पाक के खिलाफ भारत का सर्जिकल स्ट्राइक (शस्त्र-चिकित्सक हड़ताल) भाग-1 (Download PDF)

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प्रस्तावना:- करगिल युद्ध में मुंह की खाने के बाद उम्मीद थी कि पाकिस्तान सीमा पार से आतंक को बढ़ावा देना बंद करेगा। पर ऐसा हुआ नहीं। नवंबर 1999 के आम चुनाव में देश की अवाम ने अटल बिहारी वाजपेयाी को खूब सराहा। हालात स्थिर थे, माहौल शांत था। इसलिए जुलाई 2001 में वाजपेयी ने भी नफरत भुलाकर आगरा में परवेज मुशर्रफ के साथ वार्ता शुरू की, लेकिन पाक नहीं माना। पहले कश्मीर विधानसभा पर हमला हुआ। फिर संसद, मुंबई, दिल्ली समेत दर्जनों आतंकी हमले पाक दव्ारा हुए। जवानों का सिर काटा गया। पठानकोट के बाद भी भारत सब्र और शांति के आदर्श पर टिका रहा। अब उरी हमले के बाद भारत का अटल धैर्य टूट चुका है। करगिल के बाद भारत का 17 साल का सब्र टूटा और इसलिए पाकिस्तान को दिया करारा जवाब।

धैर्य की परीक्षा:- कई तरह से लेता रहा पाकिस्तान भारत के धैर्य की परीक्षा-

  • 2000 लाल किले को निशाना बनाया। 03 की मौत हुई।
  • 2001 में संसद पर हमला 1 अक्टुबर 2001 को कश्मीर विधानसभा में फिदायिन हमले के बाद इसी साल 13 दिसंबर को संसद पर हमला किया गया। लोकतंत्र पर इस हमले के बाद भी धैर्य बनाए रखा।
  • 2002 में पांच बड़े हमले हुए। 202 लोगों की मौत हुई।
  • 2003 मुंबई में तीन बार हमला हुआ, लेकिन भी भारत ने वार्ता की।
  • 2004 मनमोहन सिंह संयुक्त राष्ट्र में मुशर्रफ से मिले।
  • 2005 में दिल्ली ब्लास्ट हुआ अक्टुबर में दिल्ली दहली। तीन जगहों पर ब्लास्ट हुए। इस साल आतंकी हमलों कुल 83 मौतें हुई। इसके बावजूद भारत की ओर से हमला नहीं किया गया।
  • 11.7.2006 मुंबई ट्रेन धमाके इस साल 300 से ज्यादा लोग पाक समर्थित आतंक की भेंट चढ़ गए। देश भर में गुस्सा उफान पर था, लेकिन भारत सरकार ने अपना धैर्य बनाए रखा। साथ इसी साल 7.3.06 को बनारस में विस्फोट हुआ।
  • 25.8.2007 को हैदराबाद धमाका हुआ इसमें 6 बड़े हमलों में 150 से ज्यादा लोग मारे गए।
  • 26/11/2008 में फिर मुंबई में हमला हुआ देश की आर्थिक राजधानी पर बड़ा हमला। 171 लोग मारे गए। जिंदा आतंकी भी पकड़ाया। तब देश में गुस्से का गुबार था। हमने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया। कसाब को फांसी दी। इसी साल 13.5.08 को जयपुर में भी धमाके हुए। 13 मई को 6 जगहों पर 9 बम धमाके हुए। 63 लोगों की मौत हुई। 200 से ज्यादा घायल। हमने अपने गुस्से पर काबू रखा। पाकिस्तान को डोजियर (पिनक लेने वाला) सौंपे। हालाता नहीं सुधरें। साथ ही 8/11/08 मालेगांव विस्फोट हुए।
  • 2009 में 13 भारतीय आतंक की भेंट चढ़ गए। घुसपैठ की कई कोशिशें हुई।
  • 2010 में कश्मीर मेें प्रदशनों का दौर। इधर दो बड़े धमाके हुए। फिर भी हमने धीरज नहीं खोया।
  • 2011 में सीमा पार लगातार गोलीबारी होती रही। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गए, हमला नहीं किया।
  • 2012 में अपेक्षाकृत शांत रहा, लेकिन घुसपैठ की कोशिशें लगातार होती रहीं।
  • 2013 में श्रीनगर से बेंगलूरू तक आतंकी हमले हुए जिनमें करीब 170 जाने गई। 8 बड़े धमाके हुए।
  • 2014 में 120 जाने आतंकियों ने ली। हमने रिश्ते सुधारने की कोशिशें जारी रखीं।

उसके बाद 2015 में गुरदासपुर व 2016 में पठानकोट और उरी में आतंकियों ने हमला कर भारत का सब्र का बांध तोड़ डाला। पठानकोट में घुसकर आतंकियों ने जवानों पर हमला किया। सारे सबूत पाकिस्तान के खिलाफ थे। हमने पाक जांच दल को पठानकोट का दौरा भी कराया बातचीत की कोशिशें जारी रखी उसके बाद भी पाकिस्तान ने उरी में हमला कर दिया तो भारत का सब्र तो टूटना ही था।

एलओसी :-यानी (लाइफ आफॅ कंट्रोल (जीवन नियंत्रण) व अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा)- विभाजन के बाद 17 अगस्त, 1947 को भारत-पाक के बीच सीमा बन गई। सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोग दव्ारा रेखा का निधारण किया गया, जो 88 करोड़ लोगों के बीच 1,75,000 वर्ग मील (4,50,000 वर्ग किमी) क्षेत्र विभाजित कर बनाया गया लेकिन पाक ने कश्मीर पर आक्रमण कर भारत की कुछ भूमि पर कब्जा कर लिया था। यह वही 740 किलोमीटर लंबी खींची गई सीमा रेखा है। 3 जुलाई, 1972 में शिमला समझौते के बाद इस नियंत्रण रेखा को जब तक के लिए बहाल किया गया, तब तक कि आपसी समझौते में दोनों देश सीमा का मसला सुलझा नहीं लेते। इसके बावजूद पाक सैनिक इस क्षेत्र में हमले करते हैं।

क्या है सर्जिकल स्ट्राइक?:- किसी सीमित क्षेत्र में सेना की तरफ से आतंकियों के खात्मे के लिए की जाने वाली सैन्य कार्रवाई को सर्जिकल स्ट्राइक कहते हैं। इसमें आतंकियों और उनके ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक से पहले उस क्षेत्र (जहां हमला करना है) की पुख्ता जानकारी जुटाई जाती है। उसके बाद तय समय के भीतर सैन्य कार्रवाई को अंजाम देकर ठिकानों को नष्ट किया जाता है। इस कार्रवाई की सूचना बेहद गोपनीय रखी जाती है। इसकी जानकारी सिर्फ कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों के साथ विदेश और रक्षा मंत्रालय को दी जाती है। सर्जिकल स्ट्राइक में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि उस क्षेत्र के आम आदमी को कोई नुकसान न पहुंचे और मानवाधिकार का उल्लघंन न हो। सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने का कोई भी तरीका हो सकता है या उस क्षेत्र में खास कमांडोज (शक्ति) और सैन्य टुकड़ों को जमीन पर उतारकर टारगेट (लक्ष्य) को निशान बना कर भी हो सकता है।

ऐसे लिया उरी हमले का बड़ा बदला:- 28 सितंबर 2016 को 2,4 और 9 पैराशुट सैन्य दल के कमांडो सहित सेना के 150 जवान पीओके में घुसे। कमांडो पाक सीमा के अंदर तीन किलोमीटर तक पैदल ही गए। सेना ने एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ भीगर, हॉटस्प्रिंग, केल और लिपा सेक्टर में हमला किया। ऑपरेशन (क्रिया) को बारामूला, राजौरी और कूपवाड़ा में तैनात सेना की 19,25 और 28 डिविजन्स (विभाग) के जवानों ने अंजाम दिया। यह ऑपरेशन आधी रात 12.30 बजे शुरू हुआ। 4.30 बजे सुबह तक कार्रवाई की गई। 150 खास जवानों का दल ने 40 आतंकियों को मार गिराया। 07 आतंकी शिविर हुए तबाह इसके साथ 9 पाक सैनिकों को भी मार गिराया।

ऑपरेशन के महत्वपूर्ण तथ्य निम्न हैं-

  • एलओसी के नजदीक चॉपर (हेलिकॉप्टर) से उतरी पांच कमांडो दल, हर दल में 15-20 कमांडो थे। कमांडो के कैमरे लगे हेलमेट पहने हुए थे, जिससे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग (प्रबोधक) हो रही थीं। पूरे ऑपरेशन की ड्रोन कैमरे से रिकॉर्डिग (प्रमाणित) की गई, ताकि सबूत रहे।
  • अंधेरा होने पर रेंगकर फेंसिंग (जाल) पार की। 2.30 बजे के आसपास 2-3 किमी पैदल कीचड़ पत्थर यहां तक की लैंडमाइंस (भूमिगत बम) को भी पार कर कमांडो आतंकियों के लॉन्च पैड (शुरू में मंद गति) तक पहुंचे। खास फोर्स (सेना) के अलावा सेना की एक टुकड़ी कमांडोज के रास्ते की सुरक्षा कर रही थी। इन जवानों को बैकअप (पीछे से ऊपर) के लिए साथ रखा था। अगर लक्ष्य तक पहुंचने के बीच कोई भी चुनौती मिलती तो इन्ही जवानों को उससे निपटना था। ताकि कमांडो सीधे अपने लक्ष्य तक पहुंच सके।
  • मिशन (लक्ष्य) पूरा कर 2 घंटे बाद अपनी सीमा में लौटे कमांडो। रात 2.30 बजे हमला किया। पीओके में 42 आतंकी शिविर हैं। 4 बंद हो चुके हैं। जिस इलाके में हमला हुआ वहां 11-12 शिविर हैं। 7 को टारगेट (लक्ष्य) किया गया।
  • 48 घंटे तक बिना पानी के लड़ सकते हैं हमारे कमांडो। कंमांडो टेवर और एम-4 गन (बन्दुक), ग्रैनेड्‌स, स्मोक (नशीली पदार्थ) ग्रैनेड्‌स, यूबीजीएल लॉन्चर (शुरुआत) और कैमरे (तस्वीर खींचने का यंत्र) लगी हैलमेट से कम थे। इनके ये हथियार खासतौर पर छोटे, हल्के लेकिन हैवी फायरिंग (भारी हमले) में सक्षम होते हैं।
  • हमें बहुत ही विश्वस्त और पक्की जानकारी मिली कि कुछ आतंकी एलओसी के साथ शुरू पैड्‌स पर एकत्रित हुए हैं। उनका मकसद भारत में घुसपैठ करके आतंकी हमले करना था। हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया। कई आतंकी मार गिराए। हमारा ऑपरेशन पूरा हुआ। लेकिन आगे कोई प्रतिक्रिया हुइ तो हम उसका भी पुरजोर जवाब देंगे।

                                                                                                                                                     ले. जनरल रनबीर सिंह, डीजीएमओ

जानकारी दी:-जो समयनुसार निम्न हैं-

  • सुबह 8.00 बजे अमेरिकी एनएसए सुजैन राइस ने हमारे एनएसए अजीत डोभाल से फोन सबुह बात की। शाम को 22 देशों को भारत ने स्ट्राइक की जानकारी दी। कई देशों ने भारत की कार्रवाई का समर्थन किया।
  • सुबह 10.30 बजे सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक बुलाई गई।
  • दोपहर 12.00 बजे सेना व विदेश मंत्रालय ने देश को बताया हमने हमला किया। सेना और फॉरेन मिनिस्ट्री (मंत्रिगण) ने आधे घंटे के आदेश पर मीडिया (संचार माध्यम) को बुलाया। ’सर्जिकल स्ट्राइक’ की जानकारी दी। यह भी साफ किया कि आगे कार्रवाई नहीं करेंगे पर कुछ हुआ तो जवाब भी देंगे।
  • दोपहर 2.35 बजे गृहमंत्री ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और गुजरात में पाक से लगे 10 किमी तक के गांवों को खाली कराने का आदेश जारी किया। वाघा सीमा पर बीटिंग (मारपीट का दंड) रिट्रीट (शरण/पीछे हटना) हुई। लेकिन लोगों के आने पर रोक रही।
  • दोपहर 4.15 बजे सरकार ने सभी दलों की सभा बुलाई। सुषमा स्वराज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलीं। सभी दलों ने सरकार के सख्त रुख का समर्थन किया। आगे भी साथ रहने का भरोसा दिलाया।

महत्वपूर्ण फेसले:-

  • पहली बार सेना एलओसी पार कर पीओके में घुसी।
  • प्रेस (जन-समुदाय) सम्मेलन कर इसे स्वीकार भी किया।
  • सर्जिकल ऑपरेशन की ड्रोन से वीडियो ग्राफी (चित्र बनाने या लिखने में प्रयुक्त यथा इत्यादि की।

सैन्य कार्रवाई:- उरी हमले के दस दिन बाद भारत ने पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर अलग-थलग करते हुए अब बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। सेना ने पहली बार आधी रात को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। करीब चार घंटे तक चले इस सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान सेना ने तकरीबन 40 आतंकी मार गिराये। भारत के इस ऑपरेशन को पाक पर करारा तमाचा माना जा रहा है। डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि यह स्ट्राइक आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों के खिलाफ थी। उन्होंने ऑपरेशन खत्म होने की जानकारी दी। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हामिद अंसारी को कार्रवाई की पहले ही जानकारी दे दी थी।

हमला:-

  • जिन आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया, उनकी सेना बीते एक सप्ताह से निगरानी कर रही थी। पूरी तरह पुख्ता सबूत जुटाने के बाद ही ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
  • ऑपरेशन की ड्रोन (मसक बाजे की निचली नली या नर मुधुमक्खी) से वीडियोग्राफी हुई। आतंकी शिविरों को नष्ट करने की तस्वीरें ली गई। सरकार इस पर फैसला लेगी कि इस फुटेज को जारी करना है या नहीं।
  • सर्जिकल स्ट्राइक से पहले सरकार यूएन में विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज के भाषण का इंतजार कर रही थी। सरकार पहले राजनयिक आक्रमण तेज करना चाहती थी।

विदेशी सहयोग:-

  • अमेरिका ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री दव्ारा भारत पर परमाणु हमला करने की धमकी पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान को अपनी नाराजगी जता भी दी है। उसने कहा है कि परमाणु संपन्न दोष के प्रमुख नेताओं को बयानों में संयम बरतना चाहिए। वहीं, भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को उसके कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के मामले में संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य देशों ने कोई समर्थन नहीं मिल सका है। वहीं, अमेरिकी सांसदो सहित कई देशों के नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत का समर्थन किया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक दल के व्हिप स्टेनी होयर ने उरी आतंकी हमले को दिल दहलाने वाली घटना बताया। अमेरिकी सांसदो ने किया भारत का समर्थन।
  • इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत आतंकवाद विरोधी मुहिम का अगुवा बन सकता है। फ्रांस, अमरीका, ब्रिटेन समेत आतंकवाद से पीड़ित तमाम पड़ोसी देश बाग्लादेश, नेपाल, भूटान हमारे साथ आ जाएंगे। पूरा का पूरा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश, जहां-जहां आतंकवाद फैल रहा है, वह भारत के साथ खड़ा हो जाएगा। सेना ने पहले ही बोल दिया था, समय भी हमारा होगा और जगह भी और सच में उसने ऐसा करके भी दिखाया।

संयुक्त राष्ट्र :-

  • भारत -पाक नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम पर नजर रखने वाले संयुक्त राष्ट्र सैन्य निगरानी समूह यूएनमोगिप ने कहा है कि उसे नियंत्रण रेखा पर आगजनी की कोई घटना नजर नहीं आई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है।
  • उन्होंने कहा ’किसी के देखने या नहीं देखने से असल बात बदल नहीं जाती। वास्तविकता, वास्तविकता होती है, हमने तथ्य सामने रखे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक से जब पूछा गया कि भारत जब कह रहा है कि उसने सर्जिकल स्ट्राइक किए तो यूएनमोगिप को गोलियां चलते हुए कैसे नहीं दिखीं। जब उन्होंने दोहराया कि सीधे तौर पर कोई गोलीबारी नहीं देखी।
  • चेतावनी:- सेना ने प्रेस सम्मेलन में पाक को खुली चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो दोबारा ऐसा ऑपरेशन चलाएंगे। बाद में डीजीएमओं ने भी ऐसी और कार्रवाई करने की बात कही है।
  • सोशल मीडिया (संचार माध्यम):- पर भी यह कार्रवाई करीब तीन घंटे तक दुनियाभर में टॉप-ट्रेड में रही। हैशटैग ’मोदीपनिशपाक’ व ’इंडियनआर्मी’ व्यापार करता रहा। एक ट्‌वीट यह भी आतंकियों तुम्हें मरने के लिए सीमा पार करने की जरूरत नहीं। सेना ने होम डिलिवरी शुरू कर दी हैं।
  • पीओके सर्जिकल स्ट्राइक के पांच सूत्रधार:- बीते 11 दिन से जनमानस की बेचैनी और भावुक बयानों के बीच देश का शीर्ष नेतृत्व रणनीति बनाने में वयस्त था। हालात परखकर, सही जगह चोट करने की इस रणनीति में यूं तो कई लोगों का योगदान रहा है, लेकिन इसके सूत्रधार प्रस्तुत पांच चेहरे है। ये आगे भी दुश्मन को माकूल जवाब देने को तैयार है।

मनोहर पर्रिकर, रक्षामंत्री-

  • जन्म: 13 दिसंबर 1955 आईआर्टी-बॉम्बे से इंजीनियरिंग (अभियंता) में स्नातक। आईआईटी के पहले छात्र जो मुख्यमंत्री बने। आईआईटी के बाद कारोबार के साथ आरएसएस में स्थानीय संघचालक रहे। राष्ट्रीयता, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन के लिए संघ की भूमिका स्वीकार करते हैं। 1994 में पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने। अक्टूबर 2000 में पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री बने। पत्नी मेघा का 2001 में कैंसर से निधन। एक बेटा इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (विद्युत अभियंता), दूसरे का गोवा में कारोबार हैं।
  • खासियत- विरोधियों का नजरिया भांपने में माहिर। शांत भीतरी हलचल चेहरे से जाहिर नहीं होने देते।

      कल हमारे जवानों ने 5 लोगों (आतंकियों) को वापस भेज दिया। पाकिस्तान में जाना और नर्क में जाना एक ही है।

                                                                                                                     (अगस्त 2016 में एक सैन्य अभियान के बाद का बयान)

ज. दलबीर सिंह सुहाग, सेना प्रमुख-

  • जन्म: 28 दिसंबर 1954 तत्कालीन पूर्वी पंजाब में जन्म। चित्तौड़गढ़ से शुरुआती शिक्षा। 1970 में एनडीए में दाखिला।
  • सेना में अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिता सूबेदार मे रहे। एलडीए के बाद स्ट्रेटेजिक स्टडी (खोज) के लिए हवाई और नैरोबी गए। पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह से विवाद रहा। कारगिल युद्ध में अदम्य शौर्य के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक के अलावा अन्य मोर्चो पर परम विशिष्ट सेवा पदक उत्तम, युद्ध सेवा पदक और विशिष्ट पदक से सम्मानित। मध्यवर्गीय परिवार की विरासत।
  • खासियत- उच्च नैतिक मूल्यों के समर्थक। धैर्य और जमीनी हकीकत के आधार पर निर्णय लेने के लिए मशहूर।

    पाकिस्तान परमाणु हथियारों का बचकाना इस्तेमाल कर सकता है लेकिन हमारी नीति सपष्ट है। हम पहले ये हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे।

                                                                                                                                             (अप्रैल 2016 में शत्रुजीत के दौरान बयान)

अजीत डोभाल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार-

  • जन्म: 20 जनवरी 1945 मई 2014 में प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार बने। खुफिया विभाग में काम का लंबा अनुभव।
  • उत्तराखंड के ताल्लुक रखने वाले डोभाल के पिता भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। अजमेर मिलिट्री (फौजी) विद्यालय से शुरुआती शिक्षा हासिल करने वाले डोभाल 1968 बैच के आईपीएस हैं। हाल ही में इराक से भारतीय नर्सो की वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका है। कंधार विमान कांड के समय मुख्य वार्ताकार थे। पाकिस्तान में जासूस रहे। 2005 में सेवानिवृत के बाद विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशन (नींव) की स्थापना की।
  • खासियत- दुश्मनों की कमजोरियो से परिचित। वेश बदलने में माहिर। हमेशा प्लान बी (योजना दूसरी) के लिए तैयार।
  • कल से हालत आज बेहतर हुए हैं और कल और अच्छे होंगे। कश्मीर की समस्याओं से हम वाकिफ हैं और उन्हें हल करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

                                                                                                                                                                                (जुलाई 2016 में)

राजिन्दर खन्ना, रॉ प्रमुख-

  • मूलत: आईपीएस अधिकारी लेकिन बाद में रिसर्च एंड एनालिसिस सर्विस (खोज और विघटन) सेवा) (आरएएस) में गए। 1978 बैच के अधिकारी। दिसबंर 2014 में रॉ (अपक्व/असिद्ध) के प्रमुख बनाए गए। आरएएस से रॉ प्रमुख बनाए गए पहले अधिकारी। दिसंबर में कार्यकाल खत्म हो रहा हैं। कई आतंक विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया है। खुफिया विभाग में कई जिम्मेदारी भी संभाली। कहा जाता है कि कई देशों में बतौर जासूस भी काम किया है। लंबे कार्यकाल में पूर्वोत्तर में भी काम किया।
  • खासियत- सार्वजनिक जीवन से दूर। संचार माध्यम से दूर रहकर काम करते हैं।
  • आतंकियों के मंसूबे नाकाम करने और विदेशों में आतंकियों के हिमायतियों के बारे में खुफिया जानकारी हासिल करने की कोशिशों का अहम हिस्सा। पाकिस्तान के छद्म युद्ध के खिलाफ लंबा अनुभव।
  • रॉ में आतंकवाद विरोधी इकाई के जनक। दुनिया भर की खुफिया कार्यकताओं से सहयोग हासिल करने में महारत हासिल।

ले. ज. रणबीर सिंह, डीजीएमओ-

  •  मिलिट्री ऑपरेशन के निर्देशक जनरल (डीजीएमओ) पद पर आने से पहले जनरल रणबीर सिंह असम में उग्रवादी गतिविधियों में काफी कमी आई। अपने चार दशक के कार्यकाल में उन्होंने स्टॉफ (सदस्य) और मोर्चे दोनों स्तर पर बखूबी काम किया है।। 2012-14 के दौरान भारत-म्यंमार सीमा पर उन्होंने शांति स्थापित की।
  • खासियत-लंबे सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने की काबलियत। घेरेबंदी करने में माहिर। सीधी लड़ाई का अनुभव। कम से कम जोखिम में सफलता हासिल करने का प्रमाण। 39 साल की जीवनवृत्ति। 1975 में बिहार सैन्य दल से शुरूआत।
  • मैं यकीन दिलाता हूं कि भारतीय सेना दुश्मन को माकूल जवाब देगी। हमले की जगह और समय हम तय करेंगे। हम ताजा हालात पर नजर रखे हुए हैं।

                                                                                                                                                                             (उरी हमले के बाद)

पाकिस्तान पस्त:- एलओसी के पार पाक की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक के भारत के दावे को पाक ने नहीं माना। पाक सेना ने कहा कि भारत से क्रॉस बॉर्डर (सीमा पार) फायरिंग (आगजनी) हुई है, जिसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं शरीफ ने कहा कि हमारे शांति के प्रयासों को हमारी कमजोरी न समझें। बोखलाए पाक ने पांच अक्टूबर को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। पाक ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया है। भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने ही घर में घिर गए हैं। उरी हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक स्तर पर पाक को अलग-थलग करने में कामयाबी तो पाई ही थी, साथ में अब सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। शरीफ राजनीति दलों, सेना और अपनी अवाम के निशाने पर आ गए हैं। वहीं, भारतीय सेना के साहसिक कदम से पाक सेना का मनोबल काफी गिर गया है। माना जा रहा है कि शरीफ नवम्बर में सेवानिवृत होने वाले पाक सेना प्रमुख राहिल शरीफ का कार्यकाल बढ़ाए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

ऐसे बढ़ रहा नवाज का सिरदर्द-जिसमें निम्न बाते हैं-

  • उ. वजीरिस्तान पर रस्साकशी-2013 में सत्ता में आने के बाद से शरीफ की सत्ता पर पकड़ लगातार ढीली पड़ रही है। उत्तरी वजीरिस्तान में तालिबान से निपटने के तरीके पर सेना और शरीफ के बीच तनाव बढ़ गया है।
  • बलूचिस्तान- पीएम मोदी ने बलूचिस्तान के मुद्दे जैसे अंतरराष्ट्रीयकरण किया है, उससे दुनिया का ध्यान इस ओर गया है। पाक आर्मी के बलूचिस्तान में अत्याचारी का मुद्दा अब दुनियाभर में छा गया है।
  • फिल्म निर्माताओं के संगठन ’इंडियन मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन’ (भारतीय चलती-फिरती तस्वीरें मंडली) ने भी पाक कलाकरों के हिन्दी फिल्मों में काम करने पर रोक लगा दी है। वहीं, पाक में भी बॉलीवुड फिल्मों पर बैन लगा दिया गया है। पाक को आर्थिक रूप से काफी नुकसान होगा।
  • इस्लामाबाद में होने वाला सार्क सम्मेलन आखिरकार पाक को टालना पड़ा। इससे पहले श्रीलंका ने इस सम्मेलन से किनारा कर लिया था। अन्य देशों के समूह में ऐसा करने वाला श्रीलंका पांचवां देश बन गया है।
  • परमाणु बमों की तुलना में भारत के 36 राफेल चीन और पाक से सटी सीमाओं पर तैनात होंगे। इस बात की आशंका से चीन और पाक परेशान हो गए हैंं।

पाक प्रतिक्रिया पर तैयारी:- निम्न हैं-

  • पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तनाव को देखते हुए सरकार ने पाकिस्तान के किसी भी संभावित पलटवार से निपटने के लिए कमर कस ली है। पाक सीमा से लगे पंजाब, राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर के गांवो के 10 किमी के इलाके खाली करा लिए गए हैं। इसके साथ ही वहां बीएसएफ के अतिरिक्त जवानों को भेजा जा रहा है।
  • बौखलाए पाक की संभावित प्रतिक्रिया से निपटने के लिए भारत ने तैयारी कर ली है। तीनों सेनाओं में छुट्‌िटयां रद्द कर दी गई हैं। सीमावर्ती अस्पतालों को आपातकालीन सेनाओं को तैयार रहने को कहा गया हैं। पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों और नर्सों की छुट्‌िटयां रद्द कर दी गई हैं।
  • पंजाब के सीमावर्ती इलाके खाली करवाए जा रहे हैं। सरहद से 10 किमी अंदर तक के इलाके खाली कराने के निर्देश दिए गए हैंं।
  • वाघा सीमा पर बीटिंग रिट्रीट परेड जारी रहेगी, मगर लोगों को वहां जाने की मनाही है। लोगों को अटारी सीमा पर नहीं जाने की सलाह दी हैं। राजस्थान की सरहद सील कर दी गई। सेना और वायुसेना को हाईअलर्ट (उच्च सावधान) कर दिया गया।
  • रूपरेखा:-सूचना के पुख्ता होने के बाद कार्रवाई की रूपरेखा बनाई गई। इसमें निर्देशक जनरल मिलिट्री ऑपरेशन, रक्षा मंत्री और तीनों सेना प्रमुखों के अलावा राष्ट्रीय सरुक्षा सलाहकार ने भी हिस्सा लिया। सर्जिकल स्ट्राइक में हिस्सा लेने वालो कमांडोज को बारिकी से लक्ष्य के बारे मे जानकारी दी गई हालांकि कमांडोज का यह नहीं बताया कि उन्हें कहां ऑपरेशन करना है। महज दो घंटे पहले जवानों को बताया गया कैसं इसे पूरे हमले को अंजाम देना हैं।
  • कार्रवाई जरूरी:- भारतीय सेना की एलओसी पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक बेहद जरूरी थी। इस साल पाकिस्तान संरक्षित आतंकियों ने पठानकोट, पाम्पोर, पूंछ और उरी में हमले किये और 20 बार सीमा पार करने की कोशिश की। उम्मीद है कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद स्थिति बदलेगी और पाकिस्तान आतंकवादियों को संरक्षण देने से बाज आएगा। पाकिस्तान को उसके घर में घुस कर बार-बार मारना होगा और हम मारेंगे। पूर्व राजदूत नरेश चंद्रा कहते है कि इस तरह की कार्रवाई आम जनता और सेना के मनोबल के लिए भी जरूरी थीं।
  • पीओके- यह मात्र उरी पर आतंकी हमला नहीं, बल्कि हमारे देश की ताकत पर हमला किया गया है। किसी देश के सेना के मुख्यालय पर हमला होना कोई सामान्य बात नहीं। भारत को फौजी कार्रवाई कर पीआके को वापस लेना चाहिए। अगर पीओके पर फौजी हमला होता है तो निश्चित रूप से पाकिस्तान कमजोर पड़ जाएगा, क्योंकि पीओके में ही 70 फीसदी आतंकी शिविर चलाए जाते हैं। चीन हो या अमरीका, सभी जानते हैं कि पीओके भारत का हिस्सा है। पाकिस्तान ने उस पर जबरन कब्जा कर रखा है।

सबूत:-

  • भारत और पाकिस्तान के बीच आजकल जो चल रहा है वह अजूबा है। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इतिहास में एक विलक्षण प्रहसन के तौर पर जाना जाएगा। मुठभेड़ तो हुई है दो देशों के बीच, लेकिन दंगल उनके बीच नहीं, उनके अंदर चल रहा है। भारत में मोदी के विरोधी हाथ धोकर उनके पीछे पड़ गए हैं। वे कह रहे हैं कि भारत ने यदि नियंत्रण-रेखा के पार शल्य-चिकित्सा (सर्जिकल स्ट्राइक) की है तो सरकार कोई प्रमाण क्यों नहीं देती? दूसरे में सरकार प्रचार में तो मेधावी है है, लेकिन प्रमाण में मंदबृद्धि क्यों हैं? फौज ने जब प्रमाण बनाकर वीडियों मोदी जी को सौंप दिए तो प्रधानमंत्री संयम का उपदेश क्यों दे रहें हैं? जो लोग प्रमाण मांग रहे हैंं, वे फौजी कार्रवाई की तारीफ तो जमकर कर रहे हैं, लेकिन सरकार के हाथ मजबूत करने के नाम पर उसकी टांग खींच रहे हैं। राहुल गांधी का ’खून की दलाली’ वाला बयान बहुत जहरीला है।
  • उधर, पाकिस्तान की सरकार पहले दिन से बार-बार कह रही है नियंत्रण-रेखा के पार कोई हमला हुआ ही नहीं है। यह कोरी गप है। भारतीय फौजो ने कौन से सात ’लांच पैड’ उड़ाए हैं और कौन से 38 पाकिस्तानी जवान और आतंकी मारे हैं, जरा वह दुनिया को बताए। उसने कुछ अपने और कुछ प्रसिद्ध विदेशी पत्रकारों को ले जाकर नियंत्रण-रेखा के वे स्थान भी दिखा दिए, जिन पर हमले का दावा हमारी सरकार ने किया था। संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों और इन पत्रकारों ने कहा है कि उन्हें हमले के कोई सबूत नहीं मिले।

                                                                                                                           वेदप्रताप वैदिक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष

  • पाक में उथल-पुथल:-यदि भारत ने कुछ नहीं किया है तो फिर पाकिस्तान में इतनी उथल-पुथल क्यो मची हुई हैं? प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को रोज बयानबाजी क्यों करनी पड़ रही हैं? वे अपने सेनापति राहील शरीफ से मंत्रणा क्यों कर रहे हैं? उन्हें मंत्रिमंडल, सभी दलों और संसद की आपात बैठक क्यों बुलानी पड़ी है? सारी बात आई-गई हो जानी चाहिए, लेकिन अफवाहों का बाजार गर्म हैं अफवाह यह भी हैं कि दोनों शरीफ अब शराफत की हद पर पहुंच गए हैं। नवाज शरीफ ने फौज और आईएसआई से कह दिया है कि आतंकियों के खिलाफ जो भी कार्रवाई हो, उसमें वे बिल्कुल अडंगा न लगाएं। पाकिस्तानी अखबार ’डॉन’ की खबर है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेंजुआ और गुप्तचर मुखिया अख्तर को आदेश दिया है कि वे पाकिस्तान के चारों प्रांतों में जाएं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करें। पाक-प्रवक्ता ने इस खबर को मनगंढ़त बताया हैं लेकिन पाक संचार माध्यम पर यह खबर छाई हुई हैंं।
  • भारत को समर्थन:-असल बात तो यह है कि उड़ी में हुआ हमला पाकिस्तान को बहुत महंगा पड़ गया हैं। उड़ी-जैसे आतंकी हमले कई हो चुके हैं। भारत ने कई बार जवाबी कार्रवाई भी डटकर की है, लेकिन इन छुट-पुट मुठभेड़ों का जैसा प्रचार इन दिनों हुआ हैं, पहले कभी नहीं हुआ। हमारी प्रचारप्रेमी सरकार बधाई की पात्र हैं, जिसने सारी दुनिया में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया हैं। वह इतना अकेला 1971 में भी नहीं पड़ा था, जब उसने पूर्वी पाकिस्तान में नर-संहार किया था। उस समय अमेरिका और चीन उसकी पीठ ठोंक रहे थे, लेकिन उड़ी की घटना ने उसे ’अंतरराष्ट्रीय अछूत’ बना दिया हैं। दुनिया की किसी भी महाशक्ति, किसी भी मुस्लिम राष्ट्र और किसी भी दक्षेस राष्ट्र ने पाकिस्तान के लिए सहानुभूमि का एक शब्द भी नहीं बोला। उड़ी हमले की सबने निदां की तथा भारत की जवाबी कार्रवाई को सही और जरूरी बताया। इस्लामाबाद में होने वाले दक्षेस सम्मेलन स्थगित हो गया। पाकिस्तान और आतंकवाद एक दूसरे के पर्याय बन गए। आज आतंकवाद इतना घृणित शब्द है जो राष्ट्र भी इसमें शामिल पाया जायेगा उसे दुनिया ’गुंडा-राज्य’ कहने के लिए तैयार है। पाकिस्तान की परेशानी का कारण यही है।
  • भारत और पाक:-सच पूछा जाए तो सारा मामला अब ठंडा पड़ जाना चाहिए, क्योंकि मोदी ने भी इसे तुल देना ठीक नहीं समझा है और नवाज भी कह रहे हैं कि कुछ हुआ ही नहीं है। किन्तु यह गरमाया जाता रहेगा, क्योंकि यह अब जितना भारत-पाक के बीच है, उससे कहीं ज्यादा यह दोनों देशों की आतंरिक राजनीति का अहम मुद्दा बन गया है। भारत में उत्तरप्रदेश और पंजाब के चुनाव हैं। पाकिस्तान में सेनापति राहील शरीफ सेवानिवृत्त होने वाले हैं और ’पनामा पेपर्स’ से निकले काले धन की वजह से नवाज काफी कमजोर पड़ गए हैं। फौजी तख्ता-पलट की अफवाह भी गर्म है। इधर भारत में ढाई साल के राज ने मोदी की छवि को काफी मंदा कर दिया था। दिल्ली और बिहार में मात खाने तथा उत्तराखंड और अरुणाचल में दुर्गति करवाने के बाद यह उड़ी-कांड एक आसमानी वरदान की तरह टपक पड़ा। अब भाजपा इसे भुनाए तो इसमें गलत क्या है? इसी संभावना ने भारत के विरोधी दलों को हड़का दिया हैं। वे और नवाज शरीफ बिल्कुल एक ही आवाज में बोल रहे हैं

विवाद:-

  • यदि ’सर्जिकल स्ट्राइक’ विवादास्पद बन गया तो भी फायदा भाजपा को मिल गया, सो मिल गया, बस डर यही है कि यह विवाद कहीं अंतरराष्ट्रीय बहस का मुद्दा न बन जाए। उस स्थित में मोदी सरकार ही नहीं, भारत की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग सकती है। तब सरकार के पास ’सर्जिकल स्ट्राइक’ के प्रमाण पेश करने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा।
  • यह तर्क बिल्कुल गलत है कि इन प्रमाणों को दिखाने से हमारे हथियार, हमारी रणनीति और हमारे रहस्य दुनिया के सामने उजागर हो जाएंगे। एक स्थानीय और छोटी-सी कार्रवाई के लिए इतनी बड़े-बड़े बहाने बनाने की कोई जरूरत नहीं है। हो सकता हैं कि मोदी सरकार पर ’झूठ बोलने’ और फौजयों के खुन की दलाली’ के सारे आरोप लगाने के बाद विरोधी नेता जब गदगद होने लगें तो उसी समय मोदी ’सर्जिकल स्ट्राइक’ के सारे प्रमाण दिखा दें। ये प्रमाण प्रकट हो या न हो, लेकिन ’सर्जिकल स्ट्राइक’ जिसका सरकार ने इतना प्रचार किया है और जो पहले गुपचुप होती थी, वह अब सरकार की नई नीति बन गई हैं। देखें, इस नई नीति का पालन कहां तक होता हैं?

गर्व:-

  • देश गर्व से भर उठा है। पहली बार आतंक के विरुद्ध भारतीय युद्ध की झलक, शक्तिशाली रूप से सामने आई है। और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खुलकर इसे घोषित किया गया है। इससे पहले नियंत्रण रेखा पर की जाने वाली सैन्य कार्रवाई कभी भी स्वीकार नहीं की जाती थी। इसे सामने लाने के कारण ही आज देश के नौजवानों की भुजाएं फड़कने लगी हैं। जिन्हें यह शिकायत थी कि हमारे सैनिक हमेशा शहीद क्यों होते रहेंगे-उनके पास आज सैनिकों के साहस की प्रशंसा के शब्द कम पड़ रहे हैं। और आतंक की कारखाना बने पाकिस्तान की हालत तो म्यांमार से भी बदतर हो गई है। यदि इस्लामाबाद इस कार्रवाई को मान ले-तो आतंकी ठिकाने बनाने और आतंकियों को पनाह देने का दोष खुद-ब खुद उस पर आ जाएगा। इसलिए नवाज शरीफ के पास कोई चारा नहीं है। झूठ बोलना उनकी मजबूरी है। सर्जिकल स्ट्राइक की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह भावावेश में उठाया गया कदम नहीं था। नींद में हमारे 19 जांबाजों पर, चुपके से किया कायराना उरी हमला और हत्या ’बदला’ लेने के लिए स्वाभाविक कारण बन सकता था। उत्तेजित और आक्रोशित जवान ’डू ऑर डाई’( संपादन करना/धनी है वर्ण/रंगने का द्रव्य) पर उतर सकते थे। किन्तु सेना का कठोर अनुशासन और सरकार की आक्रामक किन्तु सूझबूझ भरी नीति के कारण ही आज गौरवशाली पल आया है।
  • उरी हमले के बाद देश में पाकिस्तान के विरुद्ध अभूतपूर्व माहौल बन गया था। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए। मोदी का प्रधानमंत्री बनने से पहले कथन, उन्हीं को याद दिलाया जा रहा था। इस बीच मोदी सरकार की पाकिस्तान को अलग-थलग करने की नई योजना सामने आई। यही इस सर्जिकल स्ट्राइक के दमखम भरे फेसले का कारण बनी। पहले ये तय हुआ कि हर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को सबूतों का पुलिंदा भेजने की परंपरा बंद करनी होगी।

सजिर्कल स्ट्राइक से उठे पांच प्रश्न निम्न हैं:-

अब तक चल रही कूटनीति से अचानक सामरिक एक्शन (कार्रवाई) क्यों?

उत्तर- कुछ अचानक नहीं हुआ। उड़ी हमले के बाद जिस दिन मोदी वॉर रूम में गए थे, ये रणनीति उसी दिन से बननी शुरू हो गई थी। पुख्ता इंटेलिजेंस इनपुट (चतुर अंदर) एकत्रित किए गए। भारत के कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान के प्रतिक्रिया और उस प्रतिक्रिया पर हमारे संभावित जवाब का पूरा प्लान फाइनल (योजना अंत) किया गया। इसके बाद ही ये कार्रवाई की गई। इसमें 10 दिन लग गए।

अब सिंधु समझौता और एमएफएन का दर्जा रद्द करने जैसे मुद्दे का क्या?

उत्तर- देश में भी और दुनिया में भी ये बताना जरूरी हो गया था कि भारत कुछ कर रहा है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय दबाव भी न आए। इसलिए वही कदम उठाए जा रहे हैं, जो नजर आए। सिंधु जल समझौता तोड़ना आसान नहीं था। वो भारत के खिलाफ जा सकता था। अगला कदम पाक को दिया मोस्ट फेवरेट नेशन (अधिकतम पसंद राष्ट्रीय) का दर्जा वापस लेने और सीजफायर (धरना हमला) समझौता तोड़ने का हो सकता है।

अब क्या पाकिस्तान रिएक्ट (प्रतिक्रिया) नहीं करेगा? उसकी भी तो तैयारी होगी।

उत्तर:- नवाज शरीफ फंस गए हैं। अगर कार्रवाई नहीं करते हैं तो सेना तख्ता पलट सकती है। कटटरपंथियों-आतंकी गुटों के गुस्से का भी सामना करना पड़ सकता है। और कार्रवाई करते है तो वो सीमित युद्ध न होकर बड़े युद्ध की ओर जाएंगे। भारत-पाक एटमी शक्ति हैं, ऐसे में अमेरिका या यूएन पाक पर दबाव बढ़ाएंगे। मौजूदा हालात पाक को गृह युद्ध की ओर ले जा सकते हैं।

इस हमले से भारत को सबसे ज्यादा क्या हासिल हुआ?

उत्तर- सॉफ्ट स्टेट (मधुर राज्य) की छवि टूटेगी। 11 दिन से जो दबाव बना रखा था, वो दुनिया को पता था। पर भारत एलओसी पार कर सकता है, ये कल्पना किसी को नहीं थीं। ऐसे में एक संदेश स्पष्ट रूप से दुनिया में गया है कि भारत सैन्य विकल्प भी उपयोग कर सकता है। वो भी उतने ही गोपनीय तरीके से जितना एटमी परीक्षण के समय किया गया था।

इस बार कोई नई रणनीति या बात, जो दुनिया को चौंकाती हैं।

उत्तर- सर्जिकल ऑपरेशन पहले भी हुए हैं, पर कभी भी सेना ने खुलासा नहीं किया। पहली बार हमें बताया गया। साथ ही हमारे डीजीएमओ ने पाकिस्तान के डीजीएमओ को फोन कर इसकी जानकारी भी दी। हमारी सरकार ये बताना चाहती थी। ताकि एक संदेश जाए कि अब भारत के सब्र की सीमा खत्म हो रही हैं….।

मोदी का पाक को चारो ओर से घेरना:-

  • मोदी का चारों ओर से घेरना का पहला कदम था सिंधु के पानी का मुद्दा उठाना अचानक। खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।
  • दूसरा- विदेश मेंत्री सुषमा स्वराज से पाक को अकेला करने की बात अंतरराष्ट्रीय मंच पर दो टूक बुलवाना।
  • तीसरी बात सार्क का बहिस्कार।
  • चौथी बात सार्क देशों का साथ जुटाना।
  • पांचवां था सेना और सुरक्षा सलाहकार के माध्यम से ’सैन्य कार्रवाई’ के बारे में विचार और विकल्प ढूंढना।

ऐसे कि सेना का दबदबा कायम हो जाए किन्तु युद्ध भड़कानें जैसा कतई न हो आक्रामक सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका निकला सर्जिकल स्ट्राइक का।

पाकिस्तान की बैठक:- में मिलिट्री (फौज) में बैठकों का दौर, विपक्षी दलों की रैली-

  • पाक के एयर चीफ (हवा के मुखिया) सोहैल अमन ने कहा-भारत सर्जिकल स्ट्राइक कह रहा है, पर यह क्रॉस बॉर्डर फायरिंग (सीमा पार आगजनी) हैं। पाक के रडार एक्टिव (तैयार) हैं हमारी एयरस्पेस (हवा अवकाश या अंतर रखना) में भारत की तरफ से कोई गतिविधि नहीं हुई। अगर ऐसा कुछ हुआ तो हमारे जेट तैयार हैं।
  • लोग गुस्से में हैं। कार ड्राइवर तक कह रहे कि एक बार जंग हो ही जाए। पर पढ़ा लिखा तबका नवाज शरीफ से खफा है वे शॉल-साड़ी आम की डिप्लोमेसी (कूटनीति) कर रहे हैं।
  • पाकिस्तानी संचार माध्यम बता रहा कि नवाज शरीफ ने 5 अक्टूबर को संसद का संयुक्त सत्र बुलाया हैं। हमले पर चर्चा होगी उधर पाक ने भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावले को समन भेजा हैं।

विश्लेषण:-

  • ये हमला ठीक वैसा ही हुआ है, जैसा देश उम्मीद कर रहा था। हमारी सर्जिकल स्ट्राइक आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान के दिमाग को भी टारगेट (लक्ष्य) करेगी। उनके लिए यह सबसे बड़ा संदेश है। 11 दिन पहले उरी में हुए हमले के बाद डीजीएमओ ने कहा था हम जवाबी कार्रवाई जरूर करेंगे। लेकिन जगह और समय हम तय करेंगे। ये हमला उसी रणनीति का सफल नतीजा है।
  • नियंत्रण रेखा के आसपास इस तरह के हमलों के योजना हमारे पास हमेशा होती हैं। सेना को इन जगहों की जानकारी पहले से होती है। ये हमला भी लंबी धैर्य के तहत हुआ है। और अभी ये आगे चलता रहेगा। बस राजनीतिक हमले की जरूरत होगी। हाल ही में हमारी राजनीतिक नेता ने पाकिस्तान के खिलाफ जो बयान दिए हैं उससे सेना को बल मिला है।
  • पाकिस्तान का हमला से इंकार:-जहां तक पाकिस्तान की बात है, तो वो हमेशा से इंकार करता आ रहा है कि उसने कभी आतंकवाद का साथ दिया है। वो तो ये भी नहीं मानता कि इन सब कारणों से उसका कभी नुकसान हुआ। भले हमले वो करे या हमारी ओर से जवाबी कार्रवाई हो। पाकिस्तान का यह रवैया नया नहीं है। यही कारण है कि पाकिस्तान मना कर रहा है कि ऐसी कोई स्ट्राइक हुई है।
  • तैयारी- एलओसी पर जो लांचिंग पैड है, दरअसल वो पाकिस्तानी सेना के शिविर होते हैं। वहीं आतंकवादियों को पनाह भी मिलती है। इस स्ट्राइक से नुकसान केवल आतंकवादियों को ही नहीं, पाकिस्तानी सेना के जवानों को भी हुआ होगा अब इस स्ट्राइक के बाद अगर पाकिस्तान कुछ करने के लिए सोचता है तो हमारी सेना तैयार है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षामंत्री, मिलिट्री कमांडर्स मिलकर कार्रवाई की योजना कर रहे हैं। हमारे वॉर रूम में वॉर खेल चल रहे हैं हम जानते हैं कि दुश्मन की तरफ से क्या जवाब हो सकता है। हमने हमारा टारगेट (लक्ष्य) हासिल कर लिया है। पाकिस्तान ये समझ ले कि उसने हम पर हमला किया था, तो भारत ने उसका जवाब दिया है। ये न्याय है। हमने लाइन ऑफ कंट्रोल (जीवन नियंत्रण) पर कार्रवाई की है। उसके आगे ले जाना हमारा मकसद नहीं हैं। पर प्रतिक्रिया में कुछ हुआ तो हम हर चीज के लिए तैयार भी हैं। पाकिस्तान की एटमी हमले की धमकी से भारतीय सेना डरनेवाली नहीं है। जब पता चल जाता है कि हमें न्यूक्लियर ताकत पर हमला करना है तो तैयारी भी न्यूक्लियर हथियार वाले देश से मुकाबले के मुताबिक ही होती हैं। ये बच्चों का खेल नहीं है कि आप यूं ही हमे डरा देंगे। अगर देश का राजनीतिक नेतृत्व निर्णय लेता है कि सेना की ताकत का इस्तेमाल करना है तो पाक की धमकियों से हमारी कार्रवाई रुकेगी नहीं। अगर सवाल ये है कि अंतरराष्ट्रीय दवाब कैसे पूरा होगा तो राष्ट्रीय सुरक्षा हमारे लिए अहम है। दवाब तो बना रहेगा। इस सबके बीच पाक आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखेगा। वह ऐसा ढांचा तैयार कर चुका है जो दो मुंही तलवार है। हमारी सरकार ने जो शुरू किया है वो एक रात में नतीजे नहीं देगी। पर इसका असर होगा।

                                                                                                                                                       जनरल बिक्रम सिंह, पूर्व सेना प्रमुख

पाक मीडिया (संचार माध्यम):-

  • में भारत के आठ जवानों के मारे जाने और एक को जिंदा बंधक बनाए जाने की खबरों को भारतीय सेना ने झूठा करार दिया है।
  • पाक के मुख्य न्यायाधीश अनवर जहीर जमाली नई दिल्ली में होने वाली सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे। जमाली ने भारतीय सुप्रीम न्यायालय को इस बारे में पत्र लिखा है।

                                                                                                                                               अनवर जहीर, पाक के मुख्य न्यायाधीश

डॉन भारत ने इसलिए कार्रवाई की है क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी दबाव में है। इन विवरणों में ’कथित हमलो’ को संचार माध्यम का शिगूफा बताया है। साथ ही सीमा पर सेना तैनाती का फुटेज दिखाया।

  • द नेशन-पांच ठिकानों पर एक साथ हमला हुआ जो सामान्य बात कतई नहीं हैं। भारतीय सेना के डीजीएमओ ले. जनरल रणबीर सिंह ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा था, ’ये स्ट्राइक्स बुधवार रात को नियंत्रण रेखा पर आतंकवादी ठिकानों पर की गई।
  • द ट्रिब्यून एक्सप्रेस- यूएन में भारत ने पाकिस्तान पर कई आरोप लगाए। लेकिन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनका दल ने सही ढंग से उत्तर नहीं दिया। अफगानिस्तान और ईरान का भी झुकाव भारत की तरफ है। पाक अलग पड़ रहा है। शरीफ की कमजोर नीतियों की वजह से ही यह हमला हुआ।
  • वर्ल्ड मीडिया (विश्व संचार माध्यम) :- विदेशी मीडिया ने इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है। उरी हमले के बाद मोदी पर दबाव बढ़ गया था। क्योंकि वो पाक को सबक सिखाने का वादा कर लिया था।
  • बीबीसी- पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाने के वादे के साथ सत्ता में आए मोदी पर उरी हमले के बाद भारी दबाव था। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक भारत का अब तक का सबसे खतरनाक हमला है।
  • द न्यूयॉर्क टाइम्स- भारतीय सेना दव्ारा सीमा पार जाकर कार्रवाई करना अप्रत्याशित है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी भारत ने एलओसी पार नहीं की थी। मोदी के सत्ता में आने के बाद सेना को फ्री हैंड (खुला हाथ) मिला हुआ हैं। म्यांमार भी सेना ने ऐसा ही हमला किया। ऐसे में परमाणु से कम दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर हैं।
  • भारत का दबदबा:- यह देखा गया हैं कि जिस देश की सैन्य ताकत ज्यादा होती है, विश्वमंचों पर उसकी बात ज्यादा सुनी जाती है। इस लिहाज से पाकिस्तान जैसे परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की सीमा में घुस कर भारत दव्ारा आतंकवादियों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के बाद भारत को विश्व मंचों पर हल्के में नहीं लिया जाएगा। एलओसी पर जाकर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति काफी मजबूत होगी भारत की इस दहाड़ के बाद दुनियाभर में यह संदेश जाएगा कि भारत अब वह देश नहीं रहा, जो केवल अहिंसा और शांति की ही बातें करता है। अब भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कार्रवाई भी कर सकता है और जवाबी कार्रवाई भी।
  • भ्रम:-भारत के इस ऑपरेशन के बाद अब पाकिस्तान को भी पता चल गया होगा कि भारत केवल बयानबाजियां नहीं करता, बल्कि वह जो कहता है करके भी दिखाता है। हाल-फिलहाल में पाकिस्तान को इस बात का भ्रम हो गया था कि भारत बातों के सिवाय कुछ नहीं करता, इसलिए वो आतंकियों का बहाना लेकर भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा था, इस सैन्य कार्रवाई के बाद अब उसे भी सबक मिल गया होगा। आगे कुछ भी करने से पहले वो सौ बार सोचेगा। उसे अब पता चल गया होगा कि अगर वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो इसके घातक परिणाम उसे भुगतने होंगे।
  • क्षमता:- नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान खास फौज को पाक फौज का खास प्रतिरोध नहीं झेलना पड़ा, क्योंकि ऐसे ऑपरेशन के दौरान अपने इलाके में घुसी फोर्स पर जवाबी हमले की क्षमता दुनिया की गिनी-चुनी सेनाओं के पास ही है। इसके अलावा जिस इलाके में यह ऑपरेशन हुआ, वहां रणनीतिक रूप से पाक सेना की तैनाती काफी विरल है। भारत-पाक सेनाएं एक-दूसरे की क्षमता से वाकिफ है, पर कुछ मामलों में भारतीय सेना का जवाब नहीं है। यही क्षमता काम आई।

सर्जिकल स्ट्राइक का असर:- भारत लगातार अपने कड़े कदमों से पाकिस्तान के ऊपर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसका इसर निम्न हैं-

  • विमान-भारत अब पाकिस्तान के साथ अपने विमानों के संबंधों को भी निलंबति करने की योजना बना रहा है। उरी हमले में भारतीय सेना के 18 सैनिक मारे जाने के बाद भारत पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को सीमित करना चाहता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सामने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (अधिकतम पसंद राष्ट्रीय) का दर्जा छीनने की बात भी कही थी।
  • व्यापार-भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने से दोनों देशों के बीच हर साल होने वाले कपास के व्यापार को झटका लग सकता है। दोनों देशों के बीच हर साल कपास का करीब 5,481 करोड़ रुपए का व्यापार होता है। व्यापारी सप्लाइर् (आपूर्ति करने वाला) को लेकर चिंता में पड़ गए हैं। उन्होंने फिलहाल नए सौदे करना रोक दिया है। दोनों तरफ के व्यापारियों का कहना है कि वे सीमा के घटनाक्रम पर निगाह रखे हुए हैं।
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है जबकि पाकिस्तान तीसरा बड़ा उपभोक्ता देश। आमतौर पर वह सितंबर से आयात शुरू करता हैं। भारतीय निर्यातकों का कहना है कि दो हफ्तों में वहां से पूछताछ मंद पड़ी है। पाकिस्तान कॉटन डीलर्स एसोसिएशन (सूती भ्रान्त चित्त सभा) के चेयरमैन (सभापति) एहसानुल हक ने कहा, फिलहाल करोबार नहीं हो रहा। राजनीतिक तनाव में कमी के साथ व्यापार बहाल होने की उम्मीद है। पाकिस्तान के कॉटन, कमिश्नर (सूती आयुक्त/अधिकारी) खालिद अब्दुल्ला ने कहा, ’कम मात्रा में कारोबार हो रहा है। पाक सरकार ने भारत से कपास की खरीद रोकने के निर्देश नहीं दिए हैं। तनाव शांत होने के साथ करोबार सामान्य होने की उम्मीद है।’ वहीं, भारतीय अधिकारियों ने कहा कि कारोबार थमने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उड़ी हमले के मद्देनजर मोदी सरकार फिलहाल इस पर बात आगे नहीं बढ़ी हैं।
  • वर्ष 2015-16 में भारत के 641 अरब डॉलर के कुल निर्यात में पाकिस्तान के साथ महज 2.67 अरब उॉलर का करोबार हुआ। इसमें कपास की हिस्सेदारी सबसे अधिक हे। 30 सितंबर को खत्म फसल वर्ष में पाक भारती कपास का सबसे बड़ा खरीदार रहा। इस दौरान उसने 25 लाख गठानें आयात कीं।
  • निर्यात-भारतीय एक्सपोर्टर (निर्यातक) चिराग पटेल ने कहा, भारत फसल वर्ष 2016-17 में कुल 50 लाख गठान निर्यात कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान के आयात के बिना निर्यात घटकर 30 लाख गठान रह सकता है। जलगांव के एक जिनर प्रदीप जैन ने कहा कई कॉटन एक्सपोर्टर (सूती निर्यातक) पाकिस्तान को कपास बेचने के इच्छुक नहीं है। वे अन्य बाजारों की तलाश कर रहे हैं।
  • इसके साथ ही सब्जियोंं का व्यापार भी विशेष तौर पर बंद करने की निर्णय लिया है। इससे गुजरात के किसानों का करीब तीन करोड़ का व्यापार प्रभावित हो सकता है। 1997 के बाद यह पहली बार है जब गुजरात के व्यापारियों ने पाकिस्तान को सप्लाई (परिपूर्ण या पूर्ति करना) होने वाले सब्जी पर रोक लगाई है।
  • रेल- सर्जिकल स्ट्राइक के बाद समझौता एक्सप्रेस में 10 गुना घट गए यात्री। दिल्ली-अटारी एक्सप्रेस (द्रुतगामी) के नाम से मशहुर इस रेल में एक तरफ से आमतौर पर करीब एक हजार यात्री सफर करते हैं लेकिन अब केवल 100 ही सफर कर रहे हैं। क्योंकि दोनों ओर वीजा मिलने में दिक्कत आ रही हैं।

आर्थिक स्ट्राइक (हड़ताल):-

  • जरूरत है कि पाक पर आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक किया जाए जो उसके आर्थिक ताने-बाने को तहस-नहस कर दे। अत: आर्थिक नाकेबंदी, प्रौद्योगिकी उन्नयन जैसे गैर सैन्य समाधानों के बारे में सोचना होगा। दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जो भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों के लिए प्रयास नहीं कर रहा हो। इतना ही नहीं, बहुराष्ट्रीय कार्यकताओं में मानवता और नैतिकता को लेकर जागी चेतना भी सुखद संयोग है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद पाकिस्तान से 9 गुना अधिक है और भारत के साथ व्यापार का आकर्षण दुनिया में बढ़ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी बहुत कारगर हो सकती है। इसके लिए भारत को दक्षिण एशियाई देशों के साथ दव्पक्षीय व्यापारिक समझौते और रिश्तों को अधिक मजबूत बनाने चाहिए अथवा एक जोरदार अभियान छेड़कर समुचित लॉबींग और सीधी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान को सार्क से बेदखल करवा देना चाहिए। यह सिर्फ भारत के हित में ही नहीं, दुनिया के हित में हैं। 1996 से पाकिस्तान को सर्वाधिक अनुकूल देश का एकतरफा दर्जा प्राप्त है, उसे वापस लेना चाहिए। भारत बहुराष्ट्रीय जनसमूहों को इस के लिए सहमत कर सकता है कि वे दुनिया को आतंक का निर्यात करने वाले देश से आर्थिक संबंध न रखें। पाकिस्तानी हुकुमत को आम जनता के सुख-दुख से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि वह तो आतंकी गुटों के रहमों करम पर निर्भर हैं।
  • अब आगे की राह सतर्कता भरी तो होगी ही, लेकिन इसमें पाकिस्तान को हमेशा के लिए ठीक करने के अवसर भी हैं और चुनौती भी। इसके लिए आर्थिक नाकेबंदी और प्रौद्योगिकी को भी रणनीति का अहम हिस्सा बनाना होगा।

                                                                                                     अमन सिंह, वरिष्ठ आईएस अधिकारी और प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़

  • म्यांमार:- एलओसी पर किया गया यह सर्जिकल स्ट्राइक भी म्यांमार में किए गए ऑपरेशन की ही तरह था। ऐसा मानना है रक्षा और विदेश मामलों के जानकर प्रफुल्ल बख्शी का। 10 जून 2015 को म्यांमार सीमा में दाखिल होकर आतंककारियों को मार गिराने के लिए भारतीय सेना ने पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक की रणनीति अपनाई थी। उग्रवादी मणिपुर में सेना के 18 जवानों को मार कर म्यांमार भाग गए थे। जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना के खास पैरा कमांडोस (उपयुक्त/सुविधा) ने म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों को ढेर कर दिया था।

पाक दबाव:-

  • सार्क सम्मेलन खारिज होने की खबरो के बीच भारत ने कूटनीति के साथ-साथ सैन्याभ्यास के जरिये भी पाक पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की हैं। इस कड़ी में नौसेना अरब सागर में अब तक की सबसे ताकवर युद्धाभ्यास करेगी। यह अभ्यास पाकिस्तान को समुद्री सीमा के पास होगा। 35 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियों शामिल होंगे। नौसेना के एक वरिष्ठ अधािकरी ने बताया कि इसका नाम डिफेंस ऑफ गुजरात एक्सरसाइज (डीजीएक्स) (गुजरात के रक्षा अभ्यास) रखा गया है। भारत इसके माध्यम से चीन को भी अपनी ताकत का एहसास कराना चाहता हैं। नौसेना के युद्धाभ्यास में लड़ाकू, खुफिया व गश्त करने वाले हवाईजहाज भी शामिल होते हैं। अरब सागर में होने जा रहे युद्ध अभ्यास में भारतीय वायुसेना के जगुआर और एसयू 30 एमकेआई, पेट्रोल विमान और ड्रोन्स का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
  • इस दौरान सुरक्षा कार्यकताओं के वरिष्ठ अधिकारियों का दल भी मौजूद रहेगा। इसमें भारतीय वायुसेना के जहाज भी इस अभ्यास में शामिल हो सकते हैं। बहरहाल, अरब सागर पाकिस्तान के लिए व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण रास्ता है। ऐसे मेंं माना जा रहा है कि पड़ोसी मुल्क दबाव में आ जाएगा। उसे आतंकवाद को लेकर अपनी रणनीति भारत के नजरियें से बदलनी होगी। इसके साथ ही रूस ने पाक के साथ युद्धाभ्यास से मना कर दिया।

हमले के विषय में विचार निम्न हैं-

ऑपरेशन के बाद संभावित जंग के लिए भी तैयार रहना चाहिए और साथ में कूटनीति की भी गुंजाइश होनी चाहिए।

                                                                                                                                                      जितेन्द्र कुमार, पूर्व राजनयिक

हमारा और हमारे परिवार का दुख तो कोई कम नहीं कर सकता, मगर सेना की र्कारवाई से हमारे कलेजे को ठंडक पहुंची है।

                                                                                                                                                    बेबी, शहीद राजेश यादव की पत्नी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर मोदी की तारीफ की। कहा मोदी जी ने ढाई साल में पहला एक्शन (कार्य) लिया है, जो पीएम के लायक एक्शन हैं।

                                                                                                                                                         राहुल गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष

पाक कलाकारों के साथ अब सलमान खान भी उतर पड़े हैं। कहा वे कलाकार हैं, आतंकी नहीं। उन्हें सरकार ने वीजा दिया है। मनसे ने पाक कलाकारों को भारत छोड़ने को कहा था।

                                                                                                                                                                सलमान खान, अभिनेता

भारत माता की जय। पूरा देश भारतीय सेना के साथ है। देश की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं।

                                                                                                                                                    अरविंद केजरीवाल, दिल्ली सीएम

मुझे गर्व है अपने देश के वीर जवानों पर हमारे प्रधानमंत्री मोदी और रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर पर जयहिंद वंदेमातरम।

                                                                                                                                                       लता मंगेशकर, गायिका

भारतीय सेना को सलाम। हमारे देश के लड़को ने बहुत ही बढ़िया खेल दिखाया। जयहिंद।

                                                                                                                                                            वीरेंन्द्र सहवाग, क्रिकेटर

कांग्रेस सहित पूरा देश आज पाक समर्थित आतंकवाद के खात्मे के भारतीय सेना की ओर से की गई कार्रवाई के साथ हैं।

आतंकवाद को सरहद पार से जो शह दी जा रही है उसके लिए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।

                                                                                                                                                सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

इस कार्रवाई का कांग्रेस पूरी तरह समर्थन करती है। यह हमारे देश के संकल्प को पारिभाषित करता हैं।

उरी का हमला राष्ट्र की चेतना के लिए अपमान है। मुझे उम्मीद है कि हमलावरों से सख्ती से निपटा जाएगा।

                                                                                                                                                        सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

उरी हमले में जिन सैनिकों ने मातृभूमि के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, हमारी संवदेनाएं उनके परिवारों के साथ हैं।

                                                                                                                                                        किरण रिजीजु, गृह राज्य मंत्री

उरी हमला निदंनीय है। मैं शहीद जवानों को श्रदांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवारों के प्रति शोक संवेदना प्रकट करता हूं।

                                                                                                                                                         उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री

उरी हमले के शहीद हुए जवानों के बलिदान को देष हमेशा याद रखेगा। इसे भुलाया नहीं जा सकेगा।

                                                                                                                                                         नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री बिहार

  • शुरुआत:- उरी हमले के बाद ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक होना बहुत जरूरी थीं। हमने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला नहीं किया और न कही उनके नागरिको पर सीधा निशाना बनाया है। बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी शिविरों को ही निशाना बनाया है। इसलिए यह ’एक्ट ऑफ वारॅ’ नहीं कहा जाना चाहिए। हमें पाकिस्तान के प्रतिक्रिया के रूप में राजनीतिक, कूटनीतिक व सैन्य रूप से हम एकजुट हैं। हमने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर हमला नहीं है बल्कि पीओके हमारी ही सीमा है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है। पाकिस्तान ऐसा देश है, जिसने कारगिल में खुद के मरे हुए सैनिको के शव लेने से इनकार कर दिया था। अब भारत के हमले के बाद पाकिस्तान की सेना आतंकी हमले और तेज करने की कोशिश करेगी। उन्हें भी पता है कि सीधी लड़ाई का परिणाम क्या होता हैं।
  • पाकिस्तान प्रतिक्रिया- में जवाब देने के लिए सीमाओ पर चौकसी बढ़ा दी गई हैं पश्चिमी सीमा पर सैन्य सुरक्षा बल ने चौकसी बढ़ा दी हैं। ’कोस्टल लाइन’ पर भी चौकसी और तैनाती बढ़ाने की जरूरत हैं। हमारी रणनीति अभी यही है कि जहां से भी हमला हो, उसी क्षेत्र में करारा सैन्य जवाब दिया जाए। इस मामले में अमरीका ने भी पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रूख अपनाया हैं। यह भारत का एक सीमित जवाब हैं। लेकिन इसे युद्ध की दिशा में बढ़ने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए इसे सेना को केवल सर्जिकल स्ट्राइक तक ही सीमित रखना चाहिए। कश्मीर में बर्फ पड़ने से पहले पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों की घुसपैठ ज्यादा से ज्यादा कराने की कोशिश करती हैं। हर साल ऐसा होता रहा है। अब सितंबर में ही हमने आतंकवादियों को बड़ा नुकसान पहुंचा दिया हैं।

उरी हमले के बाद जिस भारतीय जवाब का देश को इंतजार था, उसे सेना ने बखूबी अंजाम दे दिया हैं अभी तक हम पाकिस्तान को हमलों के सबूत ही दिए जा रहे थे पर पहली बार सीधा हमला करके कड़ा जवाब दिया है। पाकिस्तान के लिए यह करारा सबक हैं।

                                             जयप्रकाश नेहरा सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल पूर्व डिफ्टी चीफ आफॅ आर्मी स्टाफ, पीवीएसएम एवीएसएम

वित्त व गृह विभाग:-

  • सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देशभर खासकर राजस्थान सहित सीमावर्ती राज्यों में हाई अलर्ट जारी किया हुआ है बावजूद इसके राज्य के वित्त विभाग ने महज तीन करोड़ रुपए मासिक बचाने के चक्कर में 3150 होमगार्ड की ड्‌यूटी (कर्तव्य) जारी रखने के गृह विभाग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। तर्क दिया गया कि पिछले सालों में पुलिस बेड़े में 3000 से अधिक जवानों ने ड्‌यूटी ज्वाइन कर ली। ऐसे में अब होमगार्ड की क्या जरूरत है।
  • उधर, गृह विभाग ने एक नया प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें कहा गया है कि प्रदेश में प्रतिवर्ष 3000 हैडकांस्टेबल व कांस्टेबल सेवानिवृत्त हो जाते हैं। हैंडकांस्टेबल के 5500 और कांस्टेबल के 5500 पद खाली हैं। ऐसे में पुलिस का सहयोग करने के लिए होमगार्ड की बड़ी जरूरत है।
  • वित्त और गृह विभाग के इस विवाद के चलते उन थानों की स्थिति बेहद खराब हो गई है, जहाँ स्टाफ (अधिकारियों का समूह) पहले से कम था। रात्रि गश्त के लिए पुलिसकर्मी नहीं मिल रहे। प्रदेश में बहुत से थाने ऐसे हैं, जहां 25 फीसदी तक स्टाफ नहीं हैं।
  • भारत-पाक सीमा बंद:- आने वाले दो सालों में पाकिस्तान से लगी हमारी सीमाएं पूरी तरह बंद हो जाएंगी। दिसंबर 2018 के बाद से सीमा पार से आतंकी हमारे देश में घुसपैठ नहीं कर पाएंगे। दरअसल केंद्र सरकार ने सीमाओं को पूरी तरह सील करने के लिए बॉर्डर सिक्यूरिटी (सीमा सुरक्षा) ग्रिड नाम से एक एक्शन योजना बनाया है। ग्रिड में पाक की सीमा से लगे तीन राज्यों जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की मदद ली जाएगी। ये राज्य ग्रिड को इनपुट देंगे, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।

पांच सीमा निम्न हैं-

  • भारत-पाक सीमा- कुल लंबाई 3,323 किमी (लगभग)
  • जम्मू-कश्मीर पाक सीमा- 1,225 किमी- लंबाई (एलओसी शामिल)
  • पंजाब-पाक सीमा- 553 किमी -हेरोइन तस्करी, बीएसएफ ने 2016 में जून तक 104 किलो और 2015 में 344 किलो हेरोइन पकड़ी थी। चरस, स्मैक और सिंथेटिक (क्षय रोग से नाश होने वाला/कृत्रिम रचना संबंधी दवाओं की भी तस्करी।
  • राजस्थान-पाक सीमा- 1,037 किमी- अफीम तस्करी, यहां से भारत में अफीम और जाली नोट की तस्करी होती हें।
  • पाक-गुजरात सीमा- 508 किमी- मुंबई हमले के गुनहगार यहां से आए थे।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक:- केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यकताओं के आला अधिकारियों की बैठक दो बार हो चुकी हैं। तीसरी बैठक होने के संकेत हैं। उम्मीद है कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसे व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाने की तैयारी की जा रही है।
  • स्वतंत्र पैनल (चौखटा)- राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाने में अकेले सुरक्षा कार्यकता ही शामिल नहीं होगी। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए देश के विश्वसनीय और सम्मानित आतंरिक सुरक्षा विशेषज्ञों का एक स्वतंत्र पैनल भी बनेगा। यह पैनल मौजूदा रक्षा व्यवस्था की अच्छाइयों और कर्मियों पर न केवल नजर रखेगा बल्कि यह पैनल अब तक देश पर हुए आतंकी हमलों जैसे मुंबई हमलों, गुरदासपुर, पठानकोट और अब उरी हमलों की सीमा पर हुई चूक की स्वतंत्र जांच भी करेगा। बताया जा रहा है कि यह स्वतंत्र पैनल भारत पाक व चीन सीमा पर सेना की तैयारी की जांच का काम भी करेगा। यही नहीं यह पैनल नेपाल, म्यांमार और बाग्लादेश के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा की कमियों को भी बताएगा।
  • उपकरण:-ध्यान रहे कि सीमा के बुनियादी ढांचे को लेकर कुछ समय पूर्व कराए गए एक सर्वेक्षण के दौरान ऐसे उपकरण सामने आए थे जो महज इसलिए उपयोग में नहीं थे क्योंकि उनको चलाने योग्य लोग ही वहां नहीं थे। थर्मल इमेजर उपकरण इसलिए नहीं चला पा रहे थे क्योंकि उनको रात भर चलाने के लिए सक्षम बैटरी वहां नहीं थीं। उरी जैसे बेहद संवदेनशील सैन्य प्रतिष्ठानों में अधिकांश सुरक्षा की कई परते होती हैं ताकि अगर एक को कोई भेद भी दे तो अगले स्तर पर उसे रोका जा सके।

समीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की:-

  • यदि सुरक्षा -व्यवस्था को चाकचौबंद रखें तो हमलों से बच सकते हैं। अनेक बार यह देखा गया है कि केन्द्रीय सुरक्षा कार्यकताओं और राज्य सरकारों के बीच भी पर्याप्त तालमेल नहीं रह पाता। आतंकवाद की समस्या जब इतना विकराल रूप ले चुकी है तो उससे निपटने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए। सवाल यह उठता है कि हमला होने या संदिग्धों को देखे जाने के बाद ही अलर्ट जारी क्यों होता हैं? हमारे यहां के महत्वपूर्ण स्थल तो हमेशा हाई अलर्ट पर ही रहने चाहिए। आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए आधुनिक साधनों के साथ सभी कार्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जाना जरूरी हैं। कोशिश ऐसी होनी चाहिए कि महत्वपूर्ण स्थलों तक कोई भी संदिग्ध व्यक्ति पहुंचने ही नहीं पाए। सतर्कता के साथ किसी को भी समझौता करने की छूट दी ही नहीं जानी चाहिए।
  • अगर हमारी खुफिया तंत्र चुस्त हो और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद हो तो आतंकी क्या परिंदे भी पर नहीं मार सकते हैं। जबकि अमरीका में ’वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ (विश्व व्यापार केंद्र) पर हुए आतंकी हमले के बाद वहां कोई दूसरा बड़ा हमला नहीं हुआ। मोदी जी ने 2004 में गुवाहाटी में इसका जिक्र किया था कि कारगर खुफिया नेटवर्क वाले देश को सरकार चलाने के लिए किसी हथियार और गोला-बारूद की जरूरत नहीं होती। इसके बावजूद हम ऐसा पुख्ता खुफिया नेटवर्क तैयार नहीं कर सके हैं। यह हमारी सरुक्षा व्यवस्था की नाकामी ही है कि उरी में उतनी बड़ी घटना हो गई और भनक लगने के बावजूद उसे रोक नहीं सके। हम सरुक्षा की बेहतर तकनीकी का प्रयोग करने में पीछे हैं। घुसपैठ कहां से आ रहे हैं यह पता करने में हमारे निगरानी तंत्र क्यों सक्षम नहीं हैं।
  • विदेश नीति:- जवानों की शहादत को दरअसल, मोदी की विदेश नीति के लिए एक निर्णायक क्षण माना जाना चाहिए। सवाल यही उठता है कि आप एक ऐसे परमाणु शक्ति संपन्न देश से कैसे निपट सकते हैं, जो आतंक को हथियार की तरह इस्तेमाल करता हो और जिसे दुनिया की तमाम बड़ी ताकतों से पैसा मिल रहा हो? और यह भी कि कैसे ऐसे देश के साथ संबंध रख सकते हो, जहां सेना को मुख्य भूमिका में बने रहने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता रहा हो। ऐसी सेना, जिसकी पहचान ही नफरत फेलाना हो गई हो? इन सब सवालों के जवाब आसान नहीं हैं। यूं तो भारत के पास अधिकार है कि वह ऐसे हमले के जवाब में मनचाही कार्रवाई करे।
  • पाकिस्तान- एक ऐसा देश है कि जिसने हार के बाद अपनी सैन्य व मौलिक शक्तियों में इजाफा ही किया हैं एवं अंदरूनी हिंसा झेलने के लिए भी तैयार रहता है। इसलिए ऐसे देश के भीतर मामूली हिंसा से उसको बमुश्किल ही कोई फर्क पड़ने वाला है। कोई भी समाज आतंकवाद से उतना कमजोर नहीं होता जितना कि इसके बाद की जवाबी कार्रवाइयों से। हां कुछ परिस्थितियों में यह प्रतिकार गतिरोध के रूप में भी हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हो सकता है दूसरे पक्ष को आशाजनक राजनीतिक समर्थन नहीं मिल पाए। ऐसा इसलिए की भारत-पाक विवाद अब एक पारम्परिक समस्या ही नहीं रह गई है, यह एक मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक प्रक्रिया है। पिछले बार से भारत की ताकत में असीमित रूप से इजाफा हुआ है।
  • भारत- जैसे-जैसे भारत की सैन्य शक्ति बढ़ रही है, वैसे-वैसे हमारी विदेश नीति भी बदल रही है। विदेश नीति पर भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का सीधा असर दिख रहा है निश्चित रूप से अगर किसी देश की सैन्य शक्ति मजबूत होती हैं तो उसकी विदेश नीति भी मजबूत होती है। ठीक वैसे ही, जैसे अगर किसी देश की सेना कमजोर हो तो उसकी विदेश नीति भी उसी अनुसार कमजोर होती हैं।
  • कूटनीति:-भारत के पास अब भी पाक के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार कूटनीति ही है। पाकिस्तान ने सारी हदें पार कर दी हैं और अतंरराष्ट्रीय समुदाय भी पाक को लेकर संयम खोता नजर आ रहा है। उरी के सैन्य शिविर में आतंकवादी हमले के बाद को पाकिस्तान के साथ क्या सलूक करना चाहिए इसको लेकर बहस का दौर जारी है। सैन्य कार्रवाई से जवाब मिले या कूटनीतिक रूप से। लोकप्रिया अवधारणा के विपरीत मोदी जी सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रतिक्रिया करने में ज्यादा मजबूती से पेश आएंगे। सैन्य कार्रवाई में उन्हें क्षमता संबंधी अभावों का सामना करना पड़ सकता है जबकि उनकी कूटनीतिक शैली अधिक साफ स्पष्ट और आत्मविश्वास से परिपूर्ण है। अब इस कूटनीतिक चातुर्य के इस्तेमाल का सही समय आ गया है।

(प्रताप भानु मेहता विश्लेषक, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च नई दिल्ली के अध्यक्ष हैं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मंडल के सदस्य व भारतीय ज्ञान आयोग में भी रहे हैं।)

  • मोदी के संकेत:- प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने पहले पाकिस्तान से बेहतर रिश्ता बनाने की कोशिश की, उसके बाद जब पाक नहीं माना तो अंतरराष्ट्रीय बैठकों में उसके खिलाफ सबूत दिए। इसके बावजूद पाकिस्तान पर कोई असर नहीं हुआ और उसकी जमीन से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रही हैं। इसके मद्देनजर अब केंद्र सरकार पाकिस्तान और पाक समर्थित आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का मन बना रही है। मोदी सरकार पर पाक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दबाव इसलिए भी है, क्योंकि लोकसभा चुनाव पूर्व उन्होंने पाकिस्तान को करारा जवाब देने की बाते कहीं थीं।

चेतन भगत(अंग्रेजी के युवा उपन्यासकार):- पाकिस्तान जब लगातार हमें उकसा रहा है तो हम उसके साथ क्या करें । हम हमला इसलिए नहीं करते है क्योंकि इसके दो मुख्य कारण हैं-

  • पहला एक तो हम भारतीय मूल रूप से हिंसक नहीं हैं।
  • दूसरा ऐसी जगह से परमाणु हमले का खतरा हैं, जहां किसी को मालूम ही नहीं कि मुखिया कौन है। परमाणु हथियारों का नियंत्रण किसके हाथों में है।

यह तो तय है कि यह नियंत्रण नवाज शरीफ के पास नहीं है क्योंकि उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री से भी कम अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा यह नियंत्रण गर्म दिमाग के जनरल के पास जिनकी लोगों के प्रति जवाबदेही नहीं है या फिर कटटरपंथियों के पास, आतंकी गुटों के सरगनाओं और मौलवियों के विचित्र समुह के पास है। या फिर परमाणु ठिकाने पर तैनात किसी अधिकारी के पास हैं, जो उन्हें दाग सकता हैं। इसके बारे में हमे कुछ पता नहीं। पाक के बारे में हमें यही पता है कि वह नतीजे की परवाह किए बिना परमाणु बम डाल सकता हैं। इसके बदले हम पाकिस्तान को ही नष्ट कर सकते हैं। दुनियां में अफरा तफरी मच जाएगी।

रैंडम बंच ऑफ पीपल हू कंट्रोल पाकिस्तान (आरबीपीडब्ल्यूसीपी) यानी पाकिस्तान को नियंत्रित करने वाला बेतरह समूह दुनिया को कुछ ही हफ्तों में नष्ट कर सकता है। हमारा सामना किसी असली राष्ट्र से नहीं बल्कि आतंकी देश से है। कई योजना है जो बिना गोली चलाए असर दिखा सकती है। जो निम्न हैं-

  • पहला हम एक राष्ट्र के रूप में आधिकारिक रूप से तय कर लें कि पाकिस्तान नाकाम राष्ट्र हैं यह तो राष्ट्र भी नहीं बल्कि आतंकी क्षेत्र है, जो परमाणु बम से कम है। दुनिया की शांति के लिए सबसे खतरनाक मिश्रण। यही बात हम दुनिया को बताएं। पाक आईएसआईएस-2 हैं जहां सरकार राष्ट्र को नियंत्रित नहीं करती।
  • दूसरा हम पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दे। नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में दुर तक फेले हुए पाक उच्चायोग की कोई जरूरत नहीं हैं।
  • तीसरा-दुनिया को आरबीपीडब्ल्यूसीपी से बहुत खतरा है।
  • चौथा-दुनिया जाने कि आरबीपीडब्ल्यूसीपी क्या कर रहा है। तब जाकर हमें वैश्विक समर्थन मिलेगा।
  • पांचवा:- हमें कलाकारों पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि कला राष्ट्रीयता के परे होती हैं। और प्रतिभाओं का स्वागत होना चाहिए।

यदि हम इतना कर लें तो धीरे-धीरे दुनिया यह मान लेगी कि पाकिस्तान एक नाकाम राष्ट्र है। इसके बाद ही पाकिस्तान का विभाजन करने, प्रतिबंध लगाने और उसका परमाणु कार्यकम बंद करने जैसे विकल्प उभरेंगे। इसमें एक समानातंर नुकसान भी है। कुछ उदारवादियों को लग सकता है कि हमारा व्यवहार निष्पक्ष नहीं है और हम समानता के सिद्धांत का पर्याप्त पालन नहीं कर रहे हैं। भाइचारों के प्रयासों को रोकना अनावश्यक और गलत है। हालांकि, स्पष्ट संदेश और कदमों से दुनिया को हमारे पक्ष में करना महत्वपूर्ण हैं।

सबक:- राजस्थान, पंजाब, जम्मू कश्मीर के सरहद और नियंत्रण रेखा पर बसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। यहां बसे लोगों ने सेना से कहा है कि कहा कि हमारी चिंता छोड़ों पाक को सबक सिखाओ।

भनक:- भारत उरी घटना के 12 घंटे के अंदर सभी दक्षिण एशियाई देशों सहित विश्व के प्रमुख 15 राष्ट्रों से संपर्क कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी, जिसकी भनक बहुत कम लोगों को लगी।

म्कसद:- इसका मकसद नियंत्रण रेखा पर पाक की नाजायज हरकतों को घटनाक्रम के सबूतों के आधार पर दुनिया को सूचित करना और पाक को बेनकाब करना था।

- Published/Last Modified on: November 8, 2016

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