महान सुधारक (Great Reformers – Part 20)

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अरुणा रॉय:-

भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी रही अरुणा रॉय देश की महत्वपूर्ण राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता है। वह 1968 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुनी गई लेकिन 1974 में उन्होंने इस सेवा से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह से समाज कल्याण के कार्य में जुट गई। वर्ष 2004 में उन्हें राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया।

वे राजस्थान के निर्धन लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिये किये गये प्रयास के लिये विशेष रूप से जानी जाती है। भारत में सूचना का अधिकार लागू करने के लिये उनके प्रयत्न एवं योगदान उल्लेखनीय है। वे मेवाड़ के राजसमंद जिले में स्थित देवडुंगरी गांव से संपूर्ण देश में संचालित मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापिका एवं अध्यक्ष भी हैं। उनके योगदान के लिये उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार एवं मेवाड़ सेवाश्री आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने ’मजदूर किसान शक्ति संगठन’ नामक सामाजिक संगठन की स्थापना की है।

किरण बेदी:-

डॉ. किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा की प्रथम महिला अधिकारी हैं। उन्होंने विभिन्न पदो ंपर रहते हुए अपनी कार्य-कुशलता का परिचय दिया है। वे संयुक्त आयुक्त पुलिस तथा दिल्ली पुलिस स्पेशल (खास) आयुक्त (खुफिया) के पद पर कार्य कर चुकी हैं।

उनका जन्म 9 जून, 1949 को अमृतसर में हुआ था। किरण को बचपन में टेनिस बहुत पसंद था और टेनिस की खिलाड़ी भी रही थी। अपनी बहनों के साथ उन्होंने इस खेल में कई खिताब भी हासिल किए। उस दौर में किरण बेदी और उनकी बहनों को ’पेशावर बहनो’ (शादी के पहले पेशावरियां उनका उपनाम था) के नाम से जाना जाता था। किरण ऑल इंडिया (भारत) और ऑल (सभी) एशियन टेनिस चैंपियनशिप (प्रतियोगिता) की विजेता भी रहीं। वर्ष 1972 में किरण बेदी ने भारतीय पुलिस सेवा में चुने जाने के बाद नौकरी करते हुए भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और सन्‌ 1988 में दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की उपाधि हासिल की। किरण बेदी ने राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, नई दिल्ली से 1993 में सामाजिक विज्ञान में ’नशाखोरी तथा घरेलू हिंसा’ विषय पर उनके शोध पर पी.एच.डी. की डिग्री (उपाधि) हासिल की।

भारतीय पुलिस सेवा में पुलिस महानिर्देशक (ब्यूरो (सरकारी विभाग) ऑफ (के) पुलिस रिसर्च (खोज) एंड (और) डेवलपमेंट (विकास) ) के पद पर पहुँचने वाली किरण एकमात्र भारतीय महिला थीं, जिसे यह गौरव हासिल हुआ। किरण बेदी ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस चीफ (मुखिया), नारकोटिक्स कंट्रोल (नियंत्रक) ब्यूरों (सरकारी विभाग), डिप्टी इंस्पेटर जनरल ऑफ (का) पुलिस मिजोरम, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ प्रिंजन, तिहाड़, चंडीगढ़ गवर्नर (राज्यपाल) की सलाहकार, नारकोटिक्स कंट्रोल (नियंत्रण) ब्यूरो (सरकारी विभाग) में डीआईजी तथा यूनाइटेड (संघ) नेशंस (राष्ट्र) में एक असाइनमेंट (समर्पण-पत्र) पर भी कार्य कर चुकी हैं।

अपने कार्यकाल के दौरान और कार्यकाल के पश्चात भी किरण बेदी ने कई उल्लेखीय कार्य किए जिनके जरिए उन्हें प्रसिद्धि मिली। दिल्ली में पुलिस आयुक्त के अपने कार्यकाल में उन्होंने तलवारें लहराती भीड़ का अकेले ही सामना करके देश भर में यह संदेश दिया था कि किसी ईमानदार अधिकारी को भीड़ और गुंडा तंत्र के दम पर नहीं डराया जा सकता। दिल्ली स्थित भारत की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में तैनाती के समय सुधारात्मक कदम उठाते हुए किरण बेदी ने अपनी एक पहचान बना ली थी। जब किरण बेदी को 7200 कैदियों वाली तिहाड़ जेल की महानिरीक्षक बनाया गया तो उन्होंने वहां एक नया मिशन (लक्ष्य) चलाया। इसके अंतर्गत उन्होंने कैदियों के प्रति ’सुधारात्मक रवैया’ अपनाते हुए उन्हें योग, ध्यान, शिक्षा व संस्कारों की शिक्षा देकर जेलो में बंद कैदियों की जिंदगी में सुधार लाने का प्रयास किया। जब किरण नई दिल्ली की ट्रैफिक (यातायात) कमिश्नर (आयुक्त) बनीं तब उनके तीखे तेवरों के कारण लोगों ने उन्हें किरण बेदी की जगह क्रैन बेदी कहना शुरू कर दिया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सार्वजनिक रूप से किरण बेदी की प्रशंसा में कहा था कि इस देश को आज किरण बेदी जैसे अधिकारियों की जरूरत है जो सही को सही तरीके से करने का साहस कर सके।

26 दिसंबर, 2007 को उन्होंने पुलिस सेवा से स्वैछिक सेवानिवृत्ति ली। उस समय वे भारतीय पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरों (सरकारी विभाग) के महानिर्देशक पद पर थीं। किरण बेदी को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें प्रेसीडेंट (राष्ट्रपति) गेलेट्री अवार्ड (पुरस्कार) (1979), सन्‌ 1994 में एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाने वाला ’रमन मैग्सेस पुरस्कार’ प्रमुख हैं। उनके जीवन पर बने वृत्तचित्र ’यस मैडम, सर’ को भी कई पुरस्कार मिले हैं। सन्‌ 1987 में किरण बेदी ने नवज्योति तथा 1994 में इंडिया (भारत) विजन (दृष्टिकोण) फाउंडेशन (नींव) नामक संस्थानों की शुरुआत की। इनके माध्यम से उन्होंने नशाखोरी पर अंकुश लगाने तथा गरीब व जरूरतमंद लोगों की मदद करने जैसे काम शुरू किए। ये संस्थाएं रोजाना हजारों गरीब बेसहारा बच्चों तक पहुंचकर उन्हें प्राथमिक शिक्षा तथा स्त्रियों को प्रौढ़ शिक्षा उपलब्ध कराती हैं।

हर्ष मंदर:-

भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी हर्ष मंदर की ख्याति सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक होने से भी है। आईएएस सेवा में रहने के दौरान वह करीब दो दशक तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नियुक्त रहे। श्री मंदर सूचना के अधिकार के लिए चले आंदोलन के अगुआ लोगों में शामिल रहे हैं।

उनका मुख्य काम सामूहिक हिंसा और भूख के शिकार लोगों की मदद करने से जुड़ा है। वह वर्तमान में सेंटर (केन्द्र) फॉर (के लिये) इक्विटी (निष्पक्षता) स्टडीज (अध्ययन) के निर्देशक हैं। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने भोजन के अधिकार मामलें में विशेष आयुक्त भी नियुक्त किया है। श्री मंदर विभिन्न सामाजिक मुद्दों और आंदोलनों से जुड़े हुये है और उनके सांप्रदायिक सदभाव, आदिवासी, दलितों और विकलांगों के अधिकारों, सूचना के अधिकार, हिरासत संबंधी मामलों में न्याय, बेघरों और बंधुआ मजदूरों पर दिये भाषणों एवं लेखो को ध्यान से पढ़ा जाता है। वह मानवाधिकार आयोग की एक समिति के सदस्य। एक्शन (कार्य)-एंड (और) इंडिया (भारत) के कंट्री (देश) निदेशक, स्टेट (राज्य) हेल्थ (स्वास्थ्य) रिर्सोस (प्रश्रय) सेंटर (केन्द्र) -छत्तीसगढ़ के संस्थापक अध्यक्ष होने के अलावा कई सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। श्री मंदर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में भी शामिल किए गये हैं। परिषद में उन्होंने भोजन के अधिकार, भू-अधिग्रहण और पुनर्वास विधेयक, बाल बंधुआ मजदूर उन्मूलन, शहरी गरीबी और बेघर, फेरी वालों के अधिकार आदि महत्वपूर्ण मसलों पर काम किया।

श्री मंदर ने कई सामाजिक कार्यक्रम शुरू किये हैं। इनमें धर्मनिरपेक्षता, शांति और न्याय के लिए ’अमन-बिरादरी’ सांप्रदायिक हिंसा के शिकार लोगों के लिए ’न्यायग्रह’, फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों के लिए ’दिल से’, शहरी बेघरों के लिए ’हौसला’ अभियान शामिल है। वह बतौर शिक्षक भी आईआईएम- अहमदाबाद, सेंट स्टीफेंन्स महाविद्यालय, नई दिल्ली आदि अनेक भारतीय एवं विदेशी संस्थाओं से जुड़े हुये हैं।

श्री मंदर की लिखित किताबे Heard (सुना) Voices (आवाजें): Stories (कहानी) of (के) Forgotten (भूल गये) Lives (रहता है), ‘The (यह) Ripped (फट) Chest (छाती): Pubic (लोग) Policy (नीति) and (और) the (यह) poor (गरीब) in india (भारत)’, ‘ Fear (डर) and (और) Forgiveness (माफी): The (यह) Aftemath (परिणाम) of (का) Massacre’ (नरसंहार), Fractured (खंडित) Freedom (स्वतत्रंता): Chronicles (इतिहास) from (से) india’s (भारत) Margins’ (अंतर), ‘Untouchability (अस्पृश्यता) in Rural (ग्रामीण) india (भारत)’ (सहलेखक), तथा हाल ही में आई ‘ Ash in the Belly’ (पेट) india’s (भारत) Unfinished (अधूरा) Battle (लड़ाई) against (विरुद्ध) Hunger (भूख)’ काफी चर्चा में रही हैं। वह कई अखबारों में नियमित रूप से स्तंभ भी लिखते रहे हैं। श्री मंदर को राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना अवार्ड (पुरस्कार) प्रदान किया गया है।