खनन निगरानी प्रणाली (Mining surveillance system)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा एवं खान के केन्द्रीय राज्य मंत्री ने नई दिल्ली में खनन निगरानी प्रणाली आरंभ की है।

यह क्या है?

  • एमएसस एक उपग्रह आधारित निगरानी प्रणाली है जिसे भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी), गांधीनगर और इलेक्ट्रॉनिक्स (विद्युतीय) एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सहयोग एवं इंडियन (भारतीय) ब्यूरों (सरकारी विभाग) ऑफ़ (का) माइंस (खानों) (आईबीएम) के माध्यम से खान मंत्रालय दव्ारा डिजिटल (अंकीय) इंडिया (भारत) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है।

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की सहायता से विकसित यह विश्व की प्रथम निगरानी प्रणालियों में से एक है।

राष्ट्रीय इस्पात मंत्रालय

सुर्ख़ियों में क्यों?

भारतीय इस्पात मंत्रालय ने राष्ट्रीय इस्पात नीति (एनएसपी), 2017 का मसौदा जारी किया है। एनएसपी मसौदे का उद्देश्य विश्व स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर इस्पात उद्योगे विकसित करना है।

महत्त्व

  • चीन और जापान के बाद, भारत विश्व में फिनिश्ड (पक्का) इस्पात का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

  • भारतीय इस्पात क्षेत्र का अनुमानित मूल्य 100 अरब डॉलर (मुद्रा) से अधिक आँका गया है और उसका जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में योगदान 2 प्रतिशत है।

  • यह सेक्टर (क्षेत्र) 6.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से और 13 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराता है।

  • भारत वर्ष 2007-08 के बाद से (2013 को छोड़कर) फिनिश्ड इस्पात का लगातार आयात करता आ रहा है।

  • दो वर्ष पूर्व तक भारत इस्पात का तीसरा बड़ा उपभोक्ता था।

  • वैश्विक आर्थिंक मंदी के बावजूद, भारत एक अकेली अर्थव्यवस्था है, जिसने 2015 में इस्पात क्षेत्र में सकरात्मक वृद्धि की है।

स्टील (इस्पात) रिसर्च (अनुसंधान) एंड (और) टेक्नोलॉजी (तकनीकी) मिशन (लक्ष्य) ऑफ (का) इंडिया (भारत) (एसआरटीएमआई)

  • यह एक उद्योग संचालित पहल है। इसे एक पंजीकृत सोसाइटी (समाज) के रूप में स्थापित किया गया है। यहाँ इस्पात मंत्रालय एक सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएगा।

  • यह भारत में लौह एवं इस्पात क्षेत्र में संयुक्त सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को सुविधा प्रदान करेगा।

  • एसआरटीएमआई को शासी निकाय दव्ारा शासित एवं प्रशासित किया जाएगा। इसमें इस्पात के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, डोमेन एक्स्पट्‌र्स (विशेषज्ञ) और इस्पात मंत्रालय के एक प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे।

  • एसआरटीएमआई की स्थापना के लिए प्रारंभिक कोष 200 करोड़ है। जिनमें से 50 प्रतिशत इस्पात मंत्रालय एवं शेष इसमें भाग लेने वाली स्टील (इस्पात) कंपनियों (संघों) दव्ारा प्रदान किया जाएगा।

  • इसके बाद एसआरटीएमआई का संचालन इस्पात कंपनियों के उनके पिछले वर्ष के कुल कारोबार के आधार पर दिए गये वार्षिक अंशदान से किया जाएगा।