सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 16

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सूचना के अधिकार अधिनियम में विभिन्न तरह की चुनौतियाँ

  • सूचना के रख-रखाव का आधुनिकीकरण आवश्यकतानुसार नहीं किया जा सकता है।

  • सूचना के अधिकार और गोपनीयता के अधिकार में पारस्परिक विरोधाभास है। (दोनों को ही न्यायपालिका ने मौलिक अधिकारों से जोड़ा है।)

  • अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और उभरती असुरक्षा की वजह से सूचना के अधिकार को लागू करने में देरी होती है (जैसे कि ब्रिटेन में यह कानून -2000 में लाया गया। किन्तु उसे 2005 में लागू किया जा सका।)

  • कुछ देशों में ऐसे कानून प्रतिबंधात्मक ज्यादा है।

  • कहीं-कहीं सूचना में अनावश्यक केन्द्रीकरण की प्रवृत्तियाँ भी हैं।

  • कुछ निजी क्षेत्रों में भी सूचना के अधिकार को लागू करने की जरूरत है।

  • सूचना के अधिकार के कानून के अनुसार सिविल (नागरिक) सेवाओं की कार्य संस्कृति एवं आचार संहिताओं में उचित परिवर्तन नहीं लाए जा सके हैं।

  • स्थानीय सरकारों के लिए लाए गये कानूनों में सूचना के अधिकार और नागरिक चार्टर (राज-पत्र) के संबंध में कमियाँ है।

  • कुछ देशों में शिकायत निवारण के उचित तंत्र को लाये जाने में कमियां है।

  • यद्यपि इलेक्टॉनिक (विद्युत) माध्यम से सूचना प्राप्त करने का अधिकार दिया गया लेकिन कंम्यूटर (परिकलक) साक्षरता में कमी का प्रतिकूल असर है।

  • नागरिकों में दूसरों की गोपनीयता के अधिकार के आदर की प्रवृत्तियों में कमियाँ हैं।

  • एक संघीय व्यवस्था में संघीय स्तर पर लाये गये कानूनों के संदर्भ में राज्यों में लागू करने में संघ राज्य मतभेद बने रहते हैं।

  • शिकायत निवारण व्यवस्था में अभी भी क्षेत्रीय स्तर पर उचित पहुँच में कमियाँ बनी हुई हैं। (11-एआरसी ने केन्द्रीय सूचना आयुक्त और बड़े राज्यों में राज्य सूचना आयोगों में ऐसी समस्याओं को रखा)

  • अभी भी आवश्यकतानुसार सूचना के अधिकार और जनसंपर्क में प्रशिक्षण देने में कमियाँ हैं।