नाभिकीय ऊजा (Nuclear power) for GIC

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आंध्रप्रदेश: देश का परमाणु ऊर्जा हब

  • आंध्र प्रदेश में अमेरिका और रूस की साझेदारी में हजारों मेगावाट क्षमता के छह परमाणु संयंत्रों को स्थापित किए जाने की संभावना है।

  • यदि रूस, अमेरिका और एनपीसीआईएल के विचाराधीन सभी परियोजनाओं का क्रियान्वयन हो जाए तो आंध्र प्रदेश में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (NPPs) की कुल क्षमता, मोदी सरकार के 2031 तक 63,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन के लक्ष्य से 30,000 मेगावाट अधिक हो जाएगी।

  • तोशिबा-वेस्टिंगहाउस के ’अमेरिकन पार्टिसिपेशन’ (भाग लेना) योजना के तहत स्थापित किये जाने वाले 1,100 मेगावाट के 6 AP1000 रिएक्टरों (परमाणु भटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू ठी) को भूमि अधिग्रहण के दौरान होने वाले ”किसानों के कड़े विरोध प्रदर्शन” के कारण हटाकर अब आंध्र प्रदेश ले जाया जा सकता है। पहले गुजरात के मीठीवर्दी में इन्हें स्थापित किये जाने की योजना थी।

  • राज्य सरकार ने अपना न्यूक्लियर (नाभिकीय) पार्क कोव्वाड़ा में स्थापित करने की योजना बनाई है, जहां एक अन्य अमेरिकी कंपनी (संघ) जीई हिताची को भी 1594 मेगावाट क्षमता के 6 इकोनॉमिक (अर्थशास्त्र) सिम्प्लिफायिड (सरलीकृत) बॉयल्ड (उबल हुआ) वाटर (पानी) रिएक्टर्स (परमाणु भटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू ठी) (ESBWRs) स्थापित करने के लिए भूमि आवंटित की गयी थी परन्तु यह परियोजना अत्यंत धीमी गति से चल रही है।

  • रूसी स्वामित्व वाली कंपनी भी आंध्र प्रदेश में छह रिएक्टरों के अपने अगले चरण का निर्माण करेगी। छह रूसी रिएक्टरों के अगले सेट (वर्ग) के लिए नेल्लोर जिले में कवाली नामक स्थान प्रस्तावित है, जिसकी घोषणा अक्टूबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान की जा सकती है।

  • प्ाश्चम बंगाल के हरिपुर में प्रस्तावित एक अन्य रूसी परियोजना, 1000 मेगावाट के 6 ’वीवीईआर’ (वाटर-वाटर एनर्जी (पानी-पानी ऊर्जा)) रिएक्टर के निर्माण को भी स्थानीय विरोध प्रदर्शनों के कारण आंध्र प्रदेश स्थानांतरित किया जा सकता है।

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