रॉकेट (अग्निबाण) (Rocket- in Hindi) (Download PDF)

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प्रस्तावना: - नासा ने दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट (अग्निबाण) स्पेस (अंतरिक्ष) लॉन्च (प्रक्षेपण) सिस्टम (प्रबंध) (एसएलएस) बनाकर तैयार कर लिया है। नासा के मुताबिक -इस रॉकेट (अग्निबाण) के इंजन आरएस-25 का परीक्षण सफल रहा है। इसी के साथ रॉकेट ने भी आकार ले लिया है। अब सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल इसे इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने वाले ओरियन स्पेसक्रॉफ्ट (अंतरिक्ष यान) के साथ पहले मिशन (लक्ष्य) पर भेजा जाएगा। हालांकि इस मिशन में मानव नहीं भेजे जाएंगे। इस एक साल के दौरान वैज्ञानिक रॉकेट (अग्निबाण) का वजन और लागत कम करने के लिए इसमें 3 डी प्रिंटेड (मुद्रित) पार्ट (हिस्सा) लगाएंगे। नासा की योजना इसी रॉकेट से 2030 तक मंगल पर इंसानों को भेजने की है। अगले साल चांद पर और 12 साल के भीतर इंसानों को मंगल ग्रह पर भी ले जाएगा।

एसएलएस इंजन आरएस-25 अग्निबाण की विशेषताएं: -

  • एस्टेरॉयड (छोटा तारा) मिशन (लक्ष्य) का हिस्सा- आएएस- 25 इंजन वाले इस रॉकेट का इस्तेमाल 2013 में लॉन्च (प्रक्षेपण) हुए नासा के एस्टेरॉयड मिशन में भी किया जाएगा।
  • आरएस-25 में करीब 380 करोड़ रु. लगे हैं। नासा का दावा है कि भविष्य में लागत में 33 प्रतिशत की कमी लाएगी।
  • यह रॉकेट 77 टन भार के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। आमतौर पर नासा के रॉकेट 50 टन वजन ले जाने में सक्षम होते हैं। भारत का जीएसएलवी-19 भी 40 टन वजन ले जाने में ही सक्षम है।
  • आरएस-25 का वजन करीब 4 टन, लंबाई 14 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है। इस रॉकेट इंजन का तापमान अलग-अलग परिस्थितियों में-423 से 6000 डिग्री फारेनहाइट (विदेशी ऊंचाई) के बीच हो सकता है।
  • इंजन का डिजाइन (रूपरेखा) कैलिफोर्निया में बना और परीक्षण मिसीसिपी में हुआ। सिस्टम (प्रबंध) को लुइसियाना में अपग्रेड किया गया है। आरएस-25 में फ्यूल (ईंधन) और ऑक्सीजन दोनों के मिश्रण का प्रयोग किया गया है।
  • आरएस-25 के इंजन से निकलने वाली गैस (जेट स्टीम (भाप) ) की गति आवाज की गति से भी 13 गुना तेज है। ये जेट स्टीम 5000 किमी की दूरी 15 - 20 मिनट में ही तय कर सकती है।
  • इंजन में हाइड्रोजन फ्यूल टैंक (टंकी) लगाया गया है। ये टैंक 130 फीट लंबा है। इसकी क्षमता 5 लाख 37 हजार गैलन ठंडा लिक्विड (तरल) हाइड्रोजन स्टोर (एकत्रित) करने की है।
  • रॉकेट के तीन स्टेज (मंच) होते हैं। लिक्विड (तरल) हाइड्रोजन टैंक और ऑक्सीजन टैंक फर्स्ट (पहला) स्टेज (मंच) का हिस्सा हैं, जो रॉकेट को तेजी से आगे धकेलता है।
  • हाइड्रोजन टैंक में मौजूद लिक्विड हाइड्रोजन का काम चार शक्तिशाली आरएस-25 इंजनों के लिए जरूरी ईंधन उपलब्ध कराने का होता है।

अमेरिका: - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जल्द ही देश का सबसे वजनी कम्युनिकेशन (संचार) सैटेलाइट (उपग्रह) जीसैट-11 लांच (प्रक्षेपण) करेगा। इसका वजन 5.6 टन है। हमारे पास चार टन से ज्यादा वजनी सैटेलाइट भेजने की क्षमता वाले रॉकेट नहीं हैं। लिहाजा इसे दक्षिण अमेरिकी दव्ीप फ्रेंच गुयाना से एरियन -5 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा।ं इसके सफल प्रक्षेपण से हमारे पास खुद का सैटेलाइट (उपग्रह) बेस्ड (अच्छा) इंटरनेट स्पीड (गति) भी बढ़ जाएगी। दरअसल यह इसरो के इंटरनेट बेस्ड सैटेलाइट सीरीज का हिस्सा है। मकसद इंटरनेट स्पीड को बढ़ाना है। इसके तहत अंतरिक्ष में 18 महीने में तीन उपग्रह भेजे जाने हैं। पहला उपग्रह जीसैट-19 बीते साल जून में भेजा जा चुका है। जीसैट-11 को इस साल जनवरी में और जीसैट-20 को साल के आखिरी तक भेजने की योजना है। ये तीनों मल्टिपल (एक से अधिक) स्पॉट (धब्बे) बीम (किरण) तकनीकी पर काम करेगा।

जीसैट-19 जून 2017 को लॉन्च हुआ।

  • लागत-500 करोड़ रुपए
  • वजन- 3.1 टन
  • क्षमता- 4 जीबीपीएस

यह देश का अब तक का सबसे एडवांस (संचार) कम्युनिकेशन (संचार) उपग्रह है। 4 जीबी/सेकंड (पल) डाटा (आंकड़ा) देने की क्षमता। भेजे गए 4 उपग्रह जितना ताकतवर।

जीसैट-11 जनवरी 2018 में लॉन्चिंग

  • लागत-1117 करोड़ रुपये
  • वजन-5.6 टन
  • क्षमता-13 जीबी/सेकंड

ये जीसैट-19 से भी ज्यादा ताकतवर है। इससे हमें 13 जीबी/सेकंड की इंटरनेट स्पीड मिलेगी। इसकी लॉन्चिंग से हमें अपना उपग्रह बेस्ड इंटरनेट मिल जाएगा।

जीसैट-20 दिसंबर 2018 तक लॉन्चिंग

  • लागत-जानकारी नहीं
  • वजन-3.6 टन
  • क्षमता-70 जीबीपीएस

इसे 2018 के आखिरी तक लांच करने की योजना है। यह 70 जीबी/सेंकड की स्पीड से डेटा (आंकड़ा) भेजेगा। ये तीनों उपग्रह एक साथ संचालन में आते ही हाई (उच्च) -क्वालिटी (गुणवत्ता) इंटरनेट, फोन और वीडियो सर्विसेज (सेवा) देना शुरू कर देंगे।

उपग्रह: -

  • इसरो ने अब तक 28 कम्युनिकेशन उपग्रह भेजे हैं। जीसैट-11 की क्षमता अकेले इन सभी उपग्रह की क्षमता के बराबर है। यह जीसैट-17 से 3 - 4 गुना शक्तिशाली है।
  • हमारा सबसे ताकतवर रॉकेटमार्क-3 है। यह 4 टन वजनी उपग्रह ले जाने में सक्षम। अभी तक 3.4 टन वजनी जीसैट-10 हमारा सबसे वजनी उपग्रह हैं। ये 2012 में छोड़ा था।
  • दुनिया के 16 देश अब तक कम्युनिकेशन उपग्रह भेज चुके हैं। इसके अलावा यूरोपियन यूनियन (संघ) और सोवियत संघ भी अपना कम्युनिकेशन (संचार) उपग्रह भेज चुके हैं।

ऐसे बदलेगा इंटरनेट-वायरलेस टीवी कार्यक्रम देखेंगे, साइबर सुरक्षा मजबूत होगी-

  • हाई इंटरनेट स्पीड- इस मंडल से हमें बेहतर इंटरनेट स्पीड मिलेगी। इंटरनेट कनेक्टिवटी (संयोजकता) सस्ती होगी। पूरे देश तक पहुंच होगी।
  • साइबर सुरक्षा- एक नया सुरक्षा कवच मिलेगा। साइबर सुरक्षा मजबूत होगी। प्रबंध और बैंकिंग (महाजन) प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
  • स्मार्ट (आकर्षक) सिटी- इससे हमें 70 जीबी/सेंकड की स्पीड मिलेगी। यह स्मार्ट सिटी के लिए जरूरी ट्रांसमिशन (हस्तांतरण) की जितनी स्पीड है।
  • वायरलेस तकनीकी- इसके तहत बिना डिश लगाए टीवी कार्यक्रम देखे जा सकेंगे। इससे स्मार्टफोन की भी दुनिया बदल जाएगी।

स्पेस (अंतरिक्ष) एक्स 800 उपग्रह लांच (प्रक्षेपण) करेगा। पूरी दुनिया को देगा इंटरनेट।

इसरो: -भारत 10 जनवरी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केन्द्र से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह कार्टोसैट सहित 31 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर लिया था। इनमें से 28 उपग्रह अमेरिका के और पांच अन्य देशों के थे। 2018 के इस पहले अंतरिक्ष अभियान के तहत ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवीसी-440) के जरिए सभी 31 उपग्रह छोड़े जाएंगे। इस अभियान से चार महीने पहले नाविक मिशन (दूतमंडल) का 8वां उपग्रह छोड़ा गया था, लेकिन रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने में विफल रहा था। इस मिशन में कार्टोसैट-2 के अलावा भारत का एक नैनो उपग्रह और एक माइक्रो उपग्रह भी लॉन्च (प्रक्षेपण) किया जाएगा। एक निगरानी उपग्रह के रूप में कार्टोसैट शहरी, तटीय भूमि उपयोग, सड़क नेटवर्क (जाल पर कार्य) की निगरानी आदि के लिए आंकड़े उपलब्ध कराएगा।

उपसंहार: - इस तरह इसरों ने हर वर्ष अंतरिक्ष में कोई न कोई अग्निबाण भेजकर हर लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा किया हैं और हमारे भारत वर्ष का नाम रोशन किया हैं जिससे हमारा देश विकास की ओर बढ़ रहा हैं।

- Published/Last Modified on: March 12, 2018

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