सौर ऊर्जा (solar energy) Part 1

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राष्ट्रीय सौर मिशन (लक्ष्य)

  • यह एनएपीसीसी के आठ प्रमुख मिशनों में से एक है।

  • हाल ही में लक्ष्यों को संशोधित किया गया है।

  • वर्ष 2021-22 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन।

  • ग्राउंड (भूमि) माउंटेड (घुड़सवार/जोड़ा हुआ) ग्रिड (जाली) कनेक्टेड (जुड़े हुए) सौर ऊर्जा दव्ारा 60 गीगावॉट और रूफ़ (छत) टॉप (शिखर) ग्रिड (जाली) कनेक्टेड (जुड़े हुए) सौर ऊर्जा दव्ारा 60 गीगावॉट का उत्पादन।

  • चालू वर्ष के लिए लक्ष्य 2,000 मेगावाट है और अगले साल का लक्ष्य 12,000 मेगावाट है।

भारत में सौर ऊर्जा क्षमता

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) दव्ारा किए गए अध्ययन के अनुसार, भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 748 गीगावॉट है। जो हमारे देश में सभी स्रोतों की संचयी स्थापित क्षमता लगभग 275 गीगावॉट से बहुत ज्यादा है।

सौर ऊर्जा सस्ती हो रही है

  • सौर पैनल (सूची) perovskites (पेरावस्काइट) नामक पदार्थ से बन रहे हैं।

  • हाल ही में स्काई (नभ) पाउडर (चूरा) और सनएडिसन जैसी कंपनियों (संघों) ने 5-6 रुपए/यूनिट (ईकाइ) के हिसाब से बोली लगायी जो कि बहुत कुछ ताप विद्युत संयंत्रों के समकक्ष है।

पारंपरिक ऊर्जा की तुलना में यह कम व्यावहारिक है-

  • सौर ऊर्जा सिर्फ सूरज के निकलने पर ही व्यवहार्य है।

  • सौर पैनल मानसून या सर्दियों के दौरान कोहरे में कुशलता से काम नहीं करते।

  • ग्रिड (जाली) में तापीय ऊर्जा के साथ सौर ऊर्जा सम्मिश्रण कई सारी व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न करता है।

  • सौर पैनल इनस्टॉल करने की पूंजी लागत भी अधिक है।

  • घरेलू विनिर्माण एक कमजोर कड़ी है:

  • भारतीय उत्पाद कम उन्नत किस्म के हैं।

  • ’मेक (बनाना) इन (भीतर) इंडिया (भारत)’ की सफलता के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है। इससे वर्ष 2030 तक उपकरणों के आयात में लगने वाली 42 अरब डॉलर की पूंजी की बचत होगी, और 50,000 प्रत्यक्ष रोजगार तथा कम से कम 125,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन होगा।

भारत की विश्व व्यापार संगठन में दर्ज अपील में हार

  • भारत ने अपने राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत बड़ी सौर परियोजनाओं के लिए ’स्थानीय-खरीद’ प्रावधान का प्रस्ताव किया है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर निर्मित उपकरणों का परियोजनाओं में प्रयोग किये जाने पर उन्हें सब्सिडी (सरकारी सहायता) और सरकारी खरीद का आश्वासन दिया गया था।

  • भारत में आयातित सौर उपकरणों के संदर्भ में कोई भी अलाभकारी स्थितियां उत्पन्न न हों, इस कारण डब्ल्यूटीओ ने इस वर्ष की शुरूआत में उपर्युक्त प्रावधान के खिलाफ निर्णय दिया था।

  • डब्ल्यूटीओ के अनुसार, स्थानीय सामग्री को प्रयोग करने का उपबंध स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उसके प्रयासों को कमजोर करेगा, क्योंकि इस उपबंध के तहत अधिक महंगे और कम कुशल स्थानीय उपकरणों के उपयोग की अनिवार्यता स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के लागत प्रतिस्पर्धी होने को और अधिक कठिन बना देगी।

  • इस प्रकार, भारत ने डब्ल्यूटीओ के समक्ष इस मुद्दे पर एक अपील दायर की थी। हालांकि, हाल ही में अपील को खारिज कर दिया गया।