दव्पक्षीय यातायात अधिकार (Bilateral Traffic Right)

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भारत सरकार, सार्क देशों और दिल्ली से 5,000 किमी. से परे स्थित देशों के साथ पारस्परिक आधार पर ’ओपन स्काई’ (खुला आकाश) के प्रावधान को लागू करेगी। अर्थात ये देश उड़ानों और सीटों की संख्या के मामले में भारतीय हवाई अड्‌डों का असीमित उपयोग कर पाएंगे, जिससे इन देशों के साथ उड़ानों में वृद्धि होगी।

ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नस

  • सभी विमानन संबंधी लेनदेन, शिकायत आदि के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।

  • ”ईज ऑफ़ डूइंग बिज़निस” पर अधिक ध्यान क्योंकि सरकार की योजना क्षेत्रीय उड़ानों की व्यवस्था को उदार बनाने की है।

  • भारतीय विमानन कंपनियां (संघ) देश में किसी भी गंतव्य के लिए विदेशी विमानन कंपनियों के साथ पारस्परिक आधार पर कोड (संकेतावली) -शेयरिंग (साझा करने) एग्रीमेंट (समझौता) के लिए मुक्त होगी।

  • सभी क्षेत्रीय उड़ानों पर पहले से प्रस्तावित 2 प्रतिशत उपकर हटा दिया गया है। यह उपकर क्षेत्रीय अवसरंचना में सुधार के लिए धन इकट्‌ठा करने के लिए प्रस्तावित किया गया था।

अवसंरचना का विकास

  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के माध्यम से 50 करोड़ रुपये की अधिकतम कीमत पर हवाई पट्टियों की बहाली।

  • सरकार चार हेली-हब (केन्द्र) विकसित करेगी। हेलीकाप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवा भी प्रारंभ होगी।

  • राज्य सरकारों के साथ-साथ निजी क्षेत्र या पीपीपी मोड (प्रकार) के दव्ारा ग्रीनफील्ड (हरितक्षेत्र) और ब्राउनफील्ड (भूराक्षेत्र) हवाई अड्‌डों के विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • भविष्य में सभी हवाईअड्‌डों पर टैरिफ (मूल्य) की गणना ’हाइब्रिड (संकर) टिल’ (उस समय तक) के आधार पर की जाएगी।

  • विमानन क्षेत्र में कौशल पहलों को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच सामरिक साझेदारी।