ग्गाां संस्कृति यात्रा पंडित दीन दयाल उपाध्याय की स्वर्ण जयंती (Ganga Culture Tour Golden Jubilee of Pandit Deendayal Upadhyaya – Culture)

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• यह एक उत्सव है जिसका आयोजन फरवरी-मार्च में गंगासागर से गंगोत्री तक किया जाएगा।

• गंगा संस्कृति यात्रा का उद्देश्य गंगा नदी की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ गंगा नदी को सुरक्षित रखने और पुनर्जीवित करने के प्रति आम लोगों में जागरूकता का संदेश फैलाना है।

• गंगा संस्कृति यात्रा में सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके मद्देनजर यात्रा को विभिन्न भागों में बांटा गया है और इसका केंद्र बिन्दु वाराणसी होगा।

• यात्रा के दौरान कलात्मक क्रियाकलापों और गंगा की सांस्कृतिक विरासत पर सर्वेक्षण और दस्तावेजों का श्रृंखला के प्रारंभ होने पर विमोचन किया जाएगा।

• समारोह का मुख्य आकर्षण गंगा से जुड़ी विभिन्न कलात्मक क्रियाकलापों का प्रदर्शन होगा। इसके अंतर्गत पारंपरिक गीत, पारंपरिक नृत्य, पारंपरिक रंगमंच, वृत्तचित्र और फिल्मों का प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, कवि सम्मेलन, फोटो (छायाचित्र) प्रदर्शनी, फिल्म (चलचित्र) प्रदर्शन, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं, संगोष्ठी और पोस्टर (विज्ञापनों) अभियानों का आयोजन किया जाएगा।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय की स्वर्ण जयंती (Golden Jubilee of Pandit Deendayal Upadhyaya – Culture)

• सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के अग्रवर्ती भारतीय जनसंघ के नेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी समारोह के लिए 100 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

• उन्हें अपने ’एकात्म मानव वाद दर्शन’ (एकात्म मानव वाद का दर्शन) के लिए सर्वाधिक जाना जाता है।

• उन्होंने ’स्वदेश’ नामक एक दैनिक, ’पाञचजन्य’ नामक एक पाक्षिक तथा ’राष्ट्र धर्म’ नाम से एक मासिक पत्रिका आरंभ की थी।

• उनका एकात्म मानव वाद दर्शन व्यक्तिगत एवं सामूहिक तथा भौतिक एंव आध्यात्मिक का एक संक्षेपण है।

• गाँवो को आधार बनाते हुए उन्होंने भारत के लिए विकेंद्रीकृत राजव्यवस्था और आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था की कल्पना की।

• वह अन्त्योदय अर्थात समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा में विश्वास करते थे।