भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की अमेरिका यात्रा (Modi's US visit in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 26 जून को ’हजार संभावनाओं वाले देश’ अमरीका की यात्रा पर रहेंगे। वे अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात भी करेंगे। मोदी की पिछली अमरीका यात्रा के बाद से हालात काफी बदल गए हैं।’ अमरीका फर्स्ट’ का नारा वहां चल रहा है। एच-1 बी वीजा का मुद्दा सीधे तौर पर हमसे जुड़ा हुआ है। साथ ही अमरीका में भारतवंशियों पर नस्लीय हमलों का भी मसला है। मोदी को इस बार अमरीका दौरे में चलना होगा ’ट्रंप कार्ड’। ओबामा दौर के बाद के समीकरणों में मोदी को ट्रंप का मुकाबला करना होगा। इसमें कूटनीतिक समझदारी और राजनीतिक चातुर्य दोनों की परीक्षा भी होगी।

रेमिटेंस (प्रेषण): - भारत में 11 अरब डॉलर की रेमिटेंस भेजी गई। 60 लाख डॉलर की रेमिटेंस भेजी गई भारत से अमरीका को।

पाकिस्तान और चीन: - प्रधानमंत्री मोदी की अमरीका यात्रा से काफी आशाएं हैं। जिन मुद्दों में दोनों देशों को कुछ गलतफहमी है या कोई दिक्कत है, उसे दूर करने पर बातचीत हो सकती है। भारत का जोर आतंकवाद और सुरक्षा पर रहेगा। भारत चाहता है कि अमरीका, पाकिस्तान पर आतंकवाद के खात्मे का दबाव डाले। भारत यह कहता रहा है कि आतंकवाद की जड़ पाकिस्तान में है। अफगानिस्तान में हो रहे आतंकी हमलों के लिए अफगानिस्तान, पाकि को दोषी ठहरा रहा है। अफगान सरकार का आरोप है कि हमले करने वाले तालिबान और हक्कानी नेटवर्क (जाली तंत्र) को पाक का समर्थन मिल, रहा है। इससे अमरीका पर दबाव बढ़ रहा है कि वह पाक पर लगाम कसे। भारत की न्यूक्लियर (नाभिकीय) सप्लायर्स (आपूर्ति) ग्रुप (समूह) (एनएसजी) की सदस्यता में चीन अडंगा लगा लगा रहा हैं। यह मुद्दा भी भारत की तरफ से उठेगा और भारत चाहेगा कि अमरीका, चीन को भारत की सदस्यता में अडंगा न डालने के लिए राजी करे। जलवायु परिवर्तन के पेरिस समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ विवाद हैं। ट्रंप ने इसे रद्द करते हुए कहा कि भारत ने इस समझौते के बदले अरबों डॉलर की राशि ली है। यह बात सरासर गलत है। शायद उन्हें इस बारे में गलत जानकारी दी गई है। अमरीका के उपराष्ट्रपति ने भी कहा कि भारत भी अब पेरिस समझौते से आजाद है और उसके नियम-कानून मानने के लिए बाध्य नहीं है। इसके अलावा भारत को अमरीका के वीजा (आज्ञापत्र) नियमों के कुछ संशोधनों पर आपत्ति है। इन मतभेद वाले मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है और मतभेद या कुछ गलतफहमियां हैं, उन्हें दूर किया जा सकता है। पिछले 20 - 25 वर्ष से दोनों देशों के संबंध काफी मजबूत पाए है। अमरीका, भारत के रूप में नया रणनीतिक साझेदार देख रहा है। दोनों देशों की साझेदारी लंबे समय तक चल सकती है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच जिन मुद्दों पर विवाद है, वे जल्द ही सुलझा लिए जाएंगे। यात्रा के दौरान हथियारों की खरीद से जुड़े और तकनीकी हस्तांतरण से जुड़े कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। भारत हथियारों की खरीद के साथ-साथ उसकी तकनीक का हस्तांतरण भी चाहता है जिससे आगे चलकर वह हथियारों की तकनीक के मामलें में आत्मनिर्भर बन सके।

वैश्विक महाशक्ति: - प्रणानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक महाशक्ति यानी अमरीका के साथ भारत के संबंधों को प्राथमिकता दी है। बराक ओबामा के साथ उनके व्यक्तिगत रूप से भी काफी अच्छे संबंध रहे हैं। मोदी की अमरीका यात्रा सुर्खियों में रही है।

  • विजिट (देखने जाना) -1 26 से 30 सितंबर, 2014 को मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री पहली बार अमरीका की यात्री की। यूएन में हिन्दी में भाषण दिया। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आहृान किया। ग्लोबल (विश्वव्यापी) सिटिजन (स्थानिक) पाकर् में अभिनेता ह्यू जैकमैन से मिले। मेडिसिन (दवाई) स्क्वॉयर (जमीदार) पार्क में संबोधन दिया। व्हाइट हाउस में तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा ने उनका गुजराती में ’केम छो’ बोल स्वागत किया।
  • विजिट-2 24 से 28 सितंबर, 2015 में यूएन जनरल (साधारण) असेंबली (सभा) और सिलिकॉन वैली की यात्रा पर अमरीका गए। सतत विकास पर यूएन में भाषण दिया। जी-4 देशों की बैठक का आयोजन किया। सिलिकॉन वैली में ’इंडिया (भारत) -यूएस स्टार्टअप (उद्धाटन) कनेक्ट’ (जोड़ना) में दिग्गजों से की मुलाकात। फेसबुक के जुकरबर्ग के साथ मुलाकात में सवाल-जवाब चर्चाओं में रहे।
  • विजिट-3 31 मार्च से 1 अप्रैल, 2016 में न्यूक्लियर (नाभिकीय) सिक्योरिटी (सुरक्षा) समिट (सम्मेलन) में भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात कर दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे से निपटने के लिए एक वैश्विक नीति और समूह बनाने की अपील की। मोदी ने पाकिस्तान के परमाणु खतरे को भी चिहृित किया।
  • विजिट-4 6 से 8 जून, 2016 में मोदी ने चौथी बार बतौर पीएम अमरीका की राजकीय यात्रा की। मोदी दूसरी बार व्हाइट हाउस गए। वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद और आर्थिक प्रगति के बारे में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से चर्चा की। सामयिक विषय सतत विकास के बारे में भी मुद्दा आधारित बातचीत की। मोदी ने अमरीकी कांग्रेस को भी संबोधित किया।

अहम मसले: -

  1. एच-1 बी वीजा- अमरीका में वर्तमान में लगभग 1, 00, 000 से भी अधिक आईटी प्रोफेशनल्स (व्यावसायिक) काम कर रहे हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1 बी वीजा की शर्तो को और कड़ा बनाने की दिशा में कार्रवाई की है। साथ ही एच-1 बी वीजा जारी करने की संख्या को कम करने का भी ऐलान किया हैं।
  2. नस्लवाद-अमरीका में हाल में नस्लवादी घटनाओं में कुछ भारतीयों को जान गंवानी पड़ी है। भारतीय विशेषज्ञों का तर्क है कि ट्रंप की श्वेत प्रभुता वाली विचारधारा से वहां रहने वाले भारतवंशियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जबकि भारतीय अमरीका के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। भारतीयों की सकरात्मक छवि बनानी होगी।
  3. रक्षा क्षेत्र-अमरीका की लॉकहीड मार्टिन और भारत के टाटा ग्रुप (समूह) ने हाल ही में एफ-16 फाइटर प्लेन (लड़ाकू विमान) बनाने का रक्षा संबंधी अहम समझौता किया है जबकि माना जा रहा था कि ट्रंप के अमरीका फर्स्ट (पहली) की नीति के चलते ये सौदा रद्द हो सकता है। रक्षा के अन्य करार मोदी और ट्रंप के बीच हो सकते हैं।
  4. पेरिस समझौता-राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अमरीका को बाहर निकालने की घोषणा की है। क्लाइमेट (वातावरण) चेंज (परिवर्तन) पर अमरीका जैसे बड़े देश के निकलने से प्रतिकूल असर पड़ेगा। ट्रंप का कहना है कि भारत और चीन जैस देश विकसित देशों से अनुदान प्राप्त करे हैं।
  5. द. एशिया-ट्रंप प्रशासन ने अमरीका की वैश्विक नीति में बदलाव करते हुए स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता का लक्ष्य बनाया है। इससे भारत को दक्षिण एशिया में अपना दबदबा बढ़ाने में आसानी होगी। एशिया में भी भारत अहम भूमिका अदा कर सकेगा। जियोपॉलिटिकल (भू राजनीतिक) रणनीति के तहत ट्रंप के साथ मोदी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीति कर सकते हैं।
  6. आतंकवाद-आतंकवाद पर जीरो (लक्ष्य साधना) टॉलरेस की नीति पर दोनों देश कायम हैं। मोदी की अमरीका यात्रा से पहले व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के अनुसार दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझा रूप से कार्य करने को प्रतिबद्ध हैं। लेकिन एक ओर जहां ट्रंप आईएस के सफाए पर कायम हैं तो मोदी सीमापार आतंकवाद को वरीयता देंगे।
  7. अन्य मसले: -इन मुद्दों पर हो सकती है बातचीत-एशिया-पैसिफिक (शांतकर) रीजन (कारण) और दुनिया में स्थिरता व सुरक्षा मजबूत करना, आतंकवाद, इकोनॉमिक (अर्थशास्त्र) ग्रोथ (विस्तार) बढ़ाना, भारतीय फौज का तेजी से आधुनिकीकरण करना, सिविल (सभ्य) न्यूक्लियर (नाभकीय) डील (समझौता), मेक (बनाना) इन (अंदर) इंडिया (भारत) और भारत के व्यापार के बारे में कर सकते हैं चर्चा।

भारत और अमरीका: - भारत और अमरीका में स्थानीयता का नारा बुलंद है। एक ओर जहां अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमरीका फर्स्ट (पहली) के समर्थक हैं वहीं भारतीय प्रधानमंत्री मोदी भी इंडिया (भारत) फर्स्ट (पहली) के हिमायती हैं। ट्रंप ने अमरीकी उद्यमियों को स्वदेश में ज्यादा निवेश कर युवाओं को रोजगार प्रदान करने का आहृान किया है। मोदी अपनी अमरीकी यात्रा के दौरान एपल, वॉलमार्ट, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और कैटरपिलर जैसी दिग्गज कंपनियों (व्यापारिक संस्था या संगठन) के मुखियाओं से मुलाकात कर उन्हें भारत में निवेश बढ़ानें के लिए आमंत्रित करेंगे। मोदी का वर्जीनिया में भारतवंशियों को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। ’मेक (बनाना) इन (अंदर) इंडिया (भारत) ’ के लिए निवेश जुटाना अहम लक्ष्य होगा।

विशेषज्ञों के विचार: -निम्न हैं-

ट्रंप के -’अमरीका फर्स्ट’ और मोदी के ’मेक इन इंडिया के बीच कैसे तालमेल बैठता है। यह इस यात्रा के दौरान पता लग जाएगा।

प्रो. चिंतामणि महापात्रा, भारत-अमरीका मामलों के विशेषज्ञ

  • प्रधानमंत्री मोदी की अमरीका यात्रा पिछली यात्राओं से कुछ अलग हो सकती है। क्योंकि वर्तमान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से अलग हैं। वे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ओबामा की नीतियों को बदल रहे हैं। चाहे वो स्वास्थ्य नीति हो या विदेश नीति। ट्रंप ने नाटो, चीन, उत्तरी कोरिया के प्रति भी विदेश नीति में बदलाव किया है। मोदी जब पिछली बार अमरीका गए थे तो मेडिसन स्क्वॉयर में भारतवंशियों के लिए बड़ा आयोजन किया था, लेकिन अबकी बार वैसा समारोह नहीं हो पाएगा। दोनों देशों के बीच कुछ ऐसे समान मुद्दे हैं जिन पर सहमति बन सकती है। आतंकवाद भी एक ऐसा ही मुद्दा है। मोदी अमरीका में अपनी हर यात्रा के दौरान आतंकवाद का मुद्दा उठाते रहे हैं तो ट्रंप के एजेंडे (कार्यसूची) में भी आतंकवाद प्रमुख मुद्दा रहा है। इस मुद्दे पर दोनों देशो के बीच किसी प्रकार की सहमति बन सकती है। दूसरा, वीजा (आज्ञापत्र) पॉलिसी (राजनीतिक) पर दोनों देशों के बीच सकरात्मक बातचीत हो सकती है। ट्रंप प्रशासन को भी अब समझ में आने लग गया है कि टैक्नोक्रेट (तकनीकी तंत्री/विज्ञान विशेषज्ञ) और उच्च कौशल वाले लोगों का आना अमरीका के हित में होगा। दोनों देश चाहते हैं कि उनके यहां लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिलें। ट्रंप की ’अमरीका फर्स्ट’ की नीति है तो मोदी ’मेक इन इंडिया’ चाह रहे है।
  • अमरीका की कई कंपनियों (व्यापारिक संस्था या संगठन) ने भारत में निवेश कर रखा तो भारत की भी कुछ कंपनियां वहांँ रोजगार दे रही हैं। ऐसे में किसी निवेश संबंधी समझौते पर सहमति बन सकती है। शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद और आतंक के खिलाफ युद्ध के दौरान दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनो देशोंं ंके बीच रणनीतिक साझेदारी विकसित हुई है। ओबामा के कार्यकाल में तो दोनोंं देशों के संबंध और भी मजबूत हुए हैं। अब ये सब कुछ ट्रंप के रवैये पर निर्भर करेगा। ट्रंप के रवैये को लेकर ज्यादा पूर्व अनुमान नहीं लगाए जा सकता हैं। ट्रंप के रवैये का प्रधनमंत्री मोदी को भी पता है अैार वे इस बात से सतर्क होंगे यात्रा के दौरान मोदी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को लेकर बातचीत कर सकतें हैं। वर्ष 2004 में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नॉन-नाटो सहयोगी बनाया। इससे पाकिस्तान को अमरीका से आर्थिक मदद मिलने लगी। अब पाकिस्तान का नॉन-नाटो सहयोगी का दर्जा खत्म करने पर बातचीत चल रही है। पाकिस्तान, अमरीका से आतंकवाद को खत्म करने के नाम पर सहायता लेकर भी अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन कर रहा है।
  • दोनों देशों एवं नेताओें के बीच काफी समानताएँ हैं जिससे यात्रा के सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद की जानी चाहिए।

डॉ. मनन दव्वेदी, ’सरन्डिपिटी (आकस्मिक लाभवृत्ति) एन्ड (और) (यह) अमेरिकन ड्रीम (सपना) पुस्तक के लेखक

  • भारत- अमरिका के बीच अच्छे संबंध है और इाेनों में काफी समानताएं भी है। दोनो देशें में लोकतांत्रिक व्यवस्था उदार अर्थव्यवस्था जैसी काफी समानताएँ है। ट्रंप- मोदी दोनो ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को तरजीह दी है। इसलिए दोनो के बीच अच्छा तालमेल हो सकता है और यात्रा से सकारात्मक नतीजो की उम्मीद की जानी चाहिए। दोनो देशे ंकी बातचीत में व्यापार और आतंकवाद मुख्य मुद्दे हो सकते है। दोनो देशे ने वर्ष 2020 तक आपंसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा हुआ है लेकिन अभी तक यह 100 अरब डॉलर तक ही पहुँचा है। व्यापार में कई अड़चने है जिन्हे दूर करने की जरूरत है। इसमें दव्पक्षीय निवेश संधी (बीआईटी) सबसे महत्वपूर्ण है। भारत की कई देशों के साथ बीआईटी है। लेकिन अमेरिका के साथ अभी तक नहीं हो पाई है। अमरिका को भारत के कुछ कानूनों को लेकर आपत्ति है जिन पर बात अटकी हुई है। इस यात्रा के दौरान इस पर बात हो सकती है। दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है आतंकवाद। भले ही हम माने या न माने पर वास्तविकता तो यही है कि इस मुद्दे पर अमरीका का पाकिस्तान के प्रति रुख ज्यादा कड़ा नहीं होता है।
  • इसका मुख्य कारण पाकिस्तान की भू-रणनीतिक स्थिति के चलते ही पाकिस्तान आज भी अमरीका के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। अमरीका के सैनिक अफगानिस्तान में हैं और वह वहां शांति चाह रहा है। अफगानिस्तान के सहयोग के बिना स्थापित करना मुश्किल है। इसलिए अमरीका, पाकिस्तान के प्रति ज्यादा कड़ा रुख नहीं अपनाएगा, भले ही ओबामा ने पाक-अफगान क्षेत्र का धरती का सबसे खतरनाक क्षेत्र बताया था। भारत को अमरीका के प्रति इस बात के लिए रुख अपनाना होगा कि वह आतंकवाद को रोकने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए। दरअसल, दिक्कत यह भी रही है कि अमरीका भारत-अमरीका और पाक-अमरीका संबंधों को जुड़ा हुआ मानता है। इसमें बदलाव लाने की जरूरत है अमरीका से भारत और पाकिस्तान के संबंध जुड़े हुए नहीं बल्कि अलग-अलग हैं और भारत एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभर रहा है जिसका अपना इतिहास और सभ्यता रही है। इसके साथ ही दोनों देशों का कुछ मुद्दों पर रवैया अलग-अलग है। वीजा नियमों को लेकर दोनों देशों में बातचीत हो सकती है। इसके साथ ही जलवायु परिर्वतन के पेरिस समझौते पर भी बातचीत की संभावना है जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया है।
  • ट्रंप प्रशासन के एक अफसर ने कहा कि ट्रंप भी मानते है कि भारत दुनिया में बेहतरी लाने के लिए ताकत रखता है, लिहाजा उसके साथ रिश्ते रखना बेहद अहम हो जाता है। इसके ठीक पहले प्रशासन ने उन खबरों को खंडन किया है जिनमें कहा गया है कि यूएस भारत की अनदेखी कर रहा है।

समय: - जब अमरीकी राष्ट्रपति से मोदी जी मिलेंगे तो दोनो नेताओं के पास एक दूसरे को जानने, दोस्ती बनाने व दव्पक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए 5 घ्टोंं का समय होगा।

पुर्तगाल: -मोदी जी पुर्तगाल के पीएम एंटोनियो कोस्टा से मिले। इस दौरान भारत और पुर्तगाल के बीच 11 करार हुए। मोदी ने कहा-भारत, पुर्तगाल आतंकवाद के खिलाफ सहयोग के लिए सहमत हैं। 17 साल बाद पहली बार होगा जब कोई भारतीय पीएम पुर्तमाल पहुंचा।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों पुर्तगाल अमेरिका और नीदरलेंड की यात्रा के पहले चरण में लिस्बन पहुँचे। उन्होने पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात कीं। मोदी दव्पक्षीय दौरे पर पुर्तगाल जाने वाले पहले भारतीय पीएम है। अटल बिहार वाजपेयी 2000 में पुर्तगाल गए थे। पर वह दव्पक्षीय यात्रा नहीं थी।
  • मोदी पुर्तगाल पहुँचने के करीब एक घंटे बाद पीएम कोस्टा से मिले। दोनो नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद रोकने के प्रयास के मुद्दो पर बात की। पुर्तगाल ने 2005 में आतंकी अबु सलेम और मौनिका बेदी को भारत प्रत्यर्पित किया था। यह किसी यूरोपीय देश से भारत को होने वाला पहला प्रत्यपर्ण था। यह मोदी की यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। इस बार मोदी का पूरा फोकस कारोबार पर है। लिहाजा भारतीय मूल के लोगों के साथ कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं होगा। वे मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट (भारत के अंदर बनाना परियोजना) को बढ़ाने के लिए अमेरिका के 20 बड़े बिजनेसमैन (व्यापारी) से मिलेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी पहली मुलाकात होगी।
  • ’मैं ट्रंप के न्योते पर वॉशिंगटन की यात्रा पर जा रहा हूं। हमारे बीच टेलीफोन पर बात हुई है। मैं भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को लेकर आशावादी हूं।’

नरेन्द्र मोदी

सौदा-अमेरिका, भारत को 22 गार्जियन ड्रोन की बिक्री को मंजूरी दे सकता है। ये सौदा दो अरब डॉलर का होगा। यह ऐसी पहली डील है जो अमेरिका किसी गैर नाटो सदस्य देश के साथ करेगा।

आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक तरक्की को बढ़ावा देने, आर्थिक सुधार और सुरक्षा के मामले में सहयोग, दोनों देशों के साझा मुद्दे हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भी बात होगी।

वर्ल्ड मीडिया (विश्व संचार माध्यम) -

(यह) इकोनॉमिस्ट (अर्थशास्त्रीय) (यूएस) -जब मोदी पीएम बने थे तब उनकी छवि आर्थिक सुधारक की थी। पर तीन साल में मोदी ने ऐसा कोई आर्थिक सुधार नहीं किया जिसकी उम्मीद की जा रही थी। एक तरह से उन्होंने मौका गंवा दिया है।

वाशिंगटन पोस्ट (पद) (यूएस) -दोनों ही देश ट्रंप-मोदी मुलाकात से पहले ज्यादा उम्मीदें नहीं दिखा रहें हैं। वजह साफ है। अगर पहली मुलाकात में बड़े करार न हो तो यह कहा जा सके कि अभी तो संबंधों की शुरुआत हुई हैं।

डॉन (पाकिस्तान) - इस दौरे से दोनों के रक्षा संबंध मजबूत होने के संकेत दिख रहे हैं। अमेरिका भारत को 22 गार्जियन ड्रोन देगाा। हालांकि, दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर अनिश्चितता बरकरार है।

ग्लोबल (विश्वव्यापी) टाइम्स (चीन) -भारत की जीडीपी तेजी से बढ़ रही है। भारत को अमरीकी सहयोग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसलिए मोदी अमेरिका से संबंध बढ़ाने के लिए इच्छुक हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स-ने पॉलिटिकल (राजनीतिक) साइटिंस्ट (विशेषज्ञ) के हवाले से लिखा है कि मोदी जी और ट्रंप की मुलाकात उम्मीद से बेहतर रही। भारतीय डिप्लोमेट (कूटनीतिज्ञ) राजीव डोगरा कहा कहना है कि कुछ लोग इस मुलकाात को लेकर चिंतिंत थे। पर ट्रपं ने भारत के साथ चलने के लिए अपने तरीके से रास्ता निकाल लिया हैं।

शिखर वार्ता: -हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर वार्ता में, आतंकवाद पर आपसी तालमेल को इसकी सबसे बड़ी सफलता बताया जा रहा है। मोदी, राष्ट्रपति ट्रंप को व्हाइट हाउस में मिलने वाले विश्व के पांचवे विदेशी नेता हैं पर वे पहले ऐसे नेता हैं जिनके प्रतिनिधिमंडल के लिए व्हाइट हाउस में ही रात्रिभोजन आयोजित किया गया। दूसरा, दोनों पक्ष में आधिकारिक वार्तालाप से पहले ही अमरीका के विदेश मंत्रालय ने हिजबुल मुताहिद्दीन के सरगाना सैयद सलाहुद्दीन, जिसने कश्मीर को भारतीय सेना का कब्रिस्तान बनाने की बात की थी, उसे विशेषतौर पर अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया। बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल विस्तार से भारत-अमरीका के बीच बढ़ती घनिष्ठता पर जोर दिया बल्कि साफ शब्दों में यह भी कहा के दोनों देश मिलकर उग्र इस्लामिक आतंकवाद को नेस्तनाबूद कर देंगे। यह टिप्पणी पाकिस्तान के लिए कड़ा संदंश तो है ही और साथ में इसका इशारा चीन की तरफ भी है। पिछले दो वर्षो से चीन का रवैया भारत की आतंकवाद से लड़ने की कोशिशों में एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। इसके साथ इसका इशारा कश्मीर में चल रहे आतंकवाद की ओर भी है। पिछले साल आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर (सेनापति) बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी निरंतर हिंसाग्रस्त रही है। सैयद सलाहुद्दीन 1990 से जब वह हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर था, भारत के लिए बड़ा सिरदर्द रहा है।

  • आज वह पाकिस्तान में यूनाइटेड (संयुक्त) जिहाद काउंसिल (परिषद) का मुखिया है और भारत विरोधी सभी आतंकियों को जोड़ने में लगा हुआ है। इस माहौल में अमरीका का उसको विशेष तौर पर अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करना भारत की आतंकवाद से लड़ाई में जरूर गर्मजोशी ला सकता है पर भारत को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अमरीका ने कई साल पहले, जमात-उद-दावा का गठन करने वाले हाफिज सईद को भी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया था। उस पर तो किसी विश्वसनीय सूचना देने वाले को एक करोड़ डॉलर (अमरीका मुद्रा) का इनाम भी घोषित हुआ था। लेकिन, हाफिज सईद पाकिस्तान में न केवल खुला घूमता है बल्कि बड़ी-बड़ी रैलियों में भाषण देता भी नजर आता है जहां तक सैयद सलाहुद्दीन की बात है तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (संस्था) इंटर (अंतर) सर्विसेज (सेवा) इंटेलीजेंस (बुद्धिमता) (आईएसआई) के साथ उसकी पहले से ही अनबन रही है। भारत की रिसर्च (खोज) एंड (और) एनालिसिस (विश्लेषण करना) विंग (उड़ने) के पूर्व प्रमुख ए. एस. दौलत ने अपनी पुस्तक ’कश्मीर: द वाजपेयी ईयर्स’ (साल) में इसका उल्लेख किया हैं कि एक समय था जब सलाहुद्दीन भारत लौटना चाहता था और आत्मसमर्पण का संदेश खुद ही भिजवाया करता था। ऐसे में अमरीका का केवल व्यक्तिगत तौर पर सलाहुद्दीन को आतंकी घोषित करना और हिजबुल मुजाहिद्दीन को आतंकी संगठन घोषित नहीं करना, आईएसआई की किसी और को हिजबुल मुजाहिद्दीन का मुखिया बनाने की कोशिश को ही सरल बनाता है। इसलिए अमरीकी राष्ट्रपति के बयान को इसके सीमित संदर्भ में समझना जरूरी है।
  • शायद बड़ी सफलता इसमें न देखकर मोदी और ट्रंप की गर्मजोशी भरे तालमेल में ढूंढना बेहतर होगा। जनवरी से लेकर पिछले चार बड़े नेताओं की व्हाइट हाउस की यात्रा में शायद यह सर्वाधिक गर्मजोशी भरी नजर आई। इसका श्रेय भारतीय कूटनीति और प्रधानमंत्री के सलाहकारों को मिलना चाहिए कि इस शिखर वार्ता में कहीं कोई अटपटापन नजर नहीं आया। प्रधानमंत्री की भाषा व व्यवहार में संयम के साथ सीमितता रही। वे भारत के इतिहास व संस्कृति को दर्शाना नहीं भूलते। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के रुझानों के मद्देनजर, उन्हें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के निधन के शताब्दी वर्ष की याद में 1965 में भारत में जारी डाक टिकट का संग्रह भेंट किया। भारत अमरीका से 100 से ज्यादा यात्री विमान खरीदने और कतर में बदलते हालत के परिप्रेक्ष्य में अमरीका की प्राकृतिक गैस खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। यह राष्ट्रपति ट्रंप की अमरीका पहली नीति के तहत रोजगार सृजन में सहायक होगे। प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत व इसके साथ अमरीकी पहली नीति के लिए भारतीय योगदान का प्रदर्शन, इस शिखर वार्ता का विशेष आकर्षण रहा। इस यात्रा के अंतर में जारी’ अमरीका-भारत: समृद्धता के लिए सहयोग’ न केवल भारत की आतंकवाद से लड़ने, आर्थिक विकास व संप्रभुता की नीतियों का समर्थन करता है बल्कि देश के क्षेत्रीय नेतृत्व पर भी जोर देता है।

प्रो. स्वर्ण सिंह, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार, जेएनयू के सेंटर (केन्द्र) फॉर (के लिये) इंटरनेशल (अंतरराष्ट्रीय) पॉलिटिक्स (राजनीतिक) , ऑर्गेनाइजेशन (संगठन) एंड (और) डिस्आर्मामेंट (नि: शस्त्रीकरण) विभाग में अध्यापन का लंबा अनुभव।

भारत-अमरीका संबंध: -मोदी ने वॉल (दीवार) स्ट्रीट (गली) जर्नल में ’फारॅ (के लिये) द (यह) यूएस एंड (और) इंडिया (भारत), ए (एक) कन्वर्जेंस (अभिसरण) ऑफ (का) इंटरेस्ट्‌स एंड (और) वैल्यूज (मूल्य) ’ शीर्षक से आर्टिकल लिखांं है। इसमें भारत और अमेरिकी संबंधों पर जोर दिया है। जो निम्न हैं-

कारोबार -दोनों देश तेजी से एक-दूसरे की इकोनॉमी (अर्थशास्त्र) को रफ्तार दे रहे हैं। हमारी साझेदारी कामयाबी और विकास का विजन (दृष्टि) गाइड (मार्गदर्शन) है। 15 बिलियन (एक अरब) डॉलर (अमरीका मुद्रा) के निवेश से भारतीय कंपनियां (संघ) अमेरिका के मैन्युफैक्चुरिंग (निर्माण) और सर्विस (सेवा) सेक्टर (क्षेत्र) में मूल्यों को जोड़ रही हैं। अमेरिकी कंपनियों (संघों) ने भारत में 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा के निवेश से अपनी ग्लोबल (विश्वव्यापी) ग्रोथ (विस्तार) को और मजबूत किया हैं।

जीएसटी-अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में निवेश के लिए मौके ही मौके-अमेरिकी कंपनियों को निवेश के लिए न्यौता देते हुए मोदी ने कहा भारत में 1 जुलाई से जीएसटी लागू हो जाएगा। 100 स्मार्ट (आकर्षक) शहरों की योजना के तहत बंदरगाहों का विकास, एयरपोर्ट (हवाईअड्‌डे), सड़क और रेल यातायात का विकास किया जाएगा। ये सिर्फ वादे नहीं हैं बल्कि ये भारत-अमेरिका साझेदारी का परिणाम भी है।

आतंकवाद-भारत के पास आतंक से लड़ने का 40 साल तक का तर्जुबा। रक्षा का क्षेत्र दोनों देशों को फायदा पहुंचाने वाला है। भारत और अमरीका दोनों समाज और दुनिया को आतंकवाद, कट्‌टरपंथ से सुरक्षित करना चाहते हैं। भारत के पास आतंकवाद से लड़ने का चार दशक का अनुभव है ओर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम अमेरिका के साथ हैं।

प्रवासी भारतीय-30 लाख भारतीयों का अमेरिकी समाज में बड़ा योगदान है। इन्होंने हमारे समाज में विशेष योगदान दिया है। पिछले दो दशक से हमारे बीच परस्पर सुरक्षा तथा विकास को लेकर दोनों देशों बीच संबंधों की फलदायी यात्रा रही है। अगले कुछ दशक में इसमें और बढ़ोत्तरी होगी।

पिछली बार यूएस कांग्रेस में मैंने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते पुरानी झिझक से उबर गए हैं। एक साल बाद में फिर अमेरिका लौटा हूं और दोनों देशों के पहले से अधिक मजबूती के साथ काम करने के प्रति आश्वस्त हूं।

-नरेन्द्र मोदी

समानताएं: -ट्रंप और मोदी में काफी कुछ समानता है। दोनों अपने देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाना चाहते हैं। समानताए निम्न हैं-

यूएसए टूडे (आज) अखबार ने अमरीका-भारत में चार समानताएं बताई है

  1. दोनों देश दुनिया के बड़े गणतंत्र हैं।
  2. दोनों को आलोचक मुस्लिम विरोधी मानते हैं।
  3. अमरिकी कंपनियों में बहुत संख्या में भारतीय हैं।
  4. दोनों देश चीन को खतरा मानते हैं।

मोदी महान प्रधानमंत्री हैं। मैं उनके बारे में पढ़ता रहता हूं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का स्वागत करना सम्मान की बात है। आप व्हाइट हाउस के सच्चे दोस्त हैं।

भारत दुनिया की तेजी से बढ़ रही इकोनॉमी (अर्थशास्त्र) है। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को ढेर सारी बधाइयां। मै मोदी को सैल्यूट (सलाम) करता हूं। मैं और मोदी ही सोशल (सामाजिक) मीडिया (संचार माध्यम) के वर्ल्ड (विश्व) लीडर्स (नेता) हैं।

-अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

मुझे भरोसा है कि ट्रंप के महान नेतृत्व में हमारे रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती, सकरात्मकता और ऊंचाई मिलेगी। आपका कारोबारी जगत का व्यक्तित्व अनुभव हमारे सहयोग को आगे बढ़ाने में और मददगार साबित होगा।

-नरेन्द्र मोदी जी

पत्र: -मोदी से मुलाकात से पहले अमंरिका के रिपब्लिकन (गणतंत्रात्मक) और डेमोक्रेट (लोकतंत्रवादी व्यक्ति) सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को पत्र लिखा है। उन्होने कहा कि भारत व्यापार और निवेश से जुड़ी शर्तो को सरल करने में नाकाम रहा है। वह अपने बाज़ार खेलने के लिए सही रिफॉर्म्स नहीं कर सका है। इसलिए ट्रम्प को मोदी के सामने इन दोनो विषयों को प्रमुखता से रखना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि भारतीय इकोनोमी (अर्थशास्त्र) के कई सेक्टर (क्षेत्र) में अनुचित और कड़ी शर्ते है। खासकर, इंटलेक्चुअल (बुद्धिमतापूर्ण) प्रोपर्टी (संपत्ति) राइट्‌स (सर्वोत्तम) और लाइसेंस (अनुज्ञप्ति) की कठिन प्रक्रिया। ऐसी शर्तो के कारण ही अमेरिका कंपनिया (संघ) ं भारत में व्यापार करने में कठिनाई महसूस करती है। सबसे अधिक परेशनी सोलर और इन्फॉर्मेशन (सूचना) टेक्नोलोजी (तकनीकी), टेलिकम्यूनिकेशन (दूरसंचार प्रणाली) कंम्पनियों को हो रही है। पत्र में वर्ल्ड (विश्व) बैंक (अधिकोष) की रैंकिंग (सर्वोच्च/वस्तुओं या व्यक्तियों का वर्ग या पंक्ति) का भी जिक्र किया गया है। इसमें व्यापार की सरलता के लिए भारत को 190 देशें में 130 वीं रैकिंग दी गई थी। मुलाकात के दौरान मोदी और ट्रम्प कुछ मुद्दों पर असहज भी हो सकते है। जैसे की ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट पोलिसी (पहली नीति) । इससे अमेरिका भारत व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा पेरिस जलवायु संधी को अस्विकार करते हुए आरोप लगाया था कि इससे भारत को अरबों डॉलर की मदद मिलती है। जबकि ऐसा नहीं है। मोदी की मेंक (बनाना) इन (अंदर) इंडिया (भारत) पॉलिसी (नीति) भी ऐसा ही एक मसला है।

उपसंहार: - मोदी जी की इस अमरीका यात्रा से दोनों देश चाहे तो हर मसले का हल निकाल सकते है जिससे दोनों देशों की विकास राह आगे के लिए बेहतरीन हो जाये एवं दोनों देश हर क्षेत्र के विकास के लिए मिलकर कार्य करें।

- Published/Last Modified on: July 21, 2017

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