Indian Geography MCQs in Hindi Part 6 with Answers

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1 यह जेट स्ट्रीम (धारा) भारतीय मानसून के साथ जुड़ी हुई है और ग्रीष्म ऋतु में मानसून की शुरूआत के साथ ही इसकी दिशा बदल जाती है। यह मेडागास्कर के पास स्थायी उच्च दाब को सशक्त करती है और दक्षिण-पश्चिम मानसून को अधिक गति और तीव्रता से भारत की तरफ लाने में सहायता करती है।

उपर्युक्त विश्लेषण निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं?

अ) उष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम (धारा)

ब) उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (धारा)

स) अफ्रीका जेट स्ट्रीम (धारा)

द) सोमाली जेट स्ट्रीम (धारा)

उत्तर : (द)

व्याख्या:

  • सोमाली जेट स्ट्रीम भारत की ओर आने वाले दशिण पश्चिम मानसून को बल प्रदान करती है। यह मानसून केन्या, सोमालिया और साहेल प्रदेश से होकर बहती है। केन्या तट पर आने से पहले यह धारा मॉरीशस और मेडागास्कर से भी गुजरती है।

  • सोमाली जेट स्ट्रीम की उल्लेखनीय विशेषताओं में गर्मी के समय में मानसून के आगमन के साथ ही यह विपरीत दिशा में प्रवाहित होने लगती है। सर्दी के समय यह धारा अरब के तट से पूर्वी अफ्रीका की तटरेखा के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है, जबकि गर्मी में यह दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है।

2 पश्चिमी विक्षोभ के परिणाम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ यह सर्दियों में रबी की फसल के लिये लाभदायक होता है।

  • यह हिमालय के क्षेत्र में भारी बर्फबारी के लिये ज़िम्मेदार है।

  • यह उत्तरी भारत के मैदानों में शीत लहर के लिये उत्तरदायी है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1 और 2

ब) केवल 3

स) केवल 2 और 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर : (द)

व्याख्या:

  • ये चक्रवात पूर्वी भूमध्यसागर पर उत्पन्न होते हैं और पूर्व की ओर चलते हुए पश्चिमी एशिया, ईरान-अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान को पार करके भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में पहुँचते हैं।

  • ये क्षीण शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ वर्षा करते हैं। यह शीतकालीन वर्षा भारत में रबी की फसल के लिये उपयोगी होती है। यह हिमाचल के क्षेत्र में भारी बर्फबारी के लिये ज़िम्मेदार है। उत्तरी भारत के मैदानों में शीत लहर के लिये उत्तरदायी है।

3 पवनों का मौसम के अनुसार उत्क्रमण किस प्रकार की जलवायु की विशेष अभिलक्षण है?

अ) मानसूनी जलवायु

ब) ध्रुवीय जलवायु

स) भूमध्यसागरीय जलवायु

द) भूमध्यरेखीय जलवायु

उत्तर : (अ)

व्याख्या:

मानसूनी जलवायु विषुवत रेखा से दोनों ही दिशा में 5 डिग्री (तापमान) से 10 डिग्री (तापमान) अक्षांशों के बीच कुछ क्षेत्रों में व्यापारिक पवन पेटी वाले क्षेत्रों में पाई जाती है। इसी पवन पेटी में मौसम के अनुसार खिसकाव होता है जिसके कारण मानसूनी जलवायु की उत्पत्ति होती है। इसके अंतर्गत छ: मास तक पवनें सागर से स्थल की ओर और पुन: छ: मास तक स्थल से सागर की ओर चलती हैं।

4 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर मानसून की अवधि बढ़ती है।

उत्तरी भारत के मैदानों में वार्षिक वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न तो 2

उत्तर : (ब)

व्याख्या:

  • कथन 1 असत्य है। दक्षिणी भारत से उत्तरी भारत की ओर मानसून की अवधि घटती है।

  • कथन 2 सत्य है। उत्तरी भारत के मैदानों में वार्षिक वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती है। क्योंकि उत्तर के मैदान में मानसून का प्रवाह पश्चिम बंगाल से हिमाचल के समानांतर पश्चिम की ओर होता है। अपने प्रवेश के क्रम में पहले आने वाले स्थानों पर भारी मात्रा में वर्षा करती है तथा आगे बढ़ते हुए इनकी आर्द्रता में हृास होने लगता है। परिणामस्वरूप पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए मानसूनी पवनों से वर्षा में कमी होने लगती है।

5 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ पूर्वी जेट प्रवाह उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को भारत में लाता है।

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात के मार्ग भारत में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न तो 2

उत्तर : (स)

व्याख्या: उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।

पूर्वी जेट प्रवाह उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को भारत में लाता है। ये चक्रवात भारतीय उपमहादव्ीप में वर्षा के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उल्लेखनीय है कि उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के मार्ग में सर्वाधिक वर्षा वाले भाग हैं। इन चक्रवात की बारंबारता, दिशा, गहनता एवं प्रवाह का प्रभाव लंबे दौर में भारत की ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा के प्रतिरूप निर्धारण पर पड़ता है।

6 पूर्व-मानसून वर्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में यह आम्र वर्षा कहलाती है।

  • असम और पश्चिम बंगाल में चलने वाली विनाशकारी पवनों को काल बैसाखी कहा जाता है।

  • फूलों वाली बौछार केरल व इसके निकटवर्ती क्षेत्र में होती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1 और 2

ब) केवल 2

स) केवल 2 और 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर : (स)

व्याख्या:

  • भारत में ग्रीष्म ऋतु में मानसून से पूर्व स्थानीय तूफान आते हैं जिन्हें अलग-अलग प्रदेशों में भिन्न नामों से पुकारा जाता है।

  • केेरल व तटीय कर्नाटक में पूर्व-मानसून वर्षा को आम्र वर्षा कहा जाता है, न कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में। यह वर्षा आमों को जल्दी पकाने में सहायक होती है। अत: कथन 1 गलत है।

  • असम और पश्चिम बंगाल में बैसाख के महीने में शाम को चलने वाली पवने भयंकर व विनाशकारी होती है। इन पवनों को काल बैसाखी कहा जाता है। इन्हें बैशाख के महीने में आने वाली तबाही भी कहा जाता है। असम में इन्हें ’बारदोली छीड़ा’ कहा जाता है। अत: कथन 2 सही है। केरल व निटकवर्ती कहवा उत्पादक क्षेत्रों में पूर्व-मानसून वर्षा से कहवा के फूल खिलने के कारण इस वर्षा को फूलों वाली वर्षा या फूलों वाली बौछार (चेरी ब्लासम) कहा जाता है। अत: कथन 3 सही है।

7 वर्षा ऋतु में तमिलनाडु तट के शुष्क रहने के कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ यह मानसूनी पवनों के सामानांतर पड़ता है।

यह वृष्टि छाया क्षेत्र में स्थित है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (स)

व्याख्या: उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • तमिलनाडु तट बंगाल की ओर बढ़ने वाली मानसून पवनों के सामानांतर पड़ता है। अत: ये पवनें तमिलनाडु तट के सामानांतर गुजरते हुए पश्चिमी बंगाल एवं बांग्लादेश में दक्षिण व दक्षिण-पूर्वी दिशा से प्रवेश करती हैं।

  • तमिलनाडु दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा के वृष्टि छाया क्षेत्र में स्थित हैं। अरब सागर की मानसून पवनें पश्चिमी घाट की पश्चिमी ढलानों पर 400 से.मी. तक वर्षा करती हैं जबकि पश्चिमी घाट के पूर्व में नाममात्र की वर्षा होती है।

8 कोपेन जलवायु वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ कोपेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार अर्द्ध-शुष्क मरुस्थल एस तथा मरूस्थल डब्ल्यू कहलाता है।

सीडब्ल्यूजी प्रकार की जलवायु गंगा के मैदान, पूर्वी राजस्थान और उत्तर-पूर्वी भारत में पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (स)

व्याख्या: उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • कोपेन ने अपने जलवायु वर्गीकरण का आधार तापमान तथा वर्षण के मासिक मानों को बनाया है।

  • कोपेन ने अंग्रेजी के बड़े वर्णों में एस को अर्द्ध मरुस्थल के लिये और डब्लयू को मरूथल के लिए प्रयोग किया है। इसी प्रकार उप-विभागों को व्यक्त करने के लिये छोटे वर्णो का प्रयोग किया है। (जैसे एफ, एम, डब्ल्यू, एच, सी और जी)।

  • कोपेन के अनुसार भारत को आठ जलवायु प्रदेशों में बांटा जा सकता है। इसमें से सीडब्ल्यू शुष्क शीत ऋतु वाला मानसून प्रकार है। यह मानसून प्रकार गंगा के मैदान, पूर्वी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश, उत्तर-पूर्वी भारत का अधिकतर प्रदेश आता है।

9 निम्नलिखित में से कौन -से कारक भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों में सम्मिलित हैं?

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ अक्षांश

  • जल और और स्थल का वितरण

  • समुद्र तट से दूरी

  • समुद्र तल से उँचाई

  • उच्चावच

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिये।

अ) केवल 1, 2 और 3

ब) केवल 2, 3 और 4

स) केवल 4 और 5

द) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर : (द)

व्याख्या: भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-

अ) स्थिति तथा उच्चावन संबंधी कारक

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ अक्षांश

  • जल और और स्थल का वितरण

  • समुद्र तट से दूरी

  • समुद्र तल से उँचाई

  • उच्चावच

ब) वायुदाब एवं पवन संबंधी कारक

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ वायुदाब एवं पवनों का धरातल पर वितरण।

  • भूमंडलीय मौसम को नियंत्रित करने वालें कारकों एवं विभिन्न वायु संहितयों एवं जेट प्रवाह के अंतर्वाह दव्ारा उत्पन्न ऊपरी वायुसंचरण।

  • शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभों तथा दक्षिण-पश्चिमी मानसून काल में उष्ण कटिबंधीय अवदाबों के भारत में अंतर्वहन के कारण उत्पन्न वर्षा की अनुकुल दशाएँ।

10 भारत की जलवायु के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ मानसूनी ऋतु में पश्चिमी घाट से लगा दक्षिणी पठार पवनाभिमुखी स्थित के कारण बहुत अधिक वर्षा प्राप्त करता है।

कर्क रेखा के उत्तर में स्थित क्षेत्र में भूमध्य रेखा से दूर होने के कारण उच्च दैनिक और वार्षिक तापांतर के साथ विषम जलवायु पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (ब)

व्याख्या:

  • काल में पश्चिमी घाट और असम के पवनाभिमुखी ढाल अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं, जबकि इसी समय पश्चिमी घाट के साथ लगा दक्षिणी पठार पवनाविमुखी स्थिति मानसून के कारण कम वर्षा प्राप्त करता है। अत कथन 1 गलत है।

  • देश के मध्य भाग से गुजरने वाली कर्क रेखा के उत्तर स्थित भाग शीतोष्ण कटिबंध में और दक्षिण में स्थित भाग उष्ण कटिबंध में पड़ता है। उष्ण कटिबंध के भूमध्य रेखा से अधिक निकट होने के कारण वहाँ पूरे वर्ष उच्च तापमान तथा कम दैनिक और वार्षिक तापांतर का अनुभव होता है। जबकि कर्क रेखा के उत्तर में स्थित क्षेत्र (शीतोष्ण कटिबंध) में भूमध्य रेखा से दूर होने के कारण उच्च दैनिक और वार्षिक तापांतर के साथ विषम जलवायु पाई जाती है। अत: कथन 2 सही है।