पैरालंपिक खेल 2016 (Paralympic Games 2016) (Download PDF)

()

Download PDF of This Page (Size: 493.95 K)

प्रस्तावना:- रियो ओलंपिक में दुनिया भर के एथलीटों का जलवा देखने के बाद अब मौका है रियो पैरालंपिक में दुनिया भर के दिव्यांग एथलीटों के जज्बें को सलाम करने का। नजर डालते है 7 सितंबर से 18 सितंबर तक रियो में होने वाले पैरालंपिक के कुछ खास पहलुओं पर। रियो ओलंपिक के बाद अब शुरू होने वाले पैरालिंपिक पर सबकी नजरें टिक गई हैं। इसमें मैदान तो वही होंगे, लेकिन खिलाड़ी अलग। ये दिव्यांग अपने जीवन की मुश्किलों से लड़कर यहां तक पहुंचे हें। ये खेल के साथ-साथ हमें अपने हौसले और कभी हार न मानने वाले जज्बे से प्रेरित भी करते हैं।

  • सफर:- पैरालंपिक को आयोजित कराने का सफर 1960 में शुरू हुआ। इटली के शहर रोम में पहली बार इसका अयोजन हुआ। इसके बाद 2001 में अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साझा निर्णय के बाद 2012 तक ओलंपिक खेलों के मेजबान देश के शहर को ही पैरालंपिक आयोजित कराने का निर्णय लिया गया। अब इसको बढ़ाकार 2020 कर दिया गया।
  • उद्घाटन:-पैरालपियन और एक्ट्रेस अमेरिका की एमी पर्डी भी ओपनिंग सेरेमनी में अपने प्रदर्शन से दुनिया का दिल जीतने को तैयार हैं। स्नोबोर्ड में पर्डी ने 2014 विंटर (सर्दी) पैरालंपिक खेल में भाग लिया था। आपको बता दें कि एमी ओपंनिग सेरेमनी (प्रारंभ शिष्टाचार) में नृत्य करेंगी, उनके दोनों पैर नहीं हैं। अमेरिका पैरालंपियन एरोन वील्ज ने 55 फीट की ऊंचाई से अपनी व्हीलचेयर समेंत छलांग लगाकर सबको दंग कर दिया। इसके बाद एक-एक कर सभी देशों के पैरा एथलीटों ने परेड किया। ब्राजील के सांबा नृत्य और आतिशबाजी ने अनोखा समां बांध दिया। रात में हएु रंगारंग कार्यक्रम में उड़ती व्हीलचेयर और दृष्टिबाधितों की टोली लोगों के आकर्षण का केंद्र रहें। भारतीय देवेंद्र पैराएथलीट के ध्वजाधारक थे।
  • ध्वजावाहक- रियो में 7 सितंबर से शुरू हो रहे पैरालंपिक खेलों में चूरू जिले के सादुलपुर तहसील की झाझड़ियों की ढाणी के जेवलिन थ्रोअर देवेन्द्र झाझड़िया भारतीय दल के ध्वजवाहक बनेंगे। भारतीय दल में दो महिला एवं 17 पुरुष खिलाड़ी शामिल हैं। इन खेलों की विभिन्न स्पर्द्धाओं में 165 देशों के 4500 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। 23 खेल शामिल किए गए हैं।
  • हूटिंग- ब्राजील में मौजूदा राजनीतिक संकट का असर उद्घाटन समारोह में भी देखने को मिला। कार्यवाहक राष्ट्रपति माइकल तेमेर ने खेलों के उद्घाटन का जैसे ही ऐलान किया उन्हें हूटिंग का सामना करना पड़ा। महाभियोग के कारण जिल्मा रोसेफ को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा है। जिनके कार्यकाल को तेमेर पूरा कर रहे हैं।
  • आयोजन:-रियो पैरालंपिक को चार आयोजन स्थलों में बांटा गया है। अधिक इवेंट (वृत्तांत) बर्रा क्लस्टर में होंगे। अन्य सभी इवेंटस डियोडोरो क्लस्टर, माराकाना क्लस्टर, कोपोकापाना क्लस्टर में आयोजित होंगे।
  • पैरालंपिक टार्च- पैरालंपिक टार्च पांच आग की लपटों के साथ रियो से शुरू हुई और बाद में ब्राजील के पांच क्षेत्रों में घूमी, छठी लपटें को माराकाना ओपनिंग सेरेमनी (प्रारंभ शिष्टाचार) आयोजन स्थल पर मिलकर एक पैरालंपिक टार्च बनेगी।
  • देश:-रियो डि जनेरियो पैरालंपिक में इस बार 162 देश है, उन खेलों में 528 इवेंट्‌स (सब अवस्था) इस दौरान खेले जाएंगे। जिसमें दुनिया के 162 देशों के 5 हजार से ज्यादा एथलीट अपना दम दिखाएंगे। पहली बार दो शरणार्थी खिलाड़ी भी शामिल होंगे।
  • रूस:- 267 रूसी पैरा एथलीट पैरालंपिक में शामिल नहीं हो पाए। राज्य प्रायोजित डोपिंग स्कैंडल (अपमान या कलंक) का खुलासा होने के बाद रूसी पैरा एथलीटों को बंद कर दिया गया हैं। पैरालंपिक के 16 लाख टिकट बिक चुके हैं। लक्ष्य 24 लाख टिकट बेचने का हैं।
  • चीन:-चीन ने लंदन पैरालंपिक में 95 स्वर्ण पदक जीते थे। चीन 03 बार से पदक तालिका पर शीर्ष पर रहा। 308 पैरा एथलीटों के साथ चीन का दल सबसे बड़ा हैं।
  • ब्राजील:- स्वीमर डेनिय डियास 10 स्वर्ण पदक के साथ ब्राजील के सबसे सफल पैरालंपियन हैं।
  • भारत के पदक:- भारत ने ओलंपिक खेलों में कितने पदक जीते हैं? यदि आपसे यह सवाल पूछा जाए तो शायद आप आम खेल प्रेमी की तरह गुणा-भाग लगाकर 28 पदकों का ब्यौरा पेश कर देंगे, जिसमें 11 पदक अकेली हॉकी की बदौलत आए है। लेकिन ऐसा करते हुए उस समय आप उन 8 पदक को भूल जाएंगे, जो देश के लिए उन्हीं ओलंपिक खेलों के साथ होने वाले पैरालंपिक खेलों में ऐस खिलाड़ियों ने तिरंगा लहराकर हासिल किए है, जिनके दिव्यांग शरीर जैसी हालत होने पर शायद हम और आप खेलने की बात तो दूर जिंदगी जीने की भी कल्पना नहीं करेंगे। ऐसे हालात में शायद इन एथलीटों (पहलवानों) के हर पदक की कीमत किसी भी सामान्य खिलाड़ी के पदक से ज्यादा मान सकते हैं।
  • अब ये ही दिव्यांग एथलीट लगभग 15 दिन पहले खत्म हुए रियो ओलंपिक खेलों में टूटी आशाओं पर मरहम लगाने उसी रियो की धरती पर ही उतरेंगे। रियो गए पैरालंपिक दल में 19 खिलाड़ियों को भारतीय गौरव चमकाने और तिरंगे को सबसे ऊपर लहराने की जिम्मेदारी दी गई हैं।
  • भारतीय दल:-रियो पैरालिंपिक के लिए भारतीय दल को मोदी जी ने शुभकामनाएं दीं है। ब्राजील के महानगर रियो डी जेनेरो में पैरालिंपिक खेल सात सितंबर से 18 सितंबर तक चलेंगे। मोदी जी ने कहा कि ’भारत के लागे रियो पैरालिंपिक में हिस्सा लेने वाले अपने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करेंगे, जो 7 सितंबर से शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा ’हम रियो पैरालिंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले अपने दल को शुभकामनाएं देते हैं। मुझे भरोसा है कि हमारे खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देंगे और देश को गौरवान्वित करेंगे।’ इन खेलों में भारत के 17 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें से 15 पुरुष और दो महिलाएं हैं। ये खिलाड़ी पांच स्पर्द्धाओं में हिस्सा लेंगे। यह भारत का पैरालिंपिक खेलों में अभी तक का सबसे बड़ा दल है।
  • रियो पैरालंपिक पहली बार भारत का सबसे बड़ा 19 एथलीटों का दल हैं। जिसमें केवल 3 महिलाएं शामिल हैं। पूरे भारतीय दल में इस बार 13 खिलाड़ी एथलेटिक्स (पहलवान) के हैं। 8 पदक में से 6 आज तक देश को एथलेटिक्स में ही मिले हैं।दल की सबसे बड़ी उम्र की सदस्या 45 साल की दीपा मलिक हैं। 11वीं बार भारत पैरालंपिक में लेगा भाग।

भारतीयों के लिए पैरालंपिक देखने के छह कारण-

  1. लाइव (सीधा प्रसारण) देखने का मौका- इस बार प्रायोजक नहीं मिलने से पैरालंपिक का लाइव एक्शन (सीधा प्रसारण, साहसिक कार्य या क्रिया देखना) देखने को नहीं मिला है। वेबसाइट पर 680 घंटे पैरालंपिक का प्रसारण होगा। जिसमें 22 खेल शामिल होंगे।
  2. दोगुने पदक की उम्मीद- भारत के 19 पैराएथलीट इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं। कोच सत्यपाल सिंह ने उम्मीद जताई है कि भारतीय दल कम से कम पांच पदक जीतेगा। सत्यपाल 2004 से पैरालंपिक कोचिंग सदस्य में शामिल हैं।
  3.  देवेंद्र झाझरिया फिर से बन सकते हैं भारत के गोल्डन ब्वॉय।
  4. उत्तरी आयरलैंड के धावक जैसन स्मिथ काफी कुछ उसैन बोल्ट जैसे हैं। 100 मीटर और 200 मीटर के विश्व प्रमाण धारक स्मिथ गोल्डन डबल डबल पूरा कर चुके हैं। ट्रैक पर इनके जज्बे को भला कौन नहीं देखना चाहेगा।
  5. अंकुर धामा 1500 मीटर टी-1 इवेंट में भारत का प्रतिनिधत्व करेंगे। इस वर्ग में दृष्टिबाधित एथलीट हिस्सा लेंगे। धामा पहले दृष्टिहीन पैरा एथलीट हैं जो पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  6. ये देश अरूबा, कांगो, मालावी, सोमालिया, साओ, टोमे, टोगों और प्रिसिपी पहली बार पैरालंपिक में हिस्सा लेंगे। लंदन पैरालंपिक से ज्यादा खिलाड़ी रियो में हिस्सा लेंगे।

भारत के वे खिलाड़ी जो राउंड (चक्र) से बाहर हो गए।

  • पूजा:- रियो पैरालंपिक के रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धा में भारतीय तीरंदाज पूजा रैंकिंग राउंड में 513 अंक के साथ 290 स्थान पर रहीं। वही भारतीय निशानेबाज नरेश कुमार शर्मा मिश्रित 10 मीटर एयर राइफल प्रोन निशानेबाजी स्पर्धा में 44वें स्थान पर रहे और क्वालीफाइंग (योग्यता) राउंड (चक्र) से बाहर हो गए। नरेश इससे पहले पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्टैडिंग एसएच1 इवेंट के फाइनल (वृत्तांत के अंतिम) से भी बहार हो गए थे।

भारतीय खिलाड़ी निम्न हैं-

  • दीपा मलिक-कमर से नीचे लकवा की शिकार महिला एथलीट दीपा मलिक से भी पदक की उम्मीद। भारत की शॉट पुटर दीपा मलिक ने रियो पैरालंपिक में सिल्वर (चाँदी) पदक जीता। 48 साल में पहली बार इन खेलों में किसी भारतीय महिला को पदक मिला है। 1960 में शुरू हुए पैरालंपिक में भारत ने पहली बार 1968 में हिस्सा लिया था। उन्होंने शॉट पुट (एफ-53) में 4.61 मी. की थ्रो (वेदना/व्यथा) के साथ पदक अपने नाम किया। एफ-53 वर्ग में वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनकी थ्रॉइंग (भीड़ करना) आर्म (भुजा) में पूरी ताकत होती है लेकिन उंगलियों में कमजोरी होती हैं। कमर का निचला हिस्सा भी कमजोर होता हैं। बहरीन की फतिमा नेधम (4.76 मीटर) ने दीपा से 0.15 मीटर अधिक थ्रो कर स्वर्ण जीता। दीपा के पदक के बाद भारत तीन पदक के साथ रियो पैरालंपिक में 35वें स्थान पर पहुंच गया। दीपा को हरियाणा सरकार ने 4 करोड़ रुपए और केंद्र सरकार ने 50 लाख रुपए देने का फैसला किया।
  • 45 वर्षीय दीपा मलिक कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हैं। 17 साल पहले उन्हें स्पाइनल (पीठ की रीढ़) ट्‌यूमर (गाँठ/गिलटी/सूजन) हो गया था। उनकी 31 सर्जरी (शल्य चिकित्सा) हुई। फिर भी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकीं। वे अब तक राष्ट्रीय अतंरराष्ट्रीय इवेंट (वृत्तांत) में 68 स्वर्ण जीत चुकी हैं। दीपा के पति बिक्रम सिंह आर्मी से वीआरएस ले चुके हैं। दो बेटियां हैं।

प्रमाण निम्न हैं-

  • दीपा के नाम जेवलिन थ्रो (वेदना/व्यथा) का राष्ट्रीय और एशियन प्रमाण भी है।
  • शॉट (निशानेबाज) पुट और डिस्कस (चक्र/प्रस्तुत विषय) थ्रो (वेदना/व्यथा) का राष्ट्रीय प्रमाण भी उनके नाम है।
  • विश्व सर्वश्रेष्ठविजेता (2011) में शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में सिल्वर (चाँदी) पदक जीत चुकी हैं।
  • मोटर खेल में हिस्सा ले चुकी हैं।
  • 1700 किमी. की रेड डि हिमाचल रेस (तेजी से दौड़ना) माइनस (कमी/न्यूनता) तापमान में 8 दिन में पूरी कर चुकी हैं।

बेटी दीपिका भी पैरा एथलीट हैं। कई प्रतियोगिताओं में मां-बेटी साथ खेलती हैं। बेटी के नाम भी कई प्रमाण हैं।

मेरी उम्र 46 साल है। इस उम्र में भी ओलंपिक पदक जीतकर मैंने विकलांगता को हरा दिया है। स्वर्ण न जीत पाने का मलाल है। पर चार साल बाद टोक्यों ओलंपिक भी तो होना है। फिटनेस (स्वास्थ्य) बनी रही तो पक्का स्वर्ण लाने की कोशिश करूंगी। सिंधू और साक्षी की जीत ने मुझे बहुत मोटिवेट (प्रेरित) किया था।

                                                                                                                                                                      दीपा मलिक

  • समर्पित-पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली देश की पहली भारतीय महिला एथलीट दीपा मलिक ने अपने पदक को भारत की दिव्यांग महिलाओं को समर्पित किया हैं। दीपा ने कहा कि वह भारतीय दल में सबसे उम्रदराज खिलाड़ी है, ऐसे में उनको पदक जीतकर काफी खुशी है। वो इस पदक के जरिये दिव्यांग महिलाओं में जोश भरेंगी। दीपा हरियाणा की सोनीपत जिले की रहने वाली है।
  • हरियाणा के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अनिल विज ने पैरालिंपिक्स रज पदकधारी दीपा को चार करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ में विज ने कहा कि दीपा को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट (पहलवान) हैं।
  • जोग्रिद्र सिंह-एथलेटिक्स में जोगिंद्र सिंह बेदी 01 रजत और 2 कांस्य समेत कुल 3 सबसे ज्यादा पदक जीत चुके हैं।
  • मरियप्पन थांगावेलू व वरुण भाटी:- रियो पैरालंपिक खेल में मरियप्पन थांगावेलू के स्वर्ण और वरुण भाटी के ब्रॉन्ज पदक की बदौलत भारत पदक टेबल में टॉप-30 में आ गया है।
  • मरियप्पन 21 साल का हैं तमिलनाडु के सेलम शहर के पेरियावादमगामपट्‌टी गांव में जन्म हुआ। इन्होंने पैरालंपिक में हाईजंपर (उच्च छलांग) प्रदर्शन किया। 14 साल की उम्र में पहली बार उसके खेल शिक्षक ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और खेल के मैदान में उतारने के लिए तैयार किया।

उपलब्धियां निम्न हैं-

  • 2013 में पहली बार राष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स में खेलकर प्रभावित किया।
  • 2016 में ट्‌यूनीशिया में आईपीसी ग्रैंडप्रिक्स में पाया रियो का टिकट। इस सर्वश्रेष्ठविजेता में मरियप्पन ने 1.78 मीटर की हाईजंप लगाई। रियो पैरालंपिक में जाने के लिए1.60 मीटर का ए-क्वालिफिकेशन (योग्यता) स्टैंडर्ड (नियम) तय किया गया।
  • 2015 में नीदरलैंड्‌स में आईडब्ल्यूएस विश्व जूनियर सर्वश्रेष्ठ विजेता में जीता स्वर्ण पदक। मरियप्पन ने नीदरलैंड्‌स में स्वर्ण पदक जीत के लिए1.77 मीटर की हाई जंप (उच्च छलांग) लगाई।

टी-42 यानी एक पैरा घुटने के ऊपर से नाकाम- मरियप्पन और वरुण ने टी-42 हाई जंप (उच्च छंलाग) में पदक जीते। पैरालंपिक में ट्रैक एंड फील्ड इवेंट (पद चिन्ह और मैदान, वृत्तांत) के लिए टी-42 कैटेगिरी (वर्ग) उन एथलीटों के लिए है जिनका एक पैर किसी भी कारण से घुटने के ऊपर से नाकाम हो चुका हैं।

आपकी कामयाबी से देश को खुशी मिली हैं। मरियप्पन और वरुण को बधाई।

                                                                                                                      पीएम नरेंद्र मोदी

मरियप्पन का स्वर्ण पदक क्लब में स्वागत है। शानदार प्रदर्शन पर बधाई।

                                                                                                                   अभिवन बिंद्रा

तमलि में थोंगम का मतलब स्वर्ण जीता है। जैसा नाम, वैसा प्रदर्शन।

                                                                                                          वर्गीस

मरियप्पन और वरुण को बधाई। आपका जज्बा काबले तारीफ है।

                                                                                               सचिन तेंदुलकर

भारतीय खेल में प्रेरणा की कमी नहीं है। आपने देश का सिर ऊंचा किया है।

                                                                                                               साक्षी मिलक

भारत और भारतीय एथलीटों के लिए हाई जंप (उच्च छंलाग) दोनों को बधाई।

                                                                                                                   गौतम गंभीर

पैरालंपिक्स में भारत ने 9 सितंबर को इतिहास रचा। उच्च छलांग में मरियप्पन थांगावेलू ने स्वर्ण जीता। मरियप्पन ने 1.89 तो भाटी ने 1.86 मीत्र उछले और पदक तालिका में देश को 26वें नंबर पर पहुंचाया। बीते मार्च में मरियप्पन 1.78 मी. उछले थे। यानी छह माह में 11 सेमी ज्यादा ऊंची छलांग लगाई।

  • सरकार- तमिल सरकार मरियप्पन को दो करोड़ रु. देगी। अब सभी पैरालंपिक्स में भारत के 10 पदक (3 स्वर्ण, 3 सिल्वर व 4 ब्रांज) हो गए हैं।
  • दुर्घटना-मरियप्पन 5 साल के थे तो विद्यालय जाते समय उनके दाएं पैर पर बस चढ़ गई थी। हादसे में घुटने तक पैर खराब हो गया था। बाएं पैर से छलांग कर उन्होंने जैसे दुनिया ही लांघ दी। कुछ साल पहले उन्होंने चिकित्सा ईलाज के लिए 3 लाख का लोन लिया था, जो आज तक नहीं चुका पाए हैं। शारीरिक अयोग्यता के बावजूद विद्यालय की तरफ से वॉलीबाल खेला। 15 साल की उम्र में पहली प्रतियोगिता में सिल्वर (चाँदी) जीत कर सभी को चौंका दिया।
  • मरियप्पन की मां सरोजा ईंट ढोती थीं। बीमार रहने लगीं तो मरियप्पन ने किसी से पांच सौ रु. उधार लेकर उन्हें दिए और कहा कि वे सब्जियां बेचें। तमिलनाडु के 20 वर्षीय थांगावेलू पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने वाले भारत के तीसरे एथलीट (पहलवान) बन गए हैं।
  • मरियप्पन ने मीडिया (संचार माध्यम) को साक्षात्कार में बताया कि ’ड्राइवर नशे में था, लेकिन इस बात से आखिर क्या फर्क पड़ता है? आखिर मेरा पैर पूरी तरह बेकार हो चुका था। मेरी टांग फिर कभी ठीक नहीं हुई। मेरा परिवार आज भी सरकारी ट्रांसपोर्ट (निर्वासन/ढुलाई) जनसमूह के खिलाफ न्यायालय में केस लड़ रहा है।’ लेकिन यह हादसा भी मरियप्पन को रोक नहीं पाया। वे अब 21 साल के हो चुके हैं। 9 सितंबर को उन्होंने पुरुषों की टी-42 उच्च छलांग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
  • राजधानी चेन्नई से इस गांव की दूरी 340 किलोमीटर है। उनकी मां सरोजा साइकिल पर सब्जियां बेचने और मजदूरी का काम करती हैं। इनके पिता करीब एक दशक पहले परिवार को छोड़कर चले गए थे। लेकिन मां ने मरियप्पन का साथ नहीं छोड़ा। विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर उन्होंने कई पदक जीते।
  • पिछले साल ही उन्होंने कारोबार लोक प्रशासन की अपनी उपाधि पूरी की है। और अब वह रेग्युलर (नियमानुसार) नौकरी की तलाश में थे। नौकरी तो हालांकि उन्हें अभी नहीं मिली लेकिन नाम और पहचान जरूर मिल गई है। मरियप्पन के कोच सत्यनारायण बेंगलुरु के रहने वाले हैं।
  • जश्न-जीत के बाद मरियप्पन के परिवार ने खुशी से पटाखे जलाए। मरियप्पन का परिवार 500 रुपए महीने के किराये के घर में रहता हैं। उनके घर में इस खबर के आने के बाद लोगों को तांता बंद नहीं हो रहा। मरियप्पन की मां ने उनके बेटे की मदद करने वाले हर व्यक्ति का शुक्रिया अदा किया। इसी साल मार्च में उन्होंने 1.78 मीटर की छलांग लगाकर रियो के लिए क्वॉलिफाई (नियम के अनुकूल बनाना) किया था जबकि क्वॉलिफिकेशन (योग्यता) मार्क 1.60 मीटर था। उनके प्रदर्शन से इस बात का अंदाता लग गया था कि ओलंपिक का पदक उनकी पहुंच से दूर नहीं हैं।
  • पहली बार है जब भारत ने एक ही खेल में दो पदक जीते हैं। चीन-यूएस को हराकर उच्च छलांग में स्वर्ण भी पहली बार हैं।
  • वरूण भाटी:-इसी इवेंट (वृत्तान्त) में वरूण सिंह भाटी ने कांस्य पर कब्जा जमाया। कांस्य विजेता ग्रेटर नोएडा के जमालपुर गांव के वरुण भाटी किसान के बेटे हैं। उन्हें बचपन में पोलियों हो गया था। उन्होंने गांव में ही तैयारी की। वे ऊंची कूद में विश्व रैकिंग दो पर थे।
  • देवेंद्र झाझरिया:- 35 साल के हैं ये राजस्थान के चूरू जिले के निवासी है। 8 साल की उम्र में 11 हजार हाईवोल्टेज लाइन (उच्च विद्युत की रेखा) की चपेट में आकर हाथ कटा।

जीत के कदम निम्न हैं-

  1. 2001 में अंतर विवि खेल प्रतियोगिता में सक्षम खिलाड़ियों के साथ पहला पदक।
  2. 2002 में दक्षिण कोरिया में पैसेफिक खेल में प्रथम अंतरराष्ट्रीय पदक जीता।
  3. 2003 में ओपन सर्वश्रेष्ठ विजेता में जेवेलिन में पदक जीता।
  4. 2003 में ही ब्रिटेन में ब्रिटिश ओपन सर्वश्रेष्ठ विजेता में जेवलिन में पदक जीता।
  5. 2004 एथेंस पैरालंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक 62.15 मी. के नए विश्व प्रमाण के साथ जीता।
  6. 2007 ताईवान में आयोजित पैरवर्ल्ड (विश्व) खेल में स्वर्ण पदक।
  7. 2.5 मीटर के लगभग पीछे छोड़ दिया था। 59.77 मीटर का पुराना विश्व प्रमाण है।
  8. 2008 व 2012 ओलंपिक में एफ-46 श्रेणी न होने से नहीं खेल पाए।
  9. 2004 में अर्जुन पुरस्कार व 2012 में भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा।
  10. 2012 में पद्यश्री भी मिल चुका है और वे ये सम्मान पाने वाले पहले पैरालंपिक खिलाड़ी हैं।
  11. 2013 में लियोन फ्रांस में हुई आईपीसी विश्व एथलेटिक्स (पहलवान) में जीता स्वर्ण पदक।
  12. 2014 में इंचियोन में हुए एशियन पैराखेल में सिल्वर (चाँदी) पदक जीता।
  13. 2015 में दोहा में आईपीसी विश्व एथलेक्टिस में जीता सिल्वर पदक।
  14. 57.04 मीटर की थ्रो लियोन में करते हुए चीन के चुनलियांग गुओ का 55.90 मीटर का सर्वश्रष्ठविजेता प्रमाण भी तोड़ा।
  15. 2016 में दुबई में एशिया-ओसेनिया सर्वश्रष्ठविजेता में जीता है स्वर्ण।

मरियप्पन के हाई जंप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारत का यह दूसरा स्वर्ण है। भारत के रिंकू इसी स्पर्द्धा में 5वे स्थान पर रहे। रियो पैरालंपिक में गोल्डन (स्वर्ण) थ्रो (वेदना/व्यथा) देवेन्द्र ने खुद का तोड़ा विश्व प्रमाण नया कीर्तिमान 63.97 मीटर तक भाला फेंक बने दो बार स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी।

जेवलिन थ्रो के एफ-46 श्रेणी में देवेन्द्र ने 12 साल पुराना अपना विश्व प्रमाण भी तोड़ दिया। 116 साल के ओलंपिक और 48 साल के पैरालंपिक इतिहास में पहली बार किसी भारतीय ने दो स्वर्ण जीते हैंं। 32 साल बाद पहली बार 4 पदक मिले। 1984 में थे 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज पदक मिले। 44 साल में भारत पहली बार 31वें स्थान पर पहुंचा। 1972 के बाद बेस्ट रैकिंग।

  • बचपन-पैरालंपिक में जेवेलियन में लगातार दूसरी बार स्वर्ण जीतकर देश के गोल्डन बॉय बने देवेन्द्र का बचपन कठिनाइयों में बीता है। खेलने का शौक था और पास में भाला (जैवलिन) खरीदने के पैसे नहीं थे। इसलिए अभ्यास के लिए खेजड़ी की लकड़ी का भाला बनाकर खेतों में आठ-आठ घंटे तैयारी की। इसी मेहनत का नतीजा रहा कि विद्यालय की प्रतियोगिताओं से शुरू हुआ जीत का सिलसिला पैरालंपिक में भी जारी रहा। वह भी नए विश्व प्रमाण के साथ।
  • दुर्घटना का विस्तार- देवेन्द्र जब छोटे थे तब एक दिन अपने खेत पर स्थित एक पेड़ पर चढ़कर छंगाई का कार्य कर रहे थे। पेड़ के अंदर से बिजली के तार गुजर रहे थे। करंट लगने से देवेन्द्र का बायां हाथ बुरी तरह झुलस गया। खुद पेड़ से गिरकर बेहोश हो गए। हालात ऐसे बन गए कि चिकित्सको को आठ साल की उम्र में ही देवेन्द्र का हाथ काटना पड़ा। लेकिन देवेन्द्र ने हिम्मत नहीं हारी। परिजनों ने उसकी काबिलियत को देखते हुए आगे बढ़ाया। माता-पिता ने अभाव में जी कर देवेन्द्र को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया। निकटवर्ती गांव रतनपुरा विद्यालय में 10वीं तक अध्ययन किया। उसके बाद हनुमानगढ़ महाविद्यालय से बीए किया। निशक्ता के बावजूद इस युवा ने एथलेटिक्स को चुना। अपनी सफलता का श्रेय कोच, माता-पिता सहित अन्य परिजनों को दिया।
  • समर्पित:- देवेन्द्र ने रियो से राजस्थान पत्रिका को बताया कि यह गर्व के साथ खुशियों भरा पल है। इस दिन को कभी नहीं भूलेंगे। यह जीत मेरे देश को समर्पित हैं। देश ने मेरे ऊपर विश्वास कर मुझे ध्वज वाहक बनाया था। अब मैंने देश वासियों की दुआओं से पदक जीतकर अपना कर्तव्य निभा दिया है। इस मुकाम में खेल मंत्रालय, साई, माता-पिता, मित्र रिश्तेदारों का खूब सहयोग रहा।
  • उन्होंने युवाओ से कहा कि वे सपने पूरा करने के लिए कठोर मेहनत करें शॅार्टकट (संक्षेप करना) से कुछ हासिल नही हो सकता हैं। हालत चाहे कितने ही विपरीत क्यों नहीं हो यदि मन में दृढ़ निश्चय है तो जीतने से कोई नहीं रोक सकता हैं। युवा खुद पर विश्वास करें और हार नहीं माने।
  • ये पुरस्कार मिल चुके हैं-वर्ष 2004 में राष्ट्रपति से विशेष योग्यता पुरस्कार, 2005 में राजस्थान सरकार ने महाराणा प्रताप पुरस्कार, भारत की पैराओलंपिक समिति ने 2005 का पीसीआई आउट स्टेडिंग (न चुकाया हुआ/विशिष्ट) प्रदर्शन पुरस्कार प्रदान किया। राष्ट्रपति ने 2005 में अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया।
  • पुरस्कारों की बोछार- राज्य सरकार ने देवेन्द्र को 75 लाख रुपए नकद, इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में 25 बीघा जमीन और जयपुर में 220 मीटर का प्लॉट देने की घोषणा की है। सरकारी नौकरी दिए जाने पर विचार चल रहा हैं।
  • देवेन्द की पत्नी- की असल जिंदगी सलमान खान की फिल्म ’स्ल्तुान’ की कहानी से मिली जुलती हैं। इस वास्तविक जीवन की कहानी में देवेन्द्र भाला फेंक का ’सुल्तान’ बना तो पत्नी मंजू ने ’आरफा’ जैसा अभिनय बखूबी निभाया है। मंजू खुद कबड्‌डी की राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी हैं।
  • फैसला-शादी के बाद दोनों के सामने खेलों में स्वर्णिम भविष्य बनाने का अवसर था, मगर परिवार की बागडोर संभालने को किसी एक को पीछे हटना जरूरी हो गया था। तब मंजू ने देवेन्द्र को आगे बढ़ाने का फैसला किया। देवेन्द्र ने बताया कि पड़ोस के गांव चीमनपुरा निवासी मंजू से वर्ष 2007 में शादी हुई। तब वे मलसीसर स्थित हैलिना कौशिक महाविद्यालय में फाइनल (अंतिम) की विद्यार्थी व कबड्‌डी खिलाड़ी थीं। वर्ष 2009-10 में मंजू के सामने अंतरराष्ट्रीय लेवल की कबड्‌डी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का अवसर आना था, मगर उन्हीं दिनों बेटी जिया पैदा हुई।
  • सुविधाहीन परिवेश और विपरीत परिस्थितियों को देवेन्द्र ने कभी अपने मार्ग की बाधा स्वीकार नहीं किया। गांव के जोहड़ में एकलव्य की तरह लक्ष्य को समर्पित देवेन्द्र ने लकड़ी का भाला बनाकर खुद ही अभ्यास शुरू कर दिया।
  • रियो से आने के बाद देवेन्द्र सबसे पहले सालासर पदयात्रा करेंगे क्योंकि रियो में जाने से पहले सबसे पहले वे सालासर हनुमान जी बाबा के दरबार में धोक लग कर गये थे। इसलिए वहां से आते ही यहां सबसे पहले पदयात्रा कर धोक लगाएंगे। फिर पहले अपनी मां को घूमाऊंगा क्योंकि उन्होंने मेरे लिए बहुत किया हैं उन दिनों को मैं भूल नहीं सकता।

अमित सरोहा:- क्लब व डिस्क्स थ्रो

31 साल के है हरियाणा के पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी अमित सरोहा। 22 साल के थे दुर्घटना में उनका कमर से नीचे का हिससा लकवाग्रस्त हो गया।

  1. 2010 ग्वांगझू एशियन पैराखेल में पहली बार उन्होंने सिल्वर (चाँदी) पदक जीता।
  2. 2012 में अमित ने लंदन पैरालंपिक में क्वालिफाई करते हुए एशियन प्रमाण तोड़कर स्वर्ण जीता।
  3. 2013 में उन्हें भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से नवाजा।
  4. 2014 में इंचियोन एशियन पैराखेल में क्लब थ्रो का स्वर्ण नाम किया।
  • हालिया प्रदर्शन- 21.31 मीटर के नए एशियन प्रमाण से जीते। 9.89 मीटर डिरक्स थ्रो से एशियन खेल में ही सिल्वर भी जीता। 2015 में दोहा विश्व एथलेटिक्स में कलब थ्रो में सिल्वर जीता। 25.44 मीटर से नया एशियन प्रमाण बनाया। 2016 में क्लब थ्रो में फ्रांस में 26.58 मी. व पोलैंड में 27.81 मी. से सुधारे एशियन प्रमाण। 10.60 मी. डिरक्स थ्रो कर पोलैंड में ही अपना एशियन प्रमाण भी सुधारा।एफ51 श्रेणी के पैराएथलीट अमित सरोहा केवल 9.01 मीटर दूरी तक चक्का फेंक सके। वे सात प्रतिस्पर्धाओं में आखिरी स्थान पर रहे।
  • भारत के अन्य खिलाड़ी:-उनसे पहले मुरलीकांत पेटकर (स्वीमिंग, 1972 हेजवर्ग) और देवेंद्र झाझरिया (जेवलिन थ्रो, एथेंस 2004) में स्वर्ण जीता था। इस तरह 12 साल के बाद भारत को पैरालंपिक में स्वर्ण मिला हैं। भारत ने 32 साल बाद पैरालंपिक के एक ही इवेंट (वृत्तान्त) में दो पदक जीते हैं।
  • भारत दो पदक लेकर 27वें स्थान पर मौजूद था। इस खेल में 161 देश हिस्सा ले रहे हैं। 21 स्वर्ण के साथ 51 पदक जीतकर चीन शीर्ष पर बना हुआ है।
  • संदीप:-दूसरे दिन भारत के ही संदीप जेवलिन थ्रो का पदक जीतने से चूक गए। वे चौथे स्थान पर रहे। रियो पैरालंपिक खेलों के भाला फेंक एफ-44 स्पर्धा में भारतीय एथलीट संदीप इतिहास रचने से चूक गए। 20 साल पैरा एथलीट संदीप ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 54.30 मीटर की दूरी तक भाला फेंका और चौथे स्थान पर रहे। तथा कांस्य पदक जीतने से चूक गए।
  • नरेंद्र रणबीर- ने 53.79 मीटर दूरी का भाला फेंका और वह छठे नंबर पर रहे।
  • भारोत्तलन:- रियो पैरालंपिक के भारोत्तोलन स्पर्धा में भारतीय भारोत्तोलक फरमान बाशा कांस्य पदक से चूक गए। उन्हें पुरुषों के 49 किग्रा वर्ग में चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। उन्होंने तीन प्रयास में सर्वाधिक 140 किग्रा वजन उठाया। वहीं वियतनाम के कोंग वाल ली ने विश्व प्रमाण बनाते हुए 181 क्रिगा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। जॉर्डन के उमर करादा को रजत पदक जबकि हंगरी के नंदोर तुंकेल को कांस्य पदक मिला।

रियो पैरालंपिक में भारतीय दलों के नाम-निम्न हैं

  1. हाई जंप (उच्च छलांग)-मरियप्पन (तमिलनाडु), वरुण भाटी (उत्तर प्रदेश, शरद कुमार (दिल्ली) व रामपाल (हरियाणा)
  2. 1500 मीटर दौड़-अंकुर धामा (दिल्ली)
  3. जैवलिन (भाला) थ्रो- देवेंद्र, सुंदर सिंह गुर्जर (राजस्थान), रिंकू, नरिंदर, विरेंद्र धनखड़ (शॉटपुट में भी उतरेंगे), संदीप (चारों हरियाणा)
  4. शॉटपुट-दीपा मलिक (हरियाणा)
  5. क्लब थ्रो (मंडली, वेदना/व्यथा) - अमित कुमार (डिरकस थ्रो में भी उतरेंगे) और धर्मबीर (दोनों हरियाणा)
  6. डिरक्स थ्रो- कर्मज्योति दलाल (हरियाणा)
  7. पॉवरलिफ्टिंग -फरमान बाशा (कर्नाटक)
  8. स्वीमिंग (तैरना)- सुयश कुमार जाधव (महाराष्ट्र)
  9. शूटिंग (तीर या गोली चलाना/निशानेबाजी)-नरेश शर्मा (दिल्ली)
  10. तीरंदाजी-पूजा (हरियाणा)

इससे पहले 1984 में भीमराव केसारकर (सिल्वर) और जोगिंदर सिंह बेदी (ब्रॉन्ज) ने जेवलिन थ्रो (एल 6) में पदक जीते थे। बेदी ने उस पैरालंपिक में दो और पदक जीते थे।

  • 1968 में पहली बार भारत ने पैरालंपिक खेलों में भाग लिया।
  • 02 ओलंपिक 1976 व 1980 में नहीं जीता कोई पदक।
  • 04 पदक भारत को 1984 के लास एंजिल्स ओलंपिक में मिले।

पैरालंपिक में अब भारत के कुल 10 पदक हो गए हैं।

48 साल में भारत के नाम 10 पदक हैं-

  • मुरलीकांत पेटकर (1972) स्वीमिंग में स्वर्ण
  • जोगिंदर सिंह बेदी (1984) शांट पुट में कांस्य, जेवलिन और डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज।
  • भीमराव केसारकर (1984) जेवलिन थ्रो में सिल्वर।
  • देवेंद्र झाझरिया (2004) जेवलिन थ्रो में स्वर्ण।
  • राजिंदर सिंह राहेलू (2004) पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज
  • गिरीशा नागराजेगौड़ा (2012) हाई जंप (उच्च छंलाग) में सिल्वर।
  • मरियप्पन थंगावेलू ( 2016 ) हाई जंप (उच्च छंलाग) में स्वर्ण।
  • वरुण भाटी (2016) हाई जंप (उच्च छंलाग) में ब्रॉन्ज।

08 पदक हैं भारत के पास 2 स्वर्ण और 3-3 सिल्वर व ब्रांज के रूप में।

अन्य देश के दिव्यांग खिलाड़ी निम्न हैं:-

मिशेल-रियो में पैरालंपिक का जोश उफान पर हैं। 12 दिन चलने वाले खेल शुरू हो गए हैं। इसमें स्टिलवेल रियो पहुंच चुकी हैं। 42 साल की मिशेल ब्रिटिश कोलंबिया में कैबिनेट (मंत्रालय) मंत्री हैं। यह उनका चौथा पैरालंपिक है। वह 17 साल की थीं, तो दोस्त के पीछे दौड़ते हुए सीढ़ियों से फिसल गई। पीठ में आए फ्रैक्चर से अपाहिज हो गईं। तब व्हीलचेयर को ही हथियार बना लिया। मिशेल के नाम व्हीलचेयर रेसिंग (दौड़) के तीन विश्व प्रमाण हैं। मिशेल इसके पहले सिडनी (2000), बीजिंग (2004) और लंदन (2012) में भी हिस्सा ले चुकी हैं।

मिशेल की उपब्धियां निम्न हैं-

  • मिशेल अब तो मोटिवेशनल (प्रेरित) स्पीकर (व्याख्यान देनेवाला/सभापति) भी हैं।
  • तीन पैरालंपिक में 4 स्वर्ण और 1 सिल्वर (चाँदी पदक) जीत चुकी हैं। हालांकि मंत्री बनने के बाद यह मिशेल का पहला पैरालंपिक हैं।
  • मिशेल एकमात्र महिला पैरालंपिक एथलीट है जो दो अलग-अलग खेलों में स्वर्ण जीत चुकी हैं। सिडनी में व्हीलचेयर बास्केटबॉल का स्वर्ण, फिर व्हीलचेयर रेसिंग में भी पदक जीता।
  • मिशेल 2013 में पहली बार विधायक चुनी गई। पिछले साल क्रिस्टी क्लार्क की सरकार में पहली बार मंत्री बनी हैं।

मुझे याद नहीं कि आखरी बार अवकाश पर कब गई। घर मेंरे पति मार्क ही संभालते हैं। मैं सुबह 5.30 बजे उठकर सारे काम समाप्त कर 9 बजे कार्यालय पहुंच जाती हू और शाम को पैक्टिस । लोग अब मुझे ’स्पीड मिनिस्टर (गति मंत्री)’ भी कहने लगे हैं।

                                                                                                                                                                  मिशेल स्टिलवेल

  • तात्याना मैक्फेडेन- सोवियत संघ के लेनिनग्रेड शहर में जन्मी तात्याना मैक्फेडन जन्म के समय ही कमर के नीचे से लकवाग्रस्त थीं। जन्म के बाद मां उन्हें अनाथ आश्रम में छोड़कर चली गई। वहां वहीलवेयर तो थी नहीं। इसलिए वे छह साल की उम्र तक अपने हाथों के बल ही चलीं। उनके जीने की संभावना बहुत कम थी। कुछ समय बाद यूएस हेल्थ डिपार्टमेंट की कमिनश्नर (आयुक्त) (स्वास्थ्य विभाग) ने उन्हें गोद ले लिया और उन्हें बाल्टिमोर (अमेरिका) ले गई। तात्याना ने आठ साल की उम्र से व्हीलचेयर रेसिंग (दौड़) करना शुरू किया। उन्होंने 15 साल की उम्र में पहली बार ओलंपिक (एथेंस 2004) में हिस्सा लिया।
  • रायले बेट- ऑस्ट्रेलिया के रग्बी प्लेयर (खिलाड़ी) रायले बेट कहते हैं कि अगर उन्हें जादू की छड़ी मिल जाए, जिससे कि पैर दोबारा हासिल कर सकेंगे तो वे उस छड़ी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। वे लंदन ओलंपिक में स्वर्ण और बीजिंग में सिल्वर (चाँदी) पदक जीत चुके हैं। जन्म के समय से ही उनके पैर नहीं थे। 12 साल की उम्र तक उन्हें व्हीलचेयर पसंद नहीं था। इसलिए स्कैटबोर्ड की मदद से चलते थे। वे कहते थे कि व्हीलचेयर उन लोगों के लिए होता हैं, जो अपने लिए कुछ नहीं सकते हैं।
  • मेगन फिशर- ब्रिट्रेेन की मेगन फिशर बचपन में टेनिस खेलती थीं। 19 साल की उम्र में कार दुर्घटना में बाया पैर गंवा दिया। ब्रेन सर्जरी हुई। कोमा में चली गई। छह माह बाद कोमा से वापस आई। टेनिस छोड़कर साइक्िलिंग चुना। पैरासाइक्लिंग में 10 बार विश्व विजेता बन चुकी हैं।
  • बैड स्नाइटर- अमेरिकी सेना में लेफ्टिनेंट ब्रैंड स्नाइडर ने अफगानिस्तान में ब्लास्ट (विस्फोट) के दौरान अपनी आंखे गंवा दी थीं। फिर खेल को चुना। ओलंपिक में दो सवर्ण और एक सिल्वर (चाँदी) पदक जीत चुके हैं। उनके नाम 100 मी. फ्रीस्टाइल का विश्व प्रमाण है।
  • वेनिसा- जर्मनी की वेनिस लो ने रियो पैरालंपिक के लॉन्ग (लंबा) जंप (छलांग) (टी42) का स्वर्ण प्रमाण बनाकर जीता। उन्होंने 4.93 मीटर की जंप (छलांग) लगाकर पिछले साल विश्व सर्वश्रेष्ठविजेता में बनाए अपने ही प्रमाण (4.79 मी.) को तोड़ा। वेनिसा ने 15 साल की उम्र में ट्रेन एक्सीडेंट (रेल दुर्घटना) में अपने पैर गंवा दिए थे। वे दो महीने तक कोमा में रही थीं। खेल को लेकर जुनून बचपन से था। दुर्घटना के दो साल बाद ही ट्रैक (पदचिन्ह) पर वापसी कर ली थीं। अपने पहले पैरालंपिक (लंदन 2012) में खराब प्रदर्शन की वजह से 26 वर्षीय वेनिस ने खेल से नाता तोड़ लिया था। लेकिन एक साल बाद साथी एथलीट (पहलवान) कैंथरीन ग्रीन ने मोटिवेट (प्रेरित) किया तो फिर से खेल से जुड़ गई।
  • मोरान- इजराइल की लेरिबयन रोवर मोरान सैंमुअल ने 100. मी. का ब्रॉन्ज पदक जीता। यह रियो पैरालंपिक में इजराइल का पहला पदक हैं। विक्ट्री सेरेमनी के दौरान उन्होंने पोडियम पर अपने छह माह के बेटे अरद के साथ खुशी मनाई।
  • ऐगर्स एपिनिस -लातविया के ऐगर्स एपिनिस ने 20.83 मीटर दूर चक्का फेंककर स्वर्ण पदक जीता।
  • रॉर्ट जैकिमोविच -पौलेंड के रॉर्ट जैकिमोविच (19.10 मीटर) ने रजत जीता।
  • वेलिमिर सैंडोर -क्रोएशिया के वेलिमिर सैंडोर (18.24 मीटर) ने कांस्य पदक जीता।
  • रॉरी मैकस्वीने -न्यूजीलैंड संदीप से आगे न्यूजीलैंड के रॉरी मैकस्वीने रहे जिन्होंने 54.99 मी का थ्रो याने भाला फेंककर कांस्य पदक जीता।
  • स्टेवार्ट अकीम -त्रिनीददा एंड टोबेगो के स्टेवार्ट अकीम ने 57.32 मी को भाला फेंकते हुए विश्व प्रमाण बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
  • आयरलैंड- के जेसन स्मिथ ने रियो पैरालंपिक के 100 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण जीता। स्मिथ ने 10.64 सेंकड में रेस पूरी कर धरती का सबसे तेज पैरालंपियन होने का अपना खिताब भी बरकरार रखा हैं।
  • ग्रेट ब्रिटेन:-दूसरे नंबर पर मौजूद ग्रेट ब्रिटेन के 13 स्वर्ण सहित 29 पदक हैं।

अल्जीरिया के चार प्रमुख खिलाड़ी:- पैरालंपिक खेल में पुरुषों की 1500 मीटर की दौड़ (टी13 श्रेणी) में चार खिलाड़ियों (बाका, तमरू, हेनरी, फौद) ने दुनिया को चौंका दिया। चारों पूरी तरह से देख नहीं सकते, पर 1500 मीटर दौड़ में ओलंपिक स्वर्ण मेडेलिस्ट (पदक खोदक/पदक प्राप्त व्यक्ति) के कम समय में रेस पूरी कर ली। 23 दिन पहले अमेरिका के मैथ्यू ने 3 मिनिट 50 सेंकेड में रेस पूरी की थी।

पहले स्थान पर पैरालंपिक स्वर्ण विजेता अल्जीरिया के अब्देलातिफ बाका ने 3 मिनिट 48.29 सेकंड में दौड़ पूरी की। यह इवेंट (वृत्तान्त) का विश्व प्रमाण भी है।

मैंने इस सफलता के लिए पिछले दो साल में कड़ी मेहनत की हैं। पैराएथालीटों को आम एथलीटों जितनी मदद नहीं मिलती है। लेकिन हमने साबित कर दिया है कि हम किसी से कम नहीं हैं, मेरा अगला लक्ष्य टोक्यों ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।

                                                                                                                                                       अब्देलातिफ बाका

दूसरे स्थान पर तमिरू डेमिस (इथियोपिया) सिल्वर 3 मिनिट 49.49 सेकंड।

तीसरे स्थान के हेनरी किरवा (केन्या) ब्रॉन्ज पदक 3 मिनिट 49.59 सेकंड हैं।

चौथे स्थान पर फाउद बाका ये बाका के जुड़वा भाई हैं। 3 मिनिट 49.84 सेकंड की समय के अनुसार चौथे स्थान पर रहे।

  • अचमत हसीम:- दस साल पहले शार्क के हमले में उन्होंने अपना दायां पैरा गंवा दिया था। अब वे इन्हीं शार्क को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। द. अफ्रीका के अचमत हमसीम पूरी दुनिया में घूम-घूमकर लोगों को समुद्री जीवों के बारे में अवेयर (सावधान) करते हैं। इसके लिए वे और उनका दल सेमिनार भी आयोजित करती है। पैरा स्वीमर अचमत लंदन ओलंपिक में 100 मी. बटरफ्लाई (तितली) में नेशनल (राष्ट्रीय) प्रमाण बनाकर ब्रॉन्ज पदक जीत चुके हें। अब वे रियो पैरालिंपिक में भी हिस्सा ले रहे हैं। वे बताते है, ’यह 10 साल पहले की बात है। मैं और मेरा भाई लाइफ गार्ड (जीवन सुरक्षा) का काम करते हैं। एक बार हम प्रैक्टिस (अभ्यास) कर रहे थे। एक व्हाइट शार्क ने हम पर हमला कर दिया। मैंने उसका ध्यान भटकाने की कोशिश की। तब तक मेरा भाई बोट पर चढ़ गया। इस समय तक शार्क ने मुझे पानी में खींच लिया मैं डूबने लगा। भाई ने मेरा हाथ पकड़कर खींचा तब तक मेरा पैर शार्क के मुंह में था। मैं अपना एक पैर गंवा चुका था। इसके बाद मेरे कई ऑपरेशन (चीर फाड़) हुए। प्रॉस्थेटिक पैर लगाया गया। मैंने इसी से चलने की प्रैक्टिस (अभ्यास) शुरू की। स्वीमिंग (तैरना) करनी शुरू की। बीजिंग पैरालंपिक (2008)में हिस्सा लिया। पदक नहीं जीत सका। लंदन पैरालंपिक (2012) में राष्ट्रीय प्रमाण बनाकर ब्रॉन्ज जीता। 200 मी. बटरफ्लाई (तितली) में विश्व प्रमाण बनाया। उस समय सब मुझे ’शार्क बॉय’ कहकर पुकराते थे।’
  • उन्होंने कहा ’मैं शार्क अटैक (हमला) सरवाइवर था। फिर भी मैं उन्हें बचाने के लिए काम कर रहा था। मुझे लगता है कि अटैक का अनुभव और समुद्र से प्यार ने मुझे इस काम के लिए प्रेरित किया। इससे ही मैं प्रेरित होकर संरक्षण के लिए काम करने का फैसला कर पाया। शार्क समुद्र में संतुलन बनाने के लिए बहुत जरूरी हैंं। इसके अलावा कई लोग समुद्र में पाए जाने वाले जीव-जंतुओं को पकड़ते हैं। अपने शौक के लिए उन्हें मारते हैं। मैं शार्क को बचाने वाले एक एनजीओं (गैर सरकारी संस्था) से जुड़ा। पूरी दुनिया में घूमकर लोगों को शार्क को बचाने के लिए अवेयर किया। हमारे दल के सदस्यों ने युवाओं के अवेयर (सावधान) करने के लिए कई सेमीनार किए। अब हमारे एनजीओं शार्क के लिए सेंचुरी (अभ्यारण्य) खोलने पर विचार कर रहा है।

मरीका:- रियो, ब्राजील के रियो डि जनेरियो में चल रहे पैरालिंपिक में रजत पदक हासिल करने वाली बेल्जियम की खिलाड़ी मारीका वेरवूर्त ने सरेआम ऐलान किया है वह भविष्य में इच्छामृत्यु को चुनेंगी, मगर अभी नहीं। उन्होंने कहा कि अभी वह जीवन के हर छोटे-छोटे पल का आनंद उठा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब भी ऐसा पल आएगा, जिसमें अच्छे दिनों की तुलना में जब बुरे दिन ज्यादा होंगे, तब मैं अपनी इच्छा से मौत चुन लूंगी।

  • मांसपेषियों से विकार की असाध्य बीमारी से जूझ रही 37 वर्षीय मारिका वेरवूर्त धाविका ने व्हील चेयर की 400 मीटर की रेस में रजत पदक हासिल किया है। मसल्स (मांस पेशी) से जुड़ी इस बीमारी के चलते उन्हें पैरों में लगातार भीषण दर्द होता रहता है, जिससे वह मुश्किल से सो पाती हैं। बेल्जियम की मारीके वेरवूर्त स्पाइन की लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं।
  • बेल्जियम में यूथेनिसिया यानी इच्छामृत्यु वैध है। बेल्जियम के अखबारों ने खबर दी थी कि वह रियों के बाद अपना जीवन समाप्त कर सकती हैं, लेकिन उन्होंने अपनी जीत के बाद संवाददाता सम्मेलन में इन सभी अटकलों को नकार दिया।
  • 14 साल की उम्र में मारीका वेरवूर्त को अपनी इस बीमारी का पता चला था। तब से उनकी जिंदगी लगातार जंग जैसी हैं। वह 2008 में ही यूथेनिसिया (इच्छा मृत्यु) के कागजों पर दस्तखत कर चुकी हैं।
  • व्हील चेयर रेस में मारीका ने 2012 के लंदन पैरालंपिक में 100 मीटर में स्वर्ण और 200 मीटर में रजत पदक हासिल किया था।

मारीके बताती हैं कि,’ साल 2000 में मुझे स्वास्थ्य की समस्याएं शुरू हुई। एक बीमारी ने मुझे लकवाग्रस्त कर दिया। फिर मैं खेल से जुड़ी रही। पहले में ट्राएथलॉन में हिस्सा लेती थी। 2008 मैंने व्हीलचेयर स्प्रिंट में भाग लेना शुरू किया। शुरुआत मैं सब ठीक रहा है। लेकिन धीरे-धीरे मेरी समस्याएं बढ़ती जा रही थीं। भले ही मैं अपनी बीमारी से लड़ रही हूं लेकिन कड़ा प्रशिक्षण भी करती हूं। रियो के बाद मेरा खेल का जीवननिवृत्ति समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं रियो में स्वर्ण जीतना चाहती हूं। हालांकि यह इतना असान नहीं है। मुझे कड़ी चुनौती मिलेगी।

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 11.09.2016

Medal table 11.09.2016

पदक तालिका 11.9.16

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

21

17

13

51

ग्रेट ब्रिटेन

13

6

10

29

यूक्रेन

8

7

13

28

अमेरिका

4

9

4

17

ब्राजील

03

6

2

11

24-भारत

1

0

1

2

नोट- पदक तालिका भारतीय समयानुसार रात 11.30 बजे तक

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 12.09.2016

Medal table 12.09.2016

पदक तालिका12.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

29

28

21

78

ग्रेट ब्रिटेन

20

11

15

46

यूक्रेन

14

10

16

40

अमेरिका

10

13

09

32

ब्राजील

06

09

06

21

36-भारत

1

0

1

2

नोट- पदक तालिका भारतीय समयानुसार रात 11.30 बजे तक

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 13.09.2016

Medal table 13.09.2016

पदक तालिका13.9.16

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

41

33

24

98

ग्रेट ब्रिटेन

25

14

19

58

यूक्रेन

19

14

19

52

अमेरिका

13

15

11

39

ब्राजील

06

14

07

27

36-भारत

1

1

1

3

नोट- पदक तालिका भारतीय समयानुसार रात 11.30 बजे तक

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 14.09.2016

Medal table 14.09.2016

पदक तालिका14.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

55

42

28

125

ग्रेट ब्रिटेन

31

16

20

67

यूक्रेन

22

19

21

62

अमेरिका

18

17

14

49

ब्राजील

10

18

10

38

42-भारत

1

1

1

3

नोट- पदक तालिका भारतीय समयनुसार रात 12.00 बजे तक

सुन्दर:-

  • रियो पैरालंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाले राजस्थान के सुंन्दर सिंह गुर्जर जैवलियन थ्रो स्पर्द्धा के लिए समय पर नहीं पहुंचे और उन्हें डिस्क्वालीफाई कर दिया गया। सुन्दर के स्पर्द्धा में समय पर नहीं पहुंचने को लकर अलग-अलग कारण सामने आ रहे है, लेकिन कोई भी स्पष्ट रूप से कुछ कहने को तैयार नहीं है। खेल के अनुसार स्पर्द्धा से पहले कॉल रूम में तीन बार सुन्दर का नाम पुकार गया, लेकिन जब वे नहीं पहुंचे तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। 1.20 मिनट देरी से पहुंचने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय पैरालंपिक समिति के उपाध्यक्ष गुरशरण सिंह ने कहा है कि वह इस घटना की जांच कराएंगे।
  • भारत की ओर से पुरुष जैवेलियन (भाला) थ्रो स्पर्द्धा में तीन एथलीटों (पहलवानों) देवेन्द्र, सुन्दर और रिंकू ने हिस्सा लिया था। देवेन्द्र ने जहां विश्व रिकॉर्ड (प्रमाण) के साथ स्वर्ण पदक जीता, वहीं रिंकू पांचने स्थान पर रहे। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सुन्दर नाम पुकारे जाने के बावजूद नहीं पहुंचे।
  • सुन्दर के पूर्व कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुके आरडी सिंह ने इस मामले पर दुख जताया है। उन्होंने इसका सारा दोष कोच महावीर सैनी पर मढ़ा है। हनुमानगढ़ के सिंह ने कहा कि उनकी गलती के कारण सुन्दर के पदक जीतने का सपना टूट गया।
  • कॉल रूम में सभी खिलाड़ी एक साथ मौजूद थे और वॉर्मअप कर रहे थे। सभी एथलीटों के नाम कई बार पुकारे गए थे। मुझे समझ नहीं आया कि हुआ क्या। या तो उनका ध्यान अपने अभ्यास में ही लगा था और उन्होंने अपना नाम अनसुना कर दिया। इस मामले की जांच होगी।

तथ्य:- निम्न हैं-

  • सुन्दर के परिवार का तर्क है कि भारतीय पैराएथलीट को अंग्रेजी समझ नहीं आने के कारण वह समझ नहीं पाए कि उनका नाम पुकारा जा रहा हैं। इस कारण स्पर्द्धा के शुरू होने के समय नहीं पहुंचे।
  • एक खेल वेबसाइट के अनुसार स्पर्द्धा से पहले कॉल रूम में सुन्दर वॉर्मअप हो रहे थे और अंतिम तैयारियों में जुटे हुए थे, लेकिन वे अभ्यास में इतने मग्न थे कि अपना नाम सुन ही नहीं पाए।
  • एक विवरण में कहा जा रहा है कि सुन्दर का एक फोटोग्राफर (चित्र खींचने वाला) फोटो ले रहा था वे मुख्य मैदान से काफी दूर थे और तीसरी बार नाम पुकारे जाने के दो मिनिट बाद पहुंचे, लेकिन तब तक उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।
  • सुन्दर के जीजा एसएस घटाना का कहना है कि सुन्दर के साथ साजिश हुई है। जब सुन्दर प्रतियोगिता की ओर जा रहा था तो वॉर्मअप के दौरान कनाडाई पत्रकार के माला पहनाई और वह होश खो बैठा। रियो में जाने से पहले भी जयपुर में एक जूस की दुकान के संचालक के जरिये सुन्दर को नशीला जूस पािलाने की साजिश हुई थी।
  • 2 अगस्त 2016 को शेर सिंह घटाना ने आरोप लगयाया था कि देवेन्द्र , संन्दर को डोप जांच में फंसाने के लिए साजिश रच रहे हैं।
  • रिंकू, देवेन्द्र व सुन्दर तीनों में से पदक के सबसे तगड़े दावेदार थे। उन्होंने इसी साल मार्च में पैरा राष्ट्रीय में 68.42 मीटर जेवलिन (भाला) फेंका था। इसके अलावा इसी साल दुबई में आईपीसी एथलेटिक्स (पहलवान) ग्रांपी में स्वर्ण जीता था।

अब जो हो गया वह हो गया। अगले साल ही विश्व सर्वश्रेष्ठविजेता है मैं उसमें खुद को साबित कर दूंगा। मुझे दुख है कि मै बिना पदक के ही वापस आंऊगा।

सुन्दर सिंह गुर्जर

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 15.09.2016

Medal table 15.09.2016

पदक तालिका 15.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

66

52

35

153

ग्रेट ब्रिटेन

38

18

24

80

यूक्रेन

27

21

24

72

अमेरिका

22

25

23

70

ब्राजील

10

21

13

44

31-भारत

2

1

1

4

नोट- पदक तालिका भारतीय समयनुसार रात 11.30 बजे तक

  • विदेशों के खास खिलाड़ी-नौवे दिन कई खिलाड़ियों ने पदक जीते। लेकिन कुछ खिलाड़ियों के स्वर्ण खास रहे। एक ने उसी दिन पदक जीता, जिस दिन कई सालों पहले उसके साथ दुर्घटना हुई थी। एक पावर लिफ्टर ने 300 किलो वजन उठाकर सबको चौंका दिया। महिला तैराक ने उम्र के बंधनों को पीछे छोड़ा।
  • इटली की जनार्दी- पूर्व फॉर्मूला वन ड्राइवर इटली के एलेक्स जनादी ने 15 सितंबर 2001 के दिन रेस के दौरान जबरदस्त कार दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा दिए थे लेकिन रियो पैरालंपिक में इस घटना के ठीक 15 वर्ष बाद इसी दिन उन्होंने स्वर्ण पदक जीत इस दिन की बुरी यादों को पीछे छोड़ उसे अपने लिए सादगार बना दिया।
  • इटली के पूर्व एफवन ड्राइवर 49 वर्षीय जनार्दी ने ब्राजील के रियों में चल रहे पैरालंपिक खेलों की 20 किलोमीटर की एचएफ हैड साइक्लिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। यह उनका इस स्पर्धा में दूसरा स्वर्ण है। इससे पहले चार वर्ष पहले उन्होंने लंदन पैरालंपिक में भी स्वर्ण जीता था। जनार्दी ने कहा आमतौर पर मैं भगवान के बारे में नहीं सोचता हूं, लेकिन आज तो हद ही हो गई। अब तो मुझे सचमुच अपना सिर उठाकर भगवान की ओर देखकर उन्हें धन्यवाद करना ही पड़ेगा। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं। मुझे लगता है कि जीवन कभी न खत्म होने वाली विशेष चीज है।
  • जनार्दी ने 15 सिंतबर 2001 को जर्मनी के लॉसस्ट्रिंग में रेस के दौरान भयानक कार दुर्घटना में वे इस तरह घायल हुए थे कि उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। वह इस कदर घायल हो गए थे कि उनका दिल सात बार रूका था, लेकिन वह करिश्माई रूप से बच गए, लेकिन घुटने से नीचे उनके दोनों पैरों को काटना पड़ा। लंदन 2012 और रियो 2016 के स्वर्ण पदक सर्वश्रेष्ठविजेता जनार्दी अमेरिका की चैंप कार सीरीज जिसे अब ईडी कार सीरीज के नाम से जाना जाता है, के लिये वर्ष 1991 से 1999 के बीच 41 ग्रां प्री में हिस्सा ले चुके हैं।
  • कजाकिस्तान की जुल्फिया- गाबिदुलिना जुल्फिया ने 50 साल की उम्र में स्वर्ण पदक जीता। वे 100 मी. फ्रीस्टाइल (स्वतंत्र रूप से प्रधान पद या पदवी का प्रयोग करना) स्वीमिंग (तैरने) में पहले नंबर पर रहीं। जुल्फिया ने एस-3 श्रेणी में 1:30.07 मिनट का समय लिया। वे पैरालंपिक में पदक जीतने वाले कजाकिस्तान की पहली खिलाड़ी भी बन गई हैं। जुल्फिया 30 साल की उम्र में खेल से जुड़ी थीं। वे व्हीलचेयर रेसिंग (दौड़) करती थीं।
  • ईरान के रहमान- ईरान के पावर लिफ्टर रहमान सियामंद ने 107 किग्रा वजन वर्ग का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 310 किलो वजन उठाकर विश्व प्रमाण बनाया। पैरालंपिक इतिहास में पहली बार किसी खिलाड़ी ने 300 किलो से ज्यादा वजन उठाया। रहमान जब पैदा हुए तब वे एबनॉर्मल (असाधारण) थे। उनके माता-पिता ने काफी इलाज कराया। उनका वजन भी बढ़ता जा रहा था। पिता ने पावर (ताकत) लिफ्टिंग सिखाने का फैसला किया। उन्हें यह खेल पसंद आने लगा। उनका दिव्यांग होना इसमें बाधा नहीं बना।

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 16.09.2016

Medal table 16.09.2016

पदक तालिका 16.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

75

58

39

172

ग्रेट ब्रिटेन

45

24

29

98

यूक्रेन

32

23

27

82

अमेरिका

28

30

25

83

ऑस्ट्रेलिया

11

22

20

53

37-भारत

2

1

1

4

नोट- पदक तालिका भारतीय समयनुसार रात 12.00 बजे तक

सिटिंग वॉलीबॉल:-

  • ईरान की मुर्तजा:- की सिटिंग वॉलीबॉल दल रियो पैरालंपिक में धूम मचा रही है। इस दल ने लगातार तीन मैचों में एकतरफा जीत दर्ज की है और स्वर्ण पदक जीतने की सबसे मजबूत दावेदार है। ईरान की इस सफलता में एक खिलाड़ी की भूमिका सबसे अधिक है। नाम है मुर्तजा मेहरजाद। 28 साल की उम्र में उनकी लंबाई 8 फीट, 1इंच है और यह अबभी बढ़ रही है। वे दुनिया के दूसरे सबसे लंबें इंसान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी खेल के सबसे लंबें खिलाड़ी हैं। केवल तुर्की के सुल्तान कोसेन (8 फीट, 2 इंच) ही उनसे ज्यादा लंबे हैं। 15 साल की उम्र में एक साइकिल दुर्घटना के बाद उनके दाएं पैरा का विस्तार रुक गया। धीरे-धीरे उनका बायां पैरा दाएं की तुलना में छह इंच लंबा हो गया। इस कारण से वे बिना सहारे के चलने में भी असमर्थ हो गए। हालांकि उन्होंने लाचारणी में जिंदगी गुजारने की जगह कुछ अलग करने की ठानी और पांच साल पहले सिटिंग वॉलीबॉल में हाथ आजमाया। इसमें उन्हें सफलता मिलने लगी और इस साल मार्च में उनका चयन ईरान की पैरालंपिक दल में हो गया
  • सामान्य वॉलीबॉल की तरह सिटिंग वॉलीबॉल में अधिक लंबाई खिलाड़ी के लिए प्लस प्वांइट (जोड़े हुए बिन्दु) मानी जाती है। मुर्तजा के लिए तो यह प्वांइट कुछ ज्यादा ही प्लस था। बैठ कर भी उनकी हाथ की पहुंच छह फीट से ज्यादा है। इस कारण से वे बेहतरीन स्मैश जमाते हैं साथ ही उनकी झन्नाटेदार सर्विस (सेवा) भी विरोधियों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है।
  • बीमारी- मुर्तजा एक्रोमिगेली बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में पीड़ित के शरीर में विस्तार हार्मोन का प्रोडक्शन (निर्माण) सामान्य से कहीं ज्यादा होता है। इसी कारण से मुर्तजा की लंबाद इतनी अधिक हो गई और अब भी बढ़ रही है। इस बीमारी से ग्रस्त लोग बहुत लंबी जिंदगी नहीं जी पाते हैं। लेकिन, मुर्तजा को इसका अब मलाल नहीं है। देश का सिर ऊंचा करने का उन्हें गर्व है। उन्हें इस बात की भी खुशी है कि उन्होंने अपनी बड़ी कमजोरी को बड़ी मजबूती में बदल दिया हैं।

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 17.09.2016

Medal table 17.09.2016

पदक तालिका 17.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

85

69

43

197

ग्रेट ब्रिटेन

52

30

32

114

यूक्रेन

36

28

31

95

अमेरिका

32

34

27

93

ऑस्ट्रेलिया

15

24

22

61

40-भारत

2

1

1

4

नोट- पदक तालिका भारतीय समयनुसार रात 12.00 बजे तक

ऑस्ट्रेलिया की नेस मर्बी:-

  • रियो डि जनेरियो पैरालंपिक गांव में एक कुत्ता इन दिनो प्रसिद्धि में बना हुआ है। आप सोचेंगे कि ये कुत्ता सुरक्षा दल के साथ होगा। लेकिन ऐसा नहीं है ये कुत्ता कनाड़ा की एथलीट नेस मर्बी का गाइड (मार्ग-दर्शक) है।
  • मर्बी देख नहीं सकती हैं, लेकिन लेक्सिंगटन नाम का ये कुत्ता उन्हें रियो पैरालंपिक में राह दिखा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में जन्मीं कनाडा की डिस्कस थ्रोअर नेस मर्बी का कहना है कि लोगों को इसके बारे में समझना बेहद मुश्किल है।
  • मर्बी कहती है कि लेक्सिंगटन इतना प्यारा है कि जब वह डयूटी (धर्म/कर्तव्य) पर होता है तो लोग उसको छुए बिना नहीं रह पाते है, लोगों को उससे दूर रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उसका काम करना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन बावजूद इसके वो अपने काम में जुट जाता है। मर्बी ने कहा मैंने सुना था कि गाइड (मार्ग-दर्शक) कुत्ता रखना बेहद मुश्किल में भी डाल देता है। लेकिन जो भी हो ये एक ऐसा साथी है जो 24 घंटे डयूटी कर सकता है। आपका दोस्त बनकर हर पल आपके साथ रहता हैं।
  • मर्बी की मानें तो लेक्सिंगटन गांव में गुडलक (अच्छा भाग्य) टोकन बन गया है। हर एथलीट अपने इवेन्ट (वृत्तान्त) से पहले लेक्सिंगटन को छूना और प्यार करना नहीं भूलता हैं।
  • डिस्कस थ्रो में मर्बी रियो पैरालंपिक में छठ स्थान पर रहीं। लेक्सिंगटन के साथ मर्बी दुनिया के कई देशों में खेलने जा चुकी हैं। पिछले साल ही अमेरिका खेल में जैवलिन थ्रो में रजत और डिस्कस थ्रो में कांस्य जीता था। मर्बी ने कहा, हमने साउ पाउलो, रियो डि जनेरियों, एरिजोना, केलीफोर्निया जैसे देशों की यात्रा की है। अब उन्हें अगले वर्ष लंदन जाना है।
  • पसंद-लेक्सिंगटन को पैरालंपिक गांव में ब्राजील की मशहूर डिश पाओ डेक्वीजो काफी पसंद है। लोगों ने लेक्सिंगटन का नाम लेक्सिंगटन डिश पाओ डे क्वीजो रख दिया है।

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 18.09.2016

Medal table 18.09.2016

पदक तालिका 18.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

98

76

49

223

ब्रिटेन

60

34

39

133

यूक्रेन

38

33

36

107

अमेरिका

36

40

29

105

ऑस्ट्रेलिया

18

27

26

71

42-भारत

2

1

1

4

नोट- पदक तालिका भारतीय समयनुसार रात 11.45 बजे तक

  • भारत की समाप्त:-रियो पैरोलंपिक में भारत चार पदक के साथ भारत का अभियान समाप्त हुआ। भारत ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता जो अभी तक पैरालंपिक में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। भारत ने 19 एथलीटों का सबसे बड़ा दल पैरालंपिक में भेजा था।

रियो पैरालंपिक

Table showing the Medal table 19.09.2016

Medal table 19.09.2016

पदक तालिका 19.9.2016

देश

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल

चीन

105

81

51

237

ग्रेट ब्रिटेन

64

39

42

147

यूक्रेन

41

37

39

117

अमेरिका

40

42

30

112

ऑस्ट्रेलिया

21

29

29

79

42-भारत

2

1

1

4

नोट- पदक तालिका भारतीय समयनुसार रात 11.45 बजे तक

  • ब्राजील समर्थन:- ओलंपिक एक्वेटिक मैदान में पैरालंपिक का आखिरी मुकाबला 4 गुणा 100 मी. रिले तैरना का हुआ। इसमें अपने देश का दल का समर्थन बनने के लिए ब्राजील के हजारों लोग पहुंचे। उनके समर्थन से ही ब्राजील दल यहां पर कांस्य जीतने में सफल रहा।
  • समापन में दुर्घटना:-रियो पैरालंपिक खेलों का समापन ट्रेजेडी (दुर्घटना) के साथ हुआ। खेलों के अंतिम दिन ईरान के साइक्लिस्ट सरफराज बहमान गोलबार्नेजाड की रियो पैरालंपिक में रेस के दौरान टक्कर के बाद मौत हो गई। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (आईपीसी) के अनुसार, 48 वर्षीय बहमन को टक्कर के बाद दिल का दौरा पड़ा। उन्हें मौके पर ही स्वास्थ्य सहायता दी गई। एंबुलेंस के माध्यम ’यूनिमेड रियो हॉस्पिटल’ ले जाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद ही उनकी मौत हो गई।’
  • बहमन ने 1980 के युद्ध में एक पैरा गंवाया था। सी-4 के ट्रायल में 14वां स्थान हासिल किया। वे रियो में अपनी दूसरी रेस में हिस्सा ले रहे थे। उनके मित्र हाशेम रास्तेगारिमोबिन के अनुसार, बहमन ने 2002 में साइक्लिंग में कॅरिअर (जीवनवृत्ति) की शुरुआत की थी। 1980 में युद्ध में लगी चोट में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया था। आईपीसी के अनुसार, घटना की जांच शुरू कर दी गई हैं। वैसे, पैरालंपिक खेलों के 56 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक एथलीट (पहलवान) की इवेंट (वृत्तान्त) के दौरान मौत हुई है।
  • भारत का स्वर्णिम सफर:- भारत के लिहाज से रियो पैरालंपिक यादगार बन गया। भारत के मरियप्पन ने हाई जंप में स्वर्ण और वरूण भाटी ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया, इसके बाद शॉट पुट दीपा मलिक ने रजत पदक जीता और इतिहास में अपना नाम लिखाया। इसके बाद देवेन्द्र झाझरिया ने जैवलिन थ्रो में अपना ही प्रमाण तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस तरह भारत ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता।
  • समाप्त:- 12 दिन के यादगार सफर के बाद रियो पैरालंपिक समाप्त हो गया। भारत के लिए ये पैरालंपिक स्वर्णिम रहा है, जिसमें भारत ने अब तक का सबसे सफल प्रदर्शन किया है। कई एथलीटों ने पदक जीतकर अपने सपने पूरे किए। इस बार पैरालंपिक खेल में 209 प्रमाण टूटे। रियो डि जनेरियो में पैरालंपिक के समापन समारोह में ब्राजील की सांबा कलाकार ने प्रस्तुति दी। सबसे ज्यादा पदक 239 चीन ने जीते। 3 हजार कर्मचारी आयोजन को सफन बनाने में लगे हुए थे। 1500 पदक 82 देशों के एथलीटों को बांटे गए। 159 देश इस पैरालंपिक का हिस्सा बने। 15 हजार वॉलिंटियर 119 देशों के आए। पूरी दनिया से 4300 एथलीटों ने भाग लिया। रियो पैरालंपिक में 21 लाख टिकट बिके।
  • उपसंहार:- इस तरह से भारत ने इस बार ओलंपिक से अधिक पैरालंपिक में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करके भारत को ऊँचाइयों में पहुंचा दिया। ये एथलीट दिव्यांग होते हुए भी अपना बेहतर प्रदर्शन दिखाया जिस पर प्रत्येक भारतवासी को गर्व हें। ऐसा ही साहस और हिम्मत अगर हर व्यक्ति में देखने को मिले तो वह दिन दूर नहीं जब हम विदेशों से आगे निकल जायेंगे। हालांकि विदेशों में भी दिव्यांगों का अच्छा प्रदर्शन रहा हैं। आगे भी हम भारतवासी यही चाहेंगे कि हर देश खिलाड़ी का प्रदर्शन आगे होने वाले खेल टोक्यो में 2020 में बेहतर प्रदर्शन हो। इसके लिए हर खिलाड़ी को भारत की ओर से शुभकामाएं हैं।

- Published/Last Modified on: October 14, 2016

Sports

Monthy-updated, fully-solved, large current affairs-2019 question bank(more than 2000 problems): Quickly cover most-important current-affairs questions with pointwise explanations especially designed for IAS, NTA-NET, Bank-PO and other competetive exams.