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केंद्रीय मंत्रिमंडल के रोजगार (Jobs of Cabinet - In Hindi) [ Current News (Concise) ]

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प्रस्तावना- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार की संभावनाए सृजित करने के उद्देश्य से मॉडल शॉप्स (नमूना दुकाने) और एस्टेबिलशमेंट बिल-2016 को मंजूरी दी है। इसके तहत शॉपिंग मॉल (विशेषत: बड़े शहरों में विशाल ढका हुआ स्थान या भवन जहाँ खरीददारी की बहुत सारी दुकाने हों), सिनेमा हॉल (भवन) आदि 24 घंटे खुले रह सकेंगे। वैसे तो कई दूसरे देशों में भी 24 घंटे बाजार खुलने की व्यवस्था है पर वहां के हालात और माहौल भिन्न हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कहीं इस नई व्यवस्था से कानून-व्यवस्था को तो खतरा नहीं हो जाएगा? क्योंकि यदि आर्थिक गतिविधियां बढ़कार रोजगार सृजन कर भी लिया गया तो बहुत संभव है कि रात्रि अपराधों में बढ़ोतरी हो जाएगी। कानून-व्यवस्था का जिम्मा राज्य सरकार का है इसीलिए नए प्रावधान लागू करने के लिए राज्य सरकारों की मंजूरी को जरूरी बनाया गया है। सांस्कृतिक तौर पर हमारे लिए रात सोने और दिन काम करने के लिए बने हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि गतिविधियां बढ़ाने के नाम पर इस सांस्कृतिक सोच को ठेस पहुंचाना कहां तक उचित है? ऐसे में क्या रात्रि अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए देश में पर्याप्त तैयारियां हैं?

केंद्रीय मंत्रिमंडल-

ने शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, बैंको आदि को ग्राहकों के लिए बेहतर समय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मॉडल शॉप्स (नमूना दुकाने) और एस्टेबिलशमेंट (रेगुलेशन ऑफ इम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशन ऑफ सर्विसेज) नामक बिल 2016 को मंजूरी दी है। इसके अनुसार ये व्यावसायिक प्रतिष्ठान 24 घंटे खुले रह सकेंगे। वास्तव में केंद्र सरकार ने आर्थिक लिहाज से उदारवादी व्यवस्था उपलब्ध कराने की कोशिश की हैं।

रोजगार के अवसर-

केंद्र सरकार के इस फेसले से बिल्कुल स्पष्ट है कि वह रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश में हैं। जितना अधिक समय तक व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलेंगे, उतना ही अधिक रोजगारों में बढ़ोतरी होगी क्योंकि ज्यादा से ज्यादा कामगारों की आवश्यकता पड़ेगी। यही नहीं इससे आर्थिक गतिविधि को काफी बढ़ावा मिलने की संभावना है। जितनी अधिक देर तक लोग बाजार में रहेंगे, वे कुछ न कुछ जरूर खरीदने की कोशिश करेंगे। अर्थव्यवस्था को चक्र इसी तरह घूमता है। इसके अलावा बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है कि जिसे देर रात में अधिक फुर्सत मिल पाती है। ऐसे जो लोग रात्रि में समय के अभाव में निर्धारित समय पर कारोबार बंद होने से पूर्व बाजार नहीं जा पाते हैं। उनके लिए यह काफी सुविधाजनक हो सकता है। इसके अलावा जो शहर पर्यटन के लिहाज से समृद्ध कहे जाते हैं, उन्हें देर रात तक बाजार के खुलने की सुविधा का लाभ मिल सकता है। यही नहीं बस स्टैंड (स्थान), रेलवे स्टेशन (स्थान) और एयरपोर्ट (हवाइ अड्डा) आदि के निकट के बाजारों को भी देर रात तक खुलने की सुविधा से विशेष लाभ हो सकता हैं।

खतरा-

अकसर बाजार शाम 8 बजे से 10 बजे तक बंद होने लगते हैं। ज्यादातर शहरों में अधिकतम 11 बजे तक शॉपिंग मॉल और करीब साढ़े बारह बजे तक सिनेमा हॉल खुले रहते हैं। लेकिन, इसके बाद इनका कामकाज बंद हो जाता है गोवा या कुछ अन्य पर्यटन स्थलों पर कैसीनों और बार देर रात तक चलते रहते हैं। लेकिन, ये सब हमारी संस्कृति के लिहाज से ठीक भी नहीं समझे जाते है। देर रात तक शॉपिंग मॉल और सिनेमा हॉल, दुकाने खुलने की सुविधा मिलने से बार, रेस्त्रां भी खुलेंगे। इससे कामकाज करने वालों की सुरक्षा को लेकर खतरा बहुत बढ़ने की आशंका रहेगी। शायद, कानून व्यवस्था के मद्देनजर ही राज्य सरकारों की मंजूरी को इसमें जरूरी बनाया गया है क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार का विषय होता है। कुल मिलाकर भले ही आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के उद्देश्य से इस तरह का प्रयास किया जा रहा हो, लेकिन इससे काम की आदर्श परिस्थितियों को आघात पहुंचने की आशंका है। रात को आमतौर पर आराम का समय माना गया है। भले ही ग्राहक आने को तैयार हो लेकिन दुकानदारों के कामकाज की परिस्थितियों तो प्रभावित होगी ही। इससे आर्थिक लाभ कम बल्कि सांस्कृतिक हानि अधिक हो सकती है। यदि युवा वर्ग को आकर्षित करने के लिहाज से 24 घंटे शॉपिंग मॉल खुलने का विचार आया हो तो यह गलत ही है। क्योंकि आज का युवा वर्ग तकनीक सेवा है और बहुत सी खरीददारी देर रात की बजाय ऑनलाइन (खुली रेखा) करना पसंद करता है। यहां तक खाने-पीने की वस्तुएं भी ऑनलाइन मिल जाती हैं। आपात परिस्थितियों के लिए तो इंतजाम बहुत हैं। इसलिए ज्यादा उम्मीदें बांधना आसान नहीं हैं।

बढ़ेंगे रोजगार-

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार पर रोजगार देने का दबाव बढ़ रहा है। इसलिए ऐसे नए कदम उठाया जाना रोजगार सृजन से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में सरकार ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नियमों में ढिलाई दी थी। सरकार का ध्यान लेबर इंटेंसिव (मजदूर वर्ग तीव्र/गहन) प्रावधानों पर हैं।

चमकेगा खुदारा बाजार-

24 घंटे मॉल्स खोल पाने की इजाजत के बाद खुदरा व्यापारी अपने हिसाब से दुकाने खोल पाएंगे। इस कानून से हजारों नौकरी की राह खुलेगी। देशभर में खुदरा व्यापार चमकेगा क्योंकि ग्राहक अपनी सहुलियत से खरीददारी कर सकेंगे।

                                                                                                                    कृष अय्यर, सीईओ, वॉलमार्ट इंडिया

राज्यों के लिए रेडीमेड (बनाबनाया/तैयार)-

हम इसेफौरन राज्यों को भेज देंगे। मॉडल लॉ राज्य सरकारो के लिए एक रेडीमेड (तैयार) बिल होगा। इसे अलग-अलग मंत्रालयों और मंत्रिमंडल से कई दौर की सलाह-मशविरा के बाद तैयार किया गया है।

                                                                                                                         शंकर अग्रवाल, केंद्रीय श्रम सचिव

परीक्षा:-

दिन और रात काम करने की व्यवस्था हमारे देश में पहले से ही मौजूद हैं। यह बदलाव शुरू हो चुका है। कॉल (फोन करना) सेंटर (केंद्र) में 24 घंटे काम चलता हैं। वहां महिलाएं भी काम करती हैं। निजी सेक्टर उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखता है। अब केंद्र सरकार ने मॉडल शॉप्स (नमूना दुकाने) और एस्टेबिलशमेंट (रेगुलेशन ऑफ इम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशन ऑफ सर्विसेज) बिल 2016 को मंजूरी दी है। हालांकि इसे लागू करना राज्य सरकारों पर निर्भर करेगा कि वे इसे कितना हकीकत बना पाती हैं?

मुद्दा:-

इसमें बड़ा मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा से ही जुड़ा है, क्योंकि भारत में महिलाओं का रात में कार्य करना सुरक्षित नहीं माना जाता हैं। शाम होते ही नौकरीपेशा महिलाएं घर पहुंचने लगती हैं। यह एक समस्या है। इसलिए इस बिल में कहा गया है कि राज्यों को महिलाओं के लिए एक कार्यस्थल पर पुख्ता इंतजाम करने होंगे। जिम्मेदारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा है कि सबसे पहले तो उन्हें घर से लाने और ले जाने की अनिवार्य सुरक्षित व्यवस्था हो। उनके रात में कार्य करने के लिए जरूरी माहौल हो, जरूरत पड़ने पर उनके लिए आराम का कमरा, टायलेट रूम (कमरा) की सही व्यवस्था हो। रात में नौकरी करने वाली महिलाओं की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य को करनी होगी।

मॉडल लॉ (नमूना कानून):-

वैसे एसे मॉडल लॉ (नमूना कानून) अलग-अलग क्षेत्र में बनाए जाते रहे हैं पर उनका सही क्रियांवयन नहीं हो पाता है। बड़े शहरों में तो यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। क्योंकि शहरी समाज में रात्रिकालीन गतिविधियों का चलन है। होटल, विमानचालक सेक्टर में सभी दिन- रात काम करते ही हैं हालांकि हमारे देश में देर रात शॉपिंग का चलन बहुत ज्यादा नहीं है। पर यह शुरू हो रहा है। इससे नौकरी व व्यापार में कोई बड़ी बढ़ोतरी हो जाएगी, यह अभी बताना मुश्किल है।

इस बिल में कर्मचारियों के श्रम अधिकार पूरे करने पर भी जोर दिया गया हैं। ई-कामर्स कंपनियों (ई वाणिज्य जनसमूह) को मजदूर के कानूनों में लाया गया है। वेयरहाउस (मालगोदाम), गोदाम में काम करने वाले श्रमिकों के अधिकार भी सुरक्षित होंगे।

                                                                        पंरजॉय गुहा ठाकुरता, संपादक, इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली

उपसंहार-कुला मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि रोजगार बढ़ाने की दृष्टि से 24 घंटे व्यापारी प्रतिष्ठान खुले रहना यह बात एक तरफ तो अच्छी बात हैं पर दूसरी ओर अगर हम देगें यह कानून के लिए ओर भी जिम्मेदारी वाला कार्य हो जाएगा। इसलिए अगर इस के लाभ हैं तो इसमें नुकसान भी है। इसलिए प्रस्तुत बिल के बारे में पुन: विचार करना बहुत आवश्यक हैं।

- Published on: August 17, 2016