पाक अधिकृत कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir) (Download PDF)

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प्रस्तावना:- धरती पर यदि कहीं स्वर्ग हैं तो कश्मीर में यहीं है, सचमुच में कश्मीर की प्राकृतिक छटा दुनिया में अनूठी है इतिहास के पन्नों को पलटते हैं तो कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा रहा है। विभाजन के बाद से ही पाकिस्तान इस पर नजरें जमाए बैठा है। पड़ोसी चीन ने भी कश्मीर का एक हिस्सा कब्जाया हुआ है। वो दिन नहीं जब हम पूरे कश्मीर से पड़ोसियों का कब्जा हटाएंगे। जम्मू और कश्मीर में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार है। अशांति और आतंकवाद से कराहते कश्मीर का दर्द हम सभी देशवासियों को भी महसूस होता है। इतिहास के विभन्न पड़ावों में कश्मीर ने कई दौर देखे हैं। कश्मीर का बीता कल शानदार था, आज भले ही चुनौतीपूर्ण हो लेकिन आने वाला कल सुनहरा होगा।

  • विचार:- ने कश्मीर में जारी हिंसा और तनावों को लेकर चिंता जताई है। भागवत ने यह भी कहा कि कश्मीर ही नहीं मीरपुर और गिलगित- बाल्टिस्तान भी भारत के ही हिस्से हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से जो बातें कही जा रही हैं, उसे धरातल पर भी उतारा जाना चाहिए।

                                                                                      मोहन भागवत, पत्रिका समाचार नेटवर्क (जाली का काम)

पाक अधिकृत कश्मीर:-

  • पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के 13,297 वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा कर पीओके बनाया है। पाक अधिकृत कश्मीर में 10 जिले और 19 प्रमुख शहर हैं। पीओके से जुड़ी एलओसी 400 किमी लंबी है। 46 लाख की आबदी है पाकि अधिकृत कश्मीर की हैं।
  • कश्मीर घाटी का हल अटल बिहारी वाजपेयी के दौर से तीन शब्दों में निहित रहा है। जम्हूरियत, कश्मीरियत, इंसानियत। ऐसा लोकतंत्र, जहां कश्मीरी पंडित, मुस्लिम साथ-साथ रहें। कश्मीरी पहचान न छूटे और हिंसा की नहीं इंसानियत की भावना रहे तो शांति मुमकिन है।
  • भाग:-मूल कश्मीर का वह भाग है, जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में हमला कर कबजा कर लिया था। इसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब एवं उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत से पश्चिम में, उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान के बाखान गतियारे से, चीन के जांजियांग उयूर स्यायत्त क्षेत्र से उत्तर और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती हैं। इस क्षेत्र के पूर्व कश्मीर राज्य के कुछ भाग, ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट को पाकिस्तान ने चीन को दे दिया था व शेष क्षेत्र को दो भागों में बांट दिया था उत्तरी क्षेत्र एवं आजाद कश्मीर में। भारत और संयुक्त राष्ट्र सहित अधिकतर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और देश इसे पाक-अधिकृत कश्मीर ही कहते हैं।
  • पाक:- पाकिस्तान की पूरी कोशिश कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की हैं, जबकि भारत का इस पर स्थान बिल्कुल साफ है कि यह भारत का अंदरुनी मामला हैं। पाक ऐसा पहले भी करता रहा हैं। वह कश्मीर का राग अलापते हुए इस्लामिक देशों को खत लिखकर कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग कर चुका है। इतना ही नहीं, उसकी तरफ से यूएन में भारत की शिकायत की जा चुकी हैं।
  • गिलगित-बालतिस्तान:- आठ हजार मीटर को पांच पहाड़ियों वाले गिलगित बालतिस्तान क्षेत्र में पाकिस्तान का वर्ष 1947 के बाद से ही प्रशासनिक आधिपत्य रहा है। इतिहासकार फाह्यान ने भी अपने वृतांत में गिलगित का उल्लेख किया हैं।
  • आवाज- गिलगित-बालतिस्तान में पिछले कुछ वर्षो से पाकिस्तान के आधिपत्य के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। भारत ने वहां मानवाधिकार उल्लघंन के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन देने का फैसला किया है। दरअसल, विभाजन के बाद पाकिस्तान ने गिलगित-बालतिस्तान के इलाके के कबाड़लियों को भारतीय सीमा में दाखिल कराया था। संघर्ष विराम के बाद क्षेत्र के नृजातीय समीकरणों का गड़बड़ाने के लिए कबाड़लियों को यहां बसा दिया। गिलगित-बालतिस्तान की कुछ बाते निम्न हैं-
  1. वर्ष 2015 में 18 लाख जनसंख्या गिलगित-बालतिस्तान की।
  2. 8,000 मीटर से ज्यादा ऊंची 05 पर्वत चोटियां गिलगित में।
  3. गिलगित-बालतिस्तान में 50 पर्वत चोटियां 7,000 मीटर से ज्यादा ऊंची।
  4. गिलगित-बालतिस्तान में 10 जिले, 9 प्रमुख शहर हैं।
  5. गिलगित में के-2 दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी हैं।

मीरपुर:-

  • 14 अगस्त 1947 को हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय से ही मीरपुर का दर्द हमें सता रहा है। बंटवारे के समय मीरपुर के सभी मुसलमान पाकिस्तान पलायन कर गए थे। इस दौरान पाकिस्तान के पंजाब से हजारों की संख्या में हिन्दू और सिख मीरपुर आ गए थे। यहां अब हिंदुओं की संख्या करीब 40 हजार हो गई थीं। मीरपुर जम्मू-कश्मीर रियासत का एक हिन्दू बहुल शहर था। यही हालात कोटली, पूंछ और मुजफ्फरबाद में भी हुई।
  • यहां के हिन्दू वाशिंदो ने खुद को पाकिस्तानी सेना से बचाने की गुहार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन कश्मीर रियासत के प्रमुख शेख अब्दुल्ला से की थी। इसे अनसुना कर दिया गया और उन्हें पाकिस्तानी सेना के हाथों मरने को छोड़ दिया। परिणामत: पाकिस्तानी सेना ने 18000 सिखों को मार डाला था।
  • मुजफ्फराबाद:- मुजफ्फराबाद पाक-अधिकृत कश्मीर के आज़ाद कश्मीर क्षेत्र की राजधानी व मुख्यालय हैं यह शहर मुजफ्फराबाद जिले का भाग है। इसका क्षेत्रफल 6,117 वर्ग किलोमीटर भारत इसे अपना भाग मानता है। यह झेलम व किशनगंगा नदियों के किनारे बसा हैं। किशनगंगा का नाम बदलकर पाक ने नीलम नदी कर दिया है। यह उत्तर में नीलम जिला, दक्षिण में बाग जिला, पूर्व में भारत के बारामुला जिला और कुपवाड़ा जिला में स्थिति हैं। पाक ने इसको दो भागों में विभाजित कर दिया है आज आजाद कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान।
  • गिलगित-बाल्टिस्तान:- यह लगभग 63 हजार वर्ग किमी. विस्तृत भू-भाग हैं, जिसमें गिलगित लगभग 42 हजार वर्ग किमी. और बाल्टिस्तान लगभग 21 हजार वर्ग किमी. है। यह वह क्षेत्र है जहां 6 देशों की सीमाएं मिलती हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, चीन, तिब्बत एवं भारत। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाला दुर्गम क्षेत्र हैं जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां से पूरे दशिया में प्रभुत्व रखा जा सकता है। यहां की आबादी मात्र 20 लाख है। पिछले 500-600 साल से ये क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के अधीन रहा है। यहां की 80 प्रतिशत आबादी शिया मुस्लिमों की है जबकि 20 प्रतिशत आबादी सुन्नी मुस्लिमों की है। इस इलाके में सोना भी प्रचुर मात्रा में है।
  • चीन की घुसपैठ- वर्तमान में गिलगित में चीन के 11000 सैनिक तैनात हैं। पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में चीन ने लगभग 65 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया व आज अनेक चीनी जनसमूह व कर्मचारी वहां पर काम कर रहे हैं।
  • राज्य- पाकिस्तान ने कश्मीर के गिलगित -बाल्टिस्तान इलाके को कानूनी तौर पर अपना नया राज्य बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए इस्लामाबाद में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है और वह इस दिशा में बहुत गंभीरता से काम रही है। चीन ने आने वाले 50 बिलियन डॉलर निवेश के कारण पाक सरकार इस काम में जल्दी में है।
  • भारत का हिस्सा कश्मीर:- पाकिस्तान के लिए इसे अपनी भूमि घोषित करना संभव नहीं था। वह इसे टालता रहा है। बड़ी वजह यह भी थी कि शिया बहुल इस इलाके के लोग पाक में शामिल नहीं होना चाहते हैं। यहां के नागरिकों को पाकिस्तान के अन्य नागरिकों की तरह अधिकार नहीं मिल पाए हैं। पाक नियंत्रण के बावजूद वहां की अदालतें और वहां का संविधान इसे पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते। 1994 में पाक की सुप्रीम न्यायालय ने कहा था कि यह क्षेत्र भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा है।

प्रमुख बातें निम्न हैं-

  • हक- अंग्रेजी राज के दिनों में डोगरा महाराजा हरिसिंह की रियासत का एक भाग था। 1947 में इस समूची रियासत का विलय हरि सिंह ने भारत में कर दिया था। इसलिए यह भारत का ही अंग है।
  • जनमत- पाकिस्तान कहता रहा है कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र हैं और इसके दर्जे के बारे में संयुक्त राष्ट्र के 1948-49 के प्रस्ताव के तहत जनमत संग्रह से फैसला होना चाहिए।
  • निवेश- चीन इस क्षेत्र में लाखों डॉलर का निवेश कर रहा है। इसको लेकर भारत ने कई बार आपित्त भी जताई है। पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला आर्थिक गलियारा यहीं से निकलना है।

चीन:-

  • चीन की विस्तारवादी नीतियों का दुष्प्रभाव भारत को भी झेलना पड़ा है। चीन ने लगभग 640 वर्ग किलोमीटर के भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किया हुआ है। वर्ष 1962 के बाद से अक्साई चिप पर चीन के शिनजियान प्रांत का शासन है। अक्सर चीन कूटनीति के तहत अक्साई चिन के पार भारतीय इलाकों पर अधिकार जताता है। वर्ष 1993 और 1996 के समझौते के तहत भारत-चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) का रेखांकन हुआ है।
  • जम्मू-कश्मीर का पूर्वी हिस्सा चीन ने अक्साई चिन के तौर पर 1960 के दशक में ही कब्जा लिया था। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भी सीमा का विवाद पूरी तरह से नहीं सुलझ सका है। हमें अपने दावे को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही अब तक पाक ने चीन को 5,000 वर्ग किमी क्षेत्र सौंपा हैं।
  • अक्साई चिन:- 5,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। अक्साई चिन का इलाका जम्मू-कश्मीर के उत्तर पूर्व में हैं भारत इसे लद्दाख का विस्तार और जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है। 1914 को मैकमोहन रेखा के विभाजन के अनुसार ये हिस्सा भारत का है चीन इसे नकाराता है। 1962 के युद्ध में भारत-चीन आमने सामने हुए थे। अक्सई चिन के दमचोक का 70 प्रतिशत क्षेत्र चीन के कब्जे में है।
  • बीता हुआ कल:- कल्हण ने राजतरंगिणी में लिखा है कि कश्मीर को आध्यात्मिक शक्ति से तो जीता जा सकता है, सैन्य शक्ति से नहीं। राजतरंगिणी 1184 ईसापूर्व के राजा गोनंद से राजा विजयसिम्हा (1129 ईसवी) तक के कश्मीर के प्राचीन राजवंशों और राजाओं का प्रमाणिक दस्तावेज व वहां के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का भी काव्यात्मक आवयान है। सम्राट अशोक और कनिष्क के दौर में कश्मीर में बौद्ध धर्म का खासा प्रचार-प्रसार हुआ।
  • प्रभाव- आठवी-नौवीं शताब्दी में यहां शेव दर्शन विकसित हुआ। यह अद्धैत व तांत्रिक धार्मिक पंरपराओं का समुच्चय है। वसुगुप्त की सूक्तियों का संकलन ’स्पन्दकारिका’ इसका पहला प्रामाणिक ग्रन्थ माना जाता है।
  • शक्सगाम की घाटी:- काराकोरम पर्वतमाला में शक्सगाम नदी की इस 9,900 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में वर्तमान में चीन की कारगिलिक काउंटी और टैक्सकोरगन ताजिक स्वायत्त काउंटी का शासन है। भारत इस क्षेत्र में अपना अधिकार जताता है। लेकिन इस क्षेत्र को पाकिस्तान ने रणनीतिक तौर पर चीन को लीज (खुद, मैल) पर सौंप दिया है।
  • समझौते:- भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर राज्य के पश्चिमी हिस्से में लाइन ऑफ कंट्रोल यानी नियत्रंण रेखा लगभग 740 किलोमीटर लंबी है। शिमला समझौते के तहत इसे अंतिम रूप दिया गया था। इस समझौते में निम्न बातें हुई-
  1. पाक-चीन का गिलगित से आर्थिक गलियारा।
  2. 1970 के बाद पाक ने पीआके व गिलगित-बालतिस्तान को पृथक इकाई घोषित किया।
  3. समरिक महत्व के चलते अंग्रेजो ने कश्मीर रियासत से गिलगित को हथियाया था।
  4. शिमला समझौताजुलाई 72 में भारत पाक के बीच हुआ था।
  5. शिमला समझौते से 93 हजार पाक युद्ध बंदियों की रिहाई हुई थी।
  6. सूत्रा के अुनसोर एलओसी पर सेना के 40 हजार जवान चौकसी करते हैं।

कश्मीर:-

  • के युवाओं के हाथ में पेन, किताबे और कम्प्यूटर होना चाहिए। वे बच्चे हैं अगर पत्थर फेंक रहे है तो उन्हें समझाना चाहिए। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर में प्रेस सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया था। जाहिर है कश्मीरी युवा ही वहां की तकदीर तय करेगा। उन्हें आधुनिक शिक्षा देकर आगे लाना होगा। साक्षरता दर पहले से बढ़कर 65 फीसदी हुई है। युवा चिकित्सक, इंजीनियर (अभियंता), सिविल सेवा में जाने लगे हैं। ऐसी तादाद सतत प्रक्रिया बढ़नी चाहिए।
  • घाटी केवल बुरहान वानी ही पैदा नहीं करती बल्कि वहां ऐसी प्रतिभाएं भी पैदा होती है जो सुलगती घाटी में कलेजे को ठंडक पहुंचाती है। 2010 में शाह फैज़ल आईएस टॉपर रहे तो 2016 में इस साल अतर आमिर दूसरे पायदान पर रहे।

करगिल 1999:-

  • 527 भारतीय जवान शहीद, 1,363 जख्मी।
  • करगिल विजय दिवस 26 जुलाई को मनाया जाता है।
  • स्वर्णकाल:- वर्ष 1417 में जैनुल आब्दीन गद्दी पर बैठा। सर्वधर्म सम्भाव के कारण उसका आधी सदी का शासन काल कश्मीर के इतिहास का सबसे गौरवशाली काल माना जाता है। जनहित कार्यो के कारण ही कश्मीर इतिहास में उसे महान शासक कहा जाता हैं।
  • केसर की खेती-कश्मीर में केसर की खेती की प्रसिद्ध रही है। ईरान और यूरोप के स्पेन से मध्यकाल में लाए गए केसर की क्यारियां यहां खूब फली फूली है। लेकिन अब इसमें कमी आई है।
  • मुगलों का शासन- वर्ष 1586 में कासिम खान मीर ने कश्मीर में मुगल सल्तनत का परचम फहराया। औरंगजेब के बाद मुगलों का यहां शासन सिमट गया। वर्ष 1753 में अहमद शाह अब्दाली के नेतृत्व में अफगानों ने कश्मीर पर कब्जा किया। कश्मीरी पंडितों को अहम पद सौंपे।
  • राज-पंजाब के महान शासक महाराजा रणनीतिसिंह ने भी कश्मीर पर शासन किया। लेकिन रणजीतसिंह की मौत के बाद साम्राज्य बिखरने लगा। अंग्रेजों ने इसका फायदा उठा कर युद्ध किए और कठपुतली शासकों को वहां की बागडोर सौंपने की चाल चली।
  • हरिसिंह का दौर- वर्ष 1925 में हरिसिंह ने जम्मू और कश्मीर की गद्दी संभाली। हरिसिंंह ने राज्य में शिक्षा की अनिवार्यता सहित अन्य कल्याणकारी कदम उठाए। वर्ष 1947 में हरिसिंह ने विलय में टालमठोली भरा रवैया अपनाया।
  • कर्णसिंह- कबाइलियों के हमले में हरिसिंह ने की मदद की गुहार की पर भारतीय सेनाओं ने कबाइलियों को खदेड़ा। कर्णसिंह सदर-ए-रियासत बने। जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय के मूल दस्तावेज में 84 हजार वर्ग मील क्षेत्र था ।

भारत का प्रस्तुत क्षेत्रों में कब्जा निम्न हैं-

  • हाल का क्षेत्रफल- जम्मू-कश्मीर में वर्ततान में 42 हजार वर्ग मील के क्षेत्रफल में भारत का कब्जा हैं।
  • सियाचिन पर कब्जा-सियाचिन के 700 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में भारत का कब्जा है।
  • सलटारों की पहाड़ियां- काराकोरम में सलटारों की पहाड़ियों में भारतीय सेना काबिज है।

कश्मीर के विषय में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्न हैं-

  • चुनाव- वर्ष 1941 में जम्मू-कश्मीर में पहले चुनाव कराए गए थे। इनमें वहां के लोगों ने बढ़चढ़ कर मतदान किया था। भारत का तर्क था कि ऐसे में जनमत संग्रह कराने का मुद्दा अब प्रासंगिक नहीं रह गया है।
  • अभिन्न अंग-वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर की सरकार ने वर्ष 1947, अक्टुबर में भारत के साथ हुए इंस्ट्‌मेंट ऑफ एक्सेशन को वैधानिकता प्रदान की। अर्थात्‌ जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय हुआ। इसी क्रम में वर्ष 1957 में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा माना।
  • अंतरराष्ट्रीय सीमा- भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं विभाजन के समय पर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में बने आयोग ने तय की थीं। पीओके-गिलगित अंतरराष्ट्रीय सीमा के अनुसार भारत में हैं।
  • अनुच्छेद- संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्त राज्य का दर्जा प्राप्त है। इसके मुख्य प्रावधानों में जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को दोहरी नागरिकता व विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षो का होता है।
  • ऐतिहासिक तथ्य- पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बालतिस्तान पर भारत के कब्जे के ऐतिहासिक तथ्य मौजूद हैं। यहां पर अंग्रेजों के शासन से पूर्व में भी भारतीय उपस्थिति रही है। विभिन्न राजवंशों ने यहां पर शासन किया है। इसके उल्लेख मिलते हैं।

कश्मीर प्रगति की ओर न बढ़ने के कारण:-

  • उद्योग- अरसे से बात उठाई जाती है कि बेरोजगारी के चलते कश्मीरी युवा पत्थर उठाता है इसलिए वहां बड़े उद्योग-धंधों की जरूरत है। हालांकि उद्योग नीति को थोड़ा आसान किया है पर अब भी 06 लाख से ज्यादा बेरोजगार हैं। इन्हें श्रम कौशल देकर कामगार बनाएं।
  • उच्च शिक्षा- जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा की उजली तस्वीर बनानी होगी। चिकित्सा, इंजीनियरिंग, विज्ञान से जुड़े उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने होंगे। सरकार दो एम्स की स्थापना की दिशा में बढ़ी है। आईआईटी, एनआईआईटी बनें। स्थानीय विवि को स्वायत्ता मिले।
  • अलगाववादी बाहर- कहा जाता है कि 95 फीसदी कश्मीरी अमन चाहते हैं। पर 5 फीसदी अलगाववादी धड़ा हिंसा कराता है। इसे कश्मीरी नकार चुके हैं। पर ये पैसे का लालच देकर युवाओं को फंसाते हैं, इन्हें दरकिनार करना होगा।
  • वादे-कश्मीरी युवाओं के भड़कने के पीछे बड़ी वजह केंद्र सरकारों के वादे न निभाने का सिलसिला भी है। विशेष आर्थिक सहायता के वादे हों या मध्यस्थों का विवरण की पालना, यह नहीं हो पाई। इसलिए वादे पूरे करें ताकि भरोसा बढ़े।
  • धोखा:- जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने की मांग पर डॉ. अंबेडकर ने शेख अब्दुल्ला से कहा था, ’तुम यह चाहते हो कि भारत कश्मीर की रक्षा करे, कश्मीरियों को पूरे भारत में समान अधिकार हों, लेकिन भारत और भारतीयों को तुम कश्मीर में कोई अधिकार नहीं देना चाहते। मैं भारत का कानून मंत्री हूं और मैं अपने देश के साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी और विश्वासघात में शामिल नहीं हो सकता।’ फिर भी कश्मीर को विशेष दर्जा मिला। जबकि आम भारतीय ऐसा नहीं चाहते। उनके लिए कश्मीर देश का एक अभिन अंग है और हमेशा रहेगा।
  • नुकसान:- कश्मीर घाटी में जहां युवा पत्थर थामते रहे हैं, वहीं जम्मू के लोग विकास के पक्षधर रहे हैं। उन्हें लगता है कि राज्य को विशेष दर्जा होने का लाभ केवल घाटी के कुछ लोग उठाते हैं। बजट आवंटन की स्थितियां न्यायपूर्ण नहीं हैं। जनसंख्या ज्यादा होने के बावजूद जम्मू की राज्य सरकार में राजनीतिक भागीदारी कम है। सरकारी नौकरियों में भी जम्मू के साथ न्याय नहीं होता। इसके अलावा आतंकवादी हिंसा की वजह से जिन मुस्लिमों ने घाटी से पलायन किया है, वे भी जम्मू में बस रहे हैं, शायद राज्य सरकार की नियोजित योजना के तहत ऐसा हो रहा है।
  • लद्दाख:- जम्मू-कश्मीर में सरकार किसी भी दल या गठबंधन की रही हो लेकिन लद्दाख ऐसा इलाका है, जिसकी ओर ध्यान ही नहीं दिया जाता। सारी चिताएं घाटी तक सिमटी हैं। प्रदेश के लद्दाख मामलों के मंत्री भी इस ओर ज्यादा रुख नहीं करते जिससे लद्दाखवासियों में निराशा रहती है, जो कि जायज है। उनकी भी अपनी मांग है कि लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर या तो केन्द्र शासित प्रदेश बना दें या फिर हिमाचल प्रदेश का हिस्सा बना दें। लद्दाख के लोग अपने यहां जम्मू-कश्मीर का झंडा भी नहीं लगाते। वे केवल भारत का तिरंगा लगाते हैं।

उपसंहार:-प्रस्तुत बातों से स्पष्ट है कि अभी तक कश्मीर का विलय पूर्ण रूप से भारत में शामिल नहीं हुआ उसका कुछ भाग पाकिस्तान के कब्जे में है तो कुछ भाग चीन के। इसलिए भारतवासियों को कोशिश यही करनी चाहिए कि कश्मीर जैसा स्वर्ग क्षेत्र भारत में पूरा आ जाये जिससे कश्मीर क्षेत्र प्रगति की ओ बढ़ सके।

- Published/Last Modified on: November 8, 2016

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