उच्च चौदह समाचार (Top Fourteen News Part - 2 in Hindi) (Download PDF)

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चीन व अमरीका (हथियार):- चीन ने अमेरिका के ताइवान की तरफ रुझान को देखते हुए दक्षिण चीन सागर के विवादित कृत्रिम दव्ीपो में हथियार जमा करने शुरू कर दिए हैं। सेटेलाइट (उपग्रह) तस्वीरों से पता चलता है कि अपने बनाए सातों कृत्रिम दव्ीपों में चीन ने हथियार प्रणाली तैनात कर दी है। इससे पड़ोसी देशों में भी चिंता बढ़ गई है।

अमेरिकी थिंक (घना भाग) टैंक (सेना का टैंक) से जुड़े एशिया मैरीटाइम इनिशिएटिव (एएमटीआई) ने दावा किया है कि चीन ने इन दव्ीपों पर विमान भेदी और मिसाइल (प्रक्षेपास्त्र) भेदी प्रणालियां तैनात कर दी हैं। चीन लगातार कहता है कि वह मुख्य व्यापार मार्ग के बीच पड़ने वाले इन कृत्रिम दव्ीपों में फौजी सामग्री नहीं रखना चाहता।

चीन ने इन दव्ीपों पर हवाई पट्‌िटयां भी बना दी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये सभी तैनातियां और निर्माण कानूनी तौर पर सही हैं। ये आत्मरक्षा के लिए बनाए गए हैं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि अगर किसी देश ने यहां ताकत आजमाने की कोशिश की तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गैंग शुआंग ने कहा है कि ये दव्ीप चीन को विरासत में मिले हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वाभाविक है कि यहां की रक्षा व्यवस्था चीन करे। चीन ने पार्सल दव्ीपसमूह के वूडी दव्ीप पर पहले से ही सतह से आकाश में मार करने वाली मिसाइलें तैनात कर रखी हैं।

दावा-दक्षिण चीन सागर तथा इसके कुछ दव्ीपों पर फिलीपींस, मलेशिया, ताइवान, वियतनाम भी दावा करते हैं। चीन इनके दावे नकारते हुए अपनी दादागिरी दिखा रहा है। फिलीपींस भौगोलिक रूप से इन दव्ीपों के ज्यादा करीब है। उसने अपने आस पास के इलाके में सेना तैनात कर रखी है। अमेरिका इन पर किसी के दावे का समर्थन नहीं करता लेकिन उसका कहना है कि इस क्षेत्र से सभी को स्वतंत्र रूप से आवाजाही का अधिकार होना चाहिए।

भरोसा- द. कोरिया में राष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी लिबरल पार्टी (राजनीतिक दल) के उम्मीदवार मून जाए-इन ने कहा है कि उन्हें अमेरिकी रक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि थाइ मिसाइल सुरक्षा प्रणाली तैनात के बाद से दक्षिण कोरिया के रिश्ते चीन और रूस जैसे पड़ोसियों से बिगड़ रहे हैं।

धमकी- अमेरिका की प्रशांत महासागर कमान के प्रमुख एडमिरल हैरी हैरीस ने कहा है कि अमेरिका विवादित जल क्षेत्र में चीन से किसी भी तरह के मुकाबले के लिए तैयार है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने कृत्रिम दव्ीपों पर कितने फौजी ठिकाने बना लिए हैं।

चीन व अमरीका (पनडुब्बी):-

  • दक्षिणी चीन सागर में एक अमरीकी पनडुब्बी यूयवी (अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल) की जब्ती को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग में टकराव बढ़ गया है। अमरीका ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए चीन से पनडुब्बी लौटाने को कहा है। चीनी अधिकारियों ने पनडुब्बी जब्त करने की कार्रवाई को स्वीकार किया है, लेकिन अमरीकी विरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
  • दरअसल, चीनी नौसेना ने अमरीकी पनडुब्बी यूयवी फिलीपींस के तटीय इलाके सूबिक की खाड़ी से 50 मील की दूरी पर अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में सर्वे करते हुए पकड़ा था। इसके बाद से तनातनी बढ़ती जा रही है। अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में ही ताइवान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की है और उसके बाद से दोनों देशों में तनातनी है। चीन ताईवान को अपना हिस्सा मानता है।
  • अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रवक्ता कैप्टन डेफ डेविस ने बताया कि ओशन ग्लाइडर नामक इस पनडुब्बी का इस्तेमाल जल की क्षारीयता और तापमान की जांच में किया जा रहा था, ताकि समुद्र के अंदर चैनलों को मापा जा सके। उन्होंने दावा किया कि यह अमरीकी नौसेना की पनडुब्बी है, मगर इसका संचालन सैनिक नहीं कर रहे थे।

फिलीपींस की धमकी- फिलीपींस के राष्ट्रपति रोद्रिगो दुर्तेते ने अपने देश में अमरीकी सैनिकों की प्रवेश रोकने की धमकी दी है। उन्होंने अमरीकी सैनिकों को फिलीपींस आने की मंजूरी देने वाले समझौते को रद्द करने की बात कही है दुर्तेते ने कहा कि द. चीन सागर पर बीजिंग के दावों को अस्वीकार करने के अंतरराष्ट्रीय पंचाट के आदेश को हम नहीं मानेंगे, क्योंकि वह इसे चीन पर नहीं थोपना चाहता।

नई दिल्ली- हिंद महासागर में अपना दबदबा दिखाने की कोशिश कर रहे चीन को जवाब देने के लिए भारत और अमरीका रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस कवायद में दोनों देश सालाना मालाबार नौसेना अभ्यास को और ज्यादा विस्तार देंगे। अमरीका के 7वें बेड़े के वाइस ऐडमिरल जोसेफ पी. एकॉइन ने भारतीय नौसेना के मुखिया ऐडमिरल सुनील लांबा से मुलाकात की।

चीन और अमरीका सागर में ड्रोन (नर मधुमक्खी):-

  • चीन दव्ारा अमेरिकी ड्रोन जब्त किए जाने से दोनों देशों में नया विवाद छिड़ गया है। चीन की नौसेना ने दक्षिण चीन सागर के नीचे अमेरिकी ड्रोन को जब्त किया था। यह मानव रहित यान अमेरिका के समुद्र विज्ञान पोत से छोड़ा गया था। चीन को आशंका थी कि यह समुद्र में उसके विवादित दव्ीपों की जासूसी करने के लिए छोड़ा गया। अमेरिका ने राजनयिक स्तर पर कड़ा विरोध जताया है। इसी बीच, देर शाम चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जब्त ड्रोन वापस करने के लिए अमेरिका से बातचीत कर रहे हैं। लेकिन इस मामले को तूल देकर अमेरिका सहयोग नहीं कर रहा है। माना जा रहा है कि पहली बार अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र से किसी देश ने अमेरिकी यान पकड़ा है। चीन के युद्धपोत ने स्यूबिक बे में फिलीपींस से महज 50 समुद्री मील उत्तर पश्चिम में यह ड्रोन पकड़ा है। अमेरिकी अफसरों ने बताया कि ड्रोन अमेरिकी अफसरों ने बताया कि ड्रोन अमेरिकी जहाज को आंकड़े दे पाता उससे पहले ही पकड़ लिया गया। इसे यूएसएनएस बोडिच से छोड़ा गया था। अमेरिका ने इसे लौटाने की मांग की है।
  • अमेरिकी के अफसर के मुताबिक इस ड्रोन का काम समुद्र के खारेपन और तापमान की जांच करना था। इसका संचालन असैनिक अधिकारी कर रहा था। चीन को आशंका थी कि इसे चीन की जासूसी के लिए छोड़ा गया है। इस पर लिखा था कि यह अमेरिका की संपत्ति है और इसे समुद्र से न निकाला जाए।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अगर चीन से रिश्ते बिगड़े तो यह अमेरिका के लिए बहुत बुरा होगा। साल की अपनी आखिरी प्रेस (दबाना/अत्यावश्यक) कांफ्रेंस (सम्मेलन) में ओबामा ने कहा, अंतरराष्ट्रीय मामलों में चीन की भूमिका बढ़ रही है। इस हालत में चीन से बढ़ कर कोई दव्पक्षीय रिश्ता ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की राष्ट्रपति से फोन पर बात की थी। उसे अमेरिका की एक-चीन नीति के विपरीत बताते हुए चीन विरोध कर रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

वियतनाम:- हनोई में प्रधानमंत्री गुएन शुआन फुक ने कहा है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वियतनाम को पूरी समर्थन जारी रखने का भरोसा दिया है। अमेरिका और वियतनाम के बीच करीब 30 साल तक लड़ाई चली थी जिसमें अमेरिका को मुंह की खानी पड़ी। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एशिया नीति के तहत वियतनाम से रिश्ते सुधारे। लेकिन ट्रंप ने कहा था कि वे पद संभालने के बाद 12 ट्रांस पैसिफिक देशों के साथ व्यापार संधि (टीपीपी) तोड़ देंगे। इसमें वियतनाम भी शामिल हैं।

अमेरिका और रूस:- ट्रंप की जीत में रूस का हाथ-डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतने को लेकर सीआईए ने गोपनीय रिपोर्ट (विवरण) में सनसनीखेज खुलासा किया है। इस रिपोर्ट में सीआईए ने दावा किया कि रूस ने अमरीकी चुनाव में हस्तक्षेप किया और डोनाल्ड ट्रंप रूस की मदद से जीतने में कामयाब हुए। इसमें विकीलिक्स और क्रैमलीन के बीच करीबी संबंधों का भी दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने हिलेरी क्लिंटन व जॉन पोडेस्टा के ई-मेल हैक कराए थे। ई-मेल हैक होने से डोनाल्ड ट्रंप को फायदा पहुंचा और वो राष्ट्रपति चुनाव जीते। ये सारे ईमेल चुनाव के आखिरी महीनों में बड़ी संख्या में लीक (उजागर) हुए। इससे हिलेरी और ट्रंप के बीच जीत-हार का फासला कम होता गया। रिपोर्ट का कहना है कि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्‌स (सुरक्षा विशेषज्ञ) और इंटेलिजेंस (चतुर) ऑफिशियल्स (अधिकारी) ने ई-मेल हैकिंग में रूस का हाथ पाया है।

  • खारिज- डोनाल्ड ट्रंप की टीम (समूह) ने सीआईए की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया कहा है कि ये रिपोर्ट उन्हीं लोगों ने बनाई है, जिन्होंने दावा किया था कि सद्दाम हुसैन के पास विनाशकारी हथियार हैं।
  • आगाह- इससे पहले भी सीसीईए चीफ जॉन ब्रेन्नने ने एक साक्षात्कार में ट्रंप को रूस से हथियार रखने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के साथ तोड़ना विनाशकारी साबित होगा।
  • आदेश- व्हाइट हाउस (सफेद घर) के डिप्टी प्रेस (सहायक, अत्यावश्यक) सचिव एरिक सुल्ज ने इसे गंभीर मामला बताया है। उन्होंने कहा, चुनाव अभियान में रूसी हस्तक्षेप जानने के लिए संसद की ओर से बार-बार मांग की जा रही थी। इसे देखते हुए राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मामले के जांच के आदेश दिए हैं।

अमरीकी मीडिया रिपोट्‌र्स के मुताबिक जनवरी 2017 माह में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे ट्रंप की बेटी इवानका उनकी पत्नी की जगह अमरीका की फर्स्ट लेडी (पहली महिला) की भूमिका निभा सकती हैं। ऐसा हुआ तो वह अमरीकी इतिहास में सबसे शक्तिशाली बेटी होगी।

अमरीका:- अमेरिकी राजनीति से पैसो का बोलबाला खत्म करने का वादा कर सत्ता में आए डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की सबसे अमीर मंत्रिमंडल चुनी है। ट्रंप ने उद्योगपतियों, सीईओ, बैंकर्स और हॉलीवुड से जुड़े लोगों को जोड़ा है। मंत्रिमंडल के 21 सदस्यों में से 20 को नामित कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर गोरी नस्ल के बुजुर्ग और धनी लोग हैं। ये लोग रिस्क लेने में माहिर हैं। इनमें 15 लोगों की कुल संपत्ति करीब एक लाख करोड़ रुपए से अधिक है। 5 लोगों ने संपत्ति की जानकारी नहीं दी है। यह रकम 83 देशों की जीडीपी से ज्यादा है। फेडरल रिजर्व (आरक्षित) के मुताबिक यह रकम अमेरिका के गरीब तबके के एक तिहाई लोगों यानी 4.3 करोड़ परिवारों की कुल संपत्ति के बराबर है। अमेरिका की औसत आय 81,200 डॉलर है। इस लिहाज से 2 लाख अमेरिकियों की संपत्ति जितनी अमीर होगी यह कैबिनेट (मंत्रिमंडल) को कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है।

ट्रंप टीम (समूह) में 20 में से चार महिलाएं, 1 अश्वेत यानी पिछले दो दशक की सबसे गोरी कैबिनेट (मंत्रिमंडल)

  • रेक्स टिलरसन, विदेश मंत्री, संपत्ति 1016 करोड़ रुपए– ऑयल कंपनी (तेल जनसमूह) एक्सॉन मोबिल कंपनी के सीईओ रहे हैं। 50 देशों में बिजनेस (कारोबार) फैला हुआ है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन के करीबी। रूस की ओर से उन्हें 2013 में ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप (आदेश की दोस्ती) सम्मान दिया गया था।
  • स्टीव नूचिन, वित्त मंत्री, संपत्ति 270 करोड़ रुपए– गोल्डमैन सैक्स के बैंकर रह चुके हैं। 17 साल का बैंकिंग अनुभव। फिल्म निर्माता भी है। इन्होंने ’मैड मैक्स फ्यूरी रोड और अमेरिकन स्नाइफर’ जैसी हिट (जोश) (फिल्मों का प्रोडक्शन उत्पादन प्रक्रिया) किया है।
  • जनरल जेम्स मैटिस, रक्षा मंत्री, संपत्ति की जानकारी नहीं-मैड डॉग के नाम से मशहुर मैटिस इरान, अफगानिस्तान व खाड़ी युद्ध में मोर्चा संभाल चुके हैं। ओबामा की ईरान नीति के आलोचक। सख्ती और रणनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं।
  • जैफ सेशन्स, अटॉनी जनरल, संपत्ति 50 करोड़ रुपए-जैफ अलाबामा से रिपब्लिकन सीनेटर हैं। मुस्लिम-विरोधी शख्स हैं। अमेरिकी लाइब्रेरीज में इस्लाम की जानकारी देने वाली किताबों के खर्च पर सवाल उठा चुके हैं।

4 महिलाओं में से 3 अरबपति हैं और इन्होंने ट्रंप को चंदा दिया था, भारतवंशी निक्की को भी मिली जगह

  • बेट्‌सी डेवोस, शिक्षा सचिव, कुल संपत्ति 34,557 करोड़ रुपए-मार्केटिंग कंपनी (बाजार जनसमूह) एमबे की फाउंडर मेंबर (योजना आदि असफल हो जाना, सदस्य)। पिछले साल कंपनी का 12 फीसदी राजस्व गिरकर 9.5 बिलियन डॉलर रहा। अमेरिका की 88वीं सबसे अमीर महिला। 21 करोड़ रुपए का चंदा दिया।
  • लिंडा मैकमहोन, लघु उद्योग व प्रशासन, कुल संपत्ति 10,841 करोड़ रु.-डब्ल्यूडब्ल्यूर्ड की सीईओ, पति विन मैकमहोन कंपनी के प्रमोटर और ट्रंप के दोस्त हैं। ट्रंप भी डब्ल्यूडब्ल्यूर्ड से जुड़े रहे हैं। हॉल ऑफ फेम (सूराख, के यश) के सदस्य भी हैं। चुनाव में 50 करोड़ की मदद की।
  • एलेन चाओ, परिवहन सचिव, कुल संपत्ति-155 करोड़ रुपए-चाओ के पिता देश की प्रमुख्ा शिपिंग कंपनी (जनसमूह) फोरमोस्ट मेरीटाइम के फाउंडर (निर्माण करने वाला) हैं। चाओं को संपत्ति अपनी मां से विरासत में मिली है। चाओ ताइवानी अमेरिकन हैं। माता-पिता चीन के हैं।
  • निक्की हेली, यूएन एम्बेसडर, कुल संपत्ति, 10.48 करोड़ रुपए-भारतीय मूल की निक्की हेली का पूरा नाम निमराता निक्की रंधावा। साउथ (दक्षिण दिशा) कैरलाइना की गवर्नर (राज्यपाल) हैं। प्राइमरी (विकास में प्राथमिक) चुनाव में सीनेटर रूबियो का समर्थन किया था, फिर ट्रंप के साथ आ गई।

ट्रंप ने इस्लामिक आतंकवाद विरोधी और ओबामा की मुखलाफत करने वालों को भी मंत्री बनाया

  • टॉड रिकेट्‌स, उप वाणिज्य सचिव, कुल संपत्ति 35,912 करोड़ रुपए-बचपन गरीबी में बीता। रिकेट्‌स शिकागो कब्स के सह-मालिक और एंडिंग (परिणामत:) स्पेंडिंग (खर्च की गई या खर्च के लिए उपलब्ध राशि) संस्था के सीईओ।
  • विल्बर रॉस, वाणिज्य सचिव, कुल संपत्ति-18 हजार करोड़ रुपए-डब्ल्यूएल रॉस एंड कंपनी के चैयरमैंन (सभापति) और कोल माइन के मालिक हैं। ट्रंप के कट्‌टर समर्थक।
  • स्टीफन बैनन, मुख्य रणनीतिकार, कुल संपत्ति-135 करोड़ रुपए-ट्रंप के चुनाव कैंपेन के सीइओ थे। पश्चिम में बसे मुस्लिम युवकों को टाइम बम बता चुके हैं।
  • बेन कार्सन, गृह सचिव, कुल संपत्ति,176 करोड़ रुपए-दुनिया के टॉप (सर्वश्रेष्ठ) न्यूरोसर्जन (तंत्रिका विज्ञान की शल्य चिकित्सक)। लेखक और मोटिवेटर (प्रेरित करना) भी हैं। वे एकमात्र अश्वेत मंत्री हैं।
  • एंडी पुज्डर, श्रम सचिव, कुल संपत्ति,170 करोड़ रुपए-सीकेई रेस्त्रोरेंट के सीइओ और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के विरोधी
  • टॉम प्राइस, स्वास्थ्य सचिव, कुल संपत्ति: 93 करोड़ रुपए-आर्थोपेडिक सर्जन और ओबामाकेयर के धुर विरोधी। छह बार रिपब्लिकन सांसद रह चुके हैं।
  • टीम (समूह) मोदी- प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट (मंत्रीमंडल) में 40 मंत्री करोड़पति हैं। 113 करोड़ की संपत्ति के साथ जेटली सबसे अमीर मंत्री हैं।
  • ब्रिटिश- कैबिनेट 600 करोड़ की है। रूस, जापान और चीन की कैबिनेट भी ट्रंप टीम से काफी पीछे है।
  • सउदी अरब- में राजशाही है। यहां के प्रिंस बिन तलाल करीब 2 लाख करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं।

ओबामा और ट्रंप की कैबिनेट तुलना-

  • ओबामा की कैबिनेट से 4 गुना अमीर है ट्रंप की टीम-ओबामा ने पेनी प्रित्जकर को वाणिज्य सचिव बनाया था। वे 16,225 करोड़ रुपए की मालिक हैं।
  • ओबामा की कैबिनेट के पास औसतन 17 साल का सियासी अनुभव था जबकि ट्रंप टीम के पास 6.8 साल का।
  • खुद डोनाल्ड ट्रंप देश के सबसे अमीर राष्ट्रपति होंगे। वे 30 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां-

ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी (दल) को सीनेट (अमेरिका आदि में उच्च सदन) और हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव्स (घर के वर्ग या समूह का प्रतिनिधि रूप) का दोनों सदनो में बहुमत है। लिहाजा उनकी कई योजनाएं निश्चित ही कानून का रूप लेंगी। ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद हमें तीन नीतिगत बदलाव देखने को मिलेंगे।

  1. पहला-कॉर्पोरेट (पालिका या निगम विषयक) टैक्स (कर) में भारी कटौती।
  2. दूसरा -सड़क और एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बड़ा निवेश।
  3. तीसरा- इमिग्रेशन (आप्रवास) आयात व आउटसोर्सिंग (बाहरी स्त्रोत) पर पाबंदी।

कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती -प्रथम नीति के तहत ट्रंप ने कॉर्पोरेट कर की दर को मौजूदा 30 फीसदी से घटाकर 15-20 फीसदी के आसपास लाने का वादा किया है। यह कटौती काफी अधिक है और इसका लगभग सभी देशों में असर पड़ेगा अमेरिका और दूसरे देशों की कंपनियां अन्य देशों के बजाय अमेरिका में निवेश के लिए प्रेरित होंगी। भारत पर भी इसका प्रभाव होगा। लेकिन वेतन में भारी अंतर को देखते हुए अमेरिका में नौकरी के अवसर कम होंगे।

सड़क और एयरपोर्ट (हवाईअड्डा) जैसी सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी संरचना) परियोजनाओं में बड़ा निवेश-

  • ट्रंप की दूसरी प्रमुख नीति होगी अमेरिका में इन्फास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश को बढ़ाना। उनकी योजना सड़क जैसी सार्वजनिक इन्फास्ट्रक्चर परियोजनाओं में एक लाख करोड़ डॉलर (करीब 68 लाख करोड़ रुपए) निवेश करने की है। यह रकम भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग आधा है। इससे अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों की गति में खासी तेजी आएगी। यह कॉर्पोरेट कर की दर में कटौती से दिखने वाले असर के अतिरिक्त होगी। अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का पूरी दुनिया को फायदा मिलेगा। अमेरिका में आयात बढ़ेगा। इससे उसे निर्यात करने वालो देशों को कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा। इनमें हमारी सॉफ्टवेयर (कार्यक्रम जिनसे कंम्प्यूटर पर काम किया जाता है।) सर्विसेज इंडस्ट्री (सेवा, उद्योग) भी शामिल है। अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों में तेजी सभी के लिए सकारात्मक होगी। लेकिन इसका विपरीत असर यदि हमें कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के रूप में मिलता है तो हमारा आयात बिल बढ़ेगा। इस तरह ट्रंप जब सार्वजनिक निवेश बढ़ाएंगे तो हमें नुकसान कम फायदा अधिक मिलेगा।
  • अमेरिका में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने, महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने के साथ विदेशी निवेशक भारत व अन्य उभरते बाजारों से अपने पैसा निकाल सकते हैं। इसका मतलब है कि हमारे शेयर बाजारों को अपने दम पर आगे चलना होगा। शेयर बाजारों से विदेशी पैसे की संभावित निकासी से निपटने के साथ संतुलन को आर्थिक सुधारों की प्राथमिकता तय करनी चाहिए।

इमिग्रेशन (आप्रवासी) आयात व आउटसोर्सिंग पर पाबंदी-ट्रंप की तीसरी नीति होगी इमिग्रेशन यानी विदेशी नागरिकों के अमेरिका में आकर काम करने और आउटसोर्सिंग को सीमित करने की। यह हमारे लिए बड़ा चिंता का विषय होना चाहिए क्योंकि इसका हमारी सॉफ्टवेयर सर्विसेज इंडस्ट्री पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि सॉफ्टवेयर सेक्टर में बदलाव पहले से हो रहे हैं। भारतीय कंपनियां अमेरिका और दूसरे देशों में स्थानीय लोगों को ज्यादा नौकरी दे रही हैं। यदि ट्रंप आउटसोर्सिंग पाबंदीयां बढ़ाते हैं तो हमारी सॉफ्टवेयर कंपनियों को इसके असर को झेलना होगा। इससे भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम करने वालों की मांग का पैटर्न बदल सकता है। कंपनियां कम अनुभव वाले जावा प्रोग्रामर्स (कार्यक्रम) के बजाय अधिक वेतन वाले ऐसे लोगों को नौकरियां देंगी जिन्हें आर्टिफिशयल (कृत्रिम) इंटेलिजेंस (होशियार) (एआई), क्लाउड (बादल) कम्प्यूटिंग (विद्युत उपकरण) और रोबोटिक्स का अच्छा ज्ञान होगा।

अगस्ता घोटाला:- अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले में पटियाला हाउस कोर्ट (न्यायालय) ने भारतीय वायु सेना के पूर्व अध्यक्ष एसपी त्यागी को चार दिन की सीबीआई कस्टडी (अभिरक्षा/हिरासत) में भेज दिया। त्यागी ने कोर्ट में कहा कि वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की उड़ान की सीमा को घटाने का सुझाव तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय ने दिया था। त्यागी के साथ उनके रिश्तेदार संजीव त्यागी और वकीम गौतम खेता को भी कस्टडी में भेजा गया है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि एसपी त्यागी के खिलाफ एजेंसी (कार्यस्थान) के पास सबूत हैं। त्यागी के कार्यकाल में उनके परिवार ने खेतिहर जमीन में निवेश किया था। ऐसे में उनके परिजनों से भी पूछताछ की इजाजत मिलनी चाहिए। सीबीआई ने अदालत से एसपी त्यागी की 10 दिनों की कस्टडी भी मांगी, लेकिन कोर्ट ने 4 दिन का वक्ता दिया।

गौरतलब है कि 3,600 करोड़ रुपए के घोटाले मामले में संलिप्तता को लेकर इन्हें गिरफ्तार किया गया था।

  • आरोप-एसपी पर आरोप है कि हेलाकॉप्टर के उड़ने की क्षमता 6,000 मीटर से घटाकर 4,500 मीटर करवाई गई। इसकी बदले में कथित तौर पर कंपनी (जनसमूह) से कमीशन (कार्याधिकार) लिया है।
  • 2013 में मामला सामने आने पर इस सौदे को रद्द कर दिया गया। 450 करोड़ रुपए कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप है। हालांकि उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि फैसला कथित तौर पर विशेष सुरक्षा समूह और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ परामर्श लेकर किया गया था, भारत ने 12 हेलीकॉप्टर खरीदे थे। इनमें से 3 हेलिकॉप्टर आज भी दिल्ली के पालम एयरबेस पर खड़े हैं।
  • खुलासा- घोटाला तब सामने आया, जब इटली की एक अदालत ने इस सौदे में कथित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का नाम लिया था। लेकिन दोनों में से किसी के खिलाफ इस मामले में किसी अनियमितता का कोई विवरण नहीं दिया। 2013 में सौदे को रद्द कर दिया गया। सौदे में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी और तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की भूमिका भी अहम थी।
  • आरोपी- एसपी त्यागी, उनके रिश्तेदार संजीव, राजीव व संदीप और यूरोपीय दलाल गुईडो राल्फ हश्के, कार्लो वलेंटिनो फर्डिनाडो गेरोसा तथा क्रिश्चियन माइकल सहित 10 अन्य लोगों के नाम उस प्राथमिकी में दर्ज है, जिसे सीबीआई ने मार्च 2013 में दर्ज किया था। एफआईआर में एयरोमैट्रिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (हल, निजी, सीमित) के सीईओ प्रवीन बख्शी, आईडीएस इंफोटेक लिमिटेड (इंडिया) के अध्यक्ष सतीश बागरोडिया तथा इसके प्रबंध निदेशक प्रताप के अग्रवाल के नाम भी शामिल हैं।

अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाले में पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी सहित तीनों आरोपियों का रिमांड तीन दिन और बढ़ा दिया। त्यागी के साथ वकील गौतम खेतान और भतीजे संजीव त्यागी को सीबीआई गिरफ्तार किया था। आरोप है कि 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर्स के 3600 करोड़ रु. के सौदे में 450 करोड़ रु. की रिश्वत ली गई थी। सीबीआई ने इसको गंभीर बताते हुए तीनों की रिमांड अवधि सात दिन बढ़ाने की अर्जी कोर्ट में दी थी। कोर्ट (न्यायालय) ने तीनों का रिमांड (अपराधी को मुकदमा होने तक हवालात में भेजना या ज़मानत पर छोड़ना) 3 दिन और बढ़ा दिया।

न्यूयार्क:-

  • अभी कुछ माह पहले सिलिकॉन वैली की डेढ़ सौ नामी टेक कंपनियों ने डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रचार अभियान को कट्‌टर और लोगों में भय पैदा करने वाला बताया था। इन कंपनियों के अपने खुले खत में ट्रप को नवाचार के लिए खतरा तक की संज्ञा दी। अब बारी जीत के रथ पर सवार नए निर्वाचित -राष्ट्रपति की है। न्यूयार्क में 14 दिसम्बर को होने वाले समिट के लिए ट्रंप प्रशासन ने टेक्नोलाजी इंडस्ट्री (तकनीकी उद्योग) के बड़े टाइकून को बुलाया है। इनमें फेसबुक, ट्‌िवटर, यू-टयूब, एपल, सिस्को, माइक्रोसाफ्ट समेत कई कंपनियों (जनसमूह) के सीईओ और संस्थापक शामिल हैं। इसमें टेक्नोलॉजी को लोगों के लिए बेहतर बनाने और सोशल (समाजिक) नेटवर्किंग (जाल पर कार्य) पर बात हो सकती है।
  • न्यूयार्क, मैनहटन और वाशिंगटन में लोगों का मानना है कि यह सच है कि राष्ट्रपति चुनाव में सोशल मीडिया (समाज संचार माध्यम) बेहद अहम भूमिका निभाई। इस दौरान कई फेक न्यूज (नकली समाचार) भी चलीं।
  • इन्होंने परिणामों पर असर डाला। अब फेक न्यूज पर रोक की रणनीति बनाने की जरूरत महसूस कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि यह ट्रंप और सिलिकॉन वैली के बीच कुछ तल्ख रिश्तों का बेहतर बनाने की रणनीतिक पहल होगी।
  • अमरीका में ट्रंप के समर्थकों ने जोरदार ऑनलाइन अभियान चलकर चुनाव पूर्व के सारे विश्लेषणों को झूठा साबित करने में मदद की। इसी साल ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने में फेसबुक पर चले सुनियोजित अभियान ने भी अहम भूमिका निभाई। भारत में मोदी खुद सोशल (समाज) नेटवकर् (जाल तंत्र) पर सक्रिय हैं और समर्थक सोशल नेटवर्किंग से उनकी बेहतर छवि गढ़ते हैं।

बगदाद:- अमरीका के रक्षा मंत्री कार्टर ने कहा है कि अमरीका सीरिया में कथित इस्लामिक राज्य के गढ़ माने जाने वाले रक्का में 200 और सैनिक भेजेगा। एश कार्टर ने बहरीन में कहा कि अमरीकी सैनिक रक्का पर दोबारा कब्जा करने में मदद करेंगे। पिछले महीने अमरीका समर्थित कूर्द और अरब लड़ाकूओं के गठबंधन ने कहा था कि उन्होंने रक्का पर कब्जे के लिए अभियान शुरू कर दिया है।

भारत:-

  • पिछले लगभग 3 सालों से कच्चे तेल की लगातार घटती कीमतों के कारण पेट्रोलियत उत्पादों के भारत समेत अन्य तेल उपभोक्ता देशों को भारी फायदा हुआ। भारत को कुल तेल की खपत का 70 प्रतिशत से ज्यादा आयात करना पड़ता है। घटती तेल कीमतों के चलते भारत का तेल आयात का बिल 2012-13 में 164 अरब डॉलर से घटता हुआ 2015-16 में मात्र 83 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे हमारा व्यापार घाटा वर्ष 2012-13 में 190 अरब डॉलर से घटता हुआ 2015-16 में 118 अरब डॉलर रह गया। तेल कीमतें घटती नहीं तो यह संभव नहीं होता। इससे सरकारी खजाने को तो फायदा पहुंचा पर तेल पर कर वृद्धि से पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा। राजस्व बढ़ने से सरकार को राजकोषीय अनुशासन लाने में सुविधा हो गई और 2015-16 तक आते-आते हमारा राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.9 प्रतिशत तक पहुंच गया। हमारी विकास दर भी बेहतर हुई और मुद्रास्फीति भी घटी। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पुन: बढ़ने लगी। हैं। किसी समय 30 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे पहुंची कच्चे तेल की कीमत कुछ दिन पहले 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। इस वर्ष सितंबर में कच्चा तेल उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) ने अपने कुल उत्पादन को 17 लाख बैरल प्रतिदिन घटाने का फैसला किया। ’ओपेक’ दुनिया की कुल तेल खपत का 42 प्रतिशत उपलब्ध कराते हैं। 29 नवंबर 2016 को ओपेक और गैर ओपेक तेल उत्पादक देशों की बैठक में मिलकर तेल उत्पादन घटाने के फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमत 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हालांकि अब असंमजस बना हुआ है कि क्या घटती तेल कीमतों का युग समाप्त हो गया और भविष्य में तेल कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं? वैश्विक स्तर ऐसा लगने लगा है कि शायद तेल कीमतें दोबारा बढ़ने लगेंगी। लेकिन बाजार की खबरे इस सोच को पुष्ट नहीं करती। माना जा रहा है कि एक ओर ओपेक व गैर ओपेक तेल उत्पादक देश उत्पादन घटा कर कीमत बढ़ाने की इच्छा रखते हैं। लेकिन दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ दूसरी शक्तियों तेल कीमतों को बढ़ने नहीं देना चाहती। अमरीका की एनर्जी इन्फॉरमेशन एडमिनिस्ट्रेिशन (शक्ति सूचना लोकप्रशासन) (ईआईए) का मानना है कि अगले साल भी तेल कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल से नीचे ही रहेगी। ओपेक देश तेल उत्पादन घटाएंगे जरूर पर पूर्ति के आधिक्य के चलते कीमतें बढ़ेगी नहीं। ईआईए का मानना है कि अमरीकी तेल कंपनियों के साथ गैर ओपेक देशों में भी उत्पादन बढ़ेगा, जिसके चलते ओपेक देशों दव्ारा तेल की आपूर्ति घटने का प्रभाव कीमतों पर नहीं पड़ेगा।
  • समाचार एजेंसी राइटर दव्ारा जुटाई गई जानकारी भी इसी तथ्य की पुष्टि करती है। हालांकि रायटर, ईआईए के तेल कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने के अनुमान के विपरीत मानता है कि तेल कीमतें 55 से 57 डॉलर प्रति बैरल रहेंगी। राईटर और ईआईए के अनुमानों में असहमति के बावजूद इस बात पर सहमति जरूर है कि तेल कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से की रहने वाली हैं। उधर विशेषज्ञ ’आपेके’ दव्ारा उत्पादन घटाने के बारे में भी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है। ऐसे में जब ओपेक देशों ने अपना कुल उत्पादन 17 लाख बैरल प्रति दिन घटाने का निर्णय लिया। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि गैर ओपेक देश अपना उत्पादन 6 लाख बैरल प्रतिदिन घटांए। अभी तक केवल रूस ने ही अपना उत्पादन 3 लाख बैरल प्रतिदिन घटाने का वादा किया हालांक ओपेक देशो को कहना है, चाहे गैर ओपेक देश तेल उत्पादन घटाएं या न घटाए, उनकी तेल उत्पादन घटाने की मुहिम जारी रहेगी। तमाम अपेक्षाओं और आशंकाओं के मद्देनजर लगता यही है कि तेल कीमते अपने 55 डॉल के प्रति बैरल के स्तर पर सा उससे भी कम रह सकती हैं। 1973 के बाद ओपेक देशों दव्ारा अपनी आपूर्ति घटाने की ताकत के बल पर तेली कीमतों में नियंत्रण और लाभों को अधिकतम करने की कवायद दुनिया ने देखी है। उस समय दुनिया में तेल की आपूर्ति का 52 प्रतिशत ओपेक देशों से प्राप्त होता था, जो अब घटकर 42 प्रतिशत रह गया है ओपेक के सदस्य स. अरब और गैर ओपेक तेल उत्पादक रूस के बीच व्यासायिक या अन्य कारणों से तनाव भी जगजाहिर है।
  • उधर अमरीकी दव्ारा लंबे समय से उत्पादन को 50 लाख बैरल से 90 लाख बैरल तक बढ़ाये जाने पर भी तेल कीमतों को घटाने में बड़ी भूमिका अदा की है। ओपेक देश और उनके साथ मिलकर चाहे गैर ओपेक देश भी जो समझौते कर रह हैं, उनको ईमानदारी से लागू करने के प्रति संदेह बना ही हुआ है। अमरीका दव्ारा लगातार उत्पादन बढ़ाने से संकेत मिलता है, अमरीका की यह कोशिश रहेगी कि तेल कीमतें न बढ़ने पाएं। उसके पीछे दो कारण हो सकते हैं- एक स. अरब और ओपेक के दूसरे देशों के पास बहुत ज्यादा अधिशेष उत्पादन न हो क्योंकि ऐसा माना जाता रहा है कि वे बड़ी मात्रा में आतंकवाद का वित्तीय पोषण करते हैं। दूसरा कारण यह कि बढ़ता तेल कीमतें अमरीका समेत दुनिया में आर्थिक मंदी को समाप्त करने के प्रयासों को धक्का पहुंचा सकता है।

कच्चे तेल का खेल-

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए सुधार के साथ ओपेक व गैर तेल उत्पादक देशों दव्ारा तेल उत्पादन घटाने के फैसले के बाद असमंजस यह है कि क्या पिछले सालों से घटती तेल कीमतों का युग अब खत्म हो गया या नहीं….?
  • ओपेक देश इन दिनों धन की भारी तंगी से गुजर रहे हैं और तेल कीमतों को नियंत्रित करने की उनकी ताकत भी कमजारे हुई है। वर्तमान हालात में वे तमाम कोशिशें कर रहा है, लेकिन लगता यही है कि कच्चे तेल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ने वाली नहीं।
  • नवंबर 2011 में कच्चे तेल के दाम 105 डॉलर प्रति बैरल थे जो अगस्त 2014 में 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचे। फिर ये ऐसे फिसले कि जनवरी 2016 में 30 डॉलर पर आकर रूके। अब दाम सुधरने लगे हैं और यह 55 डॉलर पर आ गए हैं।

                            डॉ. अश्विनी महाजन, आर्थिक मामलों के जानकार, दिल्ली विवि में लंबे से अध्यापन, स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक

जापान:-

  • भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अभियान शुरू किया है। वहीं, जापान में शिंजो आबे सरकार अंतरिक्ष में सफाई अभियान शुरू करने जा रही है। अंतरिक्ष में फेले कचरे को बटोरने के लिए अगले महीने एक कार्गो जहाज भेजा जाएगा। इसके लिए 700 मीटर लंबा जाल बनाया गया है। इसे जापान में मछली पकड़ने का जाल बनाने वाली 106 साल पुरानी कंपनी नितो सिमो ने बनाया है।
  • नासा के मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में 10 करोड़ से ज्यादा स्पेस (अंतरिक्ष) जंक के टुकड़े फेले हुए हैं। इनमें पुराने सैटेलाइट के बेकार हो चुके उपकरण, टूल्स (कारीगर के औजार) और रॉकेट के बिट्‌स (खंड) आदि शामिल है। इसे अंतरिक्ष से तुरंत हटाने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो इनसे टकराने वाली कोई भी चीज खत्म हो सकती है। दरअसल, नितो सिमो कंपनी पिछले 10 साल से जापानी स्पेस जाक्सा एजेंसी (कार्यस्थान) के साथ मिलकर इस जाल को बनाने में जुटी थी। ताकि स्पेस में फेले कचरे को समेटा जा सके। इस परियोजना के हेड (मुख्य) कोइचि इनोउ ने बताया कि ’स्पेस एजेंसी अगले महीने इसका ट्रायल (परीक्षण) करेगी। यह प्रयोग अंतरराष्ट्रीय सफाई मिशन का एक अहम हिस्सा है। मकसद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और करीब 6.74 लाख करोड़ रुपए के अंतरिक्ष स्टेशनों (स्थानों) का बचाव करना है। अंतरिक्ष में सैटेलाइट और रॉकेट का फैला कचरा करीब 28,165 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूम रहा है। इस कचरे का छोटा सा हिस्सा भी किसी भी कम्यूनिकेशन (संचरण) नेटवकर् को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी अंतरिक्षयात्री को इससे नुकसान नहीं पहुंचा है, पर कुछ सैटेलाइट को नुकसान हुआ है।’
  • आटोमेटड कार्गो जहाज का नाम ’स्ट्रोक’ है। जापानी भाषा में इसे ’कोउनोटोरी’ कहते है। यह अंतरिक्ष में फेले कचरे को पहले जाल में इकट्‌ठा करेगा। फिर उसे नार्थ (उत्तर दिशा) पेसेफिक (शांतिप्रिय) सागर के ऊपर स्थित तानेगाशिमा स्पेस सेंटर पर जला देगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि जाल में लगी लुब्रीकेटेड (मशीन आदि में घर्षण कम करने के लिए तेल/ग्रीस डालना) और इलेक्ट्रो (विद्युत) डॉयनमिक (गतिदायक बल) रस्सियों से इतनी ऊर्जा उत्पन होगी की कचरे अपने आप खिंचे चले आएंगे। जहाज से इस कचरे को जैसे ही वातावरण में धक्का दिया जाएगा, वे खुद जल जाएंगे।
  • यह जाल एल्युमिनियम (एक हल्कह धातु) और स्टील (इस्पात) वायर (तार/विद्युतवाही) की रस्सियों से बनाया गया है। स्पेस एजेंसी जाक्सा ने नितो सिमो कंपनी को इस विशेष जाल को विकसित करने के लिए सरकार से कहा था। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि जाक्सा ऐसा जाल चाहता था जो काफी मजबूत हो। ये काफी मुश्किल काम था।

स्पेस जंक के टुकड़े निम्न हैं-

  • नासा के मुताबिक अंतरिक्ष में करीब 5 लाख टुकड़े ऐसे तैर रहे हैं, जिनकी लंबाई एक से 10 सेंटीमीटर के बीच है।
  • स्पेस जंक के करीब 21000 टुकड़े 10 सेंटीमीटर से बड़े हैं। इसके अलावा दस करोड़ टुकड़े एक सेंटीमीटर से छोटे हैं।
  • ज्यादातर टुकड़े 2000 किमी की गति से पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे हें।
  • केवल 7 फीसदी स्पेस जंक सही है।

अमेरिका ने स्पेस जंक को ट्रैक करने के लिए करीब 1 बिलियन डॉलर नई ट्रैकिंग (पद चिन्ह) डिवाइस (विशेष प्रयोजन के लिए निर्मित वस्तु) बनाने पर खर्च किया है।

ब्रिटिश व केन्या:- 1963 में आज ही के दिन केन्या को आजादी मिली थी। यह देश 1895 से ब्रिटिश गुलामी और शोषण का शिकर था। 53 साल पहले जोमो केन्याटां आजादी हासिल करने के बाद देश के पहले राष्ट्रपति बने थे। आजादी की खुशी से सराबोर केन्या के आम अवाम ने सड़को पर झूम झूम कर गाया था और पागलों की तरह नाचा। दरअसल, 1952 में जीमो केन्याटा को केन्या पर काबिज ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। 1959 में केन्याटा की सजा पूरी हुई और उन पर लगे प्रतिबंध 1961 में उठा लिए गए। अक्टूबर माह में केन्याटा, केन्यन अफ्रीकन नेशनल यूनियन (राष्ट्रीय संघ) के अध्यक्ष बने। देश के पहले प्रधानमंत्री और बाद में राष्ट्रपति बनने का श्रेय भी उन्हीं को हैं।

स्वीडन:-

  • हम भले ही देश में स्वच्छता अभियान चला रहे हों लेकिन यूरोप में एक देश ऐसा भी है जो दूसरे देशों से कचरा मंगा रहा है। जी हां, स्वीडन में जरूरत की आधी से ज्यादा बिजली कचरे से बनाई जाती है। इससे वहां कचरे की कमी हो गई है।
  • स्वीडन उन चुनिंदा देशों में से एक है जिसने जैविक ईंधन के इस्तेमाल पर 1991 से कड़ा टैक्स (कर) लगा रहा है। वह जैविक ईंधन की बजाय कचरे को रीसाइकल (इस्तेमाल की जा चुकी वस्तु का पुननिर्माण करना) कर बिजली बनाता है। उसका रिसाइक्लिंग सिस्टम (प्रबंध) इतने परिष्कृत तरीके से काम करता है कि पिछले साल वहां पर घरों से निकले कुल कचरे का केवल एक प्रतिशत कचरा क्षेत्र में फेंका गया। लेकिन अब वहां कचरे की कमी हो गई है। अब वह अपने रीसाइक्लिंग प्लांट चालू रखने के लिए विदेश से कचरा मंगा रहा है।
  • स्वीडन की कचरा प्रबंधन की रीसाइक्लिंग संस्था की कंपनी अवफाल वेरिजे की कम्युनिकेशन डायरेक्टर (संचरण, निर्देशक) एना केरिन ग्रिपवेल ने बताया, स्वीडिश लोग प्रकृति को लेकर काफी सतर्क हैं। हम जानते हैं कि प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े मामलों के लिए क्या किया जाना चाहिए। हम लंबे समय से लोगों को कचरा बाहर ना फेंकने के लिए जागरूक करने के लिए काम कर रहे हैं जिससे कचरे को रिसाइकल और फिर से उपयोग में लाया जा सके। स्वीडन ने मजबूत रीसाइक्लिंग पॉलिसी (बीमा) बना रखी है। इसके तहत निजी कंपनियां (जनसमूह) कचरा निर्यात और जलाने का काम देखती हैं। इससे पैदा हुई ऊर्जा नेशनल (राष्ट्रीय) हीटिंग नेटवर्क (जाल तंत्र) में जाती है जिससे कड़ाके की ठंड के दिनों में घरो में बिजली पहुंचाई जाती है। स्वीडन अभी ब्रिटेन से कचरा मंगा रहा है। विदेश से कचरा मंगाने के सवाल पर ग्रिपवेल ने कहा, यह अस्थायी स्थिति है। यूरोपियन यूनियन (संघ) के देशों में कचरा स्थलों पर प्रतिबंध है। इसलिए वे हमें भेज देते हैं। अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें खुद रीसाइकल प्लांट (पौधा) बनाने होंगे। इस प्लांट के लिए डिस्ट्रिक्ट (विशिष्टता वाला क्षेत्र) हीटिंग या कूलिंग (शीतल) सिस्टम (प्रबंध) जरूरी होते हैं। इसके जिए इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी संरचना) चाहिए, जिसे बनाने में वक्ता लगता है। ब्रिटेन अभी 45 प्रतिशत कचरा रीसाइकल करता है। बाकी कचरा अपने खर्च पर स्वीडन भेज देता है।
  • स्वीडन में म्यूनिसिपलिटी (नगरपालिका) स्तर पर कचरा जमा करने का सिस्टम बनाया गया है। इसके तहत कचरा घर से रेसिडेंशियल ब्लॉक (अवरोध) में पहुंचता है। फिर अंडरग्राउंड (जमीन के अंदर) कंटनेर (डिब्बा, बोतल आदि पात्र), ऑटोमेट (व्यक्तियों दव्ारा किया जाने वाला कार्य मशीनों की सहायता से करना) वैक्यूम (खाली जगह) सिस्टम (प्रबंध) के जरिये रीसाइकल प्लांट में लाए जाते हैं। इससे ट्रांसपोर्शन (परिवहन) लागत बचती है। सड़क पर बदबू भी नहीं फेलती। स्वीडन ही नहीं पूरे यूरोपीय यूनियन ने कचरे की रीसाइक्लिंग का टारगेट (लक्ष्य) बनाया है। उसे 2020 तक 50 प्रतिशत और 2030 तक 65 प्रतिशत कचरा रीसाइकल करना है।
  • स्वीडन में महज 1 प्रतिशत कचरा फेंका जाता है कूड़ाघर में, 99 प्रतिशत कचरे की रीसाइक्लिंग कर बनाई जाती बिजली

वरदा तुफान:- चक्रवाती तूफान ’वरदा’ चेन्नई और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाके से टकराया। हवा की रफ्तार 120 किमी/ घंटा थी। यह चेन्नई में 50 साल में सबसे तेज तूफान है। तमिलनाडु और आंध्रपदेश के ज्यादातर इलाकों में सुबह से तेज बारिश होती रही, जो देर रात तक जारी थी। इससे जुड़े अलग-अलग हादसों में 10 लोगों की मौत हुई है। कई लोग घायल हुए है। हालांकि अभी दूरदराज इलाकों से जानकरी नहीं आई है। तिरूवल्लपुर और कांचीपुरम में भी ज्यादा असर नहीें हुआ। तफूान काफी कमजोर पड़ चुका है। पर इसमें करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। यह कर्नाटक होते हुए गोवा पहुंचकर खत्म हो जाएगा।

इस तूफान से बचने के लिए निम्न इंतजाम किए गए-

  • 2 दिसंबर को तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने तूफान की चेतावनी जारी की। तटवर्ती इलाकों मेे खास एहतियात बरतने को कहा।
  • पुलिस प्रशासन, नगर निगम, फायर ब्रिगेड (आग बुझाने वालों का दल) जैसी एजेंसियों (कार्यस्थानों) को तैयार रखा गया। पिछले तूफानों में जिन्होंने काम किया उनकी सेवाएं ली।
  • समुद्र से सटे निचले इलाकों से लोगों को निकाला। 296 राहत शिविर खोले गए। इनमें 17 हजार 432 लोगों को पहुंचाया गया।
  • तूफान से पहले संभावित क्षेत्रों में बिजली काट दी गई। सड़कों पर आवाजाही रोकी। मछुआरों को समुद्र में जाने नहीं दिया।
  • चैन्नई, तिरुवल्लुवर, कांचीपुरम, नेल्लोर, सुलुरपेटा, प्रकाशम, चितूर में एनडीआरएफ की 19 टीमें तैनात की गई, हर में 38 जवान रखे गए।
  • टीवी-रेडियों पर तूफान की जानकारी दी गई। घरों में जरूरी समान जमा करने और मोबाइल हमेशा चार्ज रखने को कहा।
  • सेना के 600 जवान, नेवी के 11 युद्धपोत, कोस्ट गार्ड के 4 बड़े व 6 पेट्रोलिंग जहाज, 4 डोरनियर, 2 चेतक एयरक्राफ्ट।
  • 100 से ज्यादा गोताखोर व डॉक्टरों की टीम। (चिकित्सकों का समूह) खाना, टेंट, कपड़े, कंबल और दवाइयों की खेप भेजी गई। रेस्क्यू और एयरड्रॉप के लिए नौसेना के विमान राजाली और देगा में तैनात रखे गए।

कैटेगरी-1 -यानी बेहद खतरनाक है वरदा-चक्रवाती तूफान ’वरदा’ को कैटेगरी-1 की श्रेणी में रखा गया है। यह चेन्नई में 50 सालों में आया सबसे तेज तूफान है। इससे पहले 28 नवंबर 1966 को आखिरी बार कैटेगरी-1 का तूफान आया था। 1994 में कैटेगरी-2 का तूफान चेन्नई तट से टकराया था।

वरदा से सबसे ज्यादा केले, पपीते और धान की फसल को नुकसान हुआ है।

देश में 3 सबसे खतरनाक तूफान

3 most dangerous storm in Country

Table showing the 3 most dangerous storm in Country

तूफान

साल

स्पीड (गति)

मौते

उड़ीसा

फरवरी 1999

260

10,000

हुदहुद

अक्टूबर 2014

215

124

फेलिन

अक्टूबर 2013

260

45

नामकरण- वरदा का नाम पाकिस्तान ने रखा है। इसका मतलब लाल गुलाब होता है। इससे पहले आए चक्रवाती तूफान का नाम ओमान ने ’हुदहुद’ रखा था। उससे पहले ’फेलिन’ नाम थाईलैंड का सुझाया हुआ था। अब तक चक्रवात के करीब 64 नाम सूचीबद्ध हो चुके हैं।

खतरा- चक्रवात को समुद्री सतह पर गर्मी व वाष्प से एनर्जी (ऊर्जा) मिलती है। जमीन पर आने के बाद वह कमजोर पड़ता है। इसलिए वरदा से कोई खतरा नहीं है। हां बारिश के कारण कुछ घटनाएं हो सकती हैं।

- Published/Last Modified on: January 10, 2017

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