आचार संहिता (Code of Ethics – Part 3)

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शासन में ईमानदारी

(घ) मंत्रियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी सार्वजनिक कार्यों और उनकी निजी रुचियों के बीच कोई विरोध न उठे या ऐसा प्रतीत हो कि यह उठ सकता है,

(ङ) लोक सभा में मंत्रियों को अपनी भूमिकाओं को मंत्री और निर्वाचन क्षेत्र के रूप में अलग-अलग रखना चाहिए।

(च) मंत्रियों को चाहिए कि वे अपने दल के लिए या राजनीतिक प्रयोजनों न करें, उनके दव्ारा लिए गए निर्णयों के लिए उन्हें स्वयं का उत्तरदायित्व स्वीकार करना चाहिए, न कि किसी की सलाह पर केवल दूसरों पर दोष मड़ना चाहिए।

(छ) मंत्रियों को चाहिए कि वे सिविल सेवा की राजनीतिक निष्पक्षता को बनाए रखें और सिविल सेवकों को ऐसा कोई काम करने के लिए न कहें, जिससे सिविल सेवकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के साथ विरोध उठे।

(ज़) मंत्रियों को उन अपेक्षाओं का पालन करना चाहिए जिन्हें संसद के दोनों सदन समय समय पर निर्धारित करे।

(झ) मंत्रियों को यह मानना चाहिए कि सरकारी पद या सूचना का दुरूप्रयोग उस विश्वास का हनन है जो सार्वजनिक पदाधिकारियों के रूप में जताया गया है।

(ञ) मंत्रियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता के पैसे का उपयोग अत्यंत मितव्ययिता और सावधानी से हो।

(ट) मंत्रियों को अपना काम इस प्रकार से करना चाहिए कि जिससे वे अच्छे शासन के अस्त्र के रूप में सेवा कर सके और जनता की अधिकतम रूप से भलाई के लिए सेवाएं प्रदान कर सकें और सामाजिक -आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकें।

(ठ) मंत्रियों को चाहिए कि वे उद्देश्यपूर्ण, निष्पक्ष, सत्यनिष्ठा से, न्यायसंगत तरीके से, मेहनत से तथा उचित और न्यायपूर्ण तरीके से काम करें।

वर्तमान आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करने के प्राधिकारी केन्द्रीय मंत्रियों के मामले में प्रधानमंत्री, मुख्य मंत्रियों के मामले में प्रधान मंत्री और गृहमंत्री और राज्य सरकार के मंत्रियों के मामलें में संबंधित मुख्य मंत्री हैं। दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने आचार संहिता के अनुपालन पर निगरानी रखने के लिए प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कार्यालयों में समर्पित यूनिटों (ईकाइ)का गठन करने का सुझाव दिया। अतिक्रमणों का ब्यौरा दिए जाने वाली एक वार्षिक रिपोर्ट (विवरण) समुचित विधान मंडल को विचार के लिए प्रस्तुत किये जाने की भी सिफारिश की। इसके अतिरिक्त वर्तमान आचार संहिता जनता के मामलों से मेल नहीं खाती और इसके परिणामस्वरूप जनता के सदस्य शायद इस बात से अवगत नहीं है कि ऐसी संहिता भी विद्यमान है। इसलिए प्रशासनिक सुधार आयोग ने यह सिफारिश की कि इसे जनता के पहुंच में रखना सुनिश्चित किया जाना चाहिये।

वैसे केन्द्र सरकार ने दव्तीय प्रशासनिक सुधार की उस सिफारिश को मानने से इंकार कर दिया जिसमें मंत्रियों के लिए अलग से नैतिक संहिता बनाने की सिफारिश की गई थी। सरकार के मुताबिक जब पहले से आचार संहिता मौजूद है तो फिर अलग से नैतिक संहिता की जरूरत नहीं है।

कानून-निर्माताओं के लिए नैतिकता-

अन्य देशों में कानून-निर्माताओं के लिए नैतिक ढांचा: किसी आदर्श लोकतांत्रिक ढांचे के चार आधार-स्तंभों के बीच विधानमंडल का सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्थान है। यह लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति है और कार्यपालिका इसके लिए जवाबदेह है। यह कार्यपालिका के लिए नैतिक मानकों की आवश्यकता से पहले विधि निर्माताओं के लिए नैतिक मानकों की आवश्यकता पर समान रूप से जोर देने की मांग करता है।

नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि

संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान अपने अनुच्छेद। धारा 5 में अपने सदस्यों को अनुशासन में रखने के लिए कांग्रेस को व्यापक अधिकार प्रदान करता हैं।

राज्य सभा की नैतिकता समिति: राज्य सभा में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के अध्याय XXIV में सदस्यों के आचार और नैतिक संहिता पर निगरानी रखने के लिए नैतिकता समिति के गठन की व्यवस्था है। इस नैतिकता समिति का पहला गठन 4 मार्च 1997 को सदन के सभापति दव्ारा किया गया था।

1. अपनी प्रथम रिपोर्ट (विवरण) में समिति ने अन्य बातों के अलावा लोक जीवन में राजनीति का अपराधीकरण और निर्वाचन संबंधी सुधारों के मूल्यों जैसे मामलों पर विचार किया। इसने राज्य सभा के सदस्यों के लिए आचार संहिता की रूपरेखा का सुझाव दिया।

2. अपनी दूसरी रिपोर्ट (विवरण) में समिति ने प्रथम रिपोर्ट में सुझाई गई आचार संहिता को प्रभावित करने के कार्य प्रणाली संबंधी पहलुओें पर जोर दिया जिसमें ’सदस्यों की हितों का रजिस्टर रखना’, सदस्यों दव्ारा हितों की घोषणा, छानबीन और दंड देने की विधि शामिल हैं।

3. तीसरी रिपोर्ट में समिति ने सदन में और उसके बाहर सदस्यों के व्यवहार से संबद्ध मुद्दों पर विचार किया है।

4. चौथी रिपोर्ट में, समिति ने राज्य सभा में अनुशासन और शालीनता, संपत्तियों और दायित्वों के ब्यौरों की घोषणा, हितों का पंजीकरण, आचार संहिता और शास्तियों की सिफारिश करने के लिए समिति की शक्तियों पर विचार किया है।