दसवाँ प्रतिवेदन कार्मिक प्रशासन की स्वच्छता (Tenth Report: Cleanliness of Personnel Administration) Part 4

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आयोग की दसवी रिपोर्ट में भारतीय लोक सेवाओं के इतिहास एवं सुधारों, अंतरराष्ट्रीय अनुभवों, भर्ती, प्रशिक्षण, लोक सेवकों का पदस्थापन, कार्य निष्पादन, प्रतिनियुक्ति, अनुशासनात्मक कार्यवाही, मंत्रि लोक सेवक संबंधों, अभिप्ररेणा, आचार संहिता तथा लोक सेवा कानून का विवेचन किया गया है। इस भारी भरकम रिपोर्ट में आयोग ने निम्नांकित सुझाव दिए हैं-

  • राष्ट्रीय लोक प्रशासन संस्थान की स्थापना की जाए तो लोक प्रशासन/अधिशासन/ प्रबंध में स्नातक स्तरीय ऐसे पाठयक्रम संचालित करे जो लोक सेवाओं में प्रवेशोत्सुक उम्मीदवारों के लिए सहायक हो।

  • चयनित केन्द्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालय, इच्छुक उम्मीदवारों हेतू लोक प्रशासन/अधिशासन/लोक प्रबंध के स्नातक स्तरीय ऐसे ही पाठयक्रम संचालित करें।

  • इन पाठयक्रमों में अन्य ऐच्छिक विषयों के साथ भारत का संविधान, भारतीय विधिक व्यवस्था प्रशासनिक कानून, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय राज व्यवस्था, भारतीय इतिहास तथा संस्कृति का प्रमुख विषयों के रूप में अध्ययन करवाया जाए।

  • राष्ट्रीय लोक प्रशासन संस्थान तथा उपुर्यक्त वर्णित प्रमुख विषयों में ’ब्रिज कोर्स’ (पाठ्‌यक्रम) करना अनिवार्य हो।

  • संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करके भारत सरकार दव्ारा तत्काल एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाना चाहिए जो उपर्युक्त वर्णित मुद्दों पर रणनीति सुझा सके।

  • चूँकि यह एक बढ़ा सुधार होगा अत: इसे समन्वित करने एवं परामर्श प्रदान करने हेतु शुरुआती वर्षो में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया जाए।

  • उपर्युक्त वर्णित पाठयक्रम करने वाले युवा सरकारी या निजी, किसी भी क्षेत्र में कैरियर (पेशा) चुन सकते हैं।

  • सिविल (नागरिक) सेवा परीक्षा में बैठने हेतु आयु सीमा सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों हेतु 21-25 वर्ष, अन्य पिछड़े वर्गो हेतु 21-28 वर्ष तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं शारीरिक रूप से नि:शक्तजनों हेतु 21-29 वर्ष निर्धारित कर देनी चाहिए।

  • सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के अवसरों की संख्या सामान्य श्रेणी हेतु 3, अन्य पिछड़े वर्गो हेतु 5 और अनुसूचित जाति, अनुसूचति जनजाति एवं शारीरिक रूप से नि:शक्तजनों हेतु 6 कर देनी चाहिए।

  • सिविल सेवा प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों का अयोजन लगातार दो या तीन दिना में कर दिया गया। मुख्य परीक्षा उन्हीं उम्मीवारों का हो जो प्रारंंभक परीक्षा में निर्णायक अंक प्राप्त कर लें, इसके पश्चात व्यक्तित्व परीक्षण हो। अथवा प्रारंभिक परीक्षा मेें उत्तीर्ण उम्मीदवारों को दो माह का समय देते हुए मुख्य परीक्षा एवं व्यक्तिव परीक्षण में सम्मिलित होने का अवसर दिया जाए।

  • प्रारंभिक परीक्षा में कोई ऐच्छिक विषय नहीं हो। सामान्य अध्ययन के एक या दो बहुविकल्पात्मक प्रश्न-पत्र निर्मित किए जाए जिनमें भारत का संविधान, भारतीय विधिक व्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय इतिहास तथा संस्कृति से संबंधित प्रश्न हों

  • मुख्य परीक्षा में दो अनिवार्य विषय हों जो भारतीय संविधान, भारतीय विधिक व्यवस्था, भाारतीय राजव्यवस्था, भारतीय इतिहास तथा संस्कृति से संबंधित हों। ये प्रश्न-पत्र परपंरागत वर्णनात्मक प्रकृति के हों। इसके अतिरिक्त एक निबंध प्रश्न-पत्र भी हो।

  • राज्य सेवाओं के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत करने हेतु आठ से दस वर्ष की सेवा के पश्चात प्रतिवर्ष एक परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तथा अधिकम दो अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। ऐसा अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के संदर्भ में भी हो।

  • केन्द्रीय लोक सेवा ग्रुप (समूह) ’क’ में पदोन्निति हेतु वार्षिक गोपनीय एक प्रतिवेदन एवं परीक्षा पद्धति को आधार बनाया जाना चाहिए।

  • अखिल भारतीय सेवाओं में संवर्ग आवंटन नीति (2008) में परिवर्तन करते हुए पूर्वोत्तर राज्यों के अधिवास वाले सफल प्रतियोगी परीक्षार्थियों को उनका राज्य संवर्ग आवंटित कर देना चाहिए, चाहे वहाँ पर रिक्त स्थान उपलब्ध नहीं हो।

  • यदि इन राज्यों से एक से अधिक पात्र उम्मीदवार हो तो क्रमश: अनुसूचित जनजाति, अनुसूचति जाति अन्य पिछड़ा वर्ग तथा सामान्य श्रेणी को प्रत्येक राज्य में वरीयता दी जाए।

  • प्रत्येक लोक सेवक हेतु समय-समय पर अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था कर देनी चाहिए। वर्ग ’घ’ के कार्मिकों हेतु भी पदस्थापन से पूर्व अनिवार्य प्रशिक्षण होना चाहिए।

  • राष्ट्रीय प्रशिक्षण नीति (1996) के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु एक निगरानी तंत्र होना चाहिए।

  • सभी ग्रुप (समूह) ’क’ सेवाओं-सामान्यत:, विशेषज्ञ तथा तकनीकी के लिए एक सामान्य आधारभूत पाठयक्रम एवं प्रबंध संस्थान, ऐसा प्रशिक्षण प्रदान करे।

  • प्रत्येक पदोन्निति से पूर्व अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था हो। साथ ही कैरियर (पेशा) के मध्य प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।

  • लोक सेवकों को उच्च अकादमिक (शिक्षाविदों) योग्यताएं अर्जित करने तथा प्रतिष्ठित एवं प्रामाणिक पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित कराने को प्रोत्साहित किया जाए।

  • केन्द्रीय एवं राज्य स्तर प्रशिक्षण संस्थानों का सशक्त नेटवर्क (जाल पर कार्य) होना चाहिए।

  • प्रशिक्षण संस्थाओं जैसे- लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी और सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के शासकीय निकाय में प्रतिष्ठित विशेषज्ञ वाली निकाय में सम्मिलित किए जाने चाहिए।

  • राष्ट्रीय अथवा प्रान्तीय संस्थानों में से किसी एक को उन्नत करते हुए राष्ट्रीय अभिशासन संस्थान की स्थापना की जानी चाहिए।

  • प्रत्येक विभाग को वर्ग ’ख’ की सामान्यज्ञ एवं विशेषज्ञ सेवाओं का पुननिर्धारण करना चाहिए तथा अनुभाग अधिकारी स्तर पर कुछ पदों (जैसे 25 प्रतिशत) पर सीधी भर्ती करनी चाहिए।

  • वर्ग ’ख’ अराजपत्रिय तथा वर्ग ’ग’ के पदों पर भर्ती हेतु 20-25 वर्ष आयु सीमा तथा स्नातक स्तरीय योग्यता होनी चाहिए। अन्य पिछड़ा वर्ग हेतु तीन वर्ष, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं नि:शक्तजनों की आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देनी चाहिए।

  • इन वर्गो में भर्ती हेतु एक सुविचारित बहुविकल्पात्मक परीक्षा प्रणाली होनी चाहिए। इन दोनों वर्गो हेतु एक ही सामान्य परीक्षा होनी चाहिए।

  • कनिष्ठ श्रेणी लिपिक की भर्ती चरणबद्ध रूप समाप्त कर देनी चाहिए।

  • जिन क्षेत्रीय कार्यालयों में कनिष्ठ श्रेणी लिपिक की आवश्यकता है वहाँ कर्मचारी चयन आयोग यह भर्ती करे। सीनियर (वरिष्ठ) सैकेण्डरी (माध्यमिक) न्यूनतम योग्यता हो, बहुविकल्पात्मक प्रश्न-पत्र पर आधारित परीक्षा हो तथा छाँटे गए उम्मीदवारों का कम्प्यूटर (परिकलक) पर कौशल प्रशिक्षण हो।

  • केन्द्रीय सचिवालय में सहायक के पद पर 40 प्रतिशत पद अवर श्रेणी लिपिक से, 40 प्रतिशत सीधी भर्ती से तथा 20 प्रतिशत सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा दव्ारा भरे जाने चाहिए।

  • वर्ग ’ख’ एवं ’ग’ के कार्मिकों के कार्य निष्पादन मूल्यांकन प्रपत्र में अंकीय गणना होनी चाहिए। साथ ही इसमें कार्मिक के स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, परिवहन तथा प्रतिरक्षा इत्यादि के संदर्भ में कार्मिक की रुचियों का भी वर्णन किया जाए।

  • वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन प्राप्ति रसीद देने का प्रावधान कर देना चाहिए ताकि जवाबदेयता का समावेश हो सके।

  • मध्य स्तरीय प्रबंध पर अधिकारियों की नियुक्ति हेतु 13 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अखिल भारतीय सेवाओं या केन्द्रीय सेवाओं के अधिकारियों से आवेदन मांगे जाने चाहिए तथा तार्किक पदस्थापन प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए।

  • केन्द्रीय लोक सेवा प्राधिकरण दव्ारा सभी लोक सेवाओं में पदस्थापन की अवधि निर्धारित की जानी चाहिए। प्रथम आठ से दस वर्ष की सेवा में गैर-क्षेत्रीय नियुक्ति नहीं मिलनी चाहिए। राज्य सरकारें भी तदनुरूप व्यवस्था करें।

  • उच्च प्रबंध स्तर पर पदस्थापन हेतु केन्द्रीय लोक सेवा प्राधिकरण प्रक्रिया निर्धारित करे।

  • प्रस्तावित लोक सेवा विधेयक के अंतर्गत पाँच सदस्यीय केन्द्रीय लोक सेवा प्राधिकरण का गठन किया जाए। प्रधानमंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता की सिफारिश पर राष्ट्रपति प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति करें।

  • यह प्राधिकरण संयुक्त सचिव तथा इसके ऊपर के पदों पर नियुक्ति पैनल (अनुसूची) बनाने, वरिष्ठ पदों पर पदस्थापन अवधि निश्चित करने तथा पार्श्व प्रवेश इत्यादि से संबंधित प्रकरण निस्तारित करे।

  • इसी प्रकार सैन्य तथा अर्द्ध सैन्य बलों में उच्च पदों की पदस्थापन प्रकिया को निश्चित किया जाए।

  • सरकार से बाहर के संगठनों में प्रतिनियूक्ति की एक तार्किक पद्धति बनायी जानी चाहिए।

  • कार्य निष्पादन प्रबंध व्यवस्था में निष्पादन मूल्यांकन प्रपत्र में मुख्यत: 3 भागों पर बल दिया जाए। प्रथमत: संबंधित सेवा का मूलभूत कार्य, दव्तीय विभाग के लक्ष्य तथा तृतीय लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु विशिष्ट योग्यताओं को आधार बनाया जाना चाहिए।

  • लोक सेवकों को अभिप्रेरित करने हेतु उनके अच्छे कार्य करने पर राष्ट्रीय, प्रान्तीय तथा जिला स्तर पर सामान्य, मौखिक तथा लिखित प्रशंसा के स्थान पर मूर्त पुरस्कार प्रदान किया जाना चाहिए।

  • लोक सेवकों दव्ारा विदेश में कार्य करने हेतु अनुमति केन्द्रीय लोक सेवा प्राधिकरण की अनुशंसा के पश्चात दी जाए।

  • प्रत्येक कार्मिक के कार्य की रूपरेखा एवं भार के संदर्भ में मूल्यांकन का दायित्व कार्यालयाध्यक्ष दव्ारा वहन किया जाए।

  • प्रत्येक कार्मिक की 14 एवं 20 वर्ष की सेवा के पश्चात गहन पुनरीक्षा होनी चाहिए।

  • अनुशासनात्मक कार्यवाही की लंबी प्रक्रिया के स्थान पर उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में अनुशासनात्मक बैठक या साक्षात्कार प्रणाली अपनाई जाए।

  • अनुशासनात्मक कार्यवाही के अंतर्गत सजा निर्धारित करते समय निर्णयकर्ता अधिकारी, दोषी कार्मिक से कम-से-कम तीन स्तर ऊंचा होना चाहिए।

  • लोक सेवकों को सेवा से निकालने से संबंधित मामलों में संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श लिया जाना अनिवार्य हो। इससे निम्न सजा पर आयोग का परामर्श लेना अनिवार्य नहीं हो।

  • मंत्रि-लोक सेवक संबंधों में सुधार हेतु मंत्रि एवं लोक सेवकों दोनों हेतु आचार संहिता होनी चाहिए।

  • लोक सेवा में मूल्यों की स्थापना हेतु विभागाध्यक्ष का उत्तरदायी बनाया जाए।

  • लोक सेवकोे की आचार संहिता में छ: मुख्य तत्वों यथा-सच्चरित्रता, निष्पक्षता, लोक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता, खुली जवाबदेता, कार्य के प्रति समर्पण तथा अनुकरणीय व्यवहार को सम्मिलित किया जाए।

    इसके अतिरिक्त आयोग ने प्रस्ताविक लोक सेवा विधेयक के सन्दर्भ में भी सुझाव दिए हैं।