वीजा विवाद (Visa Dispute - Essay in Hindi)

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प्रस्तावना: -कराची के साहित्य उत्सव में भाग लेने के लिए 18 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल पाकिस्तान जाना चाहते थे। लेकिन पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने भारत के प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर को छोड़कर अन्य सभी को वीजा जारी कर दिया। इस मामले पर विवाद होता देखकर हालांकि उन्होंने खेर को वीजा देने के लिए फोन भी किया लेकिन खेर ने विनम्रता के साथ इसे लौटा दिया। पाकिस्तान की ओर से ऐसा करने के पीछे क्या कारण है? भारत पाकिस्तानी कलाकारों को वीजा देने के मामले में जितनी उदारता बरतता है, पाकिस्तान के इतना संकुचित सोच रखने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? कलाकार दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में क्या भूमिका निभा सकते हैं? इसी विवाद के चलते मीडिया वालों ने कुछ सवाल अनुपम खेर जी से पूछे हैं।

प्रश्न-उत्तर: -मीडिया में आलोक मेहता ने अनुपम खेर से कई प्रश्न पूछें जो निम्न हैं-

प्रश्न- मेहता जी ने पूछा कि आपका क्या अनुमान है कि आपको पाकिस्तान क्यों नहीं आने दिया गया? पाकिस्तानी दूतावास की ओर से कहा जा रहा है कि आपने वीजा के लिए आवेदन ही नहीं किया, उनके इस बयान के बारे में आप क्या कहेंगे?

उत्तर-खेर जी ने कहा कि मैं इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगाना चाहता हूं लेकिन इतना जरूर दावे के साथ कह सकते है कि पाकिस्तान के उच्चायुक्त जो बात कह रहे हैं, वह असत्य है। हकीकत तो यह है कि कराची साहित्य उत्सव के लिए भारतीय आगंतुकों को वीजा के लिए आवेदन करना ही नहीं था। केवल पाकिस्तान के गृह मंत्रालय की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल जाने के बाद ही उच्चायुक्त को वीजा अनुमति जारी करने के लिए पासपोर्ट दिया जाना था। सच्चाई तो यह है पाकिस्तान जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के अन्य 17 लोगों में से एक ने भी वीजा के लिए आवेदन नहीं किया।

प्रश्न- आपने अपने ऑनलाइन जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने शायद केवल दो कारणों से ही आपको वीजा नहीं दिया, एक तो यह कि आप भारत में सहिष्णुता की महान परंपरा को पाकिस्तान में फैलाते और दूसरा कि आप पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क का खुलासा करने वाले थे, वे इस बात को लेकर डरे हुए हैं। क्या आप इस विषय का खुलासा करेंगे?

उत्तर- पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से मिल सकने वाले किसी कारण के अभाव में, मैं इस बारे में केवल अनुमान ही लगा सकता हूं। हां, यह जरूर है कि उनके पास किसी आतंकी नेटवर्क को खुलासा करने का कोई स्त्रोत नहीं है। वास्तव में तो खेर यह मानते है कि पाकिस्तान खुद आतंक का शिकार है। 2014 में जब पेशावर में स्कूली बच्चों की जघन्य हत्याएं हुई तो खेर ने आतंकियों के विरूद्ध एक खुला पत्र लिखा था जिसे आपके देश में काफी सराहा भी गया था।

प्रश्न- भारत और पाकिस्तान में कलाकारों के लिए खासतौर पर वीजा नीतियों पर पाबंदियां हैं, उनके बारे में आपके क्या विचार हैं? आप कितने अभिनतेओं को जानते हैं या आपने उनके नाम सुने हैं जो दोनों देशों में होने वाले कार्यक्रमों में वीजा समस्याओं के चलते शिरकत नहीं कर पाते?

उत्तर- मुझे लगता है कि कलाकार किसी भी क्षेत्र के क्यों न हों, किसी किस्म की वीजा पाबंदियां होनी ही नहीं चाहिए। इसके विपरीत खेर तो यह भी चाहते है कि दोनों देशों के पर्यटकों के लिए सरल वीजा नीति होनी चाहिए। खेर यह बात दृढ़ता के साथ मानते है कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच बेहतर उन्मुक्त संबंध होने चाहिए। वास्तव में इस तरह के संबंध दोनों के बीच विवादों को सुलझाने में सकारात्मक भूमिका निभाने में सहायक होंगे। मैं बहुत ही दुख के साथ यह बात कहना चाहता हूं कि इस तरह के मामले दोरतफा चलते हैं लेकिन पाकिस्तान की ओर से उचित प्रतिक्रिया नहीं होती। उदाहरण के तौर पर भारत ने पाकिस्तान के लिए व्यापार के मामले में काफी ढीली शर्तें ही रखी हैं लेकिन इसके विपरीत कई वर्षों पूर्व घोषणा किए जाने के बावजूद पाकिस्तान की ओर से भारत को अत्यधिक चाहत वाले देश का स्तर नहीं दिया गया।

प्रश्न- इन दिनों बहुत से अभिनेता जो भारत और पाकिस्तान में काम कर रहे हैं, उनका मानना है कि कला और राजनीति को अलग-अलग रखना चाहिए। आप इस मामले में कुछ जुदा रय रखते हैं। इस मामले में आप क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर- आदर्श रूप में कहा जा सकता है कि कला और राजनीति अलग-अलग बातें हैं लेकिन ऐसा शायद ही कभी हो पाता हो कि दोनों एक-दूसरे से न टकराते हों इस भेद को मैं और स्पष्ट करता हूं। मैं मानता हूं कि कलाकारों को दोनों देशों में कला प्रदर्शन की स्वतंत्रता होनी चाहिए लेकिन हमारे राजनीतिक रिश्ते ठीक नहीं हैं, उनमें विवाद की स्थिति है तो ऐसे में वातावरण उतना बेहतर नहीं रह पाता। इसी तरह आतंकी हमले जैसा पठानकोट में हुआ या 26/11 को मुंबई हमला था, पानी को गंदा कर देते हैं। इस तरह की घटनाएं कलाकारों और नागरिकों की एक दूसरें के देश में सुगम आवाजाही का बेहतर वातावरण नहीं बनने देतीं। इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहूंगा कि भारत पाकिस्तानी कलाकारों को अपने यहां आकार काम करने देने के मामले में वीजा अनुमति देने को लेकर काफी बड़ा दिल रखता है। कई स्टार अभिनेताओं ने भारत की फिल्मों में काम किया है और कई प्रसिद्ध उस्ताद जैसे गुलाम अली, मेंहदी हसन आदि ने तो भारतीय फिल्मों में अपनी आवाज भी दी है। हमारे देश में उनके बहुत से प्रशंसक भी हैं। हमने अदनान सामी को भारत की नागरिकता तक दी है और उन्होंने यहां अपना कैरियर बनाया है।

प्रश्न- हाल ही में आपने कहा कि आप सार्वजनिक रूप से भारत में खुद को हिंदू करॉहने में झिझकते हैं क्योंकि ऐसा कहने पर लोग आपको कट्‌टरपंथी विचारों का न कह दें। कई लोगों की नजर में यह आमिर खान के संदर्भ में आपके बयानों का यू-टर्न है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपने पूर्व में भारत को असहिष्णु बताने पर उनकी काफी आलोचना की थी। अब आपके क्या विचार हैं?

उत्तर-भारत में जब कोई खुद को हिंदू कहकर अपनी पहचान बताता है तो भारत में छद्म धर्मनिरपेक्षवादी इसके गलत अर्थ निकालते लगते हैं। ऐसे में अधिकतर बहुसंख्यक लोग खुद को अभिव्यक्त करते हुए बहुत ही संभलकर बात करते हैं। लेकिन, हमने मुस्लिमों के धार्मिक विश्वास को लेकर उनकी अभिव्यक्ति की कभी आलोचना नहीं की। यही नहीं हम तो हर स्थिति में उनके लिए सहायक ही होते है। हमारे सुपर स्टार मुस्लिम हैं। हमारे क्रिकेट कप्तान मुसलमान रहे हैं। हमारे दो राष्ट्रपति मुस्लिम थे। वायुसेना के प्रमुख मुस्लिम रहे हैं। यही नहीं हमारे उपराष्ट्रपति भी मुस्लिम ही हैं। लेकिन, मैं यह बात पूरी ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि मैं कभी किसी हिंदू को पाकिस्तान में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनते देख सकता हूं। जहां तक आमिर खान का मामला है, वे इन्क्रेडिबल इंडिया अभियान के ब्रांड एंबेसेडर रहे हैं, ऐसे में मुझे लगता है कि उन्हें बहुत सोच-समझकर बयान देना चाहिए। लेकिन, अब वे असहिष्णुता पर अपना बयान वापस ले चुके हैं।

प्रश्न- आप कराची आकर एक सत्र ’कुछ भी हो सकता है’ में बात करने वाले थे क्या आप बता सकेंगे कि आप आते तो अशोक चोपड़ा से इस सत्र में क्या बाते करते?

उत्तर- मैं अपने उद्देश्य ’कुछ भी हो सकता है’ पर सकरात्मकता के साथ बात करता। जब वन विभाग के एक विनम्र ईमानदार क्लर्क का बेटा सफल अभिनेता बन सकता है तो कुछ भी हो सकता है! मैं आशा और विश्वास पर बात करता। मैं दोनों देशों की सीमाओं के पास कला के आवागमन पर बात करता। साझी संस्कृति के कृत्रिम विभाजन पर बात करता। मैं यह भी बात करता कि हम कैसे अपना अतीत भुलाकर नया भविष्य लिख सकते हैं।

प्रश्न- यदि आपको भविष्य में पाकिस्तान आने का वीजा मिले तो क्या आपको पाकिस्तान आकर खुशी होगी?

उत्तर- इंशाअल्लाह, मैं हमेशा ही पाकिस्तान आने को तैयार हूं।

विवाद: - अनुपम खेर को हाल में मिले पद्य पुरस्कार पर भी विवाद उठा है सिने अभिनेता कादर खान की टिप्पणी थी कि अनुपम ने किया ही क्या है सिवाय मोदी की तारीफ के जो उन्हें यह पुरस्कार मिले।

अनुपम: - धन्यवाद श्रीमान अब्दुल बासित, मुझे कराची साहित्य उत्सव के लिए वीजा उपलब्ध कराने के संदर्भ में फोन पर बात करनें के लिए। मैं इस बात की सराहना करता हूं।

मेल-मिलाप: - कलाकार हो चाहें खिलाड़ी जब भारत-पाकिस्तान में आते-जाते है ंतो उनका एक -दूसरें देश में स्वागत होता आया है। एकाध अपवादों को इससे अलग रखा जा सकता है जिनके कारण कुछ ओर ही होंगे। अनुपम खेर का भारतीय सिनेमा को खासा योगदान हैं और एक कलाकार के रूप में उनका अलग ही स्थान हैं। ऐसे कराची साहित्य उत्सव में आमंत्रित अनुपम खेर को वीजा नहीं मिलना निश्चित ही दुर्भाग्य का विषय है। वह भी ऐसे मौके पर जब खेर का भारत सरकार ने पद्य पुरस्कार से सम्मानित किया है। ऐसे में उनको पहले वीजा देने में आनाकानी करना और बाद में हां कहना इसका प्रमाण हैं।

कारण: - पाकिस्तान के हुक्मरान वहां सक्रिय कट्‌टरपंथियों के दबाव में ऐसा कर रहे हैं। इस मामले अनुपम खेर तो केवल बहाना है। वहां के कट्‌टरपंथी पाक सरकार पर दबाव डालकर ऐसा माहौल जानबूझ कर बनाना चाहते हैं ताकि भारत में भी पाकिस्तान विरोधी माहौल और भड़के।

अनुपम खेर को वीजा नहीं दिए जाने को यूं तो पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली खान को भारत में हुई मुश्किलों से जोड़ कर देख सकते हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोलकता में तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केवल गुलाम अली को आमंत्रित कर सम्मानित किया बल्कि उनके कार्यक्रम में सहयोग भी किया। शिवसेना के विरोध के कारण गुलाम अली महाराष्ट्र में कार्यक्रम नहीं दे पाए थे। समर्थन व विरोध की हवा कोरी पाकिस्तान में ही चलती हो ऐसा नहीं। दरअसल कट्‌टरपंथी दोनों ओर हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों में आई खटास दूर हो इसलिए कलाकार व खिलाड़ी एक-दूसरें के यहां जाते रहे हैं।

उपसंहार: - जब दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कई मजबूत पहलू हैं तो ऐसे मुद्दे क्यों सामने आते हैं जिससे विवाद खड़ा हो। एक और तो हम अदनान सामी को भारत की नागरिकता प्रदान करते है दूसरी ओर खेर जैसे कलाकार को वीजा नहीं देकर पाकिस्तान ऐसे प्रयासों पर पानी फेरता दिखता है। इसलिए दोनो देशों के अपने यहां के कट्‌टरपंथियों पर अकुंश रखना होगा। लेकिन तब वीजा से जुड़ा यह विवाद ऐसे माहौल में ठीक नहीं है जब दोनों देशों के बीच रिश्तों मे सुधार के प्रयास होने लगे।ं इसलिए हमें दोनों देशों के बीच मधुर संबंध स्थापित करने के लिए निरंतर कोशिशे करनी चाहिए। ताकि यह प्रयास हमेशा के लिए बना रहे हैं।

- Published/Last Modified on: February 16, 2016