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रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy - Essay in Hindi) [ Current News (Concise) ]

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प्रस्तावना: - अक्षय ऊर्जा क्षेत्र यानी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर रोजगार उत्पादन की दृष्टि से खांसी उम्मीदें बंधाता हुआ नजर आ रहा है। इससे पूरी दुनिया को यह महसूस हो रहा है इस क्षेत्र में नौकरी के अधिक आसार हैं। पूरी दुनिया जहां जलवायु परिवर्तन के खतरे को रोकने के लिए इस क्षेत्र को विकसित करने में जुटी है वहीं भारत जैसे विकासशील देश ने इस स्त्रोत के विकास में अच्छी सफलता हासिल की है।

क्षमता: - पिछले दस सालों में देश ने अक्षय ऊर्जा उत्पादन की अपनी क्षमता में पांच गुना बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही 2022 तक 100 गीगावॉट सौर और 60 गीगावॉट पवन ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य भी तय किया है। सीईईब्ल्यू व एनआरडीसी (2015) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को पूरा करने में यदि सफलता मिलती है तो 2002 तक इसक्षेत्र में 10.8 लाख नौकरियां पैदा होगी। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में रोजगार पैदा करने के लिहाज से भारत दुनिया में चौथे नंबर पर है। कुछ समय पहले अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए देश ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं जो भविष्य में क्वालिफाइड प्रोफेशनल्स के लिए लाखों नौकरियां पैदा करेंगे।

भारत: - रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में रोजगार पैदा करने के लिहाज से चीन, ब्राजील और अमेरिका के बाद भारत दुनिया में चौथे नंबर पर है। पूरे विश्व में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में नियुक्त लोगों का 5.7 प्रतिशत भारत में है। इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (इरेना) की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 तक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर ने भारत में 4 लाख नौकरियां उत्पन्न की हैं।

नौकरियां: - साफ शक्ति ताकत लोकल रोजगार विस्तार भारत में अध्ययन के मुताबिक भविष्य में नौकरियां प्रोजेक्ट प्लानिंग, कंस्ट्रक्शन, डिजाइन, इंस्टॉलेशन एंड ऑपरेशंस में आएगी। अन्य रिसर्च के अनुसार, पॉवर जनरेशन, रिसर्च, मैनेजमेंट, स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग व कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में भी काम के अवसर उपलब्ध होंगे। फोटो वोल्टेइक सेल्स, ग्रिड सिस्टम और पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्‌स काम के मौके खोज सकते हैं। इसके अलावा सोलर पैनल निर्माण व विंड टर्बाइंस मैन्यूफैक्चरिंग में भी अच्छी संभावनाएं हैं। सोलर पॉवर प्लांट्‌स, बायोमास कंपनियों, विंड पॉवर प्लांट्‌स, न्यूक्लियर पॉवर प्लांट्‌स, आर्किटेक्चर फमर्स, एनर्जी स्टोरेज व ट्रांसपोर्टेशन कंपनियों, पर्यावरण सुरक्षा एजेंसियों में जॉब के अक्सर तलाशे जा सकते हैं।

डिग्रियां: - एनर्जी इंजीनियरिंग में आईआईटी के बीटेक-एमटेक ड्‌यूल डिग्री प्रोग्राम इस क्षेत्र में मजबूत नींव रखेंगे। इसके अलावा एमएसी (रिन्यूएबल एनर्जी), एमएससी (फिजिक्स एनर्जी स्टडीज), एमटेक (एनर्जी स्टडीज), एमटेक (एनर्जी मैनेजमेंट) एमटेक (एनर्जी टेक्नोलॉजी) जैसी डिग्रयां यहां काम आ सकती हैं। ग्रीन एमबीए भी चलन में है। मटीरियल मैनेजमेंट की पढ़ाई उपयोगी साबित हो सकती है।

मंदी: - पिछले वर्षों में रिन्यूएबल सेक्टर मजबूत क्षेत्र के रूप में उभरा है लेकिन इसी दौरान नॉन रिन्यूएबल इंडस्ट्री मंदी के दौर से गुजर रही है। 1990 के दशक के बाद से यह वैश्विक ऑयल इंडस्ट्री के लिए मंदी का सबसे खराब दौर है। पिछले वर्ष तेल की कीमतों के बुरी तरह गिरने से पूरे विश्व में दो लाख नौकरियां समाप्त कर दी गई। इसका असर दुनिया भर के कैंपसों में ऑयल व गैस इंडस्ट्री के ट्रेनीज पर दिखाई दे रहा है। स्टूडेंट्‌स अब रिन्यूएबल सेक्टर के विकल्प भी खुले रख रहे हैं। इसके अलावा इन क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स भी रिन्यूएबल सेक्टर का रुख कर रहे हैं।

ग्रीन जॉब्स: -निम्न है-

  • फैक्ट्‌स एंड फिगर्स -में आए उछाल में एशिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। चीन और भारत रिन्यूएबल एनर्जी के अधिक इस्तेमाल के लिए बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। भारत के सोलर व विंड प्रोग्राम्स देश की क्वालिफाइड वर्कफोर्स के लिए रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवा सकते हैं।
  • दुनियाभर में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 77 लाख लोग (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से) नियुक्त हैं। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 65 लाख था।
  • पूर्व में इंडिया एनर्जी रिवोल्यूशन रिपोर्ट यह भविष्यवाणी कर चुकी है कि 2020 तक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर 24 लाख नौकरियां पैदा करेगा।
  • पिछले वर्ष की ब्रिज टू इंडिया व टाटा पॉवर सोलर की साझा रिपोर्ट का अनुमान है कि सौर ऊर्जा उत्पादन में अगले दस वर्षों में 6.7 लाख नौकरियां पैदा करने की क्षमता है।
  • ग्रिड से जुड़े सौर व पवन ऊर्जा विकास ने लगभग 70, 000 फुल टाइम नौकरियां पैदा की हैं।
  • विंड सेक्टर डेवलपमेंट ने अब तक 45, 000 फुल टाइम इक्विवेलेंट जॉब्स उत्पन्न की हैं।
  • 2011 - 2014 के बीच अकेले सोलर फोटोवाल्टेइक प्रोजेक्ट्‌स ने 24, 000 फुलटाइम जॉब्स दिए।
  • 60 गीगा वॉट की पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य पूरा करने पर 2022 तक भारतीय विंड पॉवर सेक्टर 1 लाख 83, 500 नौकरियां पैदा कर सकता है।
  • पवन ऊर्जा क्षेत्र में भारत का विश्व में 5 वां स्थान है।

रिन्यूएबल एनर्जी जॉब्स 2014

Details on Renewable energy in India and Worldwide

Details on Renewable energy in India and Worldwide

रिन्यूएबल

विश्व

भारत

बायोमास

822

58

लिक्वड बायोफ्यूल्स

1, 788

35

बायागैसे

381

85

जिओथर्मल

154

-

स्मॉल हाइड्रोपॉवर

209

12

सोलर पीवी

2, 495

125

सीएसपी

22

-

सेलर हीटिंग/कूलिंग

764

75

विंड पॉवर

1, 027

48

स्रोत: झरेना रिपोर्ट (फिगर्स हजारों में)

भारत में पढ़ाई: - में है शिक्षण का बेहतरीन मौका, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं तो टीच फॉर इंडिया फेलोशिप आपको यह मौका दे सकती है। यह दो साल फुल टाइम पेड फेलाशिप प्रोग्राम काफी चुनौतिपूर्ण है। दरअसल टीच फॉर इडिया एक गैर लाभकारी संगठन है, जो कि टीच फॉर ऑल ग्लोबल मूवमेंट का हिस्सा है। देश के सात शहरों मुंबई, पुणे, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद और बेगलुरू में अपने फेलोशिप प्रोग्राम के जरिए टीएफआई ऐसे भारतीय कॉलेज ग्रेजुएटस और वर्किग प्रोफेशनल्स को नियुक्त करता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर स्कूलों में फुल टाइम टीचर के रूप में 2 साल तक पढ़ा सके। ये फेलो शैक्षिक असमानता को खत्म करने के लिए काम करते हैं। टीच फॉर इडिया फेलो को अपनी नेतृत्व क्षमता के आधार पर छात्रों के जीवन में बदलाव लाने का महत्वपूर्ण काम करना होता है।

प्रशिक्षण: - सबसे पहले पांच सप्ताह के स्थानीय ट्रेनिंग प्रोग्राम के रूप में इस फेलोशिप की शुरुआत होती है। इसके बाद फेलो कॅरिकुलम, लेसन प्लानिंग, स्टूडेंट असेसमेंट के साथ सफल शिक्षण के तरीके सीखते हैं। हरेक फेलो के पास प्रोग्राम मैनेजर के रूप में एक मेंटर होता है, जो प्रभावशाली टीचर व लीडर बनने के लिए उनका मार्गदर्शन करता है। कार्यक्रम के दूसरे वर्ष में फेलो को ’बी द चेंज’ नामक प्रोजेक्ट करना होता है, जिसमें उन्हें कुछ नए आइडियाज के तहत शिक्षा में बदलाव के लिए काम करना होता है।

योग्यता: - किसी भी विषय में ग्रेजुएट होना जरूरी है। उम्मीदवार ग्रामीण परिवेश में काम करने के इच्छुक हो, साथ ही समाज में बदलाव लाने का जज्बा भी होना चाहिए। यह सब योग्यता उम्मीदवार के पास होने चाहिए तब ही वह टीच फॉर इडिया में काम कर सकता हैं।

आवेदन: - टीच फॉर इडिया फेलोशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। किसी भी दूसरे प्रकार का आवेदन मान्य नहीं होगा। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क भी अदा नहीं करना है और न ही कोई लिखित आवेदन या सीवी भेजना है।

फायदा: - टीच फॉर इडिया फेलोशिप के तहत हर महीने 17, 500 रुपए प्रदान किए जाते हैं। आईआईटी, आईआईएम, सेंट स्अीफंस कॉलेज, सेंट जेवियर्स कॉलेज, प्रेंसिडेंसी कॉलेज, क्राइस्ट यूनिवरसिटी जैसी प्रतिष्ठित कॉलेज पृष्ठीभूमि के छात्रों के साथ एक्सेंचर, मैक्किंजे, महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईबीएम, अर्नस्ट एंड यंग जैसी कंपनियों के प्रोफेशनन्स इस फेलोशिप में हिस्सा लेते हैं। इससे आपको देश के प्रतिभाशाली उम्मीदवारों के साथ काम करने का मौका प्राप्त हो सकता है। इसके साथ में नये तरीके का पढ़ाने का ज्ञान भी मिल सकता है एवं इसके साथ ही टीच फॉर इडिया के संबंध एचडीएफसी, गोदरेज इंडस्ट्री, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, टाटा कंसल्टेंसी आदि कंपनियों के साथ हैं, जहां फेलो अपने लिए अवसर हासिल कर सकते हैं।

उद्यमी: - भारत में नौकरियां पैदा करनी है तो प्रधानमंत्री दुनिया को छोटे भारतीय उद्यमी की निगाह से देखना शुरू करें। उसके छोटे कंधों पर ही बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा करने की जिम्मेदारी है। यह खास तौर पर निर्माण उद्योग के लिए सच है, जो हर देश में सबसे अधिक नौकरियों का निर्माता है। सरकार में सुधार होना आवश्यक है छोटे उद्यमियों के लिए भारत आकर्षण का केंद्र बनेगा, जिससे नौकरियां तेजी से पैदा होगी। इस एजेंडे पर केद्रित रहना मोदी और राष्ट्र की प्राथमिकता है। पिछले महीने हमारे पास सिर्फ अंशकालीन प्रधानमंत्री थे। यह किसी ऐसे गरीब देश में एकदम गलत है, जहां नैतिक अनिवार्यता नौकिरियां पैदा करना है। सरकार में सुधार, आर्थिक सुधार से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

उपसंहार: -हमारे देश या अन्य देश में अकसर युवा लोग नौकरी की तलाश में डिग्री लेते हुए यहां वहां भटकते रहते है जिससे उनको काफी परेशानी होती है इसलिए सरकार को चाहिए की केवल एक क्षेत्र में अर्थात अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में नौकरियों के लिए सत्‌त प्रयास करके युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करवाएं जाएं, जिससे युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में परेशानी न हो।

- Published on: March 16, 2016