कनियन कूथु (Kaniyan Koothu – Culture)

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• कनियन कूथु तमिलनाडु में मंदिर त्योहारों के अवसर पर प्रदर्शित की जाने वाली एक पारंपरिक कला है। जिसमें केवल पुरुष भाग लेते हैं।

• कनियन कूथु नाम वस्तुत: इसके कलाकारों के समुदाय कनियन से लिया गया है। कनियन एक अनुसूचित जनजाति है।

• कनियन कूथु कम से कम 300 वर्ष पुरानी कला है एवं 17 वीं शताब्दी से इसके संकेत मिलते हैं।

वाद्य यंत्र

• सामान्यत: नृत्य मंडली में छ: सदस्य होते हैं।

• वाद्य यंत्र: मगुदम या फ्रेम (ढांचा) ड्रम मुख्य वाद्य यंत्र है। इसमें वृत्ताकार फ्रेम पर नए चमड़े को इमली के बीज से बने गोंद से चिपकाकर स्थायित्व दिया जाता है।

• मुख्य गायक अन्नावी कहलाता है जो मंडली का नेतृत्व भी करता है।

• यह कला केवल मनोरंजन के लिए नहीं है बल्कि इसका अत्यधिक धार्मिक महत्व भी है।

• नृत्य मंडली कभी भी विवाह, अंतिम संस्कार या घरों में होने वाले समारोहों में इस नृत्य का प्रदर्शन नहीं करती है।

• इसके कलाकार कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं करते हैं। गायक अपने पिता को सुनकर ही गीत और कहानियां सीख लेते हैं।

• कनियन कूथु में पौराणिक कहानियों जैसे-मार्कंडेय और हरिश्चंद्र पुराण और स्थानीय देवताओं के अतिरिक्त रामायण तथा महाभारत की कथाओं का प्रदर्शन किया जाता है।

इतिहास

• इस कला का सर्वाधिक स्पष्ट संदर्भ मुक्कूदारपल्लू (नायक कालीन तमिल कविता) में है।

• किन्तु इस कला का वर्तमान स्वरूप वस्तुत: स्टेज परफॉर्मेंस (मंच प्रदर्शन) के समरूप है। तमिल नाटक से प्रभावित कला का यह मंचीय स्वरूव संभवत: 80 वर्ष पूर्व विकसित हुआ।

कनियन जनजाति

• कनियन तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में रहने वाला एक आदिवासी समुदाय है।

• इनकी आबादी 750 से भी कम है और वर्तमान में केवल लगभग 200 लोग ही इस कला का प्रदर्शन करते हैं।

• सामान्यत: ये अशिक्षित और गरीब हैं।