पंथी नृत्य (छत्तीसगढ़) फुलकारी (Fabled Dance Flowering – Culture)

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• यह नृत्य शैली सतनामी समुदाय में प्रचलित है। इसका प्रदर्शन अत्यंत भावपूर्ण ढंग से मधुर संगीत की धुनों पर किया जाता है।

• यह मुख्य रूप से पुरुष नर्तकों दव्ारा संपन्न किया जाता है। इस नृत्य के प्रदर्शन हेतु शरीर के अधिक लचीलेपन तथा शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है क्योंकि इस नृत्य में अनेक चुनौतीपूर्ण मुद्राएँ सम्मिलित होती हैं।

• कलाकार इस अवसर के लिए विशेष रूप से स्थापित किये गए एक जैत खंब के चारों ओर नृत्य करते हैं। इस अवसर पर गाया जाने वाला गीत उनके आध्यात्मिक प्रमुख का गुणगान करते हुए कबीर, दादू आदि के दव्ारा प्रतिपादित निर्वाण संबंधी दर्शन को व्यक्त करता है।

• इस नृत्य में मृदंग, झांझ औैर ढोल जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है।

फुलकारी (Flowering – Culture)

• इस कला का प्रभाव 15वीं शताब्दी से मिलता है।

• यह शिल्प का एक रूप है जिसमें शॉल (दुशाला) और दुपट्टे पर सरल और बिखरी हुई डिजाइन (रूपरेखा) में कढ़ाई की जाती है।

• जहां डिजाइन पर बहुत बारीक काम किया गया हो और पूरे वस्त्र पर कढ़ाई की गयी हो, वहां इसे बाग (फूलों का बगीचा) कहा जाता है।

• इसमें प्रयुक्त सिल्क (रेशम) के धागे को पट कहा जाता है।

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