केंद्र सरकार का सौ फीसदी एफडीआई निवेश पर छूट भाग-2(Hundred Percent Relaxation on FDI Investment - Essay in Hindi) (Download PDF)

Doorsteptutor material for CLAT is prepared by world's top subject experts: fully solved questions with step-by-step explanation- practice your way to success.

प्रस्तावना:- भारत सरकार ने सात क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा और शर्तो में परिवर्तन किए हैं। ये परिवर्तन इस उम्मीद के साथ किए गए हैं कि देश में विदेशी जनसमूह भारी-भरकम निवेश करेंगी। लेकिन, सवाल यह है कि फार्मा उद्योग में अनुमति के साथ 74 फीसदी से अधिक निवेश की मंजूरी किन कंपनियों (जनसमूहों) को लाभ पहुंचाएगी? फूड (भोजन) रिटेलिंग (खुदरा) और ई-कामर्स की जनसमूहों को यदि बराबरी की प्रतिस्पर्धा का माहौल नहीं मिला तो एफडीआई में मिलने वाली 100 फीसदी छूट का लाभ उठाने, कौनसी जनसमूह आगे आएंगी? हो सकता है कि उड्‌डयन और सिंगल ब्रांड स्टोर (एकल उत्पाद गोदाम) क्षेत्र निवेश का कुछ लाभ मिले पर रक्षा उद्योग क्षेत्र में आने वाली जनसमूहों को लेकर संदेह है कि ये हमारी विदेश नीति तक को प्रभावित कर सकती हैं।

एफडीआई का अर्थ:-

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अर्थ है कि किसी एक देश की इकाई का दूसरे देश की इकाई में निवेश। अंग्रेजी में इसे फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट या प्रचलित लघु रूप में एफडीआई भी कहा जाता है। इस तरह से किए जाने वाले निवेश से निवेशकों को अन्य देश की उस जनसमूह के प्रबंधन में कुछ हिस्सा मिल जाता है, जिसमें उसका धन लगता है। घरेलू जनसमूहों विदेश से अपने उद्योग के लिए धन उगाहने के उद्देश्य से एफडीआई का सहारा लेती हैं। लेकिन, कितना और कैसे किस उद्योग क्षेत्र में निवेश होगा, यह फैसला केंद्र सरकार करती हैं।

केंद्र सरकार की अनुमति:-

  • ने मुख्य रूप से फार्मा उद्योग में 74 फीसदी तक ब्राउन फील्ड (पुरानी परियोजना) में बिना अनुमति के और इससे अधिक के लिए अनुमति के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत दी हैं। घरेलू विमानन जनसमूहों में एफडीआई सीमा 49 से बढ़ाकर 100 फीसदी, रक्षा, डीटीएच, मोबाइल टीवी, देश में उत्पादित खाद्य पदार्थ और ई-कामर्स के क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी है।
Table Shows Percentage Increase (+) and Decrease (-) in FDI Yearly
वर्षप्रतिशत में वृद्धि (+) में और कमी (-) मेंआकड़े करोड़ रू. में
2000 - 0110,733
2001 - 02(+) 65 % 18,65418,654
2002 - 03(-) 33 %12,871
2003 - 04(-) 19 %10,064
2004 - 05(+) 47 %14,653
2005 - 06(+) 72 %24,584
2006 - 07(+) 125 %56,390
2007 - 08(+) 97 %98,642
2008 - 09(+) 28 %142,829
2009 - 10(-) 18 %123,120
2010 - 11(-) 17 %97,320
2011 - 12(+) 64 %165,146
2012 - 13(-) 36 %121,907
2013 - 14(+) 08 %147,518
2014 - 15(+) 27 %189,107
2015 - 16(+) 29 %262,322
कुल 1,495, 860

ग्रीन व ब्राउन फील्ड (नई व पुरानी परियोजना) :-

  • एफडीआई के लिए ग्रीन फील्ड व ब्राउन फील्ड दो श्रेणियों में हैं। ग्रीन फील्ड का निवेश का अर्थ है जब कोई जनसमूह किसी नई परियोजना के लिए विदेशी निवेश की चाहत रखती है। ब्राउन फील्ड श्रेणी वह है जिसमें पहले से संचानित परियोजना में नई उत्पादन के लिए निवेश होता हैं।

परिस्थिति:- सरकार सामन्यतौर पर तीन प्रकार से उद्योग में विदेशी निवेश को नियंत्रित करती है।

  • पहले तो वह सीमित दायरे में पूर्वानुमति के साथ निवेश की मंजूरी देती है।
  • दूसरे, वह सीमित दायरे में अनुमति के साथ निवेश की मंजूरी देती है।
  • इसके अलावा निवेश को मंजूरी नहीं देती है।

भारत सरकार-

  • ने जिन सात क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा और शर्तो में परिवर्तन किया है, वह स्वागत किए जाने योग्य है। उम्मीद है कि इन फेसलों के परिणामस्वरूप दीर्घकाल में हमें बेहतर निवेश देखने को मिलेगा। लोगों को रोजगार और वास्तविक पूंजी निर्माण के साथ देश की विकास दर दोहरे अंक में लाने में सहायता मिलेगी। फिलहाल उम्मीद की बात इसलिए है कि इतना सब करने के बाद भी बहुत कुछ करना शेष रह गया हैं।

रक्षा उद्योग:-

  • के क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49 से बढ़कार 100 फीसदी कर दी गई है। यदि कोई जनसमूह भारत आकर बंदूक, टैंक या मिसाइल बनाने भी लगे तो उन्हें बेचने के लिए बाजार चाहिए होगा। चूंकि वे भारत की धरती से उत्पादन कर रही होंगी, इसके लिए सबसे बड़ा खतरा होगा हमारी विदेश नीति पर दबाव का। हो सकता है कि उन जनसमूहों के हित साधने के लिए हमें हमारी विदेश नीति के फेसलो में परिवर्तन भी करना पड़े। जहां तक सिंगल ब्रांड रिटेल (एकल उत्पाद खुदरा) के क्षेत्र में छूट की बात है तो सबसे बड़ा फायदा एपल जनसमूह को होने वाला है। उसके सीईओ भारत में आए भी थे। और वे अपने ही उत्पादों को भारत में बेचने के लिए एकल ब्रांड स्टोर (एकल उत्पाद खुदरा) की अनुमति चाहते थे। इस मामले में तीन साल की छूट दी गई है और इसे 5 साल और बढ़ाया जा सकता हैं। अब तक विदेशी जनसमूह को अपने स्टोर से 30 फीसदी भारतीय उत्पाद का इस्तेमाल करने की बाध्यता थी। अब इस मामले में छूट दे दी गई है। अब एपल के आवदेन को हरी झंडी मिल सकती है। हो सकता है कि इसका फायदा सोनी और डेल जैसी जनसमूह भी उठाएं।

दवा उद्योग:-

  • पूर्व में दवा उद्योग में समस्या यह थी कि हमारे देश में लागू दवा मूल्य नियंत्रण व्यवस्था के कारण बाहर की बड़ी जनसमूहों में निवेश करने से बचती थीं। लेकिन, अब इस उद्योग में सरकार ने बिना किसी पूर्वानुमति के 74 फीसदी तक ब्राउन फील्ड में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत दी है। इससे अधिक के निवेश के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता होगी। मगर समस्या यह है कि इस क्षेत्र की 10 प्रमुख जनसमूह तेजी से विकास कर रही हैं। उन्हें अपनी वस्तु बेचने की जरूरत ही नहीं हैं। ऐसे में सरकार की ओर से फार्मा उद्योग में अनुमति के साथ ब्राउन फील्ड में 100 फीसदी निवेश की छूट मिलने पर, कोई भी विदेशी निवेशक किसी बड़ी जनसमूह में निवेश भी तभी कर सकेगा, जबकि वह उच्च (टॉप) की बड़ी जनसमूहों को वस्तु की असमान्य कीमत देने को तैयार हो। ऐसे में यदि इस संबंध का फायदा होगा भी तो कुछ मझोली व छोटी जनसमूह को ही होगा। यदि सरकार को फार्मा उद्योग में छूट देनी ही थी तो ग्रीन फील्ड (नई परियोजना) में देनी थी। इसी से एफडीआई में बढ़ोतरी होती हैं।

देश:-

  • में उत्पादित वस्तुओं को बेचने के लिए ही फूड रिटेल (खाद्य खुदरा) और ई-कामर्स (वाणिज्य) जनसमूहों के लिए 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी दी है। कहने में तो बहुत ही अच्छा लगता है कि घरेलू दुकानदारों के हितों की रक्षा की गई है और विदेशी निवेश के माध्यम से आने वाले उद्योगों पर देश में उत्पादित को बेचने की अनिवार्य शर्त के साथ घरेलू उत्पादकों को लाभ पहुंचाने की बात की गई है। लेकिन, इतनी बाधाओं के साथ कौन समझदार विदेशी निवेशक यहां कर निवेश करेगा? भारतीय दुकानदार तो आयातित माल बेचेंगे लेकिन, विदेशी निवेशक ऐसा नहीं कर सकेंगे, तो वे किस फायदे के लिए यहां पर आएंगे? इसके अलावा यदि उन्होंने आयातित वस्तुएं बेचनी शुरू की भी दीं, उन पर नियंत्रण करना भी कठीन होगा।

उड्‌डयन क्षेत्र में संभावना:-

  • नागरिक उड्‌डयन के क्षेत्र में देश में घरेलू यात्रियों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक तेजी से बढ़ रही है। प्रति माह लगभग 22 फीसदी की वृद्धि हो रही है। यह बात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की कुछ विमानन जनसमूहों की माली हालत बहुत ही खराब भी हैं। सरकार ने अब इस क्षेत्र में एफडीआई सीमा 49 से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी गई हैं। इस लिहाज से नागरिक उड्‌डयन क्षेत्र में बड़ा निवेश आने की संभावना बन सकती है। कहा जाता है कि 20 - 22 जहाजों के साथ नागरिक उड्‌डयन क्षेत्र में लाभ नहीं कमाया जा सकता इसके लिए जितनी अधिक संख्या में जहाज होंगे और जितनी बेहतर संपर्क होगा, उतना ही लाभ मिलेगा। ऐसे में निवेश बेहतर होने से घाटे में चल रही घरेलू जनसमूहों को लाभ मिलेगा।

एफडीआई:-

  • अगर भारत को ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए रक्षा क्षेत्र में तरक्की करनी है तो सरकार द्वारा निर्माताओं अथवा निवेशकों को पर्याप्त प्रोत्साहन देना होगा। जो भी विदेशी हथियार, दवा निर्माता जनसमूह भारत में निवेश करना चाहती है, वे एक पूरा ‘पैकज’ (प्रस्ताव या सुझाव का एक समुच्चय) चाहती है। यानी वे फाइनेंशियल (आर्थिक) सीलिंग (छत) , कर कानून, श्रम काूनन, भूमि अधिग्रहण में सुधार के साथ-साथ निवेश के लिए पूरा एक सहायक निवेश परितंत्र (इकोसिस्टम) चाहती हैं।

लाल फीताशाही:-

  • सरकार ने एफडीआई के जरिए अब आधुनिक तकनीक पर जोर दिया है, जो कि इस समय बेहद जरूरी है। रक्षा क्षेत्र में छोटे हथियार-उपकरण निर्माण जैसे निश्चित केंद्र को चिन्हित किया गया है, जो अच्छा कदम है नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने तब उनका कहना था कि भारत की छवि विदेश में लाल फीताशाही (रेड टेप) की है उन्होंने कहा कि वे सत्ता में आते ही इसे रेड कार्पेट (लाल समूह) में बदल देंगे। एक विश्लेषक के तौर पर कहना है कि प्रधानमंत्री का रेड कार्पेट का संकेत स्पष्ट न होने से बड़े निर्माता अब भी भारत में दीर्घावधि के लिए निवेश करने और निर्माण में उतरने की हिचक रहे हैं।

नियम:-

  • हमें पूरे निवेश परितंत्र को ठीक करना होगा। इधर-उधर नियम (बंद) लगाने से निवेश के माहौल में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। एफडीआई के प्रावधान कोई पहली दफा नहीं हुए हैं। यूपीए सरकार के दौर में भी याद करें तो नियम और प्रक्रियाएं बनाई गई थीं। उनमें भी कुछ मामलों में 100 फीसदी एफडीआई का प्रावधान था, पर उसकी इजाजत के लिए शर्ते रखी गई थीं। उस समय भी जनसमूहों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई और कुछ खास निवेश नहीं आया।
  • 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी देना कोई बड़ा निर्णय नहीं है। यह बहस तो अरसे से चल रही है। इस सरकार ने भी कोई बड़ी घोषणा नहीं की है। हालांकि ‘स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी’ (राज्य में कला और तकनीक) से जुड़ी शर्त को हटाया गया है।

एयरलाइंस (हवाई रेखा) :-

  • में एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के बावजूद विदेशी जनसमूहों के लिए निवेश मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) नामक संस्था के नियमों के अनुसार यदि किसी एयरलाइंस का नियत्रंण विदेशी हाथों में है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय उड़ान की अनुमति नहीं मिलेगी। यदि किसी जनसमूह में 49 प्रतिशत से अधिक एफडीआई है तो विदेशों मेें उड़ान भरने में द्धिपक्षीय अधिकार को लेकर दिक्कत हो सकती है। लेकिन यदि आप देश की सीमा के भीतर उड़ान भरते है तो एफडीआई की कोई सीमा नहीं है। इस बारे में दूसरे देशों की नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है। विदेशी एयरलाइंस के लिए 49 प्रतिशत की ही लिमिट (सीमा) रहेगी।

विमान:- निम्न हैं-

  • भारत में 10 लाख लोगों पर 03 विमान हैं।
  • अमेरिका में 10 लाख लोगों पर 12 विमान हैं।
  • 2015 में 08 करोड़ ने हवाई यात्रा की है।

आरसीएस:-

  • उड्‌डयन सचिव ने बताया कि क्षेत्रीय शहरों को जोड़ने की योजना (आरसीएस) का विस्तृत प्रारूप इसी महीने सामने आ जाएगा। यह योजना तभी परवान चढ़ेगी जब विमान लीज (किराया) का खर्च कम हो। चार-पाँच साल तक कच्चे तेल की कीमत कम होना भी जरूरी है। दिल्ली इंटरनेशल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) (दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्‌डे ऋण का एक सीमित अंश चुकाना) के निदेशक के. नारायण राव ने सुझाव दिया कि आरसीएस को सफल बनाने के लिए पहले 50 या 100 छोटे विमानों के लिए कम ब्याज पर कर्ज उपलब्ध कराना चाहिए।

नियम बदलाव:-

  • उड्‌डयन सचिव ने बताया कि एफडीआई नीति में बदलाव के अनुरूप मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण के नियम भी बदलने होंगे। मौजूदा नियमों के मुताबिक फ्लाइंग लाइसेंस (उड़ान अनुमति) उसी जनसमूह को दिया जाता है जिसके सभापति और दो-तिहाई निर्देशक भारतीय हों और जिसका मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण भी भारतीयों के पास हो।
  • नागरिक उड्‌डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने इस मौके पर कहा कि एयरलाइंस देवदूत भले ही न हो हो पर वे राक्षस भी नहीं है।

चुनौती:-

  • चुनौती 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी देना नहीं थी। चुनौती यह है कि निवेश के लिए माकूल इकोसिस्टम कैसे बनाया जाए, सरकार को इस पर गौर करना होगा ताकि जनसमूहों निवेश करें और यहां निर्माण कार्य बढ़ाएं एक बहस 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी देने के नुकसान पर भी होती आई है जिस वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में हम है और जिस आधुनिक तकनीक का मुंह देख रहे हैं, उसके लिए हमें ऐसे निर्णय लेने ही होंगे। अगर 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी नहीं दी जाती तो भारत वह तकनीक कभी हासिल नहीं कर सकता जो हमारी सेना या अन्य दूसरे क्षेत्रों को चाहिए क्योंकि इनमें से ज्यादातर तकनीक पेटेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपटी (संपति) सही के दायरे में हैं। इसलिए जब तक अंतराराष्ट्रीय स्तर की हथियार-उपकरण निर्माता जनसमूहों को भारत आने की इजाजत नहीं दी जाएगी, तब तक हमारी आधुनिक तकनीक को हासिल करने की क्षमता सीमित ही रहेगी। इसलिए कुछ चिंताओं के बावजूद हमें कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जरूरी आधुनिकीकरण के लिए एफडीआई लाना ही होगा। विदेशी निवेश आना हमारे नियम की निष्ठा और ईमानदारी पर भी निर्भर करता है। खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में जब भी कोई संबंध हुआ या निर्माण कार्य बढ़ा कोई न कोई गड़बड़ी सामने आ जाती हैं। बहरहाल, कितनी बड़ी जनसमूहों भारत आने को तैयार हैं, यह हमारे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार/व्यापार) पर ही निर्भर करेगा।

बदलाव:-

  • केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की नीति में काफी बदलाव किए हैं। अब रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का रास्ता खुल गया है। उड्‌डयन, ई-कॉमर्स, ग्रीनफील्ड फार्मा से लेकर मोबाइल टीवी, केबल नेटवर्क (संपर्क) और डीटीएच क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश किया जा सकेगा। मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक अहम बदलाव यह भी किया कि सिंगल ब्रांड रिटेल (एक उत्पाद खुदरा) के नियमों को भी आसान कर दिया गया है। अब जनसमूहों 3 साल तक आउटसोर्सिंग (बाहरी सतह) के नियमों में छूट ले सकती हैं। यदि वह भारत में नई कटिंग ऐक्ट (कथन कानून) तकनीक का इस्तेमाल करती है तो उसे पांच साल की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। इससे एप्पल और जिओमी जैसी जनमूहों का अब अपने रिटेल स्टोर (खुदरा गोदाम) खोलने में आसानी होगी। वर्तमान में सिंगल ब्रांड रिटेल के तहत कारोबार करने के लिए जनसमूहों को अनिवार्य तौर पर 30 फीसदी का व्यापार स्थानीय लोगों के माध्यम से करना होता था। कुछ माह पहले ही एप्पल ने भारत में कारोबार बढ़ाने के लिए सिंगल ब्रांड रिटेल स्टोर खोलने के लिए आउटसोर्सिंग नियमों में ढील की बात कही थी।

ऐसी खोली विदेशी जनसमूहों की राह:- निम्न हैं

  • रक्षा क्षेत्र- में 100 प्रतिशत की छूट दी हैं, अभी तक 49 फीसदी की अनुमति थी। अधिक निवेश अत्याधुनिक तकनीक के संबंध में किया जा सकता था, अब शर्त हटाई हैं।
  • प्रसारण क्षेत्र -में टेलीपोट्‌र्स, डीटीएच, केबल नेटवर्क सेवा, मोबाइल टीवी, हेडेंड-इन द स्काई ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (एचआईटीएस) में 100 प्रतिशत निवेश हैं।
  • खाद्य पदार्थ - (देश में उत्पादित) और ई-कॉमर्स (वाणिज्य) क्षेत्र में सरकारी मंजूरी मार्ग से 100 प्रतिशत निवेश की अनुमति दी गई है।
  • फार्मा क्षेत्र में- की ब्राउनफील्ड (पुरानी योजनाओं) में 74 प्रतिशत एफडीआई स्वत: मार्ग से किया जा सकेगा, इससे अधिक निवेश के लिए मंजूरी लेनी होगी।
  • हवाई क्षेत्रों में- हवाई अड्‌डों को अत्याधुनिक बनाने के लिए ब्राउनफील्ड परियोजनाओ में भी 100 प्रतिशत की अनुमति है। हवाई सेवा कारोबार में 49 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत हो गई हैं।
  • विदेशी कंपनी- रक्षा, दूरसंचार, सूचना एंव प्रसारण क्षेत्र में निवेश करती है। तो वह यहां कार्यालय खोल सकेगी।

लाभ: - निम्न हैं-

  • रक्षा क्षेत्र में लाभ- 100 प्रतिशत एफडीआई यानी अभी रक्षा क्षेत्र में 49 प्रतिशत एफडीआई थी तो विदेशी जनसमूहों को साझांदार खोजना पड़ता था। इसके कारण वे कतराती थीं। अब सीधे उतर सकेंगी।
  • हथियार क्षेत्र में लाभ-बनाने वाली विश्व की 100 जनमसमूहों की सूची में भारत की 3 हैं। जबकि अमरीका की 54 प्रतिशत है। हम दूसरे देशों पर निर्भर हैं। अब आत्मनिर्भर होने में मदद मिलेगी।
  • उड्‌डयन क्षेत्र में लाभ- देश में 476 एयरपोर्ट (हवाई अड्‌डा) - एयरस्ट्रिप हैं। इनमें से 20 राजस्थान में हैं। 75 ही प्रयोग के लिए तैयार हैं। घरेलू ट्रैफिक एक साल में 22 प्रतिशत बढ़ा हैं। यानी विदेशी जनसमूहों के लिए पूरा बाजार है। अब बंद एयरपोर्ट शुरू होंगे। प्रतिस्पर्धा मे टिकट सस्ते होंगे। सुविधाएं भी बढ़ेंगी।
  • खाद्य क्षेत्र में लाभ- हमारे यहा 22 प्रतिशत फल-सब्जियां खराब हो जाती हैं। अमरीका, यूरोप में यह 0 प्रतिशत है। उनकी यह तकनीक देश में भी आ सकेगी। विदेशी जनसमूह आएगी तो नौकरियां भी बढ़ेगी।

मोदी जी:-

  • 63 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ। 2015 - 16 में हम विश्व की सबसे खुली अर्थव्यवस्था है। ′ अब एक छोटी ′ नकारात्मक ′ सूची को छोड़कर ज्यादातर क्षेत्र में एफडीआई स्वत: की जा सकती है। इन बदलावों से अब भारत एफडीआई में दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्था होगी इसका मकसद देश में रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देना है।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री भारत

रिलायंस डिफेंस:-

  • अंबानी की तीन योजनाएं मंत्रालय में लटकी हुई हैं और उससे पहले ही सरकार ने सीधे रास्ते से विदेशी निवेश का रास्ता साफ कर सौ फीसदी एफडीआई को हरी झंडी दे दी है। अंबानी के रिलायंस ग्रुप डिफेंस (समूह प्रमाण) योजना का लंबे समय से टारगेट (लक्ष्य) में है कि वह रक्षा उपकरणों में देश के सबसे बड़े उत्पादक बनें। इसके लिए जनसमूह ने मंत्रालय से लेकर विदेशी जनसमूहों तक लगभग सभी प्रक्रिया पूरी कर ली है।
  • इस हरी झंडी से एक साथ भारतीय इंडस्ट्री (उद्योग) पर असर पड़ेगा, जिनमें रिलायंस डिफेंस सिस्टम (नियम) , टाटा एडवांस्ड सिस्टम (पहले से नियम) , अडानी डिफेंस सिस्टम एंड तकनीक, भारत सेना जैसी भारतीय प्राइवेट (निजी) रक्षा जनसमूह शामिल हैं। जनसमूहों को प्रधानमंत्री मोदी के उस वायदे से बहुत उम्मीदें थीं जिसमें उन्होंने कहा था कि 2022 तक हमारा रक्षा बजट 38 लाख करोड़ रुपए होगा। यह सभी जनसमूह अबतक एफडीआई के लिए सरकार की खूब तारीफ करती रही हैं, पर आगे भी ऐसा होगा, इसमें संशय है।

निवेश:-

  • सीधा रास्ता इंवेस्टमेंट (निवेश) के बाद एफडीआई नियमों में सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इसके तहत विदेशी कॉपोरेट्‌स (संयुक्त समूह) को 30 फीसदी लोकल साझेदारी रखने की शर्त की मजबूरी नहीं रहेगी। एप्पल 30 फीसदी वाले प्रावधान के कारण ही भारत में निवेश नहीं कर रहा था। उसका तर्क था कि हमारी तकनीकी इतनी उन्नत है कि आपसे साझेदारी करना अपनी योजना के पद से समझौता करना है।

दबाव:-

  • इसी दबाव में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने 100 फीसदी एफडीआई से पहले की एपल को आमंत्रित करते हुए आश्वस्त किया था कि आप आइए तो सही, हम नियम बदल देंगे। और अब नियम बदल गए है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार ने एक जनसमूह के दबाव में 30 फीसदी लोकल साझेदारी वाले प्रावधान को खत्म कर दिया है। जो इजराइली जनसमूह राफेल, रिलायंस ग्रुप डिफेंस के साथ भारत में साझेदारी कर रही थी, उसकी भी मजबूरी खत्म हो गई है।

विचार:- निम्न हैं-

  • पूर्व वीसी और अर्थशास्त्री व्याख्याता बीबी भट्टाचार्य कहते हैं, ‘अगर विदेशी निवेश भारत में बड़े पैमाने पर होता है तो उपभोक्ता को भले फायदा हो पर भारतीय जनसमूहों को कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। हमारे देश की जनसमूहों की उत्पादन लगात चीन और दक्षिण पूर्व एशिया के दूसरे देशों से कई गुना ज्यादा है।’
  • भारत सरकार के पूर्व सचिव और वरिष्ठ अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी की राय में, ‘पैसा, पैसा होता है, वह स्वदेशी-विदेशी नहीं होता हैं। विदेशी निवेश को लेकर हम खौफजदा क्यों रहते हैं? हमें नहीं भूलना चाहिए कि ईस्ट इंडिया (पूर्वी भारत) जनसमूह की वजह से हम गुलाम नहीं हुए थे, बल्कि आपसी झगड़ों का फायदा ब्रिटेन ने उठाया था। एफडीआई से हमारी उत्पादकता में वैल्यू एडिशन किया।’

अंबानी-

  • मुकेश अंबानी की जनसमूह के मीडिया अधिकारी तुषार पनिया बताते हैं कि एफडीआई के नए प्रावधानों से उनकी जनसमूह को कोई चुनौती नहीं है। अनिल अंबानी के हिस्सेदारी वाले रिलायंस पर एफडीआई का सीधा असर होता दिख रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अनिल की जनसमूह ने रक्षा क्षेत्र में निवेश के तीन प्रस्ताव पहले से दे रखे हैं, जो एफडीआई के बाद खटाई में पड़ सकते हैं। जनसमूहों ने 84 हजार करोड़ रुपए की बिडिंग में हिस्सा ले चुकी है पर एक भी सफल नहीं हो सकती। रिलायंस इजराइयली जनसमूह राफेल के साथ ज्वांइट (जुड़ने) वेंचर (साहसिक कार्य) की तैयारी में थीं, पर 100 प्रतिशत एफडीआई के बाद राफेल को रिलायंस के साथ साझेदारी की मजबूरी नहीं रही है।
  • जनसमूह मामलों के आर्थिक सलाहकार कबीर बोगरा के अनुसार ‘पहले के नियमों के अनुसार रक्षा क्षेत्र में उपकरण बनाने के लिए भारतीय उद्योगों को साझेदारी बनाना अनिवार्य था, अब ऐसा नहीं हैं।’

टाटा-

  • जेएनयू में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अरुण कुमार का कहना हैं कि ′ विदेशी जनसमूहों के मुकाबले में सबसे ताकत के साथ टाटा का स्टील टिकेगा। उसके अलावा इनकी दर्जन भर जनसमूहों के लिए बड़ी चुनौती होगी। एविएशन (विमान चालक) के खेल में ′ विस्तारा ′ की एफडीआई के साथ शुरुआत टाटा की वैश्विक मजबूती को दिखाता है पर अभी मुकाबला ढंग से शुरू नहीं हुआ है। टाटा 10 हजार करोड़ का धंधा भी मिला गया है वह एयरबस के साथ मिलकर एयरफोर्स (हवाईसेना) के लिए 56 एयरक्राफ्ट (अपरिवर्तित हवाई जहाज) भी बना रही है। टाटा करीब आधी सदी से भारतीय सेना के साथ व्यापार कर रही है। अरुण कुमार की राय में, तकनीकी और पैसा दोनों मामलों में हमारी जनसमूहों विदेशियों के सामने कमजोर हैं। अभी भी कार की सारी तकनीकी हम उधार लेते हैं, ज्यादातर गाड़ियों में सिर्फ हमारा टायर (पहिये) होता है।

महिंद्रा-

  • केंद्र सरकार के पूर्व सचिव और अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी हिंदुस्तान मोटर्स का उदाहरण देते हैं। वह कहते हैं वह वर्षों तक एक बोझिल गाड़ी एंबेसडर बेचता रहा हैं, पर बाजार खुला तो अब वह पजेरो बेच रहा है। पजेरो में टायर (पहिये) को छोड़कर सभी पुर्जे विदेशी जनसमूह के हैं। यही चुनौती महिंद्रा के सामने ही बड़े स्तर पर है, क्योंकि मोटर तकनीकी में हम एक कदम भी नहीं चले हैं। हीरों को होंडा ने साइड (एक तरफ) कर दिया और पूरे का मालिक बन बैठी, यह एफडीआई के बाद बड़े पैमाने पर हो सकता है।
  • महिंद्रा ग्रुप के सभापति आनंद महिंद्रा के अनुसार रक्षा खेल में कई साल पहले हमने प्रवेश कर लिया था, पर करने के लिए कुछ नहीं था, पर अब हमें लगता है कि सरकार निजी केंद्र को लेकर बेहद सकारात्मक है। 2015 में जब बैकिंग क्षेत्र में 74 प्रतिशत एफडीआई हुआ था। उसके सबसे बड़े लाभार्थी कोटक महिंद्रा, यस और एक्सिस बैंक थे।

49 प्रतिशत से 100 फीसदी निवेश का असर कहां और कैसे पड़ सकता है। पांच फैक्ट्‌स (असर) निम्न हैं-

  • दो साल पहले रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किया गया तो निवेश सिर्फ 1 करोड़ का हुआ था।
  • उन्नत रक्षा उपकरणों और रक्षा को विस्तार देने के लिए 2020 तक र 7.9 लाख करोड़ की जरूरत होगी।
  • रक्षा से जुड़े आधे से अधिक उपकरण उपयोग लायक नहीं रह गए हैं।
  • भारत में 65 फीसदी रक्षा उपकरण आयात किए जाते हैं।
  • हथियारों की तादाद बढ़ाने के लिए सरकार दस सालों में र 16.5 लाख करोड़ का समूह प्रमाण ठेका देने की तैयारी में हैं। जिसको मेक इन इंडिया मिशन से जोड़ा जा रहा है।

डीआरडीओ:-

  • आर्थिक मसलों के अनुसार रोहित निगम बताते हैं कि ′ रक्षा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की पहल देश के निजी घरानों और डीआरडीओ दोंनों के लिए नुकसान दायक है। वे कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि पिछले 60 सालों में डीआरडीओ ने हथियारों और रक्षा के क्षेत्र में वैसा प्रदर्शन नहीं किया जैसा करना चाहिए था। पर 100 फीसदी एफडीआई के बाद डीआरडीओ नाम की संस्था के अस्तित्व पर ही सवाल है कि अब यह रहे ही क्यों? इसी तरह भारतीय निजी घरानों को रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए मौका नहीं दिया गया। एफडीआई के बाद न ही हमारे निजी घराने टिकेंगे और न डीआरडीओ। ऐसे में उतनी तालाबंदी होगी और बेकारों की संख्या अधिक हो जाएगी।

उपसंहार:-

  • 100 फीसदी एफडीआई विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की मंजूरी तो दे दी पर अब चुनौती यह है कि हम कितना निवेश खींच पाते हैं। सरकार ने ऑटोमैटिक रूट (अपने आप रास्ता) में एफडीआई सीमा को 49 फीसदी ही रखा है और अप्रूवल रूट (स्वीकृत रास्ता) में 100 फीसदी एफडीआई ही किया है। छोटे हथियार और बारूछ निर्माण के लिए ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय जनसमूहों के आकर्षित होने की उम्मीद हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान रक्षा क्षेत्र में महज 64 लाख रुपए ही एफडीआई आ पाया था। इस कम में केवल एक फ्रांसीसी फर्म ने ही 100 फीसदी एफडीआई का प्रस्ताव रखा था। आगे 100 फीसदी एफडीआई छूट के कारण जनसमूहों में क्या होता हैं। यह तो भविष्य ही बताएगा।

- Published/Last Modified on: July 6, 2016

News Snippets (Hindi)

Developed by: