किया है। वे वाराणसी का खास ख्याल रख कर काम कर रहे हैं। उनके विजन (कल्पना) का वाराणसी में फर्क साफ दिखने लगा है।

श्रमशक्ति-51 करोड़ की श्रमशक्ति भारत में हैं, जिनमें 5 प्रतिशत ही दक्ष हैं। नेशनल (राष्ट्रीय) स्किल (कौशल) डवलपमेंट (विकास) के तहत इन सभी को दक्ष किया जा रहा है ताकि नियोक्ताओं को दक्ष श्रमशक्ति मिले। अब तक 15 लाख से ज्यादा लोगों ने प्रशिक्षण लिया है।

जयंत कृष्ण, सीओओ, नेशनल (राष्ट्रीय) स्किल (कौशल) डवलपमेंट (विकास) कॉर्प

मोदी जी की शख्सियत: -नरेन्द्र मोदी जी की शख्सियत 15 बातें जो निम्न हैं-

  1. चौंकाने वाले-ज्यादातर फैसले अलग होते हैं। क्योंकि ब्रिटिश संसद में बोलने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री, मंगोलिया, इजराइल जाने वाले पहले पीएम। यही नहीं पहले प्रधानमंत्री जिन्होंने दिल्ली का दशहरा छोड़ा और लखनऊ की रामलीला में गए। 17 की उम्र में घर छोड़कर भी माता-पिता को चौंकाया था।
  2. स्टाइल (अभिकल्पना करना) आइकॉन (प्रतिभा) -बुलगरी का चश्मा, मॉ ब्लां का पेन मोवाड़ों की घड़ी इस्तेमाल करते हैं। आधी बाहं के कुर्ते इनसे ही फैशन (वेशभूषा) में आए। मोनोग्राम्ड सूट से भारी विवादों में रहे। क्योंकि 2015 में तत्कालीन अमरिकी राष्ट्रपति ओबामा भारत आए तो वॉल स्ट्रीट जर्नल (दिवार, सड़क, साधारण) ने हेडलाइन (शीर्षक) दी थी एयरपोर्ट (हवाईअड्‌डे) पर मोदी ने फैशन में मिशेल ओबामा को भी पीछे छोड़ दिया।
  3. प्रखर राष्ट्रवादी छवि-अंग्रेजी बोल लेते हैं, बात हिंदी में ही करते है, क्योंकि वे किसी भी विदेशी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से जानबूझ कर हिन्दी में बात करते हैं। सरकारी माध्यम को बढ़ावा देने के लिए आकाशवाणी पर मन की बात कहते हैं।
  4. नेट प्रॉफिट (यथार्थ लाभ) पीएम-परिवार के लोगों का काम में दखल नहीं।
  5. फिटनेस पसंद-योग करते हैं, खाने में भाकरी व खिचड़ी।
  6. मार्केटिंग (विपण) मैन (मनुष्य) -डिग्री एम की, तरीका एमबीए वाला-सेल्समैन (विक्रेता) व स्टेटसमैन (राजनेता) दोनों की खूबियां हैं। योजनाओं की मार्केेटिंग शांंयद ही उनसे बेहतर कोई कर पाता हो। क्योंकि जैस मेक इन इंडिया को ही लें। अभी बड़ा निवेश इसमें नहीं हुआ है लेकिन इसकी चर्चा खूब हैं।
  7. सनसनीखेज भाषण-जुमलों का इस्तेमाल करते हैं।
  8. वनमैन (एक मनुष्य) शो (कार्यक्रम) -गैस सब्सिडी (सरकार द्वारा आर्थिक सहायता) का धन्यवाद पत्र भी इनके नाम से।
  9. िरस्क (जोखिम) लेते हैं-नोटबंदी हो या मगरमच्छ, डरते नहीं हैं। क्योंकि बचपन में मोदी शर्मिष्ठा झील में तैरते थे। उसमें मगरमच्छ रहते थे झील में मंदिर था। धार्मिक मौकों पर उसके झंडे को बदला जाता था। एक बार बारिश मे मगरमच्छ सक्रिय थे। कोई जाने को तैयार नहीं था। मोदी तैर के गए और झंडा बदलकर आए।
  10. गैजेट (जुगत/यंत्र) गुरु-सुबह उठते ही चेक (जांच) करते है आईपैड, 2015 में नेपाल में आए भूकंप की जानकारी वहां के तत्कालीन पीएम सुशील कोईराला को मोदी के ट्‌वीट से मिली। क्योंकि- करीब 20 साल पहले पंजाब, हिरयाणा, हिमाचल प्रभारी थे पंचकूला में रहते थे। तब वे इकलौते थे जो वहां कम्प्यूटर (परिकलक) इस्तेमाल करते थे। जो चोरी हो गया था। 1999 के चुनाव में भी डिजिटल (अंकसंबंधी) कैमरा (छायाचित्र खींचने का यंत्र) उपयोग किया था।
  11. अनुशासन प्रिय-एक भी छुट्‌टी नहीं लते, शुरू से हैं ऐसे।
  12. विवादों में रहते हैं-उत्तराखंड में लगवा दिया राष्ट्रपति शासन। क्योंकि मोदी अक्सर विवादों में रहते हैं। इससे पहले गुजरात दंगे, महिला की जासूसी, अमेरिका से वीजा न मिलना, आदि ऐसे मामले हैं जिन्हें लेकर वे हमेशा विवादों में रहे हैं।
  13. अफसरों पर ज्यादा भरोसा- कानून बदलकर लाए पसंद का अफसर। पूर्ववर्ती सरकारों की तरह अफसरों पर ज्यादा भरोसा है। क्योंकि प्रधानमंत्री बनते ही मोदी पहला अध्यादेश सेवानिवृत्त आईएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्रा की नियुक्ति के लिए ही लाए थे। कानून में बदलाव कर उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया। एस जयशंकर और अजीत डोभाल भी ऐसे ही भरोसेमंद अफसर हैं।
  14. जिद्दी स्वभाव- लोकपाल नहीं नियुक्त करना था, नहीं किया। गुजरात में लोकायुक्त नियुक्त करना हो या केंद्र में लोकपाल। मोदी ने हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) और सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के दखल के बावजूद नहीं किया। मुस्लिम टोपी भी नहीं पहनी थी। क्योंकि बचपन से जो नहीं करना चाहते थे, राजी नहीं होते थे।
  15. दूसरी पंक्ति पनप नहीं पाती-पार्टी में केवल दो ही प्रमुख चेहरे। मोदी के नेतृत्व में भाजपा में दूसरी पंक्ति के लीडर (नेता) नहीं तैयार हो पा रहे हैं। पार्टी (राजनीतिक) में अभी केवल नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ही नजर आ रहे हैं। इनकी ही चलती थी है। क्योंकि मोदी जी वहीं करते है जो जांचा जाता है। फिर चाहे गुजरात के विश्वसनीय अमित शाह को विरोध के बावजूद पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना हो या लालकृष्ण आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी जैसे नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में शामिल करना हो।

- Published/Last Modified on: June 11, 2017

Policy-Governance

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