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प्रधान मंत्री जन-धन योजना (Prime Minister Jan Dhan Yojana - In Hindi - 2014) [ Current News (Concise) - ]

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प्रस्तावना: यदि जरूरत पड़ने पर हमारे पास पैसे हो तो हमारी सारी चिन्ताएँ दूर हो जाती हैं। जीवन में आपात स्थितियाँ कभी न कभी आ जाती हैं। ऐसे में अगर पैसा पास में हो, तो किसी के सामने हाथ फैलाना नहीं पड़ता, परन्तु आज की पीढ़ी भौतिकतावाद से प्रभावित है। उनके जीवन का मूलमंत्र है - कमाओं, खाओ, मौज करो किन्तु ऐसा करते समय वे दूरदर्शिता को भूल जाते हैं, भविष्य की चिन्ता न करके धन की बर्बादी करते हैं। अकस्मात आ जाने वाले छोटे-बड़े खर्चे, जन्म दिन, विवाद के अवसर, बीमारी आदि आते ही रहते हैं। अत: समझदारी इसी में है कि थोड़ा-थोड़ा करके पैसा बचाकर उसे बैंक में जमा कराये जाए। इसलिए चाहे गरीब ही या सामान्य वर्ग हो, सभी के लिए प्रधान मंत्री मोदी जी 15 अगस्त, 2014 को एक जन-धन योजना की घोषणा की है, जिसका लाभ सभी वर्गों को लोगों को मिलेगा। सभी की समस्या को ध्यान में रखते हुए इस योजना को शुरू किया जाता है ताकि बैंक खाता सभी के पास हों।

जन-धन योजना एक नई शुरूआत

सत्ता में आने के बाद अपनी सबसे महत्वाकांक्षी और दूरगामी लक्ष्य वाली योजना नरेन्द्र मोदी सरकार आज दिनांक 28 अगस्त, 2014 से शुरू करेंगे। हर घर को एक बैंक खाता और बीमा सुरक्षा मुहैया करने वाली प्रधानमंत्री जन-धन योजना एन.डी.ए. सरकार के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसे आरम्भ करने के लिए की गई तैयारियों से लगता है। प्रधान मंत्री जी विशेष समारोह में इस योजना की शुरूआत करेंगे और हर राज्य में उसके समानान्तर एक आयोजन होगा। नये बैंक खाते खोलने के लिए आज 60,000 कैम्प लगाए जायेंगे। बैंक खाता खुलते ही खाताधारी को ‘रू-पेय’ नामक डेबिट कार्ड मिलेगा, जिसमें एक लाख रूपये का दुर्घटना बीमा शामिल होगा।

योजना के दूसरे चरण में हर खाताधारी को इसी डेबिट कार्ड के जरिये जीवन बीमा सुरक्षा और पेंशन योजना के लाभ दिये जायेंगे। अगले छ: महीनों में हर खाते को 5,000 के ओवर ड्राफ्ट की सुविधा भे देने का लक्ष्य है। अनुमान है कि योजना के दायरे में साढ़े सात करोड़ रूपये (जिनमें डेढ़ करोड़) शहरों में है, को लाया जायेगा। अधिकारियों के मुताबिक ‘जन-धन’ सिर्फ बैंक खाता नहीं है, बल्कि इसके साथ लेनदेन को कैशलेस (बे-नगदी) और अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने की शुरूआत हो रही है। जाहिर है, एक ऐसे देश में, जहाँ लोगों में कौशल की कमी है और डिजिटल तकनीक का सीमित प्रसार है, यह योजना क्रान्तिकारी साबित हो सकती है, बशर्ते इसके अमल को प्रभावी बनाने की कारगर तैयारी भी सरकार ने की हो। स्वतंत्रता दिवस को लाल किले से राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए प्रधान मंत्री ने इस योजना की घोषणा की व ‘विशालकाय प्रयास’ बताया और आश्वस्त किया था। नरेन्द्र मोदी को यह सुनिश्चित करना है कि इस योजना का हश्र आधार कार्ड या अतीत की दूसरी कल्याण योजनाओं जैसा न हो। वे ऐसा कर पाए तोदेश में वित्तीय समावेश की दिशा में यह अप्रतिम उपलब्धि होगी।

उदयपुर मावली में जन-धन योजना का आगाज

शहर के लीड बैंक एस.बी.बी.जे. के जरिये प्रधान मंत्री जन-धन योजना की शुरूआत टाउन हॉल में सांसद अर्जुन लाल मीणा करेंगे। एस.बी.बी.जे. के प्रबन्ध निदेशक ज्योति घोष योजना की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। मावली शाखा प्रबन्धक के.आर. मीणा ने बताया कि जन-धन योजना में खोले गए खातों में खाताधारकों का एक लाख रूपये का बीमा होगा। योजना के तहत प्रत्येक परिवार के दो सदस्यों के बैंक खाते खोले जायेंगे। जिले के जिन गाँवों में बैंकिंग सुविधा नहीं है, वहाँ हर पंचायत में बिजनेस करस्पोन्डेन्स नियुक्त किए गए है। इनके जरिये बैंकिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराई जायेंगी। योजना से हर बैंक को जोड़ा गया है। यह योजना केवल उन बैंकों में नहीं लागू होगी, जहाँ कोर बैंकिंग सिस्टम नहीं है।

आर्थिक छुआछूत दूर करेगी जन-धन योजना

29 अगस्त, 2014 को शुरू की गई इस योजना में पहले ही दिन डेढ़ करोड़ खाते खेले गए। मोदी जी बोले आर्थिक छुआछूत दूर करेगी यह योजना केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी यह योजना 29 अगस्त से शुरू हो गई है। सरकार ने अगले साल 26 जनवरी तक 7.5 करोड़ परिवार को इस योजनासे जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय यूनिफाइड यू.एस.एस.डी. प्लेटफार्म को भी शुरूआत की। यह सुविधा बेसिक जी.एस.एम. मोबाइल फोन के जरिये बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है। इस पर मोदी ने अपनी कहानी सुनाते हुए कहा ‘मेरा खाता बन्द करने में बैंक को 20 साल लग गए थे।’ 29 अगस्त; गुरूवार को देश भर में 76 स्थानों पर बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 20 मुख्य मंत्रियों और केन्द्रीय मंत्रियों ने भाग लिया। देशभर में 77,852 शिविर लगाए गए थे। प्रधान मंत्री जी ने 15 अगस्त को जन-धन योजना शुरू करने की घोषणा की थी।

इस योजना की शुरूआत मोदी जी दिल्ली में की। इसी दौरान एक समारोह में जयपुर में मुख्य मंत्री वसुन्धरा राजे जी ने 10 लोगों को जीरो बेलेन्स के खातों के प्रमाण पत्र दिए। राजे जी ने कहा कि केन्द्र की प्रधानमंत्री जन-धन योजना और राज्य सरकार की भामाशाह योजना के मेल से प्रदेश में न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण एवं वित्तीय समावेशन का लक्ष्य हासिल होगा, बल्कि इन दोनों योजनाओं के साथ-साथ लागू होने से राज्य की जनता को दोहरा लाभ मिलेगा। भामाशाह योजना में महिला को परिवार की मुखिया बनाया गया है। इसके तहत बजट घोषणा के अनुरूप लाभार्थी बी.पी.एल. परिवार की महिलाओं को दो हजार रूपये की राशि अकाउण्ट के माध्यम से दी जायेगी।

बैंक खाते खुले

30 अगस्त तक 1.84 करोड़ खाते खोले गये। इस योजना का ऐसा शुभारम्भ सबके सहयोग से ही मुमकिन हो पाया है।

खाते के नियम

केवल महिलाओं के लिए ही खाते खोले जायेंगे। अगर आपका बैंक में पहले से ही खाता है, लेकिन रूपे डेबिट कार्ड नहीं है, तो दुबारा खाता खोलने की आवश्यकता नहीं है। आपका जो खाता पहले से है, उस पर ही अपना रूपे डेबिट कार्ड ले सकते है। ऐसी सभी कार्डों पर रूपये 1.0 लाख की दुर्घटना बीमा योजना उपलब्ध है। योजना के तहत बैंक शिविर 25 जनवरी, 2015 तक जारी रहेंगे तथा आम जनता अपना खाता इस तारीख तक अपनी नजदीकी बैंक शाखा/बैंक मित्र से खुलवा सकती है। प्रधान मंत्री दव्ारा घोषित रूपये 30,000 के जीवन बीमा से संबंधित दिशा-निर्देश शीघ्र ही जारी किये जायेंगे।

बन्द हुए खाते फिर एक्टिवेट होंगे, ब्याज भी मिलेगा

योजना वर्ष 2008 में शुरू की गई थी। हालांकि बाद में राज्य में कांग्रेस सरकार आने से यह ठण्डे बस्ते में चली गई। शासन सचिव (वित्त) सुभाष चन्द्र गर्ग ने बताया - फरवरी, 2008 में 45.78 लाख महिलाओं के नाम योजना में जोड़े गए थे। 29.07 लाख महिलाओं के बैंक अकाउण्ट खोले गए थे, लेकिन 8 हजार को ही कार्ड जारी हो पाए थे।

योजना पर रोक लगाने से 160 करोड़ रूपये बैंकों में ही पड़े रहे गए। उन खातों को फिर एक्टिवेट किया जायेगा। लाभार्थियों को पाँच साल का ब्याज भी मिलेगा। योजना के लिए टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 हैं।

जन-धन योजना के साथ भामाशाह योजना को भी शुरू किया गयाहै। उदयपुर में हुए राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य मंत्री जी ने भामाशाह योजना की शुरूआत की। उन्होंने योजना के लिए पहले साल 600 करोड़ रूपये देने की घोषणा की। इससे डेढ़ करोड़ महिलाओं को फायदा होगा। आठ महिलाओं को स्मार्ट कार्ड सौंपकर योजना की शुरूआत की गई। मुख्य मंत्री जी ने इस योजना को देश की सबसे बड़ी फाईनेन्शियल स्कीम है।

विशेष सुविधाएँ

  1. पैसों की सुरक्षा के साथ ब्याज।
  2. डेबिट कार्ड के जरिये किसी भी ए.टी.एम. से पैसे निकालना।
  3. रूपये 1.0 लाख का दुर्घटना बीमा।
  4. कोई न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता नहीं है।

अन्य सुविधाएँ

  1. भारत में कहीं भी आसानी से पैसे भेजना।
  2. यदि आप हितग्राही है तो सरकारी योजनाओं की राशि खाते में सीधे पाना।
  3. 6 माह तक खाते के संतोषजनक परिचालन के बाद ओवर ड्राफ्ट की सुविधा है।
  4. पेंशन, बीमा, इत्यादि।

हरेक व्यक्ति को एक मल्टीपरपज स्मार्ट कार्ड मिलेगा, जो उसका परिचय पत्र भी होगा। सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ इसी कार्ड (भामाशाह) के जरिये मिलेगा, जो परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते से जुड़ा होगा। योजनाएँ निम्न है:-

  1. राशन कार्ड और जननी सुरक्षा।
  2. खाद्य सुरक्षा योजना।
  3. मनरेगा जॉब कार्ड।
  4. इन्दिरा आवास योजना।
  5. जनश्री बीमा योजना।
  6. इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना।
  7. राजस्थान सामाजिक सुरक्षा योजना।
  8. सरकार छात्रवृत्तियाँ।

कहाँ से मिलेगी सुविधा

शहरी क्षेत्रों में ई-मित्र कियोस्क, ग्रामीण क्षेत्रों में सी.एस.सी. कियास्क, भारत निर्माण सेवा केन्द्रों, पोस्ट ऑफिसों व बैंक शाखााओं, प्राथमिक कृषि को-ऑपरेटिव सोसायटी के जरिये ये यह सुविधा मिल सकेगी।

कलक्टर होंगे मैनेजर

योजना में कलक्टर जिला भामाशाह मैनेजर (डी.बी.एम.), जिला स्तरीय सांख्यिकी अधिकारी भामाशाह ऑफिसर, ब्लॉक लेवल सांख्यिकी अधिकारी, ब्लॉक ऑफिसर होगा। ये कैम्प लगवाकर, डाटा अपडेशन व वेरिफिकेशन, सूचना, शिक्षा और संवाद (आई.ई.सी.) आदि करेंगे।

बैंक खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज

  1. आधार कार्ड या आधार नम्बर है तो किसी भी अन्य प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
  2. अगर आपका पता बदल गयाहै तो अपने वर्तमान पते को स्वयं के दव्ारा प्रमाणित करके देना आवश्यक है।
  3. अगर आधार कार्ड नहीं है तो इनमें से एक मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, ड्राईविंग लाईसेन्स, प्राधिकृत जन प्राधिकारी अथवा लोक सेवक व सरपंच दव्ारा जारी पत्र।
  4. अन्यथा इनमें से एक (पहचान के लिए) मान्यता प्राप्त संस्थान का पहचान पत्र, नरेगा दव्ारा जारी जॉब कार्ड एवं इनमें से एक (पते के लिए) बिजली या टेलीफोन बिल, जन्म या वािवह का प्रमाण पत्र।

उपसंहार

इस योजना की सफलता का आकलन एक या दो साल बाद ही किया जा सकता है। एक खाता, ग्राहकों और बैंक दोनों के लिए तभी उपयोगी है जब इसका इस्तेमाल किया जाए। बैंकों दव्ारा पहले खोले गए कई नोफ्रिल बेसिक खाते बेकार साबित हुए है, क्योंकि उन्होंने पाया कि इनमें बहुत अधिक लेनदेन नहीं हुए। वित्तीय समावेशन के काम को पूरा करने का एक अच्छा तरीका यह है कि सारे ग्रामीण लेनदेन इसी के जरिये किए जाए। मसलन किसानों को दिया जाने वाला समर्थन मूल्य का भुगतान, मनरेगा की मजदूरी अनिवार्य रूप से इन खातों में किया जाए। वित्तीय समावेशन तभी अच्दी तरह से काम करेगा। जब सभी प्रकार की सबसीडी कैश ट्रान्सफर के जरिये दी जाने लगे। सिर्फ बैंक खाते खोलना ही वित्तीय समावेशन नहीं है।

- Published on: November 14, 2014