उच्च ग्यारह समाचार (Top Eleven News) (Download PDF)

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भारत और चीन व्यापार:-आयात:- बीते दो सालों के दौरान चीन से भारत के आयात में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले पांच साल के दौरान चीन से भारत के आयात में 5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई हैं। गौरतलब बात यह है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज किए जाने की वजह से भारत का आयात खर्च बीते पांच सालों के दौरान 25 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 23 लाख करोड़ रुपए रह गया है जाहिर है कि इससे चीन से वस्तुओं के आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई हैं।

  • निर्यात:- भारत से चीन की वस्तुओं का निर्यात गिरकर लगभग आधा रह गया हैं। वर्ष 2011-12 में भारत से चीन का निर्यात करोबार करीब 86000 करोड़ रुपए का था, जो गिरकर 58000 करोड़ रुपए का रह गया। भारत कपास, तांबा, पेट्रोलियम पदार्थ और औद्योगिक मशीनों के अलावा कुछ खास निर्यात नहीं करता है। भारत अपना माल चीन को जितनी मात्रा में बेचता है, उसकी तुलना में छह गुना ज्यादा चीन से खरीदता है।
  • मांग:- दिवाली व अन्य त्योहारों के समान स्वदेशी से 20 से 40 फीसदी सस्ते हैं। रोशनी और सजावटी समान 60 फीसदी तक सस्ते मिल रहे हैं। इसकी वजह से कारोबारियों को उम्मीद है कि इस त्योहार में अधिक असर नहीं पड़ेगा।

त्योहार के लिए आर्डर तो बहुत पहले दिए जा चुके थे। उरी घटना और सर्जिकल स्ट्राइक तो बहुत बाद में हुई। बाजार में मौद्रिक तरलता कम है। ऐसे में सस्ता समान लोगों की प्राथमिकता होगी। लोग पहले से सस्ती कीमत पर सामान खरीदने के आदी हैं, ऐसे में इस बार अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  • व्यापार:- चीन ने 1980 के दशक में बाजार को गति देने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना की गई। वहां भूमि और श्रम कानूनों में सुधार भी व्यापक स्तर पर किए गए जिससे उत्पादन को गति मिली और प्रति इकाई वस्तु की लागत बहुत कम हो गई। आयरन (लोहा), स्टील (बकयंत्र) और उर्वरक के उत्पादन में चीन के मुकाबले भारत काफी पिछड़ गया। इन वस्तुओं का चीन में कुल उत्पादन का सिर्फ 10 फीसदी ही भारत में हो पा रहा है।

नई दिल्ली:-

  • असुरक्षित देश-दुनियाभर में लोगों के लिए सबसे असुरक्षित माने जाने वाले देशों पाकिस्तान चौथा सबसे खतरनाक देश है। जबकि भारत को इस मामले में 141 देशों में 129वें नंबर पर रखा गया है। यानी भारत दुनिया का 13वां सबसे असुरक्षित देश बताया गया है। यह खुलासा वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (विश्व अर्थशास्त्र बाजार) को जार ’ग्लोबल (छोटा गोला) ट्रैवल एंड टूरिज्म रिपोर्ट’ (यात्रा करना और विवरण) में हुआ है। विवरण की माने तो पाकिस्तान में मातृत्व और शिशु मृत्युदर में थोड़ी कमी आई है, लेकिन सुरक्षा के मानकों पर पाकिस्तान में हालात ठीक नहीं है। यहां तक कि पाकिस्तान को ईसाईयों के लिए छठा सबसे खतरनाक देश बताया गया है। 78 प्रतिशत पाक जनता आतंकवाद से परेशान है। 40 प्रतिशत पाक में सैलानियों की संख्या घटी। पाकिस्तान एजुकेशन (शिक्षा) टूरिज्म में भी पिछड़ा हुआ हैं।
  • चौंकाने वाली बात यह है कि इस विवरण में भारत को ट्‌यूनीशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों से भी पीछे बताया गया है। जबकि हम केवल मिस्त्र, केन्या, होंडुरास जैसे छोटे देशों से आगे हैं।

Table showing the 5 most dangerous score and rank the country

5 most dangerous score and rank the country

5 सबसे खतरनाक स्कोर एवं रैंक सहित देश

गिनती

रैंक

देश

स्कोर

1

141

नाइजीरिया

2.65

2

140

कोलंबिया

2.82

3

139

यमन

2.86

4

138

पाकिस्तान

3.04

5

137

वेनेजुएला

3.36

Table showing The other most dangerous countries

The other most dangerous countries

अन्य सबसे खतरनाक देश

गिनती

देश

6

मिस्त्र

7

ग्वाटेमाला

8

अल-साल्वाडोर

9

होंडुरास

10

थाईलैंड

11

केन्या

12

लेबनान

13

भारत

14

फिलीपिंस

15

जमैका

सुरक्षित देश:-सबसे सुरक्षित उच्च-10 देशों में तीन खाड़ी देश हैं। इनमें कतर दूसरे और यूएई तीसरे नंबर पर है। दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों के मामले में पड़ोसी देशों में हम केवल पाकिस्तान से आगे हैंं जापान 22वें और चीन 58वें नंबर पर है। जबकि भूटान 26वें और श्रीलंका 53वें नंबर पर है। नेपाल और बांग्लादेश उच्च 100 में जगह नहीं बना पाए।

Table showing The safest country

Showing The safest country in table

सबसे सुरक्षित देश

गिनती

देश

स्कोर

1

फिनलैंड

6.70

2

कतर

6.61

3

यूएई

6.60

4

आईलैंड

6.54

5

ऑस्ट्रिया

6.47

6

लग्जमबर्ग

6.46

7

न्यूजीलैंड

6.41

8

सिंगापुर

6.4

9

ओमान

6.38

10

पुर्तगाल

6.33

Table showing The other safest country

Showing The other safest country in table

अन्य सुरक्षित देश

रैंक

देश

स्कोर

26

भूटान

6.02

53

श्रीलंका

5.58

58

चीन

5.47

113

नेपाल

4.52

115

बांग्लादेश

4.43

129

भारत

3.82

दुनियां के बड़े देशों की बात करें, तो अमेरिका, ब्रिटेन सबसे सुरक्षित 100 देशों में शामिल हैं। इनमें जर्मनी उच्च-20 सुरक्षित देशों में जगह बनाने में कामयाब रहा है।

Table showing The Rank, score and country

The Rank, score and country

रैंक

देश

स्कोर

20

जर्मनी

6.06

62

फ्रांस

5.44

63

ब्रिटेन

5.44

73

अमेरिका

5.32

अमरीका:-

  • आतंकी हमलों को भाड़े आंतकियों से अंजाम देने वाले पाकिस्तान को भलें ही अमरीका आड़े हाथों ले रहा है। मगर हकीकत यह भी है कि पाक को सबसे बड़ी मदद अमरीका से ही मिलती है, जो आतंकियों से निपटने के नाम पर मिलती रही है।
  • सेंटर फॉर (केन्द्र दूरी) ग्लोबल डेवलपमेंट (छोटा गोला विकास) का विवरण की मानें तो 2010 से 2014 तक 5 साल में अमरीका ने पाक को 36500 करोड़ रु. की मदद की है। हालात है कि पाक इन अमरीकों पैसो को इस्तेमाल किसी-न-किसी रूप भारत में आतंक फेलाने के लिए करता रहा है। इस साल आई अमरीकी कांग्रेस की एक विवरण में कहा गया कि अमरीका से पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य मदद पांच साल मेें घटकर करीब एक चौथाई हो गई है। इसके अनुसार 2011 से पाकिस्तान को अमरीकी सुरक्षा मदद में 73 फीसद की कमी आई है मगर आज भी पाक को आर्थिक और सैन्य मदद ज्यादा मदद अमरीका से मिलती है।
  • जीपीएस- एनआईए ने फॉरेंसिक (अदालती) जांच के लिए जीपीएस सेट अमेरिका भेजने का फैसला किया है। फॉरेंसिक जांच के बाद ये पता चलेगा कि आतंकियों ने कब और किस रूट के जरिए दाखिल हुए थे।
  • जांच- उरी स्थित 12 ब्रिगेड हेडक्वार्टर (उच्च स्थान) पर आतंकियों के हमले की योजना के राज से परदा उठने लगा है। अभी तक की जांच में आईबी के अधिकारियों को इस बात का पता चला है कि सभी आतंकी सेना की वर्दी में आए थे, ताकि उन्हें हेडक्वाटर तक पहुंचने में मदद मिल सके और अपनी योजना को अंजाम दे सके।
  • संपर्क- ऑडियो क्लिप (पकड़ना) से इस बात का पता चला है कि जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर सभी आतंकियों के संपर्क में था। वह ऑडियों में यह कहते हुए भी सुनाई दे रहा हैं कि इन लोगों को मुजफ्फरबाद से आगे पहुंचा दो ताकि ये लोग जैश के तत्कालीन समूह कांडर शहबाज खान उर्फ गाजी बाबा का बदला ले सके।

Table showing The biggest help from the United States to Pakistan

The biggest help from the United States to Pakistan

पाक को सबसे बड़ी मदद अमरीका से

वर्ष

आर्थिक मदद

2010

9,800 करोड़

2011

8,200 करोड़

2012

6,500 करोड़

2013

6,500 करोड़

2014

5,500 करोड़

Table showing The American weapons

Showing the The American weapons in table

अमरीकी हथियार भी

नाम

संख्या

ए्‌फ-16 लड़ाकू विमान

70

एफ आई एम 92 स्ट्रिंगर मिसाइल

350

एम 110 होवित्जर तोप

60

एम 109 ए2

150

कोबरा हेलीकॉप्टर

51

युद्धक टैंक

300

बस्तरबंद टैंक

1.600

  • इराक:- इराक सेना ने आईएस के चुंगल से बड़े शहर मोसुल को छुड़ाने के लिए जंग छेड़ दी है। करीब 40 हजार सैनिक शहर में घुस गए हैं। इस अभियान में इराकी सेना, शिया, मिलिशिया गुट, कुर्द लड़ाके औरानाटों समूह शामिल है। यह मौसूल से पिछले 13 साल का सबसे बड़ा सैन्य अभियान हैं। 2003 में अमेरिकी सेना ने तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए युद्ध छेड़ दिया था अब यह शहर गंवाने के बाद आईएस का इराक पर सिर्फ 10 फीसदी हिस्से में प्रभाव रह जाएगा। हालांकि सीरिया में आईएस का प्रभाव अभी भी बरकरार है। इस बीच आईएस ने जासूसी करने के आरोप मेें 58 साथियों को डुबोकर मर डाला, फिर इन्हें जला दिया।
  • मौसूल- इराकी सेना पिछले डेढ़ साल में तिकरीत, रामादी और फजुल्लाह को आईएस से मुक्त करा चुकी है। क्रूड ऑयल से सपन्न मौसूल पर आईएस ने 2014 में कब्जा किया। बगदादी ने इसे इराक में स्वयंभू साम्राज्य की राजधानी घोषित किया था। 10 लाख लोगों को शहर छोड़ना पड़ा। यहीं से उसने फजुल्लाह, तिकरित जैसे अहम शहरों पर कब्जा किया था। इराके के दूसरे बड़े शहर मोसूल में 7 हजार आतंकी है।
  • केमिकल प्लांट (रासायनिक हथियार यंत्र या वनस्पति पौधा)- आईएस अपने आखिरी गढ़ को बचाने के लिए केमिकल प्लांट में धमाका कर सकता हैं। इसके अलावा उसे आत्मघाती दस्ता, कार ब्लास्ट (बारूद), डायनामाइट (एक तेज बारूद जो पहाड़ आदि फोड़ने में काम आती है।) ब्लास्ट (बारूद) जैसे हथकंडे अपना सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आतंकियों ने सड़कों और अहम ठिकानों पर बारूदी सुरंगो का जाल बिछा रखा है।

हिरोशिमा:-

  • हथियारों की दुनिया में बादशाहत रखने वालें रूस ने तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारियां शुरू कर दी हैं। रूस की नई मिसाइल (यंत्र) ने अमेरिका सहित पूरी दुनिया में खलबची मचा दी है। कहा जा रहा है कि नई रूसी मिसाइल आरएस-28 एक ही बार में फ्रांस या टेक्सस जैसेद देशों को पलभर में नष्ट कर सकती है। इस मिसाइल को सैटन-2 का नाम दिया गया है। वर्ष 2018 में इसे रूसी बेड़े में शमिल करने की पुरजोर तैयारियां चल रही हैं। इस मिसाइल की खासियत यह है कि इसे किसी भी राडार से न तो पकड़ा जा सकता है और न ही हवा में इसे नष्ट किया जा सकता है।
  • रूसी राष्ट्रपति क्लादिमिर पुतिन के मुताबिक मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सेना को अपडेट रहने की जरूरत है। यही वजह है कि करीब 30 साल पुरानी हो चुकी आरएस-18 मिसाइल की जगह नई मिसाइलों को जगह दी जा रही है। रूस की सरकारी हथियार निर्माण संस्था मेकेव रॉकेट डिजाइन ब्यूरों (ढाँचा बिल/माँद) ने सैटन-2 की तस्वीरें ऑनलाइन मुहैया कराते हुए बताया है कि इस मिसाइल को मॉस्को से लंदन, यूरोप के अलावा अमेरिकी शहरों और पूर्वी व पश्चिमी समुद्री इलाकों में आसानी से भेजा जा सकता है। रशियन न्यूक्लियर कैपेबिलिटी के एक्सपर्ट (बम योग्यता में चतुर) इगोर सुत्यागेन के अनुसार रूसी बेड़े में शामिल आरएस- 18 को तीन दशक से ज्यादा का समय हो चुका है, जो कि वक्त के साथ-साथ और भी पुरानी होती जा रही है। ऐसे में रूस को नए और अत्याधुनिक हथियारों की आवश्यकता है। आईएस-28 इसी चरण में एक कदम है। जानकारों के अनुसार रूस इस दिशा में भी गंभीर है कि वह अंतरिक्ष से परमाणु हमले करने में महारथ हासिल करे।

सैटन-2 मिसाइल की खासियत निम्न हैं-

  • गति- 7 किलोमीटर प्रति सेकंड हैं।
  • मारक क्षमता- 10,000 किलोमीटर हैं।
  • आयुध क्षमता-16 परमाणु हमले एक साथ अलग-अलग ठिकानों पर हैं।
  • खास- 1945 में हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमलों की तुलना में 2000 गुना ज्यादा तेजी से प्रहार करने में सक्षम इस मिसाइल को कोई भी राडार पकड़ नहीं पाएगा।
  • गुवाहटी:- देश की राजनीति में भूचाल आ सकता है। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यंमंत्री कालिखों पुल ने आत्महत्या से पहले 60 पेज के कुछ ऐसे सीक्रेट (रहस्य) नोट्‌स (पुस्तक की टीका) छोड़े थे, जिनमें भ्रष्टाचार में शामिल कुछ नेताओं का जिक्र है। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोबा ने इन सीक्रेट नोट्‌स को लेकर खुलासा किया है। राजखोबा ने सितंबर में राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया गया था। इस पूर्व राज्यपाल ने बताया कि सुसाइड के जो नोट्‌स हैं वो चार कॉपियों (मूल की प्रतिलिपियाँ) में थे। पुलिस ने नोट्‌स को कब्जे में ले लिया था। पूर्व राज्यपाल का कहना है कि इन पन्नों में उन नेताओं के कई राज दफन हैं, जो रातोंरांत अमीर हो गए थे। राजखोबा ने कहा कि वह पूर्व सीएम पुल की मौत की वजह जानने के लिए सीबीआई जांच चाहते थे।
  • सुसाइड क्यों?- कालिखों पुल को जुलाई में सुप्रीम न्यायालय के आदेश के बाद अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था उन्हें हटाकर फिर से नंबाम टुकी को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। इस घटनाक्रम के एक महीने बाद नौ अगस्त को पुल इटानगर स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। वहीं इस मामले पर बात करते हुए डीजीपी नित्यानंदन ने कहा कि हम लोग जांच की विवरण को देख रहे हैं। हालांकि, 60 पेजों के नोट्‌स को अभी नहीं देखा गया है। पुल की डायरी पंचनामा का हिस्सा थी।
  • जांच- इतना ही नहीं, राजखोवा ने यह भी कहा कि वह पुलिस की जांच से खुश नहीं थे। जिस रहस्यमयी तरीके से जांच हुई उस हिसाब से पुलिस ने अब तक कार्रवाई नहीं की। केस की जांच में एक सब इंस्पेक्टर को लगा रखा था जबकि सीएम की मौत के केस में एसपी या फिर डीसपी को लगाया जाना चाहिए था। राजखोवा के इस खुलासे के बाद अब राज्य के मौजूदा सीएम पेमा खांडु ने आईजीपी लेवल के ऑफिसर (बराबर के अधिकारी) को जांच में लगाया।
  • फ्रांस:- फ्रांसीसी भाषा में राफेल शब्द का मतलब तूफान है। इस विमान से हमारी वायुसेना की ताकत तूफानी हो जाएगी। लंबी इंतजार के बाद भारत और फ्रांस के बीच डोंसो राफाल लड़ाकू विमान पर करार हो गया है। भारत, फ्रांस से करीब 59 हजार करोड़ रुपए मेंं 36 विमान खरीदेगा। यानी एक विमान 1639 करोड़ रुपये का है। पिछले 20 सालों में यह लड़ाकू विमान की खरीद का भारत का पहला सौदा है। राफाल के विमान मे मीटियोर (उल्कापात) और बियॉन्‌ड विजुअल (जागरण सावधानी) रेंज (फेलाव) मिसाइल (यंत्र) होगी। इसकी क्षमता 150 किमी है। इससे पाकिस्तान के कई इलाके भारत की जद में आ जायेगें। पाकिस्तान के पास भी बीवीआर मिसाइल है लेकिन उसकी रेंज 80 किमी हैं। शुरुआत में फ्रांस 36 विमान के लिए 89 हजार करोड़ रुपए मांग रहा था। लेकिन भारत ने इनकार कर दिया। फिर इस साल 2016 में जनवरी में 64 हजार करोड़ रु. का प्रस्ताव रखा। भारत ने फिर खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देश 59 हजार करोड़ रुपए के करार पर सहमत हुए। अत: अंत में रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर और फ्रांसीसी रक्षा मंत्री यीव ज्यां जीन ने करार पर दस्तखत किये।

राफेल लड़ाकू विमान की खासियत निम्न हैं-

  • दो इंजन वाला लड़ाकू विमान, हर तरह के मिशन के लिए मुफीद है।
  • हवा से हवा और हवा से जमीन में मार करने में सक्षम।
  • अधिकतम गति 2,30 किमी/घंटा है, चीन के पास भी इसकी टक्कर का कोई विमान नहीं है।
  • परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
  • पहला विमान- 36 महीने के भीतर यानी 2019 में भारत को विमान मिलने शुरू हो जायेंगे, सभी 36 विमान 66 महीने के भीतर भारत आ जाएगे।
  • प्रशिक्षण- इसाल्ट वायुसेना को मुक्त प्रशिक्षण भी देगी। इतना ही नहीं, फ्रांस पायलट के प्रशिक्षण के लिए 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान की गारंटी देगा। साथ ही हथियारों के स्टोरेज (संग्रह) के लिए 6 महीने की अतिरिक्त गांरटी देगा।

कोलबिंया रेफरेंडम:-

  • दुनिया के सबसे लंबे गृहयुद्ध के खत्म होने पर फिर से अड़ंगा लग गया है। दरअसल कोलबिंया में सरकार और फार्क विद्रोहियों के बीच पिछले 52 साल से गृहयुद्ध चल रहा है। दोनों के बीच पिछले कुछ समय पहले शांति समझौते को लेकर बैठक हुई थी जिसमें फार्क के राजनीति में आने का फैसला जनमत संग्रह के आधार पर कराने का निर्णय लिया गया। इस रेफरेंडम को नकारते हुए कोलबिंया की जनता को फार्क को राजनीति में आने से रोक दिया।
  • 4.86 करोड़ जनसंख्या वाले कोलबिंया के 37 प्रतिशत लोगों ने मत दिया। इनमें से 50.2 प्रतिशत लोगों ने शांति समझौते के खिलाफ मतदान किया जबकि 49.8 फीसदी लोगों ने समझौते को समर्थन दिया है। 1.30 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया। महज 57 हजार मत के अंतर से राष्ट्रपति सांतोस का प्रस्ताव गिर गया। वामपंथी गोरिल्ला गुट फार्क 1964 से संघर्ष में जुटा था। उसने किसानाेे और महिलाओं के हक के लिए लड़ाई शुरू की थीं। सरकार और विद्रोहियों में 2012 से ही बातचीत चल रही थी। पिछले हुए शांति समझौते के बाद शर्त रखी गई कि इसे लागू कने के लिए कोलबिंया में रेफरेंडम होगा। लोगों ने कहा कि हत्यारे नहीं बना सकते देश की सरकार।
  • आगे क्या होगा- अब राष्ट्रपति सांतोस ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है लेकिन पूर्व राष्ट्रपति अलवारों उरीबे ने बैठक में आने से इनकार कर दिया है। ऐसे में सांतोस संसद की शरण ले सकते है। सरकार और विपक्ष में तनाव बढ़ सकता है। सांतोस अपने राष्ट्रपति पद के दूसरे और अंतिम कार्यकाल के खत्म होने से पहले फार्क को राजनीति में लाना चाहते हैं। सांतोस के प्रतिनिध क्यूबा जाकर फार्क नेताओं से मिलेंगे।
  • विचार- अभी जो समझौते का एग्रीमेंट (स्वीकृति पत्र) है वह विद्रोहियों के लिए बहुत लिबरल हैं। हमें डर है कि शांति वार्ता के नाकाम होने पर देश एक बार फिर हिंसा की चपेट में न आ जाएं।

                                                                                   अलवारो उरीबे, विपक्ष के नेता और पूर्व राष्ट्रपति

  • फार्क सदस्य शांति रखे, उन्होंने यूएन की निगरानी में हथियार डालने और राजनीतिक पाटी बनाने का फैसला किया उन्हें प्रयास जारी रखने चाहिए। हम हार नहीं मानेंगे ताकि अपने बच्चों के लिएहम बेहतर राष्ट्र बना सके।

                                                                                                                     मानवेल सांतोस राष्ट्रपति

  • चेन्नइर्:- अडाणी समूह की इकाई ग्रीन एनर्जी (हरी ताकात) ने दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट (सौर/सूर्य संबंधी वनस्पति पौधा) राष्ट्र को समर्पित किया। 648 मेगावाट की क्षमता वाला यह प्लांट तमिलनाडु के रामानाथपुरम जिले के कमुती मेंं लगाया गया है। यह राज्य सरकार की 2012 में पेश सौर ऊर्जा नीति के तहत 3000 मेगावाट की सौर बिजली उत्पादन के लक्ष्य का हिस्सा है। इसे एक सब स्टेशन (स्थान) की सहायता से प्रमुख ग्रिड (छड़ लगा हुआ ढाँचा) से जोड़ दिया गया है। अडाणी समूह के सभापति गौतम अडाणी ने कहा कि यह तमिलनाडु और देश के लिए एक यादगार पल है। हम राष्ट्र को इसे समर्पित कर काफी खुश है। इतने बड़े प्लांट से दश की दुनिया में प्रमुख हरित उत्पादको में शुमार होने की महत्वाकांक्षा और पुख्ता होती है। 5000 एकड़ में फेले इस प्लांट पर 4550 करोड़ रुपए निवेश किए गए है। प्लांट के उपकरण व मशीनरी के कई हिस्सों को दूसरे देशों से मंगाया गया है। इसे बनाने में आठ महीने का समय लगा। आठ माह में निर्माण कार्य पूरा करने के उद्देश्य से रोजाना 8500 लोग यहां काम पर जुटे रहे थे।
  • नई दिल्ली:- भारत के रक्षा समझौते भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार ब्रिटिश जनसमूह रोल्स रॉयस पर रक्षा सौदा हासिल करने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगा है। जनसमूह ने समझौता हासिल करने के लिए भारत के एक दलाल को 82 करोड़ रुपए बतौर रिश्वत दिए। एक संचार माध्यम के अनुसार रोल्स रॉयस ने भारतीय वायु सेना के इस्तेमाल में आने वाले हॉक (टूटे हुए जहाज का ढाँचा) एयरक्राफ्ट्‌स (हवाईजहाज) के इंजन का कॉन्ट्रैक्ट (ठेका) हासिल करने के लिए दलाल को सीक्रेट पेमेंट्‌स (रहस्यमय रुपये) किए। हथियारों का दलाल इस दलाल का नाम सुधीर चौधरी है। सरकार ने चौधरी को ब्लैक लिस्ट (काली सूची) कर रखा है।
  • आरोप- केंद्र सरकार दव्ारा कालीसूचियों जनसमूह व लोगों से संपर्क के दौरान अधिकारियों और मंत्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की चेतावानी दी गई है। उधर, सुधीर चौधरी के वकील के हवाले से कहा गया हैं कि उनके क्लाइंट (ग्राहक) ने कभी किसी भारतीय अधिकारी को रिश्वत नहीं दी। किसी रक्षा सौदे में दलाली भी नहीं की।
  • जांच- चौधरी अब लंदन में बस गया है। चौधरी ब्रिटेन के लिबरल ड्रेमोकेट (राजनीतिक) नेता टिम फेरन और उनके परिवार के लिए भारत के सलाहकार के तौर पर काम करता है। इस बीच रोल्स रॉयस ने कहा है कि वह जांच अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। साथ ही रोल्स रॉयस ने जांच पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार भी किया है।

हाल में सीबीआई ने ब्राजील से एम्ब्रेयर (डंडा लगाकर बंद करना या अंगारा) एयरक्राफ्ट डील (हवाईजहाज आपसी समझौता) की शुरुआती जांच में पाया कि करीब 36.5 करोड़ रुपए कमीशन (अधिकार) के तौर पर दिए गए। एक ब्राजीली अखबार ने हाल में आरोप लगाया था कि जनसमूह ने भारत में सौदा हासिल करने के लिए ब्रिटेन में भारतीय कार्यकर्ता को घूस दी।

  • विवरण- में कहा गया है कि जनसमूह के खिलाफ भारत के अलावा ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, इराक, ईरान, कजाखस्तान, अजरबैजान, नाइजीरिया और सऊदी अरब (12 देशों) में कांट्रैक्ट (ठेका) हासिल करने के लिए कार्यताओं को घूस देने के आरोप हैं। ब्रिटेन और अमेरिका के कार्यकर्ता जांच कर रहे हैं।

बीजिंग:-

  • चीन ने विमान निर्माताओं व खरीदारों के अब तक के सबसे बड़े जमावड़े ’एयरशो चाइना’ (हवा में प्रदर्शन) में अपनी चेंगदू जे-20 स्टेल्थ लड़ाकू विमान का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया। शुहाई में आयोजित शो की शुरुआत में ही दो जे-20 जेट विमान मौजूद मेहमानों के ऊपर से तेज आवाज करते हुए गुजरे। सिर्फ 60 सेकंड की उड़ान में ही उन्होंने न सिर्फ मेहमानों को तालियां बजाने पर मजबूर किया, बल्कि पार्किंग (निश्चित स्थान पर गाड़ी खड़ी करना) लॉट (भाग/अंश या अनेक भागों में बाँटना) में खड़ी गाड़ियों के अलार्म भी जोर-जोर से बजने लगे।
  • दक्षिण शहर शुहाई में आयोजित ’एयरशो चाइना’ के जरिए चीन न सिर्फ रक्षा क्षेत्र से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को दुनिया के सामने रख रहा हैं, बल्कि नागरिक उड़यन के क्षेत्र में भी अपनी महत्वकाक्षाओं को दुनिया के सामने रखने जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले एक दशक में चीन उड़यन के क्षेत्र में अमरीका को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपने विमान के ढाँचे को बेहतर कर रहा है, ताकि अमरीका से सैन्य लिहाज से ज्यादा अंतर न रह पाए।

जे-20 स्टेल्थ लड़ाकू विमान की खासियत निम्न हैं-

  • चीन के ये लड़ाकू विमान रडार को चकमा देने वाली खासियतों के मामले में अमरीकी वायुसेना के लिए लॉकहीड मार्टिन दव्ारा तैयार किए गए और जे-20 से बेहद मिलते-जुलते हैं।
  • लड़ाकू विमान को पहचान करने की क्षमता से लैस एफ-15, एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों, या लॉकहीड से ही एफ-35 से मुकाबला कर पाएंगे।
  • लॉग रेंज (लंबी दूरी) तक मारने में सक्षम हैं।
  • चीन का पहला फिफ्थ जेनरेशन (पाँचवी पीढ़ी) लड़ाकू जेट, जे-20 चीन के पीएल-15 मिसाइल (यंत्र) से कम हैं।

- Published/Last Modified on: November 8, 2016

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