National Emblem of India, Part of the Constituent Assembly and some important articles

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4 भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem of India)

  • राष्ट्र ध्वज-संविधान सभा ने तिरंगा (राष्ट्रीय ध्वज) का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया। इसकी चौड़ाई तथा लंबाई का अनुपात 3:2 होता है। ध्वज में समान अनुपात वाली तीन पट्‌िटयाँ हैं, जो केसरिया, सफेद एवं हरे रंग की है। सफेद पट्‌टी के बीच नीले रंग का चक्र होता है, जिसमें 24 तीलियाँ बनी है। इसे सारनाथ के अशोक के सिंह स्तंभ पर बने चक्र से लिया गया है। राष्ट्रीय ध्वज का केसरिया रंग जागृति, शौर्य तथा त्याग का, सफेद रंग सत्य तथा पवित्रता का एवं हरा रंग जीवन समृद्धि का प्रतीक है।

    • भारतीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार सभी भारतीय आम नागरिक, निजी संस्थाओं एवं शिक्षण संस्थानों आदि को भी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शन का अधिकार है।

    • 23 जनवरी 2004 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने यह घोषणा की कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(अ)े अधीन राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों का मूल अधिकार है।

  • राजचिन्ह -भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के शीर्ष की अनुकृति को राजचिन्ह के रूप में स्वीकार किया। इस राजचिन्ह के मूल स्तंभ पर चार सिंह हैं इनके नीचे घंटे के आकार के पद्म के ऊपर एक चित्रवल्लरी में एक हाथी है। सिंह शीर्ष के नीचे पट्‌टी में उभरी हुई है, जिसमें दाई ओर एक साँड़ तथा बाई ओर एक घोड़ा है। फलक के नीचे देवनागरी लिपि में ’सत्यमेव जयते’ अंकित है, जो मुंडकोपनिषद् से लिया गया है।

  • राष्ट्रगान -संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को रविंद्रनाथ टैगोर दव्ारा रचित जन-गन-मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अंकित किया। जनवरी 1912 में टैगोर दव्ारा संपादित था। इसके गायन का निर्धारित समय 52 सेकंड है। यह गीत सर्वप्रथम 27 सितंबर 1911 को कांग्रेस के कलकता अधिवेशन में गाया गया था। रविंद्रनाथ टैगोर के गीत ’अमार सोनार बंगला’ बंगलादेश का राष्ट्रगान है।

  • राष्ट्रीय गीत-बंकिम चंद्र चटर्जी दव्ारा रचित ’वंदे मातरम्‌’ को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। इसे चटर्जी के उपन्यास आनंद मठ से लिया गया है। यह मूलत: संस्कृत में है। इस गीत को सर्वप्रथम कांग्रेस के कलकता अधिवेशन में 1896 में गाया गया था।

  • झंडा गीत- ’विजय विश्व तिरंगा प्यारा.......।’ इस गीत को श्याम लाल गुप्ता ने लिखा। इसे सर्वप्रथम 1925 के कानपुर कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया और 1938 के हरिपुरा अधिवेशन में इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया।

  • राष्ट्रीय पंचाग-भारत सरकार का पंचाग (कलैंडर) शक्‌ संवत्‌ (शुरूआत 78 ई.) पर आधारित हैं, जिसे भारत ने 22 मार्च 1957 को विभिन्न सरकारी उद्देश्यों के लिए अपनाया। राष्ट्रीय पंचाग का पहला महीना चैत है, जिसका पहला दिन 22 मार्च और अधिवर्ष 21 मार्च को पड़ता है।

    • राष्ट्रीय वाक्य- सत्यमेव जयते।

    • राष्ट्रीय पशु- बाघ (पैन्थरा टाइग्रिस लिन्नायस) है।

    • राष्ट्रीय पक्षी-मयूर (पावो क्रिस्टेसस) है।

    • राष्ट्रीय पुष्प-कमल (नेलाम्बो न्यूसिपेरा गार्टन) है।

    • राष्ट्रीय वृक्ष-बरगद (फइकस बंधालेंसिस) है।

    • राष्ट्रीय फल-आम (मेनिगिफेरा इंडिका)

  • राष्ट्रीय जलीय जीव- डाल्फिन है। सरकार ने 05 अक्टूबर 2009 को इसे राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया। इसकी ध्राणशक्ति तीव्र होती है, जिससे वह अपने शिकार का पता लगाती है।

  • राष्ट्रीय विरासत पशु -हाथी (घोषणा 2010)

5 संविधान सभा के भाग एवं कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Part of the Constituent Assembly and some important articles)

भाग-1 संघ और उसका राज्यक्षेत्र (अनु. 1 से 4)

  • अनु.-1 संघ का नाम और राज्य क्षेत्र।

  • अनु.-2-नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।

  • अनु.-3-नए राज्या का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन।

भाग-2 ( अनु.-5-11) नागरिकता

  • अनु.-5 संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता।

  • अनु.-8 भारत के बाहर रहने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता का अधिकार।

  • अनु.-9 -विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना।

  • अनु.-11-संसद दव्ारा नागरिकता के अधिकारों का विधि दव्ारा विनियमन किया जाना।

भाग-3 (अनु.-12 से 35) मूल अधिकार

भाग-4 ( अनु.-36 से 51) राज्य के नीति के निदेशक तत्व।

भाग-4 क ( अनु. 51 क) मूल कर्तव्य

भाग-5 (अनु. 52 से 151) संघ की शासन व्यवस्था (इस भाग में 5 अध्याय हैं)।

  • अनु. 53 संघ की कार्यपालिका संबंधी शक्ति राष्ट्रपति में निहित हैं।

  • अनु.-58 राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अहर्ताएं।

  • अनु.-59 राष्ट्रपति पद के लिए शर्तें

  • अनु. 60-राष्ट्रपति दव्ारा शपथ या प्रतिज्ञापन।

  • अनु. 61 राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया।

  • अनु. 63-भारत का उपराष्ट्रपति

  • अनु. 64 उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना।

  • अनु. 66 उपराष्ट्रपति का निर्वाचन

  • अनु. 70 उपराष्ट्रपति दव्ारा अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वाह।

  • अनु. 72-क्षमा आदि की (कुछ मामलों में दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण की राष्ट्रपति की शक्ति।)

  • अनु. 73-संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।

  • अनु. 74-राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान।

  • अनु. 76-राष्ट्रपति दव्ारा भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति।

  • अनु. 78-राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य।

  • अनु. 79-संसद का गठन।

  • अनु. 80-और 81-क्रमश: राज्यसभा एवं लोकसभा की संरचना।

  • अनु. 82-प्रत्येक जनगणना के पश्चात्‌ पुन: समायोजन।

  • अनु. 84-ससंद सदस्य की अर्हता।

  • अनु. 85 संसद के सत्र का सत्रावासन और विघटन।

  • अनु. 86-सदनों में अभिभाषण का और संदेश भेजने का राष्ट्रपति का अधिकार।

  • अनु. 93-लोकसभा का अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष।

  • अनु. 98 -संसद का सचिवालय।

  • अनु. 99-सदस्यों दव्ारा शपथ या प्रतिज्ञान।

  • अनु. 100-सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति।

  • अनु. 108-दोनों सदनों में मतदान, गतिरोध के अवसर पर संयुक्त बैठक का प्रावधान।

  • अनु. 109-धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया।

  • अनु. 110-धन विधेयक की परिभाषा।

  • अनु. 112-प्रत्येक वित्तीय वर्ष हेतु राष्ट्रपति दव्ारा संसद के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) पेश किया जाएगा।

  • अनु. 114-विनियोग विधेयक।

  • अनु. 116-लेखानुदान, प्रत्यानुदान और अपवादानुदान।

  • अनु. 117 -वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध।

  • अनु. 120-संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा।

  • अनु. 122-न्यायालयों दव्ारा संसद के कार्यवाहियों की जांच न किया जाना।

  • अनु. 123-संसद के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति।

  • अनु. 124-उच्चतम न्यायालय की स्थापना एवं गठन।

  • अनु. 129- उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना।

  • अनु. 131- उच्चतम न्यायालय का आरंभिक अधिकारिता।

  • अनु. 139-कुछ रिट निकालने की शक्तियों का उच्चतम न्यायालयों को प्रदत्त किया जाना।

  • अनु. 143-उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति।

  • अनु. 147-निवार्चन

  • अनु. 148-भारत का नियंत्रक महालेखापरिक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति दव्ारा।

  • अनु. 150-संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्रारूप।

भाग 6 ( अनु. 152 से 237) राज्य की शासन व्यवस्था संबंधी उपबंध।

  • अनु. 153-राज्यों का राज्यपाल।

  • अनु. 155-राज्यपाल की नियुक्ति।

  • अनु. 161-क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति।

  • अनु. 162-राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।

  • अनु. 163-राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद।

  • अनु. 165-राज्य का महाधिवक्ता।

  • अनु. 166-राज्य के सरकार के कार्य का संचालन।

  • अनु. 167-राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य।

  • अनु. 169-राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन या सृजन।

  • अनु. 174-राज्य विधान मंडल के सत्र, सत्रावासन और विघटन।

  • अनु. 187-राज्य के विधान मंडलों का सचिवालय।

  • अनु. 199-धन विधेयक की परिभाषा।

  • अनु. 201-राज्यपाल दव्ारा विचार के लिए आरक्षित विधेयक।

  • अनु. 202-राज्य में राज्यपाल दव्ारा वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) पेश करना।

  • अनु. 210-विधानमंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा।

  • अनु. 211-विधानमंडल में चर्चा पर निर्बन्धन।

  • अनु. 213-विधानमंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापति करने की राज्यपाल की शक्ति।

  • अनु. 214-राज्यों के लिए उच्च न्यायालय।

  • अनु. 215-उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना।

  • अनु. 222-किसी न्यायालय का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में अंतरण।

  • अनु. 226-मूल अधिकारों की रक्षा के लिए कुछ रिट निकालने की उच्च न्यायालय की शक्ति।

  • अनु. 231-दो या दो से अधिक राज्यों के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था।

  • अनु. 235-उच्च न्यायालय का अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण।

  • अनु. 239-संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन राष्ट्रपति दव्ारा होगा।

भाग 9-( अनु. 243 एवं 243 क से 243 ण तक) पंचायतों के संबंध में प्रावधान।

भाग 9 क- ( अनु. 243 ’त’ से 243 यछ तक) नगरपालिका के संबंध में प्रावधान।

भाग 10 ( अनु. 244 एवं 244 ’क’) अनुसूचति जाति और जनजाति क्षेत्र।

भाग 11 ( अनु. 245-263) एवं राज्यों के बीच संबंध।

  • अनु. 245-संसद दव्ारा और राज्यों के विधान मंडलों दव्ारा बनाई गई विधियों का विस्तार।

  • अनु. 248-अवशिष्ट विधायी शक्तियां संसद में निहित होती हैं।

  • अनु. 249-राज्य सूची के विषय में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद की शक्ति।

  • अनु. 253-राज्यों में अंतरराष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान।

  • अनु. 262-अंतरराज्यीय नदियों या नदी -दूनों के जल संबंधी विवादों का न्याय निर्णयन।

  • अनु. 263-अंतरराज्यीय परिषद के संबंध में उपबंध।

भाग 12-( अनु. 264-300 ’क’) वित्त संपत्ति, संविदाएं और वाद

  • अनु. 265-विधि के प्राधिकार के बिना करों का अध्यारोपण न किया जाना।

  • अनु. 266-भारत और राज्यों की संचित निधियां और लोक लेखा।

  • अनु. 267-संसद आकस्मिक निधि स्थापित कर सकती है।

  • अनु. 270-संघ दव्ारा उदगृहीत और संगृहीत तथा संघ और राज्यों के बीच वितरित किए जाने वाले कर।

  • अनु. 269-संघ दव्ारा उदगृहीत और संगृहीत किन्तु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर।

  • अनु. 271-कुछ शुल्कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार।

  • अनु. 275-केन्द्र दव्ारा राज्यों को सहायक अनुदान दिए जाने का प्रावधान।

  • अनु. 276-वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर।

  • अनु. 280-वित्त आयोग।

  • अनु. 281-वित्त आयोग की सिफारिशें।

  • अनु. 280-कुछ व्ययों और पेंशनों के संबंध में समायोजन।

  • अनु. 287-विद्युत पर करों से छूट।

  • अनु. 292-भारत सरकार दव्ारा उधार लेना।

  • अनु. 293-राज्यों दव्ारा उधार लेना।

  • अनु. 300 (क)-राज्य विधि के प्राधिकार के बिना व्यक्तियों को संपत्ति से वंचित नहीं कर सकता।

  • अनु. 301-व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता।

  • अनु. 303-व्यापार और वाणिज्य के संबंध में संघ और राज्यों की विद्यायी शक्तियों पर निर्बधन।

  • अनु. 304-राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बधन।

भाग 13-( अनु. 301 से 307) भारत के क्षेत्र के भीतर व्यापार वाणिज्य और समागम का उल्लेख।

भाग 14 ( अनु. 308 से 307) संघ एवं राज्यों के अधीन लोक सेवाएं।

  • अनु. 312-राज्यसभा अखिल भारतीय सेवाओं के स्थापना की अनुशंसा विशेष बहुमत दव्ारा कर सकती है।

  • अनु. 315-संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग की स्थापना।

भाग 14 क-( अनु. 323 क एवं 323 ख) अधिकरण।

अनु. 323 क-प्रशासनिक अधिकरण।

भाग 15-( अनु. 324 से 329) निर्वाचन आयोग एवं निर्वाचन से संबंधित अन्य प्रावधान।

  • अनु. 324-निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना।

  • अनु. 329-निर्वाचन संंबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्णन।

  • अनु. 326-लोकसभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का व्यस्क मताधिकार के आधार पर होना।

भाग 16-( अनु. 330 से 342) कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध।

  • अनु. 330- लोकसभा में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण। लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व।

  • अनु. 331- लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व।

  • अनु. 332-राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण।

  • अनु. 333-विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व।

  • अनु. 335-अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए विभिन्न सेवाओं में पदों पर आरक्षण का प्रावधान।

  • अनु. 340-पिछड़ें वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति।

भाग 17-( अनु. 343 से 351) राज भाषा।

  • अनु. 343 संघ की राज भाषा देवनागरी लिपि में लिखी गई हिन्दी होगी।

  • अनु. 347-किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग दव्ारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध।

  • अनु. 350 क- प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देना।

  • अनु. 351-हिन्दी भाषा के विकास के लिए निर्देश।

भाग 18-( अनु. 352 से 360) आपात उपबंध।

  • अनु. 352-यदि किसी भाग की सुरक्षा, युद्ध, बाह्य आक्रमण या सैन्य विद्रोह से हो तो राष्ट्रपति आपात की घोषणा करता है।

  • अनु. 356-राज्यों में सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दिशा में वहां राष्ट्रपति शासन लागू होता है।

  • अनु. 360-वित्तीय आपात के बारे में उपबंध।

भाग 19-( अनु. 361 से 367) राष्ट्रपति, राज्यपालों और राजप्रमुखों के संरक्षण, संसद और राज्य विधानमंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण आदि के संबध में प्रावधान (प्रकीर्ण)

  • अनु. 361-राष्ट्रपति, राज्यपालों और राज प्रमुखों का संरक्षण।

  • अनु. 363-कुछ संधियों, करारों आदि से उत्पन्न विवादों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्णन।

  • अनु. 364-महापत्तनों और विमान क्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध।

भाग 20 -( अनु. 368) संविधान संशोधन।

अनु. 368-संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया।

भाग 21 ( अनु.369 से 392) अस्थायी संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध।

  • अनु. 370-जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध।

  • अनु. 373-निवारक निरोध में रखे गये व्यक्तियों के संबंध में कुछ दशाओं में आदेश करने की राष्ट्रपति की शक्ति।

  • अनु. 374-पेफडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और पेफडरल न्यायालय में या सपरिषद हिज मेजेस्टी के समक्ष लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध।

भाग 22-( अनु. 393 से 395) संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ आदि के संबंध में प्रावधान।

अनु. 394 क- राष्ट्रपति इस संविधान का विशेष उपबंध के तहत हिन्दी में अनुवाद करवायेगे।

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