श्री रामानुज की 1000वीं जन्म शताब्दी (Mr. Ramanuja's 1000th Birth Centenary)

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मई में भारत में श्री रामानुज सहस्राब्दी मनाई गई। इनकी 1000वीं जन्म शताब्दी थी।

श्री रामानुज के बारे में

• 11वीं शताब्दी मेें तमिलनाडु में जन्मे श्री रामानुज मध्यकालीन भारत के भक्ति धारा के संत थे।

• वह अलवार से बहुत प्रभावित थे।

• उनके अनुसार विष्णु की गहन भक्ति मोक्ष प्राप्त करने का सबसे अच्छा साधन है।

• उन्होंने विशिष्टादव्ैत या अदव्ैतवाद का सिद्धांत प्रतिपादित किया जिसमें बताया कि आत्मा जब परमात्मा से मिलती है तब भी अपना अस्तित्व बनाये रखती है।

• रामानुज के सिद्धांत ने भक्ति आंदोलन को बहुत प्रेरित किया। जो इसके बाद उत्तर भारत तक फैल गया।

वर्तमान में प्रासंगिकता

• वो दया को सदगुण मानते थे और उनके अनुसार इसका अर्थ समन्वय की भावना है। उनके मूल्य आज के समाज की आवश्यकता है।

• उन्हें आधुनिक भारतीय पुनर्जागरण के नव-वेदान्तियों का पूर्वज माना जाता है।

• वह दलितों के प्रति लगाव और सहानुभूति रखते थे।

• उनके दव्ारा श्री रंगनाथ के प्रसिद्ध मंदिर में समाज के सभी वर्गो को शामिल करते हुए का उनका प्रबंधन और कई सामाजिक रूप से प्रासंगिक योजनाओं को शुरू किया गया। इनमें अन्नदान जैसे कार्यक्रम भी थे जो आज भी असंख्य रामानुज कूट के माध्यम से पूरे भारत में चल रहे हैं।

• विशिष्टादव्ैत का मतलब है संशोधित अदव्ैतवाद। इस दर्शन के अनुसार अंतिम वास्तविकता ब्रह्य (परमेश्व) है और पदार्थ और आत्मा उनके गुण है।

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