कृषकों की सहायता में ई-टेक (In aid of the farmers)

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ई-लाभ

सुर्ख़ियों में क्यों?

लक्षित लाभार्थियों को एलपीजी की भांति सब्सिडी का नकद भुगतान करने हेतु पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य विभाग ने एक ई-लाभ सॉफ्टवेयर लांच (शुरू) किया है।

सुनंदिनी योजना

  • यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत दो वर्षीय कार्यक्रम है। इसमें डेयरी किसानों को सब्सिडी प्राप्त चारा, दो मादा बछड़ों की स्वास्थ्य सेवा और बीमा कवरेज (राशि) प्रदान किया जाएगा।

  • इस योजना के दव्ारा किसानों को दो वर्ष तक चारे की आपूर्ति की जाएगी।

उर्वरक क्षेत्र में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण

सुर्ख़ियों में क्यों?

  • उर्वरक क्षेत्र में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) हेतु 16 जिलों में पायलट (संचालन) परियोजनाएं प्रारंभ की गई है।

  • उर्वरक क्षेत्र पर केन्द्र सरकार का अत्यधिक नियंत्रण है। ऐसे में यह प्रशासकीय जटिलता को कम करता है।

  • उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं की निगरानी के लिए सरकार के पास एक रियल (वास्तविक) टाइम (समय) फ़र्टिलाइज़र (उर्वरक) मॉनिटरिंग (निगरानी) सिस्टम (व्यवस्था) है।

  • आर्थिक सर्वेक्षण में उर्वरक क्षेत्र को डीबीटी के क्रियान्वयन के लिए आदर्श क्षेत्र माना गया है। यहाँ डीबीटी के लिए निम्न को लागू किया जाएगा।

  • डीबीटी को नगद के रूप में प्रदान करना।

  • बायोमेट्रिकनी (शारीरिक चिन्हों जैसे ऊँगली के निशानों अथवा आँखों की पुतलियों दव्ारा व्यक्ति विशेष पहचान की पद्धति) ऑथेंटिकेटेड (प्रमाणीकृत) फिजिकल (शारीरिक) अपटेक (बीएपीयू)-पहचान प्रमाणन के लिए आधार का उपयोग और शारीरिक रूप से उपस्थित होकर सब्सिडी (सरकारी सहायता) वाली वस्तुएं प्राप्त करना।

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण

डीबीटी योजना 2013 में निम्न उद्देश्यों से प्रारंभ की गई थी:

  • सूचना/निधि के सरल और तीव्र के लिए सरकारी वितरण प्रणाली को सुधारना।

  • दोहराव और धोखाधडी को रोककर लक्षित लाभार्थियों को लाभ सुनिश्चित करना।

  • डीबीटी कार्यक्रमों को लागू करने के लिए योजना आयोग के अंतर्गत डीबीटी मिशन (लक्ष्य) का सृजन किया गया था।

  • 2015 में, इसे कैबिनेट (मंत्रिमंडल) सचिवालय में सचिव (समन्वय और पीजी) के तहत रखा गया था।

  • जेएएम अर्थात्‌ जन धन, आधार और मोबाइल (गतिशील), इन तीनों दव्ारा डीबीटी के लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा।

उर्वरक क्षेत्र में कुछ अन्य सुधार

  • नीम कोटेड यूरिया-यह यूरिया के कृषि उपयोगों से विपथन को रोकता है और मृदा में नाइट्रोजन के निक्षालन को भी कम कर देता है।

  • गैस प्राइस (मूल्य) पूलिंग (खींचना)- इसके तहत, उर्वरक संयंत्रों हेतु एक समान दर रखने के लिए घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत को आयातित एलएनजी की लागत के साथ संतुलित या पूल (प्रभाव) किया जाता है।

उर्वरक क्षेत्र में डीबीटी की विशिष्टता

  • LPG में DBT के माध्यम से लाभार्थियों को दी गई सब्सिडी (सरकारी सहायता) के बजाय सब्सिडी उर्वरक कंपनियों (संघों) को दी जाएगी।

  • सब्सिडी की दर विभिन्न उर्वरको के साथ साथ एक कंपनी (संघ) से दूसरी कंपनी के बीच परिवर्तित होती है।