आचार संहिता (Code of Ethics – Part 5)

Download PDF of This Page (Size: 143K)

लोक सभा की नैतिकता समिति;

लोक सभा के सदस्यों की उस सदन में आचार और नैतिकता पर निगरानी रखने के लिए एक नैतिकता समिति बनाई गई है। नैतिकता समिति (13वीं लोक सभा) ने अपनी प्रथम रिपोर्ट में यह अवलोकन किया है कि सदस्यों के लिए नैतिक व्यवहार संबंधी मानदंडो को, लोक सभा में कार्य प्रणाली और कार्य संचालन नियमों में अध्यक्ष के निर्देशों तथा विविध संसदीय समितियों दव्ारा की गई सिफारिशों के आधार पर वर्षो से अपनाई जा रही प्रथाओं में पर्याप्त रूप से प्रावधान किया गया है। विद्यमान मानदंडो के अलावा, समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सदस्यों को निम्नलिखित सामान्य नैतिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए:

§ सदस्यों को अपने पद का प्रयोग लोगों के सामान्य कल्याण को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए।

§ सदस्यों की व्यक्तिगत हित और लोक हित के बीच यदि कोई संघर्ष हो तो उसे उस संघर्ष का समाधान इस प्रकार करना चाहिए कि जिससे लोक पद के कर्तव्य के प्रति व्यक्तिगत हितों गौण समझी जाए।

§ निजी ’वित्तीय/पारिवारिक हितों के बीच संघर्ष को इस प्रकार से सुलझाना चाहिए कि जिससे लोक हित को खतरा न बन सके।

§ सार्वजनिक पद पर रहते हुए सदस्यों को लोक संसाधनों का प्रयोग इस प्रकार से करना चाहिए कि जिससे जनता की भलाई हो सके।

§ सदस्यों को संविधान के भाग 4 में सूचीबद्ध किए गए मूल कर्तव्यों को अपने मन में सर्वोपरि रखना चाहिए।

दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने संसद सदस्यों के नैतिक ढांचा के संदर्भ में निम्नलिखित सिफारिशें की थी।

(क) संसद के प्रत्येक सदन दव्ारा ’नैतिक आयुक्त’ पद का गठन किया जाना चाहिए। यह पद अध्यक्ष/उपसभापति के अंतर्गत कार्य करते हुए नैतिकता पर समिति के अपने कामों का निष्पादन करने में सहायता करेगा और सदस्यों को यथा-आवश्यकता अभिलेखों को रखेगा।

(ख) राज्यों के बारे में आयोग ने निम्नलिखित सिफारिशें की:

• सभी राज्य विधान मंडलों को अपने सदस्यों, के लिए नैतिकता संहिता और आचार संहिता को अपना लेना चाहिए।

• विधायकों दव्ारा नैतिकता आचार को सुनिश्चित करने के लिए अतिक्रमण के मामले में मंजुरियों की कार्यप्रणालियों की उत्तम परिभाषा बना कर नैतिकता समितियों का गठन किया जाना चाहिए।

• राज्यों के विधायकों दव्ारा हितों की घोषणा के साथ ’सदस्यों की हितों के रजिस्टर’ (पंजिका) को बनाया रखा जाना चाहिए।

• संबधित सदनों के पटल पर वार्षिक रिपोर्टो (विवरणों) को विवरण देते हुए, जिनमें अतिक्रमण शामिल हों, रखा जाना चाहिए।

• राज्य विधान मंडलों के प्रत्येक सदन दव्ारा ’नैतिकता आयुक्त’ के पद का गठन किया जाए। यह पद अध्यक्ष/सभापति के तहत उस आधार पर काम करेगा जैसा कि संसद के लिए सुझाया गया है।