भाग-9 नागरिकता-त्रिस्तरीय पंचायत का गठन बलवन्त राय मेहता समिति (1957), बलवन्त राय मेहता समिति (1957), अशोक मेहता समिति (1977) (Part-9 Citizenship: Organization of three-tier panchayat, Balwant Rai Mehta Committee (1957), Ashok Mehta Committee (1977) ) for DRDO

Get top class preparation for competitive exams right from your home: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 160K)

त्रिस्तरीय पंचायत का गठन-

  • जिला पंचायत

  • खंड/क्षेत्र

  • ग्राम

बलवन्त राय मेहता समिति (1957):- सामुदायिक विकास कार्यक्रम और राष्ट्रीय प्रसार सेवा के असफल होने के बाद पंचायत राज व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 1957 में बलवन्त राय मेहता समिति (ग्रामोदव्ार समिति) का गठन किया गया इसकी अध्यक्षता बलवन्त राय मेहता ने की। इस समिति ने भारत में त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था लागू किया।

  • जिला पंचायत

  • खंड/क्षेत्र

  • ग्राम

  • इसमें यह भी सिफारिश की गई कि लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की मूल ईकाइ प्रखंड या समिति के स्तर पर होनी चाहिए।

  • मेहता समिति की सिफारिशों को 1 अप्रैल 1958 को लागू किया गया।

  • इस समिति दव्ारा सर्वप्रथम राजस्थान कि विधानसभा ने 2 सितंबर 1959 को पंचायती राज अधिनियम पारित किया।

  • इस अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज का उदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू घाटन किया गया।

अशोक मेहता समिति (1977):- बलवन्त राय मेहता समिति की कमियों को दूर करने के लिए 1977 में अशोक मेहता समिति का गठन किया गया।

  • इस समिति में 13 सदस्य थे

  • इस समिति ने 1978 में अपनी रिपोर्ट (विवरण) केन्द्र सरकार को सौंप दी जिसमें कुल 132 सिफारिशें की गई थी।

  • इस समिति के दव्ारा ग्राम पंचायत को खत्म करने की सिफारिश की गई परन्तु इसे अपर्याप्त मानकर नामंजूर कर दिया गया।

डी.पी.वी. के. राव. समिति (1885):- 1885 में डी.पी.वी. के. राव. की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करके उसे यह कार्य सौंपा गया कि वह ग्रामीण विकास तथा गरीबी को दूर करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था पर सिफारिश करें।

  • इस समिति ने विभिन्न स्तरों पर अनुसुचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति पर महिलाओं के लिए आरंक्षण कि भी सिफारिश की, लेकिन समिति की सिफारिश को अमान्य घोषित कर दिया गया।

पी.के थुगल समिति (1988):- 1988 में पी. थुगल समिति का गठन पंचायती संस्थानों पर विचार करने के लिये किया गया।

  • इस समिति ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि पंचायती राज्य संस्थाओं को संविधान में स्थान दिया जाना चाहिए।

प्चाांयती राजव्यवस्था का वर्णन भाग-9 व 11वीं अनुसुचि में है तथा इसमें कुल 29 विषय हैं।

जिन राज्यों में पंचायती राज व्यवस्था लागू नहीं की गई है।

  • दिल्ली

  • जम्मू कश्मीर

  • मेघालय

  • मिजोरम

  • नागालैंड

प्रश्न:- पंचायती राज व्यवस्था किस पर आधारित है?

उत्तर:- लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण पर

Developed by: