अयोध्या में रामं मंदिर व बाबरी मस्जिद का मामला (Ram Temple in Ayodhya and Babri Masjid Case) (Download PDF)

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प्रस्तावना: -सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने विवादित बाबरी ढांचा गिराए जाने की आपराधिक साजिश के आरोप में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती सहित 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के रुख में परिवर्तन आया है। सीबीआई ने कोर्ट में अपील करके मांग की थी कि आडवाणी सहित 21 अभियुक्तों के खिलाफ विवादित ढांचा गिराए जाने के षडयंत्र और अन्य धाराओं में मुकदमा चलना चाहिए। कोर्ट ने आपराधिक षडयंत्र रचने का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

राष्ट्रपति पद: -

  • आडवाणी सहित कई अन्यों लोगों पर भड़काऊ भाषण देने का मामला अभी लंबित है। कुछ समय से आडवाणी के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के कयास लगाए जाते रहे हैं। भरतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज जिस स्तर पर है, वहां तक पहुंचाने में आडवाणी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आडवाणी के पार्टी (राजनीतिक दल) में योगदान को देखते हुए ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें भाजपा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना सकती है। गौरतलब है कि आडवाणी ने लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी को भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने का विरोध किया था। भले ही आज मोदी और आडवाणी के संबंध अधिक मधुर नहीं हैं लेकिन आडवाणी, मोदी के राजनीतिक गुरु और संरक्षक की भूमिका में रहे हैं। इसलिए भी यह माना जा रहा था कि आडवाणी का पार्टी (राजनीतिक दल) में योगदान, उनकी वरिष्ठता और मोदी जी के साथ पुराने संबंधों को देखते हुए वे राष्ट्रपति पद के चुनाव की रेस (दौड़) में शामिल हो सकते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना था कि मोदी की कार्यशैली को देखते हुए लगता नहीं कि वे आडवाणी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का जोखिम लेंगे। आडवाणी के खिलाफ विवादित ढांचा गिराने की साजिश का मुकदमा चलाने के कोर्ट (न्यायालय) के आदेश के असर अब उनकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर पड़ सकता है।
  • माना जा रहा है कि कोर्ट (न्यायालय) के इस फैसले के बाद वे राष्ट्रपति पद की रेस (दौड़) से लगभग बाहर हो जाएंगे। पार्टी (राजनीतिक दल) में उनके विरोधी इस फैसले को ढाल बनाकर उनकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए अड़चने पैदा करेंगे। कानूनी जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी में इस फैसले से कोई कानूनी दिक्कत नहीं होगी। वैसे भी संविधान का मूल नियम भी यही कहता है कि हर व्यक्ति कानून के सामने तब तक निर्दोष है जब तक की वह अदालत द्वारा दोषी करार नहीं दिया जाता है। आडवाणी अभी दोषी करार नहीं दिए गए हैं इसलिए वह कानूनी तौर पर तो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के योग्य हो सकते हैं पर यह मामला थोड़ा अलग है। भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है। यहां सभी संप्रदाय समान है। ऐसे में यदि किसी के खिलाफ भड़काऊ भाषण और विवादित धार्मिक ढांचा गिराने की साजिश का मामला हो तो यह धर्मनिरपेक्ष के विपरीत बात हो जाती है। साजिश का आरोप लगने के बाद व्यक्ति अन्य लोगों के कार्य और व्यवहार के लिए भी जिम्मेदार हो जाता है। ऐसे में दायरा व्यापक हो जाता है। सवाल यदि राष्ट्रपति पद के चुनाव का है तो यहां नैतिकता का सवाल अहम हो जाता है क्योंकि ऐसे पद के लिए उन लोगों को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए जिनके खिलाफ दो समुदायों में नफरत फैलाने वाले भड़काऊ भाषण व धार्मिक ढांचा गिराने की साजिश का आरोप हो।
  • राष्ट्रपति पद की गरिमा है और इन आरोपों के साथ उस पद के लिए चुनाव लड़ना नैतिकता के खिलाफ है। मामले में शिकायती कोई व्यक्ति नहीं है बल्कि सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने यह आदेश दिया है। ऐेसे में सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने जब साजिश के आरोपों के मामले में भी मुकदमा चलाने की बात कही है तो अब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के कयास पर विराम लग जाना चाहिए। आदेश में उमा भारती का नाम भी है और वह केंद्र में मंत्री हैं। उन्हें भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना पड़ सकता है।

राज्यपाल पद: -

  • जहां तक राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का सवाल है तो उनके खिलाफ राज्यपाल पद पर रहते हुए अभी मुकदमा नहीं चल सकता क्योंकि संविधान के तहत राज्यपाल को मुकदमें से छूट मिली हुई है। हां, उनके पद से हटने पर मुकदमा चलाया जा सकता है। यहां भी मामला नैतिकता का है। कल्याण सिंह के खिलाफ नई धाराएं लगाई गई हैं और ऐसे उन पर दबाव पड़ सकता है कि नैतिकता के आधार पद वह इस्तीफा दे दें लेकिन उनके खिलाफ पहले से भड़काऊ भाषण का मामला लंबित था। फिर भी, वे राज्पाल बने। हालांकि यह सब कल्याण सिंह पर निर्भर करता है कि वे नैतिकता के दबाव में इस्तीफा देकर मुकदमा का सामना करना चाहते हैं या अपने पद पर बने रहते हैं। इस मामले की अब रोजाना सुनवाई होगी और दो साल में इस पर फैसला करना होगा यानी यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान आ सकता है। भाजपा ने हाल ही मंदिर मुद्दे को फिर से उठाया है और उसके घोषणा पत्र में भी यह मुद्दा शामिल है। संभव है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राम मंदिर बड़ा चुनावी मुद्दा बन जाए।

नीरजा चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार, तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय, राजनीति विश्लेषक। कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के साथ जुड़ी रही हैं।

अयोध्या: -

  • 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामलें में 25 साल बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व उमा भारती समेत 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के जस्टिस (न्यायाधीश) पीसी घोष और जस्टिस (न्यायाधीश) आरएफ नरीमन की पीठ ने सीबीआई की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
  • सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने इस मामले में लखनऊ की विशेष कोर्ट (न्यायालय) को रोजाना सुनवाई के आदेश देते हुए कहा है कि वह 2 साल में सुनवाई पूरी करे और बिना वजह के सुनवाई नहीं टलेगी। कोई नई सुनवाई भी नहीं होगी। 6 अप्रेल को सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने आदेश को सुरक्षित रखते हुए कहा था कि हम मामले में इंसाफ करना चाहते हैं। केस (प्रकरण) के जज का सुनवाई पूरी होने तक ट्रांसफर नहीं होंगे। केस का ट्रायल (परीक्षण) जहां था वहीं से शुरु होगा। बिना वजह केस की सुनवाई नहीं टलेगी।
  • महज तकनीकी आधार पर इनको राहत नहीं दी जा सकती। इनके खिलाफ साजिश का ट्रायल (परीक्षण) चलना चाहिए। हम डे (दिन) टू (से) डे (दिन) सुनवाई कर दो साल में सुनवाई पूरी कर सकते हैं। सीबाआई ने सुप्रीम कोर्र्ट (सर्वोच्च न्यायालय) में इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का ट्रायल (परीक्षण) चलाए जाने की मांग की थी। साथ ही साजिश की धारा हटाने के इलाहाबाद हाइकोर्ट (उच्च न्यायालय) के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए।
  • दोषी मिलने पर 3 साल की सजा-मामला धारा 120 (बी) के तहत चलाया जाएगा। आईपीसी 1860 के मुताबिक, 120 (बी) के तहत इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल तक की सजा मिल सकती है।

विचार: - निम्न हैं-

  • कोई साजिश नहीं थी, सब खुल्लमखुला था। आपातकाल और 84 के दंगों के जिम्मेदार कांग्रेस को इस्तीफा मांगने का हक नही। अयोध्या, गंगा व तिरंगे के लिए सजा भुगतने को तैयार हूं।

उमा भरती

  • न्याय की दिशा में ठोस कदम। इससे कानून का गौरव बरकरार रहेगा।

कपिल सिब्बल, कांग्रेस

न्यायालय: -

  • कार्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले में चल रहे दो अलग-अलग मामलों को एक कर दिया जाए और रायबरेली में चल रहे मामले की सुनवाई लखनऊ में की जाए। कहा, जहां तक सुनवाई रायबरेली में हो गई थी, उससे आगे की सुनवाई लखनऊ की विशेष कोर्ट (न्यायालय) में होगी।
  • पीठ ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि गवाह कोर्ट (न्यायालय) में गवाही के लिए हर तारीख में हाजिर हों। इनके अलावा ट्रायल (परीक्षण) कोर्ट (न्यायालय) को चार हफ्तों के अंदर सुनवाई शुरू करनी चाहिए।
  • आडवाणी की ओर से दोबारा ट्रायल (परीक्षण) पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि 183 गवाहों को फिर बुलाना होगा, जो मुश्किल है। साथ ही साज़िश की धारा इलाहाबाद के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट (न्यायालय) को साजिश के मामले की दोबारा सुनवाई के आदेश नहीं देने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) : -

  • ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के अयोध्या मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 लोगों पर मुकदमा चलाने का आदेश देकर कानून के राज को कायम करने की कोशिश की है लेकिन, इसके व्यावहारिक राजनीतिक परिणाम देश के सांप्रदायिक सदभाव के विरुद्ध भी जा सकते हैं। अदालत ने इस आदेश से साबित कर दिया है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं में गलत काम करने वाली राजनीतिक ताकतों से मुकाबला करने की हिम्मत है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह दिखाने की कोशिश की है कि कानून के समक्ष सभी बराबर हैं और न्याय की यात्रा अंतिम मुकाम तक पूरी होनी चाहिए। इससे बाबरी मस्जिद के विध्वंस से आहत समाज के धर्मनिरपेक्ष और अल्पसंख्यक तबके को भी राहत मिलेगी और उसका विश्वास न्यायपालिका में सुदृढ़ होगा। अच्छी बात यह है कि पच्चीस साल से लखनऊ की अदालत में लंबित कारसेवकों और रायबरेली की अदालत में चल रहे वीवीआईपी के मुकदमों को एक अदालत में स्थानातंरित करके उसकी संयुक्त सुनवाई कर फैसला दो साल के भीतर दिया जाना है। किन्तु, इस आदेश के राजनीतिक परिणाम अच्छे और बुरे दोनों हो सकते है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट (न्यायालय) के पास यह अधिकार और उसकी डयूटी (कर्त्तव्य) है कि वह किसी मामले में पूरा न्याय दे। यह अपराध जिसने देश के संविधान के सेक्यूलर (धर्म निरपेक्ष) फेब्रिक्स (रचना) को हिला दिया वह 25 साल पहले हुआ था। यह आरोपी इस केस (प्रकरण) में सही तरह से दर्ज नहीं किए गए क्योंकि सीबीआई ने आरोपियों को लेकर केस (प्रकरण) को सही तरीके से ज्वाइंट (संयुक्त) ट्रायल (परीक्षण) के लिए आगे नहीं बढ़ाया।
  • सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने कहा कि राज्य सरकार ने तकनीकी खामी को दूर नहीं किया जो आसानी से हो सकती थी। उस समय सीबीआई को राज्य सरकार की तकनीकी गड़बड़ी को दूर कराने के प्रयास करने थे, जो आसानी से हो सकते थे। वह मामले को हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) में चुनौती देती तो यह नौबत नहीं आती और ज्वाइंट (संयुक्त) ट्रायल (परीक्षण) होने के बाद अब तक फैसला आ चुका होता।
  • बता दें कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मौजूदा समय में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह पर केस नहीं चलेगा। पद पर होने की वजह से उन्हें केस (प्रकरण) से छूट दी गई है। पद से हटने के बाद उन पर केस (प्रकरण) चल सकता है। प्रकरण चलाने का 40 पेज (पृष्ठ) का फैसला दिया है। संविधान के आर्टिकल (लेख) 142 के तहत यह फैसला दिया गया है।

तात्कालिक परिणाम: -

  • तो यह होगा कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की राष्ट्रपति पद की नैतिक दावेदारी छिन जाएगी, क्योंकि जब तक फैसला होगा उससे बहुत पहले राष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा। इससे भाजपा के भीतर आडवाणी धड़े की तरह पूरी तरह पराजय हो सकते है या फिर वे शहीद होकर बड़े नेता बन सकते हैं। इसके अन्य परिणाम भी हो सकते हैं, जो देश में हिन्दुत्व राजनीति के नए उभार के रूप में प्रकट हो सकते हैं। उमा भारती ने साफ शब्दों में कहा है कि ’सब खुल्लम खल्ला किया, मंदिर बनेगा और कोई उसे रोक नहीं सकता।’ साफ है कि आने वाले दों वर्षों तक फिर राम मंदिर राजनीतिक मुद्दा बनेगा। इसमें धर्मनिरपेक्ष दलों और ताकतों की स्थिति सांप छछूंदर जैसी होनी है। वे चाहकर भी इस मुद्दे की उपेक्षा कर नहीं सकतीं। वे धर्मनिरपेक्षता का विमर्श नए सिरे से खड़ा कर सकती हैं लेकिन, उनकी न तो इतनी सांगठिक तैयारी है और न बौद्धिक कि वे इसका मुकाबला कर सकें। जनता भी मंदिर के पक्ष में है। ऐसे में देश को धार्मिक ध्रवीकरण से बचाने की आखिरी उम्मीद न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं से ही है।

उत्तर प्रदेश: -

  • यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बरसों से बंद पड़ी रामलीला का मंचन शुरू किया जाएगा। यह निर्देश राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथा ने दिए है। उन्होंने कहा, अयोध्या में कई वर्षों से बंद पड़ा रामलीला का मंचन प्रारंभ कराया जाए।
  • इसी प्रकार मथुरा में रासलीला एवं चित्रकूट में भजन संध्या कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराया जाए। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि अयोध्या में रामलीना का मंचन कई साल से बंद चल रहा था, जिसे फिर से शुरू करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए।
  • उन्होंने कहा कि अयोध्या में 14.77 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भजन संध्या स्थल का निर्माण कार्य जून 2018 तक निर्धारित मानक एवं गुणवत्ता के साथ प्रत्येक दशा में पूर्ण करा लिया जाए। चित्रकूट में भजन संध्या एवं परिक्रमा स्थल के निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत 13.75 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाले कार्यों को प्राथमिकता के साथ निर्धारित समय-सारिणी में पूर्ण कराना सुनिश्चित कराया जाए।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुप्रसिद्ध मंदिरों के संपर्क मार्ग चार रेखा बनाए जाने के साथ-साथ जन सुविधा हेतु बैठने, विश्राम गृह, पेयजल सुविधाओं के विकास कार्य भी प्राथमिकता से सुनिश्चित कराए जाएं। धार्मिक सथलों के धार्मिक तालाबों का जीणोद्वारा एवं सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्राथमिकता से सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने ब्रज चौरासी कोसी परिक्रमा परिपथ का विकास एवं जनसुविधा कार्य विकसित कराए जाने के निर्देश दिए।

राम मंदिर: -

  • बीजेपी ने अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि जब कभी उच्चतम न्यायालय फैसला करेगा, यह बहुत प्रभावी होगा। यह पूछे जाने पर कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में क्या इस मुद्दे पर चर्चा हुई हैं, केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद हर बैठक में यह मुद्दा उठाना जरूरी नहीं है, यह मुद्दा पार्टी (राजनीतिक दल) की मुख्य मामला है। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी के घोषणापत्र में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यह उत्तर प्रदेश के इस शहर में एक भव्य राम मंदिर के पक्ष में है।
  • अयोध्या में राम मंदिर विवाद के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाए जाने के सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) की सलाह का बीजेपी ने जहां स्वागत किया है, वहीं हैदराबाद से उनकी ही पार्टी (राजनीतिक दल) के एक विधायक ने राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने वालों का सिर काट देने की खुली धमकी दी है। 38 साल के विधायक राजा सिंह तेलंगाना में बीजेपी के अघ्यक्ष व्हीप है। विधायक अपने समर्थकों को संबोधित करते दिखाए दे रहे हैं ’वे कहते हैं जो ये कहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण किया तो उसके गंभीर परिणाम भूगतने होंगे, हम उनके ऐसा बोलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि हम उनकी गर्दन काट सकें। ’यह भाषण कथित तौर पर उन्होंने 5 अप्रैल को रामवनवमी के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। कांग्रेस ने उनके इस बयान की तीखी आलोचना की है और ’धार्मिक भावना आहत’ करने का प्रयास करने के लिए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
  • अपने भाषण में अन्य वीडियों (चित्रमुद्रण या चित्र ध्वनि) का जिक्र करते हैं, जिसमें ऑल इंडिया (पूरा भारत) मजलिसे इत्तेहाद उल मुसलमीन या एआईएमआईएम के कुछ नेता कथिल तौर पर यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि अगर अयोध्या में राम मंदिर बनाया गया तो देश में हंगामा खड़ा कर देंगे। बाद में इस बयान को लेकर उनसे सवाल किया तो उन्होंने अपने रुख को दोहराया और कहा राम मंदिर बनाने के लिए हम अपनी जान दे भी सकते हैं और दूसरों की जान ले भी सकते हैं।

न्यायाधीश: -

  • देश के प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा था कि अयोध्या मसला संवेदनशील और भावानात्मक मुद्दा है और इसका समाधान अदालत के बाहर बातचीत के जरिये होना चाहिए। लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और योगी से लेकर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के इस निणय का स्वागत किया था। हालांकि बाबरी मस्जिद एक्शन (कार्य) कमिटी (समिति) के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा था कि हम कोर्ट (न्यायालय) को सूचित करना चाहेंगे कि अब आपसी बातचीत संभव नहीं है। हम पिछले 31 सालों से कोशिश करते रहे। अगर चीफ जस्टिस (प्रमुख न्यायाधीश) किसी बेंच (न्यायाधीश की तख्ती) को नामित करते हैं तो ऐसा हो सकता है।
  • बीजेपी पहले से ही कहती रही है कि वह अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संवैधानिक विकल्पों पर गौर करने के लिए कृतसंकल्प है। यूपी में चुनावों से पहले बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने कहा था कि मंदिर और विकास के मुद्दे के बीच कोई विरोधाभास नहीं है।

उमा भारती: -

  • केंद्रीय जल संसाधान मंत्री उमा भारती ने राम जन्मभूमि मामले पर कहा कि चूंकि यह मामला न्यायालय में है, इसलिए मैं इस पर कुछ नहीं बोल सकती, जो चीज न्यायालय में नहीं है, वह है मेरी आस्था। मेरा विश्वास है कि जहां राम लला बैठे हैं, वहीं मंदिर बनेगा, जहां राम लला बैठे हैं वह जगह राम लला की है यह अदालत ने सत्यापित कर दिया है।
  • यहां डिजिधन मेले में हिस्सा लेने आई भारती ने कहा, ’कांग्रेसी हमारी हंसी उड़ा रहे थे, वामपंथी हमारी हंसी उड़ा रहे थे। समाजवादी लोग हम पर गोलियां चला रहे थे। कह रहे थे कि सबूत दो कि वहां राम पैदा हुए थे। हमारी आस्था और प्राणों की बलि सार्थक हुई जब 2010 में माननीय अदालत की तीन जजों की पीठ ने यह कह दिया कि बीच की जो जमीन है वह राम लला की है, उस पर कोई विवाद नहीं है।’
  • उन्होंने कहा, ’अब मामला जमीन के विवाद का है। आस्था के विवाद का तो है नहीं। मैं एक ही बात जानती हूं कि वहां राम का मंदिर ही बन सकता है और यह मंदिर कैसे बनेगा इस पर माननीय न्यायालय और संबद्ध पक्ष तय करेंगे’।
  • केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि यह उनकी आस्था का विषय है और इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़े तो जाएंगी और फांसी पर लटकना पड़े तो लटक जाएंगी।। उमा भारती ने संवाददाताओं से कहा, ’ राम मंदिर मेरी आस्था का विषय है। मेरे विश्वास का विषय है। मुझे इस पर गर्व है।
  • जब सवाल किया गया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात के दौरान क्या अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर चर्चा हुई तो उमा ने कहा, ’राम मंदिर पर हमे बात करने की जरूरत कहां रहती है। इस विषय पर हम (योगी और उमा) अजनबी नहीं हैं। योगी जी के गुरू मंहत अवैद्यनाथ राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा थे।’ खुद उच्चतम न्यायालय का कहना है कि मामले का हल अदालत से बाहर भी हो सकता है।

योगी: -

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने राम मंदिर मुद्दे का समाधान निकालने के लिए सहयोग देने की पेशकश करते हुए कहा कि अच्छा होगा कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिये सौहार्दपूर्ण तरीके से इस समस्या का समाधान निकाले। अयोध्या में राम जन्मभूमि के मसले पर एक सवाल के जवाब में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, ’ मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत करूंगा।’ उन्होंने कहा कि सरकार चूंकि वाद में नहीं है, तो जो दो पक्ष हैं, वे बातचीत के माध्यम से कोई रास्ता निकालें। सरकार का कही सहयोग चाहिए, तो उस पर सरकार सहमत है। अच्छा होगा कि सौहार्दपूर्ण तरीके से इस समस्या का समाधान हो।

सुनवाई: -

  • 1992 में बाबरी मामले में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) में सुनवाई पूरी हो गई है।
  • दरअसल आडवाणी, कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और बीजेपी, विहिप के अन्य नेताओं पर से आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) सुनवाई कर रहा था। इससे संबंधित अपीलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) के 20 मई 2010 के आदेश को खारिज करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) हटा दी थी।
  • अयोध्या राम मंदिर में अहम सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जल्द सुनवाई संभव नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए कोई अगली तारीख भी निर्धारित नहीं की है। इसका मतलब यह हुआ कि निकट भविष्य में इस मामले में कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी। इससे पहले 21 मार्च को कोर्ट ने बीजेपी नेता और इस मामले में याचिकाकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी से 31 मार्च को यह बताने के लिए कहा था कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मुद्दे सुलझाने को तैयार हैं या नहीं?
  • पिछली सुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा था कि अगर इस मामले को बातचीत से सुलझाया जाए तो बेहतर होगा। केवल इतना ही नहीं मामले की सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस (प्रमुख न्यायाधीश) ने कहा था कि अगर दोनों पक्षों को लगता हैं तो खुद मध्यस्था कराने के लिए तैयार हैं और अगर बातचीत से हल नहीं निकलता है तो सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) सुनवाई को तैयार है।
  • 21 मार्च को पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर ने कहा ये मामला धर्म से जुड़ा हुआ है और दोनों पक्ष आपस में बैठ और बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश करें। कोर्ट (न्यायालय) ने कहा अगर पक्ष चाहे तो इस मामले में कोर्ट किसी को मध्यस्थ नियुक्त कर सकता है। कोर्ट (न्यायालय) ने तब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को कहा था कि वो 31 मार्च को मामले की सुनवाई के लिए फिर से मेंशन (उल्लेख) करे। दरअसल स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायालय) में कहा था कि राम मंदिर विवाद का मामला पिछले 6 साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को रोजाना सुनवाई कर जल्द फैसला सुनाना चाहिए।

सीबीआई: -

  • पिछले साल सिंतबर में सीबीआई ने शीर्ष अदालत से कहा था कि उसकी नीति निर्धारण प्रक्रिया किसी से भी प्रभावित नहीं होती और वरिष्ठ भाजपा नेताओं पर से आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाने की कार्रवाई उसके (एजेंसी के) कहने पर नहीं हुई। सीबीआई ने एक हलफनामें में कहा था कि सीबीआई की नीति निधार्रण प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र है। सभी फैसले कानून के आलोक में सही तथ्यों के आधार पर किए जाते हैं। किसी शख्स, निकाय या संस्था से सीबीआई की नीति निर्धारण प्रक्रिया के प्रभावित होने या अदालतों में मामला लड़ने के उसके तरीके के प्रभावित होने को कोई सवाल नहीं है।

पत्र: -

  • इधर बाबरी मस्जिद के पैरोकार मोहम्मद हासिम के बेटे के वकील और सुन्नी वक्फ़ बोर्ड (सभा) ने सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के रजिस्ट्रार (पंजिका) को चिट्‌टी लिखकर सुबह्मण्यम स्वामी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। चिट्‌टी में कहा गया है कि स्वामी ने जल्द सुनवाई की मांग की थी लेकिन इस मामले में वो पक्षकार नहीं है, बल्कि उन्होंने हस्तक्षेप याचिका डाली है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अब तक ये तय नहीं किया है कि उनकी याचिका को स्वीकार किया जाए या नहीं। चिट्‌टी में ये भी कहा गया है कि स्वामी पक्षकारों के वकीलों को भी सुनवाई से जुड़ी जानकारी नहीं देते।

शिवसेना: -

  • शिवसेना ने कहा कि मोदी की अगुवाई में भाजपा अब अयोध्या राम मंदिर बनाने की अपनी योजनओं पर आगे बढ़ सकती है, क्योंकि देश में अभी ऐसा सामाजिक-राजनीतिक माहौल है कि मुस्लिम भी पीएम मोदी का पक्ष लेंगे।
  • शिवसेना ने अपने मुखपत्र ’सामना’ के संपादकीय में लिखा, ’पिछले 25 साल में देश में राजनीति बदल गई है। (भाजपा के वरिष्ठ नेता) लाल कृष्ण आडवाणी अब मार्गदर्शक मंडल में हैं जबकि देश पर पीएम मोदी का शासन है। इसलिए राम मंदिर अब बनाया जाना चाहिए और इसके लिए उच्चतम न्यायालय के नहीं, मोदी के निर्देश की जरूरत है।’
  • पार्टी (राजनीतिक दल) ने कहा, ’भाजपा को उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत मिली जो दिखाता है कि लोगों की आकांक्षा है कि राम मंदिर बने। लोग आस्था के नाम पर ऐसा चाहते हैं और इसलिए उच्चतम न्यायालय को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। आज पूरा देश मोदी की बातें सुनता है और माहौल ऐसा है कि मुस्लिम भी उनकी बातें सुनेंगे।’ शिवसेना ने कहा उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर एक स्पष्ट फैसला दे सकता है।
  • पार्टी की तरफ से आगे कहा कि ’बहरहाल, यदि अदालत के बाहर मामला सुलझाना है तो अन्ना हजारे, बाबा रामदेव या आडवाणी जैसे लोगों द्वारा ऐसा किया जा सकता है। फिर अदालत जाने की कोई जरूरत नहीं है।’

विहिप: -

  • विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश और केंद्र, दोनों जगह भारतीय पार्टी (भाजपा) की सरकार है, इसलिए अयोध्या मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा का कोई बहाना अब चलने वाला नहीं है। इसलिए भाजपा जल्द ही मंदिर निर्माण की तारीख घोषित करें।
  • विहिप के प्रांत मीडिया (संचार माध्यम) प्रभारी शैलेंद्र चौहान और बजरंग दल के प्रांत संयोजक बलराज डूंगर ने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा को उसका वादा याद दिलाने के लिए विहिप द्वारा 26 मार्च को शास्त्रीयनगर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था।
  • उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा अब हिन्दुओं के सब्र की और परीक्षा नहीं ले सकती। उन्होंने मंदिर की पुरानी शिलाओं से ही निर्माण किए जाने, अयोध्या में किसी मस्जिद का निर्माण न किए जाने और देश में बाबर के नाम पर किसी मस्जिद का नाम नहीं रखे जाने की मांग की।
  • उन्होंने अयोध्या में किसी मस्जिद के निर्माण को सिरे से खारिज करते हुए कहा, ”बाबर द्वारा ध्वस्त किए गए रामलला के जन्म स्थान को मुक्त कराने के कई सदियों से अब तक लाखों हिन्दु अपने प्राणों का बलिदान दे चुकें है। राम भारत की आस्था और आत्मा हैं, इसलिए उनके अस्तित्व को चुनौती देना सरासर मूर्खतापूर्ण हरकत और हिन्दु भावनाओं का अपमान करना है।”

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद: -

  • राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले में देश की सर्वोच्चय अदालत ने दोनों पक्षों से कहा है कि वे इस मामले को आपसी बातचीत से सुलझाएं। इसके लिए उन्होंने 31 मार्च तक का समय भी दिया है। 21 मार्च को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के मुख्य न्यायाधीश (सीजीआई) जेएस केहर ने दोनों पक्षों को बातचीत का एक और मौका दिया है। 1986 के बाद से ये 11 वां मौका है जब इस मामले को बातचीत से सुलझानें की कोशिश की गई है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का यह मामला कितना पेचीदा है। यहां तक की कोर्ट (न्यायालय) भी इस मामले में फैसला सुनाने से बचती रही है। ऐसे में कई लोगों के जेहन में सवाल उठ रहा होगा कि इस मामले की सुनवाई करने वाले जज इस विवादित जगह के बारे में क्या सोचते होंगे। तो आइए जानें इस मामले में 2010 में फैसला सुनाने वाली इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों में से एक जस्टिस (न्यायाधीश) एस यू खान अपने फैसले की शुरुआत किन शब्दों से की थी।

जस्टिस (न्यायाधीश) एस यू खान: -

  • अपने फैसले की शुरुआत करते हैं, ’यहां 1500 वर्ग जमीन का एक टुकड़ा है जहां देवता भी गुजरने से डरते हैं। यह अनगिनत बारूदी सुरंगों, लैंड (जमीन) माइंस (खानों) से भरा हुआ है। हमें इसे साफ करने की जरूरत है। कुछ भले लोगों ने हमें सलाह दी है कि कोशिश भी मत करो। हम भी नहीं चाहते हैं कि किसी मूर्ख की तरह जल्दबाजी करें और खुद को उड़ा लें। बावजूद इसके हमें जोखिम तो लेना ही है। किसी ने कहा है कि जीवन में सबसे बड़ा जोखिम होता है कि मौका आने पर जोखिम ही न लिया जाए। एक बार देवताओं को भी इंसानों के आगे झुकने के लिए मजबूर किया गया था। ये एक ऐसा ही मौका है। हम सफल हुए हैं या नाकाम रह गए हैं। अपने केस (प्रकरण) में कोई जज (न्यायाधीश) नहीं हो सकता है। इस तरह से रहा वो फैसला जिसका पूरा देश सांस रोके इंतजार कर रहा है।

जाने, क्या था 2010 का फैसला-

  • अगस्त 2010 में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर एक बार दोनों पक्षों में बातचीत की कोशिश हो चुकी है लेकिन अब चीफ (प्रमुख) जस्टिस (न्यायाधीश) की पेशकश से फिर उम्मीद की किरण दिखी है। अयोध्या में राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास कहते हैं कि ’हम चाहते हैं कि दोनों पक्ष बैठकर सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के इस आदेश का पालन करें और कहां वो मस्जिद बनाएंगे। मंदिर के संबंध में यहां के 10 हजार लोगों ने हस्ताक्षर करके सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) में दे दिया है कि जहां रामलला विराजमान है’, वहां मंदिर बनेगा और कुबेरटीला के दक्षिण मस्जिद बनेगी।’
  • उपसंहार: -अब अयोध्या में राम मंदिर व बाबरी मस्जिद के मामले में वरिष्ठ नेताओं का क्या होता है यह फिलहाल न्यायालय का फैसला आने तक इंतजार करना होगा।

- Published/Last Modified on: May 22, 2017

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