कर्नाटक में मिले कापालियों से संबंधित दुर्लभ शिलालेख (Rare Inscriptions Related To Kaplio In Karnataka – Culture)

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• रायचूर, कर्नाटक में कापालिकों से संबंधित लगभग हजार वर्ष पुराने शिलालेख पाए गए है।

• शिलालेख दिनांकित नहीं हैं, लेकिन लेख की प्रकृति के आधार पर दिनांक का अनुमान लगाया गया है।

• कापालिक पंरपरा भारत की एक गैर-पौराणिक तांत्रिक शैव परंपरा है।

• कपालिक भैरव के भक्त होते हैं। भैरव, भगवान शिव की ही एक रूप है। वे एक रहस्यमयी पंथ के अनुयायी थे जिसमें संभवत: मानव बलि का प्रचलन था।

• वे मानव खोपड़ी युक्त दंड धारण करते थे इसलिए उन्हें कापालिक या खोपड़ी धारण करने वाला व्यक्ति कहा जाता है।

• ये शिलालेख एक ’कंकाल गोरव’ को भी संदर्भित करते है जिसने ’सोम सिद्धांत’ या कापालिक सिद्धांत पर निपुणता प्राप्त की थी।

महत्व

• यह प्रथम शिलालेख है जो दक्षिण भारत और विशेष रूप से कनार्टक में कापालिकों की उपस्थिति पर प्रकाश डालता है।

• यद्यपि उत्तर भारत में पाए गए कुछ शिलालेखों में कापालिकों के संदर्भ में पाए गए हैं किन्तु उनकी उपस्थिति के संबंध में कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं था।

• यह इस अत्यंत रहस्यमयी पंथ के संबंध में आगे किए जाने वाले अध्ययन में सहयोग करेगा क्योंकि इसके संबंध में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।